28-05-2026, 07:45 PM
मेरे दिमाग में बहुत सारी बातें एक साथ घूम रही थीं।
वो ईमेल 10 - 12 साल पुराना था।
तब फेसबुक-इंस्टा कुछ नहीं था। सब याहू मेल पर होता था।
मैं और अविनाश दोनों बहुत गंदी चैट करते थे — फोटोज़ शेयर करते, कहानियाँ लिखते।
अब Gmail पर शिफ्ट हो चुके थे, जैसे ही कोई “कांड” हो जाता, मैं पूरा चैट डिलीट कर देता।
लेकिन पुरानी याहू आईडी थी।
सही कहूँ तो शादी के बाद से मैंने उसे २-३ साल में शायद ही एक-दो बार खोला हो।
वो पुरानी याद की तरह कहीं खोया हुआ था।
नेहा मेरी गोद में बैठी हुई थी, मेरे लंड को हल्का-हल्का सहला रही थी और मेरी आँखों में देख रही थी।
मैं हिचकिचाते हुए, थोड़ा रुक-रुककर बोला,
सम: “वो... वो ईमेल तो अब पता नहीं...
वो याहू का था ना... बहुत पुराना है... शायद डिलीट हो गया होगा...”
नेहा ने मेरी आँखों से नज़र नहीं हटाई।
उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान आई, लेकिन आँखें गंभीर थीं।
नेहा: “पुराना होने से क्या हुआ?
तुम्हें तो याद होगा ना...
उसके होंठों पर एक हल्की, लेकिन बहुत अर्थपूर्ण मुस्कान आ गई।
हम दोनों IT में थे, इसलिए नेहा को भी अच्छे से पता था कि पुराना याहू ईमेल पासवर्ड रिकवर करना कोई बड़ी बात नहीं है।
मेरे दिमाग में दो हिस्से लड़ रहे थे।
एक हिस्सा चिल्ला रहा था — “मत दिखा... मत ले जा उस तरफ।”
क्योंकि मुझे खुद नहीं पता था कि उस पुराने याहू ईमेल में क्या-क्या लिखा था।
क्या मैंने गर्गी की कोई बहुत गंदी फोटो भेजी थी?
क्या मैंने अविनाश को गर्गी के बारे में कुछ ऐसा लिखा था जो नेहा को कभी नहीं बताना चाहिए?
मैं काफी नशे में था — बेकार आदमी के साथ पी हुई व्हिस्की अभी भी सिर में घूम रही थी। नेहा सिर्फ़ एक पैग पीकर थी, इसलिए वो अभी भी हल्का-हल्का नशे थी।
दूसरा हिस्सा, जो मेरे लंड के साथ था, वो कह रहा था —
“ये मौका है सैम...
पिछले कई महीनों बाद नेहा आज इस mood में है।
तेरी गोद में बैठी है, चिपकी हुई है, किस कर रही है, लंड सहला रही है।
ये Ayan वाले धोखे से बाहर निकलने का पहला कदम हो सकता है।
अगर इस कदम के लिए पुरानी ईमेल वाली कुर्बानी देनी पड़े तो... दे दे।”
नेहा मेरे बहुत करीब थी।
उसके गर्म होंठों से मेरे मुँह पर हल्की-हल्की गर्म हवा पड़ रही थी।
बीच-बीच में वो मुझे हल्का-हल्का किस कर रही थी — होंठों पर, गाल पर, गर्दन पर।
उसकी छाती मेरी छाती से दब रही थी।
मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा था।
मुझे एहसास हो रहा था कि आज शायद बहुत दिनों बाद हम सेक्स कर सकते हैं।
ये मौका मैं खोना नहीं चाहता था।
नेहा ने मेरी शर्ट के दो बटन खोल दिए।
उसकी नरम, गर्म उँगलियाँ मेरे सीने पर घूम रही थीं।
फिर वो धीरे-धीरे झुकी और मेरे सीने पर हल्के-हल्के किस करने लगी।
हर किस के साथ उसकी गर्म साँस मेरी त्वचा पर पड़ रही थी।
हम दोनों सोफे पर थे।
वो मेरी गोद में बैठी हुई थी, मेरे लंड को अभी भी हल्का-हल्का सहला रही थी।
मैं कुछ बोलने वाला था, लेकिन वो मेरी आँखों में देखकर पहले ही बोल पड़ी,
नेहा: “बोलो ना... वो ईमेल खुल सकता है ना?”
मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा,
सम: “बेबी... वो मैंने बहुत दिनों से यूज़ नहीं किया है।
हो सकता है उसमें कुछ ऐसा हो... जो तुम्हें पसंद न आए...”
नेहा ने तुरंत अपनी उँगली मेरे होंठों पर रख दी।
नेहा: “श्श्श...”
