24-05-2026, 04:41 AM
करीम का दुस्साहस -4
"गरम पानी की भाप और साबुन की खुशबू के बीच करीम की आँखों में अनीता बेटी के लिए वासना की भावना और भी गहरी हो गई। उसने एक पल के लिए हाथ रोका और अपनी लुंगी की गाँठ खोल दी।"
चंद पलों में ही वह पूरी तरह नग्न होकर अनीता के सामने खड़ा हो गया। उसकी काली मज़बूत काया उस फव्वारे के नीचे खूँखार लग रही थी। उसका १० इंच का काला लंड बाथरूम की रोशनी में तनकर अनीता की जांघों के करीब झूल रहा था।
अनीता की घबराई हुई नज़रें उसके इस विशाल काला लंड पर टिक गई थीं, जहाँ डर और एक अनचाही उत्तेजना का मिश्रण साफ़ झलक रहा था।
उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं और गले से कोई आवाज़ भी नहीं निकल पा रही थी, मानो वह उस विशालता को देखकर पूरी तरह जड़ हो चुकी हो।
करीम ने उसकी इस बेबसी को ताड़ा और एक गहरी, संतुष्ट साँस लेते हुए अपने कदम उसकी तरफ बढ़ाए, जिससे उनके बीच की दूरी पूरी तरह खत्म होने लगी।
"करीम अपनी भारी आवाज़ में फुसफुसाया, 'पसंद आया? जब भी आपको देखता हूँ, यह खड़ा हो जाता है। आप हो ही इतनी खूबसूरत... देखो, कैसे खंभे की तरह खड़ा है।'"
उसके इन बेबाक और गंदे शब्दों ने अनीता के कानों में पिघले हुए सीसे की तरह काम किया, जिससे उसके गालों पर शर्म और खौफ की एक लालिमा दौड़ गई।
"नहीं करीम, अब और नहीं… मैं थक चुकी हूँ, मुझे छोड़ दो।"
उसकी आवाज़ में छिपा दर्द और बेबसी साफ बयां हो रही थी, और उसकी आँखें आंसुओं से डबडबा आई थीं जो शावर के गिरते पानी में मिलकर बह रहे थे। लेकिन करीम पर इस मिन्नत का कोई असर नहीं हुआ।
"अभी कहाँ अनीता बेटी, अभी तो मज़ा आना शुरू हुआ है। अभी तो आपको कहना चाहिए कि मुझे तोड़ दो, मेरी चूलें हिला दो, मेरे शरीर के हर कोने में बस जाओ।"
करीम की ज़बान से निकले ये तीखे और बेबाक शब्द बंद बाथरूम की दीवारों से टकराकर अनीता के कानों में पिघलते हुए लावे की तरह उतरे।
करीम ने अनीता के कंधों को पकड़ा और उसे झटके से घुमाकर दीवार की ओर मुँह करके उल्टा खड़ा कर दिया।
करीम (अनीता के कान के पास): "अब पीछे की बारी है बेटी... राज भैया ने तो शायद कभी गौर भी नहीं किया होगा कि पीछे से आपका ई ढांचा कितना कयामत ढाता है। आज इस सफाई का असली लुत्फ तो यहीं मिलेगा।"
करीम ने ढेर सारा साबुन का झाग लिया और अपने बड़े हाथों को अनीता की गोरी और भीगी हुई गर्दन पर टिका दिया। उसने धीरे-धीरे अपनी उंगलियों को नीचे सरकाना शुरू किया। झाग की वजह से उसका स्पर्श बहुत ही चिकना था।
वह गर्दन से नीचे की ओर बढ़ते हुए अनीता की बेदाग और रेशमी पीठ पर उतरा। फव्वारे का गरम पानी झाग के साथ मिलकर अनीता की रीढ़ की हड्डी से होता हुआ नीचे की ओर बह रहा था। अनीता ने दोनों हाथ दीवार की टाइलों पर टिका दिए, और उसका पूरा बदन थरथरा रहा था।
