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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#85
आखिरी अपडेट में आपने पढ़ा कि कैसे राजू ने रिशा के साथ अपनी सुहागरात मनाई और उसकी कुंवारी गांड अपने लौड़े से फाड़ दी। रिशा ने भी पूरा साथ देते हुए पूरी रात राजू के साथ खूब मजे किये.


अब आगे..
सुबह जब आँख खुली तो उसने पाया कि रिशा बिस्तार पे नहीं थी। उसकी नज़र घड़ी पे गयी। . . . 8 बज चुके थे. बाथरूम से रिशा के गुनगुनाने और शॉवर की आवाज आ रही थी। राजू भी उठ कर अपने कमरे तक गया और फ्रेश हो लिया। पूरा समय उसकी आँखों के सामने रात की झलकियाँ तैर रही थी। उसका ध्यान रिशा के जिस्म से हट ही नहीं पा रहा था। खासकर के उसके सुडोल नितंब जैसे उसके दिमाग में छप गए हो। रात की रंगरलियां याद आते ही उसकी उत्तेजना फिर बढ़ गई और लौड़ा फिर से फनफना उठा। उसने तौलिया कमर पे लपेटा और रिशा के कमरे की तरफ बढ़ गया। उसमें जैसा कोई नशा सा सवार था। सोचने समझने की शक्ति गम हो चुकी थी और आँखों में बस एक ही तस्वीर थी... रिशा की मखमली मुलायम चिकनी गांड... जब वो उसके कमरे में पहुंचा तो रिशा अभी भी बाथरूम में ही थी। वो कोई सुरीला सा गीत गुनगुना रही थी। उसे पता भी नहीं चला कि राज कब बाथरूम में आ गया। चूंकि रिशा का मुँह शॉवर की तरफ था उसे कुछ दिखाई ना पड़ा। राजू ने अपना तौलिया खोल कर एक तरफ फेंक दिया और रिशा के ठीक पीछे जा कर उसे निहारने लगा। गुनगुने पानी की धार में रिशा का भीगता बदन चमक रहा था। सुराहीदार कमर से बहता हुआ पानी उसके मुलायम फूली हुई चुत्तडो को भीगोते हुए उसकी जांघों को नहला रहा था। रेशमी दूधिया रंग की गोरी जांघें कुल्हों का सौंदर्य दोगुना कर देती थी। राजू ठीक रिशा के पीछे घुटनो के बल ज़मीन पर बैठ गया और अपना चेहरा बिलकुल गांड के करीब ले आया। उसकी निगाहें एकटक रिशा की फूली हुई उभरी गांड को देख रही थी। सुडोल मंसल जांघें जब भी थोड़ी हिलती दोनों कुल्हे यूं थिरक पडते जैसे पानी भरे गुब्बारे, और ऊपर से झरनो की तरह गिरता पानी उनसे छल कर राज के चेहरे को भीगा रहा था।

