26-05-2026, 06:28 PM
तभी कमरे का दरवाजा धीरे से खुला और बाबाजी अंदर प्रवेश कर गए।
जैसे ही उनकी नजर पड़ी, वे रुक गए। उनके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान फैल गई।
गीता और रजनी दोनों पूरी तरह नंगी थीं। माँ-बेटी एक-दूसरे से सटी हुई खड़ी थीं। गीता की एक उँगली रजनी की छोटी चूत में धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रही थी, जबकि रजनी अपनी माँ की भारी चूची को चूस रही थी। दोनों की साँसें भारी थीं और कमरे में हल्की-हल्की सिसकारियाँ गूँज रही थीं। मैत्री की पेशकश।
बाबा को देखते ही दोनों चौंक गईं। रजनी तुरंत अपनी माँ से अलग हो गई और शर्म से दोनों हाथों से अपनी चूत और स्तन ढकने की कोशिश करने लगी। गीता भी घबरा गई, लेकिन उसने जल्दी से संभलकर कहा,
“बा… बाबाजी… आप आ गए… मैं… मैं चाय बना दूँ क्या?”
बाबा ने दोनों को ऊपर से नीचे तक नंगी देहें घूरते हुए गहरी आवाज में कहा,
“चाय?
अभी यहाँ माँ-बेटी के छेदों से जो मधुर रस और आस्वाद निकल रहा है… उससे ज्यादा स्वादिष्ट चाय इस दुनिया में कहाँ मिलेगी?”
दोनों माँ-बेटी एक साथ शर्मा गईं। गीता का चेहरा लाल हो गया और रजनी ने शर्म से सिर झुका लिया।
बाबा ने रजनी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और बोले,
“शर्मा मत बेटी… अब शर्माने की कोई जरूरत नहीं। आज मैं तुम दोनों को लेस्बियन का पूरा आनंद दिलवाता हूँ।”
रजनी ने डरते-डरते पूछा, “लेस्बियन… मतलब क्या बाबाजी?” मैत्री की लेखनी।
बाबा ने मुस्कुराते हुए गीता की तरफ देखा और फिर रजनी की नंगी कमर पर हाथ फेरते हुए कहा, “मतलब… तुम दोनों माँ-बेटी अब एक-दूसरे का शरीर भी खुलकर सेक्स कर सकती हो। चूत चूसना, चूचियाँ चूसना, एक-दूसरे की गांड में उँगली डालना… सब कुछ।”
गीता ने शर्म से कहा, “बाबाजी… ये तो…”
बाबा ने तुरंत गुरु वाली भारी आवाज में टोका,
“चुप! साली मादरचोद, गुरूजी की आज्ञा पर संदेह? शंका? तू अपने भान में है या नहीं! चलो, सुनो दोनों माँ-बेटी…
यह कोई साधारण आदेश नहीं है। गुरुजी ने मुझे सपने में बताया है कि माँ और बेटी के बीच का यह शारीरिक प्रेम बहुत शक्तिशाली है। जब माँ अपनी बेटी की चूत चाटती है और बेटी अपनी माँ की चूत चूसती है, तो दोनों के शरीर में एक विशेष ‘शक्ति तरंग’ उत्पन्न होती है।
यह तरंग उन सभी बुरी आत्माओं को भगा देती है जो अभी भी तुम दोनों के अंदर छिपी हो सकती हैं। खासकर उन प्रेतों को जो चूत और गांड के रास्ते से घुसते हैं।
जितना ज्यादा तुम दोनों एक-दूसरे को चाटोगी, चूसोगी, उँगलियाँ डालोगी… उतना ही तेजी से तुम्हारे शरीर से गंदगी निकलेगी।
इसके अलावा, यह प्रक्रिया तुम दोनों की चूत को और भी संवेदनशील और मजबूत बना देगी, ताकि भविष्य में कभी कोई बुरी शक्ति तुम्हारे शरीर में प्रवेश न कर सके।”
बाबा ने रजनी की चूत पर हल्का सा थपकी देते हुए आगे कहा, “और सबसे बड़ी बात… अब तुम दोनों को घर में पूरे 6 दिन तक बिल्कुल नंगी रहना है। कपड़े पहनना पूरी तरह वर्जित है। तुम दोनों नंगी नाच सकती हो, एक-दूसरे को छू सकती हो, चुदाई जैसा खेल खेल सकती हो… बिना किसी शर्म के। क्योंकि जब तक तुम दोनों एक-दूसरे के शरीर से पूरी तरह जुड़ी नहीं रहोगी, गुरुजी की शक्ति तुम्हारे अंदर पूरी तरह नहीं बैठेगी।”
रजनी ने शर्म से अपनी माँ की तरफ देखा। गीता भी शर्मा रही थी, लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी उत्तेजना और चमक भी थी। लेखिका मैत्री है।
बाबा ने दोनों को देखकर शैतानी मुस्कान के साथ कहा, “तो… अब शर्म छोड़ो। आज से तुम दोनों माँ-बेटी नहीं… गुरुजी की दो खास चेलियाँ हो। चलो… शुरू करते हैं।“
“रजनी, तुम अपनी माँ की चूत चूस… और गीता, अपनी बेटी की चूत को अपनी जीभ से अच्छे से साफ कर।”
दोनों माँ-बेटी शर्म और उत्तेजना के मिश्रण से एक-दूसरे को देखने लगीं…
***********************************
जुड़े रहिये दोस्तों..............
