17-05-2026, 11:43 AM
मैंने गाड़ी स्टार्ट कर दी और धीरे-धीरे आगे बढ़ा दी।
सड़क अब थोड़ी खाली थी, लेकिन मैं स्पीड बहुत कम रखे हुए था।
नेहा का हाथ अभी भी उस आदमी के लंड को हिला रहा था।
वो अपनी उँगलियों की पूरी कला दिखा रही थी —
कभी पूरी मुट्ठी से लंबे-लंबे स्ट्रोक देती,
कभी सिर्फ अँगूठे और तर्जनी से हेड को घुमाती,
कभी हथेली से पूरा लंड सहलाती,
कभी टोपा को हल्का-हल्का दबाकर प्रीकम निकालती।
हर बार जब वो हाथ ऊपर ले जाती, लंड का गीला टोपा मेरे रियर व्यू मिरर में साफ़ दिख जाता।
थोड़ी-थोड़ी दूर चले ही थे कि पीछे से उस आदमी की आवाज़ आई,
“अरे... क्या नाम है तुम्हारा? जो भी हो बाबू, गाड़ी थोड़ा साइड में रोको।”
नेहा का हाथ अभी भी उसके लंड पर था, लेकिन उसकी गति थोड़ी धीमी हो गई।
मैंने रियर व्यू मिरर में देखा।
“यहाँ पास में एक तालू का ठेका है।
तुम चाहो तो मैं वहाँ से थोड़ी सी दारू लेकर आ सकता हूँ।
मेरे घर के आसपास कोई ठेका नहीं है और बारिश भी बहुत हो रही है।
बस दो मिनट लगेंगे... मैं भागकर जाता हूँ और भागकर ले आता हूँ।”
उस आदमी की बात सुनकर हम दोनों कुछ पल चुप रहे।
नेहा ने मेरी तरफ देखा और थोड़ा शर्माते हुए बोली,
“सैम... क्या तुम लेकर आ सकते हो?
गाड़ी के टिक्की में छाता रखा हुआ है।
मिनट-दो मिनट में तुम आ जाओगे ना?”
उसकी आवाज़ में एक अजीब सी रिक्वेस्ट थी।
जैसे वो मुझे गाड़ी से बाहर भेजना चाहती हो।
नेहा की ये रिक्वेस्ट सुनकर मेरा दिल एकदम से धड़कने लगा।
वो मुझे गाड़ी से बाहर भेजना चाहती थी — उस आदमी के साथ अकेली छोड़कर। ये बात मुझे अजीब लग रही थी, लेकिन नेहा ने मुझे रिक्वेस्ट की थी।
तभी उस आदमी ने कहा, “रुको।”
मैंने सोचा शायद उसे ये पसंद नहीं आया। लेकिन उसका इरादा कुछ और था।
उसने नेहा की तरफ देखकर बोला, “नेहा, मेरी जेब में हाथ डालो।”
नेहा ने थोड़ा मुस्कुराते हुए उसकी पैंट की जेब में हाथ डाला। लंड तो पहले से बाहर था, इसलिए जेब में हाथ डालते ही नेहा की कल्लियाँ एकदम हिलने लगीं।
उसकी जेब में से आधी बीड़ी का बंडल निकला
नेहा ने हैरानी से कहा, “ये क्या है?”
उस आदमी ने हँसते हुए कहा, “इस वाली जेब में नहीं, दूसरी वाली जेब में हाथ डालो।”
नेहा ने दूसरी जेब में हाथ डाला और एक 500 का नोट बाहर निकाला।
उस आदमी ने नोट नेहा को देते हुए कहा, “ये ले जाओ, 8:00 पीएम ले आना।”मुझे देखकर उसकी हँसी भी आई और थोड़ा गुस्सा भी आया। मन में सोचा — होटल में 5000 रुपये का बिल भर चुका हूँ, और ये साला 500 रुपये की दारू के लिए ये सब कर रहा है।
मैंने शांत स्वर में कहा,
“नो थैंक यू... मैं ले आऊँगा।
हम अपने लिए भी कुछ बीयर ले आएँगे।”
मैं जल्दी से गाड़ी से उतरा और डिक्की की तरफ गया। बारिश तेज़ थी। जैसे ही मैंने डिक्की का दरवाज़ा खोला, छाता निकालने के लिए, मेरी नज़र पीछे गई।
मैंने देखा कि वो आदमी, जिसने दोनों हाथ सीट बेल्ट पर टिका रखे थे, अब एक हाथ हटाकर नेहा के बाल पकड़ चुका था।
और वो दोनों पहले से ही जोर-जोर से किस कर रहे थे।
मेरे गाड़ी से उतरने का इंतज़ार भी नहीं किया।
जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोला, उस आदमी ने नेहा के बाल खींचकर उसे अपने मुँह से चिपका लिया था।
नेहा भी पूरी तरह उस किस में खो गई थी।
दोनों ने मेरी तरफ ज़रा भी ध्यान नहीं दिया।
मुझे लगा था कि शायद नेहा कोई बात करेगी — “आराम से जाना”, “बारिश में सावधानी से”, “जल्दी आना”... कुछ भी।
लेकिन नेहा तो बस उस आदमी के साथ किस में डूब गई थी।
मैं डिक्की के सामने खड़ा था, बारिश में भीगता हुआ, और पीछे मेरी बीवी किसी और के साथ गहरे किस में व्यस्त थी।
मैंने छाता निकाला और धीरे से डिक्की बंद की।
जैसे ही मैं छाता लेकर ठेके के अंदर घुसा, बारिश और तेज़ हो गई।
मैंने तुरंत पीछे मुड़कर गाड़ी की तरफ देखा।
बारिश इतनी तेज़ थी कि गाड़ी के अंदर का कुछ भी साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था। सिर्फ गाड़ी की आउटलाइन दिख रही थी।
मैंने मन ही मन सोचा — अच्छा ही है।
बाहर से अब कुछ भी दिखने वाला नहीं है।
गाड़ी ठेके से काफी दूर खड़ी थी, और बारिश की वजह से विजिबिलिटी इतनी कम थी कि कोई भी जानबूझकर देखे बिना कुछ समझ नहीं सकता था।
मैं ठेके के काउंटर पर पहुँचा।
अंदर से एक आवाज़ आई, “क्या चाहिए भाई?”
ठेके से सामान लेकर मैं वापस लौटने लगा।
एक व्हिस्की की बोतल उसके लिए, 4 बीयर मेरे और नेहा के लिए। प्लास्टिक के बैग में सब रखकर मैं बारिश में छाता खोले धीरे-धीरे गाड़ी की तरफ बढ़ने लगा
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
हर कदम के साथ एक ही सवाल दिमाग में घूम रहा था — अंदर जाकर क्या देखने को मिलेगा?
जैसे ही मैंने ड्राइवर सीट का दरवाज़ा खोला, मैं देखते ही अचंभित हो गया।
पास वाली सीट पर नेहा नहीं थी।
जैसे ही मैं गाड़ी में बैठा और पास वाली सीट पर अपनी सारी दारू की बोतलें रखीं, मैंने पीछे की तरफ देखा।
पीछे का नज़ारा देखकर मैं एक पल के लिए स्तब्ध रह गया।
नेहा पीछे वाली सीट पर जा चुकी थी।
पीछे वाली सीट पर...
नेहा घुटनों के बल बैठी हुई थी।
उसके हील वाले सैंडल ऊपर थे।
उसके हील वाले सैंडल ऊपर थे।
उसकी परफेक्ट शेप वाली, गोल और भरी हुई गांड हील्स पर टिकी हुई थी।
उसका सिर पीछे झुका हुआ था — गाड़ी की छत को छू रहा था।
बाल थोड़े गीले और बिखरे हुए थे।
शायद बारिश में बाहर जाने की वजह से।
दोनों बूब्स फिर से बाहर थे।
उस आदमी का मुँह अब नेहा के लेफ्ट बूब पर था — ठीक वही कर रहा था जो थोड़ी देर पहले राइट बूब पर कर रहा था।
जोर-जोर से चूस रहा था, निप्पल को मुँह में लेकर खींच रहा था।
नेहा के दोनों हाथ उस आदमी के बालों में थे।
उस आदमी के दोनों हाथ नेहा की जाँघों पर थे, उन्हें फैलाए हुए।
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
बिना किसी शर्म के, सीधे मेरी आँखों में देखते हुए बोली,
“बेबी... ये बोल रहे थे कि मैंने तुम्हारे दूसरे बूब्स का स्वाद तो चखा ही नहीं...
सीट पर बैठे-बैठे बहुत मुश्किल हो रही थी... तो मैं पीछे आ गई...
सही किया ना मैंने बेबी?”
