14-05-2026, 11:39 PM
मैंने नेहा की तरफ देखा।
बारिश की बूँदें कार की विंडशील्ड पर तेज़ी से गिर रही थीं।
वाइपर चल रहे थे।
सड़क पर पानी बह रहा था।
नेहा कुछ पल सोचती रही।
फिर धीरे से बोली,
“हाँ... छोड़ देते हैं।
बारिश में खड़ा है बेचारा।”
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस गाड़ी घुमाई और बस स्टॉप की तरफ ले गया।
वो आदमी अभी भी वहीं खड़ा था।
भीग रहा था।
पुरानी शर्ट और पैंट पानी से चिपक गई थी।
उसका पतला शरीर और भी छोटा लग रहा था।
मैंने कार उसके पास रोकी।
नेहा ने विंडो नीचे की और धीरे से बोला,
“आ जाओ... हम तुम्हें घर छोड़ देते हैं।”
बेकार आदमी एक पल के लिए हैरान रह गया।
फिर जल्दी से कार के पिछले दरवाज़े की तरफ भागा और अंदर बैठ गया।
कार में अब हम तीन थे।
बारिश की आवाज़, एसी की हल्की गुनगुनाहट और उस आदमी की तेज़ साँसें।
मैं और नेहा आगे वाली सीट पर थे।
वो पीछे वाली सीट पर बैठा था।
बारिश में भीगकर उसकी पुरानी शर्ट और पैंट शरीर से चिपक गई थी।
नशा उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था।
डैशबोर्ड पर सिगरेट का पैकेट देखकर उसने हिचकिचाते हुए कहा,
“भाई... एक सिगरेट मिलेगी?”
मैंने पैकेट पीछे की तरफ बढ़ा दिया।
उसने एक सिगरेट निकाली, जलाई और पहला कश लेकर बोला
वो हल्के-हल्के कश मार रहा था।
सिगरेट की लाल चिंगारी बारिश की बूँदों में चमक रही थी।
नेहा पीछे मुड़कर उसे देख रही थी।
मैं ड्राइव कर रहा था।
उसकी नज़रें नेहा से ज़्यादा कार को देख रही थीं।
जब मेरे पास कोई बड़ी गाड़ी भी नहीं थी।
भीगने की वजह से उसकी पैंट अब लंड से चिपक गई थी।
टाइट तो वो अभी भी था... लेकिन जाँघ से लटक जा रहा था।
मुझे लग रहा था कि उसके बदन की कमजोरी उसके भारी लंड का वजन नहीं उठा पा रही थी।
इसलिए तनने की बजाय वो लटक जा रहा था।
नेहा ने पीछे मुड़कर पूछा,
“तुम्हारा घर कहाँ है?”
बेकार आदमी सिगरेट पीते हुए, खुद को आराम से सेट करते हुए बोला,
“यहीं पास ही मेरा घर है।”
वो धीरे-धीरे सिगरेट का कश ले रहा था।
कार में धुआँ फैल रहा था।
मुझे लगा था कि जैसे ही वो कार में बैठेगा, मेरी बीवी पर टूट पड़ेगा।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
शायद उसके दिमाग में अभी भी हिचक लग रही थी।
जैसे वो सोच रहा हो — रेस्टोरेंट में जो गेम खेलकर आया था, वो वही से शुरू कर सकता है या नहीं।
जैसे वीडियो गेम में पॉज करके आए हो और अब रिज्यूम करना हो।
हम दोनों आगे वाली सीट पर थे।
नेहा उसकी हर बात पर खिलखिला रही थी।
मैं नेहा के चेहरे को देखकर बता सकता था — वो तैयार थी।
क्यों नेहा इतनी जल्दी तैयार हो गई?
वो कभी किसी को इतनी आसानी से भाव नहीं देती थी।
फिर भी आज उसने गाड़ी घुमाने को कहा।
अभी भी उसके चेहरे पर वो चमक थी — जैसे वो पूरी तरह तैयार है।
उसकी लिमिट मुझे नहीं पता, लेकिन एक बात साफ़ थी —
जहाँ तक बेकार आदमी ने गेम पॉज किया था, वहाँ तक वो बिना किसी आपत्ति के खेलने देगी।
कुछ लोग सोच सकते हैं कि नेहा अजीब है।
मगर मुझे पता है — उसे अजीब सिचुएशन में मजा आने लगा है।
उसके अनयूजुअल किंक्स ज्यादातर उन पोर्न से आए हैं जो हम साथ देखते हैं।
एक्सपोज़र , हुमिलिएशन, रिस्की सीटुएशन्स ...
