08-06-2026, 09:17 PM
अगला स्टेशन। और भीड़ बढ़ गई।
अब सुमन के पीछे वाला आदमी उससे पूरी तरह चिपक चुका था। उसका लंड — सख्त — सुमन की गांड के बीचोंबीच धँस रहा था। उसने अपने दोनों हाथों से सुमन की गांड के दोनों गाल पकड़ लिए। जोर से दबाया। मांसल, गर्म, गीली लेगिंग के ऊपर से।
सुमन की "आह..." निकल गई। जोर से। एक आदमी ने मुड़कर देखा। सुमन ने अपना मुँह झुका लिया। शर्म से नहीं — इसलिए कि वह अपनी आँखों में आ रही आग छिपा सके।
पीछे वाले ने अपना हाथ सुमन की लेगिंग के ऊपर से उसकी गांड की दरार में डाल दिया। ऊपर-नीचे करने लगा। कपड़े के ऊपर से ही उसकी चूत की नमी उसकी उँगलियों तक आ रही थी।
और तभी — सामने वाले युवक ने अपनी पूरी हथेली से सुमन की एक चूची को मुट्ठी में भर लिया।
दोनों हाथ। दोनों जगह।
सुमन कसमसा गई। उसके घुटने झुक गए। वह लोहे के पोल को इतनी जोर से पकड़ रही थी कि उसकी उँगलियाँ सफेद पड़ गई थीं।
युवक ने उसकी चूची दबाई। घुमाई। खींची। निप्पल को अंगूठे और उँगली के बीच रगड़ा।
पीछे वाले ने उसकी गांड की दरार में उँगली घुसाने की कोशिश की — लेगिंग के ऊपर से नहीं, बल्कि अंदर से। उसने लेगिंग के ऊपरी हिस्से को खींचने की कोशिश की।
सुमन की चूत का पानी अब लेगिंग को पार कर रहा था। वह अपनी जांघों पर टपकने लगा था।
फोन पर राज — "रोक दूँ?"
सुमन की आँखों में आँसू थे। चाहत के। उसने लिखा — "नहीं। और चाहिए।"
उसने फोन रख दिया। अपनी आँखें बंद कर लीं। अपना मुँह थोड़ा खोल दिया।
दोनों आदमियों ने उस पर हमला बोल दिया — एक ने उसकी चूचियाँ मसलनी शुरू कर दीं, दूसरे ने उसकी गांड पर अपना पूरा लंड रगड़ना शुरू कर दिया।
भीड़ शोर मचा रही थी। कोई नहीं देख रहा था। या देख रहा था, लेकिन आँखें फेर रहा था।
सुमन की पूरी चूत में ऐंठन होने लगी। उसका पानी बह निकला। एक धार। लेगिंग पर एक बड़ा सा गीला दाग फैल गया।
उसने अपने दाँत भींच लिए। जोर से। अपनी चीख को दबाने के लिए।
और वह आ गई।
बीच मेट्रो में। पराए हाथों में। पराए लंडों के बीच।
उसकी पूरी बॉडी सख्त हुई, फिर ढीली पड़ गई। उसके अंदर का तापमान बढ़ गया। वह काँप रही थी। उसकी साँसें रुक गईं, फिर चली गईं।
दोनों आदमी — जैसे समझ गए — धीरे-धीरे पीछे हट गए। अगले स्टेशन पर उतर गए।
सुमन अकेली रह गई। पोल को पकड़े हुए। गीली लेगिंग में। काँपती हुई।
राज धीरे-धीरे उसके पास आया। उसने किसी और आदमी की तरह उसके पास खड़े होकर कहा —
"मैडम, ठीक हो?"
