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Adultery ......काला जामुन ..... A meanie mommy
तकरीबन पाँच मिनट बाद मम्मी बाथरूम से बाहर निकल और मुझे कहा "आज बहुत गर्मी है इसलिए मैं स्विमिंग पुल ‌मैं नहाने जा रही हुं तुम्हें नहाना हो तो नीचे आ जाना " और वह चली गई । मैं फ्रेश होकर थोड़ी देर बाद नीचे आ गया और स्विमिंग पुल के पास जा पहुँचा जहाँ मम्मी पहले से ही नहा रही थीं। मैंने सारे कपड़े उतारे सिर्फ अंडरवियर के और झट से स्विमिंग पुल में कूद गया और सीधा मम्मी के पास चला गया। मम्मी थोड़ी देर नहाने के बाद स्विमिंग पुल से बाहर निकलकर वह रखी कुर्सी पर बैठ गई। तभी एक आंटी मम्मी के बगल में बैठे मम्मी से बातचीत करने लगी । मैं थोड़ी देर नहाने के बाद स्विमिंग पुल से बहार आ गया और मम्मी के पास पहुंचा। जब मैं करीब पहुंचा तो वह आंटी कल सवेरे वाली बॉडी मसाज करने वाली महिला थी । उस आंटी ने मुझे " गुड मॉर्निंग " कहा , वापसी में मैंने भी उन्हें " गुड़ मॉर्निंग " कहा। थोड़ी देर हमलोग ने बात की फिर आंटी वह से चली गई। तभी मम्मी ने मुझे कहा " हमें अब कमरे में चलना चाहिए तैयार होने के लिए , क्योंकि हमें घूमने जाना है .

अब हम कमरे पहुंचकर तैयार हो गऐ । मम्मी ने साड़ी पहनी थी और मैं टी शर्ट और पैंट पहने हुए थे हमलोग बाहर जाने वाले थे कि किसी ने हमारे कमरे के दरवाजे खटखटाया जब मैंने दरवाजा खोला तो सामने आंटी खड़ी थी जो एक स्कर्ट और टॉप पहन थी, वो मस्त लग रही थी. फिर आंटी ने मम्मी को कहा कि चलो आज हम लोग बहुत मस्ती करेंगे और मुझे आँख मारकर बोली कि तू भी देख लेना और मस्ती कर लेना . और हम लोग घूमने चले गए।

अब पूरा दिन हम लोग बहुत घूमे और बिच पर खूब मस्ती की और हम सब रात को होटल में 7 बजे आ गये. जब हमलोग शाम को होटल पहुंचे तो एक अंकल ने आंटी को इशारा कर अपने पास बुलाया । आंटी और मम्मी वह पहुंचकर कुछ बातें कर रही थी और वो सब हंस रहे थे. फिर में अपने रूम में आ गया और आधे घंटे के बाद मम्मी आकर मुझसे बोली कि वह और आंटी लोग नीचे लॉन में जा रहे है तुम टी.वी देखो या जो मन करे करो, तो मैंने कहा ओके. अब मुझे समझ में आ गया था कि वो लोग कुछ इन्जॉय करेंगे.

फिर में मम्मी के जाने के बाद पीछे-पीछे गया तो मैंने देखो कि मम्मी और अंकल लॉन में बैठे थे. अब मम्मी अंकल के साथ बातें कर रही थी और अपने हाथ में शराब लेकर बहुत हंस रही थी. अब मुझे होटल में मम्मी बहुत ही खुश नज़र आ रही थी.

अब मम्मी और अंकल थोड़ा पीने के बाद आराम से गप्पे मार रहे थे. फिर मैंने देखा कि मम्मी को थोड़ा-थोड़ा नशा हो रहा था और उनकी साड़ी से उनका क्लीवेज साफ़ दिख रहा था और अंकल उसे घूर रहे थे. अब में उन लोगों की बातें सुनने के लिए सामने के एक पेड़ के पीछे गया और पेड़ के पीछे छुपकर उन लोगों की बातें सुनने लगा.

अंकल मम्मी के पास बैठ गये और ऐसे ही उनके हाथ छूने लगे, मम्मी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि किया करें

तभी अचानक से आंटी आई और बोली कि सॉरी गाइस थोड़ा लेट हो गया, डार्लिंग, मेरे पति ने कुछ बदमाशी तो नहीं की ना, तो मम्मी हँसने लगी. फिर अंकल बोले कि चलो अब रूम में चलते है और आंटी को आँख मारने लगे.

तब मुझे सब कुछ समझ में आया कि आज ज़रूर कुछ होने वाला है, लेकिन अब में भी उत्तेजित था. मम्मी ने इतना शराब पी लिया था कि चल भी नहीं पा रही थी, तो आंटी और अंकल मम्मी को पकड़कर रूम में ले गये । फिर आंटी थोड़ी देर बाद अपने रुम से बाहर आई और मेरे रूम की ओर जाने लगी । मैं भागता हुआ रूम में पहुंचा। जब आंटी रूम में आई तो मुझे सोया देखकर वो वहाँ से चली गयी. फिर में लॉन के पास जाकर एक कांच कि खिड़की के पास जाकर उनके रूम में देखने लगा तो में हैरान हो गया. अब मम्मी के सीने पर कपड़ा नहीं था और अब आंटी और अंकल उन्हें देखकर हंस रहे थे, अब मम्मी एकदम नशे में थी.