जैसे ही करीम के हाथ अनीता की पतली कमर से नीचे सरके, वे उन विशाल, गोरे और सुडौल गाँड पर जा टिके। करीम ने दोनों हाथों में भरपूर झाग लिया और उन मांसल उभारों को अपनी हथेलियों में भरकर मरोड़ना शुरू किया।
करीम (हवस भरी आवाज़ में): "उफ़... ई पहाड़ियों की सुडौलता! कसम खुदा की, राज भैया के पास हीरा था पर उसे तराशना सिर्फ इस काले करीम को आता है। देखिए तो, झाग के बीच कइसे आपकी ई रईस गाँड चमक रही है।"
करीम ने अपनी उंगलियों को उन दो गोरे नितंबों के बीच की गहरी दरार में धँसा दिया। वह साबुन लगाने के बहाने अपनी उंगलियों को ऊपर-नीचे फिरा रहा था, जिससे अनीता की साफ़-सुथरी गाँड का एक-एक कोना करीम के स्पर्श को महसूस कर रहा था।
अनीता के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं, "करीम, अब बस करो, प्लीज…"
उसकी कमज़ोर होती आवाज़ में वह दम नहीं था जो करीम के बढ़ते कदमों को रोक सके; बल्कि उसकी हर सिसकी करीम के भीतर की आग को और भड़का रही थी।
अनीता का मुँह दीवार की टाइलों से सटा हुआ था और उसके गले से दबी-दबी सिसकियाँ निकल रही थीं।
करीम यहीं नहीं रुका। उसने अपने नग्न और सख्त जिस्म को अनीता की पीठ से पूरी तरह सटा दिया। अनीता को अपनी गाँड़ की दरार में करीम के उस १० इंच के गर्म और फौलादी अंग का दबाव साफ़ महसूस हो रहा था।
करीम (अनीता के कूल्हों को थपथपाते हुए): "अभी तो बस साफ़ कर रहे हैं मालकिन... असली रगड़ाई तो अभी बाकी है। राज भैया ने दो घंटे दिए हैं, और हम इस बाथरूम की एक-एक टाइल को आपकी आहों से गूँजा देंगे।"
अनीता दीवार का सहारा लिए काँप रही थी, जबकि करीम ने पीछे से उसके सुडौल कूल्हों को अपने मज़बूत हाथों से जकड़ लिया था।
करीम ने अपने १० इंच के काले और सख्त लंड को अनीता की उस तंग और अनछुए पिछले छेद गाँड के मुहाने पर सटाया। शावर के साबुन और पानी की वजह से वहां काफी फिसलन थी, जिससे करीम का इरादा और भी खतरनाक हो गया।
जैसे ही करीम ने अपनी कमर का ज़ोर लगाया और लंड का सिरा अंदर धँसाने की कोशिश की, अनीता के मुँह से एक दर्दनाक सिसकी निकली।
अनीता (बदहवासी में सिर हिलाते हुए): "नहीं करीम! उह्ह... वहाँ नहीं! राज... राज ने कभी ऐसा नहीं किया। प्लीज, छोड़ दो... यह बहुत दर्द दे रहा है। वहाँ नहीं!"
करीम ने एक वहशी और शैतानी हंसी हंसी। उसने अपनी पकड़ अनीता की कमर पर और भी मज़बूत कर ली ताकि वह हिल न सके।
करीम (हवस भरी भारी आवाज़ में): "राज भैया ने कभी नहीं किया? तभी तो कह रहे हैं मालकिन... असली स्वाद तो अब चखेंगी आप। उन्होंने आपको बस सामने से सहलाया है, पर यह काला करीम आज आपके उस संकरे पिछले दरवाज़े को अपने इस दस इंच के काले लंड से खोलकर ही दम लेगा।"
अनीता रोते हुए विरोध कर रही थी, "नहीं करीम... प्लीज... आह!"
