28-05-2026, 07:42 PM
(This post was last modified: 28-05-2026, 07:43 PM by Life_is_short. Edited 1 time in total. Edited 1 time in total.)
लगभग 4 महीने बीत चुके थे उस घटना को।
नेहा अब भी पूरी तरह नॉर्मल नहीं हुई थी।
वो अंदर से अभी भी शॉक में थी — ये सोचकर कि हमारे साथ क्या-क्या हो सकता था।
कितना बड़ा रिस्क था, कितना बड़ा धोखा।
हमने उस चैट ग्रुप में दोबारा कदम भी नहीं रखा।
हम दोनों के बीच सेक्स तो लगभग खत्म ही हो गया था।
बस रात को बिस्तर पर अलग-अलग करवट लेकर सो जाते।
दिन भर ऑफिस और काम में व्यस्त रहते।
मैंने बहुत कोशिश के बाद इंटरनेट पर अयान का यूट्यूब चैनल ढूँढ लिया था।
चैनल पर वो “कपल्स को अप्रोच करने” वाले कई वीडियो डाल रहा था।
कुछ ब्लर फोटोज़ थीं — नेहा की ब्रेस्ट्स की।
यूट्यूब गाइडलाइन्स के हिसाब से नंगी नहीं थीं, लेकिन काफी provocative थीं।
नीचे ********* लिंक दिया हुआ था — जहाँ पैसे देकर लोग चैट्स और “एक्सक्लूसिव पिक्स” खरीद सकते थे।
मैंने सब देख लिया।
लेकिन अच्छी बात ये थी कि हमने कभी भी फेस वाली कोई फोटो या वीडियो शेयर नहीं की थी।
अयान हमें चेहरा से नहीं जानता था।
उसकी अपलोड की हुई तस्वीरें किसी की भी हो सकती थीं।
इंटरनेट तो boobs से भरा पड़ा है।
शायद 1-2 लोगों ने उन ब्लर फोटोज़ पर मुठ मारी होगी, बस।
उससे ज्यादा कुछ नहीं।
फिर भी...
नेहा को जब मैंने ये सब बताया, तो वो चुपचाप सुनती रही।
उसके चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं आया, न रोई।
बस बहुत ठंडी आवाज़ में बोली,
नेहा: “तो आखिर में वो भी बस पैसा और व्यूज़ के पीछे था...
मैंने सोचा था कम से कम वो अलग होगा।”
उसके बाद वो उठकर बालकनी में चली गई।
एक सिगरेट जलाई और चुपचाप धुआँ उड़ाती रही।
मैं दूर से उसे देखता रहा।
XXXXXX
इस बीच हम दोनों ज़्यादा शराब पीने लगे थे।
हर शाम ऑफिस से आते ही हम व्हिस्की या वाइन की बोतल खोल लेते।
हम अक्सर सोचते कि “आज इस बारे में बात नहीं करेंगे”, लेकिन बात आखिरकार वहीं जाकर खत्म होती।
एक रात हम बालकनी में बैठे थे।
दो-दो ग्लास व्हिस्की पी चुके थे।
नेहा का चेहरा पहले से ही लाल था।
अचानक वो चुप हो गई।
उसकी आँखें भर आईं।
वो रोने लगी — बिना आवाज़ के, सिर्फ़ आँसू बहते हुए।
नेहा: (टूटी हुई आवाज़ में)
“मैंने उस पर कितना भरोसा कर लिया था सैम...
मैंने उसे वो सब बताया जो मैंने कभी किसी को नहीं बताया...
अपनी फैंटसीज़, अपनी कमजोरियाँ, तुम्हारे साथ हमारे रिश्ते की बातें...
सब कुछ।”
उसने ग्लास को कसकर पकड़ा, जैसे उसे तोड़ना चाह रही हो।
नेहा: “मैं कितनी बेवकूफ़ थी ना?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नेहा से “आगे क्या करना है” इस बारे में बात करने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी।
मैं जानता था कि वो अभी भी गुस्से और शॉक में है। कोई भी बात उसे फिर से तोड़ सकती थी। इसलिए मैं चुप रहा।
महीने बीत गए थे।
हम दोनों के बीच सेक्स तो लगभग बंद ही था। सिर्फ़ औपचारिक बातें, खाना, ऑफिस और सो जाना।
मगर हर आदमी के दो दिमाग होते हैं।
एक असली, दूसरा लंड।
उस दिन शाम को मैं बालकनी में सिगरेट पी रहा था।
तभी राहुल अपनी बालकनी में दिखा।
उसने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए आवाज़ लगाई,
राहुल: “हेलो भैया...
आजकल नेहा भाभी की तबीयत ठीक नहीं है क्या?
