26-05-2026, 08:25 AM
(02-05-2026, 09:50 PM)Hot_randi_rishita Wrote: अपडेट – 7
उसी शाम — जहांगीर के बंगले पर
कार जहांगीर के बड़े और शानदार बंगले पर रुकी। जहांगीर स्वयं गेट पर खड़ा स्वागत करने आया।
जहांगीर (मुस्कुराते हुए): “आइए, आइए! बहुत अच्छा लगा। अंदर चलिए।”
दोनोंअंदर गए। जहांगीर ने उन्हें आराम से बिठाया। चाय-नाश्ता आया। कुछ देर सामान्य बातें हुईं, फिर जहांगीर ने सीधे मुद्दे पर बात की।
जहांगीर (बृजमोहन की तरफ देखकर): “बृजमोहन भाई, मैं सीधे बात करता हूँ। अगला पंचायत चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। मैं चाहता हूँ कि आप की धर्म पत्नी जी इस चुनाव को लड़ें ।
इस बार चुनाव लड़ें। मेरे पूरे समर्थन के साथ। पैसा, लोगों का सहयोग, सब कुछ मैं देख लूँगा।”
बृजमोहन (घबराकर): “ लेकिन सरला ही क्यों …? जहांगीर भाई, वो तो साधारण सी औरत है । उसे कितने लोग जानते होंगे । राजनीति का मुझे कुछ पता नहीं।”
जहांगीर (मुस्कुराते हुए, आत्मविश्वास से): “ ऐसी बात नहीं है, उनकी प्रसिद्धि ही मुझे आपके यहाँ खींच लाए । भाभी जी के बारे में कुछ दिन से बहुत सुन रहा था बहुतों के मुंह से ।
बृजमोहन सरला को देखता है । सरला जहांगीर को घूरती है प।
बृजमोहन – क्या सुन रहे थे आप ।
जहांगीर – यही की उनकी क्षेत्र में जान पहचान है । काफी फेमस हैं ये इलाके ने । खूबसूरत तो ये हैं ही दिल की भी अच्छी हैं । बृजमोहन के सामने ही सरला को जहांगीर हवस भरी नजरों सहो गुर्दे में बोला । सरला के चेहरे पे मुस्कुराहट थी । उसने एक होंठ को दांत के नीचे दबा दिया और जहांगीर को कातर नजरों से देखने लगी ।।
जहांगीर _ आपको बस थोड़ी हिम्मत चाहिए। मैं पीछे हूँ तो आपकी वाइफ की जीत पक्की है। घर की स्थिति भी सुधरेगी, इज्जत बढ़ेगी। सोचिए — सरला जी पंचायत में बैठेंगे, तो रेखा, पिंकी, सरला — सबका भला होगा।”
सरला (बृजमोहन को देखकर): “जी, जहांगीर भाईजान आप, ठीक कह रहे हैं। मौका अच्छा है। मै तैयार हूँ । क्यों जी , ठीक है न
बृजमोहन कुछ देर सोचता रहा, फिर धीरे से सिर हिला दिया।
बृजमोहन: “ठीक है… अगर आप कह रहे हैं और सरला भी चाहती तो ठीक है ,
सरला – हूँ, यह हुई ना बात। और जहांगीर जी आप को करना पड़ेगा । मुझे राजनीति के बारे में कुछ नहीं पता।
जहांगीर बहुत खुश हुआ। उसने सरला की तरफ देखकर मुस्कुराया।
जहांगीर –मैं सब सिखा दूंगा, आप फिक्र ना करें ।
अगले दिन
सुबह १० बजे वही सफेद इनोवा कार घर के सामने आकर खड़ी हो गई। ड्राइवर ने बताया — “सरला जी को जहांगीर साहब ने बुलाया है। कुछ इलेक्शन से जुड़ी मीटिंग है।”
सरला (बृजमोहन से): “मुझे अकेले जाना है। चुनाव की कुछ मीटिंग है, महिलाओं वाली। तुम चिंता मत करो, शाम तक लौट आऊँगी।”
बृजमोहन (चिंतित होकर): “अकेले? मैं भी चलूँ?”
सरला (मुस्कुराते हुए): “नहीं जी, आपकी जरूरत नहीं है। महिलाओं की मीटिंग है। तुम घर पर रहो। रेखा और पिंकी का ध्यान रखना।”
बृजमोहन कुछ कह नहीं सका। सरला तैयार होकर कार में बैठ गई और चली गई।
शाम को — सरला की वापसी होती है ।
सरला शाम ७:३० बजे लौटी। उसके चेहरे पर एक अलग सी चमक थी।
बृजमोहन (तुरंत पूछते हुए): “कैसी रही मीटिंग? देर क्यों लग गई? क्या-क्या बात हुई?”
सरला (आराम से बैठते हुए): “बहुत अच्छी रही। जहांगीर भाई ने बहुत कुछ समझाया। महिलाओं को कैसे जोड़ना है, वोट कैसे बटोरने हैं — सब बताया। बहुत सी महिलाएँ आई थीं।”
बृजमोहन (शक भरी नज़र से): “इतनी देर लग गई? … कहां थी ?”
सरला (हल्के से हँसकर): “अरे, अब इन सब कामों में टाइम तो लगेगा, तुम्हारी बीवी प्रधान बनने जा रही है , वो हस्ती है । वो सामान्य व्यवहार कर रही थी ।
कुछ दिन बात सरला कुछ बाहर की महिलाओं के साथ घर आती है । बृजमोहन उनसे मिलता है ।
अब अक्सर इलेक्शन के सिलसिले में बाहर जाने लगी थी । कुछ दिनों से सरला के बहुत बन ठन के ऐसे जाना जैसे किसी शादी में जा रही हो, बृजमोहन के मन में शक पैदा करता है । उसके पूछने पर सरल उसे बताती है कि वह जहांगीर के यहां जा रही है । उसके ब्लाउज छोटे और स्लीवलेस होने लगे थे । चेहरे पर ऐसे मेकअप किया होता जैसे कोई छिनाल अपने कस्टमर के पास जा रही हो मिलने ।
Bahut khoob.... Rajniti ne sarla ko top par pahuchna h to top par chadna bi hoga....haha


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