करीम (अनीता के कान के पास फुसफुसाते हुए): "मज़ा आ जाएगा, बेटी... आपकी इस वर्जिन गाँड को मारने में जो सुख है, वो कहीं और नहीं। आज आपकी इस अनछुए रास्ते की सील ई १० इंच की फौलाद ही तोड़ेगी। थोड़ा दर्द होगा, पर उसके बाद जो लज़्ज़त मिलेगी, उसे आप ताउम्र याद रखेंगी।"
उसकी इस देहाती और बेबाक ज़बान ने अनीता के भीतर एक अजीब सी सिहरन पैदा कर दी, जहाँ लोक-लाज का डर उसके शरीर में उठती अनचाही तरंगों से हार रहा था।
करीम का 10 इंच का लंड जब अनीता की उस तंग गहराई के मुहाने पर दबाव डाल रहा था, तो वह एक इंच भी अंदर नहीं जा पा रहा था। वह छेद इतना तंग और अनछुआ था कि अनीता दर्द के मारे तड़प उठी।
अनीता (सिसकते हुए और दीवार को पकड़ते हुए): "करीम... उफ़! वहाँ नहीं... प्लीज! बहुत दर्द हो रहा है... वो जगह इसके लिए नहीं बनी है। राज ने कभी कोशिश नहीं की... तुम रहने दो, प्लीज!"
करीम ने अपनी पकड़ ढीली नहीं की। उसने चारों ओर नज़रे दौड़ाईं और उसे शेल्फ़ पर तेल की एक शीशी नज़र आई। उसने एक हाथ से वह शीशी उठाई और ढेर सारा तेल अपनी हथेलियों पर उड़ेल लिया।
करीम ने बड़े ही इत्मीनान से उस तेल को अपने लंबे और सख्त लंड पर मलना शुरू किया, जिससे वह लोहे की छड़ की तरह चमकने लगा। इसके बाद उसने अनीता की उस गोरी और सुडौल गाँड के बीच की दरार में थोड़ा तेल लगाया।
करीम यहीं नहीं रुका; उसने और तेल लिया और अपनी हथेलियों को अनीता के नंगे और पुष्ट स्तनों पर फेरना शुरू किया। तेल की चिकनाई से वे मखमली उभार और भी ज़्यादा कामुक होकर चमकने लगे।
करीम (बहुत ही धीमी और ज़हरीली आवाज़ में): "घबराइए मत बेटी... हम बहुत आराम से करेंगे। ई तेल अब रास्ता भी बनाएगा और आपकी तड़प को मजे में भी बदलेगा। बस ढीली पड़ जाइए।"
करीम अब अनीता के ठीक पीछे जम गया। उसने अपने दोनों भारी हाथ अनीता के तेल से भीगे हुए स्तनों पर जमा दिए और उन्हें ज़ोर से भींच लिया। अनीता की पीठ करीम के तपते हुए सीने से सटी हुई थी।
करीम ने बहुत ही सावधानी से अपने लंड के सिरा को उस तंग मुहाने पर टिकाया। तेल की चिकनाई ने अपना काम शुरू कर दिया था। उसने बहुत ही धीरे से अपनी कमर पर दबाव बढ़ाया।
अनीता ने अपनी आँखें भींच लीं, और जैसे ही वह मोटा और काला अंग उसकी गाँड की गहराई को धीरे-धीरे चीरते हुए अंदर सरका, अनीता के मुँह से एक दबी हुई आह निकली।
करीम की रफ़्तार बहुत धीमी थी। वह नहीं चाहता था कि अनीता इस सुख को जल्दी खत्म करे। उसने अपना मुँह अनीता की चिकनी और लंबी गर्दन पर टिका दिया और उसे अपनी ज़ुबान से चाटने लगा।
करीम (गर्दन पर अपनी गर्म साँसें छोड़ते हुए): "देखिए मालकिन... कइसे ई लोहा अब आपकी तंग गली में घर बना रहा है। राज भैया की कोमलता रास नहीं आती थी न, अब ई तेल और ई फौलाद आपकी रूह तक उतर रहा है। सिसकिए मालकिन... अभी तो पूरा दो घंटा हमारा है।"
