Thread Rating:
  • 25 Vote(s) - 4.04 Average
  • 1
  • 2
  • 3
  • 4
  • 5
Adultery FLAT MATE
#1
1) तन्हाई और सुनहरे सपने

सुबह की पहली किरण जब खिड़की के झरोखे से छनकर रसोई में दाखिल हुई, तो चाय की पत्ती की खुशबू के साथ एक अजीब सी खामोशी भी साथ ले आई। यह खामोशी हमारे घर में तब से बस गई थी, जब से पापा गए थे। रसोई में बर्तन सहेजने की आवाज आ रही थी—मम्मी हमेशा की तरह अपने काम में मशगूल थीं।

मम्मी की उम्र वैसे तो 40 के पार हो चुकी है, लेकिन आज भी जब वह अपने बालों को सलीके से बांधकर हल्के गुलाबी रंग की सूती साड़ी में सामने आती हैं, तो कोई भी उन्हें उनकी सही उम्र का नहीं बता सकता। वह अब भी अपनी उम्र से कहीं कम, शायद 30 की ढलती हुई शाम जैसी लगती हैं। उनकी आंखों में एक ठहराव है, जिसे दुनिया समझदारी कहती है, पर मैं जानता हूँ कि वह केवल अपनी तनहाई को छुपाने का एक पर्दा है।

मैंने मेज पर हाथ टिकाए उन्हें चाय छानते हुए देखा….

"मम्मी," मैंने धीरे से पुकारा।

"हूँ?" उन्होंने बिना मुड़े जवाब दिया।

"पापा के बिना... अब सब कैसा लगता है? मतलब, सुबह से शाम तक आपकी जिंदगी कैसे कटती है?" मेरा सवाल सीधा था, पर शायद उनके लिए बहुत भारी।

मम्मी के हाथ एक पल के लिए ठिठके.. चाय की केतली से निकलता धुंआ उनकी आंखों के सामने एक धुंध सा बना रहा था। उन्होंने पलटकर मेरी ओर देखा, चेहरे पर वही चिर-परिचित मुस्कान तैर आई—वह मुस्कान जो अक्सर सवालों को दफनाने के काम आती है….

"अरे, मेरी छोड़," उन्होंने बात को बड़ी चतुराई से मोड़ दिया। "तू ये बता, कल जिन कंपनियों के बारे में बात कर रहा था, वहां अप्लाई किया या बस बातों के ही पुल बांध रहा है?"

मैं समझ गया कि वह अपनी खाली दोपहरों और सूने कमरों की बात नहीं करना चाहतीं…. मैंने कुर्सी खींचते हुए कहा, 

"हाँ, तीन जगह रिज्यूमे भेजा है। एक तो काफी बड़ी टेक फर्म है।"

यह सुनते ही उनके चेहरे पर जो चमक आई, उसने मेरे दिल को एक साथ सुकून और दर्द दोनों दिया। वह मेरे पास आकर बैठ गईं, उनके हाथ मेज पर रखे मेरे हाथ पर थे। 

"सच? चलो, भगवान करे कहीं बात बन जाए।"

दरअसल, मम्मी को मेरी ड्राइंग टीचर वाली नौकरी से कोई नफरत नहीं थी। जब मैं बच्चों को रंगों और रेखाओं के बीच खोया हुआ देखता, तो वह दूर से मुस्कुराती जरूर थीं। लेकिन उनके लिए वह एक 'हॉबी' थी, 'फ्यूचर' नहीं। उन्हें लगता था कि एक आर्टिस्ट की जिंदगी में उतार-चढ़ाव बहुत होते हैं, और वह नहीं चाहती थीं कि मैं कभी भी आर्थिक असुरक्षा के उस दौर से गुजरूँ, जिससे उन्होंने और पापा ने हमें बचाया था।

"देख बेटा," उन्होंने अपनी बात जारी रखी, "मैं नहीं चाहती कि कल को तू अपने दोस्तों को देखकर यह सोचे कि तू पीछे रह गया। तेरे साथ वाले अब बड़ी गाड़ियों और ऊंचे पदों की बातें करते हैं। कला अपनी जगह है, पर एक ठोस भविष्य भी तो जरूरी है न?"