नेहा मेरी तरफ देख रही थी, मेरे भाव समझने की कोशिश कर रही थी।
मेरे चेहरे पर इतने सारे इमोशन्स के कारण कोई खास एक्सप्रेशन नहीं था।
मगर उस आदमी को ये पसंद नहीं आया कि नेहा का ध्यान मेरी तरफ रहे।
वो नेहा को अपने जादू में रखना चाहता था।
उसने नेहा के निप्पल को चूसते हुए ही पूछा,
“ये उससे ज़्यादा tasty है?”
नेहा हँसी।
जैसे वो पहले भी इस पर बात कर चुकी हो।
“बुद्दू... ऐसा थोड़ी होता है...
सैम के एक बूब्स दूसरे से अलग taste करेंगे?
ये भी ना... कुछ भी बोल रहे हो।”
मैं कुछ नहीं बोल पाया।
उस समय उस आदमी ने बूब्स चूसना छोड़कर मेरी तरफ देखा।
वो मेरे एक्सप्रेशन पढ़ना चाहता था।
मैंने बस “हम्म...” में जवाब दिया।
उस आदमी के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी — वो मुस्कान जो कह रही थी,
“भले ही ज़िंदगी के हर मामले में तू मुझसे आगे है, लेकिन इस पल... मैंने तुझसे जीत लिया है।”
फिर वो फिर से नेहा के बूब्स पर लग गया।
अब वो लेफ्ट बूब को वही ट्रीटमेंट दे रहा था जो थोड़ी देर पहले राइट बूब को दे रहा था — जोर-जोर से चूसना, निप्पल को मुँह में लेकर खींचना।
मैंने गाड़ी चलाते हुए एक बीयर की कैन खोल ली।
गला सूख रहा था। जो कुछ मैं देख रहा था और सुन रहा था, उससे मेरा गला पूरी तरह सूख चुका था।
मेरी पास वाली सीट पर अब नेहा नहीं थी।
वहाँ बोतलें और आधा बीड़ी का बंडल पड़ा था।
मैंने सोचा — नेहा ने उस बीड़ी पीने वाले आदमी का स्वाद लिया।
मुझे पता था उसका स्वाद कैसा होता है।
हॉस्टल के दिनों में जब पैसे खत्म हो जाते थे, मजबूरी में मैं भी बीड़ी पी चुका था।
मुँह कड़वा हो जाता था।
और नेहा ने बिना हिचकिचाहट के अपना मुँह उसके मुँह में डाल दिया।
मैं अपनी ही बीवी को समझ नहीं पा रहा था।
वो हर एडवेंचर के लिए तैयार लग रही थी।
हमने नियम बनाया था — आज सिर्फ मिलना है।
मौका मिला तो कुछ-कुछ हो सकता है।
लेकिन आज चुदाई का दिन नहीं था।
हम दोनों सहमत थे।
नेहा ने हँसते हुए कहा था कि रेस्टोरेंट में क्या ही हो पाएगा।
वैसे भी उसे हमारा पहला एक्सपीरियंस किसी अच्छे होटल के गद्देदार बिस्तर पर चाहिए था।
मगर अब मुझे लग रहा था कि उसकी ये हाई-क्लास बीवी चुदाई कि कहीं मेरी कार की पिछली सीट पर ही तो नहीं होने वाली।
“मुझे भी...” नेहा ने कहा।
मैंने समझा वो बीयर माँग रही है।
मैंने अपना ही कैन पीछे की तरफ बढ़ा दिया।
मगर रियर व्यू मिरर में मुझे सिर्फ नेहा के बूब्स दिख रहे थे।
वो आदमी वहाँ नहीं था।
मैंने मिरर को थोड़ा नीचे एडजस्ट किया।
अब साफ़ दिख रहा था।
नेहा ने अपनी टांगें असहज तरीके से फैला रखी थीं।
उस आदमी का सिर नेहा की जाँघों के बीच में था।
वो बारी-बारी से दोनों जाँघों को चाट रहा था।
उसकी उँगलियाँ नेहा की चूत में थीं — धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रही थीं।
नेहा की साँसें तेज़ थीं।
उसका एक हाथ उस आदमी के सिर पर था, उसे और नीचे दबा रही थी।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि कार में ये सब कैसे हो पा रहा है।
लेकिन थरक जब सिर चढ़ जाती है, तो आदमी कुछ भी कर लेता है।
अब धीरे-धीरे आबादी वाला इलाका शुरू हो गया था। रोशनी बढ़ गई थी, लोग दिखने लगे थे।
मैंने थोड़ा अलर्ट होकर पीछे कहा,
“तुम्हारा घर कहाँ है?”
उस आदमी ने हँसते हुए जवाब दिया,
“अरे यार... मजा आ रहा है भेनचोद... तू दारू तो खत्म कर... मुझे भी दे एक... फिर चलते हैं घर।”
मैंने शांत लेकिन साफ़ स्वर में कहा,
“अभी ऐसे नहीं... यहाँ देख सकते हैं लोग। पहले तुम ठीक से बैठो।”
मैं जलन में नहीं बोल रहा था — सच बोल रहा था। बाहर भीड़ थी, गाड़ियों की आवाज़ें आ रही थीं।
उस आदमी ने फिर कहा,
“अरे गाड़ी लेफ्ट में ले... मैं ले चलता हूँ... अपने अड्डे...
वहाँ कोई नहीं आता... मैं वहाँ अक्सर दारू पीता हूँ...
वहाँ चैन से बैठकर पी सकते हैं, कोई टेंशन नहीं।”
दोनों अब सीधे बैठ गए थे। बाहर से देखने वाला कोई भी सोचता कि पीछे दो लोग आराम से बैठे हैं और ड्राइवर गाड़ी चला रहा है।
मगर नीचे... नेहा का हाथ अभी भी उस आदमी के नंगे लंड को धीरे-धीरे सहला रहा था।
वे दोनों बातें कर रहे थे, जैसे सब कुछ नॉर्मल हो। दोनों के हाथ में ठंडी बीयर की कैन थी।
उस आदमी ने फिर कहा,
“चुदेगी?”
नेहा ने हल्के से मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“नहीं... आज नहीं।”
“फिर कब?”
“नेक्स्ट टाइम।”
“कहाँ?”
“कोई न कोई जगह मिल ही जाएगी... सेफ जगह, जहाँ सब खुलकर कर सकें... मगर यहाँ नहीं।”
उस आदमी ने थोड़ा और आगे झुककर कहा,
“मैं तुझे तेरे घर में चोदना चाहता हूँ... तेरे बिस्तर पर... इस चूतिये के सामने।”
ये सब वो बोल रहा था जो मैं पोर्न में बुल के मुँह से सुनता था। लग रहा था कि उसने भी बहुत पोर्न देखी है।
वैसे भी लोग चैट तक तब पहुँचते हैं जब पोर्न से बोर हो जाते हैं।
नेहा खिलखिलाकर हँसी।
“अच्छा ठीक है।”
उस आदमी ने फिर पूछा,
“गांड में लेती है?”
नेहा ने तुरंत सिर हिलाया,
“नहीं... और ये तो बिल्कुल नहीं।”
उसने उस आदमी के लंड को देखकर कहा।
हमने एक बार ट्राई किया था, लेकिन नेहा को एनल सेक्स बहुत घिनौना लगता था। वो कभी तैयार नहीं हुई थी।
उस आदमी ने बीच-बीच में मेरे कंधे पर हल्का-हल्का थपकी मारकर रास्ता बताना शुरू कर दिया।
“सीधे... हाँ... अब बाईं तरफ... नहीं, और आगे...”
कुछ देर बाद हम एक जगह पहुँच गए।
दोनों तरफ पुराने-पुराने घर थे, ज्यादातर ताले लगे हुए।
सामने एक ऊँची दीवार।
दाईं तरफ एक पतली-सी गली।
उस आदमी ने धीरे से कहा,
“बस... यहीं।
अब पीछे देखते रहना... कोई आता दिखे तो राइट में मुड़कर सीधे हाईवे की तरफ...
वैसे यहाँ कोई नहीं आता।”
गाड़ी अब बहुत ही सुनसान जगह पर थी।
बारिश की वजह से आसपास का माहौल और भी अंधेरा और गीला लग रहा था।
बीच-बीच में उनकी बातें चल रही थीं।
उस आदमी ने पूछा,
“और मुँह में?”
नेहा थोड़ा शर्मा गई।
“ये... क्या पूछ रहे हो?”
उस आदमी ने हँसते हुए कहा,
“लेती है न... आजकल की सारी लड़कियाँ लेती हैं।”
नेहा ने कुछ जवाब नहीं दिया।
उस आदमी ने फिर कहा,
“मेरा तो किसी ने मुँह में लिया ही नहीं आज तक।”
उसने जैसे अपनी बीवी और घर की हालत बताई थी, उसके बाद ये सुनना कुछ भी अचंभित नहीं किया... मगर इस बारे में मैंने सोचा भी नहीं था।
नेहा ने cute अंदाज़ में कहा,
“अच्छा...”