अंकल मम्मी की गाँड़ में लण्ड पेल रहे थे। दोनों का फेस दरवाजे के ऑपोजिट था इसलिये मुझे साफ दिख रहा था। मम्मी डॉगी बनी हुई थी। उनकी गोरी मोटी जांघ और बड़ी सी चूतड़ के बीच में उनकी काली सी मोटी चूत भीगी भीगी लग रही थी। चूत की दरार से एक मोटा लसलसा गोंद जैसा धार लटककर बह रहा था और जाकर जांघ में चिपक गया था।

मम्मी की चूतड़ के बीच अंकल का लण्ड पिस्टन की तरह चल रहा था जैसे खल में लोढे से पीटते हैं न, वैसा। ओह! पीछे से कैसा मस्त लग रहा था अंकल का बदन। कसी हुई पिंडली, जांघ से लेकर एड़ी तक घने बाल और पत्थर की जैसी सख्त चूतड़। पीठ के एक एक मसल्स ऐसे जैसे छेनी हथौड़ी से तराशा गया हो और पसीने बूंदों से चमकता हुआ।

अंकल मम्मी की गाँड़ पर चढ़ कर चोद रहे थे। मम्मी सिसकारी ले रही थी। उन्होंने अपनी गाँड़ उचका रखी थी और अंकल का खीरे जैसा तगड़ा लण्ड धप धप उनकी गाँड़ में दौड़ रहा था। मेरी धड़कन इतनी तेज थी कि मैं अपने साँस पर काबू नहीं कर पा रहा थी। देह में झुनझुनी भर गई थी और सर भन्ना रहा था।

सिसकी लेकर गाँड़ मरवाने का मजा तो मम्मी ही ले रही थी। मम्मी की गांड़ से टपकता अंकल का वीर्य यह गवाही दे रहा था कि मम्मी अपनी गांड़ बहुत मस्त से चुदवा चुकी थी और अब वह चूत मरवा रही थी। लगभग पांच मिनट तक मम्मी की चुत मारते रहने के बाद अंकल ने एक जोर का धक्का मम्मी की चुत में दिया पूरा लौड़ा मम्मी की चूत में उतार दिया सिर्फ उनका आँड़ बाहर रह गया।

उसी हालत में वह मम्मी की चुत में लण्ड हुचकाने लगे और मादरचोद , साली रांड जैसी गाली देते हुए चीखने लगे और फिर लंड खींचकर जोर जोर से मसलते हुए मम्मी की चुत में वीर्य गिराने लगे। वह जोर जोर से आह आह कर रहा था और लण्ड मसल रहा था। ऐसी आवाज और चीख जैसे किसी सांढ को भाला मार दिया गया हो।

पहले तो गाढ़े वीर्य की तीन पिचकारी मम्मा की चुत के अंदर मारी फिर लण्ड को निचोड़ निचोड़ कर पानी गिराने लगे। अंकल का वीर्य मम्मा की चुत से ढलककर टप टप बिछावन पर गिरने लगा। तभी मम्मी बोली " थैंक्स फॉर ऑल दिस" . तो आंटी बोली कि पंखुरी बेबी तुम चिंता मत करो यह तो कुछ भी नहीं है, अब तो यह तुम्हें और खुश करेंगे जान, बस देखो मेरा पति तुम्हें कैसे संतुष्ट करता है? उन्हें सब पता है कि तुम्हारे पति के छोटे लंड से तुम्हारा मन नहीं भरता है." अब मैं समझ गया कि वे लोग अब पोजिशन बदलेंगे। इससे पहले ही में वहाँ से खिसक गया । भाग कर सीधा अपना रूम में पहुंचा कर दरवाजा लगाकर सो गया ।

जब मेरी आंख खुली, तो सुबह करीब साढ़े चार बज चुके थे । मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो मम्मी बेड पर नहीं थी। लेकिन जब काफ़ी टाइम तक वो नहीं आई , तो मैं उठकर बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर कमरे से बाहर निकलकर सीधे आंटी के कमरे के सामने पहुंच गया और उसके दरवाज़े को खटखटाया। थोड़ी देर बाद अंकल ने दरवाजा खोला और मैं अंदर गया। रातभर मम्मी की चुदाई से अंदर का माहौल बिगड़ा हुआ था। कमरे के अंदर मुझे सिगरेट और शराब की बदबू आ रही थी। मम्मी अब भी नींद में सो रही थी मैंने उसे जगाया । वह उठकर बाथरूम चली गई और थोड़ी देर बाद बाहर आई। जब वह बाहर आई तो मैंने मम्मी से गुस्से में कहा- मम्मी आप क्या कर रहे हो?

मम्मी: क्या कर रही हुं ?

मैं: आप शादीशुदा हो, और पापा के होते हुए किसी अंजान आदमी के कमरे में रातभर कैसे रुक सकती हो ।

मम्मी भी तैश में आकर बोली: तेरे पापा हैं यहां? दिख रहे हैं तुझे? मैं यहां यात्रा का आनंद लेना चाहती थी उनके साथ। लेकिन उनको इस चीज़ की कोई परवाह नहीं है। उनको मेरी परवा नहीं है. तो मैं उनका परवाह क्यों करूं? मैं तो वैसे ही एन्जॉय करूंगी जैसे मैंने प्लान किया था। अब तेरे पापा तो हैं नहीं, तो कोई और आदमी के साथ सही।

मैं: मम्मी आप किसी बाहर वाले आदमी के साथ ऐसा कैसे कर सकती हैं?