अब वो खुद को ऐसे ही सिचुएशन में देखकर एक्साइट होती है।
रोलप्ले में वो अक्सर खुद को नहीं, मुझे ऐसे पोजीशन में डालती है।
जैसे मेरे मम्मी-पापा अगले कमरे में हों और वो मेरे पापा के बारे में रोलप्ले करे।
जब वो अगले कमरे में होते हैं, तब भी वो मुझे ऐसी स्थिति में डाल देती है।
मुझे लगता है कि वो खुद से ज़्यादा मुझे इन पोजीशन्स में डालने में मजा लेती है।
नेहा अभी भी पीछे मुड़कर बेकार आदमी से बात कर रही थी।
उसकी आवाज़ में हल्की शरारत थी।
5 मिनट हो गए थे।
न कोई डायरेक्शन, बस चल रही थी।
हमें लगा था कि जैसे ही वो गाड़ी में बैठेगा, नेहा पर टूट पड़ेगा।
मगर वो चुपचाप पीछे बैठा, सीट पर पीठ टिकाकर सिगरेट एंजॉय कर रहा था।
शायद उसे अंदाज़ा ही नहीं था कि कार में क्या-क्या हो सकता है।
मैंने नेहा की तरफ देखा।
एक इशारा किया।
नेहा मुस्कुराई और खिलखिलाती हुई आवाज़ में पीछे मुड़कर पूछा,
“तो कितना टाइम लगता है आपके घर जाने में?”
बेकार आदमी ने सिगरेट का कश लेते हुए कहा,
“30 मिनट।”
“अच्छा... और घर पर तो अभी सब लोग होंगे?”
“हाँ।”
नेहा ने फिर हँसते हुए पूछा,
“तो आज तो रेस्टोरेंट में हुआ... उसके बाद भी आप चैट ही करेंगे या... या आज भाभी को तंग करोगे?”
उसने नेहा की बीवी को “भाभी” बोल दिया — जैसे कोई रिश्ता हो।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखा और मायूसी से बोला,
“आप नहीं समझ सकते... वो भी काम करके आती है।
1 कमरे का मकान और छत...
मैं दारू पीता हूँ... आजकल तुमसे बात करता हूँ... छत पर...
खाना खाने के लिए नीचे आता हूँ, तब तक वो सो जाती है।”
उसने थोड़ी मायूसी से कहा,
“हमारे बीच बस एक-दूसरे की केयर है।
बाकी कुछ नहीं।
कई सालों से।”
नेहा ने गंभीरता से पूछा,
“इतने सालों से?”
“याद नहीं... 4-5 शायद।”
हम दोनों ने एक-दूसरे को देखा।
ये बात मैं अक्सर नेहा से कहता था — कि अगर स्पाइस नहीं तो सेक्स लाइफ खत्म हो जाती है।
नेहा उसकी बातों में गौर कर रही थी।
बातें कर रही थी।
एक आदर्श पति को ये सब अच्छा लगना चाहिए था।
मगर मैं चूतिया हूँ।
मैं सोच रहा था कि कब ये नेहा को छूने लगेगा।
नेहा शायद ये सोच रही थी कि क्या इशारा दे उसे।
उसकी पीठ कुर्सी से टिकी हुई थी।
जानबूझकर boobs आगे।
स्कर्ट जाँघें दिखाती हुई।
बस बोलने की देर थी — “आ जाओ... थोड़ा और एंजॉय करो मेरी बॉडी को।”
मगर डायरेक्ट कहने में वो हिचकिचा रही थी।
पीछे के दरवाज़े पर खटखट हुई।
मेरा ध्यान ड्राइव पर था।
उसकी आवाज़ आई,
“ये कहाँ फेंकू?”
सिगरेट खत्म हो गई थी।
उसे विंडो नीचे करना नहीं आया।
मैंने नीचे की।
थोड़ी बूँदें अंदर आईं।
उसने सिगरेट फेंक दी।
फिर पीठ उठाकर वो अब आगे की तरफ झुक गया।
उसका चेहरा हम दोनों के बीच में आ गया।
उसका एक हाथ सीधे नेहा के नंगे कंधों पर गया।
धीरे से सहलाते हुए।
“तो क्या बोल रही थी रंडी... कि मैं अपनी बीवी को चुदवाऊँगा घर जाकर?”
