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Adultery ......काला जामुन ..... A meanie mommy
Next update - पशु मेला

उस दिनभर की चुदाई में मैंने मम्मी के चूत के सारे रस निचोड़कर रख दिए। दिनभर की जबरदस्त चुदाई से हमदोनों को काफी थकान भी महसूस हो रही थी और फिर रात को हमलोग घर वापस आ गए। हमदोनों के शरीर में थकान की वजह से बिना कुछ खाए - पीए ही कमरे में जाकर सो गया। अगली सुबह जब मैं उठा तो मम्मी कमरे में बाल संवार रही थी आयने के सामने बैठकर मेरी पहली नजर मम्मी पर पड़ी उसे देखकर मेरे शरीर का थकान गायब हो। फिर हम दोनों नीचे आये मम्मी किचन में चली गई और मैं हाॅल में सोफे पर आराम से बैठा था थोड़ी देर बाद मम्मी दो कप कॉफी बनाकर लाई । हम-दोनों बैठकर पीने लगे । थोड़ी देर बाद पापा भी जोगिंग करके वापस आ चुके थे। हमारे पास आकर बैठे और से बात करने लगे। मैं चुपचाप सुन रहा था।

पापा - कल कि शॉपिंग कैसी रही।?

मम्मी - बड़ीया रहा।

पापा - तुमने कितने कपड़े खरीदे । ?

मम्मी - मैंने 2 सेट और नयन को भी एक 1 सेट दिलायें।

और फिर पापा उठकर अपने कमरे में जाने लगे। वह रूके और मुझसे बोले।

पापा - नयन तुझे बड़े ताऊ जी के बेटे ( मिथलेश ) ने बुलाया है उसे तुझसे कुछ काम है।

नयन - ओके, पापा मैं उनसे मिल लुंगा । फिर पापा कमरे में चले गए।

पापा के कहने पर मैं भैया के घर गया. मैं अपने घर की छत के रास्ते से ही उनके घर गया . जैसे ही मैं सीढ़ियों से नीचे गया घर में कोई नहीं था , जब मुझे एक कमरे में टीवी कि आवाज सुनाई दी तो मैं वहां पहुंचा । तभी मैंने देखा कि भैया ने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रखी है और वे सोफे पर बैठकर अपना लंड हिला रहे थे.

ब्लू फिल्म में बड़ा ही सेक्स सीन चल रहा था. उसे देखकर मेरा लंड भी खड़ा हो गया. मगर तभी भैया की नज़र मुझ पर पड़ गई और उन्होंने तुरंत टीवी बंद कर दिया. उन्होंने अपना लंड पजामे में डाला और मेरे पास आ गए.

भैया- नयन तू कब आया. मुझे तो पता ही नहीं चला!

मैं- बस भैया तभी आया. जब आप लंड हिला रहे थे.

भैया- नयन तुमने देख तो लिया है. मगर किसी से कहना मत!
मैं- भैया हम दोनों दोस्त हैं न … आप चिंता मत करो. वैसे मेरा भी मन यह फिल्म देखने को कर रहा है.

चूंकि मैंने पहले कभी ब्लू फिल्म देखी नहीं थी तो जरा सी ब्लू फिल्म देख कर मेरी हालत खराब हो गई थी.

भैया- हम्म … तो तू मेरे साथ ब्लू फिल्म देखना चाहता है?
मैं- हां भैया, मेरा भी मन करता है. नयी नयी ब्लू फिल्म देखने का … एक बार सिर्फ दोस्त के मोबाइल में देखा है. मगर इतनी बड़ी स्क्रीन पर देखने का मज़ा ही अलग है!

भैया- चल देख ले यार. मैं कौन सा किसी से कहने वाला हूँ. वैसे तूने तो मेरी गांड ही फाड़ दी थी.अब उन्होंने फिर से टीवी चालू कर दिया. टीवी पर सामने एक औरत डॉगी स्टाइल में झुकी थी और पीछे से एक गोरा आदमी उसकी चूत ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था.

ये देखते ही भैया का लंड खड़ा हो गया l भैया अपने लंड को सहलाने लगा और उन्होंने खुद का पजामा भी नीचे कर दिया.
उनका लंड 7 इंच के आस पास था और उसके आगे का मोटा टोपा खुला हुआ था.

भैया मेरे सामने ही अपना लंड हिलाने लगे. मैं एक बार टीवी की तरफ देखता और फिर भैया की तरफ देखता. भैया का लंड भी बिल्कुल उस गोरे आदमी जैसा ही लग रहा था और इधर मेरा भी लंड पैंट में हरकत दिखा रहा था.

