24-05-2026, 11:18 AM
क शाम खाने की टेबल पर नेहा कुछ सोचते हुए अचानक बोली,
“क्या हम अयान से मिल सकते हैं?”
मैंने उसकी तरफ़ देखा।
उसके चेहरे पर हल्की सी हिचकिचाहट थी, लेकिन आँखों में उम्मीद भी।
मैंने कभी भी अयान से मिलने के लिए मना नहीं किया था।
मुंबई में भी मैं तैयार था मिलवाने को।
मैंने सहज भाव से कहा,
“क्यों नहीं? कहाँ मिलना है?”
नेहा थोड़ा रुकी।
“वो... वो...”
वो कुछ कहने की कोशिश कर रही थी लेकिन शब्द नहीं निकल रहे थे।
मैंने फिर पूछा, “क्या हुआ?”
नेहा ने नीचे देखते हुए धीरे से कहा,
“वो यहाँ आना चाहता है।”
मेरा दिल एक झटके से धड़का।
“यहाँ मतलब... घर पर?”
नेहा ने तुरंत सिर हिलाया,
“नहीं... घर नहीं। पुणे... फिर देखते हैं।”
उसने “फिर देखते हैं” कहकर बात को अधूरा छोड़ दिया।
लेकिन मैं समझ गया — नेहा अयान को घर लाना चाहती थी, बस अभी सीधे कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी।
खाने के बाद मैंने नेहा से सीधे पूछ लिया,
“तुमने उससे मिलने के लिए कहा था क्या?”
नेहा थोड़ा हिचकिचाई।
उसने मेरी आँखों में देखा, फिर नज़रें नीचे कर लीं।
कुछ सेकंड चुप रहने के बाद उसने धीरे से जवाब दिया,
“मुंबई के बाद... मैंने उससे मिलने के लिए पूछना बंद कर दिया था।”
मैंने उसकी तरफ़ देखा।
नेहा की आवाज़ में एक अजीब सी मिश्रित भावना थी — थोड़ा गुस्सा, थोड़ा दर्द, और थोड़ी शर्म।
“फिर अब अचानक वो खुद कह रहा है कि यहाँ आना चाहता है?” मैंने पूछा।
नेहा ने सिर हिलाया।
“हाँ... कल रात उसने खुद पूछा। बोला कि अब वो तैयार है... और मुझे मिलना चाहता है।”
मैं चुप रहा।
दिमाग में सारी पुरानी बातें घूम गईं — मुंबई की ट्रिप, अयान का गायब हो जाना, नेहा के आँसू, और फिर बेकार आदमी वाला rebound।
नेहा मेरे पास आई, मेरी गोद में बैठ गई और मेरे सीने से लगकर बोली,
“सैम... अगर तुम नहीं चाहते तो मैं मना कर दूँगी।
लेकिन... वो कह रहा है कि इस बार वो सच में मिलना चाहता है।”
उसकी आवाज़ में अब वो पुरानी चमक लौट आई थी।
मैंने उसके बालों में हाथ फेरा और धीरे से पूछा,
“तुम क्या चाहती हो?”
नेहा ने मेरी आँखों में देखा।
कुछ पल चुप रहने के बाद उसने बहुत धीमी, लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा,
“मैं... मिलना चाहती हूँ।”
मैंने फिर नेहा से पूछा,
“क्या कहा उसने ठीक-ठीक?”
नेहा ने थोड़ा सा गला साफ़ करते हुए कहा,
“उसने मुझे पूछा है कि क्या हम मिल सकते हैं। वो पुणे आने को तैयार है।
नेक्स्ट फ्राइडे को।
कहाँ मिलना है, अभी डिसाइड नहीं किया है।”
मैंने गंभीर होकर कहा,
“तुम्हें पता है ना... बिना मिले किसी को घर का पता दे देना ठीक नहीं होता।”
नेहा तुरंत चिढ़ गई।
उसने मेरी तरफ़ देखा, आँखें थोड़ी सिकुड़ी हुईं।
“मैंने कब कहा कि हम उसे घर ले आएँगे?”
उसकी आवाज़ में हल्का गुस्सा था।
“मैंने तो बस इतना कहा कि वो पुणे आ सकता है। घर की बात ही नहीं की मैंने!”
मैं चुप रहा।
नेहा ने मेरी गोद से उठते हुए कहा,
“तुम हर बार ऐसा क्यों सोच लेते हो?
जैसे मैं बेवकूफ़ हूँ और सीधा घर बुला लूँगी।”
उसने लैपटॉप उठाया और बेड पर बैठ गई।
मैं समझ गया — वो नाराज़ हो गई थी।
मैं उसके पास गया, उसके कंधे पर हाथ रखा और धीरे से बोला,
“मैं बस सेफ्टी की बात कर रहा था बेबी।
अयान को हम अभी तक सिर्फ़ ऑनलाइन जानते हैं।”
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
उसकी नाराज़गी थोड़ी कम हुई, लेकिन वो अभी भी चिढ़ी हुई थी।
“तो फिर क्या करूँ?
मना कर दूँ?”
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा। उसकी आँखों में अब साफ़ नाराज़गी और थोड़ी चुनौती थी।
“तुमने बेकार आदमी को तो घर आने कहा था,” उसने कहा।
“तुमने खुद मुझे कहा था कि मैं उसे हाँ कह सकती हूँ।”
मैंने गहरी साँस ली।
“उसकी बात अलग थी नेहा।
हम पहले उससे मिल चुके थे। उसके घर गए थे। उसके हालात देखे थे। तब जाकर हमने फैसला लिया था।
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा, जैसे मेरी बात को तोल रही हो।
मैंने आगे कहा,
“अयान सिर्फ़ हमारे लिए यहाँ आएगा। अगर उसने रुकने के लिए कहा तो...
