02-06-2026, 03:28 PM
गीता ने सबसे पहले लंड का सिरा मुँह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगी। “म्म्म… अभी भी आपका वीर्य कितना गाढ़ा और गरम है बाबाजी…”
बाबाजी ने कहा: “बेटी यह मेरे शिष्य का वीर्य नहीं पर मेरा है। जितना चाटोगी उतना प्रसन्नता होगी मुझे।“ लेखिका मैत्री है।
“जी गुरूजी अभी आप यही है जान के बहोत ख़ुशी हुई, आप चिंता न करे हम हमारी फर्ज पूरी तरह और प्रमाणिक निभाएंगे।“ उसने बाबाजी का लंड को हिलाते हुए कहा।
रजनी ने लंड के नीचे वाले हिस्से को चाटते हुए कहा, “माँ… आप ऊपर चूसो… मैं नीचे वाली जगह चाटती हूँ… देखिए कितना सारा वीर्य और हमारी चूत का रस मिला हुआ है…”
गीता ने लंड को मुँह से निकालकर रजनी को देते हुए बोली, “ले बेटी… तू भी चूस… अपनी माँ की चूत का रस और गुरुजी का वीर्य दोनों का स्वाद ले।”
रजनी ने लंड मुंह में लेकर गहरी चूसनी ली और बोली, “मम्मी… स्वाद तो बहुत अच्छा है… नमकीन और थोड़ा मीठा… मैं पूरा साफ कर दूँगी…”
दोनों माँ-बेटी बारी-बारी से बाबा का लंड चूस रही थीं। कभी गीता पूरा लंड मुँह में ले लेती, कभी रजनी। दोनों की जीभें लंड पर आपस में टकरा रही थीं।
गीता ने लंड चूसते हुए कहा, “बाबाजी… आपका लंड अभी भी इतना सख्त है… हमारी चूत फाड़ने के बाद भी…”
रजनी ने लंड के अंडकोष चूसते हुए बोली, “माँ… यह बाजी का नहीं गुरूजी का लंड हो......बाबाजी तो मात्र एक साधन है....देखो… गुरुजी के अंडे भी कितने भरे हुए हैं… मैं इन्हें भी चूस लूँ?”
बाबा ने दोनों के सिर पर हाथ रखकर कहा, “चूसो… दोनों मिलकर साफ करो… आज तुम दोनों ने अच्छा काम किया है। गुगुजी काफी खुश होंगे।”
गीता और रजनी ने मिलकर बाबा का लंड अच्छी तरह चाटा और साफ़ किया। उनके होंठ और दाढ़ी बाबा के वीर्य और उनकी अपनी चूत के रस से चमक रहे थे। मैत्री की प्रस्तुति।
गीता ने आखिरी बूँद चाटी और कहा, "अब यह पूरी तरह साफ़ है, बाबाजी... हम दोनों ने आपका प्रसाद पी लिया है। आपके प्रसाद की कद्र करते हुए, हम दोनों ने इसे अपने पेट में डाल लिया है, आपकी कृपा बनी रहे।"
रजनी शर्मा गई और उसने बाबाजी का लंड छोड़ दिया और अपनी माँ के पास झुककर धीरे से कहा, "माँ... अगली बार, हम तीनों एक साथ खेलेंगे, है ना? मुझे बाबाजी का लंड बहुत पसंद है। उनका प्रसाद कमाल का है। अगली बार मैं यह प्रसाद अपने पेट में भर लूँगी।"
गीता मुस्कुराई और रजनी का माथा चूमा, "हाँ, बेटी... अब हम तीनों एक परिवार की तरह हैं... जो गुरुजी चाहेंगे वही होगा। और ऐसा ही होगा। हमें बस अपने छेद तैयार रखने हैं। हमें कैसे पता चलेगा कि गुरुजी का लंड कब खड़ा होगा?" गीता प्यार से बाबाजी का लंड रगड़ रही थी।
“चलो बेटी, मैं तुम्हे लेप बना के देती हूँ, जिससे तुम्हारी चूत और गांड से निकलने वाला खून बंद हो जाएगा। और तुम्हें थोड़ा आराम भी मिलेगा। सच कहूँ तो मुझे भी लगाना पड़ेगा।” फनलव द्वारा एडिटेड।