वो थोड़ी अलग-सी लग रही हैं। कई दिनों से दिखाई ही नहीं दीं।”
मैंने उसे देखा।
उसकी आँखों में वही पुरानी भूख थी।
नेहा ने तो सब बंद कर रखा था — न कोई शॉर्ट ड्रेस, न बालकनी में फ्लर्ट, न राहुल को कोई शो।
फिर भी इस झंट बराबर लड़के की हिम्मत देखो — वो मुझसे ही पूछ रहा था कि मेरी बीवी उसे क्यों नहीं दिख रही।
उसकी बात सुनते ही मेरे लंड में अचानक जान आ गई।
पूरा खड़ा हो गया।
मैंने सिगरेट का कश लिया और हल्के से मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“हाँ... थोड़ा थकान है। काम का प्रेशर ज्यादा है।
आराम कर रही है।”
नेहा किचन में थी। मैं बेडरूम में गया, दरवाज़ा बंद किया, पैंट उतारी और लंड पकड़ लिया।
मैंने आँखें बंद कीं और हिलाने लगा।
मैं सोच रहा था —
नेहा जब बेकार आदमी के साथ थी...
उसकी गोरी जाँघें फैली हुई...
बेकार आदमी की उँगलियाँ उसकी चूत में...
नेहा की आहें...
उसका गीला चेहरा...
जब वो उसके मोटे, बदबूदार लंड को मुँह में ले रही थी...
मेरा हाथ तेज़ हो गया।
मैं सब कुछ याद कर रहा था —
मैं तेज़ी से हिलाता रहा।
कुछ ही मिनट में मेरा लंड फड़कने लगा और मैं झड़ गया — पूरा पेट और हाथ पर।
साँसें तेज़ थीं।
शरीर में एक अजीब सी राहत थी, लेकिन मन में अपराधबोध भी।
मैंने नेहा को कुछ नहीं बताया।
न राहुल की बात, न अपना खड़ा लंड, न ये कि मैं उसके पुराने किस्सों को याद करके हिला रहा था।
मैं बस चुपचाप बाथरूम गया, साफ किया और बाहर निकल आया।
नेहा अभी भी किचन में थी।
XXXXXXX
कुछ दिन बाद रात को जब नेहा सो गई, तो मैं चुपके से लैपटॉप खोला।
मैं फिर से उसी पुराने चैटबॉट पर गया — बेकार आदमी को ढूँढने।
नेहा को कुछ नहीं बताया।
मुझे खुद भी नहीं पता था कि मैं क्यों ढूँढ रहा हूँ। शायद इसलिए कि अयान वाले धोखे के बाद वो एकमात्र ऐसा शख्स था जिस पर भरोसा किया जा सकता था — कम से कम वो धोखा तो नहीं देता था। गंदा था, बेहूदा था, लेकिन सच्चा था।
कई दिनों की मेहनत के बाद आखिरकार मैं उसे ढूँढ ही लिया।
जैसे ही मैंने मैसेज भेजा, उसका रिप्लाई कुछ मिनट बाद आया।
बेकार आदमी:
“अरे वाह... लौट आए भाई?
कहाँ गायब हो गए थे तुम दोनों?
नेहा का भी कोई मैसेज नहीं आया महीनों से। सब ठीक तो है ना?”
उसकी बातों में कोई खास उम्मीद नहीं थी।
न कोई शिकायत, न कोई गुस्सा, न कोई “मुझे बहुत याद आ रही थी” वाला ड्रामा।
बस साधारण जिज्ञासा थी।
या फिर उसने समझ लिया था कि हमारा चैप्टर बंद हो चुका है।
मैंने कुछ देर सोचा और लिखा:
“हाँ सब ठीक है।
धीरे-धीरे मेरी और बेकार आदमी की बातें फिर से शुरू हो गईं।
मैंने नेहा को कुछ नहीं बताया।
मैंने उसे सब कुछ बताया —
अयान वाला पूरा धोखा, नेहा का शॉक, वो रोना, तीन महीनों की चैटिंग, लोनावला वाला पैनिक, सब कुछ।
वो चुपचाप सुनता रहा।
एक दिन मैंने उससे कहा,
“मिलते हैं कहीं?”
उसने तुरंत हाँ कर दी।
ऑफिस के बाद मैं उसे अपनी कार में ले गया।
एसी चला दी, महंगी व्हिस्की खोली (जो मैंने खास उसके लिए ली थी)।
वो कार की सीट पर फैलकर बैठ गया, जैसे राजा हो।
मैं उसे ग्लास थमाता, वो पीता और मुस्कुराता।
मैंने उसे सब कुछ बताया —
नेहा का गोवा वाला किस्सा ।
मैंने उसे अपना पूरा पास्ट भी बता दिया।
नेहा का पास्ट भी।
सब कुछ।
मुझे पुराने अविनाश वाले दिन याद आ रहे थे।
बस इस बार मैं अपनी बहन के बारे में नहीं, अपनी बीवी के बारे में गंदी बातें कर रहा था।
वो मेरी महंगी व्हिस्की पीता, सिगरेट फूँकता और गंदी-गंदी बातें करता।
मुझे अजीब सा मजा आ रहा था।
रात को घर लौटते वक्त मैं नेहा को बोल देता,
“आज ऑफिस के दोस्तों के साथ हूँ, लेट हो जाएगा।”
नेहा को कभी शक नहीं हुआ।
क्यों शक करती?