नहीं।
यहाँ नहीं।
उसे बोल दो कहीं बाहर मिलना है — होटल, कैफ़े, या कोई पब्लिक प्लेस। घर नहीं।”
नेहा कुछ पल चुप रही।
फिर उसने लैपटॉप पर उँगलियाँ चलाईं और धीरे से बोली,
“ठीक है... मैं उसे यही बोल दूँगी।
लेकिन उसके चेहरे पर वो असंतोष साफ़ दिख रहा था।
जैसे वो चाहती हो कि अयान घर आए, मेरे सामने, हमारे बेडरूम में...
मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा।
“नेहा, मैं मना नहीं कर रहा हूँ।
बस सेफ्टी और हमारे नियम... याद है ना?”
नेहा लैपटॉप पर टाइप कर रही थी। मैं उसके पीछे खड़ा सब पढ़ रहा था।
नेहा ने लिखा:
“हम पुणे में नहीं मिल सकते... कहीं और मिलते हैं... पास में... मुंबई-पुणे के बीच कहीं मिलते हैं...”
अयान का रिप्लाई तुरंत आया। उसकी नाराज़गी साफ़ दिख रही थी:
“what the fuck नेहा बेबी.... मैंने पूरी तैयारी कर ली थी आने की.... इस टाइम पर KLPD मत कर जान”
नेहा ने हल्का मुस्कुराते हुए मेरी तरफ़ देखा और फिर लिखा:
“सम नहीं चाहते कि हम अभी घर या घर के आस-पास मिलें”
अयान ने तुरंत जवाब दिया:
“क्यों अभी भी भरोसा नहीं है क्या... सम है क्या आस-पास?”
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
मैंने धीरे से कहा, “बोल दो कि मैं पास में नहीं हूँ।”
मैं उसका रिएक्शन देखना चाहता था।
नेहा ने एक पल सोचा, फिर लैपटॉप पर टाइप किया:
“सम पास में नहीं है।”
अयान का रिप्लाई आया — और इस बार बहुत गंदा और आक्रामक:
“तेरा पति एक नंबर का चूतिया है भैंचोद.... मादरचोद को बीवी भी चुदवानी है और गांड भी फट रही है साले की...
तू मारने दे उसे... तू बोल देना कि तू ऑफिस जा रही है... और मिलने आ जा ना..... फिर अपन दोनों तेरे cucky hubby को सरप्राइज़ देंगे [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f525.png[/img]”
मैं और नेहा दोनों चुपचाप पढ़ रहे थे।
अयान पहले भी मुझे गालियाँ देता था, लेकिन आज कुछ अलग था।
इस बार उसकी गालियों में गुस्सा, घृणा और खुली हिकारत थी। जैसे वो मुझे सच में तुच्छ समझता हो।
नेहा का चेहरा लाल हो गया।
उसने मेरी तरफ़ देखा।
उसकी आँखों में शर्म भी थी और... एक अजीब सी उत्तेजना भी।
उसने लिखा:
“ओ मिस्टर... ज़बान संभाल के... वो मेरे पति हैं... मैं उनके बिना कुछ नहीं करूंगी... और आप उनकी गाली-गलौज करने की हिम्मत भी न करें।”
उसकी साँसें तेज़ थीं।
मैं हैरान था।
नेहा ने पहली बार अयान को इस तरह रोका था।
पहले वो उसकी गालियाँ चुपचाप पढ़ती थी, कभी-कभी मुस्कुरा भी देती थी।
लेकिन आज... उसने मेरी तरफ़ से जवाब दिया।
नेहा का मैसेज भेजने के बाद वहाँ कुछ देर तक कोई रिप्लाई नहीं आया।
अयान को लग रहा था कि वो किसी साधारण, आसानी से फुसलाने वाली लड़की से डील कर रहा है।
उसे नहीं पता था कि नेहा कितनी स्मार्ट है।
कई बार तो मुझे भी लगता था कि मैंने नेहा को कन्विंस नहीं किया, बल्कि नेहा ने मुझे तैयार किया है ये सब करने के लिए।
लगभग 6-7 मिनट बाद अयान का मैसेज आया।
पहले एक "Sorry" और फिर उसके साथ उसका लंड का फोटो।
बहुत साफ़, खड़ा, मोटा और नसों वाला।
नीचे लिखा था:
“Sorry yaar... ये आने के लिए बहुत excited था [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f60f.png[/img]”
नेहा ने फोटो देखा तो उसकी आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं।
उसने फोटो को ज़ूम करके देखा, फिर मेरी तरफ़ देखा।
उसके चेहरे पर गुस्सा तो था, लेकिन साथ में एक हल्की उत्तेजना भी छुप नहीं पा रही थी।
नेहा ने फोटो को कुछ सेकंड देखा, फिर मुझे दिखाते हुए बोली
नेहा अभी भी गुस्से में थी।
उसका चेहरा लाल था और होंठ सिकुड़े हुए थे।
मैंने उसके कंधे पर हल्का से थपकी दी और धीरे से कहा,
“कोई बात नहीं बेबी... शांत हो जा।”
नेहा ने गहरी साँस ली।
गुस्सा शांत करते हुए उसने लैपटॉप पर टाइप करना शुरू किया।
“तो इसे excited रखो...
मैंने कब मिलने से मना किया?
लोनावला में मिलते हैं...
फ्राइडे को ही...
क्या प्रॉब्लम है?”
