31-05-2026, 12:59 PM
बाबा दरवाजे पर खड़े-खड़े मुस्कुरा रहे थे। उनकी नजर दोनों नंगी माँ-बेटी पर टिकी हुई थी।
गीता रजनी की चूत को जोर-जोर से चाट रही थी, जबकि रजनी अपनी माँ की चूत में जीभ घुसाए हुए थी। दोनों की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।
बाबा ने गहरी आवाज में कहा,
“वाह… क्या दृश्य है! माँ अपनी बेटी की चूत चूस रही है और बेटी माँ की चूत को चाट रही है। गुरुजी बहुत प्रसन्न होंगे।” मैत्री की पेशकश।
दोनों चौंककर अलग होने लगीं, लेकिन बाबा ने तुरंत टोका,
“रुक जाओ! शर्माने की कोई जरूरत नहीं। आज से तुम दोनों को एक-दूसरे की चूत का स्वाद लेना ही है।”
गीता शर्मा कर बोली, “बाबाजी… हम तो बस…”
बाबा ने मुस्कुराते हुए पास आकर रजनी की नंगी गांड पर थपकी दी और बोले,
“चुप! अब बोलने की बजाय चूसने का काम करो। रजनी… अपनी माँ की चूत को और जोर से चूस। जीभ अंदर डालकर पूरा रस पी।”
रजनी शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसने माँ की चूत पर मुँह रख दिया और जोर-जोर से चूसने लगी। “चट… चट… चट…”
गीता सिसकारी भरते हुए बोली,
“आह्ह्ह… बेटी… और जोर से… माँ की चूत को अच्छे से चूस ले… हाँ… जीभ अंदर डाल… आह्ह्ह!” मैत्री रचित कहानी।
बाबा ने गीता की पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा,
“गीता… तू भी अपनी बेटी की छोटी-सी चूत को मत छोड़। उसकी टाइट चूत में अपनी दो उँगलियाँ डाल और जोर से अंदर-बाहर कर। दिखा अपनी बेटी को कि माँ कितनी गंदी हो सकती है।”
गीता ने रजनी की चूत में दो उँगलियाँ घुसा दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगी। रजनी की सिसकारियाँ बढ़ गईं,
“माँ… आह्ह्ह… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… हाँ… ऐसे… मुझे बहुत मजा आ रहा है माँ!”
बाबा ने रजनी के बाल पकड़कर उसका मुँह अपनी माँ की चूत पर और जोर से दबाया और बोले,
“चूस बेटी… अपनी माँ का पूरा चूत का पानी पी ले। देख… कितना रस निकल रहा है तेरी माँ की चूत से।”
रजनी ने मुँह भरकर चूसते हुए कहा,
“माँ… आपकी चूत का पानी बहुत मीठा है… मैं पूरा पी जाऊँगी… चूसूँगी… चाटूँगी…”
गीता हाँफते हुए बोली,
“बेटी… तू भी मेरी चूत को मत छोड़… जीभ अंदर घुसा… हाँ… और गहरी… आह्ह्ह! बाबाजी… देखिए मेरी बेटी कितनी अच्छी चूत चाट रही है।” लेखिका मैत्री।
बाबा ने अब खुद बीच में आकर रजनी की गांड पर थपकी दी और बोले,
“अब पोजीशन बदलो। गीता… लेट जा। रजनी… अपनी माँ के ऊपर 69 में बैठ जा। दोनों एक साथ एक-दूसरे की चूत चाटो।”
दोनों ने तुरंत आज्ञा मानी। गीता लेट गई और रजनी उसके ऊपर 69 पोजीशन में बैठ गई। अब माँ की चूत रजनी के मुँह के नीचे थी और रजनी की चूत गीता के मुँह के ऊपर।
दोनों ने एक साथ चूसना शुरू कर दिया।
रजनी: “माँ… आपकी चूत कितनी गर्म है… मैं पूरी चूस लूँगी… आपका सारा रस पी जाऊँगी।”
गीता: “हाँ बेटी… तू भी मेरी चूत को खा जा… और अपनी छोटी चूत मेरे मुँह में दे… मैं तेरी चूत को फाड़कर चूसूँगी… आह्ह्ह… कितनी टाइट और मीठी है तेरी चूत!”