तेल की चिकनाई की वजह से उसका १० इंच का फौलाद अब अनीता की उस तंग गाँड को धीरे-धीरे और भी ज़्यादा स्ट्रेच कर रहा था। अनीता का पूरा शरीर उस फैलाव और दबाव के मारे कांप रहा था।
करीम ने अपनी पकड़ और भी शातिर बना ली। उसने अपना एक हाथ अनीता के तेल से लथपथ स्तनों से हटाया और नीचे की ओर ले गया। अपनी दो मोटी और खुरदरी उंगलियों को उसने अनीता की उस गीली योनि के मुहाने पर टिकाया और एक झटके में उन्हें गहराई तक धँसा दिया।
अनीता (मुँह से एक तीखी सिसकी निकालते हुए): "आह्ह... करीम! उह्ह... दोनों तरफ से... तुम... तुम मुझे फाड़ दोगे।"
करीम का दूसरा हाथ अभी भी अनीता के एक पुष्ट चूचे को बेरहमी से मसल रहा था। वह पीछे से पूरी ताक़त से सटा हुआ था, और उसका मुँह अब अनीता की उस गोरी और लंबी गर्दन पर अपना अधिकार जमा रहा था। उसने अपनी ज़ुबान से पहले उस जगह को गीला किया और फिर अपनी मर्दानगी के नशे में अनीता की कोमल खाल को अपने दाँतों से ज़ोर से काट लिया।
अनीता (दर्द और डर के मारे झटपटाते हुए): "नहीं! करीम... काटो मत! वहाँ निशान पड़ जाएंगे... उह्ह... राज देख लेंगे तो मैं क्या जवाब दूँगी? प्लीज... बाइट मत करो!"
करीम ने दांतों की पकड़ और मज़बूत कर दी, जैसे वह उस गोरी गर्दन पर अपनी गुलामी की मुहर लगा रहा हो। उसने मुँह हटाकर अनीता के कान में बहुत ही भारी और वहशी आवाज़ में फुसफुसाया।
करीम (हवस भरी आवाज़ में): "पड़ने दीजिए निशान मालकिन... राज भैया जब इन निशानों को देखेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि जिस बदन को वो बस सहलाते थे, उसे ई काला कुत्ता कइसे कच्चा चबाता है। ई निशान उन्हें हमारी याद दिलाएंगे। और फिक्र मत कीजिए, राज भैया को तो आप 'जुकाम' और 'फिसलने' का बहाना पहले ही दे चुकी हैं, एक और झूठ बोल दीजिएगा।"
करीम ने अब अपनी उंगलियों को अनीता की योनि के भीतर तेज़ी से चलाना शुरू किया, जबकि पीछे से उसका १० इंच का लोहा उसकी गाँड की चूलें हिला रहा था। अनीता दीवार से सटी हुई थी, उसका बदन तेल, पानी और पसीने से चमक रहा था। वह नफरत करना चाहती थी, पर करीम की इस दोहरी मार ने उसे अपनी सुध-बुध खोने पर मजबूर कर दिया था।
करीम (दांत पीसते हुए): "बोलिए बेटी... राज भैया की याद आ रही है या ई काले करीम का ई दोहरा प्रहार रास आ रहा है? आज तो आपकी रूह के हर छेद पर इस नौकर का कब्ज़ा होगा।"
बाथरूम की उमस और शावर से गिरते गरम पानी के बीच अनीता के भीतर कुछ बहुत गहराई से टूट रहा था। वह सनसनी, जो उसके शरीर के पोर-पोर में दौड़ रही थी, उसे पहले कभी महसूस नहीं हुई थी। नफरत और शर्म की दीवारें अब हवस के उस सैलाब में ढह रही थीं जो करीम ने अपनी दरिंदगी से पैदा किया था।
