09-06-2026, 09:06 PM
स्क्रीन पर मैसेज आया — “आपके पैसे वापस कर दिए जाएंगे।”
बस इतना पढ़ते ही हमें समझ आ गया कि हमारी चाल पकड़ ली गई है। हमारा पूरा नाटक, फेक प्रोफाइल, सब उजागर हो गया।
हम जानते थे कि फोटो काफी सच जैसी लग रही थीं, लेकिन आसानी से पकड़ी जा सकती थीं। मैंने नेहा को एक साल रुकने का सुझाव भी दिया था, लेकिन ये ऐसा मामला था जिसमें हम कुछ नहीं कर सकते थे।
हमने सारे फोटो एक ही दिन अपलोड कर दिए थे।
जितनी कोशिश हम सच दिखने की करते, अगर किसी ने ध्यान दिया तो हम पकड़े ही जाते।
कुछ दिन बाद...
रात के करीब 11:15 बजे हम बेड पर लेटे हुए थे। नेहा मेरी छाती पर सिर रखकर फोन देख रही थी। अचानक उसका फोन vibrate हुआ।
नेहा: “सैम... Velvet Exchange से फिर ईमेल आया है।”
मैंने फोन लिया और पढ़ना शुरू किया। ईमेल काफी लंबा और ठंडा था:
विषय: अंतिम चेतावनी और स्पष्टीकरण का अवसर
प्रिय राहुल और रिया,
हमारी पिछली मीटिंग का रिकॉर्डिंग देखने के बाद, हमने आपके प्रोफाइल में गंभीर अनियमितताएँ पाई हैं।
हमारी मॉडरेशन टीम को मजबूत कारण हैं कि आपके द्वारा दी गई जानकारी और तस्वीरें असली नहीं हैं। यह हमारे क्लब की सख्त नीतियों का सीधा उल्लंघन है।
हम इस तरह की बातों को हल्के में नहीं लेते।
हालाँकि, चूँकि आप भारत से नए रजिस्ट्रेशन हैं, इसलिए हम आपको एक अंतिम मौका दे रहे हैं कि आप अगले 48 घंटों के अंदर स्पष्ट रूप से स्पष्टीकरण दें।
अगर आपका स्पष्टीकरण संतोषजनक रहा, तो हम आपकी सदस्यता पर पुनर्विचार कर सकते हैं।
अगर नहीं, तो आपका अकाउंट स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा और रजिस्ट्रेशन फीस वापस नहीं की जाएगी।
हम आपके जवाब में पूरी ईमानदारी की उम्मीद करते हैं।
इस मौके को बर्बाद न करें।
प्रबंधन
वेल्वेट एक्सचेंज
हमने क्रेडिट कार्ड से पेमेंट कर दिया।
प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई।
पहले पैसे जमा करवाए गए, फिर विस्तृत फॉर्म भरा गया।
सोशल मीडिया प्रोफाइल की जाँच, फेक अकाउंट की वेरिफिकेशन — सब कुछ दोबारा हुआ।
कुछ दिनों बाद फिर एक ईमेल आया:
विषय: आपका इंटरव्यू तय
“प्रिय राहुल और रिया,
आपका प्रोफाइल अब फाइनल रिव्यू के लिए तैयार है।
आपका इंटरव्यू जिग्स और जिंक्स के साथ कल शाम 7 बजे IST तय किया गया है।
कृपया समय पर उपलब्ध रहें।”
कॉल आया।
स्क्रीन पर जिग्स और जिंक्स दिखे।
जिग्स ने इस बार नीला चश्मा पहन रखा था। जिंक्स ने मास्क तो पहना था, लेकिन उसकी टॉप और भी डीप थी, जिससे उसके भारी स्तन और ज्यादा दिख रहे थे।
जिग्स: (थोड़े ऊबे हुए स्वर में)
जिग्स: “मेरे पास इस सब के लिए वापस समय नहीं है।”
ये
कहते हुए वो अपनी कुर्सी से उठ गया।
शायद हमारी स्क्रीन ब्लैक देखकर वो निराश हो गया था।
उसे लगा होगा कि दूसरे मौके पर हम कैमरा ऑन करके कुछ अलग करेंगे।
वो उठा और जाने लगा।
जैसे ही वो खड़ा हुआ, नेहा ने अचानक मेरी जाँघ दबाई।
मैंने भी देखा — उसके क्रॉच में साफ़ टेंट दिख रहा था।
उसका लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था।
जिग्स स्क्रीन से बाहर चला गया।
अब सिर्फ जिंक्स रह गई थी।
वो अकेली स्क्रीन पर बैठी मुस्कुरा रही थी।
उसकी डीप नेक वाली ड्रेस में उसके भारी स्तन और भी ज्यादा आकर्षक लग रहे थे।
जिग्स उठते वक्त जिंक्स को कुछ कहकर चला गया।
हमने सुना नहीं कि क्या कहा।
अब स्क्रीन पर सिर्फ जिंक्स रह गई थी।
वो कुछ पल चुप रही, फिर धीरे से मुस्कुराई और बोली,
जिंक्स: “तुम लोगों को पता है ना कि हमने तुम्हें पिछली बार क्यों ब्लॉक किया था?”
नेहा डरी हुई आवाज़ में बोली,
नेहा: “हाँ...”
जिंक्स: “फिर आज वही प्रोफाइल और वही सब क्यों इस्तेमाल किया?”
मैंने गला साफ़ करके जवाब दिया,
सम: “मुझे बहुत अफसोस है... लेकिन हम अपने असली सोशल आईडी जमा करने से डरते हैं।
उसमें फैमिली की जानकारी होती है... जहाँ हम काम करते हैं, वहाँ की डिटेल्स होती हैं...”
जिंक्स ने हल्के से मुस्कुराया।
जिंक्स: “कम से कम तुमने सच तो बोला।”
वो थोड़ा आगे झुकी, अपनी गहरी नेक वाली ड्रेस में स्तन और साफ़ दिखाते हुए बोली,
जिंक्स: “तो एक और सच बताओ —
क्या प्रोफाइल में तुम दोनों ही हो?
