24-05-2026, 11:16 AM
मेरा दिल एक झटके से धड़क गया।
अयान।
वो लड़का जिसे नेहा बहुत पसंद करती थी।
हाँ, ये सब मुझे अब अच्छे से याद है।
हम दोनों खास तौर पर अयान से मिलने मुंबई गए थे।
नेहा उसे बहुत पसंद करती थी — वो सुसंस्कृत, हैंडसम, अच्छा बोलने वाला, जिम वाला लड़का था।
लेकिन मिलने के बाद अयान अचानक गायब हो गया — महीनों तक कोई मैसेज, कोई कॉल नहीं।
उसी दौरान नेहा ने “बेकार आदमी” से बात शुरू कर दी।
वो अयान के बिल्कुल उलट था — रूप में, बातचीत में, स्टाइल में, संस्कार में हर मामले में inferior।
बस एक ही चीज़ में मुकाबला था — उसका लंड।
साइज़ और मोटाई में अयान जितना ही बड़ा और तगड़ा, लेकिन दिखने में थोड़ा गंदा और बदबूदार।
फिर जो हुआ, वो सब एक छोटी-सी मुलाकात में ही हो गया।
सब कुछ इतनी तेज़ी से हुआ कि मुझे खुद यकीन नहीं हुआ।
हैंडजॉब, ब्लोजॉब, फिंगरिंग — जितना भी हुआ, वो बस एक घंटे-डेढ़ घंटे की मुलाकात में पूरा हो गया।
मुझे कहीं न कहीं ये लगता था कि नेहा ये सब अयान को अपने दिमाग से निकालने के लिए कर रही थी।
ठीक वैसे जैसे लोग ब्रेकअप या ghosting के बाद करते हैं — बिना सोचे-समझे किसी भी व्यक्ति के साथ involve हो जाते हैं, सिर्फ़ उस खालीपन को भरने के लिए।
जैसे ब्रेकअप के बाद लोग बिना सोचे-समझे किसी से भी involve हो जाते हैं।
और अब अयान वापस आ गया था।
नेहा ने लैपटॉप खोला।
उसकी आँखों में एक चमक थी।
वो मैसेज पढ़ रही थी।
मैं चुपचाप उसके बगल में बैठ गया।
अगले कुछ दिन नेहा बेहद खुश थी।
सब पहले जैसा हो गया था।
हम ऑफिस से आते, बिना किसी औपचारिक बात के नेहा लैपटॉप के सामने बैठ जाती।
हम खाना भी लैपटॉप के सामने ही खाते।
टीवी के सामने बैठे हुए दिन हो गए थे, अब टीवी बंद ही रहता।
मैं चुपचाप देखता रहता।
नेहा की लंबी-लंबी बातें अयान के साथ।
वो सुसंस्कृत, सुंदर, जिम जाने वाला लड़का।
नेहा उसके साथ घंटों बात करती — कभी हँसती, कभी शरमाती, कभी अपनी छोटी-छोटी बातें बताती।
अयान उसे “सुंदर”, “सेक्सी”, “मेरी सपनों की लड़की” कहता।
नेहा का चेहरा खिल जाता।
और फिर...
बेकार आदमी के साथ वाली चैट।
वो वाली चैट पूरी तरह गंदी होती।
“कैसी है मेरी रंडी?”
“आज पति ने चोदा या नहीं?”
“चूत दिखा... पैंटी उतार...
कभी-कभी वॉइस कॉल पर भी बात होती।
बेकार आदमी उसे गालियाँ देता, नेहा हँसती और जवाब देती।
मैं बगल में बैठा सब देखता।
कभी-कभी मेरा लिंग खड़ा हो जाता, कभी दिल में जलन होती।
पहले तो अयान ने नेहा से गुस्से में बात की — कुछ दिन तक।
नेहा ने अयान से बिल्कुल ठंडी होकर बात की।
भले ही वो अंदर से कितनी भी उत्साहित हो, उसने अपनी आवाज़ में कोई गर्माहट नहीं आने दी।
नेहा ने लिखा, “कहाँ थे इतने दिन?”