फिर वो मेरी आँखों में गहरी नज़र डालकर बोली,
नेहा: “हम दोनों के बीच ऐसा कुछ नहीं होगा।
वैसे भी मैंने बहुत सोच लिया है।
मैंने decide कर लिया है कि अब मैं बाहर किसी के साथ कुछ नहीं करूँगी।
किसी के भी साथ।”
उसने मेरे सीने पर एक और किस किया, फिर मेरे कान में धीरे से कहा,
नेहा: “तुमने मुझे कभी force नहीं किया... और आगे भी मत करना।
मैं जानती हूँ।
लेकिन जो अयान के साथ हुआ... उससे हमारी सेक्स लाइफ खराब नहीं होनी चाहिए।
हम वो सब कर सकते हैं...
बस उस एक्साइटमेंट को जारी रखने के लिए मैंने पूछा था।
वरना कोई force नहीं है।”
नेहा ने मेरी शर्ट का एक और बटन खोला।
उसकी गर्म, नरम जीभ की नोक मेरे nipple पर घूम रही थी — बहुत धीरे-धीरे, गीला करते हुए।
हर बार जब वो चूसती, मेरे शरीर में झनझनाहट दौड़ जाती।
मैं हाँफते हुए बोला,
सम: “चलो... देखते हैं वो ईमेल खुलता है या नहीं...”
जैसे ही मैंने ये कहा, नेहा की आँखों में एक झटका सा उत्तेजना भरी चमक आई।
वो तुरंत मेरी गोद से उठी, हिलती-डुलती हुई लैपटॉप ले आने गई।
उसकी शॉर्ट्स में उसकी गोरी जाँघें और टैंक टॉप में उसके स्तन हिल रहे थे।
मैं लैपटॉप खोलकर पुरानी याहू आईडी में लॉगिन करने की कोशिश करने लगा।
नेहा पीछे खड़ी मेरे कंधे पर हाथ रखे हुए देख रही थी।
15-20 मिनट की मेहनत के बाद आखिरकार वो पुराना अकाउंट खुल गया।
हजारों ईमेल्स एक साथ सामने आ गए।
नेहा ने झट से लैपटॉप मेरे हाथ से ले लिया।
वो सोफे पर बैठ गई और स्क्रोल करने लगी — बहुत पीछे, शुरुआत की तरफ़।
जैसे वो सब कुछ, एक-एक करके देखना चाहती हो।
उसका चेहरा स्क्रीन की रोशनी में चमक रहा था।
उसकी साँसें थोड़ी तेज़ हो गई थीं।
नेहा: (बिना मेरी तरफ़ देखे, स्क्रोल करते हुए)
“ये... 12 साल पुराना है...
यहाँ से शुरू करते हैं...”
वो स्क्रोल करती जा रही थी।
हर पुरानी डेट पर रुक रही थी।
मैं उसके बगल में बैठा था, मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
कुछ पुरानी चैट्स खुलने लगीं —
अविनाश और मेरी बातें...
गर्गी की फोटोज़...
उसके बारे में लिखी गई गंदी-गंदी लाइन्स...
नेहा चुपचाप पढ़ रही थी।
उसका चेहरा भावहीन था, लेकिन उसकी गर्दन पर नसें उभर आई थीं।
मैं चुपचाप बैठा था।
नशा अभी भी था, लेकिन अब डर भी साथ में था।
नेहा ने एक पुरानी ईमेल खोली।
उसमें गर्गी की वो फोटो थी — टाइट ब्लैक टॉप में, जिसमें उसके स्तन बहुत उभरे हुए दिख रहे थे।
नेहा ने फोटो को ज़ूम किया और धीरे से बोली,
नेहा: “ये... दीदी है ना?”
(वो गर्गी को हमेशा “दीदी” ही बोलती थी)
मैंने चुपचाप हाँ में सिर हिला दिया।
अभी तक जितने भी ईमेल खुल रहे थे, उनमें मेरी तरफ से ज़्यादातर फोटोज़ थीं — गर्गी की।
अविनाश के रिप्लाई में सिर्फ़ गंदी-गंदी टिप्पणियाँ।
फिर एक ईमेल खुला जिसमें अविनाश ने अपना लंड की फोटो भेजी थी।
पुरानी कैमरे की फोटो थी, क्वालिटी खराब, लेकिन साइज़ और शेप साफ़ दिख रहा था।
उसके बाद कुछ और फोटोज़ — उसके निकले हुए वीर्य की।
किसी कपड़े पर, किसी ब्रा पर...
नेहा ने एक फोटो को ज़ूम किया — सफेद वीर्य एक ब्रा के कप पर फैला हुआ था।
नेहा: (धीमी लेकिन sharp आवाज़ में)
“क्या ये... दीदी की ब्रा है?”
मैंने फिर चुपचाप हाँ में सिर हिला दिया।
नेहा कुछ पल तक स्क्रीन को घूरती रही।
फिर उसने अगला ईमेल खोला।
इस बार अविनाश ने लिखा था — “यार तेरी बहन की गांड तो फाड़नी है... इतनी टाइट लग रही है... तू इजाजत दे तो मैं इसे अपना बना लूँ...”
नेहा ने ईमेल पढ़ा, फिर मेरी तरफ़ मुड़ी।
उसकी आँखें लाल हो रही थीं, लेकिन गुस्सा नहीं — एक अजीब सी उत्तेजना और हैरानी का मिश्रण था।
नेहा: “तो तुम अपनी बहन की फोटोज़ भेजकर...