क्योंकि तस्वीरें थोड़ी अलग लग रही हैं... थोड़ी कम natural।”
नेहा मेरी जाँघ को और कस के पकड़ लेती है।
उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं।
जिंक्स की नज़र अब बहुत तीखी थी।
वो हमें घूर रही थी, जैसे स्क्रीन के पीछे से हमारे चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही हो।
इस बार मैंने सच बोल दिया।
सम: “मैम... पता नहीं क्यों, लेकिन मैं सच बता रहा हूँ।
हम 90% असली हैं।
लेकिन लोकेशन AI से बनाया हुआ है।
हम दोनों भारत में ही हैं।
हम दोनों IT में जॉब करते हैं।
जो आप लोग कर रहे हैं, वो हमें बहुत आकर्षित करता है।
भारत में ऐसा कुछ नहीं है... सब फ्रॉड, ब्लैकमेल, खतरा।
इससे पहले कि हम कोई गलती कर बैठें, हमने सोचा कि किसी experienced couple से बात करें... जो हमें बता सके कि क्या और कैसे करना चाहिए... किस पर भरोसा करना चाहिए या नहीं।”
जिंक्स ने मेरी बात सुनकर हल्के से हँसी।
जिंक्स: “तुम खुद फ्रॉड कर रहे हो और बाकी सब को फ्रॉड बता रहे हो...
तुम लोग सच में cute लग रहे हो...”
फिर उसका चेहरा थोड़ा serious हो गया।
जिंक्स: “मगर मैं ये इंटरव्यू क्लब की तरफ से कर रही हूँ।
आई एम सॉरी... लेकिन मुझे तुम्हें वापस ब्लॉक करना होगा।
यहाँ पार्टिसिपेट करने के लिए तुम्हें यहाँ रहना ज़रूरी है।”
जिंक्स जा रही थी, तभी नेहा ने अचानक कहा,
नेहा: “मुझे कुछ पूछना है प्लीज...”
जिंक्स रुकी और मुस्कुराते हुए बोली,
जिंक्स: “क्या? पूछो?”
नेहा ने एक पल सोचा, फिर बोली,
नेहा: “आपके पति उस दिन हिंदी में हमें गाली दे रहे थे... कैमरा ऑफ होने के बाद... वो आप थे या और लोग भी ये इंटरव्यू देख रहे थे?”
मैंने नेहा की बात में जोड़ दिया,
सम: “या आपने अपने पड़ोसियों से सीख ली?”
जिंक्स पहले तो हँसी, फिर थोड़ा रुकी।
अभी तक पूरी बातचीत अंग्रेजी में हो रही थी, लेकिन अचानक जिंक्स की तरफ से आवाज आई,
जिंक्स: “हुं तने अंग्रेज लागू छु?”
(उसने गुजराती में कहा — “क्या मैं तुम्हें अंग्रेज लगती हूँ?”)
हम दोनों एक-दूसरे की तरफ़ हैरान होकर देखने लगे।
फिर जिंक्स हिंदी में बोलने लगी,
जिंक्स: “हम पटेल हैं... तीन जेनरेशन से यहाँ रह रहे हैं।”
उसने अपने ब्लॉन्ड-भूरे बालों को हाथ में लेकर कहा,
जिंक्स: “ये dye किए हुए हैं।”
वो हँसते हुए बोल रही थी।
जिंक्स: “मेरा पूरा नाम जिंकल पटेल है। और हस्बैंड जिग्नेश।”
मैंने हिंदी में ही कहा,
सम: “आप दोनों को देखकर नहीं लगता...”
जिंक्स ने मस्ती में कहा,
जिंक्स: “शायद... नीचे का कलर देखकर पहचान जाते...”
हम तीनों को समझ में आ रहा था कि वो अपनी भारतीय चूत के बारे में इशारा कर रही थी।
नेहा ने थोड़ा प्यार भरे टोन में कहा,
नेहा: “क्या कुछ नहीं हो सकता... हमें इस क्लब में लाने के लिए?”
जिंकल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
जिंकल: “ये भारत नहीं है... यहाँ रिश्वत से काम नहीं चलेगा।”
हम दोनों थोड़ा दुखी हँसे।
जिंकल फिर बोली,
जिंकल: “ये सबकी सेफ्टी का सवाल है... अगर तुम इस क्लब में होते और मैं तुम्हारी सेफ्टी किसी और के हाथ में दे देती तो क्या होता?”
हमें बात समझ में आ रही थी।
मैंने कहा,
सम: “ठीक है... आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा।”
जिंकल ने कहा,
जिंकल: “हम क्लब की टूर पर तो नहीं, लेकिन पर्सनल टच में रह सकते हैं। मुझे जिग्नेश से बात करनी होगी। हम यंग कपल्स बहुत पसंद करते हैं। और जिग्नेश को भारतीय लड़कियाँ बहुत भाती हैं। शायद वो तुम्हें एक और मौका दे। अगर वो हाँ करेगा तो देखते हैं।”
फिर वो थोड़ा रुकी और बोली,
जिंकल: “अभी के लिए बाय... और सॉरी, तुम्हारे ये वाले पैसे वापस नहीं आएंगे।”
मैंने मन ही मन सोचा — “वैसे भी किसे पड़ी थी 4000 की...”
जिंकल ने हाथ हिलाया और स्क्रीन ब्लैक हो गई।
उनकी टाइमिंग हमसे 12 घंटे पीछे थी।
अभी वहाँ सुबह होने वाली थी और यहाँ रात।
हम मिक्स भावनाओं में थे।
मगर उस रात हमने सेक्स किया।
नेहा का मूड कुछ अलग था।
वो ज़मीन पर शीशे के सामने घोड़ी बनकर बैठ गई थी।
सिर ऊपर, कमर नीचे, नंगी पीठ और गोल नितंब मेरे सामने।
शीशे में उसका पूरा नंगा बदन दिख रहा था — भारी स्तन लटके हुए, कमर का निचला हिस्सा, और चूत की गीली लकीर।
नेहा: (धीमी, समर्पित आवाज़ में)
“आज तुम राजा...
