26-05-2026, 06:32 PM
बाबा ने मुस्कुराते हुए दोनों को देखा और बोले, “शर्मा मत। आज से शर्म का कपड़ा भी उतार दो। रजनी… अपनी माँ के पास जा और उसे अच्छे से चूम।”
रजनी शर्मा कर अपनी माँ के पास गई। गीता ने अपनी बेटी को गले लगा लिया। दोनों नंगी देहें एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गईं। मैत्री की प्रस्तुति।
गीता ने रजनी के गाल पर किस करते हुए धीरे से कहा, “अरे मेरी शैतान बेटी… इतनी जल्दी माँ की चूत चूसने को तैयार हो गई?”
रजनी ने शर्म से मुँह छुपाते हुए, लेकिन मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “माँ… आप ही तो कह रही थीं कि गुरुजी की आज्ञा है। गुरूजी की हर आज्ञा का पालन करना ही हमारा धर्म है और… सच कहूँ तो मुझे भी बहुत मन कर रहा है। आपकी यह चूसने को।”
गीता हँस पड़ी। उसने रजनी की ठोड़ी उठाई और उसके होंठों पर एक लंबा, गहरा किस किया। दोनों की जीभें एक-दूसरे से खेलने लगीं।
गीता ने किस तोड़ते हुए कामुक स्वर में कहा, “वाह बेटी… तेरी जीभ तो बहुत मीठी है। गुरुजी से भी अच्छी चूम रही है।”
रजनी शर्मा कर बोली, “माँ… आपकी चूचियाँ तो बहुत भारी हैं। मुझे तो डर लग रहा है कि इन्हें चूसते-चूसते मेरा मुँह भर जाएगा।”
गीता ने अपनी बाईं चूची उठाकर रजनी के मुँह के सामने कर दी और बोली, “तो ले… भर ले अपना मुँह। दुहो ले माँ की चूची। निप्पल को अच्छे से दाँतों से काट-काटकर चूस। गुरुजी ने भी यही किया था।” लेखिका मैत्री है।
रजनी ने झुककर माँ की चूची मुंह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगी। “म्म्म… माँ… आपका निप्पल कितना सख्त और स्वादिष्ट है।”
गीता सिसकारी भरते हुए बोली, “आह्ह्ह… हाँ बेटी… और जोर से चूस। माँ की चूत तो पहले से ही तर हो रही है।”
रजनी ने दूसरी चूची को हाथ से मसलते हुए कहा, “माँ… आपकी चूत देखो… कितनी गीली हो गई है। क्या मैं चाटूँ?”
गीता ने रजनी के बाल पकड़कर उसे नीचे की तरफ दबाते हुए अधिक कामुक अंदाज में बोली, “चाट ना शैतान… यही से तो आई है और अपनी माँ की चूत चाट। जीभ अंदर डालकर अच्छे से चूस। देखती हूँ तू कितनी अच्छी बेटी है।” गीताने रजनी को उकसाते हुए कहा।
रजनी घुटनों के बल बैठ गई। उसने अपनी माँ की जाँघें फैलाईं और माँ की गीली चूत पर जीभ फिरानी शुरू कर दी।
“माँ… आपकी चूत का स्वाद तो गुरुजी के लंड से भी अच्छा है। कितना मीठा पानी निकल रहा है।”
गीता ने आँखें बंद कर लीं और रजनी के सिर को अपनी चूत पर दबाते हुए कराहते हुए बोली, “आह्ह्ह… हाँ बेटी… और अंदर डाल अपनी जीभ। चूस… अच्छे से चूस माँ की चूत को। गुरुजी ने भी यही किया था। अंदर तक जीभ घुसा… हाँ… ऐसे… आह्ह्ह! अपनी जीभ से माँ की चूत चोद।”
रजनी ने माँ की चूत में जीभ अंदर डालकर जोर-जोर से चूसना शुरू कर दिया। गीता की जाँघें काँप रही थीं।
गीता ने हाँफते हुए कहा, “बेटी… तू बहुत अच्छी चूत चाटने वाली है। अब माँ भी तेरी चूत चाटेगी। आ… लेट जा। और अपनी चूत दिखा।”
रजनी लेट गई। गीता उसके ऊपर आ गई और 69 पोजीशन में बैठ गई। अब माँ की चूत रजनी के मुँह के ऊपर थी और रजनी की छोटी चूत गीता के मुँह के सामने।
गीता ने रजनी की चूत को चाटते हुए बोली, “वाह बेटी… तेरी चूत तो अभी भी बहुत टाइट और गुलाबी है। गुरुजी ने फाड़ी तो थी, फिर भी कितनी प्यारी लग रही है।”
रजनी ने माँ की चूत चाटते हुए सिसकारी भरी, “माँ… आपकी जीभ बहुत गर्म है… आह्ह… मेरी चूत में अंदर डालो… हाँ… चूसो मुझे… मैं आपकी बेटी हूँ ना… पूरी तरह चूस लो। बेटी की हर इच्छा माँ को पूरी करनी होती है। आप भि कर दो मेरी इच्छापूर्ति।”
दोनों माँ-बेटी एक-दूसरे की चूत चाट रही थीं। कमरे में चूत चाटने की चट-चट की आवाजें और दोनों की सिसकारियाँ, एक दुसरे को थप्पड़ मारने की आवाजे गूँज रही थीं। दोनों की चूते बार बार अपना चुतरस चोदे जा रही थी और दोनों अपने मुंह में भर रही थी। बहोत ही कामुक द्रश्य बना हुआ था घर के उस रूम में। फनलवर संपादिका है।
गीता ने रजनी की चूत में दो उँगलियाँ डालते हुए कामुक स्वर में कहा, “बेटी… तू तो बहुत गीली हो गई है। क्या गुरुजी की बातें सुनकर चूत में आग लग गई थी?”
