18-05-2026, 01:31 PM
“हम्म माँ, तूम सही कह रही हो।“ उतना कहते ही उसने अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए।
गीता नंगी होकर गई और रजनी को भी नंगी करके ले आई। रचयिता मैत्री।
मैंने रजनी की आँखों पर पट्टी बाँध दी और उसे जमीन पर बिठा दिया। गीता को पलंग पर लिटाया। फिर उसके पूरे शरीर पर मंत्र पढ़ते हुए हाथ फेरने लगा। आखिर में उसके माथे पर हाथ रखकर बोला, “आँखें बंद कर लो।”
गीता ने आँखें बंद कर लीं।
मैंने उसे वश में करते हुए कहा, “गीता, अब कल्पना करो कि हम तुम्हारे पति हैं। तुम्हें पूरे दिल से हमारी सेवा करनी है।”
गीता पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो चुकी थी। मैत्री लिखित कहानी।
मैंने अपनी धोती खोल दी और अपना 9 इंच का मोटा लंड उसके हाथ में थमा दिया। गीता ने प्यार से उसे सहलाना शुरू कर दिया। मैं उसके नीचे झुककर उसकी चूत चाटने लगा। उसकी चूत पहले ही गीली और लावा उगल रही थी।
फिर मैंने रजनी को खींचा, अपना लंड उसके मुँह में दे दिया और एक हाथ से गीता की चूची मलने लगा। दोनों माँ-बेटी गरम हो चुकी थीं।
मैंने फैसला किया - पहले गीता।
रजनी को खड़ा करके मैंने अपना लंड गीता की चूत पर रखा और एक धक्के में आधा घुसा दिया। गीता की चूत पूरी तरह गीली थी, इसलिए लंड आसानी से अंदर चला गया। मैंने रजनी की चूत में अंगुली डालकर खेलना शुरू कर दिया।
आधे घंटे तक मैं गीता को जोर-जोर से चोदता रहा, साथ में रजनी की चूत में उँगलियाँ डालता रहा। रजनी अपनी माँ को चुदवाती हुई देख रही थी और अपनी चूत से पानी छोड़े जा रही थी। मुझे इन माँ बेटी की चुदाई करने में बहोत मजा आ रही थी। रजनी अब काफी निढाल हो चुकी थी। वह बार-बार हिलती रहती थी और मेरी ऊँगली को अधिकतम अपनी चूत में समा लेने की कोशिश कर रही थी।
रजनी के चहरे पर एक आजिजी थी की अब माँ को छोड़ कर उसकी चुदाई करे। उसकी आँखों में एक स्पष्ट आमंत्रण था।
मैंने गीता को कहा “अब तुम देखो तुम्हारी बेटी को चुदते हुए” ऐसा कह के मैंने रजनी को अपनी तरफ खिंचा और निचे लिटाया। मुझे उसके पैरो को फैलाने नहीं पड़े, उसने अपने आप ही मेरे लंड के लिए उसकी चूत के फांके खोल दिए। फिर भी मैंने गीता को कहा उसके पैरो को पकड़ कर रखे ताकि मेरे लंड को उसकी चुदाई के लिए तकलीफ ना हो। गीता ने कहा: “जो आज्ञा बापजी” कह कर उसने रजनी के पैरो को पकडे और ऊपर की तरफ खुले कर दिया और रजनी को चूत को पूरी तरह खोल दिया।
“आ जाईए बाबाजी, आपका लंड की सेवा में रजनी की चूत तैयार है।“
फिर मैं गीता पर से हटकर रजनी को लिटाया और 30 मिनट तक उसकी टाइट चूत की जमकर चुदाई की।
रजनी शांत होने के बाद मैं वापस गीता के पास गया। उसे अपने ऊपर बिठाया और उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से चोदा। गीता अब पूरी तरह चुदाई के नशे में थी और जोर-जोर से गांड हिला रही थी।
आखिरकार मैंने गीता को नीचे लिटाया, अपना लंड उसके मुँह में ठूँस दिया और 8-9 जोरदार धक्के मारकर पूरा गाढ़ा वीर्य उसके गले में उड़ेल दिया।