मुझे अपनी रानी नहीं, अपनी रंडी समझकर चोदो।”
मैंने उसके बालों को कस के पकड़ लिया।
इतना कस के कि उसकी गर्दन की नसें उभर आईं।
वो “आह्ह...” करके काँप उठी।
मैंने लंड उसके चूत पर सेट किया और एक ज़ोरदार धक्का मारा।
नेहा का पूरा शरीर आगे झटका खा गया।
नेहा: (कराहते हुए)
“हाँ... और ज़ोर से...”
मैंने उसके बाल और कस के खींचे और तेज़-तेज़ ठोकने लगा।
हर धक्के पर उसके भारी स्तन शीशे में हिल रहे थे।
वो बार-बार शीशे में खुद को देख रही थी।
ने उसके बाल खींचे, गाल पर थप्पड़ मारा और तेज़ी से चोदता रहा।
सम: “कहाँ निकालूँ?”
नेहा: (हाँफते हुए)
“मुझे अभी टाइम लगेगा..."
मैंने आखिरी कुछ धक्के और तेज़ मारे और अपना पूरा वीर्य उसकी नंगी, गोरी पीठ पर निकाल दिया।
गर्म-गर्म धारें उसकी कमर पर फैल गईं।
नेहा उसी घोड़ी वाली मुद्रा में रही।
पीछे मुड़कर देखा, फिर शीशे में खुद को देखा।
उसके चेहरे पर संतोष और भूख दोनों थे।
मैंने अपनी उँगलियाँ उसकी चूत पर रख दीं और धीरे-धीरे सहलाने लगा।
थोड़ी देर उँगलियों से खेलने के बाद मैंने अपना मुँह अंदर डाल दिया।
मैं किसी इमली के दाने की तरह उसकी चूत चाट रहा था — धीरे, गहरे और भूखेपन से।
उसका रस बह रहा था, गाढ़ा और मीठा।
मेरी उँगलियों ने शायद वो कमाल कर दिया था जो लंड नहीं कर पाया था।
वो धीरे-धीरे बह रही थी।
आँखें नशीली, आधे बंद।
वो शीशे में खुद को घूर रही थी।
ये मैं उसमें पहली बार देख रहा था।
अक्सर जब वो ऑर्गेज़्म के करीब होती, तो आँखें बंद कर लेती थी।
अक्सर जब वो मेरे चूसने से झड़ती, तो कम से कम ये ज़रूर बोलती — “तुम इस काम में सबसे अच्छे हो...”
मगर आज नहीं।
आज वो अपने बदन को देख रही थी।
हर हरकत, हर झटका, हर बार जब उसके स्तन हिलते, जब उसकी कमर काँपती, जब उसकी चूत मेरे मुँह पर रगड़ती।
जैसे वो खुद को एक औरत की नज़र से देख रही हो।
क्यों लोग उसे पसंद करते हैं।
क्यों उसे चोदना चाहते हैं।
क्या वो देख रही थी — अपनी नंगी देह की खूबसूरती, अपनी चूत की भूख, अपनी आहों की गहराई।
उसकी चूत मेरी जीभ पर और ज़्यादा भीग रही थी।
वो धीरे-धीरे काँप रही थी, लेकिन आँखें शीशे से नहीं हटा रही थी।
उस रात सेक्स के बाद हम दोनों शांत थे।
नेहा मेरी छाती पर सिर रखे लेटी हुई थी। उसकी साँसें धीमी थीं, लेकिन मुझे पता था कि वो सोई नहीं है।
मुझे नहीं पता था कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है। वो कुछ बोल नहीं रही थी।
मेरे दिमाग में लग रहा था कि एक और किस्सा खत्म हो गया है।
अब आगे क्या होगा?
आज रात का सेक्स एक उम्मीद दे रहा था, लेकिन मुझे पता था कि हमारा बॉन्ड अब सेक्स से कहीं ऊपर जा चुका है।
ये अब सिर्फ़ शरीर की भूख नहीं थी।
ये कुछ और था — गहरी, जटिल, और थोड़ी खतरनाक चाहत।
जैसा मैंने सोचा था, कुछ दिन ऐसे ही बीते।
नेहा पता नहीं क्यों, लेकिन सबमिसिव बिहेव कर रही थी।
वो मेरे साथ वैसा काम ही करती थी।
मगर वो भी हफ्ते भर में फीका पड़ने लगा।
शायद मैं उसका पार्ट प्ले अच्छे से नहीं कर पा रहा था।
वो कई बार बोलती,
“मुझे थप्पड़ मारो...
सेक्स में नहीं... बस ऐसे ही...”
एक शाम डाइनिंग टेबल पर बैठे-बैठे अचानक वो बोली और अपना गोरा सुंदर चेहरा आगे कर के मुस्कुराई।
मैंने पूछा,
“पक्का?”
उसने हामी में सिर हिला दिया।
मैंने हल्के हाथों से उसके गाल पर मारा।
नेहा: “और ज़ोर से...”
मैंने थोड़ा और दम लगाया।
दूसरा थप्पड़ ज़ोर से पड़ा।
उसका गोरा चेहरा तुरंत लाल हो गया।
मुझे अच्छा नहीं लग रहा था।
मैं नहीं चाहता था कि उसके चेहरे पर मेरा हाथ का निशान रहे।
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
उसकी आँखों में हल्की निराशा थी।
फिर वो चुपचाप खाना खाने लगी।
ये incident आपको पढ़ने में जितना अजीब लग रहा है, मुझे उतना ही अजीब महसूस हो रहा था।
मुझे नेहा की मनोस्थिति समझ में नहीं आ रही थी।
कभी वो पूरी तरह समर्पित बन जाती, कभी अचानक ठंडी हो जाती।
अभी भी अयान वाला गुस्सा उसके अंदर से गया नहीं था।
कभी गुप्ता जी दिख जाते तो नेहा बस हल्के से मुस्कुरा देती।
न कोई नजर, न कोई इशारा, न कोई पुरानी वाली शरारत।
बस एक ठंडी, खोखली मुस्कान।
एक दिन शाम को मैंने बालकनी में खड़े होकर कहा,
सम: “राहुल बालकनी में है...”
नेहा ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ा और आँख मारते हुए बोली,
नेहा: “Sorry baby... मुझे पता है...
बिल्कुल मन नहीं है...”