अनीता को अब उस दर्द में भी एक अजीब सी तड़प महसूस हो रही थी। अनजाने में ही, उसके भारी और सुडौल कूल्हे अब पीछे की ओर झटके मारने लगे, ताकि वह करीम के उस १० इंच के फौलादी लंड को अपनी गाँड की गहराइयों में और भी ज़्यादा समा सके। वह अब उस प्रहार को सिर्फ सह नहीं रही थी, बल्कि उसे और पाने के लिए व्याकुल थी।
करीम ने जब अनीता के जिस्म की इस बगावत को देखा, तो उसके चेहरे पर एक वहशी और ज़हरीली मुस्कान फैल गई। उसे अपनी जीत का पूरा अहसास हो गया था—राज की पत्नी अब इस काले नौकर के इशारों पर नाच रही थी।
उसने अपनी कमर की रफ़्तार रोके बिना, अपना हाथ आगे बढ़ाया और अनीता की ठोड़ी को पकड़कर उसका चेहरा अपनी ओर घुमाया। अनीता की आँखें नशे, दर्द और मदहोशी में डूबी हुई थीं। करीम ने एक पल के लिए उसकी आँखों में गहराई से झाँका, जैसे वह उसकी रूह की बेबसी पढ़ रहा हो।
करीम (बहुत ही भारी और दबी आवाज़ में): "देखा मालकिन? ई गोरा बदन अब खुद भीख माँग रहा है। राज भैया का मखमली बिस्तर छोटा पड़ गया न इस काले लंड के आगे?"
इससे पहले कि अनीता कुछ कह पाती, करीम ने अपने काले और मोटे होंठ अनीता के नाज़ुक होंठों पर टिका दिए और उन्हें पूरी ताक़त से दबोच लिया। करीम की ज़ुबान अनीता के मुँह के हर कोने को खंगालने लगी, जबकि पीछे से उसका १० इंच का लोहा उसकी गाँड की दीवारें फाड़ रहा था।
उसने अनीता के बालों को हल्का सा पीछे की ओर खींचा और उसे सिंक के पास लगी बाथरूम की लोहे की रॉड को पकड़ने का हुक्म दिया।
करीम (हवस भरी और उखड़ी हुई आवाज़ में): "पकड़िए इसे मालकिन! कस के पकड़िए... वरना हमारा ई १० इंच का प्रहार आपकी टांगों की चूलें हिला देगा। आज राज भैया के इस महल की दीवारें आपकी चीखें सुनेंगी।"
अनीता ने थरथराते हाथों से उस ठंडी रॉड को जकड़ लिया। उसका बदन तेल और साबुन की वजह से पहले ही फिसलन भरा था, और अब वह करीम के सामने पूरी तरह झुक चुकी थी।
करीम ने अपनी पकड़ अनीता की नंगी और तेल से चमकती गाँड पर और मज़बूत की और पूरी ताक़त से अपनी कमर को चलाना शुरू किया। वह अब किसी जंगली जानवर की तरह प्रहार कर रहा था। उसका १० इंच का काला लंड ९० प्रतिशत बाहर आता और फिर एक ही झटके में पूरी गहराई तक अनीता की उस तंग गाँड को चीरता हुआ अंदर धँस जाता। 'फच-फच' की आवाज़ शावर के पानी के शोर पर हावी हो रही थी।
करीम के दोनों हाथ अनीता के भारी और पुष्ट स्तनों को किसी खिलौने की तरह मरोड़ रहे थे। उसने अपनी उंगलियों से अनीता की गुलाबी चोटियों को पकड़कर ज़ोर से चुटकी काटी और उन्हें खींचने लगा।
अनीता (बदहवासी में सिर पटकते हुए): "अह्ह्ह... करीम... उह्ह... धीरे... तुम... तुम मुझे जान से मार दोगे! उफ़... वो रॉड... छूट रही है... आह्ह!"