फिर वो झुकी।
अब सब कुछ मेरे देखने के लिए आसान हो गया था।
मुझे सिर्फ पीछे नज़र रखनी थी — सारा कांड पीछे ही चल रहा था।
मेरी बीवी... एक हल्के-फुल्के आदमी के ऊपर चढ़ी हुई थी।
दोनों एक-दूसरे को गहरे किस कर रहे थे।
उसके हाथ उस आदमी के लंड पर ऊपर से नीचे जा रहे थे।
2 मिनट के लंबे किस के बाद नेहा ने उस आदमी के सीने पर हाथ रखकर उसे कार की सीट के कोने में धकेल दिया।
उसकी पैंट अब पूरी तरह गायब थी।
एक पाँव मेरी आगे वाली सीट पर, दूसरा नीचे।
टांगें खुली हुई थीं।
नेहा... मेरी हाई-क्लास बीवी...
उसकी आँखों में देखते हुए उस आदमी की जाँघों को सहला रही थी।
फिर वो नीचे झुकी।
धीरे-धीरे उस आदमी की जाँघों पर हल्के-हल्के किस करने लगी।
और आगे बढ़ती गई।
जब वो उसके लंड के बहुत करीब पहुँची — उसके चेहरे के बिल्कुल सामने —
नेहा ने धीरे से पूछा,
“सच में... किसी ने इसे मुँह में नहीं लिया?”
उस आदमी ने नेहा के बाल सहलाते हुए ना में सिर हिलाया।
नेहा का चेहरा उस आदमी के लंड के बिल्कुल सामने था।
उसकी साँसें उसके लंड को छू रही थीं।
उसके लंड वाले हिस्से को अच्छे से देखने के बाद लग रहा था कि वो किसी खास उम्मीद से नहीं आया था।
हम लड़कों को थोड़ी भी उम्मीद होती है तो कम से कम अपनी झाड़ी साफ़ कर लेते हैं।
मगर वहाँ घने, काले बाल थे... बीच-बीच में कुछ सफेद भी।
फिर नेहा ने धीरे से उससे कहा,
“अपनी गांड ऊपर करो मेरे लिए।”
उस आदमी ने अपनी कमर एडजस्ट करके निचला हिस्सा आगे बढ़ा दिया।
नेहा ने उसके लंड को मज़बूती से पकड़ लिया और बोली,
“अब बेहतर है।”
उसने अपनी बीयर की कैन से एक घूँट लिया।
ठंडी बीयर अभी भी उसके मुँह में थी।
फिर वो झुकी... और उस आदमी के लंड का टोपा अपने मुँह में ले लिया।
ठंडी बीयर की वजह से उस आदमी के शरीर में एक झटका सा लगा।
उसके मुँह से निकला,
“आह्ह्ह...!”
मेरे मुँह से भी अनायास ही कुछ निकल गया।
मैं अपनी बीवी को अपने सामने किसी और का लंड मुँह में लेते हुए देख रहा था...
और वो भी इस अदा से।
नेहा का मुँह झुका हुआ था।
उसके होंठों के कोनों से ठंडी बीयर धीरे-धीरे बह रही थी, जो पूरे लंड को गीला कर रही थी।
वो कभी-कभी बीयर को अपने मुँह में घुमाती, फिर लंड को चूसती।
ठंडी बीयर और गर्म लंड का मेल...
ये उसने मेरे साथ कभी नहीं किया था।
मैं बस देखता रह गया।
उस आदमी को ये नया फील बहुत अच्छा लग रहा था।
मेरी बीवी का गर्म मुँह और ठंडी बीयर की ठंडक — दोनों का मेल उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था।
नेहा ने उसके लंड को मुँह में भर लिया — जितना हो सके।
फिर धीरे-धीरे, बहुत मीठे और sensual अंदाज़ में चूसने लगी।
वो उसे चूस रही थी जैसे कोई स्वादिष्ट, कीमती चीज़ हो।
कभी जोर से चूसती, कभी हल्का-हल्का ऊपर-नीचे करती, कभी सिर्फ टोपा को मुँह में लेकर चाटती।
एक बार उसने सिर पीछे खींचा और लंड को मुँह से बाहर निकाल दिया।
उस आदमी के चेहरे पर एक पल के लिए निराशा झलक गई।
लेकिन नेहा ने ऊपर देखकर मुस्कुराते हुए, अपनी जीभ से पूरे लंड को ऊपर से नीचे तक चाटा — जानबूझकर उसे tease करते हुए।
फिर सेक्सी, भरी हुई आवाज़ में बोली,
“आइस पसंद आया?”
उस आदमी ने बस हाँ में सिर हिलाया, साँसें तेज़ हो चुकी थीं।
नेहा ने फिर से लंड को मुँह में ले लिया — इस बार और गहरे, और धीरे।
उसके होंठों के कोनों से ठंडी बीयर की कुछ बूँदें बह रही थीं, जो लंड को और चमका रही थीं।
“बहुत ” उस आदमी ने जल्दी से जवाब दिया, “और चूसो...”
नेहा अब पूरी तरह सीट पर चढ़ गई थी।
दोनों घुटनों के बल, झुकी हुई।
उस आदमी ने अपना हाथ उसके पेट के नीचे से ले जाकर फिर से उसकी चूत पर रख दिया।
अब वो पहले से भी ज़्यादा गीली थी — एक बड़ी बूँद उसकी चूत से टपककर सीट पर गिर गई।
नेहा उसे चूस रही थी और साथ-साथ अपनी कमर हिला रही थी, उसकी उँगलियों पर अपनी चूत रगड़ रही थी।
सब कुछ चल रहा था, तभी उस आदमी की नज़र मेरी नज़र से टकराई।
उसने एक भौंह हल्का सा ऊपर उठाकर पूछा, जैसे कह रहा हो — “सब ठीक है ना?”
मैं कुछ नहीं बोला।
मैं तो बस उस सीन में पूरी तरह डूबा हुआ था।
ये मेरे सालों की मेहनत थी — नेहा को इस हाल में देखना।
मैं हर हल्की हरकत देख रहा था।
नेहा बार-बार कोशिश कर रही थी कि पूरा लंड मुँह में ले ले, लेकिन सिर्फ़ आधा ही जा पा रहा था।
मेरा तो पूरा अंदर चला जाता था, लेकिन उसका शेप और साइज़ अलग था।
फिर भी वो जबरदस्ती पूरा लेने की कोशिश नहीं कर रही थी।
उसे पता था कार में क्या हो सकता है।
कभी-कभी वो जीभ निकालकर लंड पर लगी बीयर को चाट लेती।
बीयर उसके अंडकोष तक चली गई थी।
नेहा को कोई आपत्ति नहीं थी।
वो उसके घने बालों वाले अंडकोष को भी चाट रही थी।
बीच-बीच में रुककर जीभ पर चिपके बालों को उँगलियों से निकालती और फिर लग जाती।
मेरे लिए ये सब बहुत ज़्यादा हॉट था।
अगर नेहा मेरे साथ करती तो शायद मैं अब तक झड़ चुका होता।
मगर उस आदमी में अभी झड़ने के कोई संकेत नहीं थे।
नेहा को समय का अंदाज़ा था, इसलिए अब वो चूसते हुए एक हाथ से उसकी लंड की खाल को ऊपर-नीचे करने लगी।
वो भी चाहती थी कि वो जल्दी झड़ जाए। कार में सब कुछ uncomfortable था।
थोड़ी देर बाद नेहा ने लंड को मुँह से निकालकर हाँफते हुए पूछा,
“रोक क्यों रखा है अपने आप को... बहाने दो... कोई बात नहीं, कार खराब हो जाएगी तो हम साफ़ करवा लेंगे?”
मेरी भोली बीवी को अभी भी लग रहा था कि मुझे अपनी कार गंदी होने से फर्क पड़ेगा।
उस आदमी ने हँसते हुए कहा,
“ऐसे नहीं होगा... मैंने बहुत मुठ मारी है ...”
नेहा ने मुस्कुराते हुए पूछा,
“अच्छा... तो फिर कैसे होगा?”
“ऐसा कर... तू अब लेट जा सीट पर...”
नेहा लेट गई।
टांगें खुलीं।
मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
उस आदमी ने नेहा की सीट के बिल्कुल किनारे पर घुटनों के बल बैठकर अपना लंड नेहा की चूत पर रगड़ा।
नेहा काँप गई।
उसने पूछा,
“डाल दूँ?”
नेहा ने शांत भाव से कहा,
“क्यों... वापस नहीं मिलना?”