उसकी आवाज़ में न गुस्सा था, न उत्तेजना — बस एक थकान भरी उदासी।
मुझे दिल में बहुत दर्द हुआ।
वो जलन, वो अपमान की चाहत, वो पुरानी वाली उत्तेजना — सब मेरे अंदर अभी भी जिंदा थी।
मैं चाहता था कि नेहा मुझे फिर से वही feeling दे — मुझे नीचा दिखाए, मुझे चिढ़ाए ।
लेकिन वो मुझे वो सब नहीं दे रही थी।
मुझे लगा कि शायद अब यही हमारी जिंदगी है।
एक शांत, ठंडी, औपचारिक जिंदगी — जिसमें सेक्स होता है, लेकिन वो पुराना जोश, वो गंदापन, वो नशा... सब खत्म हो चुका है।
XXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXXX
आज रात नेहा कुछ अलग दिख रही थी।
उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी, जो पिछले कई हफ्तों में गायब हो गई थी।
हम लैपटॉप के सामने बैठे थे।
स्क्रीन पर एक लगभग 50 साल का आदमी दिख रहा था — जिग्नेश।
पहली बार वो हमें बिना किसी फेस हाइड के देख रहा था।
ये सब तब शुरू हुआ जब हम उम्मीद खो बैठे थे।
अचानक एक ईमेल आया — “Patel Couples” के नाम से।
जिंकल ने लिखा था:
“हम तुम दोनों को एक मौका दे सकते हैं।
तुमने कहा था कि तुम्हारी वाइफ रिया 90 % अपनी AI इमेज की तरह दिखती है।
जिग्नेश को इस उम्र की भारतीय शादीशुदा लड़कियाँ बहुत पसंद हैं।
हम बात कर सकते हैं...
मगर तुम्हें सब सच कहना होगा।
ये Video Call से शुरू होगा।
अगर तुम लोगों को मंजूर है तो हम आगे बात कर सकते हैं।”
उस रात बहुत दिनों बाद हमारा ज़ोरदार झगड़ा हुआ।
नेहा पूरी तरह तैयार थी।
उसने कहा,
नेहा: “तुमने देखा ना... वो लोग कितने अमीर हैं, कितने बड़े ग्रुप में हैं।
उन्होंने मेरी जैसी कितनी लड़कियों को देखा होगा?
और हम कौन से नंगे होने वाले हैं?
बस चैट... बात... वो भी ऑनलाइन...”
वो बिना सोचे-समझे बोलती जा रही थी।
मैं मना कर रहा था।
हालाँकि मैंने अयान वाली बात बीच में नहीं लाई, लेकिन नेहा को समझ नहीं पा रहा था।
उसने पिछले 5-6 महीने इसी डर में निकाले थे, और अब वो फिर से खतरा लेना चाहती थी — वो भी सिर्फ़ चैट के लिए।
हमने शराब पी।
एक-दूसरे पर चिल्लाए भी।
फिर थककर सो गए।
सुबह जब मेरी आँख खुली, तो कमरे में रोशनी भर गई थी।
बालकनी का गेट खुला हुआ था।
मैं उठा और बाहर देखा।
सुबह के करीब 9 बज रहे थे।
नेहा बालकनी में खड़ी थी।
बहुत छोटी शॉर्ट्स पहनी हुई थी।
रेलिंग पर झुकी हुई, पीठ मेरी तरफ़।
एक सिगरेट पी रही थी।
उसकी गोरी जाँघें, टाइट शॉर्ट्स में उसके नितंब — सब कुछ सुबह की धूप में चमक रहा था।
मेरा लंड पैंट में तुरंत जाग गया।
खटर-पटर की आवाज़ सुनकर नेहा को लगा कि मैं जाग गया हूँ। वो पीछे मुड़ी।
मैं देखकर हैरान रह गया।
पीछे से वो बस एक खुली शर्ट पहने हुए थी। सामने के सारे बटन खुले हुए थे। उसके भारी स्तन ब्रा में कैद थे। सुबह की धूप में उसका गोरा बदन चमक रहा था।
उसने मुझे सिगरेट दिखाकर इशारा किया — जैसे पूछ रही हो, “चाहिए?”
जैसे कल रात का झगड़ा हुआ ही न हो।
मैं बिना कुछ सोचे उसकी तरफ़ बढ़ा। बालकनी में आते ही नेहा ने मुझे ज़ोर से खींच लिया। होंठों से होंठ मिल गए। एक गहरा, लंबा किस।
रात के झगड़े के बाद भी वो मुझे इस तरह किस कर रही थी। किस करते-करते उसका हाथ मेरे पजामे के ऊपर से मेरे लंड पर गया। वो उसे मसलने लगी।
खुले में।
उसने जिस हाथ में सिगरेट थी, उससे मेरे सिर को अपनी गर्दन की तरफ़ दबाया। मैं समझ गया। मैंने उसकी गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया।
नेहा ने दूसरे हाथ से मेरे लंड को मसलते हुए, सिगरेट का एक कश लिया और धुएँ के साथ मेरे कान में फुसफुसाया,
नेहा: “हमें कोई देख रहा है...”
मैं भूल गया था कि हम खुले में हैं। मैंने गर्दन ऊपर करके देखने की कोशिश की, लेकिन नेहा ने मेरी गर्दन और दबा दी।
नेहा: “sssss... उससे पता मत लगने दो...”
मगर जिज्ञासा बनी रही। कौन देख रहा है?
थोड़ी देर बाद यकीन हो गया — राहुल ही था। थोड़ा दूर, अपनी बालकनी में। वो बिना किसी फिक्र के अपना लंड रगड़ रहा था।
शायद बहुत दिनों बाद उसे ये नज़ारा देखने को मिला था।
नेहा भी उसे पूरा शो दे रही थी। उसने अपनी शर्ट को और खोल दिया था।
नेहा ने मेरे कान में फुसफुसाया,
नेहा: “कैसा लग रहा है?”
मैंने उसकी गर्दन पर हल्की सी बाइट देकर हामी भरी।
सम: “बस यही तो करना है... ये लड़का देख ले... ये दूर देख में बैठा वो कपल भी देख लेगा...”
