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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#84
जब राजू जैसा देवर हो घर पर और अपना पति हो दूर

तब देवर के आगे घोड़ी बनाने को औरत हो जाती मजबूर

देवर को भी जब मिले बजाने को भाभी की गांड कुंवारी

फ़िर सारे छेद बजता है वो भाभी के बिस्तर पर बारी बारी

अक्सर भाभी भी गरमा जाती है देवर का देख के जोश

फ़िर चूत चुदी या गांड चुदी कहां रहता है उसको होश

[Image: 689226330-961740050167508-6624987732701414479-n.jpg]
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 14-05-2026, 05:11 PM



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