मैसेज भेजते ही नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
उसकी आँखों में अब गुस्सा कम था, लेकिन एक ठोस फैसला साफ़ दिख रहा था।
कुछ देर बाद अयान का रिप्लाई आया:
“अच्छा बताता हूँ”
हा के जवाब ने मेरा दिल जीत लिया था।
उसने अयान को सीधा जवाब दिया था — मेरे सम्मान के साथ।
मुझे गर्व हुआ था।
लेकिन मैं ये भी जानना चाहता था कि अगर मैं वहाँ न होता तो वो क्या कहती।
मैंने धीरे से पूछा,
“नेहा... अगर मैं न मानता तो तुम क्या करती?”
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
उसकी आँखें कुछ पल के लिए मेरी आँखों में गड़ी रहीं।
फिर उसने बहुत शांत लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा,
“मैं अयान से बेकार आदमी की तरह नहीं मिलना चाहती।
हम बाहर मिल रहे हैं।
अगर सब ठीक रहा... और कुछ होता है... तो...”
मैं समझा नहीं।
या शायद मेरा दिमाग समझना नहीं चाह रहा था।
“मतलब?” मैंने पूछा।
नेहा ने धीरे-धीरे, रुक-रुककर कहा,
“मतलब... कि... शायद...
ये... वो... रात... हो...
जो... तुम... इतने... दिनों... से... देखना... चाहते... हो...”
उसका चेहरा लाल हो गया।
उसने आखिरी वाक्य इतनी धीमी आवाज़ में कहा कि मुझे पूरा यकीन हो गया।
ये चुदाई की बात थी।
पूर्ण सेक्स।
इस बार नेहा अयान के साथ पूरी तरह जाने को तैयार थी।
मुझे याद आया — बेकार आदमी के साथ पहली मुलाकात में जब उसने फुल सेक्स माँगा था, तो नेहा ने साफ़ मना कर दिया था।
“नहीं... सिर्फ़ यही तक।” कहकर वो रुक गई थी।
लेकिन अयान के मामले में...
वो पहली बार तैयार थी।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
गला सूख गया था।
मैं हकलाते हुए बोला,
“तुमने तो बेकार आदमी से वादा किया था... कि फुल सेक्स नहीं करोगी...”
उसकी मुस्कान में शरारत थी, थोड़ी शर्म थी और बहुत सारी हिम्मत।
“वो भी देख लेंगे...” उसने धीरे से कहा।
“लेकिन... अगर सब ठीक रहा तो...”
उसने वाक्य अधूरा छोड़ दिया।
मैंने उसे घूरा।
मेरा गला सूख रहा था।
कितना अजीब था सब कुछ...
मैं अपनी बीवी से दूसरे मर्दों के बारे में बात कर रहा था।
हम दोनों बैठकर फैसला कर रहे थे कि मेरी बीवी को किसके साथ रात बितानी है।
कौन मेरी बीवी की चूत की वो गहराइयाँ नापेगा, जहाँ मैं अब तक नहीं पहुँच पाया था।
मैंने धीरे से पूछा,
“तो ये तुम्हारा फाइनल फैसला है... अयान?”
नेहा ने आँखें मटकाते हुए, शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा,
“हाँ... मैं चाहती हूँ कि ये मेरा पहला हो।”
उसने लैपटॉप की स्क्रीन की तरफ़ इशारा किया।
वहाँ अयान का लंड का फोटो अभी भी खुला हुआ था — मोटा, तगड़ा, भारी, नसों वाला।
जो जल्द ही नेहा के अंदर जाएगा।
मैंने सोचा — उसके बाद कुछ दिनों तक नेहा को मेरा लंड हल्का-हल्का महसूस होगा।
ठीक वैसे जैसे शूति की चूत मुझे महसूस हुई थी, जब मैंने अपने रूममेट के 10 मिनट बाद उसे चोदा था।
(वो कहानी कभी और...)
नेहा ने कहा कि अयान उसका पहला होगा।
मुझे अचानक थोड़ा बुरा लगा।
नेगी जी, बिल्लू, वेणु, बेकार आदमी — इन सबने नेहा के साथ जो कुछ भी किया, उसके स्तनों को छुआ, उसके शरीर को नहलाया,
उसके अंदर उँगलियाँ डालीं...
उसने उन सबको नहीं गिना।
मगर मैं तो उसका पहला था... क्या वो मुझे भी नहीं गिन रही?
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
जैसे मेरा दिमाग पढ़ रही हो।
फिर मुस्कुराते हुए, मुझे चिढ़ाते हुए बोली,
“मेरा मतलब... तुम्हारे बाद वो पहला होगा।”
उसने ये कहते हुए मेरी गोद में हल्का सा हिलकर मेरे लंड पर दबाव डाला।
उसकी आँखों में शरारत और प्यार दोनों थे।
हम दोनों फिर से लैपटॉप देख रहे थे कि अयान के और मैसेज पॉप-अप होने लगे।
अयान:
“यार नेहा प्लीज... फ्राइडे का ही प्रोग्राम बना ले ना”
नेहा ने तुरंत जवाब दिया:
“ना बोला ना... वैसे भी हमारे ऑफिस बहुत बड़े हैं... कोई न कोई मिल सकता है।”
अयान:
“अरे यार ऐसे ही कोई थोड़ी मिलेगा इतने बड़े शहर में”
नेहा ने कुछ सोचते हुए लिखा:
“अरे तुम मुझसे ही मिलना चाहते हो तो कहीं और मिलेंगे ना... या किसी और काम से आ रहे हो यहाँ?”