अनीता को महसूस हो रहा था कि उसकी कोख के सबसे गहरे कोने में कोई ज्वालामुखी फटने वाला है। करीम के उस ९० प्रतिशत बाहर आकर फिर से अंदर धँसने वाले अंदाज़ ने उसकी नसों में आग लगा दी थी। उसे अपनी योनि और गाँठ, दोनों जगह से एक अजीब सी लहर उठती हुई महसूस हुई।
अचानक, अनीता का पूरा शरीर अकड़ने लगा। उसे लगा कि उसके भीतर से 'कामुक रस' का एक और ज़बरदस्त सैलाब फूटने वाला है। उसका दूसरा क्लाइमेक्स अब बस एक कदम दूर था।
करीम (अनीता के कांपते बदन को महसूस करते हुए): "छोड़िए मत मालकिन! आने दीजिए उस सैलाब को... आज राज भैया की मेमसाहब इस काले नौकर के लंड पर अपना पानी छोड़ेंगी। सिसकिए... ज़ोर से सिसकिए!"
करीम ने महसूस किया कि अनीता का बदन पूरी तरह से अकड़ चुका है। उसने अपनी कमर की रफ्तार और तेज़ कर दी। हर धक्के के साथ वह १० इंच का काला फौलाद जब अनीता की गाँड की दीवारों से रगड़ खाता हुआ पूरी गहराई तक जाता, तो अनीता के पैर फर्श से ऊपर उठने को होते।
अनीता (पागलों की तरह सिर हिलाते हुए और रॉड को अपनी पूरी ताकत से भींचते हुए): "करीम... आह्ह... अब नहीं... मैं... मैं मर जाऊंगी! उफ़... वो अहसास... करीम... आह्ह्ह!"
अनीता की आवाज़ अब बाथरूम की टाइलों से टकराकर गूँज रही थी। उसका दूसरा क्लाइमेक्स अब एक सुनामी की तरह उसके बदन को अपनी चपेट में ले चुका था। उसकी योनि से रस का एक गर्म फव्वारा फूटा, जिसने करीम की जांघों और फर्श को पूरी तरह भिगो दिया। उसी पल करीम ने एक आखिरी और सबसे खूँखार झटका मारा, उसका लंड अनीता की कोख की आखिरी दीवार को छू गया।
करीम का चेहरा भी पसीने और पानी की बूंदों से लथपथ था। उसने अपनी दाँत पीसते हुए एक जंगली गुर्राहट के साथ अपना सारा गर्म और गाढ़ा वीर्य अनीता की उस तंग गाँड के भीतर उड़ेला। अनीता का पूरा वजूद एक झटके के साथ ढीला पड़ गया।
अनीता के हाथ उस लोहे की रॉड से छूट गए। गरम पानी अभी भी उसके नग्न, तेल से लथपथ और लाल पड़ चुके बदन पर गिर रहा था। उसके गोरे कूल्हों पर करीम की उंगलियों के नीले और लाल निशान साफ़ चमक रहे थे।
करीम हाँफता हुआ उसके पीछे खड़ा था। उसने अपना १० इंच का लोहा अभी भी बाहर नहीं निकाला था। वह उसी हालत में अनीता के ऊपर झुक गया और उसके कंधों को जकड़ लिया।
करीम (हवस भरी और उखड़ी हुई आवाज़ में): "देखा बेटी? राज भैया के मखमली बिस्तर पर जो चैन नहीं मिला, वो आज इस बाथरूम के फर्श पर मिल गया न? अभी तो सिर्फ एक घंटा हुआ है... राज भैया ने हमें पूरे दो घंटे दिए हैं।"
अनीता ने कोई जवाब नहीं दिया। उसकी आँखों से आँसू गिर रहे थे जो शावर के पानी के साथ मिलकर बह रहे थे। वह समझ नहीं पा रही थी कि वह इस ज़िल्लत पर रो रही है या उस सुख पर जिसने उसे अपनी मर्यादा भूलने पर मजबूर कर दिया।
करीम ने उसे बालों से पकड़कर ऊपर उठाया और उसका चेहरा दीवार की ओर लगे बड़े आईने की तरफ कर दिया।