तभी भैया बोले- अरे यार जब तेरा लंड खड़ा हो गया है, तो उसे बाहर निकाल कर मुट्ठी मार ले न … रुक मैं करता हूँ. इससे पहले मैं कुछ कह पाता, भैया ने मेरी पैंट खोल दी और मेरा लंड बाहर निकल आया।

भैया - तेरा लंड भी तो काफ़ी बड़ा और मोटा है.

मैं - मगर भैया आपके लंड का टोपा काला है और मेरे लंड का टोपा गुलाबी हैं।

भैया- नयन , सब मर्दों का लंड अलग अलग होता है.अभी तो तुम्हारा लंड और भी बड़ा हो जाएगा!

भैया अपना लंड ज़ोर ज़ोर से हिला रहे थे. भैया का लंड वाकई काफ़ी मोटा था. उसका खुला हुआ टोपा और उभरी हुई नसें अलग ही दिख रही थीं.भैया काफ़ी देर तक मुट्ठी मारते रहे, तब जाकर भैया के लंड से पानी निकला.अपने लंड का पानी निकालने के बाद भी भैया का लंड जरा सा ही ढीला पड़ा था.
यह मेरे लिए एक अजीब सी बात थी.

अब भैया मेरा लंड हिलाने लगे और कुछ ही देर में मेरा शरीर अकड़ गया.मेरा पानी ज़मीन पर गिर गया. मैंने अपना लंड अन्दर कर लिया.

उस दिन के बाद से मैं और भैया काफी अच्छे दोस्त बन गए.

एक दिन भैया ने कहा- नयन तेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
मैं- भैया, मुझे तो लड़कियों से बात करते हुए भी डर लगता है … और आप गर्लफ्रेंड की बात कर रहे हो!

भैया- नयन , ये उम्र गर्लफ्रेंड बनाने की है. गर्लफ्रेंड होगी तो तू उसकी चुदाई कर पाएगा और तुझे मुट्ठी मारने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी!

मैं- भैया मुट्ठी तो आप भी मारते हो, क्या आपका मन नहीं होता है कि आप किसी लड़की की चुदाई करो!

भैया- नहीं यार, लड़की में वह मज़ा नहीं है, जो मज़ा किसी औरत को चोदने में है.

मैं- भैया आपने कभी किसी को चोदा है क्या?

भैया- नयन जिनकी जीएफ नहीं होती है. उनके पास औरत का ही सहारा होता है. मेरी सैटिंग मेरे पड़ोस की एक भाभी से है ।

मैं- ओह माय गॉड … आप गांव में पड़ोस की भाभी को चोद चुके हो?

भैया- हां नयन , मैंने उनकी चूत बड़े अच्छे से चोदी थी क्योंकि भाभी का पति उनकी गर्मी नहीं निकाल पाता था . वैसे तू बता, आज तक तूने किसी औरत को नंगी देखा है?

मैं- अरे कहां भैया, मेरी किस्मत बहुत खराब है. ना ही नंगी औरत देखी है. ना ही कभी चुदाई की है.

भैया- यार, वैसे जब गांव की औरतें छत पर आती हैं. तब मैं उनके गदराए जिस्म के दर्शन करता हूँ. बहुत मज़ा आता है. तू भी तो ऐसे देखता होगा!

मैं- हां भैया ।

भैया- तू भी छुपा रुस्तम है. सारे मज़े लेता है. मगर शक्ल से कितना सीधा लगता है. ऐसे दिखता है, जैसे कुछ जानता ही ना हो!

मैं- भैया वैसे सीधे तो आप भी बनते हो. मगर देखो, अन्दर ही अन्दर आप अपनी पड़ोस की भाभी को चोद चुके हो!

भैया- नयन , ये सब तो कभी कभी ही हो पाता है. हमेशा नहीं होता है. इसलिए मैं तो ऐसी औरत चाहता हूँ, जो रोज मेरे लंड की गर्मी को निकाले.

मैं- भैया ऐसी औरत कहां होती है, जो रोज रोज लंड लेना चाहे.

भैया- नयन , तू अभी छोटा है. तुझे क्या पता कि जो औरत जितनी सीधी होती है. उसकी चूत में उतनी ही आग होती है. जब मेरे पड़ोस की भाभी मेरे पास आई थीं तो वे बहुत शर्माती थीं. मगर जब चुदवाने लगी तो खुलकर चुदवाती थी .