मेरे मुँह से बस “हाँ” निकला।
नेहा ने कितनी चालाकी से मुझे मना लिया था।
बस इतना पढ़ते ही हमें समझ आ गया कि हमारी चाल पकड़ ली गई है। हमारा पूरा नाटक, फेक प्रोफाइल, सब उजागर हो गया।
हम जानते थे कि फोटो काफी सच जैसी लग रही थीं, लेकिन आसानी से पकड़ी जा सकती थीं। मैंने नेहा को एक साल रुकने का सुझाव भी दिया था, लेकिन ये ऐसा मामला था जिसमें हम कुछ नहीं कर सकते थे।
हमने सारे फोटो एक ही दिन अपलोड कर दिए थे।
जितनी कोशिश हम सच दिखने की करते, अगर किसी ने ध्यान दिया तो हम पकड़े ही जाते।
कुछ दिन बाद...
रात के करीब 11:15 बजे हम बेड पर लेटे हुए थे। नेहा मेरी छाती पर सिर रखकर फोन देख रही थी। अचानक उसका फोन vibrate हुआ।
नेहा: “सैम... Velvet Exchange से फिर ईमेल आया है।”
मैंने फोन लिया और पढ़ना शुरू किया। ईमेल काफी लंबा और ठंडा था:
विषय: अंतिम चेतावनी और स्पष्टीकरण का अवसर
प्रिय राहुल और रिया,
हमारी पिछली मीटिंग का रिकॉर्डिंग देखने के बाद, हमने आपके प्रोफाइल में गंभीर अनियमितताएँ पाई हैं।
हमारी मॉडरेशन टीम को मजबूत कारण हैं कि आपके द्वारा दी गई जानकारी और तस्वीरें असली नहीं हैं। यह हमारे क्लब की सख्त नीतियों का सीधा उल्लंघन है।
हम इस तरह की बातों को हल्के में नहीं लेते।
हालाँकि, चूँकि आप भारत से नए रजिस्ट्रेशन हैं, इसलिए हम आपको एक अंतिम मौका दे रहे हैं कि आप अगले 48 घंटों के अंदर स्पष्ट रूप से स्पष्टीकरण दें।
अगर आपका स्पष्टीकरण संतोषजनक रहा, तो हम आपकी सदस्यता पर पुनर्विचार कर सकते हैं।
अगर नहीं, तो आपका अकाउंट स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा और रजिस्ट्रेशन फीस वापस नहीं की जाएगी।
हम आपके जवाब में पूरी ईमानदारी की उम्मीद करते हैं।
इस मौके को बर्बाद न करें।
प्रबंधन
वेल्वेट एक्सचेंज
हमने क्रेडिट कार्ड से पेमेंट कर दिया।
प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई।
पहले पैसे जमा करवाए गए, फिर विस्तृत फॉर्म भरा गया।
सोशल मीडिया प्रोफाइल की जाँच, फेक अकाउंट की वेरिफिकेशन — सब कुछ दोबारा हुआ।
कुछ दिनों बाद फिर एक ईमेल आया:
विषय: आपका इंटरव्यू तय
“प्रिय राहुल और रिया,
आपका प्रोफाइल अब फाइनल रिव्यू के लिए तैयार है।
आपका इंटरव्यू जिग्स और जिंक्स के साथ कल शाम 7 बजे IST तय किया गया है।
कृपया समय पर उपलब्ध रहें।”
कॉल आया।
स्क्रीन पर जिग्स और जिंक्स दिखे।
जिग्स ने इस बार नीला चश्मा पहन रखा था। जिंक्स ने मास्क तो पहना था, लेकिन उसकी टॉप और भी डीप थी, जिससे उसके भारी स्तन और ज्यादा दिख रहे थे।
जिग्स: (थोड़े ऊबे हुए स्वर में)
जिग्स: “मेरे पास इस सब के लिए वापस समय नहीं है।”
ये
कहते हुए वो अपनी कुर्सी से उठ गया।
शायद हमारी स्क्रीन ब्लैक देखकर वो निराश हो गया था।
उसे लगा होगा कि दूसरे मौके पर हम कैमरा ऑन करके कुछ अलग करेंगे।
वो उठा और जाने लगा।
जैसे ही वो खड़ा हुआ, नेहा ने अचानक मेरी जाँघ दबाई।
मैंने भी देखा — उसके क्रॉच में साफ़ टेंट दिख रहा था।
उसका लंड पैंट के अंदर खड़ा हो चुका था।
जिग्स स्क्रीन से बाहर चला गया।
अब सिर्फ जिंक्स रह गई थी।
वो अकेली स्क्रीन पर बैठी मुस्कुरा रही थी।
उसकी डीप नेक वाली ड्रेस में उसके भारी स्तन और भी ज्यादा आकर्षक लग रहे थे।
जिग्स उठते वक्त जिंक्स को कुछ कहकर चला गया।
हमने सुना नहीं कि क्या कहा।
अब स्क्रीन पर सिर्फ जिंक्स रह गई थी।
वो कुछ पल चुप रही, फिर धीरे से मुस्कुराई और बोली,
जिंक्स: “तुम लोगों को पता है ना कि हमने तुम्हें पिछली बार क्यों ब्लॉक किया था?”
नेहा डरी हुई आवाज़ में बोली,
नेहा: “हाँ...”
जिंक्स: “फिर आज वही प्रोफाइल और वही सब क्यों इस्तेमाल किया?”
मैंने गला साफ़ करके जवाब दिया,
सम: “मुझे बहुत अफसोस है... लेकिन हम अपने असली सोशल आईडी जमा करने से डरते हैं।
उसमें फैमिली की जानकारी होती है... जहाँ हम काम करते हैं, वहाँ की डिटेल्स होती हैं...”
जिंक्स ने हल्के से मुस्कुराया।
जिंक्स: “कम से कम तुमने सच तो बोला।”
वो थोड़ा आगे झुकी, अपनी गहरी नेक वाली ड्रेस में स्तन और साफ़ दिखाते हुए बोली,
जिंक्स: “तो एक और सच बताओ —
क्या प्रोफाइल में तुम दोनों ही हो?
