07-06-2026, 11:31 PM
(This post was last modified: 08-06-2026, 09:26 PM by Certified Addict. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
राज ने जोर से लंड अंदर पटका। सुमन चीखी — दबी हुई, लंबी चीख।
"चोद मुझे... रुक मत... और भीतर..."
उसकी चूत काँप रही थी। राज ने उसके चेहरे की तरफ देखा — आँखें बंद, मुँह खुला, जीभ बाहर। वह अब किसी और के बारे में सोच रही थी। राज नहीं।
लेकिन राज को कोई फर्क नहीं पड़ा। वह देख रहा था। उसकी बीवी — उसकी शरीफ, सुंदर, भरी हुई बीवी — अपनी चूत फाड़े ले रही थी।
"हाँ... हाँ... वो मुझे चोद रहा है..." सुमन चिल्लाई।
और फिर वह आ गई।
एक झटके में। उसकी पूरी बॉडी सख्त हो गई, फिर ढीली पड़ गई। उसके अंदर की गर्मी ने राज के लंड को ऐसे दबाया जैसे कोई मुट्ठी भरकर छोड़ दे। पानी बह निकला — चादर पर, राज के लंड पर, बॉल्स पर।
राज अभी नहीं आया था। वह ऊपर खड़ा था, जैसे कोई जल्लाद। सुमन थकी हुई, काँपती हुई, अपने आए हुए ऑर्गैज्म के बीच उसकी तरफ देखा।
"कैसा लगा?" राज ने पूछा।
सुमन ने कोई जवाब नहीं दिया। बस उसने अपनी उँगली अपनी चूत पर फिराई — कीचड़ जैसा पानी — और फिर वह उँगली राज के होठों पर रख दी।
बस तीन हफ्ते में सुमन वो औरत बन गई थी जिसे वह खुद नहीं पहचान पा रही थी। पहले वह शर्माती थी। 'नहीं राज, ये सब बकवास है।' 'तुझे क्या हो गया है?' 'मैं ऐसा कुछ नहीं सोच सकती।'
लेकिन रातें। वो रातें।
हर रात कोई नया चेहरा। कोई नया नाम। राज उसके कान में कहानियाँ गढ़ता — कभी ऑफिस का वो सीनियर जो उसे घूरता है, कभी जिम का वो ट्रेनर जिसकी नजर हमेशा उसकी चूचियों पर रहती है, कभी कोई अनजान आदमी मेट्रो में। और हर बार सुमन की चूत ने हाँ कही।
पानी की तरह बही वह। राज के लंड पर झूलते हुए वह उन काल्पनिक लंडों के नाम चिल्लाने लगी थी। "हाँ... राहुल की चोद... हाँ... आकाश भर दे मुझे..."
शुरुआत में वह खुद से घृणा करती थी। सुबह उठकर लगता — कल रात मैंने क्या किया? मैं किसी और के बारे में सोचकर कैसे चिल्ला सकती हूँ?
लेकिन राज उसे प्यार से घेर लेता। "तेरी गलती नहीं, जान। तेरा शरीर जाग गया है। बस। इतना ही।"
और अब? अब सुमन खुद चाहने लगी थी। आज सुबह भी ऐसी ही थी। राज ने एक बड़ा सा शॉपिंग बैग उसके सामने रख दिया।
"खोल।" सुमन ने खोला। अंदर — कपड़े। लेकिन ऐसे कपड़े जो उसने अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं पहने थे।
एक डीप नेक टॉप — सामने से लगभग नाभि तक खुला हुआ। उसके बड़े स्तनों के बीच की दरार को ढकने के लिए उसमें बस एक पतली सी लटकन थी।
एक स्किन-टाइट लेगिंग — काली, चमकदार, ऐसी कि पहनते ही हर कर्व, हर उभार, उसकी भरी हुई जांघें, उसकी उठी हुई गांड — सब दिख जाएगा।
एक थाई-स्लिट ड्रेस — जांघ के ठीक ऊपर तक चीरा हुआ। हर कदम पर उसकी सफेद रान दिखेगी।
एक सेमी-ट्रांसपेरेंट नाइट ड्रेस — जिसमें वह सोएगी तो उसके निप्पल, उसकी चूत के बाल, सब झाँकेंगे।
और फिर — थोंग। हॉट लैंगरी। मिनी स्कर्ट। एक छोटा सा काला टुकड़ा जिसे 'स्कर्ट' कहना भी गलत था।
सुमन की साँसें तेज़ हो गईं। "ये... ये सब किस लिए?" राज उसके पास आया। उसकी ठुड्डी पकड़ी। आँखों में देखा।
"मैं चाहता हूँ कि तू ये सब पहने। अपने सुंदर, आकर्षक शरीर को दिखाए।"
"चोद मुझे... रुक मत... और भीतर..."