उसने खुद मुझे छूट दे रखी थी कि मैं उसे किसी और से चुदवा सकता हूँ।
लेकिन उसे ये कभी नहीं पता चला कि मैं ऑफिस के पढ़े-लिखे, महंगे, “सॉफिस्टिकेटेड” दोस्तों के साथ बैठकर शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड या नेटफ्लिक्स की बातें करने के बजाय...
एक मजदूर, एक बेकार आदमी के साथ कार में बैठकर महंगी व्हिस्की पीना और अपनी बीवी की चुदाई की कहानियाँ सुनना ज्यादा पसंद कर रहा था।
ये मेरा नया गुप्त नशा बन गया था।
पहली एक-दो मुलाकातों में वो अभी भी अपनी भावनाएँ पैंट के ऊपर से छुपा रहा था।
जब मैं बात कर रहा होता, तो वो चुपचाप सुनता और कभी-कभी जाँघ पर हाथ फेर लेता। लेकिन कुछ नहीं बोलता।
लेकिन तीसरी-चौथी मीटिंग के बाद उसका संकोच टूट गया।
उस दिन मैं गर्गी के बारे में बता रहा था।
उसकी फोटो फोन पर दिखा रहा था — गोरा रंग, भारी स्तन, पतली कमर।
वो फोटो देखते ही उसकी आँखें चमक उठीं।
“ओह भैंचोद... तेरे घर सब ही माल है यार!
यकीन नहीं होता... इसकी दो बच्चे भी हैं?”
उसने बिना कोई हिचकिचाहट के अपनी zip खोल दी।
कार की सीट पर आराम से फैल गया और बोला,
“अब तुझे क्या शर्माना?
तू तो पहले ही सब hilaya hua है...”
मैं बोलता जाता, वो मेरी महंगी व्हिस्की पीता जाता।
कभी-कभी नेहा या गर्गी की फोटो देखकर अपने लंड को जोर-जोर से हिलाने लगता।
कार में सिर्फ़ मेरी आवाज़, उसकी हाँफती साँसें और लंड हिलाने की गीली-गीली आवाज़ भर गई थी।
जब वो झड़ने वाला था, मैंने चुपचाप उसे टिश्यू पेपर थमा दिया।
उसने समझ लिया।
मेरी महंगी गाड़ी खराब नहीं करनी थी।
उसने टिश्यू को अपने लंड पर लगा लिया और ज़ोर से हिलाते हुए झड़ गया।
बहुत सारा गाढ़ा वीर्य टिश्यू में भर गया।
वो हाँफ रहा था।
माथे पर पसीना था।
मैं चुपचाप बैठा उसे देख रहा था।
मुझे इस सब में मजा आ रहा था।
बहुत गहरा, बहुत गंदा मजा।
मैं अपने दिमाग को समझ नहीं पा रहा था।
एक तरफ नेहा अभी भी उस धोखे के सदमे में थी, हमारे बीच सब कुछ ठंडा पड़ गया था।
दूसरी तरफ मैं... अपनी बीवी की पुरानी चुदाई की कहानियाँ सुनाकर, किसी और आदमी को अपनी कार में बैठाकर, उसकी महंगी शराब पिलाकर, अपनी बीवी की फोटोज़ दिखाकर... उसका लंड हिलवाकर मजा ले रहा था।
मुझे एहसास हो गया था —
मुझे नेहा के साथ वो “feeling” addict हो गई थी।
वो उत्तेजना।
वो जलन।
वो गंदापन।
लेकिन अब नेहा इसमें शामिल नहीं थी।
फिर भी मुझे वो feeling चाहिए थी।
इसलिए मैं ये सब कर रहा था।
बेकार आदमी ने टिश्यू को मोड़ा, खिड़की से बाहर फेंका और मुस्कुराते हुए बोला,
“साली... तेरी बीवी की कहानी सुनकर आज बहुत तेज़ झड़ा यार।
अब बता... कब फिर मिलेगी वो मेरे लंड से?”
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस गाड़ी स्टार्ट कर दी।
XXXXXXXXXXX
आखिरी बार जब मैं बेकार आदमी से मिला, उसने बताया कि उसकी शिफ्ट बदलने वाली है। अब शाम को मिलना मुश्किल हो जाएगा।
बेकार आदमी: “मादरचोद... मेरी शिफ्ट बदल रहे हैं। अब दिन में ही ड्यूटी लगेगी।”
उस दिन हमने काफी ज्यादा पी ली थी। मेरी महंगी व्हिस्की की बोतल आधी से ज्यादा खाली हो चुकी थी।
नशे में मैंने उसे वो फोटोज़ दिखानी शुरू कर दीं — जो हमारी शादी के कुछ ही दिन बाद ली थीं। नेहा को मैंने विक्टोरिया सीक्रेट की ब्लैक नाइटी गिफ्ट की थी। वो बहुत ट्रांसपेरेंट और सेक्सी थी। नेहा की गोरी त्वचा उसमें और भी चमक रही थी।
जैसे ही उसने फोटो देखी, उसकी आँखें फैल गईं।
“ओहह भैंचोद... क्या माल है यार!”
