22-05-2026, 10:33 AM
हम बिल्डिंग पहुँच गए।
गाड़ी पार्क की।
नेहा और मैं दोनों लहराते हुए, नशे में नीचे उतरे।
रात काफी हो चुकी थी।
लिफ्ट से हम अपने फ्लोर पर पहुँचे।
लॉबी में जैसे ही हम निकले, सामने गुप्ता जी खड़े दिखे।
मैंने तुरंत नेहा से धीरे से कहा,
“प्लीज़... सही से चलो... गुप्ता जी वहाँ खड़े हैं।”
नेहा ने हल्का सिर हिलाया, लेकिन उसकी चाल अभी भी लड़खड़ा रही थी।
उसके बाल बिखरे हुए थे, ड्रेस थोड़ी अस्त-व्यस्त, और चेहरे पर अभी भी वो नशा साफ़ दिख रहा था।
नेहा ने हल्के से कहा, “अच्छा...”
उसकी आँखों में शरारत झलक रही थी।
गुप्ता जी लॉबी में सिगरेट पी रहे थे। उनकी पीठ हमारी तरफ थी।
मैंने देखा — नेहा ने तेज़ी से लड़खड़ाते हुए गुप्ता जी की तरफ कदम बढ़ाया।
जानबूझकर उसने गुप्ता जी के कंधे से टकरा दिया।
“ओह्ह... अंकल आप... sorry!”
नेहा ने नशे वाली, मीठी आवाज़ में कहा।
गुप्ता जी चौंककर मुड़े।
उनकी नज़र पहले नेहा के चेहरे पर, फिर उसकी थोड़ी अस्त-व्यस्त ड्रेस पर, फिर नंगी टाँगों पर अटक गई।
नेहा ने लड़खड़ाते हुए खुद को संभाला और हँसते हुए बोली,
“माफ़ करना अंकल... थोड़ा नशा हो गया है...”
गुप्ता जी जानते थे कि नेहा पीती है।
आस-पास के लगभग सभी लोग जानते थे।
पुणे में ये आम बात थी।
सोशलली भी नेहा ने गुप्ता जी के सामने पहले पी रखी थी।
लेकिन आज नेहा बहुत ज़्यादा नशे में थी।
वो अब गुप्ता जी के सामने खड़ी थी।
लड़खड़ाते हुए, नशे वाली आँखों से उन्हें देखते हुए।
मैं गुप्ता जी के थोड़ा पीछे खड़ा था।
नेहा ने शर्माते हुए, लेकिन नशे वाली मीठी आवाज़ में कहा,
“Sorry uncle... वो गलती से... मैंने थोड़ा ज़्यादा पी लिया है।”
ये बोलते हुए उसकी पूरी बॉडी हिल रही थी।
फिर नेहा ने वो किया जो वो अंकल के साथ हमेशा करती थी —
उनके आशीर्वाद के लिए पैर छूने लगी।
जानबूझकर या नशे में, पता नहीं।
जैसे ही वो झुकी, मैं और गुप्ता जी दोनों को एक ही नज़ारा दिखाई दिया।
नेहा की छोटी ब्लैक ड्रेस ऊपर चढ़ गई।
उसकी गोरी, गोल, नंगी टाँगें पूरी तरह दिख रही थीं।
पैंटी का किनारा भी साफ़ नज़र आ रहा था।
गुप्ता जी के होश उड़ गए थे।
जैसे ही नेहा झुकी, उनकी नज़र ऊपर वाली बॉडी पर गई।
नेहा की ब्रा तो कार में ही कहीं खो चुकी थी — वो रेस्टोरेंट जाते समय ही उतार चुकी थी।
स्लीवलेस ड्रेस में जब वो झुकी, तो दोनों गोरे, भरे हुए बूब्स पूरी तरह लटकते हुए दिख गए।
पूरी शेप साफ़ दिख रही थी।
दोनों बूब्स पर दाँतों के नीले-लाल निशान बने हुए थे।
मुझे तो साफ़ दिख रहे थे।