बाबा खड़े होकर दोनों को देख रहे थे। उन्होंने अपनी धोती सरकाई, अपना मोटा खड़ा लंड बाहर निकाला और रजनी की गांड पर हल्का सा थपका दिया।
“बहुत अच्छा… अब दोनों जोर से चूसो। गीता, अपनी बेटी की चूत में तीन उँगलियाँ डाल। रजनी, अपनी माँ की चूत में जीभ घुसाकर चूस।”
रजनी ने माँ की चूत में जीभ और गहरी डाली और बोली,
“माँ… आपकी चूत में से बहुत पानी निकल रहा है… मैं पी रही हूँ… पूरा पी रही हूँ…”
गीता ने रजनी की चूत में तीन उँगलियाँ डालकर तेजी से अंदर-बाहर करते हुए कहा,
“बेटी… तेरी चूत तो अभी भी बहुत टाइट है… गुरुजी ने फाड़ी तो थी, फिर भी कितनी प्यारी है। माँ इसे और फाड़ेगी… जोर से… हाँ… ले… ले मेरी उँगलियाँ…”
दोनों माँ-बेटी अब पूरी तरह गंदी हो चुकी थीं। उनके मुँह चूत के रस से चमक रहे थे। सिसकारियाँ, चट-चट की आवाजें और गंदे-गंदे शब्द कमरे में गूँज रहे थे।
बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा, “बहुत अच्छा… आज तुम दोनों ने साबित कर दिया कि तुम गुरुजी की सच्ची चेलियाँ हो। अब आगे और भी गंदा खेल खेलेंगे… लेकिन अभी तो दोनों अपना-अपना रस एक-दूसरे को पिला दो।”
रजनी और गीता दोनों एक-दूसरे की चूत चाटते-चूसते हुए और जोर-जोर से कराह रही थीं।
गीता: “बेटी… मैं झड़ने वाली हूँ… तू भी चूस… हाँ… और तेज…” फनलवर संपादित।
रजनी: “माँ… मैं भी… आह्ह्ह… माँ… मैं भी झड़ रही हूँ… आपकी उँगलियाँ… बहुत जोर से…”
दोनों माँ-बेटी लगभग एक साथ झड़ गईं। उनके शरीर काँप रहे थे और चूत से रस बह रहा था।
बाबा खड़े होकर पूरा मजा ले रहे थे…
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जुड़े रहिये दोस्तों.
Maitri.
गीता रजनी की चूत को जोर-जोर से चाट रही थी, जबकि रजनी अपनी माँ की चूत में जीभ घुसाए हुए थी। दोनों की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।
बाबा ने गहरी आवाज में कहा,
“वाह… क्या दृश्य है! माँ अपनी बेटी की चूत चूस रही है और बेटी माँ की चूत को चाट रही है। गुरुजी बहुत प्रसन्न होंगे।” मैत्री की पेशकश।
दोनों चौंककर अलग होने लगीं, लेकिन बाबा ने तुरंत टोका,
“रुक जाओ! शर्माने की कोई जरूरत नहीं। आज से तुम दोनों को एक-दूसरे की चूत का स्वाद लेना ही है।”
गीता शर्मा कर बोली, “बाबाजी… हम तो बस…”
बाबा ने मुस्कुराते हुए पास आकर रजनी की नंगी गांड पर थपकी दी और बोले,
“चुप! अब बोलने की बजाय चूसने का काम करो। रजनी… अपनी माँ की चूत को और जोर से चूस। जीभ अंदर डालकर पूरा रस पी।”
रजनी शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसने माँ की चूत पर मुँह रख दिया और जोर-जोर से चूसने लगी। “चट… चट… चट…”
गीता सिसकारी भरते हुए बोली,
“आह्ह्ह… बेटी… और जोर से… माँ की चूत को अच्छे से चूस ले… हाँ… जीभ अंदर डाल… आह्ह्ह!” मैत्री रचित कहानी।
बाबा ने गीता की पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा,
“गीता… तू भी अपनी बेटी की छोटी-सी चूत को मत छोड़। उसकी टाइट चूत में अपनी दो उँगलियाँ डाल और जोर से अंदर-बाहर कर। दिखा अपनी बेटी को कि माँ कितनी गंदी हो सकती है।”
गीता ने रजनी की चूत में दो उँगलियाँ घुसा दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगी। रजनी की सिसकारियाँ बढ़ गईं,
“माँ… आह्ह्ह… जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… हाँ… ऐसे… मुझे बहुत मजा आ रहा है माँ!”