मम्मी: अब अंदर वाला आदमी कहां से लाऊं? तेरे पापा के बाद घर में तू ही है, तो तू मजे देगा मुझे (मम्मी ने मेरे करीब आते हुए कहा)? फ़िर वो हसने लगी, और मुझे कोई जवाब नहीं आया।

मैं कमरे से निकलकर बाहर आया और सीधे अपने कमरे में पहुंच गया और अंदर से दरवाजा बंद कर दिया। थोड़ी देर बाद दरवाजा पर किसी ने खटखटाया, मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने मम्मी थी।वह अंदर आई और मुझे गले लगाकर " सोरी ' सोरी " बोली और कहा मुझे तुमसे उस तरह बात नहीं करना चाहिए था। मुझे माफ़ कर दो।

मैंने मम्मी को गले लगाया और कहा " इट्स ओके " । फिर मम्मी बोली मुझे ज़ोर का नींद आ रही है मैं सोने जा रही हुं और वह बेंड से सोने चली गई ।

मैंने सोचा मम्मी तो सो रही है क्यों ना आज टेरिस ( छत ) पर घूमने चलना चाहिए। तो मैं तैयार होकर कमरे से बाहर निकलकर दरवाजा बंद कर सीधे टेरिस ( छत ) पहुंच गया।

थोड़ी देर टेरिस ( छत ) पर घूमने के बाद में नीचे कमरे में पहुंचा।
मम्मी कमरे में नहीं थी. मैं कमरे के बाहर गया और लिफ्ट से नीचे गया। नीचे पहुंचकर देखा मम्मी स्विमिंग पूल के पास कुर्सी पर बैठी थी, और अंकल से बात कर रही थी। मम्मी ने आज येलो कलर की शॉर्ट्स पहनी थी, और साथ में ब्लू कलर का स्लीवलेस टॉप पहना था। उनका टॉप शॉर्ट था, तो जब वो बैठी थी, तो टॉप उठने की वजह से उनकी नंगी पीठ दिख रही थी। उनको ऐसे देख कर कोई भी मर्द का लंड पिघल जायेगा। मैं वहीं खड़े रहकर उनकी बातें सुनने लगा। मम्मी वैसे ही टाइम पास वाली बातें कर रही थी अंकल से । अंकल बातें करते हुए मम्मी की गोरी कमर पर अपना हाथ रख लिया। लेकिन मम्मी ने उसको कुछ नहीं कहा।

मुझे यह देखकर बहुत गुस्सा आया। मैंने सोचा कि मम्मी ने क्या तमाशा लगाया था। वो हमारी इज्जत को सारे आम नीलाम कर रही थी। मुझसे रुका नहीं गया, और मैं मम्मी के पास चला गया। वहां जाकर मैंने मम्मी को बोला- मम्मी, मुझे आप से कुछ बात करनी है। आप चलिए मेरे साथ.

मम्मी: बेटा , पहले अंकल को हैलो बोलो। और मैं रुककर आती हूं थोडा।

मुझे और गुस्सा आया, और मैंने मम्मी का हाथ पकड़ लिया। फ़िर मैं बोला- मुझे आपसे अभी बात करनी है। ये बोल कर मैंने मम्मी को खींचा, और अपने साथ लेके जाने लगा।

मम्मी मुझसे अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मैं उनको खींचते हुए अपने साथ होटल के अंदर ले आया। फिर हम लिफ्ट में चले गए. लिफ्ट में जाते ही मैंने मम्मी का हाथ छोड़ दिया। मम्मी बहुत गुस्से में थी. वो बोली- तेरी हिम्मत कैसे हुई मुझे वहां से खींच कर लाने की!?

मैं: मम्मी मैं आपको ऐसा नहीं देख सकता किसी और आदमी के साथ।

मम्मी: जब तू खुद कुछ नहीं कर पाएगा, तो मुझे करने दे। तू भी साले अपने बाप की तरह है।


ये सुन कर मुझे गुस्सा आ गया. मैंने उसका वक्त मम्मी की कमर में हाथ डाला, और उनको अपने पास खींच लिया। फिर मैंने अपने होठों से चिपका दिया, और उनके होठों को चुनने लगा। मम्मी भी मेरा साथ देने लगी. अब मैं अपनी मम्मी की चुदाई का मन बना चुका था। मैं और मम्मी पागलों की तरह किस कर रहे थे, जैसे बरसों की भड़ास निकल रहे हो। मैं किस करते हुए अपने हाथ उनकी मोटी गांड पर ले गया, और शॉर्ट्स के ऊपर से उनको मुलायम चूतड़ दबाने लगा। आज तक मैंने सिर्फ गांड को आंखों से निहारा था, लेकिन आज उनको हाथों से छूने और दबाने का मौका मिल रहा था। गांड दबते मम्मी और उत्तेजित होने लगी। तभी हमारी लिफ्ट हमारे फ्लोर पर पहुंच गई, और हमें अलग होना पड़ा। जब हम लॉबी में से होते हुए अपने कमरे तक जा रहे थे, तो मम्मी मेरे आगे चल रही थी। मेरी नज़र उनकी मटकते हुए गांड़ पर थी।