उसका लंड तुरंत पैंट के अंदर सख्त हो गया। उसने zip खोली और अपना मोटा, काला लंड बाहर निकाल लिया। पूरी तरह खड़ा और नसों से भरा हुआ।
वो फोटो देखता, बार-बार ज़ूम करता, और अपना लंड हिलाता।
कभी लंड पकड़ता, कभी हाथ हटाकर फोटो को और अच्छे से देखता।
जैसे नेहा के हर अंग को अपनी आँखों से चोद रहा हो।
मैं नशे में था।
मुझे खुद नहीं पता चला कब मुँह से निकल गया,
“दिक्कत हो रही है तो... मैं हिला दूँ?
तू नेहा को enjoy कर...”
उसने मेरी तरफ़ देखा।
एक पल के लिए चुप रहा, फिर मुस्कुराया।
मैंने बिना कुछ सोचे अपना हाथ बढ़ाया और उसका गर्म, मोटा लंड पकड़ लिया।
पहली बार किसी और आदमी का लंड अपने हाथ में लिया था।
बहुत मोटा, भारी और गर्म था।
मैंने धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया।
वो नेहा की फोटोज़ देखता रहा — उसके स्तन, उसकी जाँघें, उसकी कमर, उसके होंठ।
वो नेहा की ब्लैक नाइटी वाली फोटो को बार-बार ज़ूम करके देख रहा था।
उसकी साँसें भारी हो चुकी थीं।
“धीरे... हाँ... धीरे हिला...
अब तेज़... और तेज़ यार...”
मैं उसके इशारों के हिसाब से हाथ की रफ्तार बदल रहा था।
कभी धीमा, कभी तेज़।
उसने अचानक मेरे हाथ को देखकर कहा,
“भैंचोद... तेरे हाथ कितने सॉफ्ट हैं...
किसी लड़की जैसे...”
फिर उसने अपना वही गंदा, खुरदुरा हाथ मेरे चेहरे पर रगड़ दिया।
जो हाथ थोड़ी देर पहले अपने लंड पर था।
मैंने उसकी खुशबू सूँघी — नमकीन, पसीने और व्हिस्की की मिली-जुली।
मेरा हाथ अपने आप तेज़ हो गया।
वो और भी कामुक हो गया।
उसकी गर्दन पीछे झुक गई, आँखें बंद।
“बाबू... वो कागज़ निकाल ले...
मैं झड़ने वाला हूँ... (हाँफते हुए) ”
मैंने दूसरे हाथ से टिश्यू ढूँढा, लेकिन एक हाथ से उसके लंड को हिलाना नहीं छोड़ा।
जैसे ही मैंने टिश्यू निकाला, उसने जोर से कराहा।
“आआह्ह्ह... ले...”
उसके लंड ने फड़कते हुए गर्म-गर्म गोले दाग दिए।
कुछ टिश्यू पर, ज़्यादातर मेरी कार के डैशबोर्ड पर।
मोटे, सफेद धब्बे डैशबोर्ड पर बिखर गए।
वो कुछ सेकंड तक हाँफता रहा, आँखें बंद किए।
सके जाने के बाद मैंने टिश्यू से अपना डैशबोर्ड साफ किया।
उसके वीर्य की गंध अभी भी कार में फैली हुई थी।
अजीब सी feeling थी — न शर्म, न पछतावा।
बल्कि एक गहरा, गंदा संतोष।
मुझे अभी भी ये सब गलत नहीं लग रहा था।
घर पहुँचा तो नेहा शॉर्ट्स और टैंक टॉप में थी।
बहुत दिनों बाद उसका ये रूप देख रहा था — गोरी जाँघें, बिना ब्रा के निप्पल टैंक टॉप से हल्के से उभरे हुए।
मैं लेट था, लेकिन उसने पहले ही बोतल खोल रखी थी।
मेरा पैग भी तैयार था।
नेहा: (मुस्कुराते हुए) “आ जा बेबी...”
वो मेरी गोद में बैठ गई।
कस के चिपक गई।
एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया और हल्का-हल्का दबाने लगी।
महीनों बाद उसकी ऐसी closeness और छुअन महसूस हो रही थी।
मैंने उसे कस के पकड़ लिया।
तभी उसने अचानक पूछा,
नेहा: “वो तुम्हारा दोस्त था ना... कॉलेज वाला... क्या नाम था उसका?”
सम: “अविनाश।”
नेहा: “हाँ... अविनाश।
तुमने मुझे बताया था कि तुम उसे मेरी पिक्स ईमेल कर सकते हो... दीदी के...”