मैं- वैसे भैया सच कहूँ, तो मुझे भी लड़की से ज्यादा आंटी पसंद हैं. उनकी चूचियां कितनी बड़ी बड़ी होती हैं. मन करता है कि बस हमेशा चूसता ही रहूँ.

भैया और मैं अब छत पर बैठकर औरतों की चूचियां और गांड देखा करते थे. वे कभी मुझे किसी की बड़ी बड़ी चूचियां दिखाते तो कभी मैं किसी आंटी की बड़ी गांड.

( मगर कहते हैं ना कि जो तुम दूसरों के लिए सोचते हो … वही कोई तुम्हारे घर वालों के लिए भी सोचता है. )

हम दोनों तीन - चार दिनों से औरतों की चूचियां और गांड देख रहे थे … और उनके बारे में बात भी कर रहे थे । फिर पांचवें दिन मैं और भैया बैठे थे. तभी मम्मी छत पर आ गईं.

मम्मी ने साड़ी और ब्लाउज पहना हुआ था. उनकी बड़ी बड़ी चूचियों की घाटी और उनका खुला हुआ पेट साफ दिख रहा था. मैंने देखा कि भैया मेरी मम्मी की जवानी को ताड़ रहे थे और उस वक्त उनका लंड झटके खा रहा था.

थोड़ी देर बाद मम्मी चली गईं. तब मैंने देखा कि भैया की नज़र मम्मी की गांड पर लगी थी.

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मैं- ये क्या देख रहे है भैया? वे मेरी मम्मी हैं.

भैया- सॉरी यार, ग़लती से नज़र चली गयी थी. मगर मैं क्या करता यार … तेरी मम्मी की चूचियां और गांड बहुत बड़ी है.

मैं- भैया, जुबान संभाल कर बात करो! आप मेरी मम्मी के बारे में गलत बात कर रहे हो!

भैया- अबे तू तो ऐसा गुस्सा हो रहा है. जैसे मैंने कुछ ग़लत कह दिया हो. अबे हर बंदा तेरी मम्मी की गांड और चूचियों का दीवाना है. वैसे भी वे हैं तो एक औरत ही … और तूने भी तो कभी उन्हें देखा ही होगा!

मैं- नहीं , देखा है ।

भैया- अच्छा एक बात बता … तूने कभी आपने मम्मी पापा को चुदाई करते देखा है?

मैं - अपने तो सारी हदें पार कर दीं और अब मैं घर जा रहा हूं और द्वारा कभी नहीं आऊंगा आपके घर। जब मैं अपने घर जाने लगा तो उन्होंने मुझे रोक लिया और अपने साथ मुझे नीचे अपने कमरे में लेते आये।

भैया ने टीवी पर ब्लू फिल्म लगा दी और मैं उनके टीवी पर ब्लू फिल्म देखने लगा.

भैया- तेरे पापा तो बहुत लकी हैं यार. तेरी मम्मी जैसा माल सबके नसीब में नहीं होता है. क्या मस्त चोदता होगा तेरा पापा, तेरी मम्मी को!

मैं- भैया आप बहुत बदतमीज़ हो, अब मुझे आपसे दोस्ती नहीं रखना.

फिर मैं गुस्सा होकर वहां से घर जा रहा था । जब मैं उनके कमरे से बाहर निकल रहा था तो भैया मुझे अपने पास रोकने का कोशिश कर रहे थे।

भैया- अरे सुन तो, क्या हो गया बे?

मैंने उनकी कोई बात नहीं सुनी, सीधा घर आ गया. दिनभर मम्मी से साथ काम करके और बातचीत करके किसी तरह दिनभर कट गया‌ । फिर रात का खाना खाकर सो गया.

अगले सबेरे जब मैं छत पर किसी काम से गया था तब भैया वहां पहले से ही बैठे थे. भैया की नज़र मुझ पर पड़ी और वे मुझे बुलाएं. क्योंकि भैया भी रोज़ इसी टाइम छत पर आकर मुहल्ले की आंटियों को देखते थे. क्योंकि दो दिन पहले मैं भी तो उनके साथ बैठ कर यही सब देखता था.


उन्होंने मुझे देखते ही आवाज़ लगाई- इधर आ नयन , मुझे एक बात बोलना है. मैं भैया के पास चला गया.

भैया- क्या हुआ… इतना गुस्सा हो गया है ? मैंने तेरी मम्मी के साथ कुछ ग़लत थोड़ी किया है . मैं तो सिर्फ बात कर रहा था. किसी के बारे में बात करने से किसी का कोई नुकसान थोड़ी हो जाता है.