अयान ने तुरंत जवाब दिया, “सॉरी यार... मेरा एक्सीडेंट हो गया था... मैं किसी से बात नहीं कर पाया।”
उसने कुछ हॉस्पिटल की फोटोज भी भेज दीं।
नेहा ने बस “हम्म” लिख दिया।
अयान ने फिर लिखा, “सॉरी यार... तुम मुंबई आए... मैं मिल नहीं पाया... तुम्हें बुरा लगा होगा।”
नेहा ने जवाब दिया, “कोई बात नहीं... वैसे भी हमें ज्यादा समय नहीं मिला था... पूरे समय बिज़ी ही थे।”
वो जताना चाहती थी कि अयान उसके लिए इतना महत्वपूर्ण नहीं है।
लेकिन असलियत कुछ और थी।
मैंने नेहा को मायूस देखा था।
कभी-कभी रात में उसकी आँखों में आँसू भी थे।
वो अयान के साथ couple जैसा बर्ताव कर रही थी — और जब वो गायब हो गया तो नेहा को सच में दर्द हुआ था।
धीरे-धीरे सब शुरू होने लगा।
बातें फिर से रोमांटिक हो गईं।
जो आधी रात तक आते-आते बेहद सेक्सी हो जातीं।
हम बिस्तर पर सेक्स करते।
लैपटॉप खुला रहता।
हमने कभी लाइव नहीं दिखाया, लेकिन वॉइस कॉल पर नेहा की आहें और कराहें जाती थीं।
अयान सुनता और उत्तेजित हो जाता।
बेकार आदमी से सिर्फ़ एक घंटे की विंडो में बात होती थी — वो भी रात 9 से 10 के बीच।
लेकिन अयान के पास नेहा के लिए पूरा समय था।
हम सेक्स करते।
मैं थक जाता।
जब मैं सोने जाता, तो नेहा को कहता, “बस 5 मिनट बात कर लो ना...”
फिर वो बातें घंटों में बदल जातीं।
कभी-कभी मुझे नेहा को याद दिलाना पड़ता, “कल ऑफिस भी जाना है...”
नेहा मुस्कुराती, “हाँ... बस 2 मिनट और...”
और फिर 2 मिनट घंटे बन जाते।
मैं बिस्तर पर लेटा रहता।
अंधेरे में नेहा की हँसी, उसकी फुसफुसाहट, और कभी-कभी उसकी उत्तेजित साँसें सुनता।
मुझे जलन होती थी।
मुझे उत्तेजना भी होती थी।
उसके साथ जो नेहा गुप्ता जी के बेटे राहुल के साथ कर रही थी, वो भी जारी था।
मेरी बीवी वर्चुअली ही सही, लेकिन अब 3-4 मर्दों के बीच में थी।
अयान, बेकार आदमी, और अब राहुल।
कभी-कभी मुझे डर लगता था कि रायता ज्यादा न फैल जाए।
कहीं कोई बात बाहर न निकल जाए।
कहीं गुप्ता जी को पता न चल जाए कि उसका बेटा मेरी बीवी को बालकनी में, छत पर, या चैट पर कितना देख रहा है।
लेकिन राहुल के साथ मामला अभी तक “टाँक झाँक” तक ही सीमित था।
नेहा बहुत होशियार थी।
वो जानती थी — कितना दिखाना है, कितना छुपाना है।
सुबह बालकनी में वो अपनी शॉर्ट स्कर्ट पहनकर खड़ी हो जाती, बाल खोलकर, कभी-कभी टॉप का एक बटन खोलकर।
राहुल अपनी बालकनी में खड़ा उसे घूरता।
नेहा जानबूझकर झुकती, ताकि उसकी गोरी जाँघें और थोड़ी नजर आएँ।
कभी सिगरेट पीते हुए वो राहुल को देखकर मुस्कुराती और आँख मार देती।