मैं एकदम से सतर्क हो गया।
नशा एक पल में उतरने लगा।
नेहा: (धीरे से, लेकिन सीधे मेरी आँखों में देखते हुए)
“मुझे वो ईमेल देखना है।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
मेरी गोद में बैठी हुई नेहा मेरे लंड को अभी भी हल्का-हल्का सहला रही थी, लेकिन उसकी आँखों में अब एक अलग तरह की चमक थी।
न शर्म, न शरारत — बस एक ठंडी, जिज्ञासु नज़र।
मैं कुछ बोल नहीं पाया।
नेहा अब भी पूरी तरह नॉर्मल नहीं हुई थी।
वो अंदर से अभी भी शॉक में थी — ये सोचकर कि हमारे साथ क्या-क्या हो सकता था।
कितना बड़ा रिस्क था, कितना बड़ा धोखा।
हमने उस चैट ग्रुप में दोबारा कदम भी नहीं रखा।
हम दोनों के बीच सेक्स तो लगभग खत्म ही हो गया था।
बस रात को बिस्तर पर अलग-अलग करवट लेकर सो जाते।
दिन भर ऑफिस और काम में व्यस्त रहते।
मैंने बहुत कोशिश के बाद इंटरनेट पर अयान का यूट्यूब चैनल ढूँढ लिया था।
चैनल पर वो “कपल्स को अप्रोच करने” वाले कई वीडियो डाल रहा था।
कुछ ब्लर फोटोज़ थीं — नेहा की ब्रेस्ट्स की।
यूट्यूब गाइडलाइन्स के हिसाब से नंगी नहीं थीं, लेकिन काफी provocative थीं।
नीचे ********* लिंक दिया हुआ था — जहाँ पैसे देकर लोग चैट्स और “एक्सक्लूसिव पिक्स” खरीद सकते थे।
मैंने सब देख लिया।
लेकिन अच्छी बात ये थी कि हमने कभी भी फेस वाली कोई फोटो या वीडियो शेयर नहीं की थी।
अयान हमें चेहरा से नहीं जानता था।
उसकी अपलोड की हुई तस्वीरें किसी की भी हो सकती थीं।
इंटरनेट तो boobs से भरा पड़ा है।
शायद 1-2 लोगों ने उन ब्लर फोटोज़ पर मुठ मारी होगी, बस।
उससे ज्यादा कुछ नहीं।
फिर भी...
नेहा को जब मैंने ये सब बताया, तो वो चुपचाप सुनती रही।
उसके चेहरे पर कोई गुस्सा नहीं आया, न रोई।
बस बहुत ठंडी आवाज़ में बोली,
नेहा: “तो आखिर में वो भी बस पैसा और व्यूज़ के पीछे था...
मैंने सोचा था कम से कम वो अलग होगा।”
उसके बाद वो उठकर बालकनी में चली गई।
एक सिगरेट जलाई और चुपचाप धुआँ उड़ाती रही।
मैं दूर से उसे देखता रहा।
XXXXXX
इस बीच हम दोनों ज़्यादा शराब पीने लगे थे।
हर शाम ऑफिस से आते ही हम व्हिस्की या वाइन की बोतल खोल लेते।
हम अक्सर सोचते कि “आज इस बारे में बात नहीं करेंगे”, लेकिन बात आखिरकार वहीं जाकर खत्म होती।
एक रात हम बालकनी में बैठे थे।
दो-दो ग्लास व्हिस्की पी चुके थे।
नेहा का चेहरा पहले से ही लाल था।
अचानक वो चुप हो गई।
उसकी आँखें भर आईं।
वो रोने लगी — बिना आवाज़ के, सिर्फ़ आँसू बहते हुए।
नेहा: (टूटी हुई आवाज़ में)
“मैंने उस पर कितना भरोसा कर लिया था सैम...
मैंने उसे वो सब बताया जो मैंने कभी किसी को नहीं बताया...
अपनी फैंटसीज़, अपनी कमजोरियाँ, तुम्हारे साथ हमारे रिश्ते की बातें...
सब कुछ।”
उसने ग्लास को कसकर पकड़ा, जैसे उसे तोड़ना चाह रही हो।
नेहा: “मैं कितनी बेवकूफ़ थी ना?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नेहा से “आगे क्या करना है” इस बारे में बात करने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी।
मैं जानता था कि वो अभी भी गुस्से और शॉक में है। कोई भी बात उसे फिर से तोड़ सकती थी। इसलिए मैं चुप रहा।
महीने बीत गए थे।
हम दोनों के बीच सेक्स तो लगभग बंद ही था। सिर्फ़ औपचारिक बातें, खाना, ऑफिस और सो जाना।
मगर हर आदमी के दो दिमाग होते हैं।
एक असली, दूसरा लंड।
उस दिन शाम को मैं बालकनी में सिगरेट पी रहा था।
तभी राहुल अपनी बालकनी में दिखा।
उसने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए आवाज़ लगाई,
राहुल: “हेलो भैया...
आजकल नेहा भाभी की तबीयत ठीक नहीं है क्या?