करीम (आईने में अनीता की नग्नता दिखाते हुए): "देखिए, मालकिन... खुद को देखिए। ई जो आपकी आँखों में मदहोशी है, और ई जो बदन पर हमारे दाँतों और नाखूनों के निशान हैं... ई गवाही दे रहे हैं कि आप अब उस राज साहब की नहीं, बल्कि इस काले करीम की मिल्कियत बन चुकी हैं।"
अनीता ने आईने में अपनी हालत देखी। उसके नंगे और पुष्ट स्तन अभी भी तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहे थे, उनकी गुलाबी चोटियाँ करीम की रगड़ से सूज चुकी थीं। उसकी जांघों के बीच से वीर्य और योनि-रस की मिली-जुली धार नीचे बह रही थी। उसे अपनी इस 'गुलामी' में अजीब-सा डर और आकर्षण महसूस हो रहा था।
करीम ने उसे फिर से अपनी बाँहों में भर लिया। वह उसे शावर के नीचे से निकालकर बाथटब की ओर ले जाने लगा।
करीम (कुटिल मुस्कान के साथ): "अभी तो खेल आधा हुआ है मालकिन। अभी तो हमें राज भैया के उस 'बाथटब' का स्वाद भी चखना है। वहाँ पानी शांत होगा, पर हमारी हवस का तूफ़ान और भी खूँखार होगा। चलिए... राज भैया के आने में अभी बहुत वक़्त है।"
अनीता का रोम-रोम कांप रहा था। वह जानती थी कि अगले एक घंटे में करीम उसे और भी गहरे दलदल में ले जाएगा, जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं होगा। उसने बेबसी में अपना सिर करीम के चौड़े और काले सीने पर रख दिया, जबकि करीम उसे उस बाथटब की ओर ले जा रहा था जहाँ अब एक नया और लंबा अध्याय शुरू होने वाला था।
अनीता (रोते हुए और हांफते हुए): "नहीं करीम बस... अब और नहीं, प्लीज मुझे अभी छोड़ दो। फिर कभी कर लेना..." अचानक उसके मुँह से निकल गया, "मैं तुम्हें मना नहीं करूँगी।"
अपनी ही ज़बान से निकले इन आख़िरी शब्दों को सुनकर अनीता खुद सुन्न रह गई, मानो उसने हार मानकर करीम के सामने अपने आत्मसमर्पण की मुहर लगा दी हो। करीम के चेहरे पर एक गहरी, शैतानी कामयाबी की चमक उभर आई; उसने अनीता की कमज़ोर पड़ती कमर को ऊपर उठाया और उसके कानों में फुसफुसाया, "यह वादा याद रखना मालकिन।"
करीम (एक विजयी मुस्कान के साथ): "ठीक है, पर याद रखना, अब आप मेरी हर बात मानेंगी। मैं आपके कपड़े तय करूँगा, मैं आपके साथ बाहर घूमने जाऊँगा। आप मेरी गर्लफ्रेंड बनकर मेरे साथ घूमेंगी... मुझे आपकी पूरी रज़ामंदी चाहिए।"
उसके इन शब्दों ने अनीता को भीतर तक झकझोर दिया, क्योंकि वह समझ चुकी थी कि उसने केवल अपने बदन का नहीं, बल्कि अपनी आज़ादी का भी सौदा कर लिया था। करीम ने उसके चेहरे को अपनी ओर मोड़ा और उसकी आँखों में आँखें डालकर अपनी इस नई मिल्कियत का अहसास कराया, जिससे अनीता की पलकें शर्म और बेबसी से और नीचे झुक गईं।
Deepak Kapoor
Author on amazon
https://xossipy.com/thread-71793.html -- अनीता सिंह-
https://xossipy.com/thread-73166.html - अम्मी और अंकल
Author on amazon
- An Innocent Beauty Series ( 5 Books )
https://xossipy.com/thread-71793.html -- अनीता सिंह-
https://xossipy.com/thread-73166.html - अम्मी और अंकल


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)