राजू भी वासना में लिपटे हुए उस पानी में खुद को तार कर रहा था जैसे वो अमृत स्नान कर रहा हो। जब उससे रहा ना गया तो हाथ बढ़ा कर उसने रिशा की कमर थाम ली और कुल्हों के बीच लम्बी दरार को जीभ से चाट लिया। रिशा अचानक हमले के लिए तैयार न थी और उसने घबरा कर पीछे देखा। उसकी हैरानी का ठिकाना ना रहा जब उसने राजू को फर्श पर बैठा देखा। राजू और उसकी नजरें टकराईं. रिशा बड़ी बड़ी आँखों लिए सारा नजारा देख रही थी। राजू ने फिर उसकी गांड की दरार में जिभ रगड़ दी। एक मखमली सिस्की बाथरूम में गूंज गई। "स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्श!!" राजू ने रिशा पर नज़रें गढ़ाई राखी और कुल्हो को चाटना शुरू कर दिया। गांड पर बहता पानी अमृत समान पीते हुए उसने पूरी चूतड़ का रसस्वादन किया। रिशा की आंखें भी वासना से लाल होने लगीं। उसने सामने दीवार पर दोनों हाथ टिकाए और कुल्हो को पीछे की ओर ढकेल दिया। अब राजू का पूरा चेहरा उसके नितंबों के बीच धसा हुआ था, और वो पूरी मस्ती से गांड का रसपान कर रहा था। उसकी हथेलिया सरकती हुई उसके कुल्हो पर टिक गई। गरम हथेलियों के स्पर्श से रिशा के रोम रोम खड़े हो गए और वो भी मस्ती में आ गई।
[Image: IMG-7141.jpg]
उसने कमर लचका कर गांड राजू के चेहरे पर रगड़नी शुरू कर दी। राजू ने भी उसके कुल्हो की मस्त मालिश शुरू कर दी। बीच में वो कुल्हों को काट भी लेता, और मुँह में भर कर चूसता भी। रिशा पगलाये जा रही थी. उसके पैरों के बीच दूरी बढ़ती जा रही थी। एक हाथ नीचे लाकर उसने अपनी चुत रगड़नी शुरू कर दी। शावर अभी भी चालू था और दोनों अब पानी से तरबतर थे। राजू ने उसके नितंबो को दोनों हथेलियाँ से पकड़ लिया और फेला कर गांड के छेद पर कड़क जीभ की ठोकर मारी। रिशा बस आह करके रह गई। राजू ने अब तबियत से उसकी गुदा पे वार करने शुरू कर दिए। रिशा के उन्माद का तूफ़ान उफ़ान मारने लगा। वो कमर हिला हिला के राजू की ठोकरों का जवाब दे रही थी। यूं ही थोड़ी देर और चलता रहा। आख़िर राजू ने अपना अंगूठा उसके छेद में पेल दिया। रिशा मचल उठी. राजू ने उसकी जाँघों को चाटना शुरू किया तो रिशा की उंगली उसकी कोमल चूत में दाख़िल हो गई। अब राजू का अंगूठा उसकी गांड मार रहा था और रिशा की उंगलियाँ अपनी ही चूत पेल रही थी। साथ ही साथ राजू की जीभ उसकी गांड और जांघों के हर एक कोने को नाप रही थी।

थोड़ी ही देर में रिशा झड़ने लगी। राजू ने झट से मौके का फ़ायदा उठाया और सीधा खड़ा होकर रिशा की गांड पर अपना लंड रख दिया। गरम लौड़े के स्पर्श से रिशा पगला गई और उसका ओर्गासम और तेज़ हो गया। राजू ने सुपाड़े को उसके छेद पर टिकाया। गरम सुपाड़े के गांड के छेद पर स्पर्श होते ही रिशा समझ गई आगे क्या होने वाला है। लेकिन उसका शरीर अब उसके बस से बाहर चला गया था। उसने बस सुबकते हुए शॉवर के मुँह को पकड़ लिया। बहते पानी में कोई उसके आनंद के आंसू नई देख पता। उसने पीछे मुड़कर राजू को देखा। राजू की नज़रें उससे लड़ीं, और रिशा ने हां में सर हिलाया। राजू ने कमर को एक झटका दिया और गीला सुपाड़ा फच्च की आवाज करते हुए उसके छेद में दाखिल हो गया। राजू ने मदहोश कर देने वाले कसाव का अनुभव किया। उसने कमर थोड़े पीछे कर के एक मजबूत शॉट लगाया और लंड गांड को मानो चिरता हुआ जड़ तक रिशा की गांड में धंस गया। रिशा की एक लंबी चीख निकल पड़ी, जिस पर ध्यान दिया बिना राजू ने फिर धीरे से लंड पीछे खींचा और वापस जड़ तक पेल दिया। फिर तो गांड मरने का सिलसिला वापस शुरू हो गया। राजू धीरे से लंड सुपाड़े तक बाहर खिंचता और पूरे दम से गांड में पेल देता।. रिशा का बदन पूरा तन चुका था। वो दीवार पर चिपकी हुई थी और उसकी गांड पीछे को तनी हुई थी जिसमें राजू के शॉट दमदार पड रहे थे। गरम जिस्म से उठी भाप से कांच शावर सेक्शन धुंधला पड़ गया था। जब-जब राजू शॉट लगता था वो रिशा की गांड को अपनी तरफ खींचता था जिसका शॉट तगड़ा पड़ता था। रिशा बस दीवार पे सर टिकाए हुए अपनी गांड मरवा रही थी। पूरा बाथरूम में गीले जिस्मो के टकराने की आवाज गूंज रही थी। आवाज़ के साथ रिशा की सिसकिया भी गूँज रही थी। "आह!!... आह!!.. हाऐई!!.. मर गईई!!... ऊउमाआ!! आआह!! आह!! आह!! स्स्स!! सीई!! और तेज राजू!! और तेज!! आह!! आह! आह!!" राजू की मजबूत पकड़ से रिशा की मखमली गांड पर गुलाबी निशान पड़ गए थे, और ठोकरो ने उसके नितंबो को लाल कर दिया था। राजू से रहा ना गया और उसने रिशा की गांड पर एक जोरदार तमाचा जड़ दिया। "चटाक!!" रिशा की चीख निकल गयी, "आआअहहहहहहहहहहह!!"