उसकी टोन अचानक बदल गई थी।
शायद वो तब तक गाड़ी में सिर्फ सिगरेट एंजॉय कर रहा था।
मेरी गाड़ी में मेरा सिगरेट।
अब शायद उसे अहसास हुआ कि मेरी गाड़ी में मेरी बीवी भी तो है।
नेहा चुप थी।
वो मेरी बीवी के कंधों को अच्छे से सहला रहा था, देल कर रहा था।
मगर जैसे ही कोई गाड़ी पास से गुजरती, वो सहज हो जाता।
हाथ हटा लेता।
उसे लग रहा था कि कहीं कोई देख लेगा।
ये अच्छा था कि उसे इज्जत का तो डर था।
इस बार नेहा ने पहल करके कहा,
“चलती गाड़ी में कुछ नहीं दिखेगा... आप छू सकते हैं।”
थोड़ा शर्म से।
मेरा ध्यान ड्राइव और उसके हाथ पर था।
“आआईईई...”
नेहा की आवाज़ आई।
मैंने देखा — उस आदमी ने नेहा के कंधे पर पिंच कर दिया।
प्लेफुल पिंच।
“बहुत चालू आइटम है तू साली... पति के सामने बोल रही है कि छू सकते हो।”
नेहा ने कुछ नहीं कहा।
उस आदमी ने फिर बोला,
“तेरी जैसी बीवी होती ना मेरी तो साली को रोज़ रात बस छत का पंखा दिखाता...
अब वो बस शरीर है... थका हुआ... काली बॉडी से पता नहीं किस केमिकल की बदबू आती है...
तुम जैसी मेमसाहब थोड़ी है वो।”
उस आदमी ने मेरी तरफ देखा।
फिर बोला,
“तुम जैसी जिंदगी... तुम जैसी कार... तेरी जैसी बीवी...
साला ये जिंदगी है भेनचोद...
मगर मादरचोद तू यहाँ अपनी बीवी चुदवाने के लिए बैठा है...
चलो जी को जिसमे मजा मिले।”
उसके अंदर ज्ञान खत्म ही नहीं हो रहा था।
या तो नेहा, या शायद सिचुएशन, या मेरी चूतिया शक्ल...
उसे बार-बार मजबूर कर रही थी वो बातें बोलने के लिए, जिसमें उसी का नुकसान हो सकता था।
ये वो इतना पागल नहीं था जितना हम सोच रहे थे।
उसे पता था कि हम क्या सुनना चाहते हैं।
मैं क्या सुनना चाहता हूँ।
वो वही बोल रहा था।
फिर उसने नेहा की तरफ देखकर बोला,
“तूने कहा गाड़ी में छू सकते हैं... कोई नहीं देखेगा...
तो बता रांड... कहाँ छू सकते हैं?”
नेहा ने सीट का बटन दबाया।
पीछे वाली सीट थोड़ी नीचे झुक गई।
अब वो थोड़ी लेटी हुई थी।
उसकी स्कर्ट पहले से ही ऊपर चढ़ी हुई थी।
गोरी जाँघें डिम लाइट में चमक रही थीं।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखा।
उसकी आँखों में अब पहले वाली घबराहट नहीं थी।
एक भूख थी।
नेहा ने हल्के से गिगल किया ।
मैं देख रहा था।
उसने मुझे पकड़ लिया और हल्के से डाँटते हुए बोली,
“तुम अपनी नज़रें सड़क पर रखो ।”
डीप नेक टॉप में आधी लेटी हुई मेरी बीवी।
मैं सोच सकता था कि उस आदमी को क्या नज़ारा मिल रहा होगा।
वो आदमी अब नेहा की सीट के बिल्कुल पीछे चला गया था।
उसके दोनों हाथ अब सीट के दोनों तरफ से आ रहे थे।
मैं बीच-बीच में देख रहा था — उसके दोनों हाथ नेहा की जाँघों पर थे।
स्कर्ट ऊपर उठ चुकी थी।
पैंटी दिख रही थी।
मगर उसके हाथ नेहा की बॉडी को फील करते हुए आगे बढ़ रहे थे।
नेहा की साँसें तेज़ हो गई थीं।
उसने अपनी टांगें थोड़ी और फैला दीं।
मैं गाड़ी चला रहा था।
बारिश में।
जब मैंने अगली बार देखा तो उसके दोनों हाथ अब नेहा के बूब्स पर थे।