मैंनें कुछ नहीं बोला.

भैया- ठीक है, चल अब नीचे चलें । फिर थोड़ी देर बाद मैं और भैया नीचे आ गए और नीचे आकर भैया टीवी पर ब्लू फिल्म लगा कर देखने लगे.

कुछ देर बाद मैं भी भैया के साथ ब्लू फिल्म देखने लगा. शायद भैया ने जानबूझ कर मम्मी की साइज़ की औरत की चुदाई वाली वीडियो लगाया था.

इस फिल्म में मेरी मम्मी की उम्र की महिला को एक जवान लड़का चोद रहा था. लेकिन मुझे क्या … मुझे तो चुदाई देखने में बहुत मज़ा आ रहा था.

अब भैया ने अपना 7 इंच का लंड निकाला और हिलाने लगे.

कुछ देर बाद भैया मेरे पास आए और उन्होंने अचानक से मेरी पैंट को नीचे कर दिया. टीवी पर चुदाई देख कर मेरा लंड भी टाइट हो गया था.

अब उन्होंने अपने एक हाथ से अपना लंड और दूसरे हाथ से मेरा लंड पकड़ा और वे एक साथ दोनों को हिलाने लगे.

मुझे भैया के हाथ से अपना लंड हिलवाने में बहुत मज़ा आ रहा था.

तभी मैंने कहा - भैया, आप मम्मी को चोदना चाहते हो? भैया यह सुनकर चौंक गए और मेरी तरफ देखे।

भैया- यार तू बुरा मत मानना. मगर जब मैंने तेरी मम्मी को पहली बार देखा था. मैं तभी से उन्हें चोदना चाहता हूँ.

मैं- भैया तो आप एक बार और कोशिश करके देख लो. हो सकता है वह मान जाएं.

भैया- नहीं यार, वे नहीं मानेंगी. तेरी मम्मी की चुदाई के लिए मुझे कुछ और प्लान करना पड़ेगा. जिससे वह मना नहीं कर पाएं और खुद मुझे अपनी चूत चोदने दे दें.

मैं- भैया कुछ प्लान है आपके पास?

भैया - हां , प्लान तो है पता नहीं काम करेगा कि नहीं।

फिर भैया ने प्लान बताया गांव में पशु मेला लगा हुआ है ,जहां पर अलग-अलग जहां पर अलग अलग प्रकार के पशु की खरीद बीकरी होती है और उसके साथ-साथ जलेबी के दुकानें भी लगती थी। तु अपने मम्मी को आज शाम मेला दिखाने के लिए ले आ बाकी सारा काम हो जाएगा।

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दोपहर को मैं खाना खाने घर आया । थोड़ी देर हाॅल में बैठने के बाद मैंने मम्मी को आवाज लगाई ' मम्मी खाना निकाल दो मुझे भुख लगी है " फिर मम्मी कमरे बाहर आई और बोली " मुंह हाथ धोकर पापा को भी बुला ले और डायनिंग टेबल पर बैठ जा " फिर मम्मी किचन में चली गई खाना निकालने। मैंने पापा को बुलाकर हाॅल में रखे डायनिंग टेबल बैठा गया। थोड़ी देर बाद मम्मी हम दोनों का खाना लेकर आई खाने को दिया । मैं और पापा दोनों खाना खाने लगे तभी पापा ने कहा " पंखुड़ी तुम भी अपना खाना लेकर आओ और हमारे साथ खाओ । मम्मी किचन में गई अपने लिए खाना लेकर आई और हम लोग के साथ बैठक खाने लगी । मम्मी को अभी खाना खाते हुए थोड़ी ही देर हुआ था।


मैंने कहा, “ मम्मी , , गांव में मेला लगा है और वहां जलेबी की दुकान भी लगी है आज शाम को आप , में और पापा घुमने चलते हैं ना है।” और मम्मी ने कहा, “ठीक है , चलती हूँ। मगर तेरे पापा साथ चलेंगे तभी तो ना ” तब मैंने पापा से कहा " पापा ने कहा उन्हें मेला देखने मन नहीं है तुम और अपनी मम्मी को लेकर चले जा कार में बैठकर और मेला देखकर वापस आ जाना । फिर पापा ने अपना खाना खाय और कमरे में चले गए । फिर मैंने मम्मी की ओर देखा तो मम्मी ने कहा:- " टेंशन मत ले में तेरे साथ चलुंगी " । फिर हम दोनों खाना खा। मम्मी कमरे में चली गई और मैं हाॅल में बैठकर टीवी देखने लगा। थोड़ी देर बाद मम्मी ने मुझे कमरे में बुलाया जब मैं अंदर गया और दरवाजा बंद कर दिया जैसे मम्मी की तरफ देखा वह बिल्कुल नंगी लेटी थी और मुझे बिस्तर पर चुदवाने का निमंत्रण दे रही थी मैंने भी बिना देर किए अपने कपड़े उतार कर बिस्तर पर आ गया और चुदाई कार्यक्रम चालू कर दिया ।