गुप्ता जी तो और भी आगे थे — शायद उन्हें लाइट ब्राउन निप्पल भी दिख गए होंगे।
नेहा थोड़ी देर वैसी ही झुकी रही।
जैसे जानबूझकर समय ले रही हो।
फिर वो थोड़ा लड़खड़ाई।
गुप्ता जी ने तुरंत आगे बढ़कर उसे दोनों नंगी बाहों से पकड़ लिया।
दोनों हाथ उसकी नंगी बाहों पर थे।
उन्होंने उसे सहारा दिया ताकि वो न गिरे।
मैं भी आगे बढ़ा, लेकिन गुप्ता जी ने तुरंत कहा,
“मैंने संभाल लिया है... डोंट वरी।”
उनकी आवाज़ में एक अजीब सा अधिकार था।
उनकी उँगलियाँ नेहा की नंगी बाहों पर कस गई थीं।
नेहा अब उनकी बाहों में टिकी हुई थी।
उसकी ड्रेस अभी भी नीचे खिसकी हुई थी।
गुप्ता जी ने नेहा को सीधा किया।
अब नेहा उनके बहुत करीब थी — लगभग उनसे लिपटी हुई।
उनके हाथ अभी भी नेहा की नंगी बाहों पर थे।
गुप्ता जी ने नेहा को सहारा देते हुए मेरी तरफ घुमाया।
मैंने आगे बढ़कर नेहा को पूरी तरह अपने सहारे में ले लिया।
उसका पूरा वजन अब मेरे ऊपर था।
गुप्ता जी ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा,
“ध्यान रखो बेटी का...
I know कभी-कभी wild party चलती है।”
मुझे समझ नहीं आ रहा था — ये बात शराब के लिए थी या नेहा के बूब्स पर बने दाँतों के निशानों के लिए।
मैं नेहा को सहारा देते हुए अपने फ्लैट की तरफ बढ़ा।
जैसे ही हम थोड़ा आगे बढ़े, नेहा ने अपना मुँह मेरे कान के पास ले जाकर बहुत धीरे से, नशे वाली गर्म साँसों के साथ फुसफुसाया,
“मज्जा आया?”
गाड़ी पार्क की।
नेहा और मैं दोनों लहराते हुए, नशे में नीचे उतरे।
रात काफी हो चुकी थी।
लिफ्ट से हम अपने फ्लोर पर पहुँचे।
लॉबी में जैसे ही हम निकले, सामने गुप्ता जी खड़े दिखे।
मैंने तुरंत नेहा से धीरे से कहा,
“प्लीज़... सही से चलो... गुप्ता जी वहाँ खड़े हैं।”
नेहा ने हल्का सिर हिलाया, लेकिन उसकी चाल अभी भी लड़खड़ा रही थी।
उसके बाल बिखरे हुए थे, ड्रेस थोड़ी अस्त-व्यस्त, और चेहरे पर अभी भी वो नशा साफ़ दिख रहा था।
नेहा ने हल्के से कहा, “अच्छा...”
उसकी आँखों में शरारत झलक रही थी।
गुप्ता जी लॉबी में सिगरेट पी रहे थे। उनकी पीठ हमारी तरफ थी।
मैंने देखा — नेहा ने तेज़ी से लड़खड़ाते हुए गुप्ता जी की तरफ कदम बढ़ाया।
जानबूझकर उसने गुप्ता जी के कंधे से टकरा दिया।
“ओह्ह... अंकल आप... sorry!”
नेहा ने नशे वाली, मीठी आवाज़ में कहा।
गुप्ता जी चौंककर मुड़े।
उनकी नज़र पहले नेहा के चेहरे पर, फिर उसकी थोड़ी अस्त-व्यस्त ड्रेस पर, फिर नंगी टाँगों पर अटक गई।
नेहा ने लड़खड़ाते हुए खुद को संभाला और हँसते हुए बोली,
“माफ़ करना अंकल... थोड़ा नशा हो गया है...”