क्योंकि तस्वीरें थोड़ी अलग लग रही हैं... थोड़ी कम natural।”
नेहा मेरी जाँघ को और कस के पकड़ लेती है।
उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं।
जिंक्स की नज़र अब बहुत तीखी थी।
वो हमें घूर रही थी, जैसे स्क्रीन के पीछे से हमारे चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रही हो।
इस बार मैंने सच बोल दिया।
सम: “मैम... पता नहीं क्यों, लेकिन मैं सच बता रहा हूँ।
हम 90% असली हैं।
लेकिन लोकेशन AI से बनाया हुआ है।
हम दोनों भारत में ही हैं।
हम दोनों IT में जॉब करते हैं।
जो आप लोग कर रहे हैं, वो हमें बहुत आकर्षित करता है।
भारत में ऐसा कुछ नहीं है... सब फ्रॉड, ब्लैकमेल, खतरा।
इससे पहले कि हम कोई गलती कर बैठें, हमने सोचा कि किसी experienced couple से बात करें... जो हमें बता सके कि क्या और कैसे करना चाहिए... किस पर भरोसा करना चाहिए या नहीं।”
जिंक्स ने मेरी बात सुनकर हल्के से हँसी।
जिंक्स: “तुम खुद फ्रॉड कर रहे हो और बाकी सब को फ्रॉड बता रहे हो...
तुम लोग सच में cute लग रहे हो...”
फिर उसका चेहरा थोड़ा serious हो गया।
जिंक्स: “मगर मैं ये इंटरव्यू क्लब की तरफ से कर रही हूँ।
आई एम सॉरी... लेकिन मुझे तुम्हें वापस ब्लॉक करना होगा।
यहाँ पार्टिसिपेट करने के लिए तुम्हें यहाँ रहना ज़रूरी है।”
जिंक्स जा रही थी, तभी नेहा ने अचानक कहा,
नेहा: “मुझे कुछ पूछना है प्लीज...”
जिंक्स रुकी और मुस्कुराते हुए बोली,
जिंक्स: “क्या? पूछो?”
नेहा ने एक पल सोचा, फिर बोली,
नेहा: “आपके पति उस दिन हिंदी में हमें गाली दे रहे थे... कैमरा ऑफ होने के बाद... वो आप थे या और लोग भी ये इंटरव्यू देख रहे थे?”
मैंने नेहा की बात में जोड़ दिया,
सम: “या आपने अपने पड़ोसियों से सीख ली?”
जिंक्स पहले तो हँसी, फिर थोड़ा रुकी।
अभी तक पूरी बातचीत अंग्रेजी में हो रही थी, लेकिन अचानक जिंक्स की तरफ से आवाज आई,
जिंक्स: “हुं तने अंग्रेज लागू छु?”
(उसने गुजराती में कहा — “क्या मैं तुम्हें अंग्रेज लगती हूँ?”)
हम दोनों एक-दूसरे की तरफ़ हैरान होकर देखने लगे।
फिर जिंक्स हिंदी में बोलने लगी,
जिंक्स: “हम पटेल हैं... तीन जेनरेशन से यहाँ रह रहे हैं।”
उसने अपने ब्लॉन्ड-भूरे बालों को हाथ में लेकर कहा,
जिंक्स: “ये dye किए हुए हैं।”
वो हँसते हुए बोल रही थी।
जिंक्स: “मेरा पूरा नाम जिंकल पटेल है। और हस्बैंड जिग्नेश।”
मैंने हिंदी में ही कहा,
सम: “आप दोनों को देखकर नहीं लगता...”
जिंक्स ने मस्ती में कहा,
जिंक्स: “शायद... नीचे का कलर देखकर पहचान जाते...”
हम तीनों को समझ में आ रहा था कि वो अपनी भारतीय चूत के बारे में इशारा कर रही थी।
नेहा ने थोड़ा प्यार भरे टोन में कहा,
नेहा: “क्या कुछ नहीं हो सकता... हमें इस क्लब में लाने के लिए?”
जिंकल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
जिंकल: “ये भारत नहीं है... यहाँ रिश्वत से काम नहीं चलेगा।”
हम दोनों थोड़ा दुखी हँसे।
जिंकल फिर बोली,
जिंकल: “ये सबकी सेफ्टी का सवाल है... अगर तुम इस क्लब में होते और मैं तुम्हारी सेफ्टी किसी और के हाथ में दे देती तो क्या होता?”
हमें बात समझ में आ रही थी।
मैंने कहा,
सम: “ठीक है... आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा।”
जिंकल ने कहा,
जिंकल: “हम क्लब की टूर पर तो नहीं, लेकिन पर्सनल टच में रह सकते हैं। मुझे जिग्नेश से बात करनी होगी। हम यंग कपल्स बहुत पसंद करते हैं। और जिग्नेश को भारतीय लड़कियाँ बहुत भाती हैं। शायद वो तुम्हें एक और मौका दे। अगर वो हाँ करेगा तो देखते हैं।”
फिर वो थोड़ा रुकी और बोली,
जिंकल: “अभी के लिए बाय... और सॉरी, तुम्हारे ये वाले पैसे वापस नहीं आएंगे।”
मैंने मन ही मन सोचा — “वैसे भी किसे पड़ी थी 4000 की...”
जिंकल ने हाथ हिलाया और स्क्रीन ब्लैक हो गई।
उनकी टाइमिंग हमसे 12 घंटे पीछे थी।
अभी वहाँ सुबह होने वाली थी और यहाँ रात।
हम मिक्स भावनाओं में थे।
मगर उस रात हमने सेक्स किया।
नेहा का मूड कुछ अलग था।
वो ज़मीन पर शीशे के सामने घोड़ी बनकर बैठ गई थी।
सिर ऊपर, कमर नीचे, नंगी पीठ और गोल नितंब मेरे सामने।
शीशे में उसका पूरा नंगा बदन दिख रहा था — भारी स्तन लटके हुए, कमर का निचला हिस्सा, और चूत की गीली लकीर।
नेहा: (धीमी, समर्पित आवाज़ में)
“आज तुम राजा...
मुझे अपनी रानी नहीं, अपनी रंडी समझकर चोदो।”
मैंने उसके बालों को कस के पकड़ लिया।
इतना कस के कि उसकी गर्दन की नसें उभर आईं।
वो “आह्ह...” करके काँप उठी।
मैंने लंड उसके चूत पर सेट किया और एक ज़ोरदार धक्का मारा।
नेहा का पूरा शरीर आगे झटका खा गया।
नेहा: (कराहते हुए)
“हाँ... और ज़ोर से...”