शायद उसने नेहा की कमर को भी थोड़ा काम किया होगा, मगर उस समय मेरा ध्यान रोड पर था।
वो उसे मसल रहा था।
रेस्तरां में टेबल के ऊपर वाली एक्टिविटी के लिए उसे अच्छे से मौका नहीं मिला था।
इसलिए वो मेरी परफेक्ट साइज़ वाली बीवी के बूब्स को पूरी तरह चेक कर रहा था।
उसके शेप, साइज़... दोनों बूब्स के नीचे हाथ डालकर... दोनों का वजन कर रहा था।
नेहा बस खिलखिला रही थी।
उसके मुँह से एक “आह्ह...” भी निकली थी, मगर वो उस आदमी की वजह से नहीं।
मैंने देखा — नेहा का एक हाथ अपनी चूत पर था।
वो खुद उसे पैंटी के ऊपर से रगड़ रही थी।
इससे पता चलता है कि वो कितनी एक्साइटेड थी अभी।
ट्रैफिक वाली जगह पर मेरा पूरा ध्यान रोड पर था।
हालाँकि स्पीड स्लो थी।
ऑटोमैटिक गाड़ी को एक ही स्पीड में चलाना थोड़ा आसान होता है।
मेरा ध्यान वापस उस पर गया जब मैंने आवाज़ सुनी,
“क्या इसे थोड़ा नीचे कर सकते हैं?”
मैंने नेहा को देखा।
उसकी ड्रेस की जिन पतली डोरियों की वजह से कंधों पर टिकी हुई थी, वो अब नीचे हो चुके थे।
उस आदमी के हाथ ऊपर बूब्स पर थे।
और वो मेरी बीवी से पूछ रहा था कि क्या थोड़ा नीचे कर सकते हैं।
नेहा ने शरारती हँसी के साथ कहा,
“तुम बहुत बुरे हो। तो क्या तुम चाहते हो कि मैं पूरी नंगी सड़क पर चलूँ?”
नेहा के दोनों हाथ उस आदमी के हाथ के करीब नहीं थे।
कोई विरोध नहीं।
यहाँ तक कि नेहा का जो हाथ फ्री था, उसने उससे मेरे हाथ को पकड़ लिया।
उसने नेहा का जवाब भी नहीं सुना और ड्रेस को नीचे खिसका दिया।
नेहा के बूब्स अब नंगे हो गए थे।
एक अनजान आदमी के सामने।
“कमाल है तू रंडी...”
उसके मुँह से निकला।
फिर उसकी उँगलियाँ नेहा के हल्के निप्पल को छूने लगीं।
यहाँ नेहा ने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया।
टांगें थोड़ी और फैला दीं।
मैंने चेक किया।
वो बहुत गीली थी।
“You are so wet,” मैंने कहा।
नेहा ने सिर सीट पर टिकाया और फील करने लगी — चार हाथ।
एक अपना, एक मेरा, और दो अनजान आदमी के।
आँखें आधी खुली, आधी बंद।
मेरा लंड अब सेमी हार्ड से फुल हार्ड हो चुका था।
मेरा हाथ अब उसकी पैंटी के अंदर चला गया।
मैं उसकी स्लिट को स्ट्रोक कर रहा था, अपनी उँगलियों से उसके लेबिया को अलग कर रहा था।
और वो आदमी उसके बूब्स को टेस्ट करना चाहता था।
उसका सिर पिछली सीट से आगे आने की कोशिश कर रहा था।
उसने नेहा का एक फ्री हाथ उठाकर अपने कंधे पर रख दिया।
नेहा ने खुद को थोड़ा दाईं तरफ झुका दिया — ताकि उसका सिर उसके बूब्स तक पहुँच सके।
आखिरकार वो सफल हो गया।
उसका सिर मेरे कंधे को टच कर रहा था।
मुझे दिख तो नहीं पा रहा था, मगर उसकी मूवमेंट... पूच-पूच की आवाज़... बीच-बीच में नेहा की “आह्ह” से लग रहा था कि वो अच्छे से चूस पा रहा है मेरी बीवी के निप्पल को।
बारिश की बूँदें कार की विंडशील्ड पर तेज़ी से गिर रही थीं।
वाइपर चल रहे थे।
सड़क पर पानी बह रहा था।
नेहा कुछ पल सोचती रही।
फिर धीरे से बोली,