थोड़ी देर बाद पापा मम्मी को ढूँढते हुए कमरे के पास आये और पापा ने मम्मी को आवाज़ दी , और अपने कमरे में आने को कहा और फिर चले गए । तब मम्मी और मैं कमरे में चुदाई कर रहे थे । पापा की आवाज सुनते ही मम्मी और मैं बिल्कुल शांत हो गए ।

पापा के जाने के बाद मम्मी ने कहा " पापा अगर दरवाजा खोलकर आ जाते तो पूरा सच बाहर आ जाता, कैसे उनकी बीवी अपने बेटे से चुदवाती है। लेकिन हम नहीं पकड़े गए " और फिर मैंने मम्मी को पापा के पास भेजा दिया और मैं भी कमरे से बाहर निकालकर पापा के कमरे के खिड़की के पास खड़ा कर देखने लगा। अंदर किया हो रहा है।

मम्मी के कमरे के अंदर जाते ही पापा ने भी मम्मी की चूत और गांड मारी। मैं खिड़की से देख कर मम्मी को चिढ़ा रहा था। पापा के सोने के बाद मम्मी वापस कमरे में आई, और कहा- तुमसे चुदने के बाद किसी और से चुदने का मजा ही नहीं आता।

मैंने तुरंत मम्मी को गोदी में उठाया, और बिस्तर पर लेके चोदा। थोड़ी देर बाद हम-दोनों बांहों में बांहें डालकर सो गया।

मेरी नींद शाम को टुटी मम्मी के जगाने पर और मुझे तैयार होने को बोलकर और बाथरूम में चली गई और 20 मिनट बाद बाहर आई।

मम्मी ने चॉकलेट रंग की साड़ी पहनी थी, जिसका ब्लाउज इतना डीप नेक था कि उनके चूची की गहरी दरार साफ दिख रही थी। दोनों चूचियों के बीच का हिस्सा और ऊपर का मांसल हिस्सा बाहर झलक रहा था, मानो कोई दूध का समंदर उफान मार रहा हो। उनकी ब्रा का स्ट्रैप बार-बार ब्लाउज से खिसककर कंधे पर आ जाता था, और मम्मी उसे बार-बार अंदर ठूंस रही थीं। मम्मी ने ऊँची हील वाली चप्पल पहनी थी, जिससे उनकी गांड़ चलते वक्त इस कदर हिल रही थी। उनकी गांड का हर हिलना ऐसा था जैसे कोई भारी भरकम जेली हवा में नाच रही हो।

शाम को हम दोनों लोग घर के लिए निकलते कार में सवार होकर
मैं कार चला रहा था । मम्मी कार के पीछे वाली सीट पर बैठी थी । मैंने कार को भैया के घर के सामने रोका और भैया को आवाज लगाई। भैया थोड़ी देर में बाहर आये और कार में पीछे वाली सीट पर बैठ गए फिर मैं कार चलाने लगा। रास्ते में भैया मम्मी ने बातचीत करते जा रहे थे।

हम तीनों 20 मिनट बाद मेला में पहुंच गए । मैंने गाड़ी एक रेस्टोरेंट के पास खड़ी की वह पर पहले से बहुत गाड़ी खड़ी थी और हल्का अंधेरा भी था । हम तीनों रेस्टोरेंट के अंदर गए और एक टेबल बुक किया और फिर हम तीनों कोइल्ड्रिंक और समोसा ऑर्डर किया। तीनों ने बैठकर कोइल्ड्रिक और समोसा खाया । खाने के बाद वहां बैठकर इधर उधर की बात करने लगे। तभी मिथलेश भैया ने मुझे वहां से जाने का इशारा किया । मैं समझ गया भैया ने मुझे क्यों इशारा किया ।

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मुझे समझ आ गया कि भैया मम्मी को चुदाई के लिए तैयार करने वाले हैं , शायद मेरे कारण मम्मी डर रही हैं या वह हिचक रहे हैं।

मैंने मम्मी से कहा, “मम्मी, चलो थोड़ा देर मेला घुम लेते हैं । ”