मैंने उसके बाल और कस के खींचे और तेज़-तेज़ ठोकने लगा।
हर धक्के पर उसके भारी स्तन शीशे में हिल रहे थे।
वो बार-बार शीशे में खुद को देख रही थी।
ने उसके बाल खींचे, गाल पर थप्पड़ मारा और तेज़ी से चोदता रहा।
सम: “कहाँ निकालूँ?”
नेहा: (हाँफते हुए)
“मुझे अभी टाइम लगेगा..."
मैंने आखिरी कुछ धक्के और तेज़ मारे और अपना पूरा वीर्य उसकी नंगी, गोरी पीठ पर निकाल दिया।
गर्म-गर्म धारें उसकी कमर पर फैल गईं।
नेहा उसी घोड़ी वाली मुद्रा में रही।
पीछे मुड़कर देखा, फिर शीशे में खुद को देखा।
उसके चेहरे पर संतोष और भूख दोनों थे।
मैंने अपनी उँगलियाँ उसकी चूत पर रख दीं और धीरे-धीरे सहलाने लगा।
थोड़ी देर उँगलियों से खेलने के बाद मैंने अपना मुँह अंदर डाल दिया।
मैं किसी इमली के दाने की तरह उसकी चूत चाट रहा था — धीरे, गहरे और भूखेपन से।
उसका रस बह रहा था, गाढ़ा और मीठा।
मेरी उँगलियों ने शायद वो कमाल कर दिया था जो लंड नहीं कर पाया था।
वो धीरे-धीरे बह रही थी।
आँखें नशीली, आधे बंद।
वो शीशे में खुद को घूर रही थी।
ये मैं उसमें पहली बार देख रहा था।
अक्सर जब वो ऑर्गेज़्म के करीब होती, तो आँखें बंद कर लेती थी।
अक्सर जब वो मेरे चूसने से झड़ती, तो कम से कम ये ज़रूर बोलती — “तुम इस काम में सबसे अच्छे हो...”
मगर आज नहीं।
आज वो अपने बदन को देख रही थी।
हर हरकत, हर झटका, हर बार जब उसके स्तन हिलते, जब उसकी कमर काँपती, जब उसकी चूत मेरे मुँह पर रगड़ती।
जैसे वो खुद को एक औरत की नज़र से देख रही हो।
क्यों लोग उसे पसंद करते हैं।
क्यों उसे चोदना चाहते हैं।
क्या वो देख रही थी — अपनी नंगी देह की खूबसूरती, अपनी चूत की भूख, अपनी आहों की गहराई।
उसकी चूत मेरी जीभ पर और ज़्यादा भीग रही थी।
वो धीरे-धीरे काँप रही थी, लेकिन आँखें शीशे से नहीं हटा रही थी।
उस रात सेक्स के बाद हम दोनों शांत थे।
नेहा मेरी छाती पर सिर रखे लेटी हुई थी। उसकी साँसें धीमी थीं, लेकिन मुझे पता था कि वो सोई नहीं है।
मुझे नहीं पता था कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है। वो कुछ बोल नहीं रही थी।
मेरे दिमाग में लग रहा था कि एक और किस्सा खत्म हो गया है।
अब आगे क्या होगा?
आज रात का सेक्स एक उम्मीद दे रहा था, लेकिन मुझे पता था कि हमारा बॉन्ड अब सेक्स से कहीं ऊपर जा चुका है।
ये अब सिर्फ़ शरीर की भूख नहीं थी।
ये कुछ और था — गहरी, जटिल, और थोड़ी खतरनाक चाहत।
जैसा मैंने सोचा था, कुछ दिन ऐसे ही बीते।
नेहा पता नहीं क्यों, लेकिन सबमिसिव बिहेव कर रही थी।
वो मेरे साथ वैसा काम ही करती थी।
मगर वो भी हफ्ते भर में फीका पड़ने लगा।
शायद मैं उसका पार्ट प्ले अच्छे से नहीं कर पा रहा था।
वो कई बार बोलती,
“मुझे थप्पड़ मारो...
सेक्स में नहीं... बस ऐसे ही...”
एक शाम डाइनिंग टेबल पर बैठे-बैठे अचानक वो बोली और अपना गोरा सुंदर चेहरा आगे कर के मुस्कुराई।
मैंने पूछा,
“पक्का?”
उसने हामी में सिर हिला दिया।
मैंने हल्के हाथों से उसके गाल पर मारा।
नेहा: “और ज़ोर से...”
मैंने थोड़ा और दम लगाया।
दूसरा थप्पड़ ज़ोर से पड़ा।
उसका गोरा चेहरा तुरंत लाल हो गया।
मुझे अच्छा नहीं लग रहा था।
मैं नहीं चाहता था कि उसके चेहरे पर मेरा हाथ का निशान रहे।
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
उसकी आँखों में हल्की निराशा थी।
फिर वो चुपचाप खाना खाने लगी।
ये incident आपको पढ़ने में जितना अजीब लग रहा है, मुझे उतना ही अजीब महसूस हो रहा था।
मुझे नेहा की मनोस्थिति समझ में नहीं आ रही थी।
कभी वो पूरी तरह समर्पित बन जाती, कभी अचानक ठंडी हो जाती।
अभी भी अयान वाला गुस्सा उसके अंदर से गया नहीं था।
कभी गुप्ता जी दिख जाते तो नेहा बस हल्के से मुस्कुरा देती।
न कोई नजर, न कोई इशारा, न कोई पुरानी वाली शरारत।
बस एक ठंडी, खोखली मुस्कान।
एक दिन शाम को मैंने बालकनी में खड़े होकर कहा,
सम: “राहुल बालकनी में है...”
नेहा ने सिगरेट का कश लिया, धुआँ छोड़ा और आँख मारते हुए बोली,
नेहा: “Sorry baby... मुझे पता है...
बिल्कुल मन नहीं है...”
