Thread Rating:
  • 2 Vote(s) - 3 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#6
Photo 
Chapter 2

और कुछ दिन ऐसे ही बीत गए।

सुमन अब वही पहनने लगी थी जो राज चाहता था। थाई-स्लिट ड्रेस में वह बालकनी में चाय पीती। स्किन-टाइट लेगिंग में वह दूध लाने जाती। मिनी स्कर्ट में वह राज के सामने खाना बनाती।
शर्म? वो तो पिघल चुकी थी।
अब उसे अच्छा लगता था। जब कोई रिक्शेवाला उसे घूरता, तो उसकी चूत सिकुड़ती। जब कोई पड़ोसी उसके स्तनों पर नज़र डालता, तो उसके निप्पल सख्त हो जाते।
राज देखता था। मुस्कुराता था। रात को वही देखकर उसकी चूत फाड़ता।
सोमवार था।
राज ने छुट्टी ले ली। सुबह उठते ही उसने सुमन से कहा — "आज मेरे साथ चल। घूमने। लेकिन मेरे तरीके से।"
सुमन बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसकी नाइटी ऊपर चढ़ी हुई थी। उसकी गांड खुली थी।
"कैसे तरीके से?"
राज उसके पास आया। उसकी गांड पर हाथ रखा। जोर से दबाया। "ऑफिस टाइम की भीड़भाड़ वाली मेट्रो। तू लेगिंग पहनेगी। टाइट। और डीप नेक टॉप।"
सुमन की आँखें खुली रह गईं। उसका दिल धक-धक करने लगा।
"क्या... क्या करेंगे मेट्रो में?"
राज ने उसके कान में कहा — "मैं चाहता हूँ कि तू पराए मर्दों के बीच खड़ी हो। देखूँ वो क्या करते हैं। और हाँमैट्रो में हम एक-दूसरे को नहीं जानते। हम चैट पर बात करेंगे। समझी?"
सुमन ने निगल लिया। उसकी चूत में हलचल हुई। गीलापन गया।
"तू पागल है, राज।"
"हूँ। तेरे लिए।"

दो घंटे बाद।

सुमन ने काली, स्किन-टाइट लेगिंग पहनी। हर कर्व, हर उभार, उसकी भरी हुई जांघें, उसकी उठी हुई गांडसब साफ दिख रहा था।

[Image: anal-fuck_001-4.gif]


ऊपर गहरे नीले रंग का डीप नेक टॉप। उसके बड़े स्तन आधे बाहर थे। बीच की दरार में पसीना रहा था।

उसने खुद को दर्पण में देखा। उसकी दिल की धड़कनें तेज़ थीं। उसके निप्पल कपड़े के नीचे सख्त हो चुके थे।

राज ने पीछे से आकर उसकी गांड दबाई। "परफेक्ट। अब चल।"

मेट्रो स्टेशन।

पीक टाइम। भीड़ ऐसी थी मानो पूरा शहर इकट्ठा हो गया हो। सुमन राज के पीछे-पीछे प्लेटफॉर्म पर उतरी। लोग घूर रहे थे। एक आदमी ने उसके स्तनों पर नज़र डाली और उसकी पत्नी ने उसे ठोकर मारी।

सुमन का दिल तेज़ धड़क रहा था। उसकी चूत में नमी थी। लेगिंग पर एक छोटा सा गोल दाग बन गया था।

फोन पर राज का मैसेज आया — "डर लग रहा है?"

सुमन ने लिखा — "थोड़ा। लेकिन... अच्छा भी लग रहा है।"
राज — [b]"अभी और अच्छा लगेगा। चल। मेट्रो रही है।"[/b]
Like Reply


Messages In This Thread
RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 08-06-2026, 09:13 PM



Users browsing this thread: 5 Guest(s)