वो थोड़ी अलग-सी लग रही हैं। कई दिनों से दिखाई ही नहीं दीं।”
मैंने उसे देखा।
उसकी आँखों में वही पुरानी भूख थी।
नेहा ने तो सब बंद कर रखा था — न कोई शॉर्ट ड्रेस, न बालकनी में फ्लर्ट, न राहुल को कोई शो।
फिर भी इस झंट बराबर लड़के की हिम्मत देखो — वो मुझसे ही पूछ रहा था कि मेरी बीवी उसे क्यों नहीं दिख रही।
उसकी बात सुनते ही मेरे लंड में अचानक जान आ गई।
पूरा खड़ा हो गया।
मैंने सिगरेट का कश लिया और हल्के से मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“हाँ... थोड़ा थकान है। काम का प्रेशर ज्यादा है।
आराम कर रही है।”
नेहा किचन में थी। मैं बेडरूम में गया, दरवाज़ा बंद किया, पैंट उतारी और लंड पकड़ लिया।
मैंने आँखें बंद कीं और हिलाने लगा।
मैं सोच रहा था —
नेहा जब बेकार आदमी के साथ थी...
उसकी गोरी जाँघें फैली हुई...
बेकार आदमी की उँगलियाँ उसकी चूत में...
नेहा की आहें...
उसका गीला चेहरा...
जब वो उसके मोटे, बदबूदार लंड को मुँह में ले रही थी...
मेरा हाथ तेज़ हो गया।
मैं सब कुछ याद कर रहा था —
मैं तेज़ी से हिलाता रहा।
कुछ ही मिनट में मेरा लंड फड़कने लगा और मैं झड़ गया — पूरा पेट और हाथ पर।
साँसें तेज़ थीं।
शरीर में एक अजीब सी राहत थी, लेकिन मन में अपराधबोध भी।
मैंने नेहा को कुछ नहीं बताया।
न राहुल की बात, न अपना खड़ा लंड, न ये कि मैं उसके पुराने किस्सों को याद करके हिला रहा था।
मैं बस चुपचाप बाथरूम गया, साफ किया और बाहर निकल आया।
नेहा अभी भी किचन में थी।
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कुछ दिन बाद रात को जब नेहा सो गई, तो मैं चुपके से लैपटॉप खोला।
मैं फिर से उसी पुराने चैटबॉट पर गया — बेकार आदमी को ढूँढने।
नेहा को कुछ नहीं बताया।
मुझे खुद भी नहीं पता था कि मैं क्यों ढूँढ रहा हूँ। शायद इसलिए कि अयान वाले धोखे के बाद वो एकमात्र ऐसा शख्स था जिस पर भरोसा किया जा सकता था — कम से कम वो धोखा तो नहीं देता था। गंदा था, बेहूदा था, लेकिन सच्चा था।
कई दिनों की मेहनत के बाद आखिरकार मैं उसे ढूँढ ही लिया।
जैसे ही मैंने मैसेज भेजा, उसका रिप्लाई कुछ मिनट बाद आया।
बेकार आदमी:
“अरे वाह... लौट आए भाई?
कहाँ गायब हो गए थे तुम दोनों?
नेहा का भी कोई मैसेज नहीं आया महीनों से। सब ठीक तो है ना?”
उसकी बातों में कोई खास उम्मीद नहीं थी।
न कोई शिकायत, न कोई गुस्सा, न कोई “मुझे बहुत याद आ रही थी” वाला ड्रामा।
बस साधारण जिज्ञासा थी।
या फिर उसने समझ लिया था कि हमारा चैप्टर बंद हो चुका है।
मैंने कुछ देर सोचा और लिखा:
“हाँ सब ठीक है।
धीरे-धीरे मेरी और बेकार आदमी की बातें फिर से शुरू हो गईं।
मैंने नेहा को कुछ नहीं बताया।
मैंने उसे सब कुछ बताया —
अयान वाला पूरा धोखा, नेहा का शॉक, वो रोना, तीन महीनों की चैटिंग, लोनावला वाला पैनिक, सब कुछ।
वो चुपचाप सुनता रहा।
एक दिन मैंने उससे कहा,
“मिलते हैं कहीं?”
उसने तुरंत हाँ कर दी।
ऑफिस के बाद मैं उसे अपनी कार में ले गया।
एसी चला दी, महंगी व्हिस्की खोली (जो मैंने खास उसके लिए ली थी)।
वो कार की सीट पर फैलकर बैठ गया, जैसे राजा हो।
मैं उसे ग्लास थमाता, वो पीता और मुस्कुराता।
मैंने उसे सब कुछ बताया —
नेहा का गोवा वाला किस्सा ।
मैंने उसे अपना पूरा पास्ट भी बता दिया।
नेहा का पास्ट भी।
सब कुछ।
मुझे पुराने अविनाश वाले दिन याद आ रहे थे।
बस इस बार मैं अपनी बहन के बारे में नहीं, अपनी बीवी के बारे में गंदी बातें कर रहा था।
वो मेरी महंगी व्हिस्की पीता, सिगरेट फूँकता और गंदी-गंदी बातें करता।
मुझे अजीब सा मजा आ रहा था।
रात को घर लौटते वक्त मैं नेहा को बोल देता,
“आज ऑफिस के दोस्तों के साथ हूँ, लेट हो जाएगा।”
नेहा को कभी शक नहीं हुआ।
क्यों शक करती?