फिर नेहा ने शरारत करते हुए लिखा:
“क्या मेरी जैसी कोई और भी पटा रखी है? सोच रहे हो दोनों को एक ही साथ एक ही ट्रिप में निपटा दोगे? [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f60f.png[/img]”
अयान:
“नहीं नहीं... ऐसा कुछ नहीं है”
नेहा ने मजाक वाली इमोजी के साथ लिखा:
“अगर ऐसा भी हो तो तुम इस बार उससे मिल लो... हम कोई BF-GF नहीं हैं... बाद में मिल सकते हैं [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f609.png[/img]”
इस बार अयान ने हाँ कर दी।
उसने लिखा कि वो लोनावला का प्लान बताएगा।
मैं और नेहा दोनों चुपचाप सब पढ़ रहे थे।
मुझे अब सब कुछ समझ आ रहा था।
जैसा आपने चैप्टर 1 में पढ़ा था — उसकी ये सारी बातें उस वक्त नहीं, लेकिन मुलाकात के बाद सेंस बनाने लगी थीं।
शायद अयान हमें expose करना चाहता था।
खासकर घर के साथ।
वो चाहता था कि सब कुछ हमारे घर में, हमारे बेड पर हो।
हमने कई गलत फैसले लिए थे, लेकिन पुणे में उससे न मिलना...
ये हमारा अब तक का सबसे सही फैसला था।
स रात हमने बेहद जोश और जुनून के साथ सेक्स किया।
नेहा बिल्कुल आग थी।
अयान का “हाँ” मिलने के बाद वो जैसे किसी और ही लेवल पर चली गई थी।
उसने मुझे बिस्तर पर धकेला, मेरी शर्ट फाड़ते हुए उतारी और मेरे ऊपर चढ़ गई।
“आज मुझे ज़ोर से चोदो सैम...” उसने मेरे कान में काटते हुए कहा।
उसकी चूत पहले से ही बहुत गीली थी।
वो मेरे लंड पर बैठ गई और एक ही झटके में पूरा अंदर ले लिया।
फिर तेज़-तेज़ कमर हिलाने लगी।
उसकी आहें कमरे में गूँज रही थीं।
“आह्ह... हाँ... और तेज़...”
मैंने उसके स्तनों को कस के दबाया, निप्पल चूसे, लेकिन नेहा का मन कहीं और था।
उसकी आँखें बंद थीं और वो बार-बार फुसफुसा रही थी — “अयान... अयान...”
उस दिन जब हम निकले, तो नेहा ने अयान से दो बार कन्फर्म कर लिया था।
नेहा बेहद एक्साइटेड थी।
उसने लाल साड़ी पहनी थी — वो वाली जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद थी।
सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़ियाँ, काजल, बिंदी — सब कुछ पूरा।
वो सर से पैर तक किसी की परफेक्ट, शादीशुदा बीवी लग रही थी।
साड़ी का पल्लू उसकी छाती पर लिपटा हुआ था, ब्लाउज थोड़ा टाइट, जिससे उसकी गोरी कमर का हिस्सा हल्का-हल्का दिख रहा था।
अयान ने खास तौर पर यही माँगा था — “मुझे तुम्हें साड़ी में देखना है, पूर्ण भारतीय बीवी वाली लुक में।”
मैं गाड़ी चला रहा था।
नेहा आगे वाली सीट पर बैठी थी, बार-बार आईने में खुद को देख रही थी।
उसके चेहरे पर एक अनोखी चमक थी।
मैंने हल्के से कहा,
“लग रहा है आज कोई दूसरा आदमी अपनी बीवी को ले जा रहा है।”
नेहा मुस्कुराई, मेरी जाँघ पर हाथ रखा और बोली,
“हाँ... आज मैं किसी और की बीवी बनकर जा रही हूँ।”
लोनावला पहुँचने तक हम दोनों चुप थे।
बेकार आदमी की याद आ रही थी — उसने नेहा को हमेशा मॉडर्न कपड़ों में, शॉर्ट ड्रेस, जींस, टॉप में बुलाया था।
जवान अयान नेहा को ट्रेडिशनल वाइफ के रूप में चोदना चाहता था।
हर किसी की अपनी फैंटसी होती है।
फिर वहाँ जो हुआ, वो हम सबने चैप्टर 1 में पढ़ा था।
वो धोखा।
जिसने नेहा को सच में तोड़ दिया।
लोनावला के होटल की लॉबी में छिपते-छिपते, साँस रोके, स्टाफ डोर से भागते हुए जब हम कार में बैठे, तब तक नेहा का पूरा शरीर काँप रहा था।
रास्ते भर वो चुप रही।
घर पहुँचकर भी वो सीधे सोफे पर बैठ गई। एक सिगरेट जलाई और बिना रुके पीने लगी।
मैं लैपटॉप खोलकर अयान के मैसेज पढ़ रहा था।
जब मैंने नेहा को दिखाया कि अयान ने हमें देखा भी नहीं था, वो सिर्फ़ ब्लफ मार रहा था — तब नेहा का चेहरा और भी सफेद पड़ गया।
उसने लैपटॉप को घूरा।
फिर धीरे-धीरे उसकी आँखों में आँसू भर आए।
महीनों का इमोशनल कनेक्शन, वो सारी बातें, वो विश्वास — सब एक पल में बेकार हो गया।
ये वो धोखा था जिसने नेहा को अंदर तक तोड़ दिया।
उसके बाद नेहा कई दिनों तक चुप रही।
हँसना बंद कर दिया।
मेरे साथ भी बातें कम हो गईं।
वो सिर्फ़ एक बात बार-बार कहती थी:
नेहा: “अब किसी पर भरोसा नहीं करना सैम...
किसी पर भी।”
ये था वो धोखा।
जिसने नेहा को सच में तोड़ दिया।
“क्या हम अयान से मिल सकते हैं?”