उनकी चिंता जायज थी। वह अक्सर रात को देर तक जागती रहती थीं, शायद यही सोचकर कि मेरा कल कैसा होगा। उनकी नजरों में सफलता का मतलब एक दफ्तर, एक तयशुदा सैलरी और समाज में एक रुतबा था।

मैंने उनकी आंखों में झांका, जहाँ मेरे लिए बेपनाह फिक्र थी। "मम्मी, मुझे अपनी चिंता उतनी नहीं सताती, जितनी आपकी होती है," मैंने आखिरकार वह बात कह दी जो मेरे सीने में दबी थी।

मम्मी ने सवालिया नजरों से मुझे देखा।

"अगर मुझे वह कॉर्पोरेट जॉब मिल गई, तो मैं सुबह 9 बजे घर से निकलूँगा और रात को 8 बजे वापस आऊँगा। इस बड़े से घर में आप पूरे दिन क्या करेंगी? किसके साथ बातें करेंगी? मुझे डर लगता है कि आप इस अकेलेपन में और ज्यादा खो जाएँगी," मेरी आवाज में एक हल्की सी थरथराहट थी।

मम्मी एक पल के लिए चुप हो गईं। कमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि घड़ी की टिक-टिक भी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी। फिर उन्होंने मेरा सिर सहलाया और बड़े धीरज से कहा, 

"पागल है क्या? मेरा मन लगाने के लिए तू अपनी जिंदगी के सबसे जरूरी साल घर बैठ कर खराब करेगा? मेरी फिक्र छोड़। जब तू शाम को थका-हारा घर आएगा और अपनी तरक्की की कहानियां सुनाएगा, वही मेरे पूरे दिन की खुराक होगी। तू आगे बढ़ेगा, तो मुझे लगेगा कि मेरी और तेरे पापा की मेहनत सफल हो गई।"

उन्होंने चाय का कप मेरे आगे सरका दिया- "जा, तैयार हो जा। आज शायद किसी का कॉल आ जाए।"

मैंने चाय का घूंट भरा, लेकिन उसका स्वाद आज कुछ कड़वा लग रहा था। मम्मी की मुस्कान के पीछे का डर और मेरे सपनों के बीच की यह कशमकश—यही मेरे भविष्य की नई कहानी की शुरुआत थी। मैं जानता था कि मुझे वह जॉब लेनी होगी, उनके लिए... ताकि वह दुनिया को गर्व से बता सकें कि उनका बेटा 'पीछे' नहीं रहा। भले ही इसके बदले मुझे उन्हें उन खामोश दोपहरों के हवाले करना पड़े।

मैंने गौर किया कि उनके हाथों की नसें अब पहले से ज्यादा उभर आई हैं—वे हाथ जो सालों से घर की चहारदीवारी और रिश्तों को थामे हुए थे, अब शायद थोड़े थक चुके थे। उनकी 'चतुराई' और 'मुस्कान' दरअसल एक ढाल थी, जिसे उन्होंने बरसों की साधना से तैयार किया था ताकि उनकी तनहाई की आंच मुझ तक न पहुंचे।

मम्मी की आंखों के कोरों में जो हल्की सी नमी झलकी और तुरंत ओझल हो गई, उसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया। वह अपने अस्तित्व को सिकोड़कर मेरे भविष्य के लिए जगह बना रही थीं। उनकी चुप्पी में एक अजीब सी चीख थी—यह डर नहीं था कि वह अकेली रह जाएंगी, बल्कि यह बेबसी थी कि उनके पास मुझे देने के लिए अब केवल अपनी तनहाई का बलिदान ही बचा था। मुझे अहसास हुआ कि कॉर्पोरेट जगत की उस ऊंची इमारत की सीढ़ियां दरअसल मम्मी के उन्हीं खामोश घंटों से बनी होंगी, जिन्हें मैं पीछे छोड़ जाऊंगा।


मैंने तय कर लिया था कि मैं वह मुखौटा पहनूंगा जो उन्हें पसंद है, भले ही उसके पीछे मेरा कलाकार हर रोज थोड़ा-थोड़ा दम तोड़े….