रजनी हाँफते हुए बोली, “हाँ माँ… और आपकी चूत चूसने से तो और भी गीली हो गई। माँ… मुझे भी उँगलियाँ डालो… जोर से… हाँ… ऐसे… आह्ह्ह! चोदो मुझे जैसे भी आप चाहे बस चोदो। फाड़ो....”
गीता ने जोर से उँगलियाँ अंदर-बाहर करने लगीं और बोली, “ले बेटी… माँ तेरी चूत फाड़ रही है। जब गुरुजी आएँगे तो हम दोनों उन्हें दिखाएँगी कि हम कितनी अच्छी लेस्बियन बन गई हैं।”
रजनी ने माँ की चूत को जोर से चूसते हुए कहा, “माँ… मुझे तो अब लग रहा है कि गुरुजी से पहले आप ही मुझे चोद देंगी।”
दोनों हँस पड़ीं और फिर और जोर से एक-दूसरे की चूत चाटने लगीं। कमरा उनकी सिसकारियों और चूत चाटने की आवाजों से भर गया था।
बाबा खड़े-खड़े मुस्कुराते हुए पूरा मजा ले रहे थे… मैत्री की रचना।
“लंड के बिना चुदाई का असली मजा कहा!” माँ ने बेटी को कहा।
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बस यही तक दोस्तों।
फिर मिले तब तक के लिए मैत्री के जय भारत।।
रजनी शर्मा कर अपनी माँ के पास गई। गीता ने अपनी बेटी को गले लगा लिया। दोनों नंगी देहें एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गईं। मैत्री की प्रस्तुति।
गीता ने रजनी के गाल पर किस करते हुए धीरे से कहा, “अरे मेरी शैतान बेटी… इतनी जल्दी माँ की चूत चूसने को तैयार हो गई?”
रजनी ने शर्म से मुँह छुपाते हुए, लेकिन मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “माँ… आप ही तो कह रही थीं कि गुरुजी की आज्ञा है। गुरूजी की हर आज्ञा का पालन करना ही हमारा धर्म है और… सच कहूँ तो मुझे भी बहुत मन कर रहा है। आपकी यह चूसने को।”
गीता हँस पड़ी। उसने रजनी की ठोड़ी उठाई और उसके होंठों पर एक लंबा, गहरा किस किया। दोनों की जीभें एक-दूसरे से खेलने लगीं।
गीता ने किस तोड़ते हुए कामुक स्वर में कहा, “वाह बेटी… तेरी जीभ तो बहुत मीठी है। गुरुजी से भी अच्छी चूम रही है।”
रजनी शर्मा कर बोली, “माँ… आपकी चूचियाँ तो बहुत भारी हैं। मुझे तो डर लग रहा है कि इन्हें चूसते-चूसते मेरा मुँह भर जाएगा।”
गीता ने अपनी बाईं चूची उठाकर रजनी के मुँह के सामने कर दी और बोली, “तो ले… भर ले अपना मुँह। दुहो ले माँ की चूची। निप्पल को अच्छे से दाँतों से काट-काटकर चूस। गुरुजी ने भी यही किया था।” लेखिका मैत्री है।
रजनी ने झुककर माँ की चूची मुंह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगी। “म्म्म… माँ… आपका निप्पल कितना सख्त और स्वादिष्ट है।”
गीता सिसकारी भरते हुए बोली, “आह्ह्ह… हाँ बेटी… और जोर से चूस। माँ की चूत तो पहले से ही तर हो रही है।”
रजनी ने दूसरी चूची को हाथ से मसलते हुए कहा, “माँ… आपकी चूत देखो… कितनी गीली हो गई है। क्या मैं चाटूँ?”