मैंने उसकी तरफ़ देखा।
उसके चेहरे पर हल्की सी हिचकिचाहट थी, लेकिन आँखों में उम्मीद भी।
मैंने कभी भी अयान से मिलने के लिए मना नहीं किया था।
मुंबई में भी मैं तैयार था मिलवाने को।
मैंने सहज भाव से कहा,
“क्यों नहीं? कहाँ मिलना है?”
नेहा थोड़ा रुकी।
“वो... वो...”
वो कुछ कहने की कोशिश कर रही थी लेकिन शब्द नहीं निकल रहे थे।
मैंने फिर पूछा, “क्या हुआ?”
नेहा ने नीचे देखते हुए धीरे से कहा,
“वो यहाँ आना चाहता है।”
मेरा दिल एक झटके से धड़का।
“यहाँ मतलब... घर पर?”
नेहा ने तुरंत सिर हिलाया,
“नहीं... घर नहीं। पुणे... फिर देखते हैं।”
उसने “फिर देखते हैं” कहकर बात को अधूरा छोड़ दिया।
लेकिन मैं समझ गया — नेहा अयान को घर लाना चाहती थी, बस अभी सीधे कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी।
खाने के बाद मैंने नेहा से सीधे पूछ लिया,
“तुमने उससे मिलने के लिए कहा था क्या?”
नेहा थोड़ा हिचकिचाई।
उसने मेरी आँखों में देखा, फिर नज़रें नीचे कर लीं।
कुछ सेकंड चुप रहने के बाद उसने धीरे से जवाब दिया,
“मुंबई के बाद... मैंने उससे मिलने के लिए पूछना बंद कर दिया था।”
मैंने उसकी तरफ़ देखा।
नेहा की आवाज़ में एक अजीब सी मिश्रित भावना थी — थोड़ा गुस्सा, थोड़ा दर्द, और थोड़ी शर्म।
“फिर अब अचानक वो खुद कह रहा है कि यहाँ आना चाहता है?” मैंने पूछा।
नेहा ने सिर हिलाया।
“हाँ... कल रात उसने खुद पूछा। बोला कि अब वो तैयार है... और मुझे मिलना चाहता है।”
मैं चुप रहा।
दिमाग में सारी पुरानी बातें घूम गईं — मुंबई की ट्रिप, अयान का गायब हो जाना, नेहा के आँसू, और फिर बेकार आदमी वाला rebound।
नेहा मेरे पास आई, मेरी गोद में बैठ गई और मेरे सीने से लगकर बोली,
“सैम... अगर तुम नहीं चाहते तो मैं मना कर दूँगी।
लेकिन... वो कह रहा है कि इस बार वो सच में मिलना चाहता है।”
उसकी आवाज़ में अब वो पुरानी चमक लौट आई थी।
मैंने उसके बालों में हाथ फेरा और धीरे से पूछा,
“तुम क्या चाहती हो?”
नेहा ने मेरी आँखों में देखा।
कुछ पल चुप रहने के बाद उसने बहुत धीमी, लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा,
“मैं... मिलना चाहती हूँ।”
मैंने फिर नेहा से पूछा,
“क्या कहा उसने ठीक-ठीक?”
नेहा ने थोड़ा सा गला साफ़ करते हुए कहा,
“उसने मुझे पूछा है कि क्या हम मिल सकते हैं। वो पुणे आने को तैयार है।
नेक्स्ट फ्राइडे को।
कहाँ मिलना है, अभी डिसाइड नहीं किया है।”
मैंने गंभीर होकर कहा,
“तुम्हें पता है ना... बिना मिले किसी को घर का पता दे देना ठीक नहीं होता।”
नेहा तुरंत चिढ़ गई।
उसने मेरी तरफ़ देखा, आँखें थोड़ी सिकुड़ी हुईं।
“मैंने कब कहा कि हम उसे घर ले आएँगे?”
उसकी आवाज़ में हल्का गुस्सा था।
“मैंने तो बस इतना कहा कि वो पुणे आ सकता है। घर की बात ही नहीं की मैंने!”
मैं चुप रहा।
नेहा ने मेरी गोद से उठते हुए कहा,
“तुम हर बार ऐसा क्यों सोच लेते हो?
जैसे मैं बेवकूफ़ हूँ और सीधा घर बुला लूँगी।”
उसने लैपटॉप उठाया और बेड पर बैठ गई।
मैं समझ गया — वो नाराज़ हो गई थी।
मैं उसके पास गया, उसके कंधे पर हाथ रखा और धीरे से बोला,
“मैं बस सेफ्टी की बात कर रहा था बेबी।
अयान को हम अभी तक सिर्फ़ ऑनलाइन जानते हैं।”
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
उसकी नाराज़गी थोड़ी कम हुई, लेकिन वो अभी भी चिढ़ी हुई थी।
“तो फिर क्या करूँ?
मना कर दूँ?”
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा। उसकी आँखों में अब साफ़ नाराज़गी और थोड़ी चुनौती थी।
“तुमने बेकार आदमी को तो घर आने कहा था,” उसने कहा।
“तुमने खुद मुझे कहा था कि मैं उसे हाँ कह सकती हूँ।”
मैंने गहरी साँस ली।
“उसकी बात अलग थी नेहा।
हम पहले उससे मिल चुके थे। उसके घर गए थे। उसके हालात देखे थे। तब जाकर हमने फैसला लिया था।
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा, जैसे मेरी बात को तोल रही हो।
मैंने आगे कहा,
“अयान सिर्फ़ हमारे लिए यहाँ आएगा। अगर उसने रुकने के लिए कहा तो...
