18-05-2026, 01:26 PM
नाश्ता खत्म करने के बाद मैंने कहा, “गीता, अब हम थोड़ी देर आराम करेंगे।”
गीता ने एक पलंग पर बिस्तर लगा दिया। मैं लेट गया। पूरी रात जागने की वजह से गीता भी थकी हुई थी। वह मेरे पैर दबाने लगी। सिर्फ साड़ी पहने हुए गीता को देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो चुका था और धोती के नीचे साफ उभर रहा था।
पैर दबाते हुए गीता ने पूछा, “बाबाजी, विधि कब शुरू होगी?” मैत्री की प्रस्तुति।
मैंने कहा, “अभी हम समाधि लगाएंगे।”
मैंने आँखें बंद कीं, फिर अचानक चेहरा विकृत कर लिया।
गीता डर गई, “क्या हुआ बाबाजी?”
मैंने बोला, “तुम्हारे पति का पैर किसी टोटके पर पड़ गया है। उनके साथ बहुत बुरा होने वाला है।”
गीता घबराकर बोली, “कोई उपाय तो होगा ना?”
“उपाय है… लेकिन बहुत निजी। तुम उनकी अर्धांगिनी हो, इसलिए तुम्हारे शरीर से ही क्रिया करनी पड़ेगी।”
गीता ने हिचकिचाते हुए पूछा, “कोई और रास्ता?” प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
“नहीं है। अगर अभी नहीं किया तो सब बेकार हो जाएगा। तुम अपनी बेटी और पति दोनों से हाथ धो बैठोगी।”
गीता तुरंत मान गई।
मैंने गीता को पलंग पर लिटा दिया और गुरु वाली मोटी आवाज में मंत्र पढ़ते हुए हिलने लगा। गीता समझ गई कि गुरुजी फिर से मुज में आ गए हैं। उसने प्रणाम किया।
मैंने अपना हाथ उसके पेट पर फेरते हुए कहा, “बेटा, तुम्हें अपने पति के प्राण बचाने के लिए अगले 6 दिन तक पूरी तरह नंगी रहना होगा। कर पाओगी?”
गीता ने काँपते स्वर में कहा, “जी… बाबाजी, करना पड़ेगा अगर आप कहोगे तो।”
“तुम्हारी बेटी रजनी को भी यही नियम पालन करना होगा। जाओ, दोनों को नंगी करके मेरे पास ले आओ।”
गिरा रजनी के पास गई और सब बताया की बाबा ने देखा है की उसके पिता कुछ गरबदी में पड़ गए है और उनको बचने के लिए हम दोनों को नंगा होना पड़ेगा और वह भी 6 दिनों के लिए। यह गुरूजी का आदेश है।
रजनी तो पहले से ही तैयार थी इस प्रकार की विधिओ के लिए। वह तुरंत तैयार हो गई। माँ पिताजी को बचने के लिए मैं नंगी होने को तैयार हूँ और वैसे भी बाबा के शरीर में उनके गुरुजी है मतलब की उनके कुछ याद नहीं रहता।“ रचयिता मैत्री।
“जी बेटी, तुम सही कह रही हो... चलो अब देर ना लगाओ और जल्दी से नंगी हो जा, वैसे अब हम दोनों ने एक दुसरे को नंगा तो देखा ही है अब कुछ छुपाने जैसा तो है नहीं।“
*******************************.
बने रहिये।
क्रमश:
मैत्री।
गीता ने एक पलंग पर बिस्तर लगा दिया। मैं लेट गया। पूरी रात जागने की वजह से गीता भी थकी हुई थी। वह मेरे पैर दबाने लगी। सिर्फ साड़ी पहने हुए गीता को देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो चुका था और धोती के नीचे साफ उभर रहा था।
पैर दबाते हुए गीता ने पूछा, “बाबाजी, विधि कब शुरू होगी?” मैत्री की प्रस्तुति।
मैंने कहा, “अभी हम समाधि लगाएंगे।”
मैंने आँखें बंद कीं, फिर अचानक चेहरा विकृत कर लिया।
गीता डर गई, “क्या हुआ बाबाजी?”
मैंने बोला, “तुम्हारे पति का पैर किसी टोटके पर पड़ गया है। उनके साथ बहुत बुरा होने वाला है।”
गीता घबराकर बोली, “कोई उपाय तो होगा ना?”
“उपाय है… लेकिन बहुत निजी। तुम उनकी अर्धांगिनी हो, इसलिए तुम्हारे शरीर से ही क्रिया करनी पड़ेगी।”
गीता ने हिचकिचाते हुए पूछा, “कोई और रास्ता?” प्रस्तुतकर्ता मैत्री।
“नहीं है। अगर अभी नहीं किया तो सब बेकार हो जाएगा। तुम अपनी बेटी और पति दोनों से हाथ धो बैठोगी।”
गीता तुरंत मान गई।
मैंने गीता को पलंग पर लिटा दिया और गुरु वाली मोटी आवाज में मंत्र पढ़ते हुए हिलने लगा। गीता समझ गई कि गुरुजी फिर से मुज में आ गए हैं। उसने प्रणाम किया।
मैंने अपना हाथ उसके पेट पर फेरते हुए कहा, “बेटा, तुम्हें अपने पति के प्राण बचाने के लिए अगले 6 दिन तक पूरी तरह नंगी रहना होगा। कर पाओगी?”
गीता ने काँपते स्वर में कहा, “जी… बाबाजी, करना पड़ेगा अगर आप कहोगे तो।”
“तुम्हारी बेटी रजनी को भी यही नियम पालन करना होगा। जाओ, दोनों को नंगी करके मेरे पास ले आओ।”
गिरा रजनी के पास गई और सब बताया की बाबा ने देखा है की उसके पिता कुछ गरबदी में पड़ गए है और उनको बचने के लिए हम दोनों को नंगा होना पड़ेगा और वह भी 6 दिनों के लिए। यह गुरूजी का आदेश है।
रजनी तो पहले से ही तैयार थी इस प्रकार की विधिओ के लिए। वह तुरंत तैयार हो गई। माँ पिताजी को बचने के लिए मैं नंगी होने को तैयार हूँ और वैसे भी बाबा के शरीर में उनके गुरुजी है मतलब की उनके कुछ याद नहीं रहता।“ रचयिता मैत्री।
“जी बेटी, तुम सही कह रही हो... चलो अब देर ना लगाओ और जल्दी से नंगी हो जा, वैसे अब हम दोनों ने एक दुसरे को नंगा तो देखा ही है अब कुछ छुपाने जैसा तो है नहीं।“
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बने रहिये।
क्रमश:
मैत्री।



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