उसने खुद मुझे छूट दे रखी थी कि मैं उसे किसी और से चुदवा सकता हूँ।
लेकिन उसे ये कभी नहीं पता चला कि मैं ऑफिस के पढ़े-लिखे, महंगे, “सॉफिस्टिकेटेड” दोस्तों के साथ बैठकर शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड या नेटफ्लिक्स की बातें करने के बजाय...
एक मजदूर, एक बेकार आदमी के साथ कार में बैठकर महंगी व्हिस्की पीना और अपनी बीवी की चुदाई की कहानियाँ सुनना ज्यादा पसंद कर रहा था।
ये मेरा नया गुप्त नशा बन गया था।
पहली एक-दो मुलाकातों में वो अभी भी अपनी भावनाएँ पैंट के ऊपर से छुपा रहा था।
जब मैं बात कर रहा होता, तो वो चुपचाप सुनता और कभी-कभी जाँघ पर हाथ फेर लेता। लेकिन कुछ नहीं बोलता।
लेकिन तीसरी-चौथी मीटिंग के बाद उसका संकोच टूट गया।
उस दिन मैं गर्गी के बारे में बता रहा था।
उसकी फोटो फोन पर दिखा रहा था — गोरा रंग, भारी स्तन, पतली कमर।
वो फोटो देखते ही उसकी आँखें चमक उठीं।
“ओह भैंचोद... तेरे घर सब ही माल है यार!
यकीन नहीं होता... इसकी दो बच्चे भी हैं?”
उसने बिना कोई हिचकिचाहट के अपनी zip खोल दी।
कार की सीट पर आराम से फैल गया और बोला,
“अब तुझे क्या शर्माना?
तू तो पहले ही सब hilaya hua है...”
मैं बोलता जाता, वो मेरी महंगी व्हिस्की पीता जाता।
कभी-कभी नेहा या गर्गी की फोटो देखकर अपने लंड को जोर-जोर से हिलाने लगता।
कार में सिर्फ़ मेरी आवाज़, उसकी हाँफती साँसें और लंड हिलाने की गीली-गीली आवाज़ भर गई थी।
जब वो झड़ने वाला था, मैंने चुपचाप उसे टिश्यू पेपर थमा दिया।
उसने समझ लिया।
मेरी महंगी गाड़ी खराब नहीं करनी थी।
उसने टिश्यू को अपने लंड पर लगा लिया और ज़ोर से हिलाते हुए झड़ गया।
बहुत सारा गाढ़ा वीर्य टिश्यू में भर गया।
वो हाँफ रहा था।
माथे पर पसीना था।
मैं चुपचाप बैठा उसे देख रहा था।
मुझे इस सब में मजा आ रहा था।
बहुत गहरा, बहुत गंदा मजा।
मैं अपने दिमाग को समझ नहीं पा रहा था।
एक तरफ नेहा अभी भी उस धोखे के सदमे में थी, हमारे बीच सब कुछ ठंडा पड़ गया था।
दूसरी तरफ मैं... अपनी बीवी की पुरानी चुदाई की कहानियाँ सुनाकर, किसी और आदमी को अपनी कार में बैठाकर, उसकी महंगी शराब पिलाकर, अपनी बीवी की फोटोज़ दिखाकर... उसका लंड हिलवाकर मजा ले रहा था।
मुझे एहसास हो गया था —
मुझे नेहा के साथ वो “feeling” addict हो गई थी।
वो उत्तेजना।
वो जलन।
वो गंदापन।
लेकिन अब नेहा इसमें शामिल नहीं थी।
फिर भी मुझे वो feeling चाहिए थी।
इसलिए मैं ये सब कर रहा था।
बेकार आदमी ने टिश्यू को मोड़ा, खिड़की से बाहर फेंका और मुस्कुराते हुए बोला,
“साली... तेरी बीवी की कहानी सुनकर आज बहुत तेज़ झड़ा यार।
अब बता... कब फिर मिलेगी वो मेरे लंड से?”
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस गाड़ी स्टार्ट कर दी।
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आखिरी बार जब मैं बेकार आदमी से मिला, उसने बताया कि उसकी शिफ्ट बदलने वाली है। अब शाम को मिलना मुश्किल हो जाएगा।
बेकार आदमी: “मादरचोद... मेरी शिफ्ट बदल रहे हैं। अब दिन में ही ड्यूटी लगेगी।”
उस दिन हमने काफी ज्यादा पी ली थी। मेरी महंगी व्हिस्की की बोतल आधी से ज्यादा खाली हो चुकी थी।
नशे में मैंने उसे वो फोटोज़ दिखानी शुरू कर दीं — जो हमारी शादी के कुछ ही दिन बाद ली थीं। नेहा को मैंने विक्टोरिया सीक्रेट की ब्लैक नाइटी गिफ्ट की थी। वो बहुत ट्रांसपेरेंट और सेक्सी थी। नेहा की गोरी त्वचा उसमें और भी चमक रही थी।
जैसे ही उसने फोटो देखी, उसकी आँखें फैल गईं।
“ओहह भैंचोद... क्या माल है यार!”