फ़िर मम्मी ने दरवाज़ा खोला, और अंदर घुसे। अंदर जाते ही मैंने दरवाजा बंद किया, और फिर से मम्मी को पकड़ लिया। हम फिर से किस करने लगे, और किस करते हुए बिस्तार तक पहुंच गए। मैंने मम्मी को बिस्तर पर ले लिया, और उनके ऊपर आ के किस करने लगा। तकरीबन 10 मिनट तो हम एक-दूसरे के होठों को चुनेंगे। फिर हम अलग हुए, और एक दूसरे की आँखों में देखने लगे। मम्मी की आंखों में चुदाई की चाहत साफ दिख रही थी। फिर मैंने मम्मी के टॉप को उनके कंधों से खींचा, और उनकी गर्दन, कंधे, और क्लीवेज को छूने लगा। मम्मी मदहोश हो कर आहें भरने लगी. उनकी सांसे तेज़ हो गई, और वो हल्की आवाज़ में आह्ह आह्ह करने लगी। मम्मी के बदन की खुशबू कमाल की थी, मुझे और उत्साहित कर रही थी। किस करते हुए मैंने उनका टॉप नीचे से पकड़कर उठाया, और उसको निकाल दिया। फिर मैं पीछे चला गया, और मम्मी की ब्रा का हुक खोलने लगा।


हुक खोलते ही मैं मम्मी की नंगी पीठ छूने लगा, और उस पर जीभ फिराने लगा। मेरा दिल तो कर रहा था कि उनको खा ही जाऊं। फिर मैंने मम्मी को घुमाया, और उनके स्तनों को एक-एक करके चुनने लगा। मम्मी आहें भरते हुए बोली- आह्ह नयन , आज इतने सालों बाद इनको चूस कैसे लग रहा है? इन्हीं का दूध पी कर तू बड़ा हुआ है।

मैं: आज मैं तेरे दूध का कर्ज चुकाऊंगा मम्मी । फिर मैंने स्तन छोड़ कर नीचे गया, और शॉर्ट्स और पैंटी एक झटके में निकाल कर फेंक दी। मम्मी अब नंगी मेरे सामने थी, और उनकी चिकनी चूत जिसमें मैं बाहर आया था, भीगी हुई थी। मैंने जैसी ही मम्मी की गीली चूत पर हाथ रखा, मम्मी सकपका गई। फिर मैंने चूत की फाँको को खोला, और उसमें अपनी जीभ फिराने लगा। मम्मी अह्ह्ह अह्ह्ह करके मदहोश होने लगी. अब मैं जीब को अन्दर-बाहर करने लगा, और चूत के माँस को अपने मुँह में खींच-खींच कर चुनने लगा। मम्मी लगतार आहें भर रही थी। उनकी चूत का रस मेरे मुँह में जा रहा था, जो बहुत स्वादिष्ट था।

कुछ देर ऐसे ही चूत चाटने के बाद मैं खड़ा हुआ, और अपने कपड़े उतारने लगा। मम्मी मेरा मोटा और बड़ा लंड देख कर शॉक हो गई। वो जल्दी से मेरे सामने अपने घुटनों पर आ गई, और मेरे लंड को हाथ में लेके लंड चूसना शुरू कर दिया। यह एक सपना की तरह था, जब मेरी मम्मी मेरा लंड चूस रही थी। कुछ देर लंड चुनने के बाद मम्मी टांगें खोल कर लेतीं, और बोली- आ जा नयन और मैं मम्मी पर चढ़ गया, और लंड चूत पर सेट करके अंदर डालने ही वाला था कि तभी किसी ने दरवाजे को खटखटाया , मैं और मम्मी कुछ देर के लिए विराम अवश्य में पहुंच गए।

तभी मम्मी ने कहा - कौन है ? ( उधर से आंटी की आवाज आई )

आंटी - में हुं।

मम्मी ने कहा - थोड़ा वेट करो आती हुं । ( मम्मी ने मुझे बाथरूम में जाने को इशारा किया ) मैं बाथरूम में जाकर अपने खड़े लंड को शांत किया और अंदर से ही उनलोगों कि बातचीत सुनने लगा।

आंटी कमरे के अंदर आते ही मम्मी से कहा कि " मैं तुम्हें एक बात बताना चाहती थी आज रात इस होटल में एक बडे़ नेता जी आ रहें हैं उनके स्वागत में एक पार्टी रखी गई है। उस पार्टी में तुम्हें और तुम्हारे बेटे को आने का निमंत्रण दे रही हुं। हां एक बात और बतानी थी किया तुम मेरे साथ मार्केट चल सकती हो आज रात के पार्टी के लिए कुछ कपड़े खरीदना था

मम्मी:- अच्छा ठीक है , मार्केट कब चलना है।
आंटी:- दोपहर के समय। ( फिर आंटी चली गई तब मम्मी ने मुझे बाथरूम से बाहर निकल जाने को कहा ),

दोपहर को मम्मी और आंटी दोनों तैयार होकर मार्केट के लिए निकल गई और शाम तक मार्केट कर के वापस आईं। वापस आने के बाद मम्मी ने थोड़ी देर आराम किया और फिर नहाकर तैयार हो गई पार्टी में शामिल होने के लिए और मुझे भी जल्दी से तैयार होने को बोली , में फटाफट जाकर तैयार हो गया, थोड़ी देर बाद हमलोग पार्टी में शामिल होने के लिए पार्टी हॉल में पहुंच गए।