राहुल का हाथ अपने पजामे पर चला जाता।
नेहा देखती और फिर अंदर चली जाती।
ये सब उसने बहुत अच्छे से कंट्रोल में रखा था।
न ज्यादा, न कम।
बस उतना जितना राहुल को उत्तेजित रखे, लेकिन उसकी हिम्मत न बढ़े कि वो कुछ और माँगे।
मैं सब देखता।
कभी जलन होती, कभी उत्तेजना।
कभी डर लगता कि ये खेल कब और कहाँ तक जाएगा।
रात में जब नेहा अयान से बात करती, तो वो रोमांटिक और सेक्सी होती।
बेकार आदमी से गंदी और बेशर्म।
और राहुल के साथ दिन में वो “नॉटी पड़ोसन” वाली भूमिका निभाती।
तीन अलग-अलग मर्द।
तीन अलग-अलग स्वाद।
और मेरी बीवी... इन तीनों के बीच में।
रात के दो बज रहे थे।
मेरी आँखें अचानक खुल गईं।
बिस्तर पर नेहा नहीं थी।
मैंने वॉशरूम देखा — खाली।
बालकनी — खाली।
फिर मैंने मुख्य दरवाज़े की तरफ़ देखा।
वहाँ, थोड़े से कोने में...
नेहा खड़ी थी।
गुप्ता जी के साथ।
दोनों अर्ध रात में।
नेहा ने साधारण टी-शर्ट और पजामा पहना हुआ था।
गुप्ता जी भी घरेलू कपड़ों में थे।
दोनों किसी बात पर हँस रहे थे।
नेहा के हाथ में सिगरेट थी — आधी जली हुई।
मेरा दिल जोर से धड़कने लगा।
मैं धीरे से फुसफुसाया, “नेहा... नेहा...”
दोनों ने मेरी तरफ़ देखा।
नेहा ने मुझे इशारा किया कि आ जाओ।
मैं आँखें मलते हुए वहाँ पहुँचा।
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“बेबी... मेरी सिगरेट खत्म हो गई थी। मैंने ब्लिंकिट से मँगाई थी... दरवाज़े पर खड़ी थी ताकि बेल बजने से तुम्हारी नींद न खुल जाए... फिर सामने अंकल खड़े हुए थे।”
गुप्ता जी ने हल्के से हँसते हुए सिर हिलाया,
“हाँ बेटा, मैं भी रात को सिगरेट पीने आया था।”
मैंने दोनों को देखा।
नेहा का चेहरा थोड़ा लाल था — शायद नशे या हँसी की वजह से।
गुप्ता जी का हाथ अपनी जेब में था, लेकिन उनकी नज़र बार-बार नेहा की टी-शर्ट पर जा रही थी, जहाँ से उसकी छाती की आउटलाइन साफ़ दिख रही थी।
मैं चुप रहा।
कुछ कहने को नहीं था।
नेहा ने सिगरेट गुप्ता जी को देते हुए कहा,
“अंकल, आप ले लीजिए... मैं अंदर जाती हूँ।”
गुप्ता जी ने सिगरेट लेते हुए नेहा की उँगलियों को थोड़ा छू लिया।
नेहा ने कुछ नहीं कहा।
बस हल्के से मुस्कुराई।
मैं नेहा को अंदर ले आया।
मैं गुप्ता जी से दो-चार और बातें करके अंदर आ गया।
दरवाज़ा बंद करते समय भी मेरे दिमाग में वही सवाल घूम रहा था —
जब मैं सोया था तब नेहा सिर्फ़ टी-शर्ट और पैंटी में थी।
ब्रा भी नहीं पहनी थी।
फिर अचानक पजामा कैसे पहन लिया?
क्या नेहा डिलीवरी बॉय के इंतज़ार में पजामा पहनकर गई थी?
