19-05-2026, 05:19 AM
इस बार उन्होंने नज़रें नहीं चुरायीं। भीड़ और शोर के बीच, उन दोनों ने एक खामोश आँगन बना लिया था। मैंने देखा, विशाल ने धीरे से अपनी एक आइब्रो उठाई। एक खामोश सवाल। 'यह जो ... यह मेरे लिए था, ना?'
अम्मी की आँखें एक पल के लिए हैरत से फैलीं। उन्होंने एक छोटा सा, ना मानने वाला इशारा किया, लेकिन उनके होठों के कोने पर दबी हुई मुस्कुराहट उनका झूठ पकड़ रही थी।
उसी मुस्कुराहट को देखकर विशाल के चेहरे पर जीत की चमक आ गई। उसके होंठ हिले। बिना आवाज़ के, उसने हर लफ़्ज़ को आहिस्ता से तराशा।
"मस्त"
अम्मी ने एक तेज़ सांस अंदर खींची, जो उनकी सहेली से की जा रही बात के बीच में ही अटक गई। उनकी एक हाथ की मुट्ठी कस गई, और दूसरा हाथ अनजाने में उनके दिल पर चला गया, जैसे उसकी धड़कन को काबू करने की कोशिश कर रही हों। लाली की एक गहरी लहर उनके गालों से होती हुई उनकी गर्दन तक उतर आई। उन्होंने फौरन अपनी नज़रें विशाल से हटा लीं, जैसे उस लफ़्ज़ की आग उन्हें झुलसा देगी।
लेकिन इससे पहले कि वह पूरी तरह पलटतीं, उन्होंने अपने अंगूठे से अपने नीचे वाले होंठ को बहुत धीरे से, एक लंबे, सोच-समझ कर किए गए अंदाज़ में छुआ। यह एक हल्का इशारा था, लेकिन इसमें एक पूरी कहानी थी। एक इकरार था।
उस दूरी से, विशाल ने इसे ज़रूर देखा होगा। वह उसके लफ़्ज़ का जवाब था। उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट फैली।
मेरा मन किया कि मैं चीख पड़ूँ, जाकर विशाल का गिरेबान पकड़ लूँ। लेकिन मैं बस वहाँ खड़ा, अपनी ही बेबसी पर जल रहा था।
रस्म खत्म होते ही ढोलक की आवाज़ बंद हो गई और नानी ने ऊँची आवाज़ में ऐलान किया, "चलिए सब लोग खाने के लिए आ जाइये! खाना तैयार है!"
अम्मी की आँखें एक पल के लिए हैरत से फैलीं। उन्होंने एक छोटा सा, ना मानने वाला इशारा किया, लेकिन उनके होठों के कोने पर दबी हुई मुस्कुराहट उनका झूठ पकड़ रही थी।
उसी मुस्कुराहट को देखकर विशाल के चेहरे पर जीत की चमक आ गई। उसके होंठ हिले। बिना आवाज़ के, उसने हर लफ़्ज़ को आहिस्ता से तराशा।
"मस्त"
अम्मी ने एक तेज़ सांस अंदर खींची, जो उनकी सहेली से की जा रही बात के बीच में ही अटक गई। उनकी एक हाथ की मुट्ठी कस गई, और दूसरा हाथ अनजाने में उनके दिल पर चला गया, जैसे उसकी धड़कन को काबू करने की कोशिश कर रही हों। लाली की एक गहरी लहर उनके गालों से होती हुई उनकी गर्दन तक उतर आई। उन्होंने फौरन अपनी नज़रें विशाल से हटा लीं, जैसे उस लफ़्ज़ की आग उन्हें झुलसा देगी।
लेकिन इससे पहले कि वह पूरी तरह पलटतीं, उन्होंने अपने अंगूठे से अपने नीचे वाले होंठ को बहुत धीरे से, एक लंबे, सोच-समझ कर किए गए अंदाज़ में छुआ। यह एक हल्का इशारा था, लेकिन इसमें एक पूरी कहानी थी। एक इकरार था।
उस दूरी से, विशाल ने इसे ज़रूर देखा होगा। वह उसके लफ़्ज़ का जवाब था। उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट फैली।
मेरा मन किया कि मैं चीख पड़ूँ, जाकर विशाल का गिरेबान पकड़ लूँ। लेकिन मैं बस वहाँ खड़ा, अपनी ही बेबसी पर जल रहा था।
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Deepak Kapoor
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https://xossipy.com/thread-71793.html -- अनीता सिंह-
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