बाबा ने रजनी के बाल पकड़कर उसका मुँह अपनी माँ की चूत पर और जोर से दबाया और बोले,
“चूस बेटी… अपनी माँ का पूरा चूत का पानी पी ले। देख… कितना रस निकल रहा है तेरी माँ की चूत से।”
रजनी ने मुँह भरकर चूसते हुए कहा,
“माँ… आपकी चूत का पानी बहुत मीठा है… मैं पूरा पी जाऊँगी… चूसूँगी… चाटूँगी…”
गीता हाँफते हुए बोली,
“बेटी… तू भी मेरी चूत को मत छोड़… जीभ अंदर घुसा… हाँ… और गहरी… आह्ह्ह! बाबाजी… देखिए मेरी बेटी कितनी अच्छी चूत चाट रही है।” लेखिका मैत्री।
बाबा ने अब खुद बीच में आकर रजनी की गांड पर थपकी दी और बोले,
“अब पोजीशन बदलो। गीता… लेट जा। रजनी… अपनी माँ के ऊपर 69 में बैठ जा। दोनों एक साथ एक-दूसरे की चूत चाटो।”
दोनों ने तुरंत आज्ञा मानी। गीता लेट गई और रजनी उसके ऊपर 69 पोजीशन में बैठ गई। अब माँ की चूत रजनी के मुँह के नीचे थी और रजनी की चूत गीता के मुँह के ऊपर।
दोनों ने एक साथ चूसना शुरू कर दिया।
रजनी: “माँ… आपकी चूत कितनी गर्म है… मैं पूरी चूस लूँगी… आपका सारा रस पी जाऊँगी।”
गीता: “हाँ बेटी… तू भी मेरी चूत को खा जा… और अपनी छोटी चूत मेरे मुँह में दे… मैं तेरी चूत को फाड़कर चूसूँगी… आह्ह्ह… कितनी टाइट और मीठी है तेरी चूत!”
बाबा खड़े होकर दोनों को देख रहे थे। उन्होंने अपनी धोती सरकाई, अपना मोटा खड़ा लंड बाहर निकाला और रजनी की गांड पर हल्का सा थपका दिया।
“बहुत अच्छा… अब दोनों जोर से चूसो। गीता, अपनी बेटी की चूत में तीन उँगलियाँ डाल। रजनी, अपनी माँ की चूत में जीभ घुसाकर चूस।”
रजनी ने माँ की चूत में जीभ और गहरी डाली और बोली,
“माँ… आपकी चूत में से बहुत पानी निकल रहा है… मैं पी रही हूँ… पूरा पी रही हूँ…”
गीता ने रजनी की चूत में तीन उँगलियाँ डालकर तेजी से अंदर-बाहर करते हुए कहा,
“बेटी… तेरी चूत तो अभी भी बहुत टाइट है… गुरुजी ने फाड़ी तो थी, फिर भी कितनी प्यारी है। माँ इसे और फाड़ेगी… जोर से… हाँ… ले… ले मेरी उँगलियाँ…”
दोनों माँ-बेटी अब पूरी तरह गंदी हो चुकी थीं। उनके मुँह चूत के रस से चमक रहे थे। सिसकारियाँ, चट-चट की आवाजें और गंदे-गंदे शब्द कमरे में गूँज रहे थे।
बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा, “बहुत अच्छा… आज तुम दोनों ने साबित कर दिया कि तुम गुरुजी की सच्ची चेलियाँ हो। अब आगे और भी गंदा खेल खेलेंगे… लेकिन अभी तो दोनों अपना-अपना रस एक-दूसरे को पिला दो।”
रजनी और गीता दोनों एक-दूसरे की चूत चाटते-चूसते हुए और जोर-जोर से कराह रही थीं।
गीता: “बेटी… मैं झड़ने वाली हूँ… तू भी चूस… हाँ… और तेज…” फनलवर संपादित।
रजनी: “माँ… मैं भी… आह्ह्ह… माँ… मैं भी झड़ रही हूँ… आपकी उँगलियाँ… बहुत जोर से…”
दोनों माँ-बेटी लगभग एक साथ झड़ गईं। उनके शरीर काँप रहे थे और चूत से रस बह रहा था।
बाबा खड़े होकर पूरा मजा ले रहे थे…
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