उसकी चूत काँप रही थी। राज ने उसके चेहरे की तरफ देखा — आँखें बंद, मुँह खुला, जीभ बाहर। वह अब किसी और के बारे में सोच रही थी। राज नहीं।
लेकिन राज को कोई फर्क नहीं पड़ा। वह देख रहा था। उसकी बीवी — उसकी शरीफ, सुंदर, भरी हुई बीवी — अपनी चूत फाड़े ले रही थी।
"हाँ... हाँ... वो मुझे चोद रहा है..." सुमन चिल्लाई।
और फिर वह आ गई।
एक झटके में। उसकी पूरी बॉडी सख्त हो गई, फिर ढीली पड़ गई। उसके अंदर की गर्मी ने राज के लंड को ऐसे दबाया जैसे कोई मुट्ठी भरकर छोड़ दे। पानी बह निकला — चादर पर, राज के लंड पर, बॉल्स पर।
राज अभी नहीं आया था। वह ऊपर खड़ा था, जैसे कोई जल्लाद। सुमन थकी हुई, काँपती हुई, अपने आए हुए ऑर्गैज्म के बीच उसकी तरफ देखा।
"कैसा लगा?" राज ने पूछा।
सुमन ने कोई जवाब नहीं दिया। बस उसने अपनी उँगली अपनी चूत पर फिराई — कीचड़ जैसा पानी — और फिर वह उँगली राज के होठों पर रख दी।
बस तीन हफ्ते में सुमन वो औरत बन गई थी जिसे वह खुद नहीं पहचान पा रही थी। पहले वह शर्माती थी। 'नहीं राज, ये सब बकवास है।' 'तुझे क्या हो गया है?' 'मैं ऐसा कुछ नहीं सोच सकती।'
लेकिन रातें। वो रातें।
हर रात कोई नया चेहरा। कोई नया नाम। राज उसके कान में कहानियाँ गढ़ता — कभी ऑफिस का वो सीनियर जो उसे घूरता है, कभी जिम का वो ट्रेनर जिसकी नजर हमेशा उसकी चूचियों पर रहती है, कभी कोई अनजान आदमी मेट्रो में। और हर बार सुमन की चूत ने हाँ कही।
पानी की तरह बही वह। राज के लंड पर झूलते हुए वह उन काल्पनिक लंडों के नाम चिल्लाने लगी थी। "हाँ... राहुल की चोद... हाँ... आकाश भर दे मुझे..."
शुरुआत में वह खुद से घृणा करती थी। सुबह उठकर लगता — कल रात मैंने क्या किया? मैं किसी और के बारे में सोचकर कैसे चिल्ला सकती हूँ?
लेकिन राज उसे प्यार से घेर लेता। "तेरी गलती नहीं, जान। तेरा शरीर जाग गया है। बस। इतना ही।"
और अब? अब सुमन खुद चाहने लगी थी। आज सुबह भी ऐसी ही थी। राज ने एक बड़ा सा शॉपिंग बैग उसके सामने रख दिया।
"खोल।" सुमन ने खोला। अंदर — कपड़े। लेकिन ऐसे कपड़े जो उसने अपनी पूरी जिंदगी में कभी नहीं पहने थे।
एक डीप नेक टॉप — सामने से लगभग नाभि तक खुला हुआ। उसके बड़े स्तनों के बीच की दरार को ढकने के लिए उसमें बस एक पतली सी लटकन थी।
एक स्किन-टाइट लेगिंग — काली, चमकदार, ऐसी कि पहनते ही हर कर्व, हर उभार, उसकी भरी हुई जांघें, उसकी उठी हुई गांड — सब दिख जाएगा।
एक थाई-स्लिट ड्रेस — जांघ के ठीक ऊपर तक चीरा हुआ। हर कदम पर उसकी सफेद रान दिखेगी।
एक सेमी-ट्रांसपेरेंट नाइट ड्रेस — जिसमें वह सोएगी तो उसके निप्पल, उसकी चूत के बाल, सब झाँकेंगे।
और फिर — थोंग। हॉट लैंगरी। मिनी स्कर्ट। एक छोटा सा काला टुकड़ा जिसे 'स्कर्ट' कहना भी गलत था।
सुमन की साँसें तेज़ हो गईं। "ये... ये सब किस लिए?" राज उसके पास आया। उसकी ठुड्डी पकड़ी। आँखों में देखा।
"मैं चाहता हूँ कि तू ये सब पहने। अपने सुंदर, आकर्षक शरीर को दिखाए।"


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