गीता ने रजनी के बाल पकड़कर उसे नीचे की तरफ दबाते हुए अधिक कामुक अंदाज में बोली, “चाट ना शैतान… यही से तो आई है और अपनी माँ की चूत चाट। जीभ अंदर डालकर अच्छे से चूस। देखती हूँ तू कितनी अच्छी बेटी है।” गीताने रजनी को उकसाते हुए कहा।
रजनी घुटनों के बल बैठ गई। उसने अपनी माँ की जाँघें फैलाईं और माँ की गीली चूत पर जीभ फिरानी शुरू कर दी।
“माँ… आपकी चूत का स्वाद तो गुरुजी के लंड से भी अच्छा है। कितना मीठा पानी निकल रहा है।”
गीता ने आँखें बंद कर लीं और रजनी के सिर को अपनी चूत पर दबाते हुए कराहते हुए बोली, “आह्ह्ह… हाँ बेटी… और अंदर डाल अपनी जीभ। चूस… अच्छे से चूस माँ की चूत को। गुरुजी ने भी यही किया था। अंदर तक जीभ घुसा… हाँ… ऐसे… आह्ह्ह! अपनी जीभ से माँ की चूत चोद।”
रजनी ने माँ की चूत में जीभ अंदर डालकर जोर-जोर से चूसना शुरू कर दिया। गीता की जाँघें काँप रही थीं।
गीता ने हाँफते हुए कहा, “बेटी… तू बहुत अच्छी चूत चाटने वाली है। अब माँ भी तेरी चूत चाटेगी। आ… लेट जा। और अपनी चूत दिखा।”
रजनी लेट गई। गीता उसके ऊपर आ गई और 69 पोजीशन में बैठ गई। अब माँ की चूत रजनी के मुँह के ऊपर थी और रजनी की छोटी चूत गीता के मुँह के सामने।
गीता ने रजनी की चूत को चाटते हुए बोली, “वाह बेटी… तेरी चूत तो अभी भी बहुत टाइट और गुलाबी है। गुरुजी ने फाड़ी तो थी, फिर भी कितनी प्यारी लग रही है।”
रजनी ने माँ की चूत चाटते हुए सिसकारी भरी, “माँ… आपकी जीभ बहुत गर्म है… आह्ह… मेरी चूत में अंदर डालो… हाँ… चूसो मुझे… मैं आपकी बेटी हूँ ना… पूरी तरह चूस लो। बेटी की हर इच्छा माँ को पूरी करनी होती है। आप भि कर दो मेरी इच्छापूर्ति।”
दोनों माँ-बेटी एक-दूसरे की चूत चाट रही थीं। कमरे में चूत चाटने की चट-चट की आवाजें और दोनों की सिसकारियाँ, एक दुसरे को थप्पड़ मारने की आवाजे गूँज रही थीं। दोनों की चूते बार बार अपना चुतरस चोदे जा रही थी और दोनों अपने मुंह में भर रही थी। बहोत ही कामुक द्रश्य बना हुआ था घर के उस रूम में। फनलवर संपादिका है।
गीता ने रजनी की चूत में दो उँगलियाँ डालते हुए कामुक स्वर में कहा, “बेटी… तू तो बहुत गीली हो गई है। क्या गुरुजी की बातें सुनकर चूत में आग लग गई थी?”
रजनी हाँफते हुए बोली, “हाँ माँ… और आपकी चूत चूसने से तो और भी गीली हो गई। माँ… मुझे भी उँगलियाँ डालो… जोर से… हाँ… ऐसे… आह्ह्ह! चोदो मुझे जैसे भी आप चाहे बस चोदो। फाड़ो....”
गीता ने जोर से उँगलियाँ अंदर-बाहर करने लगीं और बोली, “ले बेटी… माँ तेरी चूत फाड़ रही है। जब गुरुजी आएँगे तो हम दोनों उन्हें दिखाएँगी कि हम कितनी अच्छी लेस्बियन बन गई हैं।”
रजनी ने माँ की चूत को जोर से चूसते हुए कहा, “माँ… मुझे तो अब लग रहा है कि गुरुजी से पहले आप ही मुझे चोद देंगी।”
दोनों हँस पड़ीं और फिर और जोर से एक-दूसरे की चूत चाटने लगीं। कमरा उनकी सिसकारियों और चूत चाटने की आवाजों से भर गया था।
बाबा खड़े-खड़े मुस्कुराते हुए पूरा मजा ले रहे थे… मैत्री की रचना।
“लंड के बिना चुदाई का असली मजा कहा!” माँ ने बेटी को कहा।
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बस यही तक दोस्तों।
फिर मिले तब तक के लिए मैत्री के जय भारत।।



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