पार्टी हॉल में जब हमलोग पहुंचे तो पार्टी चालू हो चुकी थी और वहां बहुत बड़े-बड़े लोग आए हुए थे सभी लोग नेताजी का आने का इंतजार कर रहे थे तभी होटल के मैनेजर के द्वारा यह सूचना दी कि नेताजी अपने ऑफिस से निकल चुके हैं थोड़ी देर में पार्टी में पहुंचने वाले हैं

तकरीबन 30 मिनट के बाद नेताजी का काफिला पार्टी में पहुंच गया होटल के मैनेजर ने नेताजी का स्वागत किया । उसे पार्टी में आए हुए सभी बड़े लोगों ने नेताजी से मिलकर उनके साथ फोटो खिंचवाया । तभी आंटी मम्मी के पास आई और मम्मी से कहा :- चलो में तुम्हारी परिचय नेताजी से करवाती हूं और मम्मी को साथ ले गई और नेताजी से परिचय करवाया ।

मैंने एक बात पर विशेष को ध्यान दिया कि जब से मम्मी नेताजी से मिले हैं तब से वह मम्मी को धुर - धुर के देखे जा रहे थे , और बीच-बीच मम्मी को अपने पास बुलाकर बातचीत कर रहे थे नेता जी कि विषेश ध्यान मम्मी पर ही टिकी हुआ था ।

पार्टी 2 घंटे तक ही चली उसके बाद पार्टी खत्म हो गया जब नेताजी अपने कमरे में जा रहे थे तब उन्होंने आंटी को अपने पास बुलाया और वह मम्मी की ओर इशारा करके कुछ बातें किया और फिर अपने मेहमान कमरे में चले गए । आंटी मम्मी के पास आई और मम्मी से बोली की नेता जी तुम्हारे बारे में ही बात कर रहे थे वह तुमसे मिलकर बहुत खुशी हुए वह तुमसे कुछ और बात करना चाहते हैं इसलिए तुम्हें अपने कमरे में बुलाया है ।

मम्मी ने कहा : ठीक है चलो नेताजी से मिल लेते हैं मम्मी और आंटी नेता जी के कमरे में जाने लगी , तो मैं भी उन दोनों के साथ जाने लगा तो आंटी ने मुझे बाहरी रोकने को कहा ", तुम यहीं हॉल में इंतजार करो हमलोग बहुत जल्दी नेता जी से मिलकर बाहर आ जाएंगे अगर हम दोनों को आने मैं देरी हो तो तुम अपने कमरे में जाकर सो जाना " तो मैंने हां में सिर हिलाया और वहीं बैठके मम्मी और आंटी के बाहर आने का इंतजार कर रहा था जब मम्मी को बहार आने में समय लगा तो मुझे कुछ संदेह हुआ तो मैं होटल के पीछे बने गलियारे में सभी की नजर से बचकर घुसकर के सीधा में नेताजी के कमरे की खिड़की के पास जा पहुंचा , वहां पहुंचकर मैंने जो देखा उससे मुझे रूम के अंदर की हालत का पता चला और देखकर मैं दंग रह गया । आगे में आपको बताता हूं किया देखा।

आंटी बोली :- नेता जी आप के लिया बिस्तार और माल तैयार है अब बिना देर किए बिस्तर पर जाओ और रातभर इस माल के जिस्म का आनंद लो। आंटी कमरे के बाहर चली गई और दरवाजा बंद कर दिया । मम्मी पलंग पर बसुध पड़ी हुई थी उनकी हर सांस के साथ उनकी बड़ी बड़ी चूची ऊपर नीचे हो रही थी। नेता जी ने बिना देर किए अपना कपड़ा और मम्मी की साड़ी उतार दिया और केवल अंडरवियर और मम्मी ब्लाउज और पेटीकोट में पलंग पर लेट गये और मम्मी को बहो में भर लिया और उनको किस करते हुआ बोला।


नेता जी - हाय स्वीटी होश में आओ, जानेमन तूम बहुत खूबसूरत हो अपना नाम तो बताओ ।

मम्मी- धीरे बोलो ' पंखुड़ी ' ।

नेता जी - ओह, बहुत सुंदर नाम है डार्लिंग. और मम्मी की गार्डन को चूम कर बोला डार्लिंग सब कुछ भूल जाओ और आज रात इस जवानी का मजा लो। जिंदगी में इतनी औरत को चोदा हुं कि याद नहीं लेकिन आज पहली बार इतनी खूबसूरत हुस्न की मल्लिका को चोदने का मौका मिला है। अब नेता जी मम्मी के स्तनों को ब्लाउस के ऊपर से ही मसल रहे थे और मम्मी को किस भी कर रहे थे। अब नेता जी ने मम्मी के ब्लाउज का बटन खोल दिया और बिना देर किए मम्मी के बदन से ब्लाउज अलग कर दिया। ब्लाउज उतारते ही मम्मी की ब्रा में कसाई हुई चूची देखकर नेता जी की मुंह से ' आह ' निकल गया । रेड कलर की ब्रा में मम्मी का गोरा चूची देखकर नेता जी मदहोश हो गया और ब्रा के ऊपर से ही चूची को चूमने लगा। अब नेता जी ने मम्मी की टांगों पर हाथ फेरता हुआ उनकी पेटीकोट का नारा खोल दिया और उतार कर बिस्तर के नीचे गिर दिया , अब मम्मी ब्रा और पेंटी में उसके सामने थी । नेता जी मम्मी की तरफ देखकर बोले ' सच में पंखुड़ी तुम बहुत ही सुंदर हो तुम्हें देखकर तो कोई भी तुम्हें अपनी बीवी बनाना चाहेगा '