जैसे उन्होंने मेरे बीयर लेने जाने के दौरान पहले ही इस पर बात कर ली थी। नेहा जानती थी — आज चुदाई का दिन नहीं था।
उस आदमी ने हल्का सा हँसा।
खिसकते हुए थोड़ा ऊपर आया।
एक टाँग ज़मीन पर, दूसरी नेहा और सीट के बीच में।
धीरे-धीरे ऊपर गया।
उसने अपना लंड नेहा के निप्पल पर रगड़ा।
थोड़ा और ऊपर गया।
नेहा ने मुँह खोल दिया।
उस आदमी का मोटा, गीला, चिपचिपा लंड धीरे-धीरे उसके मुँह में प्रवेश कर गया।
नेहा की आँखें आधी बंद हो गईं।
उसने होंठों को कसकर लंड के चारों तरफ लपेट लिया और चूसना शुरू कर दिया।
अब वो नेहा के चेहरे को चोद रहा था।
“घोक... घोक... घोक...” की गहरी, गीली, चिपचिपाती आवाज़ें कार के अंदर भर गई थीं।
हर बार जब नेहा सिर आगे ले जाती, लंड उसके मुँह में और गहरा चला जाता।
उसके गाल हल्के-हल्के फूल जाते, फिर सामान्य हो जाते।
उस आदमी ने हल्का दबाव डाला — लंड को और अंदर ले जाने की कोशिश की।
मगर पूरा अंदर उतारने का उसका इरादा नहीं था।
वो जानबूझकर नेहा की गहराई को टेस्ट कर रहा था, उसे tease कर रहा था।
शायद वो नेक्स्ट टाइम नेहा की पूरी क्षमता देखना चाहता था।
नेहा की साँसें नाक से तेज़ और भारी हो रही थीं।
उसकी लंबी गर्दन हर गहरे स्ट्रोक के साथ थोड़ी तन जाती।
कभी-कभी वो लंड को गले तक ले जाती, फिर थोड़ा पीछे खींच लेती।
उसके होंठों के कोनों से लार और बीयर का मिश्रण बह रहा था।
थोड़ी देर बाद उसने मुँह से निकाला।
थोड़ा पीछे हटा।
हाथ में लंड पकड़ा और हिलाने लगा।
“कहाँ?” नेहा ने पूछा।
“तेरे इस खूबसूरत चेहरे को खराब करना चाहता हूँ,” उसने बिना सोचे कहा।
जैसे ये उसने पहले से ही सोच रखा था कि उसे ये एक दिन करना ही है।
मगर इस पोजीशन में बैलेंस नहीं बन पा रहा था। लंड बार-बार इधर-उधर खिसक जा रहा था।
नेहा उसे देख रही थी।
उसकी इस दशा पर उसे थोड़ी हँसी आ रही थी।
सोच रही होगी — बेचारा झड़ना चाहता है पर पोजीशन नहीं बन पा रही।
नेहा ने solution देते हुए कहा,
“तुम आगे वाली सीट का सहारा ले लो।”
“तो फिर हिलाऊँगा कैसे?”
नेहा ने मेरी तरफ देखकर बहुत casually कहा,
“बेबी... तुम हिला दो ना... पकड़कर...
ये रिलीज होना चाहता है?”
मैं 30 सेकंड तक स्तब्ध रह गया।
नेहा ने फिर से साफ़ किया,
“अरे... jerk him off baby... please।”
मेरे हाथ काँप रहे थे।
मैंने बहुत धीरे से, जैसे कोई सपना देख रहा हो, अपना दायाँ हाथ पीछे बढ़ाया।
जैसे ही मेरी उँगलियाँ उस आदमी के लंड को छुईं, एक झटका सा लगा।
वो बहुत गर्म था... सख्त... नसें फूली हुईं... pulse तेज़-तेज़ धड़क रहा था।
मैंने पहली बार किसी और आदमी का लंड अपने हाथ में लिया था अपनी बीवी के सामने
मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि लग रहा था बाहर निकल आएगा।
जलन, शर्म, उत्तेजना — तीनों एक साथ मेरे अंदर घूम रहे थे।
मैंने grip ली।
उसकी मोटाई, उसकी गर्मी, उसकी नब्ज... सब मेरी हथेली में महसूस हो रहा था।
फिर मैंने धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।
उस आदमी ने सिर पीछे टिकाते हुए आह भरी,
“आह्ह... और तेज़ से... बस होने वाला है...
इस रंडी के चेहरे पर पॉइंट करना मादरचोद... आह्ह्ह... आह्ह्ह... आह्ह्ह्ह...”
उसकी आवाज़ में desperation थी।
मैं तेज़ी से हिलाने लगा।
मेरा हाथ अब पूरी तरह उसके लंड पर था।
हर स्ट्रोक के साथ वो और सख्त हो रहा था।
मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी —
ये मेरी बीवी के लिए है।
ये लंड मेरी बीवी के चेहरे पर झड़ने वाला है।
और मैं खुद इसे हिला रहा हूँ।
मुझे अपनी ही हरकत पर शर्म भी आ रही थी, लेकिन उत्तेजना इतनी ज़्यादा थी कि मैं रुक नहीं पा रहा था।
अचानक उस आदमी का शरीर तन गया।
“आह्ह्ह्ह... आ रहा है...!”
और वो झड़ गया।
पहला फव्वारा नेहा के चेहरे पर पड़ा — गर्म, मोटा और बहुत सारा।
दूसरा उसके गले पर।
तीसरा उसके बूब्स के बीच में।
नेहा आँखें बंद किए, मुँह थोड़ा खोले, सब ले रही थी।
मैं अभी भी उसका लंड पकड़े हुए था, और वो अंतिम बूँदें मेरी उँगलियों पर गिर रही थीं।
उस आदमी ने हाँफते हुए मुझे कहा,
“दबा... निचोड़ दे आखिरी बूंद तक...”
मैंने उसका लंड मज़बूती से दबाया।
आखिरी कुछ बूँदें नेहा के लाइट ब्राउन निप्पल पर गिर गईं।
फिर वो कुछ पल तक नेहा को देखता रहा।
उसके अपने वीर्य में नेहा का चेहरा, गला और बूब्स पूरी तरह सने हुए थे।
नेहा सच में बहुत खूबसूरत लग रही थी।
उसका चेहरा लाल हो चुका था, होंठ सूजे हुए थे, आँखें नम थीं।
उसके चेहरे पर, गले पर और बूब्स के बीच में वो गाढ़ा, सफेद तरल चमक रहा था।
नेहा ने धीरे से, नरम आवाज़ में मुझसे कहा,
“टिश्यू से मुझे साफ़ कर दो...”
मैंने डैशबोर्ड से वेट टिश्यू निकाला और अपनी बीवी की बॉडी से किसी और के वीर्य को साफ़ करने लगा।
ये बहुत अजीब feeling थी।
मेरी उँगलियाँ नेहा के गाल, ठोड़ी, गले और बूब्स पर घूम रही थीं, लेकिन मैं किसी और का cum पोंछ रहा था।
नेहा मेरी तरफ देख रही थी।
उसकी आँखों में शर्म, संतोष और थोड़ी नम्रता थी।
मैं चुपचाप उसे साफ़ करता रहा।
दोनों अब सीधे बैठ चुके थे।
नेहा अपनी ड्रेस को ठीक कर रही थी — डोरियाँ कंधों पर चढ़ा रही थी, स्कर्ट नीचे खींच रही थी।
जैसे ही नेहा ने आगे वाली सीट का गेट खोलकर बाहर जाने की कोशिश की, उस आदमी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“थोड़ी देर और बैठो मेरे पास... मेरा घर बस पास में ही है।”
उसने मुझे इशारा किया — “चलो” — जैसे ड्राइवर को करते हैं।
मैंने गाड़ी स्टार्ट की।
कुछ देर बाद हम एक बड़े बंगले के पास पहुँचे।
उसने रुकने को कहा।
मैंने अचंभे में पूछा,
“ये तुम्हारा घर है?”
वो हँसा और बोला,
“मेरा इतना बड़ा घर होता तो मैं तेरी जैसी रंडी से शादी करता... और खुद चोदता... तेरी तरह नहीं।”
फिर थोड़ा गंभीर होकर बोला,
“मालिक बाहर रहता है।
हम servant quarter में रहते हैं।
किराया नहीं देना पड़ता, बस देखभाल करनी पड़ती है।”
फिर उसने नेहा की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए पूछा,
“अंदर चलेंगी? चाय पिलवाता हूँ...”
उसकी बीवी अंदर थी।
मुझे नेहा का जवाब पहले से पता था।
वो “नहीं” कहने वाली थी।
मगर नेहा ने हल्के से मुस्कुराकर कहा,
“हाँ... क्यों नहीं।”
मैंने सोचा — ये क्या है?
