22-05-2026, 03:24 PM
रजनी ने माँ की दूसरी चूची को भी जोर से दबाया और बोली, “माँ… मुझे भी गुरुजी को चुस्वाना है। लेकिन मेरा तो अभी छोटा है ना?”
गीता ने रजनी को अपनी गोद में बिठा लिया। अब दोनों की चूतें एक-दूसरे से सटी हुई थीं। गीता ने रजनी की चूत पर उँगली फेरते हुए naughty मुस्कान के साथ कहा, “तेरी चूत तो अभी बहुत टाइट और छोटी है बेटी। गुरुजी ने इसे फाड़ दिया, फिर भी तू गांड उठा-उठाकर उनका लंड ले रही थी। मुझे तो देखकर बहुत गर्व हुआ था। ऐसा लगता था की मैं भी तेरी उम्र की होऊ और गुरूजी से अपना शील तुड़वा रही होऊ।”
रजनी शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसने अपनी माँ की चूत पर भी हाथ रख दिया और हल्का सा रगड़ते हुए बोली, “माँ… तुम्हारी चूत तो बहुत गीली है। अभी भी गुरुजी के लंड का असर है क्या?” मैत्री की पेशकश।
गीता ने सिसकारी ली और रजनी की गांड के छेद में एक उँगली डालने के प्रयास करती हुए बोली, “हाँ बेटी… अभी भी अंदर से गीली हो रही है। जब गुरुजी का वह राक्षस मेरी चूत में घुसते थे तो लगता था पूरा पेट भर गया। तू भी अपनी उँगली डालकर देख… कितनी गर्म है माँ की चूत। उनकी चुदाई का कोई जवाब नहीं बेटी, जब तक उनका लंड चोदता रहता है तब तो मजा आती ही है लेकिन जब वह चोद के उठ जाते है तभी भी ऐसा लगता है की चूत अभी भी चुद रही है बेटी। उस्न्की चुदाई की असर लम्बे समय तक चूत को महसूस होती रहती है, और गांड भी, बेटी इसे शब्दों में बताना कठिन है, जब तेरी गांड में वह मुसल जाएगा तभी तुझे पता चलेगा, इसका असली रंग का।”
रजनी ने अपनी उँगली अपनी माँ की चूत में धीरे से डाली और आँखें बंद करके बोली, “मम्मी… कितनी गर्म और चिकनी है। गुरुजी का लंड अंदर घुसता होगा तो कितना मजा आता होगा ना?”
गीता ने रजनी को चूम लिया और उसके कान में फुसफुसाकर कहा, “बहुत मजा आता है बेटी… लेकिन अब तू और मैं साथ में हैं। गुरुजी जब आएँगे तो हम दोनों उन्हें एक साथ सेवा करेंगी। तू मेरी चूत चाटेगी, मैं उनका लंड चूसूँगी… फिर दोनों बारी-बारी से उनकी चुदाई का मजा लेंगे।” रचयिता मैत्री।
रजनी ने अपनी माँ की चूत में उँगली अंदर-बाहर करते हुए शरमाते हुए हँसकर कहा, “माँ… तुम बहुत naughty हो गई हो गुरुजी के आने के बाद। लेकिन मुझे भी अच्छा लग रहा है। इस बहाने हम दोनों काफी खुल गए और नंगे हो गए फिर भी शर्म नाम की कोई चीज़ नहीं है हमारे बिच।”
गीता ने रजनी की चूत को हल्का सा थपथपाते हुए बोली, “अब तो हम दोनों गुरुजी की विशेष चेलियाँ हैं। नंगी रहना, चुदना और एक-दूसरे को छूना… ये सब अब हमारा नया नियम है। उनका लंड चाटना, उनकी गांड साफ़ करना और फिर बाद में चूत और गांड फड़वाना बस यही धर्म है हमारा। और जब चाहे उनके लंड से निकला प्रसाद हमारे भोजन जैसा होना चाहिए। उनके लंड का रसद से हमारा पेट भरता रहेगा बेटी। लेकिन मेहनत भी उतनी लगेगी। साथ-साथ करेंगे बारी-बारी।”
दोनों माँ-बेटी एक-दूसरे को कसकर चिपकाकर हँस पड़ीं। उनकी नंगी देहें सुबह की धूप में चमक रही थीं और दोनों की उँगलियाँ एक-दूसरे की चूत में धीरे-धीरे खेल रही थीं।
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चलिए दोस्तों यही तक। फिर मिलेंगे।