“ये बाबा का प्रसाद है… पी जा… सब कष्ट दूर हो जाएंगे।” मैत्री की रचना।
गीता ने आँखें बंद करके सारा वीर्य गट-गट करके पी लिया।
************************************.
आज के लिए बस यही तक दोस्तों।
फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ।
तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत।।
गीता नंगी होकर गई और रजनी को भी नंगी करके ले आई। रचयिता मैत्री।
मैंने रजनी की आँखों पर पट्टी बाँध दी और उसे जमीन पर बिठा दिया। गीता को पलंग पर लिटाया। फिर उसके पूरे शरीर पर मंत्र पढ़ते हुए हाथ फेरने लगा। आखिर में उसके माथे पर हाथ रखकर बोला, “आँखें बंद कर लो।”
गीता ने आँखें बंद कर लीं।
मैंने उसे वश में करते हुए कहा, “गीता, अब कल्पना करो कि हम तुम्हारे पति हैं। तुम्हें पूरे दिल से हमारी सेवा करनी है।”
गीता पूरी तरह मंत्रमुग्ध हो चुकी थी। मैत्री लिखित कहानी।
मैंने अपनी धोती खोल दी और अपना 9 इंच का मोटा लंड उसके हाथ में थमा दिया। गीता ने प्यार से उसे सहलाना शुरू कर दिया। मैं उसके नीचे झुककर उसकी चूत चाटने लगा। उसकी चूत पहले ही गीली और लावा उगल रही थी।
फिर मैंने रजनी को खींचा, अपना लंड उसके मुँह में दे दिया और एक हाथ से गीता की चूची मलने लगा। दोनों माँ-बेटी गरम हो चुकी थीं।
मैंने फैसला किया - पहले गीता।
रजनी को खड़ा करके मैंने अपना लंड गीता की चूत पर रखा और एक धक्के में आधा घुसा दिया। गीता की चूत पूरी तरह गीली थी, इसलिए लंड आसानी से अंदर चला गया। मैंने रजनी की चूत में अंगुली डालकर खेलना शुरू कर दिया।
आधे घंटे तक मैं गीता को जोर-जोर से चोदता रहा, साथ में रजनी की चूत में उँगलियाँ डालता रहा। रजनी अपनी माँ को चुदवाती हुई देख रही थी और अपनी चूत से पानी छोड़े जा रही थी। मुझे इन माँ बेटी की चुदाई करने में बहोत मजा आ रही थी। रजनी अब काफी निढाल हो चुकी थी। वह बार-बार हिलती रहती थी और मेरी ऊँगली को अधिकतम अपनी चूत में समा लेने की कोशिश कर रही थी।
रजनी के चहरे पर एक आजिजी थी की अब माँ को छोड़ कर उसकी चुदाई करे। उसकी आँखों में एक स्पष्ट आमंत्रण था।
मैंने गीता को कहा “अब तुम देखो तुम्हारी बेटी को चुदते हुए” ऐसा कह के मैंने रजनी को अपनी तरफ खिंचा और निचे लिटाया। मुझे उसके पैरो को फैलाने नहीं पड़े, उसने अपने आप ही मेरे लंड के लिए उसकी चूत के फांके खोल दिए। फिर भी मैंने गीता को कहा उसके पैरो को पकड़ कर रखे ताकि मेरे लंड को उसकी चुदाई के लिए तकलीफ ना हो। गीता ने कहा: “जो आज्ञा बापजी” कह कर उसने रजनी के पैरो को पकडे और ऊपर की तरफ खुले कर दिया और रजनी को चूत को पूरी तरह खोल दिया।
“आ जाईए बाबाजी, आपका लंड की सेवा में रजनी की चूत तैयार है।“
फिर मैं गीता पर से हटकर रजनी को लिटाया और 30 मिनट तक उसकी टाइट चूत की जमकर चुदाई की।
रजनी शांत होने के बाद मैं वापस गीता के पास गया। उसे अपने ऊपर बिठाया और उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से चोदा। गीता अब पूरी तरह चुदाई के नशे में थी और जोर-जोर से गांड हिला रही थी।
आखिरकार मैंने गीता को नीचे लिटाया, अपना लंड उसके मुँह में ठूँस दिया और 8-9 जोरदार धक्के मारकर पूरा गाढ़ा वीर्य उसके गले में उड़ेल दिया।
“ये बाबा का प्रसाद है… पी जा… सब कष्ट दूर हो जाएंगे।” मैत्री की रचना।
गीता ने आँखें बंद करके सारा वीर्य गट-गट करके पी लिया।
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आज के लिए बस यही तक दोस्तों।
फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ।
तब तक के लिए मैत्री की तरफ से जय भारत।।



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