अपने दोस्त से उसकी चुदाई की बातें कर रहे थे?”
मैंने कुछ नहीं कहा।
मेरा गला सूख रहा था।
नेहा ने लैपटॉप को थोड़ा और करीब खींचा और स्क्रोल करती रही।
हर ईमेल के साथ उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
वो मेरे बगल में बैठी थी, लेकिन अब उसका शरीर मेरे से थोड़ा अलग हो गया था।
नेहा सब जानती थी।
मैंने पहले ही उसे अविनाश वाली बातें, गर्गी वाली फोटोज़ और चैट्स के बारे में बता रखा था।
लेकिन आज वो सब कुछ दोबारा देख रही थी।
खुद पढ़ रही थी।
खुद महसूस कर रही थी।
मैं ईमेल नहीं देख रहा था।
मैं नेहा को देख रहा था।
उसके चेहरे की चमक, उसकी साँसों की रफ्तार, उसकी आँखों में आ रही लालिमा — सब कुछ।
जब कोई खास ईमेल या फोटो आती, तो वो मेरी तरफ़ देखती।
कभी हल्का सा मुक्का मेरे कंधे पर मारती, कभी शर्म से होंठ काटती, तो कभी अपनी जाँघें कस के दबा लेती और चूत को हल्का-हल्का रगड़ने लगती।
एक ईमेल में वो फोटो थी — गर्गी सो रही थी।
उसकी स्कर्ट ऊपर चढ़ी हुई थी।
काली पैंटी साफ़ दिख रही थी।
गर्गी की मोटी, गोरी जाँघें और पैंटी में उसके नितंबों की आउटलाइन।
नेहा ने फोटो को ज़ूम किया।
काफी देर तक देखती रही।
फिर मेरी तरफ़ मुड़ी।
उसकी साँसें तेज़ थीं।
नेहा काफी देर तक स्क्रीन को घूरती रही।
उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं।
फिर अचानक उसने लैपटॉप को साइड में रख दिया और मेरी तरफ़ मुड़ी।
उसने मेरे बालों को कस के पकड़ लिया — बहुत ज़ोर से।
बहुत दिनों बाद उसकी इस वाली पकड़ महसूस हो रही थी।
वो मुझे अपने होंठों के पास ले आई।
मैंने सोचा वो किस करेगी, लेकिन वो सिर्फ़ १० सेकंड के लिए मेरे होंठों को अपने होंठों से छूकर हट गई।
फिर दाँतों से मेरे निचले होंठ को काटा — हल्का-सा, लेकिन कामुक तरीके से।
नेहा: (बहुत धीमी, भारी आवाज़ में) “भैंचोद...”
उसकी आँखों में पुरानी वाली शरारत और भूख दोनों लौट आई थी।
फिर उसने मेरे सिर पर दबाव डाला और मुझे नीचे खींच लिया — अपनी चूत की तरफ़।
वो मेरे चेहरे को अपनी शॉर्ट्स के ऊपर से रगड़ने लगी।
ज़ोर-ज़ोर से।
ऊपर-नीचे, आगे-पीछे।
उसकी गर्मी और नमी दोनों शॉर्ट्स के पतले कपड़े के ऊपर से साफ़ महसूस हो रही थी।
मेरे बालों की जड़ों में तेज़ दर्द हो रहा था, लेकिन मैं कुछ नहीं बोला।
बहुत दिनों बाद नेहा का ये रूप वापस आया था — वो पुरानी, भूखी, dominant नेहा।
मैं सब सहने को तैयार था।
नेहा ने अपनी जाँघें मेरे गालों के दोनों तरफ़ कस लीं और मेरे मुँह पर और ज़ोर से रगड़ने लगी।
उसकी साँसें अब हाँफने जैसी हो गई थीं।
उसकी शॉर्ट्स अब पूरी तरह भीग चुकी थीं।
मैं जीभ निकालकर शॉर्ट्स के ऊपर से ही उसकी चूत को चाटने लगा।
नेहा और ज़ोर से कराह उठी।
नेहा ने अचानक लैपटॉप फिर से उठा लिया और स्क्रोल करना शुरू कर दिया।
वो और पुरानी ईमेल्स देख रही थी।
मैंने इंतज़ार नहीं किया।
मैंने उसके शॉर्ट्स का वेस्टबैंड पकड़ा और एक झटके में नीचे खींच दिया।
नेहा ने हल्का सा कूल्हा उठाकर मदद कर दी।
अब वो सोफे पर आधी लेटी, आधी बैठी हुई थी।
एक पैर ज़मीन पर, दूसरा सोफे पर फैला हुआ।
उसकी प्यारी, गुलाबी चूत मेरे सामने पूरी तरह खुली हुई थी — पूरी तरह भीगी, चमकती हुई, रस से लथपथ।
मुझे महीनों बाद उसकी चूत की गंध आई — वो मीठी-नमकीन, उत्तेजक गंध।
मैंने बिना एक सेकंड वेस्ट किए अपना मुँह आगे बढ़ाया और अपनी जीभ उसकी चूत पर फेर दी।
नेहा ने एक लंबी आह भरी।
नेहा: “आह्ह्ह... हाँ...”