मम्मी: नयन में थोड़ी थकीं थकीं महसूस कर रही हुं तुम अपने भैया को साथ लेकर जाओ।

फिर मैंने भैया को कहा : चलो भैया थोड़ी देर मेला घुम कर आते हैं।

मगर भैया ने आंख मारते हुए कहा: मैं आंटी के पास रूक कर थोड़ी बातचीत करना चाहत हुं।

तब मैंने कहा, “ठीक है मैं अकेले मेला घुम लेता हूं ।” जब मैं जाने लगा।

मम्मी ने कहा : “ठीक है, पर जब आओगे तब मैं तुझे यही मिलुंगी ।”

फिर मैं रेस्ट्रोंट के पीछे से होते हुए पार्किंग में जा पहुंचा । पार्किंग में अंधेरा था, लेकिन उनकी गाड़ी पर रेस्टोरेंट की छत की लाइट थोड़ी पड़ रही थी, जिससे गाड़ी के अंदर कुछ कुछ दिख रहा था। फिर भी, शीशे के पास जाकर देखना पड़ता था। मैं वापस रेस्टोरेंट के पीछे खड़ा हो गया ,

वहीं से में रेस्टोरेंट के अंदर मम्मी और भैया को देख रहा था वह दोनों कुर्सियों पर बैठकर बातें कर रही थीं। उनकी बातों में हँसी-मजाक था, और मम्मी की आँखों में एक चमक थी, जैसे वो पहले से ही गर्म हो चुकी हों। मम्मी की साड़ी का पल्लू बार-बार खिसक रहा था, और वो जानबूझकर उसे धीरे-धीरे ठीक कर रही थीं, जैसे भैया को ललचाना चाहती हों। फिर वो दोनों बाहर चले गए। मैं चुपके से देख रहा था कि वो दोनों पार्किंग की तरफ जा रहे हैं । मैं समझ गया कि वो दोनों प्लान के मुताबिक गाड़ी में जाएँगे। मैं थोड़ी देर बाद कार के पीछे चला गया और अंदर झाँककर देखने लगी। कार का शीशे थोड़ा खुला था , क्योंकि गर्मी थी। उन्होंने एसी नहीं चलाया था, शायद इसलिए कि खड़ी गाड़ी स्टार्ट रखने से किसी को शक हो सकता था। जब मैंने अंदर झाँका, तो उफ्फ! ऐसा नजारा था कि मेरी साँसें थम गईं।

गाड़ी के अंदर का माहौल इतना गर्म था कि मानो कोई आग भभक रही हो। भैया मम्मी के ब्लाउज के अंदर हाथ डालकर उनके चूची को जोर-जोर से मसल रहा था। मम्मी की साड़ी कमर तक उठी हुई थी, और उनकी जाँघें पूरी तरह नंगी थीं। उनकी कच्छी थोड़ी नीचे खिसकी हुई थी, जिससे उनकी चूत की गीली झलक साफ दिख रही थी। वो इतनी गीली थी कि रस की बूँदें गाड़ी की सीट पर टपक रही थीं। गाड़ी में गर्मी थी, और मम्मी के माथे पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं, जो उनकी उत्तेजना को और बढ़ा रही थीं।

मम्मी: “थोड़ा जल्दी करो, कोई आ जाएगा।”

मिथलेश : “आंटी, कोई नहीं आएगा। आप चिंता मत करो। वैसे
भी, पार्किंग में गाड़ी के पास कोई आता ही नहीं।”

मम्मी: “अरे, नयन थोड़ी देर के लिए मेला घुम गया है, वह कभी भी आ सकता है।”

मिथलेश : “ठीक है आंटी, चलो जल्दी करते हैं। अब अपने चूची तो बाहर निकालो।”

मम्मी ने अपने रसभरे चूची एक-एक करके ब्लाउज से बाहर निकाले। उनके चूची को देखकर भैया बस देखते रह गए। उनके निप्पल्स गहरे भूरे रंग के थे सख्त और उभरे हुए , जैसे उत्तेजना में फूल गए हों।

मिथलेश ने कहा, “आंटी, आपके एक-एक चूची में तो किलो-किलो दूध भरा होगा!”

