Thread Rating:
  • 2 Vote(s) - 3 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Adultery वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman)
#2
Chapter 1

SUMAN
[Image: Hlc-DYITKBg-M9ej5KDchf-B.jpg]

राज करवट बदलकर उसके सामने गया। उसका हाथ पहले से ही उसकी चूची पर थाबिना ब्रा के, सिर्फ नाइटी के अंदर। भारी, गर्म। उसकी उँगलियाँ अपने आप चलने लगीं।
निप्पल सख्त हो गया। कपड़े के नीचे दबकर।
"हम्म्म..." सुमन नीली रोशनी में करवट बदलते हुए बुदबुदाई। नींद और जागने के बीच की वह आवाज़ जो राज को पागल कर देती थी।
उसने पूरा हाथ रख दिया। चूची उसकी हथेली में समाने लगी। भरकर। जैसे गीली मिट्टी।
सुमन की साँस भारी हुई। उसने राज का हाथ नहीं हटाया। बस करवट और लीअब वह उसकी तरफ पीठ करके सो रही थी, लेकिन उसके हाथ को अपनी चूचियों के बीच दबा रखा था।
राज का लंड नीचे सख्त हो चुका था। उसने अपना पेट उसकी पीठ से चिपका दिया। अपने लंड को उसकी निचली पीठ और नाइटी के बीच दबाया।
सुमन चुप थी। लेकिन उसने अपनी गांड उसकी तरफ खिसका दी।
एक इशारा। हाँ।
राज ने धीरे से नाइटी ऊपर की। सुमन ने विरोध नहीं किया। उसके कूल्हे खुलेगोरे, मांसल, गर्म। उसने अपने लंड को बिना कंडोम के उसकी चूत के बाहर रगड़ना शुरू कर दिया। नमी थी। पहले से ही।
"अंदर..." सुमन ने फुसफुसाया। "अब ज्यादा मत रगड़... डाल दे।"
राज ने डाला। एक ही बार में, पूरा। सुमन कराही। दबी हुई, जैसे डरे कि कोई सुन लेहालाँकि घर में कोई और था नहीं।
राज ने धक्के देना शुरू किए। धीरे, लेकिन गहरे। सुमन की चूत अंदर से गीली हो चुकी थी। उसकी परतें राज के लंड को चूस रही थीं।
और तभी राज ने अपना मुंह उसके कान के पास ले जाकर कहा
"सुन... एक स्टोरी सुना रहा हूँ तुझे।"
सुमन की साँस फटी हुई थी। "क्या... क्या स्टोरी?"
राज ने उसके अंदर और गहरा धकेला। "इमेजिन कर... तू किसी और के लंड को अपनी चूत में ले रही है।"
सुमन की पूरी बॉडी जकड़ गई। उसकी चूत सिकुड़ी, फिर तुरंत ढीली हुई। उसने राज की कलाई पकड़ी। "नहीं... ऐसी बातें मत कर... क्यों बोल रहा है?"
"बस इमेजिन कर," राज ने उसकी एक टांग ऊपर उठा दी। अब वह साइड में ज्यादा खुली थी। उसका लंड और अंदर जा रहा था। "कोई और... अनजान... उसकी उँगलियाँ तेरी गांड पर... उसका लंड तेरे अंदर..."
"बंद... बंद कर, राज।" लेकिन उसकी आवाज़ काँप रही थी। और उसकी चूतराज ने महसूस कियावह और ज्यादा गीली हो चुकी थी। एकदम से। जैसे कोई नल खुल गया हो।
राज ने धक्के तेज़ किए। "उसकी साँसें तेरी गर्दन पर... उसके हाथ तेरे बालों में... और तू मुझे देख रही है..."
"चुप कर!" सुमन ने जोर से कहा, लेकिन उसकी गांड हवा में उठ रही थी। वह खुद राज के लंड पर पीछे आगे हो रही थी। उसके मुँह से सिर्फ "हाँ-हाँ" निकल रहा था।
राज ने अपना अंगूठा उसकी गांड पर रखा। जोर से दबाया। "और तब वह तुझे कहे — 'बोल, मैं कैसा हूँ?' और तू कहे... क्या कहेगी?"
सुमन ने अपना मुँह तकिए में दबाया। लेकिन उसकी चूत ने जवाब दे दियावह फट रही थी। उसके शरीर से पानी राज की जांघों पर टपक रहा था।
"रुक मत... रुक मत..." सुमन बुदबुदाई। "चोदता रह... जैसे चोद रहा है..."
राज खुश था। अंदर ही अंदर पागल। उसकी बीवी पानी छोड़ रही थी सिर्फ एक कल्पना पर। वह अपनी गांड ऊपर उठा रही थीजितना ऊपर हो सकेताकि उसका लंड और अंदर जाए।
"हाँ... हाँ... किसी और का..." सुमन ने खुद ही फुसफुसाया। फिर उसने लुढ़कते हुए राज को अपने ऊपर बिठा लिया। राज ऊपर था। सुमन नीचे। उसने अपनी दोनों टांगें राज के कंधों पर रख दीं। पूरी खुली। गीली। बेपनाह।
Like Reply


Messages In This Thread
RE: वह आग जो कभी बुझती नहीं (Raj or Suman) - by Certified Addict - 07-06-2026, 11:29 PM



Users browsing this thread: 1 Guest(s)