नेहा आज कुछ अलग ही मूड में थी।
उसे शायद ये uncomfortable, risky situation पसंद आ रही थी।
उस आदमी की बीवी से मिलना... जिसके पति का वीर्य अभी भी नेहा के बूब्स, गले और चेहरे पर चिपका हुआ था।
मैं चुपचाप गाड़ी खड़ी करके बैठा रहा।
सड़क अब थोड़ी खाली थी, लेकिन मैं स्पीड बहुत कम रखे हुए था।
नेहा का हाथ अभी भी उस आदमी के लंड को हिला रहा था।
वो अपनी उँगलियों की पूरी कला दिखा रही थी —
कभी पूरी मुट्ठी से लंबे-लंबे स्ट्रोक देती,
कभी सिर्फ अँगूठे और तर्जनी से हेड को घुमाती,
कभी हथेली से पूरा लंड सहलाती,
कभी टोपा को हल्का-हल्का दबाकर प्रीकम निकालती।
हर बार जब वो हाथ ऊपर ले जाती, लंड का गीला टोपा मेरे रियर व्यू मिरर में साफ़ दिख जाता।
थोड़ी-थोड़ी दूर चले ही थे कि पीछे से उस आदमी की आवाज़ आई,
“अरे... क्या नाम है तुम्हारा? जो भी हो बाबू, गाड़ी थोड़ा साइड में रोको।”
नेहा का हाथ अभी भी उसके लंड पर था, लेकिन उसकी गति थोड़ी धीमी हो गई।
मैंने रियर व्यू मिरर में देखा।
“यहाँ पास में एक तालू का ठेका है।
तुम चाहो तो मैं वहाँ से थोड़ी सी दारू लेकर आ सकता हूँ।
मेरे घर के आसपास कोई ठेका नहीं है और बारिश भी बहुत हो रही है।
बस दो मिनट लगेंगे... मैं भागकर जाता हूँ और भागकर ले आता हूँ।”
उस आदमी की बात सुनकर हम दोनों कुछ पल चुप रहे।
नेहा ने मेरी तरफ देखा और थोड़ा शर्माते हुए बोली,
“सैम... क्या तुम लेकर आ सकते हो?
गाड़ी के टिक्की में छाता रखा हुआ है।
मिनट-दो मिनट में तुम आ जाओगे ना?”
उसकी आवाज़ में एक अजीब सी रिक्वेस्ट थी।
जैसे वो मुझे गाड़ी से बाहर भेजना चाहती हो।
नेहा की ये रिक्वेस्ट सुनकर मेरा दिल एकदम से धड़कने लगा।
वो मुझे गाड़ी से बाहर भेजना चाहती थी — उस आदमी के साथ अकेली छोड़कर। ये बात मुझे अजीब लग रही थी, लेकिन नेहा ने मुझे रिक्वेस्ट की थी।
तभी उस आदमी ने कहा, “रुको।”
मैंने सोचा शायद उसे ये पसंद नहीं आया। लेकिन उसका इरादा कुछ और था।
उसने नेहा की तरफ देखकर बोला, “नेहा, मेरी जेब में हाथ डालो।”
नेहा ने थोड़ा मुस्कुराते हुए उसकी पैंट की जेब में हाथ डाला। लंड तो पहले से बाहर था, इसलिए जेब में हाथ डालते ही नेहा की कल्लियाँ एकदम हिलने लगीं।
उसकी जेब में से आधी बीड़ी का बंडल निकला
नेहा ने हैरानी से कहा, “ये क्या है?”
उस आदमी ने हँसते हुए कहा, “इस वाली जेब में नहीं, दूसरी वाली जेब में हाथ डालो।”
नेहा ने दूसरी जेब में हाथ डाला और एक 500 का नोट बाहर निकाला।
उस आदमी ने नोट नेहा को देते हुए कहा, “ये ले जाओ, 8:00 पीएम ले आना।”मुझे देखकर उसकी हँसी भी आई और थोड़ा गुस्सा भी आया। मन में सोचा — होटल में 5000 रुपये का बिल भर चुका हूँ, और ये साला 500 रुपये की दारू के लिए ये सब कर रहा है।
मैंने शांत स्वर में कहा,
“नो थैंक यू... मैं ले आऊँगा।
हम अपने लिए भी कुछ बीयर ले आएँगे।”
मैं जल्दी से गाड़ी से उतरा और डिक्की की तरफ गया। बारिश तेज़ थी। जैसे ही मैंने डिक्की का दरवाज़ा खोला, छाता निकालने के लिए, मेरी नज़र पीछे गई।
मैंने देखा कि वो आदमी, जिसने दोनों हाथ सीट बेल्ट पर टिका रखे थे, अब एक हाथ हटाकर नेहा के बाल पकड़ चुका था।
और वो दोनों पहले से ही जोर-जोर से किस कर रहे थे।
मेरे गाड़ी से उतरने का इंतज़ार भी नहीं किया।
जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोला, उस आदमी ने नेहा के बाल खींचकर उसे अपने मुँह से चिपका लिया था।
नेहा भी पूरी तरह उस किस में खो गई थी।
दोनों ने मेरी तरफ ज़रा भी ध्यान नहीं दिया।
मुझे लगा था कि शायद नेहा कोई बात करेगी — “आराम से जाना”, “बारिश में सावधानी से”, “जल्दी आना”... कुछ भी।
लेकिन नेहा तो बस उस आदमी के साथ किस में डूब गई थी।
मैं डिक्की के सामने खड़ा था, बारिश में भीगता हुआ, और पीछे मेरी बीवी किसी और के साथ गहरे किस में व्यस्त थी।
मैंने छाता निकाला और धीरे से डिक्की बंद की।
जैसे ही मैं छाता लेकर ठेके के अंदर घुसा, बारिश और तेज़ हो गई।
मैंने तुरंत पीछे मुड़कर गाड़ी की तरफ देखा।
बारिश इतनी तेज़ थी कि गाड़ी के अंदर का कुछ भी साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था। सिर्फ गाड़ी की आउटलाइन दिख रही थी।
मैंने मन ही मन सोचा — अच्छा ही है।
बाहर से अब कुछ भी दिखने वाला नहीं है।
गाड़ी ठेके से काफी दूर खड़ी थी, और बारिश की वजह से विजिबिलिटी इतनी कम थी कि कोई भी जानबूझकर देखे बिना कुछ समझ नहीं सकता था।
मैं ठेके के काउंटर पर पहुँचा।
अंदर से एक आवाज़ आई, “क्या चाहिए भाई?”
ठेके से सामान लेकर मैं वापस लौटने लगा।
एक व्हिस्की की बोतल उसके लिए, 4 बीयर मेरे और नेहा के लिए। प्लास्टिक के बैग में सब रखकर मैं बारिश में छाता खोले धीरे-धीरे गाड़ी की तरफ बढ़ने लगा
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
हर कदम के साथ एक ही सवाल दिमाग में घूम रहा था — अंदर जाकर क्या देखने को मिलेगा?
जैसे ही मैंने ड्राइवर सीट का दरवाज़ा खोला, मैं देखते ही अचंभित हो गया।
पास वाली सीट पर नेहा नहीं थी।
जैसे ही मैं गाड़ी में बैठा और पास वाली सीट पर अपनी सारी दारू की बोतलें रखीं, मैंने पीछे की तरफ देखा।
पीछे का नज़ारा देखकर मैं एक पल के लिए स्तब्ध रह गया।
नेहा पीछे वाली सीट पर जा चुकी थी।
पीछे वाली सीट पर...
नेहा घुटनों के बल बैठी हुई थी।
उसके हील वाले सैंडल ऊपर थे।
उसके हील वाले सैंडल ऊपर थे।
उसकी परफेक्ट शेप वाली, गोल और भरी हुई गांड हील्स पर टिकी हुई थी।
उसका सिर पीछे झुका हुआ था — गाड़ी की छत को छू रहा था।
बाल थोड़े गीले और बिखरे हुए थे।
शायद बारिश में बाहर जाने की वजह से।
दोनों बूब्स फिर से बाहर थे।
उस आदमी का मुँह अब नेहा के लेफ्ट बूब पर था — ठीक वही कर रहा था जो थोड़ी देर पहले राइट बूब पर कर रहा था।
जोर-जोर से चूस रहा था, निप्पल को मुँह में लेकर खींच रहा था।
नेहा के दोनों हाथ उस आदमी के बालों में थे।
उस आदमी के दोनों हाथ नेहा की जाँघों पर थे, उन्हें फैलाए हुए।
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
बिना किसी शर्म के, सीधे मेरी आँखों में देखते हुए बोली,
“बेबी... ये बोल रहे थे कि मैंने तुम्हारे दूसरे बूब्स का स्वाद तो चखा ही नहीं...
सीट पर बैठे-बैठे बहुत मुश्किल हो रही थी... तो मैं पीछे आ गई...
सही किया ना मैंने बेबी?”