धूप अब तेज हो चली थी, और बाहर सड़क पर गाड़ियों का शोर बढ़ने लगा था। एक नई दौड़ शुरू होने वाली थी, जिसमें मैं शामिल तो हो रहा था, पर मेरा दिल अब भी उसी रसोई की खामोशी में अटका हुआ था।





To be Continued….
My Current Story:
  ----------
Compromise  Running











[+] 4 users Like The_Writer's post
Like Reply
Do not mention / post any under age /rape content. If found Please use REPORT button.


Messages In This Thread
FLAT MATE - by The_Writer - 18-05-2026, 09:35 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 19-05-2026, 01:17 PM
RE: FLAT MATE - by Uvaaaa - 19-05-2026, 11:20 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 20-05-2026, 01:14 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 21-05-2026, 09:33 PM
RE: FLAT MATE - by garamrohan - 22-05-2026, 09:17 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 25-05-2026, 08:32 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 25-05-2026, 08:40 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 25-05-2026, 08:47 AM
RE: FLAT MATE - by Kerry Watson - 25-05-2026, 07:23 PM
RE: FLAT MATE - by Armando - 25-05-2026, 07:43 PM
RE: FLAT MATE - by garamrohan - 26-05-2026, 09:06 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 29-05-2026, 11:56 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 29-05-2026, 11:32 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 31-05-2026, 11:07 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 31-05-2026, 01:50 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 05-06-2026, 07:33 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 05-06-2026, 08:37 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 13-06-2026, 10:39 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 13-06-2026, 12:48 PM
RE: FLAT MATE - by Marishka - 14-06-2026, 05:11 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 15-06-2026, 12:16 PM
RE: FLAT MATE - by Jannat. - 14-06-2026, 06:41 AM
RE: FLAT MATE - by Kamya Sharma - 14-06-2026, 06:55 AM
RE: FLAT MATE - by momass - 15-06-2026, 08:12 AM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 15-06-2026, 10:59 AM
RE: FLAT MATE - by wetpussy - 15-06-2026, 03:10 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 18-06-2026, 02:43 PM
RE: FLAT MATE - by Sicario - 15-06-2026, 03:26 PM
RE: FLAT MATE - by Rajun - 15-06-2026, 03:49 PM
RE: FLAT MATE - by Kamdevi. - 15-06-2026, 08:30 PM
RE: FLAT MATE - by momass - 16-06-2026, 07:18 AM
RE: FLAT MATE - by jamanuram - 18-06-2026, 12:06 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 18-06-2026, 02:41 PM
RE: FLAT MATE - by deepfake - 18-06-2026, 09:13 PM
RE: FLAT MATE - by The_Writer - 18-06-2026, 10:32 PM
RE: FLAT MATE - by Tanisha. - 19-06-2026, 03:22 PM
RE: FLAT MATE - by Usha Devi - 19-06-2026, 03:48 PM
RE: FLAT MATE - by The Mask of Zorro - 19-06-2026, 06:20 PM
RE: FLAT MATE - by garamrohan - 20-06-2026, 12:19 PM
RE: FLAT MATE - by momass - 30-06-2026, 06:51 AM
RE: FLAT MATE - by royarnab26 - 05-07-2026, 12:54 AM
RE: FLAT MATE - by Asli lund - 05-07-2026, 07:39 AM



Users browsing this thread: 2 Guest(s)