नहीं।
यहाँ नहीं।
उसे बोल दो कहीं बाहर मिलना है — होटल, कैफ़े, या कोई पब्लिक प्लेस। घर नहीं।”
नेहा कुछ पल चुप रही।
फिर उसने लैपटॉप पर उँगलियाँ चलाईं और धीरे से बोली,
“ठीक है... मैं उसे यही बोल दूँगी।
लेकिन उसके चेहरे पर वो असंतोष साफ़ दिख रहा था।
जैसे वो चाहती हो कि अयान घर आए, मेरे सामने, हमारे बेडरूम में...
मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा।
“नेहा, मैं मना नहीं कर रहा हूँ।
बस सेफ्टी और हमारे नियम... याद है ना?”
नेहा लैपटॉप पर टाइप कर रही थी। मैं उसके पीछे खड़ा सब पढ़ रहा था।
नेहा ने लिखा:
“हम पुणे में नहीं मिल सकते... कहीं और मिलते हैं... पास में... मुंबई-पुणे के बीच कहीं मिलते हैं...”
अयान का रिप्लाई तुरंत आया। उसकी नाराज़गी साफ़ दिख रही थी:
“what the fuck नेहा बेबी.... मैंने पूरी तैयारी कर ली थी आने की.... इस टाइम पर KLPD मत कर जान”
नेहा ने हल्का मुस्कुराते हुए मेरी तरफ़ देखा और फिर लिखा:
“सम नहीं चाहते कि हम अभी घर या घर के आस-पास मिलें”
अयान ने तुरंत जवाब दिया:
“क्यों अभी भी भरोसा नहीं है क्या... सम है क्या आस-पास?”
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
मैंने धीरे से कहा, “बोल दो कि मैं पास में नहीं हूँ।”
मैं उसका रिएक्शन देखना चाहता था।
नेहा ने एक पल सोचा, फिर लैपटॉप पर टाइप किया:
“सम पास में नहीं है।”
अयान का रिप्लाई आया — और इस बार बहुत गंदा और आक्रामक:
“तेरा पति एक नंबर का चूतिया है भैंचोद.... मादरचोद को बीवी भी चुदवानी है और गांड भी फट रही है साले की...
तू मारने दे उसे... तू बोल देना कि तू ऑफिस जा रही है... और मिलने आ जा ना..... फिर अपन दोनों तेरे cucky hubby को सरप्राइज़ देंगे [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f525.png[/img]”
मैं और नेहा दोनों चुपचाप पढ़ रहे थे।
अयान पहले भी मुझे गालियाँ देता था, लेकिन आज कुछ अलग था।
इस बार उसकी गालियों में गुस्सा, घृणा और खुली हिकारत थी। जैसे वो मुझे सच में तुच्छ समझता हो।
नेहा का चेहरा लाल हो गया।
उसने मेरी तरफ़ देखा।
उसकी आँखों में शर्म भी थी और... एक अजीब सी उत्तेजना भी।
उसने लिखा:
“ओ मिस्टर... ज़बान संभाल के... वो मेरे पति हैं... मैं उनके बिना कुछ नहीं करूंगी... और आप उनकी गाली-गलौज करने की हिम्मत भी न करें।”
उसकी साँसें तेज़ थीं।
मैं हैरान था।
नेहा ने पहली बार अयान को इस तरह रोका था।
पहले वो उसकी गालियाँ चुपचाप पढ़ती थी, कभी-कभी मुस्कुरा भी देती थी।
लेकिन आज... उसने मेरी तरफ़ से जवाब दिया।
नेहा का मैसेज भेजने के बाद वहाँ कुछ देर तक कोई रिप्लाई नहीं आया।
अयान को लग रहा था कि वो किसी साधारण, आसानी से फुसलाने वाली लड़की से डील कर रहा है।
उसे नहीं पता था कि नेहा कितनी स्मार्ट है।
कई बार तो मुझे भी लगता था कि मैंने नेहा को कन्विंस नहीं किया, बल्कि नेहा ने मुझे तैयार किया है ये सब करने के लिए।
लगभग 6-7 मिनट बाद अयान का मैसेज आया।
पहले एक "Sorry" और फिर उसके साथ उसका लंड का फोटो।
बहुत साफ़, खड़ा, मोटा और नसों वाला।
नीचे लिखा था:
“Sorry yaar... ये आने के लिए बहुत excited था [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f60f.png[/img]”
नेहा ने फोटो देखा तो उसकी आँखें थोड़ी बड़ी हो गईं।
उसने फोटो को ज़ूम करके देखा, फिर मेरी तरफ़ देखा।
उसके चेहरे पर गुस्सा तो था, लेकिन साथ में एक हल्की उत्तेजना भी छुप नहीं पा रही थी।
नेहा ने फोटो को कुछ सेकंड देखा, फिर मुझे दिखाते हुए बोली
नेहा अभी भी गुस्से में थी।
उसका चेहरा लाल था और होंठ सिकुड़े हुए थे।
मैंने उसके कंधे पर हल्का से थपकी दी और धीरे से कहा,
“कोई बात नहीं बेबी... शांत हो जा।”
नेहा ने गहरी साँस ली।
गुस्सा शांत करते हुए उसने लैपटॉप पर टाइप करना शुरू किया।
“तो इसे excited रखो...
मैंने कब मिलने से मना किया?
लोनावला में मिलते हैं...
फ्राइडे को ही...
क्या प्रॉब्लम है?”