मम्मी- सर प्लीज मत करो ना. मैं एक पतिव्रता नारी हुं . ( उससे बिनती कर रही थी। )

मम्मी के मुंह से यह सुनकर नेता जी और जोश में आ गया और बोला "जानू किसी पतिव्रता औरत को चोदना में बहुत आनंद है " चिंता मत करो आज रात तुम्हें इतना मजा दुंगा कि आज के बाद सिर्फ चुदवाने का ही ख्वाब देखोगी । नेता जी की गन्दी बातों से मम्मी धीरे धीरे उत्तेजित होते जा रही थी अब मम्मी ने भी नेता जी का साथ देना शुरू कर दिया था। नेता जी ने बिना देर किए मम्मी की ब्रा और पैंटी खोल दी। मम्मी सर से पांव तक बिल्कुल नंगी पलंग पर पड़ी थी। नेता जी ने भी बिना देर किए अपना अंडरवेयर खोल दिया और मम्मी से बोला “, पंखुड़ी डार्लिंग तुम्हारा नंगा जिस्म बहुत खूबसूरत है तुम्हारे चूची और कूल्हे लाजवाब है तुम्हारे चूची एकदम बडे़ और तने हुए हैं "

मैंने कई औरतों की चूची को नंगे देखा है लेकिन ब्रा उतारने के बाद चूची ढिला हो जाता है लेकिन किसी औरत का इतना तना हुआ चूची पहली बार देख रहा हुं , जो किसी भी जवान आदमी को मदहोश करने के लिए काफी है। मम्मी नेता जी की बात सुनकर शर्म गई और नेता जी को बाहों में भर लिया , तभी नेता जी ने कहा "ओह पंखुड़ी तुम्हारा बदन एकदम नाज़ुक, मुलायम और रेशमी है" और उसके बाद मम्मी के होठों को चूसने लगा। नेता जी कुछ समय तक मम्मी का होंठ चूसता रहा और साथ ही अपना एक हाथ से मम्मी के चूची को दबाता और कभी निप्पल को मसलता और कभी अपने मुंह में लेकर निप्पल को दांतों से दबवाने लगता और दूसरे हाथ से मम्मी की कमर, जांघ और कूल्हों पर हाथ फेरता ।इससे मम्मी के मुंह से धीमी आवाज में कराह उठती । जैसे “….हहुउहह…..….उउउउफफफ्फ़….ऊऊहहहहह…. .आआह्ह्ह्ह….. मम्मु , मम्मी की कराहने की आवाज सुनकर नेता जी उत्तजित हो जा रहे थे । मम्मी बीच-बीच में बोलती “प्लीज और जोर से मसलिये….ऊऊहहहह… …और जोर से… ..हां और जोर से दबाओ मेरी चूचियों को…..बड़ा मजा आ रहा है मुझे…आपका हाथ बहुत अनुभव लगता है । शायद आपको मालूम है कि चूची के साथ कैसे खेला जाता है”और फिर करहाने लगती …आआहहहह…

यौउउउउउउउ …उउउउउह्ह्ह्ह…ऊउउउफफफ..” .आआआअह्हह्हह….ऊउउउफफफफफ्फ़… …उउउइइइम्म्म्माआआ… …ऊऊओह्ह्ह्ह… उउउउउउह्ह्ह्हह्ह….. सस्शह्ह्ह्ह…… उउउउम्म्म्म्म्म्म्म्आआआह्ह्ह्ह……..”

नेता जी मम्मी का चूची दबाते हुए बोले …तुम्हें कैसा लग रहा है पंखुड़ी डार्लिंग…।”

मम्मी बोली “….ऊओह्ह्ह मत पूछो.. ..मुझे बहुत ही मजा आ रहा है नेता जी … ….आप तो चूचियाँ निचोड़ने में एक्सपर्ट हो… ….बस यूं ही मेरी चूचियाँ दबाओ नेता जी… “…प्रिय तुम्हें मेरी चूचियाँ कैसी लग रही हैं…. …मेरी चूचियों को दबाने में कैसा लगा तुम्हें…।”

तभी नेता जी बोले " तुम्हारी चूचियां बहुत ही भरे-भरे हैं... डार्लिंग पंखुड़ी तुम्हारी गोल-गोल चूचियां काफी उठी हुई और बिल्कुल शेप में हैं... पंखुड़ी तुम्हारी फुल साइज चूचियों को दबाने में बड़ा मजा आ रहा है...''