“हाँ... छोड़ देते हैं।
बारिश में खड़ा है बेचारा।”
मैंने कुछ नहीं कहा।
बस गाड़ी घुमाई और बस स्टॉप की तरफ ले गया।
वो आदमी अभी भी वहीं खड़ा था।
भीग रहा था।
पुरानी शर्ट और पैंट पानी से चिपक गई थी।
उसका पतला शरीर और भी छोटा लग रहा था।
मैंने कार उसके पास रोकी।
नेहा ने विंडो नीचे की और धीरे से बोला,
“आ जाओ... हम तुम्हें घर छोड़ देते हैं।”
बेकार आदमी एक पल के लिए हैरान रह गया।
फिर जल्दी से कार के पिछले दरवाज़े की तरफ भागा और अंदर बैठ गया।
कार में अब हम तीन थे।
बारिश की आवाज़, एसी की हल्की गुनगुनाहट और उस आदमी की तेज़ साँसें।
मैं और नेहा आगे वाली सीट पर थे।
वो पीछे वाली सीट पर बैठा था।
बारिश में भीगकर उसकी पुरानी शर्ट और पैंट शरीर से चिपक गई थी।
नशा उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था।
डैशबोर्ड पर सिगरेट का पैकेट देखकर उसने हिचकिचाते हुए कहा,
“भाई... एक सिगरेट मिलेगी?”
मैंने पैकेट पीछे की तरफ बढ़ा दिया।
उसने एक सिगरेट निकाली, जलाई और पहला कश लेकर बोला
वो हल्के-हल्के कश मार रहा था।
सिगरेट की लाल चिंगारी बारिश की बूँदों में चमक रही थी।
नेहा पीछे मुड़कर उसे देख रही थी।
मैं ड्राइव कर रहा था।
उसकी नज़रें नेहा से ज़्यादा कार को देख रही थीं।
जब मेरे पास कोई बड़ी गाड़ी भी नहीं थी।
भीगने की वजह से उसकी पैंट अब लंड से चिपक गई थी।
टाइट तो वो अभी भी था... लेकिन जाँघ से लटक जा रहा था।
मुझे लग रहा था कि उसके बदन की कमजोरी उसके भारी लंड का वजन नहीं उठा पा रही थी।
इसलिए तनने की बजाय वो लटक जा रहा था।
नेहा ने पीछे मुड़कर पूछा,
“तुम्हारा घर कहाँ है?”
बेकार आदमी सिगरेट पीते हुए, खुद को आराम से सेट करते हुए बोला,
“यहीं पास ही मेरा घर है।”
वो धीरे-धीरे सिगरेट का कश ले रहा था।
कार में धुआँ फैल रहा था।
मुझे लगा था कि जैसे ही वो कार में बैठेगा, मेरी बीवी पर टूट पड़ेगा।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
शायद उसके दिमाग में अभी भी हिचक लग रही थी।
जैसे वो सोच रहा हो — रेस्टोरेंट में जो गेम खेलकर आया था, वो वही से शुरू कर सकता है या नहीं।
जैसे वीडियो गेम में पॉज करके आए हो और अब रिज्यूम करना हो।
हम दोनों आगे वाली सीट पर थे।
नेहा उसकी हर बात पर खिलखिला रही थी।
मैं नेहा के चेहरे को देखकर बता सकता था — वो तैयार थी।
क्यों नेहा इतनी जल्दी तैयार हो गई?
वो कभी किसी को इतनी आसानी से भाव नहीं देती थी।
फिर भी आज उसने गाड़ी घुमाने को कहा।
अभी भी उसके चेहरे पर वो चमक थी — जैसे वो पूरी तरह तैयार है।
उसकी लिमिट मुझे नहीं पता, लेकिन एक बात साफ़ थी —
जहाँ तक बेकार आदमी ने गेम पॉज किया था, वहाँ तक वो बिना किसी आपत्ति के खेलने देगी।
कुछ लोग सोच सकते हैं कि नेहा अजीब है।
मगर मुझे पता है — उसे अजीब सिचुएशन में मजा आने लगा है।
उसके अनयूजुअल किंक्स ज्यादातर उन पोर्न से आए हैं जो हम साथ देखते हैं।
एक्सपोज़र , हुमिलिएशन, रिस्की सीटुएशन्स ...