मैसेज भेजते ही नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
उसकी आँखों में अब गुस्सा कम था, लेकिन एक ठोस फैसला साफ़ दिख रहा था।
कुछ देर बाद अयान का रिप्लाई आया:
“अच्छा बताता हूँ”
हा के जवाब ने मेरा दिल जीत लिया था।
उसने अयान को सीधा जवाब दिया था — मेरे सम्मान के साथ।
मुझे गर्व हुआ था।
लेकिन मैं ये भी जानना चाहता था कि अगर मैं वहाँ न होता तो वो क्या कहती।
मैंने धीरे से पूछा,
“नेहा... अगर मैं न मानता तो तुम क्या करती?”
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
उसकी आँखें कुछ पल के लिए मेरी आँखों में गड़ी रहीं।
फिर उसने बहुत शांत लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा,
“मैं अयान से बेकार आदमी की तरह नहीं मिलना चाहती।
हम बाहर मिल रहे हैं।
अगर सब ठीक रहा... और कुछ होता है... तो...”
मैं समझा नहीं।
या शायद मेरा दिमाग समझना नहीं चाह रहा था।
“मतलब?” मैंने पूछा।
नेहा ने धीरे-धीरे, रुक-रुककर कहा,
“मतलब... कि... शायद...
ये... वो... रात... हो...
जो... तुम... इतने... दिनों... से... देखना... चाहते... हो...”
उसका चेहरा लाल हो गया।
उसने आखिरी वाक्य इतनी धीमी आवाज़ में कहा कि मुझे पूरा यकीन हो गया।
ये चुदाई की बात थी।
पूर्ण सेक्स।
इस बार नेहा अयान के साथ पूरी तरह जाने को तैयार थी।
मुझे याद आया — बेकार आदमी के साथ पहली मुलाकात में जब उसने फुल सेक्स माँगा था, तो नेहा ने साफ़ मना कर दिया था।
“नहीं... सिर्फ़ यही तक।” कहकर वो रुक गई थी।
लेकिन अयान के मामले में...
वो पहली बार तैयार थी।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
गला सूख गया था।
मैं हकलाते हुए बोला,
“तुमने तो बेकार आदमी से वादा किया था... कि फुल सेक्स नहीं करोगी...”
उसकी मुस्कान में शरारत थी, थोड़ी शर्म थी और बहुत सारी हिम्मत।
“वो भी देख लेंगे...” उसने धीरे से कहा।
“लेकिन... अगर सब ठीक रहा तो...”
उसने वाक्य अधूरा छोड़ दिया।
मैंने उसे घूरा।
मेरा गला सूख रहा था।
कितना अजीब था सब कुछ...
मैं अपनी बीवी से दूसरे मर्दों के बारे में बात कर रहा था।
हम दोनों बैठकर फैसला कर रहे थे कि मेरी बीवी को किसके साथ रात बितानी है।
कौन मेरी बीवी की चूत की वो गहराइयाँ नापेगा, जहाँ मैं अब तक नहीं पहुँच पाया था।
मैंने धीरे से पूछा,
“तो ये तुम्हारा फाइनल फैसला है... अयान?”
नेहा ने आँखें मटकाते हुए, शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा,
“हाँ... मैं चाहती हूँ कि ये मेरा पहला हो।”
उसने लैपटॉप की स्क्रीन की तरफ़ इशारा किया।
वहाँ अयान का लंड का फोटो अभी भी खुला हुआ था — मोटा, तगड़ा, भारी, नसों वाला।
जो जल्द ही नेहा के अंदर जाएगा।
मैंने सोचा — उसके बाद कुछ दिनों तक नेहा को मेरा लंड हल्का-हल्का महसूस होगा।
ठीक वैसे जैसे शूति की चूत मुझे महसूस हुई थी, जब मैंने अपने रूममेट के 10 मिनट बाद उसे चोदा था।
(वो कहानी कभी और...)
नेहा ने कहा कि अयान उसका पहला होगा।
मुझे अचानक थोड़ा बुरा लगा।
नेगी जी, बिल्लू, वेणु, बेकार आदमी — इन सबने नेहा के साथ जो कुछ भी किया, उसके स्तनों को छुआ, उसके शरीर को नहलाया,
उसके अंदर उँगलियाँ डालीं...
उसने उन सबको नहीं गिना।
मगर मैं तो उसका पहला था... क्या वो मुझे भी नहीं गिन रही?
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा।
जैसे मेरा दिमाग पढ़ रही हो।
फिर मुस्कुराते हुए, मुझे चिढ़ाते हुए बोली,
“मेरा मतलब... तुम्हारे बाद वो पहला होगा।”
उसने ये कहते हुए मेरी गोद में हल्का सा हिलकर मेरे लंड पर दबाव डाला।
उसकी आँखों में शरारत और प्यार दोनों थे।
हम दोनों फिर से लैपटॉप देख रहे थे कि अयान के और मैसेज पॉप-अप होने लगे।
अयान:
“यार नेहा प्लीज... फ्राइडे का ही प्रोग्राम बना ले ना”
नेहा ने तुरंत जवाब दिया:
“ना बोला ना... वैसे भी हमारे ऑफिस बहुत बड़े हैं... कोई न कोई मिल सकता है।”
अयान:
“अरे यार ऐसे ही कोई थोड़ी मिलेगा इतने बड़े शहर में”
नेहा ने कुछ सोचते हुए लिखा:
“अरे तुम मुझसे ही मिलना चाहते हो तो कहीं और मिलेंगे ना... या किसी और काम से आ रहे हो यहाँ?”