नेहा मेरी तरफ देख रही थी, मेरे भाव समझने की कोशिश कर रही थी।
मेरे चेहरे पर इतने सारे इमोशन्स के कारण कोई खास एक्सप्रेशन नहीं था।
मगर उस आदमी को ये पसंद नहीं आया कि नेहा का ध्यान मेरी तरफ रहे।
वो नेहा को अपने जादू में रखना चाहता था।
उसने नेहा के निप्पल को चूसते हुए ही पूछा,
“ये उससे ज़्यादा tasty है?”
नेहा हँसी।
जैसे वो पहले भी इस पर बात कर चुकी हो।
“बुद्दू... ऐसा थोड़ी होता है...
सैम के एक बूब्स दूसरे से अलग taste करेंगे?
ये भी ना... कुछ भी बोल रहे हो।”
मैं कुछ नहीं बोल पाया।
उस समय उस आदमी ने बूब्स चूसना छोड़कर मेरी तरफ देखा।
वो मेरे एक्सप्रेशन पढ़ना चाहता था।
मैंने बस “हम्म...” में जवाब दिया।
उस आदमी के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी — वो मुस्कान जो कह रही थी,
“भले ही ज़िंदगी के हर मामले में तू मुझसे आगे है, लेकिन इस पल... मैंने तुझसे जीत लिया है।”
फिर वो फिर से नेहा के बूब्स पर लग गया।
अब वो लेफ्ट बूब को वही ट्रीटमेंट दे रहा था जो थोड़ी देर पहले राइट बूब को दे रहा था — जोर-जोर से चूसना, निप्पल को मुँह में लेकर खींचना।
मैंने गाड़ी चलाते हुए एक बीयर की कैन खोल ली।
गला सूख रहा था। जो कुछ मैं देख रहा था और सुन रहा था, उससे मेरा गला पूरी तरह सूख चुका था।
मेरी पास वाली सीट पर अब नेहा नहीं थी।
वहाँ बोतलें और आधा बीड़ी का बंडल पड़ा था।
मैंने सोचा — नेहा ने उस बीड़ी पीने वाले आदमी का स्वाद लिया।
मुझे पता था उसका स्वाद कैसा होता है।
हॉस्टल के दिनों में जब पैसे खत्म हो जाते थे, मजबूरी में मैं भी बीड़ी पी चुका था।
मुँह कड़वा हो जाता था।
और नेहा ने बिना हिचकिचाहट के अपना मुँह उसके मुँह में डाल दिया।
मैं अपनी ही बीवी को समझ नहीं पा रहा था।
वो हर एडवेंचर के लिए तैयार लग रही थी।
हमने नियम बनाया था — आज सिर्फ मिलना है।
मौका मिला तो कुछ-कुछ हो सकता है।
लेकिन आज चुदाई का दिन नहीं था।
हम दोनों सहमत थे।
नेहा ने हँसते हुए कहा था कि रेस्टोरेंट में क्या ही हो पाएगा।
वैसे भी उसे हमारा पहला एक्सपीरियंस किसी अच्छे होटल के गद्देदार बिस्तर पर चाहिए था।
मगर अब मुझे लग रहा था कि उसकी ये हाई-क्लास बीवी चुदाई कि कहीं मेरी कार की पिछली सीट पर ही तो नहीं होने वाली।
“मुझे भी...” नेहा ने कहा।
मैंने समझा वो बीयर माँग रही है।
मैंने अपना ही कैन पीछे की तरफ बढ़ा दिया।
मगर रियर व्यू मिरर में मुझे सिर्फ नेहा के बूब्स दिख रहे थे।
वो आदमी वहाँ नहीं था।
मैंने मिरर को थोड़ा नीचे एडजस्ट किया।
अब साफ़ दिख रहा था।
नेहा ने अपनी टांगें असहज तरीके से फैला रखी थीं।
उस आदमी का सिर नेहा की जाँघों के बीच में था।
वो बारी-बारी से दोनों जाँघों को चाट रहा था।
उसकी उँगलियाँ नेहा की चूत में थीं — धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रही थीं।
नेहा की साँसें तेज़ थीं।
उसका एक हाथ उस आदमी के सिर पर था, उसे और नीचे दबा रही थी।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि कार में ये सब कैसे हो पा रहा है।
लेकिन थरक जब सिर चढ़ जाती है, तो आदमी कुछ भी कर लेता है।
अब धीरे-धीरे आबादी वाला इलाका शुरू हो गया था। रोशनी बढ़ गई थी, लोग दिखने लगे थे।
मैंने थोड़ा अलर्ट होकर पीछे कहा,
“तुम्हारा घर कहाँ है?”
उस आदमी ने हँसते हुए जवाब दिया,
“अरे यार... मजा आ रहा है भेनचोद... तू दारू तो खत्म कर... मुझे भी दे एक... फिर चलते हैं घर।”
मैंने शांत लेकिन साफ़ स्वर में कहा,
“अभी ऐसे नहीं... यहाँ देख सकते हैं लोग। पहले तुम ठीक से बैठो।”
मैं जलन में नहीं बोल रहा था — सच बोल रहा था। बाहर भीड़ थी, गाड़ियों की आवाज़ें आ रही थीं।
उस आदमी ने फिर कहा,
“अरे गाड़ी लेफ्ट में ले... मैं ले चलता हूँ... अपने अड्डे...
वहाँ कोई नहीं आता... मैं वहाँ अक्सर दारू पीता हूँ...
वहाँ चैन से बैठकर पी सकते हैं, कोई टेंशन नहीं।”
दोनों अब सीधे बैठ गए थे। बाहर से देखने वाला कोई भी सोचता कि पीछे दो लोग आराम से बैठे हैं और ड्राइवर गाड़ी चला रहा है।
मगर नीचे... नेहा का हाथ अभी भी उस आदमी के नंगे लंड को धीरे-धीरे सहला रहा था।
वे दोनों बातें कर रहे थे, जैसे सब कुछ नॉर्मल हो। दोनों के हाथ में ठंडी बीयर की कैन थी।
उस आदमी ने फिर कहा,
“चुदेगी?”
नेहा ने हल्के से मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“नहीं... आज नहीं।”
“फिर कब?”
“नेक्स्ट टाइम।”
“कहाँ?”
“कोई न कोई जगह मिल ही जाएगी... सेफ जगह, जहाँ सब खुलकर कर सकें... मगर यहाँ नहीं।”
उस आदमी ने थोड़ा और आगे झुककर कहा,
“मैं तुझे तेरे घर में चोदना चाहता हूँ... तेरे बिस्तर पर... इस चूतिये के सामने।”
ये सब वो बोल रहा था जो मैं पोर्न में बुल के मुँह से सुनता था। लग रहा था कि उसने भी बहुत पोर्न देखी है।
वैसे भी लोग चैट तक तब पहुँचते हैं जब पोर्न से बोर हो जाते हैं।
नेहा खिलखिलाकर हँसी।
“अच्छा ठीक है।”
उस आदमी ने फिर पूछा,
“गांड में लेती है?”
नेहा ने तुरंत सिर हिलाया,
“नहीं... और ये तो बिल्कुल नहीं।”
उसने उस आदमी के लंड को देखकर कहा।
हमने एक बार ट्राई किया था, लेकिन नेहा को एनल सेक्स बहुत घिनौना लगता था। वो कभी तैयार नहीं हुई थी।
उस आदमी ने बीच-बीच में मेरे कंधे पर हल्का-हल्का थपकी मारकर रास्ता बताना शुरू कर दिया।
“सीधे... हाँ... अब बाईं तरफ... नहीं, और आगे...”
कुछ देर बाद हम एक जगह पहुँच गए।
दोनों तरफ पुराने-पुराने घर थे, ज्यादातर ताले लगे हुए।
सामने एक ऊँची दीवार।
दाईं तरफ एक पतली-सी गली।
उस आदमी ने धीरे से कहा,
“बस... यहीं।
अब पीछे देखते रहना... कोई आता दिखे तो राइट में मुड़कर सीधे हाईवे की तरफ...
वैसे यहाँ कोई नहीं आता।”
गाड़ी अब बहुत ही सुनसान जगह पर थी।
बारिश की वजह से आसपास का माहौल और भी अंधेरा और गीला लग रहा था।
बीच-बीच में उनकी बातें चल रही थीं।
उस आदमी ने पूछा,
“और मुँह में?”
नेहा थोड़ा शर्मा गई।
“ये... क्या पूछ रहे हो?”
उस आदमी ने हँसते हुए कहा,
“लेती है न... आजकल की सारी लड़कियाँ लेती हैं।”
नेहा ने कुछ जवाब नहीं दिया।
उस आदमी ने फिर कहा,
“मेरा तो किसी ने मुँह में लिया ही नहीं आज तक।”
उसने जैसे अपनी बीवी और घर की हालत बताई थी, उसके बाद ये सुनना कुछ भी अचंभित नहीं किया... मगर इस बारे में मैंने सोचा भी नहीं था।
नेहा ने cute अंदाज़ में कहा,
“अच्छा...”