वो लैपटॉप को एक हाथ में थामे हुए थी, दूसरा हाथ मेरे बालों में।
मैंने अपनी जीभ से उसकी पूरी चूत चाटनी शुरू कर दी — नीचे से ऊपर तक, क्लिट पर घुमाते हुए, फिर अंदर डालने की कोशिश करते हुए।
नेहा की जाँघें काँप रही थीं।
वो स्क्रीन पर ईमेल पढ़ रही थी, लेकिन उसकी साँसें अब पूरी तरह अनियंत्रित हो चुकी थीं।
मैंने दोनों हाथों से उसकी जाँघें फैलाईं और अपना मुँह और गहराई में लगा दिया।
उसका गाढ़ा, गर्म रस मेरी जीभ पर, मेरे होंठों पर फैल रहा था।
मैं चूस रहा था, चाट रहा था, जीभ अंदर डाल रहा था।
नेहा ने लैपटॉप को थोड़ा और करीब खींचा, लेकिन उसकी आँखें बार-बार बंद हो रही थीं।
उसने मेरे बालों को और कस के पकड़ लिया और अपनी चूत को मेरे मुँह पर और ज़ोर से रगड़ने लगी।
मैं नेहा की चूत को वैसा चाट रहा था, जैसे कोई आदमी अपने सबसे पसंदीदा खाने को बहुत दिनों बाद मिला हो।
भूखा, लालची और बिना रुके।
मेरी जीभ उसकी पूरी चूत पर घूम रही थी — क्लिट को चूसता, अंदर डालता, फिर नीचे तक चाटता।
नेहा बीच-बीच में लैपटॉप मुझे दिखा रही थी।
कभी दीदी की फोटो, कभी अविनाश की गंदी टिप्पणी।
जितना आगे वो स्क्रोल करती, फोटोज़ उतनी साफ़ होती जा रही थीं।
एक ईमेल में मैंने दीदी की फेस्टिवल वाली फोटोज़ भेजी थीं — वो तैयार होकर खड़ी थी।
अविनाश ने रिप्लाई में लिखा था —
“साली को मैं स्टेप बाय स्टेप नंगी करूँगा...
पहले ब्लाउज, फिर पेटticoat...
तेरे घर के ही एक कमरे में ले जाकर चोदूँगा...
तेरा पूरा परिवार बाहर बैठा रहेगा...
दीदी की चुदाई की चीखें पूरे घर में गूँजेंगी...
तेरा भाई बोलेगा भी कि रोकना चाहिए...
लेकिन दीदी चुदवाती रहेगी...”
नेहा ये पढ़कर काँप उठी।
उसकी जाँघें मेरे चेहरे को दबाने लगीं।
सका शरीर अचानक सख्त हो गया।
वो मेरे बालों को कस के खींचने लगी और अपनी चूत को मेरे मुँह पर ज़ोर-ज़ोर से रगड़ने लगी।
एक जोरदार झटके के साथ वो झड़ गई।
बहुत सारा गर्म, गाढ़ा रस मेरे मुँह में, मेरी जीभ पर, मेरी ठोड़ी पर बहने लगा।
मैंने सब चाट लिया — बिना एक बूँद गिराए।
थोड़ी देर बाद जब वो शांत हुई, तो मैं उठने लगा।
लेकिन नेहा ने अपने पैरों से मेरे कंधों को पकड़ लिया और मुझे ज़ोर से नीचे दबाया।
वो अभी भी आधी लेटी, आधी बैठी हुई थी।
नेहा: (भारी, कामुक आवाज़ में)
“कहाँ जा रहा है?
आज तू बस चूत चाटेगा...
बैठ जा ज़मीन पर...”
मैं ज़मीन पर बैठ गया।
नेहा ने अपने दोनों पैर मेरे कंधों पर रख दिए।
उसकी चूत अब मेरे मुँह के बिल्कुल सामने थी — पूरी तरह खुली, लाल और रस से चमकती हुई।
नेहा: (मेरे बालों को फिर से पकड़ते हुए, मुस्कुराते हुए)
“भैंचोद..."