उसकी आवाज़ में न गुस्सा था, न उत्तेजना — बस एक थकान भरी उदासी।
मुझे दिल में बहुत दर्द हुआ।
वो जलन, वो अपमान की चाहत, वो पुरानी वाली उत्तेजना — सब मेरे अंदर अभी भी जिंदा थी।
मैं चाहता था कि नेहा मुझे फिर से वही feeling दे — मुझे नीचा दिखाए, मुझे चिढ़ाए ।
लेकिन वो मुझे वो सब नहीं दे रही थी।
मुझे लगा कि शायद अब यही हमारी जिंदगी है।
एक शांत, ठंडी, औपचारिक जिंदगी — जिसमें सेक्स होता है, लेकिन वो पुराना जोश, वो गंदापन, वो नशा... सब खत्म हो चुका है।
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आज रात नेहा कुछ अलग दिख रही थी।
उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी, जो पिछले कई हफ्तों में गायब हो गई थी।
हम लैपटॉप के सामने बैठे थे।
स्क्रीन पर एक लगभग 50 साल का आदमी दिख रहा था — जिग्नेश।
पहली बार वो हमें बिना किसी फेस हाइड के देख रहा था।
ये सब तब शुरू हुआ जब हम उम्मीद खो बैठे थे।
अचानक एक ईमेल आया — “Patel Couples” के नाम से।
जिंकल ने लिखा था:
“हम तुम दोनों को एक मौका दे सकते हैं।
तुमने कहा था कि तुम्हारी वाइफ रिया 90 % अपनी AI इमेज की तरह दिखती है।
जिग्नेश को इस उम्र की भारतीय शादीशुदा लड़कियाँ बहुत पसंद हैं।
हम बात कर सकते हैं...
मगर तुम्हें सब सच कहना होगा।
ये Video Call से शुरू होगा।
अगर तुम लोगों को मंजूर है तो हम आगे बात कर सकते हैं।”
उस रात बहुत दिनों बाद हमारा ज़ोरदार झगड़ा हुआ।
नेहा पूरी तरह तैयार थी।
उसने कहा,
नेहा: “तुमने देखा ना... वो लोग कितने अमीर हैं, कितने बड़े ग्रुप में हैं।
उन्होंने मेरी जैसी कितनी लड़कियों को देखा होगा?
और हम कौन से नंगे होने वाले हैं?
बस चैट... बात... वो भी ऑनलाइन...”
वो बिना सोचे-समझे बोलती जा रही थी।
मैं मना कर रहा था।
हालाँकि मैंने अयान वाली बात बीच में नहीं लाई, लेकिन नेहा को समझ नहीं पा रहा था।
उसने पिछले 5-6 महीने इसी डर में निकाले थे, और अब वो फिर से खतरा लेना चाहती थी — वो भी सिर्फ़ चैट के लिए।
हमने शराब पी।
एक-दूसरे पर चिल्लाए भी।
फिर थककर सो गए।
सुबह जब मेरी आँख खुली, तो कमरे में रोशनी भर गई थी।
बालकनी का गेट खुला हुआ था।
मैं उठा और बाहर देखा।
सुबह के करीब 9 बज रहे थे।
नेहा बालकनी में खड़ी थी।
बहुत छोटी शॉर्ट्स पहनी हुई थी।
रेलिंग पर झुकी हुई, पीठ मेरी तरफ़।
एक सिगरेट पी रही थी।
उसकी गोरी जाँघें, टाइट शॉर्ट्स में उसके नितंब — सब कुछ सुबह की धूप में चमक रहा था।
मेरा लंड पैंट में तुरंत जाग गया।
खटर-पटर की आवाज़ सुनकर नेहा को लगा कि मैं जाग गया हूँ। वो पीछे मुड़ी।
मैं देखकर हैरान रह गया।
पीछे से वो बस एक खुली शर्ट पहने हुए थी। सामने के सारे बटन खुले हुए थे। उसके भारी स्तन ब्रा में कैद थे। सुबह की धूप में उसका गोरा बदन चमक रहा था।
उसने मुझे सिगरेट दिखाकर इशारा किया — जैसे पूछ रही हो, “चाहिए?”
जैसे कल रात का झगड़ा हुआ ही न हो।
मैं बिना कुछ सोचे उसकी तरफ़ बढ़ा। बालकनी में आते ही नेहा ने मुझे ज़ोर से खींच लिया। होंठों से होंठ मिल गए। एक गहरा, लंबा किस।
रात के झगड़े के बाद भी वो मुझे इस तरह किस कर रही थी। किस करते-करते उसका हाथ मेरे पजामे के ऊपर से मेरे लंड पर गया। वो उसे मसलने लगी।
खुले में।
उसने जिस हाथ में सिगरेट थी, उससे मेरे सिर को अपनी गर्दन की तरफ़ दबाया। मैं समझ गया। मैंने उसकी गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया।
नेहा ने दूसरे हाथ से मेरे लंड को मसलते हुए, सिगरेट का एक कश लिया और धुएँ के साथ मेरे कान में फुसफुसाया,
नेहा: “हमें कोई देख रहा है...”
मैं भूल गया था कि हम खुले में हैं। मैंने गर्दन ऊपर करके देखने की कोशिश की, लेकिन नेहा ने मेरी गर्दन और दबा दी।
नेहा: “sssss... उससे पता मत लगने दो...”
मगर जिज्ञासा बनी रही। कौन देख रहा है?
थोड़ी देर बाद यकीन हो गया — राहुल ही था। थोड़ा दूर, अपनी बालकनी में। वो बिना किसी फिक्र के अपना लंड रगड़ रहा था।
शायद बहुत दिनों बाद उसे ये नज़ारा देखने को मिला था।
नेहा भी उसे पूरा शो दे रही थी। उसने अपनी शर्ट को और खोल दिया था।
नेहा ने मेरे कान में फुसफुसाया,
नेहा: “कैसा लग रहा है?”
मैंने उसकी गर्दन पर हल्की सी बाइट देकर हामी भरी।
सम: “बस यही तो करना है... ये लड़का देख ले... ये दूर देख में बैठा वो कपल भी देख लेगा...”
मेरे मुँह से बस “हाँ” निकला।
नेहा ने कितनी चालाकी से मुझे मना लिया था।


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