रजनी ने गीता की गांड देखी और कहा, “अरे माँ, गुरुजी ने तुम्हारी गांड से भी खून निकाला है। मैंने अपनी गांड नहीं देखी है, पर उसमें तुम्हारी गांड से ज़्यादा खून निकला होगा।” उसने अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद पर रखी और थोड़ी अंदर सरकाई, और जब उसे एहसास हुआ कि बाबाजी के लंड ने बहुत बड़ा चमत्कार किया है।
गीता ने भी अपनी बेटी की गांड देखी और शरमा गई। उसने मन में कहा: अरे बाप रे, बाबाजी के लंड ने इसकी गांड फाड़ दी है। खून तो ठीक है...पर इसकी गांड का छेद बहुत ज़्यादा चौड़ा हो गया है। वह अंदर का हिस्सा भी देख सकती है।"
दोनों ने एक-दूसरे के गांड के छेद देखकर मलकाती मुस्कराहट के साथ नंगी ही बाहर की ओर चली। गांड और चूत पर ज़्यादा मार पड़ने की वजह से दोनों लंगड़ाकर चल रही थीं। लेकिन दोनों खुश भी तो थीं। दोनों एक दुसरे के सहारे कमरे से बाहर निकल औई। जब वह निकल रही थी तब भी उनकी गांड से थोड़ी बुँदे खून की निकल रही थी। जो अपने अपने हाथो से पोछ रही थी। लेकिन उनके चहरे पर कोई दर्द के भाव नहीं थे।
बाबा उन दोनों की हरकत और उनके हिलते हुए चूतड़ों के कूल्हों को देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहे थे और अपने लंड पर गर्व महसूस कर रहे थे...
************************************
आज के लिए बस यही तक दोस्तों।
फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ।
मैत्री का जय भारत।
बाबाजी ने कहा: “बेटी यह मेरे शिष्य का वीर्य नहीं पर मेरा है। जितना चाटोगी उतना प्रसन्नता होगी मुझे।“ लेखिका मैत्री है।
“जी गुरूजी अभी आप यही है जान के बहोत ख़ुशी हुई, आप चिंता न करे हम हमारी फर्ज पूरी तरह और प्रमाणिक निभाएंगे।“ उसने बाबाजी का लंड को हिलाते हुए कहा।
रजनी ने लंड के नीचे वाले हिस्से को चाटते हुए कहा, “माँ… आप ऊपर चूसो… मैं नीचे वाली जगह चाटती हूँ… देखिए कितना सारा वीर्य और हमारी चूत का रस मिला हुआ है…”
गीता ने लंड को मुँह से निकालकर रजनी को देते हुए बोली, “ले बेटी… तू भी चूस… अपनी माँ की चूत का रस और गुरुजी का वीर्य दोनों का स्वाद ले।”
रजनी ने लंड मुंह में लेकर गहरी चूसनी ली और बोली, “मम्मी… स्वाद तो बहुत अच्छा है… नमकीन और थोड़ा मीठा… मैं पूरा साफ कर दूँगी…”
दोनों माँ-बेटी बारी-बारी से बाबा का लंड चूस रही थीं। कभी गीता पूरा लंड मुँह में ले लेती, कभी रजनी। दोनों की जीभें लंड पर आपस में टकरा रही थीं।
गीता ने लंड चूसते हुए कहा, “बाबाजी… आपका लंड अभी भी इतना सख्त है… हमारी चूत फाड़ने के बाद भी…”
रजनी ने लंड के अंडकोष चूसते हुए बोली, “माँ… यह बाजी का नहीं गुरूजी का लंड हो......बाबाजी तो मात्र एक साधन है....देखो… गुरुजी के अंडे भी कितने भरे हुए हैं… मैं इन्हें भी चूस लूँ?”