अब वो खुद को ऐसे ही सिचुएशन में देखकर एक्साइट होती है।
रोलप्ले में वो अक्सर खुद को नहीं, मुझे ऐसे पोजीशन में डालती है।
जैसे मेरे मम्मी-पापा अगले कमरे में हों और वो मेरे पापा के बारे में रोलप्ले करे।
जब वो अगले कमरे में होते हैं, तब भी वो मुझे ऐसी स्थिति में डाल देती है।
मुझे लगता है कि वो खुद से ज़्यादा मुझे इन पोजीशन्स में डालने में मजा लेती है।
नेहा अभी भी पीछे मुड़कर बेकार आदमी से बात कर रही थी।
उसकी आवाज़ में हल्की शरारत थी।
5 मिनट हो गए थे।
न कोई डायरेक्शन, बस चल रही थी।
हमें लगा था कि जैसे ही वो गाड़ी में बैठेगा, नेहा पर टूट पड़ेगा।
मगर वो चुपचाप पीछे बैठा, सीट पर पीठ टिकाकर सिगरेट एंजॉय कर रहा था।
शायद उसे अंदाज़ा ही नहीं था कि कार में क्या-क्या हो सकता है।
मैंने नेहा की तरफ देखा।
एक इशारा किया।
नेहा मुस्कुराई और खिलखिलाती हुई आवाज़ में पीछे मुड़कर पूछा,
“तो कितना टाइम लगता है आपके घर जाने में?”
बेकार आदमी ने सिगरेट का कश लेते हुए कहा,
“30 मिनट।”
“अच्छा... और घर पर तो अभी सब लोग होंगे?”
“हाँ।”
नेहा ने फिर हँसते हुए पूछा,
“तो आज तो रेस्टोरेंट में हुआ... उसके बाद भी आप चैट ही करेंगे या... या आज भाभी को तंग करोगे?”
उसने नेहा की बीवी को “भाभी” बोल दिया — जैसे कोई रिश्ता हो।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखा और मायूसी से बोला,
“आप नहीं समझ सकते... वो भी काम करके आती है।
1 कमरे का मकान और छत...
मैं दारू पीता हूँ... आजकल तुमसे बात करता हूँ... छत पर...
खाना खाने के लिए नीचे आता हूँ, तब तक वो सो जाती है।”
उसने थोड़ी मायूसी से कहा,
“हमारे बीच बस एक-दूसरे की केयर है।
बाकी कुछ नहीं।
कई सालों से।”
नेहा ने गंभीरता से पूछा,
“इतने सालों से?”
“याद नहीं... 4-5 शायद।”
हम दोनों ने एक-दूसरे को देखा।
ये बात मैं अक्सर नेहा से कहता था — कि अगर स्पाइस नहीं तो सेक्स लाइफ खत्म हो जाती है।
नेहा उसकी बातों में गौर कर रही थी।
बातें कर रही थी।
एक आदर्श पति को ये सब अच्छा लगना चाहिए था।
मगर मैं चूतिया हूँ।
मैं सोच रहा था कि कब ये नेहा को छूने लगेगा।
नेहा शायद ये सोच रही थी कि क्या इशारा दे उसे।
उसकी पीठ कुर्सी से टिकी हुई थी।
जानबूझकर boobs आगे।
स्कर्ट जाँघें दिखाती हुई।
बस बोलने की देर थी — “आ जाओ... थोड़ा और एंजॉय करो मेरी बॉडी को।”
मगर डायरेक्ट कहने में वो हिचकिचा रही थी।
पीछे के दरवाज़े पर खटखट हुई।
मेरा ध्यान ड्राइव पर था।
उसकी आवाज़ आई,
“ये कहाँ फेंकू?”
सिगरेट खत्म हो गई थी।
उसे विंडो नीचे करना नहीं आया।
मैंने नीचे की।
थोड़ी बूँदें अंदर आईं।
उसने सिगरेट फेंक दी।
फिर पीठ उठाकर वो अब आगे की तरफ झुक गया।
उसका चेहरा हम दोनों के बीच में आ गया।
उसका एक हाथ सीधे नेहा के नंगे कंधों पर गया।
धीरे से सहलाते हुए।
“तो क्या बोल रही थी रंडी... कि मैं अपनी बीवी को चुदवाऊँगा घर जाकर?”
