08-06-2026, 09:16 PM
(This post was last modified: 13-06-2026, 11:58 AM by Certified Addict. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
मेट्रो में घुसते ही भीड़ ने उन्हें अलग कर दिया।
सुमन एक लोहे के पोल को पकड़कर खड़ी हो गई। उसके बगल में एक बुजुर्ग आदमी था। सामने एक युवक। पीछे कोई और।
राज थोड़ी दूर खड़ा था। देख रहा था। सुमन ने उसकी तरफ देखा — राज ने आँखों ही आँखों में कहा — सब्र रख।
दरवाज़ा बंद हुआ। मेट्रो चली।
शुरू के कुछ मिनट सब शांत रहा। सिर्फ मेट्रो की आवाज़। सुमन की साँसें। उसके सीने का ऊपर-नीचे होना।
फिर... उसकी गांड पर हल्का सा स्पर्श।
पहले तो उसे लगा मेट्रो के हिलने से हुआ होगा। लेकिन फिर वही स्पर्श — गांड के बाएं गाल पर। हल्का। दबाव बढ़ता हुआ।
सुमन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसकी धड़कनें और तेज़ हो गईं।
फोन पर राज का मैसेज — "किसी ने हाथ लगाया?"
सुमन ने काँपते हाथों से लिखा — "हाँ... गांड पर।"
![[Image: z-image-turbo-00013.png]](https://i.postimg.cc/25D2b3Kv/z-image-turbo-00013.png)
राज — "अच्छा लग रहा है?"
सुमन ने लिखा — "... हाँ।"
उसने लिखा तो दिया, लेकिन उसकी चूत अंदर से फट रही थी। गीली हो चुकी थी। पीछे वाले आदमी का हाथ अब उसकी गांड पर था — जोर से। उसने उसे दबाया। छोड़ा। फिर दबाया।
सुमन चुपचाप खड़ी रही। उसने कोई विरोध नहीं किया।
और फिर — एक और हाथ।
इस बार सामने वाले युवक का। वह उसी पोल को पकड़ रहा था जिसे सुमन पकड़ रही थी। उसकी उँगलियाँ धीरे-धीरे सुमन के हाथ पर आईं। फिर उसकी कलाई पर। फिर...
उसने अपना हाथ घुमाया। अब उसके हाथ की पीठ सुमन के स्तनों से रगड़ खा रही थी।
सुमन की साँसें फट गईं। उसके निप्पल — वो दोनों — एकदम सख्त। कपड़े के नीचे तीर की तरह खड़े हो गए।
युवक ने देखा कि सुमन ने कोई विरोध नहीं किया। तो उसकी हिम्मत बढ़ गई। उसने अपना अंगूठा सुमन के निप्पल पर रखा। हल्का — फिर जोर से — दबाया। गोल-गोल घुमाया।
सुमन के मुँह से बस एक दबी हुई "हाँ... " निकली।
फोन पर राज — "तू गीली हो गई है?"
सुमन — "बह रही हूँ। लेगिंग भीग गई है।"
राज — "और चाहिए?"
सुमन ने उस मैसेज का जवाब नहीं दिया। लेकिन उसने अपनी गांड पीछे की तरफ धकेल दी। उस आदमी के लंड पर। जो उसकी गांड से सटा हुआ था।
सुमन एक लोहे के पोल को पकड़कर खड़ी हो गई। उसके बगल में एक बुजुर्ग आदमी था। सामने एक युवक। पीछे कोई और।
राज थोड़ी दूर खड़ा था। देख रहा था। सुमन ने उसकी तरफ देखा — राज ने आँखों ही आँखों में कहा — सब्र रख।
दरवाज़ा बंद हुआ। मेट्रो चली।
शुरू के कुछ मिनट सब शांत रहा। सिर्फ मेट्रो की आवाज़। सुमन की साँसें। उसके सीने का ऊपर-नीचे होना।
फिर... उसकी गांड पर हल्का सा स्पर्श।
पहले तो उसे लगा मेट्रो के हिलने से हुआ होगा। लेकिन फिर वही स्पर्श — गांड के बाएं गाल पर। हल्का। दबाव बढ़ता हुआ।
सुमन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसकी धड़कनें और तेज़ हो गईं।
फोन पर राज का मैसेज — "किसी ने हाथ लगाया?"
सुमन ने काँपते हाथों से लिखा — "हाँ... गांड पर।"
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राज — "अच्छा लग रहा है?"
सुमन ने लिखा — "... हाँ।"
उसने लिखा तो दिया, लेकिन उसकी चूत अंदर से फट रही थी। गीली हो चुकी थी। पीछे वाले आदमी का हाथ अब उसकी गांड पर था — जोर से। उसने उसे दबाया। छोड़ा। फिर दबाया।
सुमन चुपचाप खड़ी रही। उसने कोई विरोध नहीं किया।
और फिर — एक और हाथ।
इस बार सामने वाले युवक का। वह उसी पोल को पकड़ रहा था जिसे सुमन पकड़ रही थी। उसकी उँगलियाँ धीरे-धीरे सुमन के हाथ पर आईं। फिर उसकी कलाई पर। फिर...
उसने अपना हाथ घुमाया। अब उसके हाथ की पीठ सुमन के स्तनों से रगड़ खा रही थी।
सुमन की साँसें फट गईं। उसके निप्पल — वो दोनों — एकदम सख्त। कपड़े के नीचे तीर की तरह खड़े हो गए।
युवक ने देखा कि सुमन ने कोई विरोध नहीं किया। तो उसकी हिम्मत बढ़ गई। उसने अपना अंगूठा सुमन के निप्पल पर रखा। हल्का — फिर जोर से — दबाया। गोल-गोल घुमाया।
सुमन के मुँह से बस एक दबी हुई "हाँ... " निकली।
फोन पर राज — "तू गीली हो गई है?"
सुमन — "बह रही हूँ। लेगिंग भीग गई है।"
राज — "और चाहिए?"
सुमन ने उस मैसेज का जवाब नहीं दिया। लेकिन उसने अपनी गांड पीछे की तरफ धकेल दी। उस आदमी के लंड पर। जो उसकी गांड से सटा हुआ था।


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