मम्मी हँसते हुए बोलीं, “चलो, अभी इस चूची के उपर तुम्हारा हक़ है इससे निचोड़ लो ।”

भैया एक-एक करके चूची को पकड़कर चूसने लगे। अब उनका जीभ दाएं निप्पल पर गोल-गोल घूम रहा था । और फिर भैया दाएँ चूची को अपने दाँतों से हल्का-हल्का काट रहा था, और कभी-कभी इतनी जोर से निचोड़ रहा था कि मम्मी की सिसकारी में दर्द और मजा दोनों सुनाई दे रहे थे। मम्मी की सिसकारियाँ शुरू हो गईं, “उफ्फ… आह्ह…”

मम्मी भैया के लंड को पैंट के बाहर से मसल रही थीं। भैया का लंड पैंट में तनकर लोहे की रॉड जैसे हो गए थे। मम्मी ने भैया को देखकर कहा, “ मिथलेश , तुम मेरी चूत को गरम करो, और जल्दी करो प्लीज।” ये कहकर मम्मी ने अपनी साड़ी और ऊपर उठा ली और कार की सीट लेट गईं। उनकी जाँघें पूरी तरह खुली थीं, और उनकी चूत इतनी गीली थी कि गाड़ी की सीट पर रस की छोटी-छोटी बूँदें चमक रही थीं।

भैया उनकी जाँघों के बीच घुस गया और उनकी चूत को चाटने लगा। उसका पूरा मुँह मम्मी की जाँघों में दब गया था, और वो उनकी चूत को ऐसे चूस रहा था जैसे कोई भूखा शहद का छत्ता चाट रहा हो। उसकी जीभ मम्मी की चूत के दाने को बार-बार छू रही थी, और मम्मी का जिस्म हर बार सिहर उठता था। भैया ऊपर से मम्मी के रसभरे मम्मों को चूस रहा था, उनके निप्पल्स को मुँह में लेकर खींच रहा था। मम्मी की सिसकारियाँ अब और तेज हो गई थीं, “ऊँ… उफ्फ… आह्ह… और जोर से चूसो!” उनकी आवाज में एक बेताबी थी, जैसे उनके जिस्म की आग अब बर्दाश्त से बाहर हो रही हो।

कुछ देर बाद मम्मी ने भैया को अपनी जाँघों के बीच से निकाला और मम्मी उसकी गोद में बैठ गईं। भैया का लंड पहले से ही पैंट से बाहर था भैया ने खुद अपने लंबा और मोटा लंड बाहर निकाल रखा था । जैसे कोई काला साँप फन उठाए खड़ा हो। मम्मी ने अपनी चूत को उसके लंड पर टिकाया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगीं। हर धक्के के साथ गाड़ी चूं-चूं की आवाज कर रही थी, और मम्मी की सिसकारियाँ हवा में गूँज रही थीं, “आह्ह… ऊँ… उफ्फ…” और भैया मम्मी के चूची को चूस रहा था, उनके निप्पल्स को अपने दाँतों से हल्का-हल्का काट रहा था। मम्मी की चूत पूरी तरह गीली थी, और भैया का लंड उसमें आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ मम्मी की गांड हिल रही थी, और गाड़ी की सीटें उनके जिस्म के वजन से दब रही थीं। मम्मी का चेहरा लाल हो गया था, और उनकी आँखें आधी बंद थीं, जैसे वो उत्तेजना के नशे में पूरी तरह डूब चुकी हों।


कुछ देर बाद मम्मी ने भैया से कहा, “ मिथलेश , अगली सीट फोल्ड करो।” भैया ने फुर्ती से अगली सीट फोल्ड कर दी। मम्मी अब घोड़ी बन गईं, उनकी गांड भैया के सामने थी, पूरी तरह खुली और उभरी हुई। भैया ने पीछे से उनकी चूत में अपना लंड डाला, लेकिन उसका लंड पूरा अंदर नहीं जा रहा था।

मिथलेश : “आंटी, इतनी बड़ी गांड है कि मेरा लंड तो चूत तक पहुँचेगा ही नहीं!”

मम्मी: “ट्राई तो करो, मिथलेश ।”

मम्मी ने अपनी गांड को और ऊपर उठाया, अपनी जाँघें और चौड़ी कीं। भैया ने फिर से कोशिश की, और इस बार उसका लंड मम्मी की चूत में गहराई तक घुस गया। मम्मी की सिसकारी निकली, “उफ्फ… आह्ह… और जोर से!”