अब नेता जी ने मम्मी की जांघ और उनकी चूत को चुमना शूरू किया. जैसे ही नेता जी ने अपना जिभ उसकी चुत पूर रखी । मम्मी के मुंह से आवाज निकल गई “….आआआअह्हह्हह ……उउउउउह्हह्ह….……..उउउउउउउउउउउफफफ्फ़……”….आआआह्ह्ह …..उउउउउउह्ह्ह्ह….. ऊऊओह्ह्ह्ह…..। तब मम्मी ने खुद को संभालते हुए बोली “…….ऊऊऊहह नेता जी बहुत हो गया…. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है... आओ ना… ऊऊऊहह प्लीज़ नेता जी , चोदो मुझे…। अब देर मत करो... अब मुझे चोदो ना.... अब और कितनी देर करोगे , नेता जी ...अब ज्यादा बर्दाश नहीं होता है और मम्मी ने अपने दोनों टांगों को फैला दिया । नेता जी ने बिना देर किए अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखकर एक जोरदार शॉट मारा तो उसका मोटा लंड मम्मी की टाइट चूत को चीरता हुआ पूरा अन्दर चला गया।

"... आआआआआहहह ऊऊओह मर गई। मम्मी चीख पड़ी। ..."

अब नेता जी ने अपना लंड धीरे धीरे मम्मी की चूत में आगे पीछे करने लगे। वह धीरे धीरे मम्मी को चोद रहे थे और मम्मी कराह रही थी ……आआआह्ह्ह्ह…. ….ओहहहहह…।” इधर मम्मी धीरे-धीरे अपना हिप्स भी हिला रही थी। मम्मी की चूत गर्म थी और नेता जी का लंड और टाइट और बड़ा होता जा रहा था, उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी, जिससे मम्मी की मुंह से बहुत तेज आवाज निकलने लगा । उउउफफफ्फ़...…. इइइइइइइइइ....ओओओएचएच ....और ज़ोर से चोदो मुझे... आआआहहहह… और जोर से चोदो मुझे..आआआआहहहहहह…। मम्मी पूरी मस्ती कर रही थी “…ऊऊऊहहह…ददीईआररर.…..ऊऊऊहहहहह…उउम्म्म्माआआअह्हह ऊऊऊओह्हह्ह…”

नेता जी कहा " बड़ा मजा आ रहा है मुझे तुम्हें चोदने में पंखुड़ी " ।

मम्मी " … ….ओओह्ह्ह्ह नेता जी तुम बहुत अच्छा चोदते हो…..आआआह्हह्हह….. उउउउहहहह....उउउउउ...अुअुअुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुउहह तुम चुदाई में एक्सपर्ट हो. तुम्हें मालूम है कि औरत को कैसा चोदा जाता है .. ऐसे ही... हां ददीअरर यूं ही चोदो मुझे...बस चोदते जाओ मुझे...अब कुछ नहीं पूछो...आज जी भर के चोदो मुझे... नेता जी ...हां जमकर चोदो , तुम बहुत अच्छे हो...बस यूँ ही चोदाई करो मेरी...ऊओहहहहह... खूब चोदो मुझे..."

अब नेता जी मम्मी को फुल स्पीड से चोदे जा रहा था। उसने मम्मी के दोनों चूचियों को दबोच रखा था। धक.. धक.. फच... फच... पुक.. पुक.. की आवाज पूरे कमरे में गूँज रहा था। नेता जी लागातर एक घंटे तक मम्मी को चोदता रहा। इस दौरान मम्मी 3 बार झाड़ चुकाई थी लेकिन नेता जी के लंड ने भी तक अपना माल नहीं छोड़ा था । नेता जी मम्मी को ऐसे चोद रहा था जैसा हाथी खारगोश पर चढ़ा हुआ हो।

( लागातर एक घंटे तक चुदवाने के बाद ) मम्मी बोली - थोड़ा धीरे-धीरे कीजिये बहुत दुख रहा है नेता जी .

नेता जी अब और जोर जोर से धक्के मारने लगे. काम से काम और आधे घंटे तक चोदते रहे फिर अचानक बोले ' आआह्ह्हा... अब मेरा माल निकल ने वाला है। "

मम्मी- प्लीज़ बाहर निकालिये नहीं तो मैं प्रेग्नेंट हो जाऊँगी।

नेता जी -ये तो बहुत ही अच्छी बात है क्योंकि मुझे भी तो बेटा नहीं है। तो फिर तुम ही मुझे बेटा दिला दो। और मम्मी की चूत में ही झड़ गए और झड़ने के बाद मम्मी के बाजू में होकर लेट गये।

थोड़ी देर बाद मम्मी ने उन्हें बोला " अब तो हो गया अब मैं अपने कमरे में जाकर सो सकती हुं। " और मम्मी उठकर जाने लगती है मगर नेता जी ने उन्हें पकड़ लिया और कहा जा रही हो मेरी जान।
इतनी भी जल्दी क्या है और मम्मी को अपनी तरफ खींचकर किस करने लगे अब मम्मी भी उनका साथ देने लगी और मम्मी उन्हें बोली अब मैं आपकी हो गई हूं ना फिर भी। नेता जी- तू है ही इतनी मस्त माल , तुझे छोड़ने का मन ही नहीं होता। अब नेता जी ने लंड मम्मी की चूत में डाल दिया और मम्मी को जोर जोर से चोद रहे थे और मम्मी भी बेशर्मो की तरह उनसे चुदवाती रही और मम्मी उन्हें बोली " अब तो मैं जरूर प्रेग्नेंट हो जाऊंगी " और वह बेडशीट पकड़ कर मचल रही थी। थोड़ी देर बाद नेता जी ने मेरी जवान सेक्सी मम्मी को घोड़ी बना दिया बिस्तर पर, और अपना लम्बा मोटा काला लंड मेरी सेक्सी मम्मी की गदराई हुई गांड के छेद पर रगड़ने लगा तो मम्मी मना करने लगी: प्लीज़ नेता जी , गांड मत मारो। मैंने पहले कभी अपनी गांड में लंड नहीं लिया।
नेता जी बहुत हरामी मर्द था. वो बिना कुछ सुने अपने बड़े लंड को एक झटके में मम्मी की गदराई गांड में घुसा दिया। मम्मी की चीख निकल गयी ' आह्ह्ह्ह उफफ्फ्फ्फ़ ' नेता जी बिना रुके घपा-घप अपने लंड को मेरी मम्मी की गदराई गांड में पेलने लगा।