मैत्री।
जैसे ही उनकी नजर पड़ी, वे रुक गए। उनके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान फैल गई।
गीता और रजनी दोनों पूरी तरह नंगी थीं। माँ-बेटी एक-दूसरे से सटी हुई खड़ी थीं। गीता की एक उँगली रजनी की छोटी चूत में धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रही थी, जबकि रजनी अपनी माँ की भारी चूची को चूस रही थी। दोनों की साँसें भारी थीं और कमरे में हल्की-हल्की सिसकारियाँ गूँज रही थीं। मैत्री की पेशकश।
बाबा को देखते ही दोनों चौंक गईं। रजनी तुरंत अपनी माँ से अलग हो गई और शर्म से दोनों हाथों से अपनी चूत और स्तन ढकने की कोशिश करने लगी। गीता भी घबरा गई, लेकिन उसने जल्दी से संभलकर कहा,
“बा… बाबाजी… आप आ गए… मैं… मैं चाय बना दूँ क्या?”
बाबा ने दोनों को ऊपर से नीचे तक नंगी देहें घूरते हुए गहरी आवाज में कहा,
“चाय?
अभी यहाँ माँ-बेटी के छेदों से जो मधुर रस और आस्वाद निकल रहा है… उससे ज्यादा स्वादिष्ट चाय इस दुनिया में कहाँ मिलेगी?”
दोनों माँ-बेटी एक साथ शर्मा गईं। गीता का चेहरा लाल हो गया और रजनी ने शर्म से सिर झुका लिया।
बाबा ने रजनी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और बोले,
“शर्मा मत बेटी… अब शर्माने की कोई जरूरत नहीं। आज मैं तुम दोनों को लेस्बियन का पूरा आनंद दिलवाता हूँ।”
रजनी ने डरते-डरते पूछा, “लेस्बियन… मतलब क्या बाबाजी?” मैत्री की लेखनी।
बाबा ने मुस्कुराते हुए गीता की तरफ देखा और फिर रजनी की नंगी कमर पर हाथ फेरते हुए कहा, “मतलब… तुम दोनों माँ-बेटी अब एक-दूसरे का शरीर भी खुलकर सेक्स कर सकती हो। चूत चूसना, चूचियाँ चूसना, एक-दूसरे की गांड में उँगली डालना… सब कुछ।”
गीता ने शर्म से कहा, “बाबाजी… ये तो…”
बाबा ने तुरंत गुरु वाली भारी आवाज में टोका,
“चुप! साली मादरचोद, गुरूजी की आज्ञा पर संदेह? शंका? तू अपने भान में है या नहीं! चलो, सुनो दोनों माँ-बेटी…
यह कोई साधारण आदेश नहीं है। गुरुजी ने मुझे सपने में बताया है कि माँ और बेटी के बीच का यह शारीरिक प्रेम बहुत शक्तिशाली है। जब माँ अपनी बेटी की चूत चाटती है और बेटी अपनी माँ की चूत चूसती है, तो दोनों के शरीर में एक विशेष ‘शक्ति तरंग’ उत्पन्न होती है।
यह तरंग उन सभी बुरी आत्माओं को भगा देती है जो अभी भी तुम दोनों के अंदर छिपी हो सकती हैं। खासकर उन प्रेतों को जो चूत और गांड के रास्ते से घुसते हैं।
जितना ज्यादा तुम दोनों एक-दूसरे को चाटोगी, चूसोगी, उँगलियाँ डालोगी… उतना ही तेजी से तुम्हारे शरीर से गंदगी निकलेगी।
इसके अलावा, यह प्रक्रिया तुम दोनों की चूत को और भी संवेदनशील और मजबूत बना देगी, ताकि भविष्य में कभी कोई बुरी शक्ति तुम्हारे शरीर में प्रवेश न कर सके।”
बाबा ने रजनी की चूत पर हल्का सा थपकी देते हुए आगे कहा, “और सबसे बड़ी बात… अब तुम दोनों को घर में पूरे 6 दिन तक बिल्कुल नंगी रहना है। कपड़े पहनना पूरी तरह वर्जित है। तुम दोनों नंगी नाच सकती हो, एक-दूसरे को छू सकती हो, चुदाई जैसा खेल खेल सकती हो… बिना किसी शर्म के। क्योंकि जब तक तुम दोनों एक-दूसरे के शरीर से पूरी तरह जुड़ी नहीं रहोगी, गुरुजी की शक्ति तुम्हारे अंदर पूरी तरह नहीं बैठेगी।”
रजनी ने शर्म से अपनी माँ की तरफ देखा। गीता भी शर्मा रही थी, लेकिन उसके चेहरे पर एक अजीब सी उत्तेजना और चमक भी थी। लेखिका मैत्री है।
बाबा ने दोनों को देखकर शैतानी मुस्कान के साथ कहा, “तो… अब शर्म छोड़ो। आज से तुम दोनों माँ-बेटी नहीं… गुरुजी की दो खास चेलियाँ हो। चलो… शुरू करते हैं।“
“रजनी, तुम अपनी माँ की चूत चूस… और गीता, अपनी बेटी की चूत को अपनी जीभ से अच्छे से साफ कर।”
दोनों माँ-बेटी शर्म और उत्तेजना के मिश्रण से एक-दूसरे को देखने लगीं…
***********************************
जुड़े रहिये दोस्तों..............
मैत्री।




![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)