आज मेरा दिल बहुत खुश था।
पहले तो बेकार आदमी के साथ जो कुछ हुआ — वो गंदा, गुप्त और उत्तेजक सिलसिला।
फिर आज... बहुत दिनों बाद मेरी पुरानी dominating नेहा वापस लौट आई थी।
वो वाली नेहा, जो मेरे बाल खींचती है, मुझे अपनी चूत पर रगड़ती है और मुझे अपना गुलाम बना लेती है।
उस रात मैंने उसे 2-3 बार झड़वाया।
नेहा लैपटॉप को एक हाथ में थामे हुए थी।
भले ही उसकी जाँघें काँप रही थीं, साँसें हाँफ रही थीं, शरीर पसीने से तर था — वो लैपटॉप हाथ से जाने नहीं दे रही थी।
वो ईमेल 10 - 12 साल पुराना था।
तब फेसबुक-इंस्टा कुछ नहीं था। सब याहू मेल पर होता था।
मैं और अविनाश दोनों बहुत गंदी चैट करते थे — फोटोज़ शेयर करते, कहानियाँ लिखते।
अब Gmail पर शिफ्ट हो चुके थे, जैसे ही कोई “कांड” हो जाता, मैं पूरा चैट डिलीट कर देता।
लेकिन पुरानी याहू आईडी थी।
सही कहूँ तो शादी के बाद से मैंने उसे २-३ साल में शायद ही एक-दो बार खोला हो।
वो पुरानी याद की तरह कहीं खोया हुआ था।
नेहा मेरी गोद में बैठी हुई थी, मेरे लंड को हल्का-हल्का सहला रही थी और मेरी आँखों में देख रही थी।
मैं हिचकिचाते हुए, थोड़ा रुक-रुककर बोला,
सम: “वो... वो ईमेल तो अब पता नहीं...
वो याहू का था ना... बहुत पुराना है... शायद डिलीट हो गया होगा...”
नेहा ने मेरी आँखों से नज़र नहीं हटाई।
उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान आई, लेकिन आँखें गंभीर थीं।
नेहा: “पुराना होने से क्या हुआ?
तुम्हें तो याद होगा ना...
उसके होंठों पर एक हल्की, लेकिन बहुत अर्थपूर्ण मुस्कान आ गई।
हम दोनों IT में थे, इसलिए नेहा को भी अच्छे से पता था कि पुराना याहू ईमेल पासवर्ड रिकवर करना कोई बड़ी बात नहीं है।
मेरे दिमाग में दो हिस्से लड़ रहे थे।
एक हिस्सा चिल्ला रहा था — “मत दिखा... मत ले जा उस तरफ।”
क्योंकि मुझे खुद नहीं पता था कि उस पुराने याहू ईमेल में क्या-क्या लिखा था।
क्या मैंने गर्गी की कोई बहुत गंदी फोटो भेजी थी?
क्या मैंने अविनाश को गर्गी के बारे में कुछ ऐसा लिखा था जो नेहा को कभी नहीं बताना चाहिए?
मैं काफी नशे में था — बेकार आदमी के साथ पी हुई व्हिस्की अभी भी सिर में घूम रही थी। नेहा सिर्फ़ एक पैग पीकर थी, इसलिए वो अभी भी हल्का-हल्का नशे थी।
दूसरा हिस्सा, जो मेरे लंड के साथ था, वो कह रहा था —
“ये मौका है सैम...
पिछले कई महीनों बाद नेहा आज इस mood में है।
तेरी गोद में बैठी है, चिपकी हुई है, किस कर रही है, लंड सहला रही है।
ये Ayan वाले धोखे से बाहर निकलने का पहला कदम हो सकता है।
अगर इस कदम के लिए पुरानी ईमेल वाली कुर्बानी देनी पड़े तो... दे दे।”
नेहा मेरे बहुत करीब थी।
उसके गर्म होंठों से मेरे मुँह पर हल्की-हल्की गर्म हवा पड़ रही थी।
बीच-बीच में वो मुझे हल्का-हल्का किस कर रही थी — होंठों पर, गाल पर, गर्दन पर।
उसकी छाती मेरी छाती से दब रही थी।
मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा था।
मुझे एहसास हो रहा था कि आज शायद बहुत दिनों बाद हम सेक्स कर सकते हैं।
ये मौका मैं खोना नहीं चाहता था।
नेहा ने मेरी शर्ट के दो बटन खोल दिए।
उसकी नरम, गर्म उँगलियाँ मेरे सीने पर घूम रही थीं।
फिर वो धीरे-धीरे झुकी और मेरे सीने पर हल्के-हल्के किस करने लगी।
हर किस के साथ उसकी गर्म साँस मेरी त्वचा पर पड़ रही थी।
हम दोनों सोफे पर थे।
वो मेरी गोद में बैठी हुई थी, मेरे लंड को अभी भी हल्का-हल्का सहला रही थी।
मैं कुछ बोलने वाला था, लेकिन वो मेरी आँखों में देखकर पहले ही बोल पड़ी,
नेहा: “बोलो ना... वो ईमेल खुल सकता है ना?”
मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा,
सम: “बेबी... वो मैंने बहुत दिनों से यूज़ नहीं किया है।
हो सकता है उसमें कुछ ऐसा हो... जो तुम्हें पसंद न आए...”
नेहा ने तुरंत अपनी उँगली मेरे होंठों पर रख दी।
नेहा: “श्श्श...”