भैया ने दूसरी सीट भी फोल्ड कर दी। अब मम्मी ने दोनों सीटों पर अपने हाथ रखे, एक टांग कार की पार्टिशन की एक तरफ और दूसरी टांग दूसरी तरफ रखकर इस तरह झुकीं कि उनका चेहरा गियर लीवर के पास था। उनके बड़े-बड़े चूची सीटों के बीच लटक रहे थे, और हर धक्के के साथ वो आगे-पीछे हिल रहे थे। उनकी गांड भैया के सामने पूरी तरह खुली थी, और कार की लाइट में उनकी चूत का रस चमक रहा था।

भैया ने कहा, “वाह, मेरी पंखुड़ी आंटी ! अब जाएगा मेरा सारा सामान तुम्हारी चूत में!”

मम्मी: “जल्दी करो, मिथलेश !”

भैया ने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ मम्मी की गांड हिल रही थी, और गाड़ी भी उनके साथ हिल रही थी। मम्मी की सिसकारियाँ अब चीखों में बदल गई थीं, “ऊँ… उफ्फ… वाह… चोद ना मुझे… आह्ह!” भैया की स्पीड बढ़ गई, और मम्मी का जिस्म हर धक्के के साथ आगे-पीछे हो रहा था। अचानक भैया का लंड बाहर निकल गया, और वो बोला, “आंटी, होने वाला था, लंड क्यों बाहर कर दिया?”

मम्मी: “होने वाला था, तभी तो बाहर निकाला।”

मम्मी ने भैया का लंड पकड़ा और तेजी से मुठ मारने लगीं। भैया का सारा पानी बाहर निकला, इतना ज्यादा कि मम्मी के एक चूची पर सारा वीर्य फैल गया। मम्मी ने हँसते हुए कहा, “इतना सारा पानी, मिथलेश ! मेरे चूची तो डूब गए!”

करीब आधे घंटे बाद

फिर मम्मी ने भैया को देखा और बोलीं, “ मिथलेश , एक बार और करते हैं अब डालो अपना लंड मेरी चूत में।” भैया पीछे आ गया और उसने अपना लंड मम्मी की चूत में डाला। और जैसे ही वो अंदर गया, मम्मी की सिसकारी निकली, “उफ्फ… तुम्हारा लंड तो काफी मोटा है!”

भैया : “आंटी, इसबार मेरा लंड बाहर मत निकालना जब होने वाला होगा तो मैं बता दूंगा ”

मम्मी: “अंदर मत गिराना अपना रस।”

भैया : “नहीं, तुम्हारी गांड़ के ऊपर डालूँगा।”

भैया ने अब धीरे-धीरे धक्के शुरू किए, लेकिन जल्दी ही उसकी स्पीड बढ़ गई। मम्मी खुद को पीछे धकेल रही थीं, ताकि भैया का लंड इसबार और चूत की गहराई तक जाए। उनकी सिसकारियाँ अब सिसकियों में बदल गई थीं, “आह्ह… ऊँ… मिथलेश… और जोर से!” मम्मी की जाँघें तन गई थीं और उनकी चूत इतनी गीली हो गई थी कि हर धक्के के साथ पच-पच की आवाज गूँज रही थी। मिथलेश ने और तेज धक्के मारे, और जब उसे लगा कि वो झड़ने वाला है, उसने लंड बाहर निकाला और मम्मी की गांड पर सारा वीर्य गिरा दिया। मम्मी की गांड पर रस की बूँदें चमक रही थीं, और वो हाँफते हुए सीट पर लेट गईं।

मम्मी ने टिश्यू पेपर से अपने चूची और गांड साफ किए। फिर उन्होंने अपनी कच्छी पहनी, साड़ी ठीक की, और ब्लाउज में चूची समेटे। पूरी तरह तैयार होकर वो गाड़ी से बाहर निकलीं। उसके रेस्टोरेंट जाने से पहले में अंदर जाकर उसी टेबल पर बैठ गया।

मम्मी रेस्टोरेंट में आते ही मुझे देखकर चौंक गई और बोली : तुम कब आये।

मैंने कहा : मुझे आये हुए आधा घंटा हो चुका है मैंने कई जगह आपको खोजा आप नहीं दिखाई दिये तब मैं यहां आकर बैठ गया।

मम्मी: चलो अब घर चलते हैं काफी रात हो गई है।

कार में सवार होकर चल दिए । रास्ते में मम्मी चुप थीं, लेकिन उनके चेहरे पर एक अजीब-सी चमक थी, जैसे वो अभी भी उस चुदाई के नशे में डूबी हों। उनके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान थी, और उनकी आँखें मानो कह रही थीं कि वो अपने जिस्म की आग को बुझाकर तृप्त हो चुकी हैं।
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RE: ......काला जामुन..... A meanie mommy 2 - by Dhamakaindia108 - 02-06-2026, 09:01 PM



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