उसकी टोन अचानक बदल गई थी।
शायद वो तब तक गाड़ी में सिर्फ सिगरेट एंजॉय कर रहा था।
मेरी गाड़ी में मेरा सिगरेट।
अब शायद उसे अहसास हुआ कि मेरी गाड़ी में मेरी बीवी भी तो है।
नेहा चुप थी।
वो मेरी बीवी के कंधों को अच्छे से सहला रहा था, देल कर रहा था।
मगर जैसे ही कोई गाड़ी पास से गुजरती, वो सहज हो जाता।
हाथ हटा लेता।
उसे लग रहा था कि कहीं कोई देख लेगा।
ये अच्छा था कि उसे इज्जत का तो डर था।
इस बार नेहा ने पहल करके कहा,
“चलती गाड़ी में कुछ नहीं दिखेगा... आप छू सकते हैं।”
थोड़ा शर्म से।
मेरा ध्यान ड्राइव और उसके हाथ पर था।
“आआईईई...”
नेहा की आवाज़ आई।
मैंने देखा — उस आदमी ने नेहा के कंधे पर पिंच कर दिया।
प्लेफुल पिंच।
“बहुत चालू आइटम है तू साली... पति के सामने बोल रही है कि छू सकते हो।”
नेहा ने कुछ नहीं कहा।
उस आदमी ने फिर बोला,
“तेरी जैसी बीवी होती ना मेरी तो साली को रोज़ रात बस छत का पंखा दिखाता...
अब वो बस शरीर है... थका हुआ... काली बॉडी से पता नहीं किस केमिकल की बदबू आती है...
तुम जैसी मेमसाहब थोड़ी है वो।”
उस आदमी ने मेरी तरफ देखा।
फिर बोला,
“तुम जैसी जिंदगी... तुम जैसी कार... तेरी जैसी बीवी...
साला ये जिंदगी है भेनचोद...
मगर मादरचोद तू यहाँ अपनी बीवी चुदवाने के लिए बैठा है...
चलो जी को जिसमे मजा मिले।”
उसके अंदर ज्ञान खत्म ही नहीं हो रहा था।
या तो नेहा, या शायद सिचुएशन, या मेरी चूतिया शक्ल...
उसे बार-बार मजबूर कर रही थी वो बातें बोलने के लिए, जिसमें उसी का नुकसान हो सकता था।
ये वो इतना पागल नहीं था जितना हम सोच रहे थे।
उसे पता था कि हम क्या सुनना चाहते हैं।
मैं क्या सुनना चाहता हूँ।
वो वही बोल रहा था।
फिर उसने नेहा की तरफ देखकर बोला,
“तूने कहा गाड़ी में छू सकते हैं... कोई नहीं देखेगा...
तो बता रांड... कहाँ छू सकते हैं?”
नेहा ने सीट का बटन दबाया।
पीछे वाली सीट थोड़ी नीचे झुक गई।
अब वो थोड़ी लेटी हुई थी।
उसकी स्कर्ट पहले से ही ऊपर चढ़ी हुई थी।
गोरी जाँघें डिम लाइट में चमक रही थीं।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखा।
उसकी आँखों में अब पहले वाली घबराहट नहीं थी।
एक भूख थी।
नेहा ने हल्के से गिगल किया ।
मैं देख रहा था।
उसने मुझे पकड़ लिया और हल्के से डाँटते हुए बोली,
“तुम अपनी नज़रें सड़क पर रखो ।”
डीप नेक टॉप में आधी लेटी हुई मेरी बीवी।
मैं सोच सकता था कि उस आदमी को क्या नज़ारा मिल रहा होगा।
वो आदमी अब नेहा की सीट के बिल्कुल पीछे चला गया था।
उसके दोनों हाथ अब सीट के दोनों तरफ से आ रहे थे।
मैं बीच-बीच में देख रहा था — उसके दोनों हाथ नेहा की जाँघों पर थे।
स्कर्ट ऊपर उठ चुकी थी।
पैंटी दिख रही थी।
मगर उसके हाथ नेहा की बॉडी को फील करते हुए आगे बढ़ रहे थे।
नेहा की साँसें तेज़ हो गई थीं।
उसने अपनी टांगें थोड़ी और फैला दीं।
मैं गाड़ी चला रहा था।
बारिश में।