फिर वो झुकी।
अब सब कुछ मेरे देखने के लिए आसान हो गया था।
मुझे सिर्फ पीछे नज़र रखनी थी — सारा कांड पीछे ही चल रहा था।
मेरी बीवी... एक हल्के-फुल्के आदमी के ऊपर चढ़ी हुई थी।
दोनों एक-दूसरे को गहरे किस कर रहे थे।
उसके हाथ उस आदमी के लंड पर ऊपर से नीचे जा रहे थे।
2 मिनट के लंबे किस के बाद नेहा ने उस आदमी के सीने पर हाथ रखकर उसे कार की सीट के कोने में धकेल दिया।
उसकी पैंट अब पूरी तरह गायब थी।
एक पाँव मेरी आगे वाली सीट पर, दूसरा नीचे।
टांगें खुली हुई थीं।
नेहा... मेरी हाई-क्लास बीवी...
उसकी आँखों में देखते हुए उस आदमी की जाँघों को सहला रही थी।
फिर वो नीचे झुकी।
धीरे-धीरे उस आदमी की जाँघों पर हल्के-हल्के किस करने लगी।
और आगे बढ़ती गई।
जब वो उसके लंड के बहुत करीब पहुँची — उसके चेहरे के बिल्कुल सामने —
नेहा ने धीरे से पूछा,
“सच में... किसी ने इसे मुँह में नहीं लिया?”
उस आदमी ने नेहा के बाल सहलाते हुए ना में सिर हिलाया।
नेहा का चेहरा उस आदमी के लंड के बिल्कुल सामने था।
उसकी साँसें उसके लंड को छू रही थीं।
उसके लंड वाले हिस्से को अच्छे से देखने के बाद लग रहा था कि वो किसी खास उम्मीद से नहीं आया था।
हम लड़कों को थोड़ी भी उम्मीद होती है तो कम से कम अपनी झाड़ी साफ़ कर लेते हैं।
मगर वहाँ घने, काले बाल थे... बीच-बीच में कुछ सफेद भी।
फिर नेहा ने धीरे से उससे कहा,
“अपनी गांड ऊपर करो मेरे लिए।”
उस आदमी ने अपनी कमर एडजस्ट करके निचला हिस्सा आगे बढ़ा दिया।
नेहा ने उसके लंड को मज़बूती से पकड़ लिया और बोली,
“अब बेहतर है।”
उसने अपनी बीयर की कैन से एक घूँट लिया।
ठंडी बीयर अभी भी उसके मुँह में थी।
फिर वो झुकी... और उस आदमी के लंड का टोपा अपने मुँह में ले लिया।
ठंडी बीयर की वजह से उस आदमी के शरीर में एक झटका सा लगा।
उसके मुँह से निकला,
“आह्ह्ह...!”
मेरे मुँह से भी अनायास ही कुछ निकल गया।
मैं अपनी बीवी को अपने सामने किसी और का लंड मुँह में लेते हुए देख रहा था...
और वो भी इस अदा से।
नेहा का मुँह झुका हुआ था।
उसके होंठों के कोनों से ठंडी बीयर धीरे-धीरे बह रही थी, जो पूरे लंड को गीला कर रही थी।
वो कभी-कभी बीयर को अपने मुँह में घुमाती, फिर लंड को चूसती।
ठंडी बीयर और गर्म लंड का मेल...
ये उसने मेरे साथ कभी नहीं किया था।
मैं बस देखता रह गया।
उस आदमी को ये नया फील बहुत अच्छा लग रहा था।
मेरी बीवी का गर्म मुँह और ठंडी बीयर की ठंडक — दोनों का मेल उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था।
नेहा ने उसके लंड को मुँह में भर लिया — जितना हो सके।
फिर धीरे-धीरे, बहुत मीठे और sensual अंदाज़ में चूसने लगी।
वो उसे चूस रही थी जैसे कोई स्वादिष्ट, कीमती चीज़ हो।
कभी जोर से चूसती, कभी हल्का-हल्का ऊपर-नीचे करती, कभी सिर्फ टोपा को मुँह में लेकर चाटती।
एक बार उसने सिर पीछे खींचा और लंड को मुँह से बाहर निकाल दिया।
उस आदमी के चेहरे पर एक पल के लिए निराशा झलक गई।
लेकिन नेहा ने ऊपर देखकर मुस्कुराते हुए, अपनी जीभ से पूरे लंड को ऊपर से नीचे तक चाटा — जानबूझकर उसे tease करते हुए।
फिर सेक्सी, भरी हुई आवाज़ में बोली,
“आइस पसंद आया?”
उस आदमी ने बस हाँ में सिर हिलाया, साँसें तेज़ हो चुकी थीं।
नेहा ने फिर से लंड को मुँह में ले लिया — इस बार और गहरे, और धीरे।
उसके होंठों के कोनों से ठंडी बीयर की कुछ बूँदें बह रही थीं, जो लंड को और चमका रही थीं।
“बहुत ” उस आदमी ने जल्दी से जवाब दिया, “और चूसो...”
नेहा अब पूरी तरह सीट पर चढ़ गई थी।
दोनों घुटनों के बल, झुकी हुई।
उस आदमी ने अपना हाथ उसके पेट के नीचे से ले जाकर फिर से उसकी चूत पर रख दिया।
अब वो पहले से भी ज़्यादा गीली थी — एक बड़ी बूँद उसकी चूत से टपककर सीट पर गिर गई।
नेहा उसे चूस रही थी और साथ-साथ अपनी कमर हिला रही थी, उसकी उँगलियों पर अपनी चूत रगड़ रही थी।
सब कुछ चल रहा था, तभी उस आदमी की नज़र मेरी नज़र से टकराई।
उसने एक भौंह हल्का सा ऊपर उठाकर पूछा, जैसे कह रहा हो — “सब ठीक है ना?”
मैं कुछ नहीं बोला।
मैं तो बस उस सीन में पूरी तरह डूबा हुआ था।
ये मेरे सालों की मेहनत थी — नेहा को इस हाल में देखना।
मैं हर हल्की हरकत देख रहा था।
नेहा बार-बार कोशिश कर रही थी कि पूरा लंड मुँह में ले ले, लेकिन सिर्फ़ आधा ही जा पा रहा था।
मेरा तो पूरा अंदर चला जाता था, लेकिन उसका शेप और साइज़ अलग था।
फिर भी वो जबरदस्ती पूरा लेने की कोशिश नहीं कर रही थी।
उसे पता था कार में क्या हो सकता है।
कभी-कभी वो जीभ निकालकर लंड पर लगी बीयर को चाट लेती।
बीयर उसके अंडकोष तक चली गई थी।
नेहा को कोई आपत्ति नहीं थी।
वो उसके घने बालों वाले अंडकोष को भी चाट रही थी।
बीच-बीच में रुककर जीभ पर चिपके बालों को उँगलियों से निकालती और फिर लग जाती।
मेरे लिए ये सब बहुत ज़्यादा हॉट था।
अगर नेहा मेरे साथ करती तो शायद मैं अब तक झड़ चुका होता।
मगर उस आदमी में अभी झड़ने के कोई संकेत नहीं थे।
नेहा को समय का अंदाज़ा था, इसलिए अब वो चूसते हुए एक हाथ से उसकी लंड की खाल को ऊपर-नीचे करने लगी।
वो भी चाहती थी कि वो जल्दी झड़ जाए। कार में सब कुछ uncomfortable था।
थोड़ी देर बाद नेहा ने लंड को मुँह से निकालकर हाँफते हुए पूछा,
“रोक क्यों रखा है अपने आप को... बहाने दो... कोई बात नहीं, कार खराब हो जाएगी तो हम साफ़ करवा लेंगे?”
मेरी भोली बीवी को अभी भी लग रहा था कि मुझे अपनी कार गंदी होने से फर्क पड़ेगा।
उस आदमी ने हँसते हुए कहा,
“ऐसे नहीं होगा... मैंने बहुत मुठ मारी है ...”
नेहा ने मुस्कुराते हुए पूछा,
“अच्छा... तो फिर कैसे होगा?”
“ऐसा कर... तू अब लेट जा सीट पर...”
नेहा लेट गई।
टांगें खुलीं।
मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
उस आदमी ने नेहा की सीट के बिल्कुल किनारे पर घुटनों के बल बैठकर अपना लंड नेहा की चूत पर रगड़ा।
नेहा काँप गई।
उसने पूछा,
“डाल दूँ?”
नेहा ने शांत भाव से कहा,
“क्यों... वापस नहीं मिलना?”