गुप्ता जी जानते थे कि नेहा पीती है।
आस-पास के लगभग सभी लोग जानते थे।
पुणे में ये आम बात थी।
सोशलली भी नेहा ने गुप्ता जी के सामने पहले पी रखी थी।
लेकिन आज नेहा बहुत ज़्यादा नशे में थी।
वो अब गुप्ता जी के सामने खड़ी थी।
लड़खड़ाते हुए, नशे वाली आँखों से उन्हें देखते हुए।
मैं गुप्ता जी के थोड़ा पीछे खड़ा था।
नेहा ने शर्माते हुए, लेकिन नशे वाली मीठी आवाज़ में कहा,
“Sorry uncle... वो गलती से... मैंने थोड़ा ज़्यादा पी लिया है।”
ये बोलते हुए उसकी पूरी बॉडी हिल रही थी।
फिर नेहा ने वो किया जो वो अंकल के साथ हमेशा करती थी —
उनके आशीर्वाद के लिए पैर छूने लगी।
जानबूझकर या नशे में, पता नहीं।
जैसे ही वो झुकी, मैं और गुप्ता जी दोनों को एक ही नज़ारा दिखाई दिया।
नेहा की छोटी ब्लैक ड्रेस ऊपर चढ़ गई।
उसकी गोरी, गोल, नंगी टाँगें पूरी तरह दिख रही थीं।
पैंटी का किनारा भी साफ़ नज़र आ रहा था।
गुप्ता जी के होश उड़ गए थे।
जैसे ही नेहा झुकी, उनकी नज़र ऊपर वाली बॉडी पर गई।
नेहा की ब्रा तो कार में ही कहीं खो चुकी थी — वो रेस्टोरेंट जाते समय ही उतार चुकी थी।
स्लीवलेस ड्रेस में जब वो झुकी, तो दोनों गोरे, भरे हुए बूब्स पूरी तरह लटकते हुए दिख गए।
पूरी शेप साफ़ दिख रही थी।
दोनों बूब्स पर दाँतों के नीले-लाल निशान बने हुए थे।
मुझे तो साफ़ दिख रहे थे।
गुप्ता जी तो और भी आगे थे — शायद उन्हें लाइट ब्राउन निप्पल भी दिख गए होंगे।
नेहा थोड़ी देर वैसी ही झुकी रही।
जैसे जानबूझकर समय ले रही हो।
फिर वो थोड़ा लड़खड़ाई।
गुप्ता जी ने तुरंत आगे बढ़कर उसे दोनों नंगी बाहों से पकड़ लिया।
दोनों हाथ उसकी नंगी बाहों पर थे।
उन्होंने उसे सहारा दिया ताकि वो न गिरे।
मैं भी आगे बढ़ा, लेकिन गुप्ता जी ने तुरंत कहा,
“मैंने संभाल लिया है... डोंट वरी।”
उनकी आवाज़ में एक अजीब सा अधिकार था।
उनकी उँगलियाँ नेहा की नंगी बाहों पर कस गई थीं।
नेहा अब उनकी बाहों में टिकी हुई थी।
उसकी ड्रेस अभी भी नीचे खिसकी हुई थी।
गुप्ता जी ने नेहा को सीधा किया।
अब नेहा उनके बहुत करीब थी — लगभग उनसे लिपटी हुई।
उनके हाथ अभी भी नेहा की नंगी बाहों पर थे।
गुप्ता जी ने नेहा को सहारा देते हुए मेरी तरफ घुमाया।
मैंने आगे बढ़कर नेहा को पूरी तरह अपने सहारे में ले लिया।
उसका पूरा वजन अब मेरे ऊपर था।
गुप्ता जी ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा,
“ध्यान रखो बेटी का...
I know कभी-कभी wild party चलती है।”
मुझे समझ नहीं आ रहा था — ये बात शराब के लिए थी या नेहा के बूब्स पर बने दाँतों के निशानों के लिए।
मैं नेहा को सहारा देते हुए अपने फ्लैट की तरफ बढ़ा।
जैसे ही हम थोड़ा आगे बढ़े, नेहा ने अपना मुँह मेरे कान के पास ले जाकर बहुत धीरे से, नशे वाली गर्म साँसों के साथ फुसफुसाया,
“मज्जा आया?”


![[+]](https://xossipy.com/themes/sharepoint/collapse_collapsed.png)