या... सिर्फ़ पैंटी में ही दरवाज़ा खोला था?
मैंने कई वीडियो देखे हैं जहाँ कपल्स “डेयर” के नाम पर ऐसी ही हरकतें करते हैं।
क्या नेहा ने भी...?
नेहा अंदर बिस्तर पर लेट चुकी थी।
बिना कुछ कहे।
जैसे कुछ हुआ ही न हो।
मैं बिस्तर पर लेटा तो वो तुरंत मेरे पास सरक आई।
मेरी छाती से लिपट गई।
उसके नरम स्तन मेरी छाती से दब रहे थे।
उसके बाल मेरे चेहरे पर फैले हुए थे।
मैंने धीरे से उसके बालों में हाथ फेरा।
नेहा ने कुछ नहीं कहा।
बस और कस के लिपट गई।
मेरे दिमाग में बार-बार वो तस्वीर आ रही थी —
रात के दो बजे...
नेहा और गुप्ता जी...
एक ही सिगरेट पी रहे थे।
दोनों के होंठ एक-एक करके उसी सिगरेट के एक ही हिस्से को छू रहे थे।
नेहा की साँसें धीमी और गर्म थीं।
मुझे लगा वो पहले से ही सो चुकी है।
मैंने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा,
“नेहा... गुप्ता जी के साथ क्या बात हो रही थी?”
नेहा ने आँखें बंद रखते हुए सिर्फ़ इतना कहा,
“बस... सिगरेट... और थोड़ी सी ऑफिस वाली बात... सो जाओ ना बेबी...”
उसकी आवाज़ में कोई शर्म नहीं थी।
न कोई सफाई।
जैसे एक सिगरेट शेयर करना, आधी रात में अकेले गुप्ता जी के साथ खड़े होना — ये सब बिल्कुल सामान्य बात हो।
मैं चुप रहा।
उसकी कमर पर हाथ रखकर उसे और कस के अपनी तरफ खींच लिया।
लेकिन नींद मुझे बहुत देर बाद आई।
अयान।
वो लड़का जिसे नेहा बहुत पसंद करती थी।
हाँ, ये सब मुझे अब अच्छे से याद है।
हम दोनों खास तौर पर अयान से मिलने मुंबई गए थे।
नेहा उसे बहुत पसंद करती थी — वो सुसंस्कृत, हैंडसम, अच्छा बोलने वाला, जिम वाला लड़का था।
लेकिन मिलने के बाद अयान अचानक गायब हो गया — महीनों तक कोई मैसेज, कोई कॉल नहीं।
उसी दौरान नेहा ने “बेकार आदमी” से बात शुरू कर दी।
वो अयान के बिल्कुल उलट था — रूप में, बातचीत में, स्टाइल में, संस्कार में हर मामले में inferior।
बस एक ही चीज़ में मुकाबला था — उसका लंड।
साइज़ और मोटाई में अयान जितना ही बड़ा और तगड़ा, लेकिन दिखने में थोड़ा गंदा और बदबूदार।
फिर जो हुआ, वो सब एक छोटी-सी मुलाकात में ही हो गया।
सब कुछ इतनी तेज़ी से हुआ कि मुझे खुद यकीन नहीं हुआ।
हैंडजॉब, ब्लोजॉब, फिंगरिंग — जितना भी हुआ, वो बस एक घंटे-डेढ़ घंटे की मुलाकात में पूरा हो गया।
मुझे कहीं न कहीं ये लगता था कि नेहा ये सब अयान को अपने दिमाग से निकालने के लिए कर रही थी।
ठीक वैसे जैसे लोग ब्रेकअप या ghosting के बाद करते हैं — बिना सोचे-समझे किसी भी व्यक्ति के साथ involve हो जाते हैं, सिर्फ़ उस खालीपन को भरने के लिए।
जैसे ब्रेकअप के बाद लोग बिना सोचे-समझे किसी से भी involve हो जाते हैं।
और अब अयान वापस आ गया था।
नेहा ने लैपटॉप खोला।
उसकी आँखों में एक चमक थी।
वो मैसेज पढ़ रही थी।
मैं चुपचाप उसके बगल में बैठ गया।
अगले कुछ दिन नेहा बेहद खुश थी।
सब पहले जैसा हो गया था।
हम ऑफिस से आते, बिना किसी औपचारिक बात के नेहा लैपटॉप के सामने बैठ जाती।
हम खाना भी लैपटॉप के सामने ही खाते।
टीवी के सामने बैठे हुए दिन हो गए थे, अब टीवी बंद ही रहता।
मैं चुपचाप देखता रहता।
नेहा की लंबी-लंबी बातें अयान के साथ।
वो सुसंस्कृत, सुंदर, जिम जाने वाला लड़का।
नेहा उसके साथ घंटों बात करती — कभी हँसती, कभी शरमाती, कभी अपनी छोटी-छोटी बातें बताती।
अयान उसे “सुंदर”, “सेक्सी”, “मेरी सपनों की लड़की” कहता।
नेहा का चेहरा खिल जाता।
और फिर...