जैसे उन्होंने मेरे बीयर लेने जाने के दौरान पहले ही इस पर बात कर ली थी। नेहा जानती थी — आज चुदाई का दिन नहीं था।
उस आदमी ने हल्का सा हँसा।
खिसकते हुए थोड़ा ऊपर आया।
एक टाँग ज़मीन पर, दूसरी नेहा और सीट के बीच में।
धीरे-धीरे ऊपर गया।
उसने अपना लंड नेहा के निप्पल पर रगड़ा।
थोड़ा और ऊपर गया।
नेहा ने मुँह खोल दिया।
उस आदमी का मोटा, गीला, चिपचिपा लंड धीरे-धीरे उसके मुँह में प्रवेश कर गया।
नेहा की आँखें आधी बंद हो गईं।
उसने होंठों को कसकर लंड के चारों तरफ लपेट लिया और चूसना शुरू कर दिया।
अब वो नेहा के चेहरे को चोद रहा था।
“घोक... घोक... घोक...” की गहरी, गीली, चिपचिपाती आवाज़ें कार के अंदर भर गई थीं।
हर बार जब नेहा सिर आगे ले जाती, लंड उसके मुँह में और गहरा चला जाता।
उसके गाल हल्के-हल्के फूल जाते, फिर सामान्य हो जाते।
उस आदमी ने हल्का दबाव डाला — लंड को और अंदर ले जाने की कोशिश की।
मगर पूरा अंदर उतारने का उसका इरादा नहीं था।
वो जानबूझकर नेहा की गहराई को टेस्ट कर रहा था, उसे tease कर रहा था।
शायद वो नेक्स्ट टाइम नेहा की पूरी क्षमता देखना चाहता था।
नेहा की साँसें नाक से तेज़ और भारी हो रही थीं।
उसकी लंबी गर्दन हर गहरे स्ट्रोक के साथ थोड़ी तन जाती।
कभी-कभी वो लंड को गले तक ले जाती, फिर थोड़ा पीछे खींच लेती।
उसके होंठों के कोनों से लार और बीयर का मिश्रण बह रहा था।
थोड़ी देर बाद उसने मुँह से निकाला।
थोड़ा पीछे हटा।
हाथ में लंड पकड़ा और हिलाने लगा।
“कहाँ?” नेहा ने पूछा।
“तेरे इस खूबसूरत चेहरे को खराब करना चाहता हूँ,” उसने बिना सोचे कहा।
जैसे ये उसने पहले से ही सोच रखा था कि उसे ये एक दिन करना ही है।
मगर इस पोजीशन में बैलेंस नहीं बन पा रहा था। लंड बार-बार इधर-उधर खिसक जा रहा था।
नेहा उसे देख रही थी।
उसकी इस दशा पर उसे थोड़ी हँसी आ रही थी।
सोच रही होगी — बेचारा झड़ना चाहता है पर पोजीशन नहीं बन पा रही।
नेहा ने solution देते हुए कहा,
“तुम आगे वाली सीट का सहारा ले लो।”
“तो फिर हिलाऊँगा कैसे?”
नेहा ने मेरी तरफ देखकर बहुत casually कहा,
“बेबी... तुम हिला दो ना... पकड़कर...
ये रिलीज होना चाहता है?”
मैं 30 सेकंड तक स्तब्ध रह गया।
नेहा ने फिर से साफ़ किया,
“अरे... jerk him off baby... please।”
मेरे हाथ काँप रहे थे।
मैंने बहुत धीरे से, जैसे कोई सपना देख रहा हो, अपना दायाँ हाथ पीछे बढ़ाया।
जैसे ही मेरी उँगलियाँ उस आदमी के लंड को छुईं, एक झटका सा लगा।
वो बहुत गर्म था... सख्त... नसें फूली हुईं... pulse तेज़-तेज़ धड़क रहा था।
मैंने पहली बार किसी और आदमी का लंड अपने हाथ में लिया था अपनी बीवी के सामने
मेरा दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि लग रहा था बाहर निकल आएगा।
जलन, शर्म, उत्तेजना — तीनों एक साथ मेरे अंदर घूम रहे थे।
मैंने grip ली।
उसकी मोटाई, उसकी गर्मी, उसकी नब्ज... सब मेरी हथेली में महसूस हो रहा था।
फिर मैंने धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया।
उस आदमी ने सिर पीछे टिकाते हुए आह भरी,
“आह्ह... और तेज़ से... बस होने वाला है...
इस रंडी के चेहरे पर पॉइंट करना मादरचोद... आह्ह्ह... आह्ह्ह... आह्ह्ह्ह...”
उसकी आवाज़ में desperation थी।
मैं तेज़ी से हिलाने लगा।
मेरा हाथ अब पूरी तरह उसके लंड पर था।
हर स्ट्रोक के साथ वो और सख्त हो रहा था।
मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी —
ये मेरी बीवी के लिए है।
ये लंड मेरी बीवी के चेहरे पर झड़ने वाला है।
और मैं खुद इसे हिला रहा हूँ।
मुझे अपनी ही हरकत पर शर्म भी आ रही थी, लेकिन उत्तेजना इतनी ज़्यादा थी कि मैं रुक नहीं पा रहा था।
अचानक उस आदमी का शरीर तन गया।
“आह्ह्ह्ह... आ रहा है...!”
और वो झड़ गया।
पहला फव्वारा नेहा के चेहरे पर पड़ा — गर्म, मोटा और बहुत सारा।
दूसरा उसके गले पर।
तीसरा उसके बूब्स के बीच में।
नेहा आँखें बंद किए, मुँह थोड़ा खोले, सब ले रही थी।
मैं अभी भी उसका लंड पकड़े हुए था, और वो अंतिम बूँदें मेरी उँगलियों पर गिर रही थीं।
उस आदमी ने हाँफते हुए मुझे कहा,
“दबा... निचोड़ दे आखिरी बूंद तक...”
मैंने उसका लंड मज़बूती से दबाया।
आखिरी कुछ बूँदें नेहा के लाइट ब्राउन निप्पल पर गिर गईं।
फिर वो कुछ पल तक नेहा को देखता रहा।
उसके अपने वीर्य में नेहा का चेहरा, गला और बूब्स पूरी तरह सने हुए थे।
नेहा सच में बहुत खूबसूरत लग रही थी।
उसका चेहरा लाल हो चुका था, होंठ सूजे हुए थे, आँखें नम थीं।
उसके चेहरे पर, गले पर और बूब्स के बीच में वो गाढ़ा, सफेद तरल चमक रहा था।
नेहा ने धीरे से, नरम आवाज़ में मुझसे कहा,
“टिश्यू से मुझे साफ़ कर दो...”
मैंने डैशबोर्ड से वेट टिश्यू निकाला और अपनी बीवी की बॉडी से किसी और के वीर्य को साफ़ करने लगा।
ये बहुत अजीब feeling थी।
मेरी उँगलियाँ नेहा के गाल, ठोड़ी, गले और बूब्स पर घूम रही थीं, लेकिन मैं किसी और का cum पोंछ रहा था।
नेहा मेरी तरफ देख रही थी।
उसकी आँखों में शर्म, संतोष और थोड़ी नम्रता थी।
मैं चुपचाप उसे साफ़ करता रहा।
दोनों अब सीधे बैठ चुके थे।
नेहा अपनी ड्रेस को ठीक कर रही थी — डोरियाँ कंधों पर चढ़ा रही थी, स्कर्ट नीचे खींच रही थी।
जैसे ही नेहा ने आगे वाली सीट का गेट खोलकर बाहर जाने की कोशिश की, उस आदमी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“थोड़ी देर और बैठो मेरे पास... मेरा घर बस पास में ही है।”
उसने मुझे इशारा किया — “चलो” — जैसे ड्राइवर को करते हैं।
मैंने गाड़ी स्टार्ट की।
कुछ देर बाद हम एक बड़े बंगले के पास पहुँचे।
उसने रुकने को कहा।
मैंने अचंभे में पूछा,
“ये तुम्हारा घर है?”
वो हँसा और बोला,
“मेरा इतना बड़ा घर होता तो मैं तेरी जैसी रंडी से शादी करता... और खुद चोदता... तेरी तरह नहीं।”
फिर थोड़ा गंभीर होकर बोला,
“मालिक बाहर रहता है।
हम servant quarter में रहते हैं।
किराया नहीं देना पड़ता, बस देखभाल करनी पड़ती है।”
फिर उसने नेहा की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए पूछा,
“अंदर चलेंगी? चाय पिलवाता हूँ...”
उसकी बीवी अंदर थी।
मुझे नेहा का जवाब पहले से पता था।
वो “नहीं” कहने वाली थी।
मगर नेहा ने हल्के से मुस्कुराकर कहा,
“हाँ... क्यों नहीं।”
मैंने सोचा — ये क्या है?
नेहा आज कुछ अलग ही मूड में थी।
उसे शायद ये uncomfortable, risky situation पसंद आ रही थी।
उस आदमी की बीवी से मिलना... जिसके पति का वीर्य अभी भी नेहा के बूब्स, गले और चेहरे पर चिपका हुआ था।
मैं चुपचाप गाड़ी खड़ी करके बैठा रहा।


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