सुमन ने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में पानी था। होंठ काँप रहे थे।
उसने फुसफुसाकर कहा — "घर ले चल मुझे। अभी।"
राज मुस्कुराया। उसका लंड पेंट के नीचे फट रहा था।
"हाँ मैडम। आइए।"
अब सुमन के पीछे वाला आदमी उससे पूरी तरह चिपक चुका था। उसका लंड — सख्त — सुमन की गांड के बीचोंबीच धँस रहा था। उसने अपने दोनों हाथों से सुमन की गांड के दोनों गाल पकड़ लिए। जोर से दबाया। मांसल, गर्म, गीली लेगिंग के ऊपर से।
सुमन की "आह..." निकल गई। जोर से। एक आदमी ने मुड़कर देखा। सुमन ने अपना मुँह झुका लिया। शर्म से नहीं — इसलिए कि वह अपनी आँखों में आ रही आग छिपा सके।
पीछे वाले ने अपना हाथ सुमन की लेगिंग के ऊपर से उसकी गांड की दरार में डाल दिया। ऊपर-नीचे करने लगा। कपड़े के ऊपर से ही उसकी चूत की नमी उसकी उँगलियों तक आ रही थी।
और तभी — सामने वाले युवक ने अपनी पूरी हथेली से सुमन की एक चूची को मुट्ठी में भर लिया।
दोनों हाथ। दोनों जगह।
सुमन कसमसा गई। उसके घुटने झुक गए। वह लोहे के पोल को इतनी जोर से पकड़ रही थी कि उसकी उँगलियाँ सफेद पड़ गई थीं।
युवक ने उसकी चूची दबाई। घुमाई। खींची। निप्पल को अंगूठे और उँगली के बीच रगड़ा।
पीछे वाले ने उसकी गांड की दरार में उँगली घुसाने की कोशिश की — लेगिंग के ऊपर से नहीं, बल्कि अंदर से। उसने लेगिंग के ऊपरी हिस्से को खींचने की कोशिश की।
सुमन की चूत का पानी अब लेगिंग को पार कर रहा था। वह अपनी जांघों पर टपकने लगा था।
फोन पर राज — "रोक दूँ?"
सुमन की आँखों में आँसू थे। चाहत के। उसने लिखा — "नहीं। और चाहिए।"
उसने फोन रख दिया। अपनी आँखें बंद कर लीं। अपना मुँह थोड़ा खोल दिया।
दोनों आदमियों ने उस पर हमला बोल दिया — एक ने उसकी चूचियाँ मसलनी शुरू कर दीं, दूसरे ने उसकी गांड पर अपना पूरा लंड रगड़ना शुरू कर दिया।
भीड़ शोर मचा रही थी। कोई नहीं देख रहा था। या देख रहा था, लेकिन आँखें फेर रहा था।
सुमन की पूरी चूत में ऐंठन होने लगी। उसका पानी बह निकला। एक धार। लेगिंग पर एक बड़ा सा गीला दाग फैल गया।
उसने अपने दाँत भींच लिए। जोर से। अपनी चीख को दबाने के लिए।
और वह आ गई।
बीच मेट्रो में। पराए हाथों में। पराए लंडों के बीच।
उसकी पूरी बॉडी सख्त हुई, फिर ढीली पड़ गई। उसके अंदर का तापमान बढ़ गया। वह काँप रही थी। उसकी साँसें रुक गईं, फिर चली गईं।
दोनों आदमी — जैसे समझ गए — धीरे-धीरे पीछे हट गए। अगले स्टेशन पर उतर गए।
सुमन अकेली रह गई। पोल को पकड़े हुए। गीली लेगिंग में। काँपती हुई।
राज धीरे-धीरे उसके पास आया। उसने किसी और आदमी की तरह उसके पास खड़े होकर कहा —
"मैडम, ठीक हो?"
सुमन ने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में पानी था। होंठ काँप रहे थे।
उसने फुसफुसाकर कहा — "घर ले चल मुझे। अभी।"
राज मुस्कुराया। उसका लंड पेंट के नीचे फट रहा था।
"हाँ मैडम। आइए।"


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