बेकार आदमी के साथ वाली चैट।
वो वाली चैट पूरी तरह गंदी होती।
“कैसी है मेरी रंडी?”
“आज पति ने चोदा या नहीं?”
“चूत दिखा... पैंटी उतार...
कभी-कभी वॉइस कॉल पर भी बात होती।
बेकार आदमी उसे गालियाँ देता, नेहा हँसती और जवाब देती।
मैं बगल में बैठा सब देखता।
कभी-कभी मेरा लिंग खड़ा हो जाता, कभी दिल में जलन होती।
पहले तो अयान ने नेहा से गुस्से में बात की — कुछ दिन तक।
नेहा ने अयान से बिल्कुल ठंडी होकर बात की।
भले ही वो अंदर से कितनी भी उत्साहित हो, उसने अपनी आवाज़ में कोई गर्माहट नहीं आने दी।
नेहा ने लिखा, “कहाँ थे इतने दिन?”
अयान ने तुरंत जवाब दिया, “सॉरी यार... मेरा एक्सीडेंट हो गया था... मैं किसी से बात नहीं कर पाया।”
उसने कुछ हॉस्पिटल की फोटोज भी भेज दीं।
नेहा ने बस “हम्म” लिख दिया।
अयान ने फिर लिखा, “सॉरी यार... तुम मुंबई आए... मैं मिल नहीं पाया... तुम्हें बुरा लगा होगा।”
नेहा ने जवाब दिया, “कोई बात नहीं... वैसे भी हमें ज्यादा समय नहीं मिला था... पूरे समय बिज़ी ही थे।”
वो जताना चाहती थी कि अयान उसके लिए इतना महत्वपूर्ण नहीं है।
लेकिन असलियत कुछ और थी।
मैंने नेहा को मायूस देखा था।
कभी-कभी रात में उसकी आँखों में आँसू भी थे।
वो अयान के साथ couple जैसा बर्ताव कर रही थी — और जब वो गायब हो गया तो नेहा को सच में दर्द हुआ था।
धीरे-धीरे सब शुरू होने लगा।
बातें फिर से रोमांटिक हो गईं।
जो आधी रात तक आते-आते बेहद सेक्सी हो जातीं।
हम बिस्तर पर सेक्स करते।
लैपटॉप खुला रहता।
हमने कभी लाइव नहीं दिखाया, लेकिन वॉइस कॉल पर नेहा की आहें और कराहें जाती थीं।
अयान सुनता और उत्तेजित हो जाता।
बेकार आदमी से सिर्फ़ एक घंटे की विंडो में बात होती थी — वो भी रात 9 से 10 के बीच।
लेकिन अयान के पास नेहा के लिए पूरा समय था।
हम सेक्स करते।
मैं थक जाता।
जब मैं सोने जाता, तो नेहा को कहता, “बस 5 मिनट बात कर लो ना...”