जब मैंने अगली बार देखा तो उसके दोनों हाथ अब नेहा के बूब्स पर थे।
शायद उसने नेहा की कमर को भी थोड़ा काम किया होगा, मगर उस समय मेरा ध्यान रोड पर था।
वो उसे मसल रहा था।
रेस्तरां में टेबल के ऊपर वाली एक्टिविटी के लिए उसे अच्छे से मौका नहीं मिला था।
इसलिए वो मेरी परफेक्ट साइज़ वाली बीवी के बूब्स को पूरी तरह चेक कर रहा था।
उसके शेप, साइज़... दोनों बूब्स के नीचे हाथ डालकर... दोनों का वजन कर रहा था।
नेहा बस खिलखिला रही थी।
उसके मुँह से एक “आह्ह...” भी निकली थी, मगर वो उस आदमी की वजह से नहीं।
मैंने देखा — नेहा का एक हाथ अपनी चूत पर था।
वो खुद उसे पैंटी के ऊपर से रगड़ रही थी।
इससे पता चलता है कि वो कितनी एक्साइटेड थी अभी।
ट्रैफिक वाली जगह पर मेरा पूरा ध्यान रोड पर था।
हालाँकि स्पीड स्लो थी।
ऑटोमैटिक गाड़ी को एक ही स्पीड में चलाना थोड़ा आसान होता है।
मेरा ध्यान वापस उस पर गया जब मैंने आवाज़ सुनी,
“क्या इसे थोड़ा नीचे कर सकते हैं?”
मैंने नेहा को देखा।
उसकी ड्रेस की जिन पतली डोरियों की वजह से कंधों पर टिकी हुई थी, वो अब नीचे हो चुके थे।
उस आदमी के हाथ ऊपर बूब्स पर थे।
और वो मेरी बीवी से पूछ रहा था कि क्या थोड़ा नीचे कर सकते हैं।
नेहा ने शरारती हँसी के साथ कहा,
“तुम बहुत बुरे हो। तो क्या तुम चाहते हो कि मैं पूरी नंगी सड़क पर चलूँ?”
नेहा के दोनों हाथ उस आदमी के हाथ के करीब नहीं थे।
कोई विरोध नहीं।
यहाँ तक कि नेहा का जो हाथ फ्री था, उसने उससे मेरे हाथ को पकड़ लिया।
उसने नेहा का जवाब भी नहीं सुना और ड्रेस को नीचे खिसका दिया।
नेहा के बूब्स अब नंगे हो गए थे।
एक अनजान आदमी के सामने।
“कमाल है तू रंडी...”
उसके मुँह से निकला।
फिर उसकी उँगलियाँ नेहा के हल्के निप्पल को छूने लगीं।
यहाँ नेहा ने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया।
टांगें थोड़ी और फैला दीं।
मैंने चेक किया।
वो बहुत गीली थी।
“You are so wet,” मैंने कहा।
नेहा ने सिर सीट पर टिकाया और फील करने लगी — चार हाथ।
एक अपना, एक मेरा, और दो अनजान आदमी के।
आँखें आधी खुली, आधी बंद।
मेरा लंड अब सेमी हार्ड से फुल हार्ड हो चुका था।
मेरा हाथ अब उसकी पैंटी के अंदर चला गया।
मैं उसकी स्लिट को स्ट्रोक कर रहा था, अपनी उँगलियों से उसके लेबिया को अलग कर रहा था।
और वो आदमी उसके बूब्स को टेस्ट करना चाहता था।
उसका सिर पिछली सीट से आगे आने की कोशिश कर रहा था।
उसने नेहा का एक फ्री हाथ उठाकर अपने कंधे पर रख दिया।
नेहा ने खुद को थोड़ा दाईं तरफ झुका दिया — ताकि उसका सिर उसके बूब्स तक पहुँच सके।
आखिरकार वो सफल हो गया।
उसका सिर मेरे कंधे को टच कर रहा था।
मुझे दिख तो नहीं पा रहा था, मगर उसकी मूवमेंट... पूच-पूच की आवाज़... बीच-बीच में नेहा की “आह्ह” से लग रहा था कि वो अच्छे से चूस पा रहा है मेरी बीवी के निप्पल को।


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