उसका लंड तुरंत पैंट के अंदर सख्त हो गया। उसने zip खोली और अपना मोटा, काला लंड बाहर निकाल लिया। पूरी तरह खड़ा और नसों से भरा हुआ।
वो फोटो देखता, बार-बार ज़ूम करता, और अपना लंड हिलाता।
कभी लंड पकड़ता, कभी हाथ हटाकर फोटो को और अच्छे से देखता।
जैसे नेहा के हर अंग को अपनी आँखों से चोद रहा हो।
मैं नशे में था।
मुझे खुद नहीं पता चला कब मुँह से निकल गया,
“दिक्कत हो रही है तो... मैं हिला दूँ?
तू नेहा को enjoy कर...”
उसने मेरी तरफ़ देखा।
एक पल के लिए चुप रहा, फिर मुस्कुराया।
मैंने बिना कुछ सोचे अपना हाथ बढ़ाया और उसका गर्म, मोटा लंड पकड़ लिया।
पहली बार किसी और आदमी का लंड अपने हाथ में लिया था।
बहुत मोटा, भारी और गर्म था।
मैंने धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया।
वो नेहा की फोटोज़ देखता रहा — उसके स्तन, उसकी जाँघें, उसकी कमर, उसके होंठ।
वो नेहा की ब्लैक नाइटी वाली फोटो को बार-बार ज़ूम करके देख रहा था।
उसकी साँसें भारी हो चुकी थीं।
“धीरे... हाँ... धीरे हिला...
अब तेज़... और तेज़ यार...”
मैं उसके इशारों के हिसाब से हाथ की रफ्तार बदल रहा था।
कभी धीमा, कभी तेज़।
उसने अचानक मेरे हाथ को देखकर कहा,
“भैंचोद... तेरे हाथ कितने सॉफ्ट हैं...
किसी लड़की जैसे...”
फिर उसने अपना वही गंदा, खुरदुरा हाथ मेरे चेहरे पर रगड़ दिया।
जो हाथ थोड़ी देर पहले अपने लंड पर था।
मैंने उसकी खुशबू सूँघी — नमकीन, पसीने और व्हिस्की की मिली-जुली।
मेरा हाथ अपने आप तेज़ हो गया।
वो और भी कामुक हो गया।
उसकी गर्दन पीछे झुक गई, आँखें बंद।
“बाबू... वो कागज़ निकाल ले...
मैं झड़ने वाला हूँ... (हाँफते हुए) ”
मैंने दूसरे हाथ से टिश्यू ढूँढा, लेकिन एक हाथ से उसके लंड को हिलाना नहीं छोड़ा।
जैसे ही मैंने टिश्यू निकाला, उसने जोर से कराहा।
“आआह्ह्ह... ले...”
उसके लंड ने फड़कते हुए गर्म-गर्म गोले दाग दिए।
कुछ टिश्यू पर, ज़्यादातर मेरी कार के डैशबोर्ड पर।
मोटे, सफेद धब्बे डैशबोर्ड पर बिखर गए।
वो कुछ सेकंड तक हाँफता रहा, आँखें बंद किए।
सके जाने के बाद मैंने टिश्यू से अपना डैशबोर्ड साफ किया।
उसके वीर्य की गंध अभी भी कार में फैली हुई थी।
अजीब सी feeling थी — न शर्म, न पछतावा।
बल्कि एक गहरा, गंदा संतोष।
मुझे अभी भी ये सब गलत नहीं लग रहा था।
घर पहुँचा तो नेहा शॉर्ट्स और टैंक टॉप में थी।
बहुत दिनों बाद उसका ये रूप देख रहा था — गोरी जाँघें, बिना ब्रा के निप्पल टैंक टॉप से हल्के से उभरे हुए।
मैं लेट था, लेकिन उसने पहले ही बोतल खोल रखी थी।
मेरा पैग भी तैयार था।
नेहा: (मुस्कुराते हुए) “आ जा बेबी...”
वो मेरी गोद में बैठ गई।
कस के चिपक गई।
एक हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया और हल्का-हल्का दबाने लगी।
महीनों बाद उसकी ऐसी closeness और छुअन महसूस हो रही थी।
मैंने उसे कस के पकड़ लिया।
तभी उसने अचानक पूछा,
नेहा: “वो तुम्हारा दोस्त था ना... कॉलेज वाला... क्या नाम था उसका?”
सम: “अविनाश।”
नेहा: “हाँ... अविनाश।
तुमने मुझे बताया था कि तुम उसे मेरी पिक्स ईमेल कर सकते हो... दीदी के...”
मैं एकदम से सतर्क हो गया।
नशा एक पल में उतरने लगा।
नेहा: (धीरे से, लेकिन सीधे मेरी आँखों में देखते हुए)
“मुझे वो ईमेल देखना है।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
मेरी गोद में बैठी हुई नेहा मेरे लंड को अभी भी हल्का-हल्का सहला रही थी, लेकिन उसकी आँखों में अब एक अलग तरह की चमक थी।
न शर्म, न शरारत — बस एक ठंडी, जिज्ञासु नज़र।
मैं कुछ बोल नहीं पाया।


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