फिर वो मेरी आँखों में गहरी नज़र डालकर बोली,
नेहा: “हम दोनों के बीच ऐसा कुछ नहीं होगा।
वैसे भी मैंने बहुत सोच लिया है।
मैंने decide कर लिया है कि अब मैं बाहर किसी के साथ कुछ नहीं करूँगी।
किसी के भी साथ।”
उसने मेरे सीने पर एक और किस किया, फिर मेरे कान में धीरे से कहा,
नेहा: “तुमने मुझे कभी force नहीं किया... और आगे भी मत करना।
मैं जानती हूँ।
लेकिन जो अयान के साथ हुआ... उससे हमारी सेक्स लाइफ खराब नहीं होनी चाहिए।
हम वो सब कर सकते हैं...
बस उस एक्साइटमेंट को जारी रखने के लिए मैंने पूछा था।
वरना कोई force नहीं है।”
नेहा ने मेरी शर्ट का एक और बटन खोला।
उसकी गर्म, नरम जीभ की नोक मेरे nipple पर घूम रही थी — बहुत धीरे-धीरे, गीला करते हुए।
हर बार जब वो चूसती, मेरे शरीर में झनझनाहट दौड़ जाती।
मैं हाँफते हुए बोला,
सम: “चलो... देखते हैं वो ईमेल खुलता है या नहीं...”
जैसे ही मैंने ये कहा, नेहा की आँखों में एक झटका सा उत्तेजना भरी चमक आई।
वो तुरंत मेरी गोद से उठी, हिलती-डुलती हुई लैपटॉप ले आने गई।
उसकी शॉर्ट्स में उसकी गोरी जाँघें और टैंक टॉप में उसके स्तन हिल रहे थे।
मैं लैपटॉप खोलकर पुरानी याहू आईडी में लॉगिन करने की कोशिश करने लगा।
नेहा पीछे खड़ी मेरे कंधे पर हाथ रखे हुए देख रही थी।
15-20 मिनट की मेहनत के बाद आखिरकार वो पुराना अकाउंट खुल गया।
हजारों ईमेल्स एक साथ सामने आ गए।
नेहा ने झट से लैपटॉप मेरे हाथ से ले लिया।
वो सोफे पर बैठ गई और स्क्रोल करने लगी — बहुत पीछे, शुरुआत की तरफ़।
जैसे वो सब कुछ, एक-एक करके देखना चाहती हो।
उसका चेहरा स्क्रीन की रोशनी में चमक रहा था।
उसकी साँसें थोड़ी तेज़ हो गई थीं।
नेहा: (बिना मेरी तरफ़ देखे, स्क्रोल करते हुए)
“ये... 12 साल पुराना है...
यहाँ से शुरू करते हैं...”
वो स्क्रोल करती जा रही थी।
हर पुरानी डेट पर रुक रही थी।
मैं उसके बगल में बैठा था, मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
कुछ पुरानी चैट्स खुलने लगीं —
अविनाश और मेरी बातें...
गर्गी की फोटोज़...
उसके बारे में लिखी गई गंदी-गंदी लाइन्स...
नेहा चुपचाप पढ़ रही थी।
उसका चेहरा भावहीन था, लेकिन उसकी गर्दन पर नसें उभर आई थीं।
मैं चुपचाप बैठा था।
नशा अभी भी था, लेकिन अब डर भी साथ में था।
नेहा ने एक पुरानी ईमेल खोली।
उसमें गर्गी की वो फोटो थी — टाइट ब्लैक टॉप में, जिसमें उसके स्तन बहुत उभरे हुए दिख रहे थे।
नेहा ने फोटो को ज़ूम किया और धीरे से बोली,
नेहा: “ये... दीदी है ना?”
(वो गर्गी को हमेशा “दीदी” ही बोलती थी)
मैंने चुपचाप हाँ में सिर हिला दिया।
अभी तक जितने भी ईमेल खुल रहे थे, उनमें मेरी तरफ से ज़्यादातर फोटोज़ थीं — गर्गी की।
अविनाश के रिप्लाई में सिर्फ़ गंदी-गंदी टिप्पणियाँ।
फिर एक ईमेल खुला जिसमें अविनाश ने अपना लंड की फोटो भेजी थी।
पुरानी कैमरे की फोटो थी, क्वालिटी खराब, लेकिन साइज़ और शेप साफ़ दिख रहा था।
उसके बाद कुछ और फोटोज़ — उसके निकले हुए वीर्य की।
किसी कपड़े पर, किसी ब्रा पर...
नेहा ने एक फोटो को ज़ूम किया — सफेद वीर्य एक ब्रा के कप पर फैला हुआ था।
नेहा: (धीमी लेकिन sharp आवाज़ में)
“क्या ये... दीदी की ब्रा है?”
मैंने फिर चुपचाप हाँ में सिर हिला दिया।
नेहा कुछ पल तक स्क्रीन को घूरती रही।
फिर उसने अगला ईमेल खोला।
इस बार अविनाश ने लिखा था — “यार तेरी बहन की गांड तो फाड़नी है... इतनी टाइट लग रही है... तू इजाजत दे तो मैं इसे अपना बना लूँ...”
नेहा ने ईमेल पढ़ा, फिर मेरी तरफ़ मुड़ी।
उसकी आँखें लाल हो रही थीं, लेकिन गुस्सा नहीं — एक अजीब सी उत्तेजना और हैरानी का मिश्रण था।
नेहा: “तो तुम अपनी बहन की फोटोज़ भेजकर...