थप्पड़ पड़ते ही उसके नितंब कड़क हो गए, जैसे राजू के लौड़े पर प्रेशर दोगुना हो गया। दोनों को बहुत मजा आया. राजू ने एक और शॉट लेते हुए फिर एक थप्पड़ दूसरे कुल्हे पे मारा, “चटाक्क!!” “ऊऊऊउम्माआ!! गांड का कसाव और बढ़ गया. लंड और जकड़ गया. राजू पूरी मस्ती में आ गया और उसने चांटो की झड़ी बरसा दी। "ताड़!! तड़ाक!! चटक!! ताड़!! ताड़!! ताड़! तपक!! तड़!! तड़!! ताड़!! उधर रिशा की चीख भी निकलती लगी। "और तेज!!...और तेज!! आआह्ह्हा!!आह!!हाहा!!...हां!! और तेज!! जियो मेरे राजा!! और मारो...मार मार के लाल कर दो मेरी गांड!! जब रिशा की पूरी गांड लाल हो गई तो राजू ने अपना शॉट हल्के कर दिया, और गांड की अंदर की दीवारों को अपने लंड से मालिश करने लगा। उसने नरम पड़ चुकी गांड पर हाथ फिराये तो रिशा की कराह निकल गयी। “आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ

राजू ने रिशा को खींच कर अपने सीने से चिपका लिया और गालों का चुम्बन लेते हुए उसके होठों तक पहुंच गया। साथ ही उसने गांड पेलना जारी रखा. रिशा भी उसके धक्को का जवाब देने में पीछे नहीं थी। दोनों की जुबान एक दूसरे के होठों को चाट रही थी। दोनों की जिभ एक दूसरे पर लाप्लापा रहे थे और हाथ जिस्म से खेल रहे थे। राजू ने उसके भरे हुए स्तनो को थाम लिया और उन्हें मस्ती में मसलने लगा। अपने चुचिओ की ऐसी बेरहम ट्रीटमेंट से रिशा थोड़ी घबराई की राजू कहीं उतावलेपन में उसे खरौंच ना दे। लेकिन राजू केवल उसके स्तनों को मसलता और बीच-बीच में उसके निपल्स को भी छेड़ देता। निपल्स के साथ ये खिलवाड रिशा को बेचैन कर रहा था। चुदाई काफ़ी धीमी चल रही थी और दोनों जिस्म एक दूसरे से चिपके हुए एक लय में झूम रहे थे। रिशा भी एक हाथ से अपनी चूत में उंगली कर रही थी। राजू ने एक हाथ नीचे को ले जा कर उसके हाथ के ऊपर रख लिया, और अपनी भी एक उंगली रिशा की उंगली के बीच से उसकी चूत में पेल दी। इस अनोखे युद्ध से रिशा की सांसें ही अटक गई और वो अचानक ढेर सारा पानी पी गई..