फिर वो बातें घंटों में बदल जातीं।
कभी-कभी मुझे नेहा को याद दिलाना पड़ता, “कल ऑफिस भी जाना है...”
नेहा मुस्कुराती, “हाँ... बस 2 मिनट और...”
और फिर 2 मिनट घंटे बन जाते।
मैं बिस्तर पर लेटा रहता।
अंधेरे में नेहा की हँसी, उसकी फुसफुसाहट, और कभी-कभी उसकी उत्तेजित साँसें सुनता।
मुझे जलन होती थी।
मुझे उत्तेजना भी होती थी।
उसके साथ जो नेहा गुप्ता जी के बेटे राहुल के साथ कर रही थी, वो भी जारी था।
मेरी बीवी वर्चुअली ही सही, लेकिन अब 3-4 मर्दों के बीच में थी।
अयान, बेकार आदमी, और अब राहुल।
कभी-कभी मुझे डर लगता था कि रायता ज्यादा न फैल जाए।
कहीं कोई बात बाहर न निकल जाए।
कहीं गुप्ता जी को पता न चल जाए कि उसका बेटा मेरी बीवी को बालकनी में, छत पर, या चैट पर कितना देख रहा है।
लेकिन राहुल के साथ मामला अभी तक “टाँक झाँक” तक ही सीमित था।
नेहा बहुत होशियार थी।
वो जानती थी — कितना दिखाना है, कितना छुपाना है।
सुबह बालकनी में वो अपनी शॉर्ट स्कर्ट पहनकर खड़ी हो जाती, बाल खोलकर, कभी-कभी टॉप का एक बटन खोलकर।
राहुल अपनी बालकनी में खड़ा उसे घूरता।
नेहा जानबूझकर झुकती, ताकि उसकी गोरी जाँघें और थोड़ी नजर आएँ।
कभी सिगरेट पीते हुए वो राहुल को देखकर मुस्कुराती और आँख मार देती।
राहुल का हाथ अपने पजामे पर चला जाता।
नेहा देखती और फिर अंदर चली जाती।
ये सब उसने बहुत अच्छे से कंट्रोल में रखा था।
न ज्यादा, न कम।
बस उतना जितना राहुल को उत्तेजित रखे, लेकिन उसकी हिम्मत न बढ़े कि वो कुछ और माँगे।
मैं सब देखता।
कभी जलन होती, कभी उत्तेजना।
कभी डर लगता कि ये खेल कब और कहाँ तक जाएगा।
रात में जब नेहा अयान से बात करती, तो वो रोमांटिक और सेक्सी होती।
बेकार आदमी से गंदी और बेशर्म।
और राहुल के साथ दिन में वो “नॉटी पड़ोसन” वाली भूमिका निभाती।
तीन अलग-अलग मर्द।
तीन अलग-अलग स्वाद।
और मेरी बीवी... इन तीनों के बीच में।
रात के दो बज रहे थे।
मेरी आँखें अचानक खुल गईं।
बिस्तर पर नेहा नहीं थी।
मैंने वॉशरूम देखा — खाली।
बालकनी — खाली।
फिर मैंने मुख्य दरवाज़े की तरफ़ देखा।
वहाँ, थोड़े से कोने में...
नेहा खड़ी थी।
गुप्ता जी के साथ।
दोनों अर्ध रात में।
नेहा ने साधारण टी-शर्ट और पजामा पहना हुआ था।
गुप्ता जी भी घरेलू कपड़ों में थे।
दोनों किसी बात पर हँस रहे थे।
नेहा के हाथ में सिगरेट थी — आधी जली हुई।
मेरा दिल जोर से धड़कने लगा।
मैं धीरे से फुसफुसाया, “नेहा... नेहा...”