मैत्री की ओर से जय भारत।।
गीता ने रजनी को अपनी गोद में बिठा लिया। अब दोनों की चूतें एक-दूसरे से सटी हुई थीं। गीता ने रजनी की चूत पर उँगली फेरते हुए naughty मुस्कान के साथ कहा, “तेरी चूत तो अभी बहुत टाइट और छोटी है बेटी। गुरुजी ने इसे फाड़ दिया, फिर भी तू गांड उठा-उठाकर उनका लंड ले रही थी। मुझे तो देखकर बहुत गर्व हुआ था। ऐसा लगता था की मैं भी तेरी उम्र की होऊ और गुरूजी से अपना शील तुड़वा रही होऊ।”
रजनी शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसने अपनी माँ की चूत पर भी हाथ रख दिया और हल्का सा रगड़ते हुए बोली, “माँ… तुम्हारी चूत तो बहुत गीली है। अभी भी गुरुजी के लंड का असर है क्या?” मैत्री की पेशकश।
गीता ने सिसकारी ली और रजनी की गांड के छेद में एक उँगली डालने के प्रयास करती हुए बोली, “हाँ बेटी… अभी भी अंदर से गीली हो रही है। जब गुरुजी का वह राक्षस मेरी चूत में घुसते थे तो लगता था पूरा पेट भर गया। तू भी अपनी उँगली डालकर देख… कितनी गर्म है माँ की चूत। उनकी चुदाई का कोई जवाब नहीं बेटी, जब तक उनका लंड चोदता रहता है तब तो मजा आती ही है लेकिन जब वह चोद के उठ जाते है तभी भी ऐसा लगता है की चूत अभी भी चुद रही है बेटी। उस्न्की चुदाई की असर लम्बे समय तक चूत को महसूस होती रहती है, और गांड भी, बेटी इसे शब्दों में बताना कठिन है, जब तेरी गांड में वह मुसल जाएगा तभी तुझे पता चलेगा, इसका असली रंग का।”
रजनी ने अपनी उँगली अपनी माँ की चूत में धीरे से डाली और आँखें बंद करके बोली, “मम्मी… कितनी गर्म और चिकनी है। गुरुजी का लंड अंदर घुसता होगा तो कितना मजा आता होगा ना?”
गीता ने रजनी को चूम लिया और उसके कान में फुसफुसाकर कहा, “बहुत मजा आता है बेटी… लेकिन अब तू और मैं साथ में हैं। गुरुजी जब आएँगे तो हम दोनों उन्हें एक साथ सेवा करेंगी। तू मेरी चूत चाटेगी, मैं उनका लंड चूसूँगी… फिर दोनों बारी-बारी से उनकी चुदाई का मजा लेंगे।” रचयिता मैत्री।
रजनी ने अपनी माँ की चूत में उँगली अंदर-बाहर करते हुए शरमाते हुए हँसकर कहा, “माँ… तुम बहुत naughty हो गई हो गुरुजी के आने के बाद। लेकिन मुझे भी अच्छा लग रहा है। इस बहाने हम दोनों काफी खुल गए और नंगे हो गए फिर भी शर्म नाम की कोई चीज़ नहीं है हमारे बिच।”
गीता ने रजनी की चूत को हल्का सा थपथपाते हुए बोली, “अब तो हम दोनों गुरुजी की विशेष चेलियाँ हैं। नंगी रहना, चुदना और एक-दूसरे को छूना… ये सब अब हमारा नया नियम है। उनका लंड चाटना, उनकी गांड साफ़ करना और फिर बाद में चूत और गांड फड़वाना बस यही धर्म है हमारा। और जब चाहे उनके लंड से निकला प्रसाद हमारे भोजन जैसा होना चाहिए। उनके लंड का रसद से हमारा पेट भरता रहेगा बेटी। लेकिन मेहनत भी उतनी लगेगी। साथ-साथ करेंगे बारी-बारी।”
दोनों माँ-बेटी एक-दूसरे को कसकर चिपकाकर हँस पड़ीं। उनकी नंगी देहें सुबह की धूप में चमक रही थीं और दोनों की उँगलियाँ एक-दूसरे की चूत में धीरे-धीरे खेल रही थीं।
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चलिए दोस्तों यही तक। फिर मिलेंगे।
मैत्री की ओर से जय भारत।।



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