बाबा ने दोनों के सिर पर हाथ रखकर कहा, “चूसो… दोनों मिलकर साफ करो… आज तुम दोनों ने अच्छा काम किया है। गुगुजी काफी खुश होंगे।”
गीता और रजनी ने मिलकर बाबा का लंड अच्छी तरह चाटा और साफ़ किया। उनके होंठ और दाढ़ी बाबा के वीर्य और उनकी अपनी चूत के रस से चमक रहे थे। मैत्री की प्रस्तुति।
गीता ने आखिरी बूँद चाटी और कहा, "अब यह पूरी तरह साफ़ है, बाबाजी... हम दोनों ने आपका प्रसाद पी लिया है। आपके प्रसाद की कद्र करते हुए, हम दोनों ने इसे अपने पेट में डाल लिया है, आपकी कृपा बनी रहे।"
रजनी शर्मा गई और उसने बाबाजी का लंड छोड़ दिया और अपनी माँ के पास झुककर धीरे से कहा, "माँ... अगली बार, हम तीनों एक साथ खेलेंगे, है ना? मुझे बाबाजी का लंड बहुत पसंद है। उनका प्रसाद कमाल का है। अगली बार मैं यह प्रसाद अपने पेट में भर लूँगी।"
गीता मुस्कुराई और रजनी का माथा चूमा, "हाँ, बेटी... अब हम तीनों एक परिवार की तरह हैं... जो गुरुजी चाहेंगे वही होगा। और ऐसा ही होगा। हमें बस अपने छेद तैयार रखने हैं। हमें कैसे पता चलेगा कि गुरुजी का लंड कब खड़ा होगा?" गीता प्यार से बाबाजी का लंड रगड़ रही थी।
“चलो बेटी, मैं तुम्हे लेप बना के देती हूँ, जिससे तुम्हारी चूत और गांड से निकलने वाला खून बंद हो जाएगा। और तुम्हें थोड़ा आराम भी मिलेगा। सच कहूँ तो मुझे भी लगाना पड़ेगा।” फनलव द्वारा एडिटेड।
रजनी ने गीता की गांड देखी और कहा, “अरे माँ, गुरुजी ने तुम्हारी गांड से भी खून निकाला है। मैंने अपनी गांड नहीं देखी है, पर उसमें तुम्हारी गांड से ज़्यादा खून निकला होगा।” उसने अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद पर रखी और थोड़ी अंदर सरकाई, और जब उसे एहसास हुआ कि बाबाजी के लंड ने बहुत बड़ा चमत्कार किया है।
गीता ने भी अपनी बेटी की गांड देखी और शरमा गई। उसने मन में कहा: अरे बाप रे, बाबाजी के लंड ने इसकी गांड फाड़ दी है। खून तो ठीक है...पर इसकी गांड का छेद बहुत ज़्यादा चौड़ा हो गया है। वह अंदर का हिस्सा भी देख सकती है।"
दोनों ने एक-दूसरे के गांड के छेद देखकर मलकाती मुस्कराहट के साथ नंगी ही बाहर की ओर चली। गांड और चूत पर ज़्यादा मार पड़ने की वजह से दोनों लंगड़ाकर चल रही थीं। लेकिन दोनों खुश भी तो थीं। दोनों एक दुसरे के सहारे कमरे से बाहर निकल औई। जब वह निकल रही थी तब भी उनकी गांड से थोड़ी बुँदे खून की निकल रही थी। जो अपने अपने हाथो से पोछ रही थी। लेकिन उनके चहरे पर कोई दर्द के भाव नहीं थे।
बाबा उन दोनों की हरकत और उनके हिलते हुए चूतड़ों के कूल्हों को देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहे थे और अपने लंड पर गर्व महसूस कर रहे थे...
************************************
आज के लिए बस यही तक दोस्तों।
फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ।
मैत्री का जय भारत।




![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)