अपने दोस्त से उसकी चुदाई की बातें कर रहे थे?”
मैंने कुछ नहीं कहा।
मेरा गला सूख रहा था।
नेहा ने लैपटॉप को थोड़ा और करीब खींचा और स्क्रोल करती रही।
हर ईमेल के साथ उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं।
वो मेरे बगल में बैठी थी, लेकिन अब उसका शरीर मेरे से थोड़ा अलग हो गया था।
नेहा सब जानती थी।
मैंने पहले ही उसे अविनाश वाली बातें, गर्गी वाली फोटोज़ और चैट्स के बारे में बता रखा था।
लेकिन आज वो सब कुछ दोबारा देख रही थी।
खुद पढ़ रही थी।
खुद महसूस कर रही थी।
मैं ईमेल नहीं देख रहा था।
मैं नेहा को देख रहा था।
उसके चेहरे की चमक, उसकी साँसों की रफ्तार, उसकी आँखों में आ रही लालिमा — सब कुछ।
जब कोई खास ईमेल या फोटो आती, तो वो मेरी तरफ़ देखती।
कभी हल्का सा मुक्का मेरे कंधे पर मारती, कभी शर्म से होंठ काटती, तो कभी अपनी जाँघें कस के दबा लेती और चूत को हल्का-हल्का रगड़ने लगती।
एक ईमेल में वो फोटो थी — गर्गी सो रही थी।
उसकी स्कर्ट ऊपर चढ़ी हुई थी।
काली पैंटी साफ़ दिख रही थी।
गर्गी की मोटी, गोरी जाँघें और पैंटी में उसके नितंबों की आउटलाइन।
नेहा ने फोटो को ज़ूम किया।
काफी देर तक देखती रही।
फिर मेरी तरफ़ मुड़ी।
उसकी साँसें तेज़ थीं।
नेहा काफी देर तक स्क्रीन को घूरती रही।
उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं।
फिर अचानक उसने लैपटॉप को साइड में रख दिया और मेरी तरफ़ मुड़ी।
उसने मेरे बालों को कस के पकड़ लिया — बहुत ज़ोर से।
बहुत दिनों बाद उसकी इस वाली पकड़ महसूस हो रही थी।
वो मुझे अपने होंठों के पास ले आई।
मैंने सोचा वो किस करेगी, लेकिन वो सिर्फ़ १० सेकंड के लिए मेरे होंठों को अपने होंठों से छूकर हट गई।
फिर दाँतों से मेरे निचले होंठ को काटा — हल्का-सा, लेकिन कामुक तरीके से।
नेहा: (बहुत धीमी, भारी आवाज़ में) “भैंचोद...”
उसकी आँखों में पुरानी वाली शरारत और भूख दोनों लौट आई थी।
फिर उसने मेरे सिर पर दबाव डाला और मुझे नीचे खींच लिया — अपनी चूत की तरफ़।
वो मेरे चेहरे को अपनी शॉर्ट्स के ऊपर से रगड़ने लगी।
ज़ोर-ज़ोर से।
ऊपर-नीचे, आगे-पीछे।
उसकी गर्मी और नमी दोनों शॉर्ट्स के पतले कपड़े के ऊपर से साफ़ महसूस हो रही थी।
मेरे बालों की जड़ों में तेज़ दर्द हो रहा था, लेकिन मैं कुछ नहीं बोला।
बहुत दिनों बाद नेहा का ये रूप वापस आया था — वो पुरानी, भूखी, dominant नेहा।
मैं सब सहने को तैयार था।
नेहा ने अपनी जाँघें मेरे गालों के दोनों तरफ़ कस लीं और मेरे मुँह पर और ज़ोर से रगड़ने लगी।
उसकी साँसें अब हाँफने जैसी हो गई थीं।
उसकी शॉर्ट्स अब पूरी तरह भीग चुकी थीं।
मैं जीभ निकालकर शॉर्ट्स के ऊपर से ही उसकी चूत को चाटने लगा।
नेहा और ज़ोर से कराह उठी।
नेहा ने अचानक लैपटॉप फिर से उठा लिया और स्क्रोल करना शुरू कर दिया।
वो और पुरानी ईमेल्स देख रही थी।
मैंने इंतज़ार नहीं किया।
मैंने उसके शॉर्ट्स का वेस्टबैंड पकड़ा और एक झटके में नीचे खींच दिया।
नेहा ने हल्का सा कूल्हा उठाकर मदद कर दी।
अब वो सोफे पर आधी लेटी, आधी बैठी हुई थी।
एक पैर ज़मीन पर, दूसरा सोफे पर फैला हुआ।
उसकी प्यारी, गुलाबी चूत मेरे सामने पूरी तरह खुली हुई थी — पूरी तरह भीगी, चमकती हुई, रस से लथपथ।
मुझे महीनों बाद उसकी चूत की गंध आई — वो मीठी-नमकीन, उत्तेजक गंध।
मैंने बिना एक सेकंड वेस्ट किए अपना मुँह आगे बढ़ाया और अपनी जीभ उसकी चूत पर फेर दी।
नेहा ने एक लंबी आह भरी।
नेहा: “आह्ह्ह... हाँ...”