दोनों ने मेरी तरफ़ देखा।
नेहा ने मुझे इशारा किया कि आ जाओ।
मैं आँखें मलते हुए वहाँ पहुँचा।
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“बेबी... मेरी सिगरेट खत्म हो गई थी। मैंने ब्लिंकिट से मँगाई थी... दरवाज़े पर खड़ी थी ताकि बेल बजने से तुम्हारी नींद न खुल जाए... फिर सामने अंकल खड़े हुए थे।”
गुप्ता जी ने हल्के से हँसते हुए सिर हिलाया,
“हाँ बेटा, मैं भी रात को सिगरेट पीने आया था।”
मैंने दोनों को देखा।
नेहा का चेहरा थोड़ा लाल था — शायद नशे या हँसी की वजह से।
गुप्ता जी का हाथ अपनी जेब में था, लेकिन उनकी नज़र बार-बार नेहा की टी-शर्ट पर जा रही थी, जहाँ से उसकी छाती की आउटलाइन साफ़ दिख रही थी।
मैं चुप रहा।
कुछ कहने को नहीं था।
नेहा ने सिगरेट गुप्ता जी को देते हुए कहा,
“अंकल, आप ले लीजिए... मैं अंदर जाती हूँ।”
गुप्ता जी ने सिगरेट लेते हुए नेहा की उँगलियों को थोड़ा छू लिया।
नेहा ने कुछ नहीं कहा।
बस हल्के से मुस्कुराई।
मैं नेहा को अंदर ले आया।
मैं गुप्ता जी से दो-चार और बातें करके अंदर आ गया।
दरवाज़ा बंद करते समय भी मेरे दिमाग में वही सवाल घूम रहा था —
जब मैं सोया था तब नेहा सिर्फ़ टी-शर्ट और पैंटी में थी।
ब्रा भी नहीं पहनी थी।
फिर अचानक पजामा कैसे पहन लिया?
क्या नेहा डिलीवरी बॉय के इंतज़ार में पजामा पहनकर गई थी?
या... सिर्फ़ पैंटी में ही दरवाज़ा खोला था?
मैंने कई वीडियो देखे हैं जहाँ कपल्स “डेयर” के नाम पर ऐसी ही हरकतें करते हैं।
क्या नेहा ने भी...?
नेहा अंदर बिस्तर पर लेट चुकी थी।
बिना कुछ कहे।
जैसे कुछ हुआ ही न हो।
मैं बिस्तर पर लेटा तो वो तुरंत मेरे पास सरक आई।
मेरी छाती से लिपट गई।
उसके नरम स्तन मेरी छाती से दब रहे थे।
उसके बाल मेरे चेहरे पर फैले हुए थे।
मैंने धीरे से उसके बालों में हाथ फेरा।
नेहा ने कुछ नहीं कहा।
बस और कस के लिपट गई।
मेरे दिमाग में बार-बार वो तस्वीर आ रही थी —
रात के दो बजे...
नेहा और गुप्ता जी...
एक ही सिगरेट पी रहे थे।
दोनों के होंठ एक-एक करके उसी सिगरेट के एक ही हिस्से को छू रहे थे।
नेहा की साँसें धीमी और गर्म थीं।
मुझे लगा वो पहले से ही सो चुकी है।
मैंने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा,
“नेहा... गुप्ता जी के साथ क्या बात हो रही थी?”
नेहा ने आँखें बंद रखते हुए सिर्फ़ इतना कहा,
“बस... सिगरेट... और थोड़ी सी ऑफिस वाली बात... सो जाओ ना बेबी...”
उसकी आवाज़ में कोई शर्म नहीं थी।
न कोई सफाई।
जैसे एक सिगरेट शेयर करना, आधी रात में अकेले गुप्ता जी के साथ खड़े होना — ये सब बिल्कुल सामान्य बात हो।
मैं चुप रहा।
उसकी कमर पर हाथ रखकर उसे और कस के अपनी तरफ खींच लिया।
लेकिन नींद मुझे बहुत देर बाद आई।


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