दोस्तों बहुत खूबसूरत नजारा था। मेरी मम्मी की गांड में नेता जी का बड़ा मोटा लंड घुसा हुआ था और नेता जी किसी रंडी की तरह मेरी मम्मी की गांड को चोद रहा था। फिर नेता जी ने मेरी सेक्सी मम्मी की गदराई गांड 30 मिनट तक चोदी। मेरी मम्मी भी अब मजा लेते हुए अह्ह्ह.. उम्म्म्म.. उफफफफ्फ़.. आआअहह.. उफफफफ्फ़.. चोदो नेता जी बोल रही थी। नेता जी मम्मी की गांड मारने के बाद मम्मी से अपना लंड चुसवाने लगा। मम्मी भी मजे लेते हुए नेता जी का मोटा लंड चुनने लगी। इसबार नेता जी ने अपना माल मेरी मम्मी के मुँह में भर दिया। मम्मी भी अब चुप-चाप नेता जी के सामने बिस्तर पर लेटी रही। थोड़ी देर बाद नेता जी अब सिगरेट पीने लगा, और मम्मी की चुचियों से खेलने लगा।

अब मुझे भी नींद आ रही थी इस अपने कमरे में चला गया वह पहुंचकर सीधे बिस्तर पर लेट गया, मुझे कब‌ नींद आ गई पता ही नहीं चला गया ।

जब मेरा नींद टूटा तब दोपहर हो चुका था और कभी तक मम्मी कमरे में नहीं आई थी । मैं बिस्तर से नीचे उतर कर बाथरूम में फ्रेश होकर आया तभी मम्मी के मोबाइल में रिंग बजा , मैंने मोबाइल में देखा तो कोई अननोन नंबर था फिर मैंने कॉल रिसीव किया तो उधर से मम्मी की आवाज आई। वह बहुत घवराई हुई लग रही थी और मुझ से बोल रही थी कि " प्लीज बेटा मुझे यहां से बाहर निकालो " तब मैंने मम्मी से कहा " तुम घबराओ नहीं मैं कोशिश करता हूं तुम्हें वहां से बाहर निकलने का और फिर फोन उधर से ही फोन डिस्कनेक्ट हो गया । मैं तुरंत पापा को फोन लगाया कहा " आज रात का ही ट्रैन का दो टिकट कटवाने को कहा " पापा ने इतना जल्दी आने का कारण पूछा तो मैंने बताया कि मम्मी को आपकी बहुत याद आ रही है इसलिए वह वापस घर आना चाहती है । फिर पापा ने कहा मम्मी से जरा बात करवाओ तो मैंने पापा से झूठ कहा कि मम्मी बाथरूम गई है वह बाथरुम से आएगी तो आपसे जरूर बात करेगी और थोड़ी देर बाद पापा ने दो टिकट कटवा के मम्मी के व्हाट्सएप पर भेज दिया ।

फिर मैं अपने कमरे से बाहर निकाल के नीचे गया नीचे जाकर मैंने एक होटल के कर्मचारी से पूछा कि मुझे नेताजी से मिलना है तो उसने होटल कर्मचारियों ने बताया कि नेताजी अभी कहीं बाहर गए हैं वह शाम को वापस आएंगे तो आप मिल सकते हैं तो मैं बिना समय गंवाए नेताजी के कमरे के पास गया चारों तरफ देखा उसके बाद दरवाजे को खोला का कोशिश किया तो दरवाजा बाहर से ही किसी ने चाभी से लॉक कर रखा था मैंने फिर उसी होटल कर्मचारियों को बुलाया और उस रिक्वेस्ट की कृपया मेरी मम्मी अंदर में फांसी उसे बाहर निकाल दे तो उसने मेरी मम्मी को बाहर निकलने से मना किया , मैंने उसे तुरंत 500 की दो नोट दिया तो वह मान गया और फिर वह चोरी से उसे कमरे का चाभी लेकर आया और मेरी मम्मी को बाहर निकाला । मम्मी के बाहर आने के बाद सीधा हम दोनों अपने कमरे में गए । कमरे में पहुंच कर मम्मी को मैंने पापा और मेरे बीच में सारी बात बताई । मम्मी ने भी कहा हां आज शाम को ही हमदोनों इस होटल को छोड़कर घर वापस लौट जाएंगे । शाम मैंने एक टैक्सी बुकिंग और वहां से स्टेशन के रवाना हो गए । स्टेशन पहुंच कर ट्रैन में बैठकर धनबाद वापस आ गये । इस तरह मैंने मम्मी की जान बचाई ।
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RE: ......काला जामुन..... A meanie mommy 2 - by Dhamakaindia108 - 15-05-2026, 12:01 PM



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