फिर नेहा ने शरारत करते हुए लिखा:
“क्या मेरी जैसी कोई और भी पटा रखी है? सोच रहे हो दोनों को एक ही साथ एक ही ट्रिप में निपटा दोगे? [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f60f.png[/img]”
अयान:
“नहीं नहीं... ऐसा कुछ नहीं है”
नेहा ने मजाक वाली इमोजी के साथ लिखा:
“अगर ऐसा भी हो तो तुम इस बार उससे मिल लो... हम कोई BF-GF नहीं हैं... बाद में मिल सकते हैं [img=26x0]https://cdn.jsdelivr.net/joypixels/assets/7.0/png/unicode/64/1f609.png[/img]”
इस बार अयान ने हाँ कर दी।
उसने लिखा कि वो लोनावला का प्लान बताएगा।
मैं और नेहा दोनों चुपचाप सब पढ़ रहे थे।
मुझे अब सब कुछ समझ आ रहा था।
जैसा आपने चैप्टर 1 में पढ़ा था — उसकी ये सारी बातें उस वक्त नहीं, लेकिन मुलाकात के बाद सेंस बनाने लगी थीं।
शायद अयान हमें expose करना चाहता था।
खासकर घर के साथ।
वो चाहता था कि सब कुछ हमारे घर में, हमारे बेड पर हो।
हमने कई गलत फैसले लिए थे, लेकिन पुणे में उससे न मिलना...
ये हमारा अब तक का सबसे सही फैसला था।
स रात हमने बेहद जोश और जुनून के साथ सेक्स किया।
नेहा बिल्कुल आग थी।
अयान का “हाँ” मिलने के बाद वो जैसे किसी और ही लेवल पर चली गई थी।
उसने मुझे बिस्तर पर धकेला, मेरी शर्ट फाड़ते हुए उतारी और मेरे ऊपर चढ़ गई।
“आज मुझे ज़ोर से चोदो सैम...” उसने मेरे कान में काटते हुए कहा।
उसकी चूत पहले से ही बहुत गीली थी।
वो मेरे लंड पर बैठ गई और एक ही झटके में पूरा अंदर ले लिया।
फिर तेज़-तेज़ कमर हिलाने लगी।
उसकी आहें कमरे में गूँज रही थीं।
“आह्ह... हाँ... और तेज़...”
मैंने उसके स्तनों को कस के दबाया, निप्पल चूसे, लेकिन नेहा का मन कहीं और था।
उसकी आँखें बंद थीं और वो बार-बार फुसफुसा रही थी — “अयान... अयान...”
उस दिन जब हम निकले, तो नेहा ने अयान से दो बार कन्फर्म कर लिया था।
नेहा बेहद एक्साइटेड थी।
उसने लाल साड़ी पहनी थी — वो वाली जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद थी।
सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़ियाँ, काजल, बिंदी — सब कुछ पूरा।
वो सर से पैर तक किसी की परफेक्ट, शादीशुदा बीवी लग रही थी।
साड़ी का पल्लू उसकी छाती पर लिपटा हुआ था, ब्लाउज थोड़ा टाइट, जिससे उसकी गोरी कमर का हिस्सा हल्का-हल्का दिख रहा था।
अयान ने खास तौर पर यही माँगा था — “मुझे तुम्हें साड़ी में देखना है, पूर्ण भारतीय बीवी वाली लुक में।”
मैं गाड़ी चला रहा था।
नेहा आगे वाली सीट पर बैठी थी, बार-बार आईने में खुद को देख रही थी।
उसके चेहरे पर एक अनोखी चमक थी।
मैंने हल्के से कहा,
“लग रहा है आज कोई दूसरा आदमी अपनी बीवी को ले जा रहा है।”
नेहा मुस्कुराई, मेरी जाँघ पर हाथ रखा और बोली,
“हाँ... आज मैं किसी और की बीवी बनकर जा रही हूँ।”
लोनावला पहुँचने तक हम दोनों चुप थे।
बेकार आदमी की याद आ रही थी — उसने नेहा को हमेशा मॉडर्न कपड़ों में, शॉर्ट ड्रेस, जींस, टॉप में बुलाया था।
जवान अयान नेहा को ट्रेडिशनल वाइफ के रूप में चोदना चाहता था।
हर किसी की अपनी फैंटसी होती है।
फिर वहाँ जो हुआ, वो हम सबने चैप्टर 1 में पढ़ा था।
वो धोखा।
जिसने नेहा को सच में तोड़ दिया।
लोनावला के होटल की लॉबी में छिपते-छिपते, साँस रोके, स्टाफ डोर से भागते हुए जब हम कार में बैठे, तब तक नेहा का पूरा शरीर काँप रहा था।
रास्ते भर वो चुप रही।
घर पहुँचकर भी वो सीधे सोफे पर बैठ गई। एक सिगरेट जलाई और बिना रुके पीने लगी।
मैं लैपटॉप खोलकर अयान के मैसेज पढ़ रहा था।
जब मैंने नेहा को दिखाया कि अयान ने हमें देखा भी नहीं था, वो सिर्फ़ ब्लफ मार रहा था — तब नेहा का चेहरा और भी सफेद पड़ गया।
उसने लैपटॉप को घूरा।
फिर धीरे-धीरे उसकी आँखों में आँसू भर आए।
महीनों का इमोशनल कनेक्शन, वो सारी बातें, वो विश्वास — सब एक पल में बेकार हो गया।
ये वो धोखा था जिसने नेहा को अंदर तक तोड़ दिया।
उसके बाद नेहा कई दिनों तक चुप रही।
हँसना बंद कर दिया।
मेरे साथ भी बातें कम हो गईं।
वो सिर्फ़ एक बात बार-बार कहती थी:
नेहा: “अब किसी पर भरोसा नहीं करना सैम...
किसी पर भी।”
ये था वो धोखा।
जिसने नेहा को सच में तोड़ दिया।


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