वो लैपटॉप को एक हाथ में थामे हुए थी, दूसरा हाथ मेरे बालों में।
मैंने अपनी जीभ से उसकी पूरी चूत चाटनी शुरू कर दी — नीचे से ऊपर तक, क्लिट पर घुमाते हुए, फिर अंदर डालने की कोशिश करते हुए।
नेहा की जाँघें काँप रही थीं।
वो स्क्रीन पर ईमेल पढ़ रही थी, लेकिन उसकी साँसें अब पूरी तरह अनियंत्रित हो चुकी थीं।
मैंने दोनों हाथों से उसकी जाँघें फैलाईं और अपना मुँह और गहराई में लगा दिया।
उसका गाढ़ा, गर्म रस मेरी जीभ पर, मेरे होंठों पर फैल रहा था।
मैं चूस रहा था, चाट रहा था, जीभ अंदर डाल रहा था।
नेहा ने लैपटॉप को थोड़ा और करीब खींचा, लेकिन उसकी आँखें बार-बार बंद हो रही थीं।
उसने मेरे बालों को और कस के पकड़ लिया और अपनी चूत को मेरे मुँह पर और ज़ोर से रगड़ने लगी।
मैं नेहा की चूत को वैसा चाट रहा था, जैसे कोई आदमी अपने सबसे पसंदीदा खाने को बहुत दिनों बाद मिला हो।
भूखा, लालची और बिना रुके।
मेरी जीभ उसकी पूरी चूत पर घूम रही थी — क्लिट को चूसता, अंदर डालता, फिर नीचे तक चाटता।
नेहा बीच-बीच में लैपटॉप मुझे दिखा रही थी।
कभी दीदी की फोटो, कभी अविनाश की गंदी टिप्पणी।
जितना आगे वो स्क्रोल करती, फोटोज़ उतनी साफ़ होती जा रही थीं।
एक ईमेल में मैंने दीदी की फेस्टिवल वाली फोटोज़ भेजी थीं — वो तैयार होकर खड़ी थी।
अविनाश ने रिप्लाई में लिखा था —
“साली को मैं स्टेप बाय स्टेप नंगी करूँगा...
पहले ब्लाउज, फिर पेटticoat...
तेरे घर के ही एक कमरे में ले जाकर चोदूँगा...
तेरा पूरा परिवार बाहर बैठा रहेगा...
दीदी की चुदाई की चीखें पूरे घर में गूँजेंगी...
तेरा भाई बोलेगा भी कि रोकना चाहिए...
लेकिन दीदी चुदवाती रहेगी...”
नेहा ये पढ़कर काँप उठी।
उसकी जाँघें मेरे चेहरे को दबाने लगीं।
सका शरीर अचानक सख्त हो गया।
वो मेरे बालों को कस के खींचने लगी और अपनी चूत को मेरे मुँह पर ज़ोर-ज़ोर से रगड़ने लगी।
एक जोरदार झटके के साथ वो झड़ गई।
बहुत सारा गर्म, गाढ़ा रस मेरे मुँह में, मेरी जीभ पर, मेरी ठोड़ी पर बहने लगा।
मैंने सब चाट लिया — बिना एक बूँद गिराए।
थोड़ी देर बाद जब वो शांत हुई, तो मैं उठने लगा।
लेकिन नेहा ने अपने पैरों से मेरे कंधों को पकड़ लिया और मुझे ज़ोर से नीचे दबाया।
वो अभी भी आधी लेटी, आधी बैठी हुई थी।
नेहा: (भारी, कामुक आवाज़ में)
“कहाँ जा रहा है?
आज तू बस चूत चाटेगा...
बैठ जा ज़मीन पर...”
मैं ज़मीन पर बैठ गया।
नेहा ने अपने दोनों पैर मेरे कंधों पर रख दिए।
उसकी चूत अब मेरे मुँह के बिल्कुल सामने थी — पूरी तरह खुली, लाल और रस से चमकती हुई।
नेहा: (मेरे बालों को फिर से पकड़ते हुए, मुस्कुराते हुए)
“भैंचोद..."
आज मेरा दिल बहुत खुश था।
पहले तो बेकार आदमी के साथ जो कुछ हुआ — वो गंदा, गुप्त और उत्तेजक सिलसिला।
फिर आज... बहुत दिनों बाद मेरी पुरानी dominating नेहा वापस लौट आई थी।
वो वाली नेहा, जो मेरे बाल खींचती है, मुझे अपनी चूत पर रगड़ती है और मुझे अपना गुलाम बना लेती है।
उस रात मैंने उसे 2-3 बार झड़वाया।
नेहा लैपटॉप को एक हाथ में थामे हुए थी।
भले ही उसकी जाँघें काँप रही थीं, साँसें हाँफ रही थीं, शरीर पसीने से तर था — वो लैपटॉप हाथ से जाने नहीं दे रही थी।


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