उसने शॉवर से अपना मुंह अलग किया और सांस लेने लगी लेकिन राजू की उस हरकत से उसका बदन तन कर बिल्कुल सीधा हो गया था और जाने अंजाने रिशा भी अपने पैरों की उंगलियों पर खड़ी थी। इस पोजीशन में लंड और गांड एक सीध में आ गया, जिसका सीधा भेदन संभव हो गया था। एंगल की रुकावट जैसी ही हटी राजू की गति अपने आप तेज हो गई। उसने पूरे जोश में रिशा की गांड लेनी शुरू कर दी। बड़ा ही अजीब सा खुशनुमा एहसास था. रिशा की गांड में उसका लंड और चूत में दोनों की उंगली। वो मन से चाहता था कि ये पल कभी ख़तम ना हो। रिशा भी इस एहसास से जुदा ना थी। अब तक वो 5 बार झड़ चुकी थी और अब वो भी दिल से चाहती थी कि चुदाई कभी ख़तम ना हो। वो चली तो थी राजू का जानवर जगाने लेकिन राजू ने उसके अंदर की ज्वाला जगा दी थी। वो भी मस्त होकर राजू के लंड का आनंद लेने लगी उसकी चूत ने फिर एक बार दम तोड़ दिया और वो फिर से पानी छोड़ने लगी।

सच कहा था चाणक्य ने कि औरत की भूख मर्द से चार गुना ज्यादा ही होती है। उसने हाथ पीछे लेजाकर राजू के कड़क नितंबों को थाम लिया और चुदाई में उसका जी भर के साथ देने लगी। राजू झटका देता तो वो और जोर से राजू को अपनी और खिंचती। उसके नाखून राजू के निताम्बो में गड़ गए थे। राजू पे इस दर्द ने अंकुश जैसा काम किया और वो पगलो की तरह शॉट लगाने लगा। दोनों जिस्म एक दूसरे से गोंद की तरह चिपके हुए। पानी भी उनकी गर्मी शांत करने में नाकाम रहा था। एक दूसरे को यूं ही उलझे हुए वो दोनों चुदाई जारी रखे हुए थे। राजू का ज्वालामुखी बस फटने ही वाला था। उसने रिशा की चुचिओ पर अपनी पकड़ और मजबूत कर दी और तभी वो मनोनमद में समा गया। गांड के अंदर गरम लावा जैसा वीर्य भरने लगा। वीर्य की गर्मी से रिशा का भी ओर्गास्म हो गया और वो अपनी चूत में उंगली करती हुई झड़ने लगी। दोनों एक दूसरे को कस कर थामे हुए थे और वासना की लहरो के रुकने का इंतज़ार कर रहे थे। राजू रिशा के कंधों को तब तक चूमता रहा जब तक उसका सारा वीर्य उसकी गांड में ना उतर गया।

रिशा ने धीरे से अपनी गांड से लंड निकाला और पलट कर घुटनो के बल ज़मीन पर बैठ गयी। उसने राजू का लंड अपने मुँह में भर लिया और चूस चूस कर सारा रस निचोड़ने लगी। लंड से अचानक दो पिचकारी और निकली और रिशा का गला तर हो गया।[Image: IMG-7149.jpg] 

फिर उसने साबुन लेकर लंड को धोना शुरू किया और फिर राजू के पूरे बदन पर साबुन लगाया। राजू ने भी उसके बदन के एक एक कोने को साबुन से नहलाया और दोनों काफी देर तक दूसरे के चिकने बदन को सहलाते हुए किस करते रहे। फिर शॉवर से दोनो ने एक दूसरे के बदन से साबुन साफ किया। सारी हरकतों से राजू का लिंग फिर तनने लगा। अब चूंकि दोनों नहा चुके थे तो रिशा की नज़र उसके पानी में चमकते लंड पर पड़ी। लंड आधा खड़ा देख उसने एक दबी सी मुस्कान से उसे थाम लिया और नीचे झुक कर उसे पूरा मुँह में भर के एक बार जोर से चूसा। फिर सुपाड़े पर एक जोर का चुम्मा जड़ दिया। राजू का लौड़ा फिर तन गया तो उसने एक चांटा उसका लंड पे दिया और बाथरूम से निकल कर कमरे में चली गई।
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 14-05-2026, 05:16 PM



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