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Adultery एक रंडी की दास्तान-The story of a corporate whore
#21
पिछली सीट पर बैठा लड़का, जिसने नीली टी-शर्ट पहनी थी, उसने बाइक धीमी करते हुए पूछा, "कितने?"

चैताली ने अपनी आवाज में हल्की सी मिठास घोलते हुए कहा, " कितने लोग हैं तुम?"

अगली सीट पर बैठा लड़का, जिसकी दाढ़ी अभी पूरी तरह से नहीं उगी थी, उसने अपने दोस्त की ओर देखा। " बस हम दो हैं ।"

चैताली ने मुस्कुराते हुए कहा, "ठीक है।"

नीली टी-शर्ट वाले लड़के ने अपने दोस्त से फुसफुसाया, "क्या बोलते हो?"

दाढ़ी वाले लड़के ने चैताली की ओर देखा। "पूरा पैकेज, क्या दोगी?"

चैताली ने अपनी पलकें झपकाते हुए कहा, "जो तुम चाहोगे, सब मिलेगा। पांच हजार, दो घंटे "

" एक हज़ार" नीली टी-शर्ट वाले ने कहा।

चैताली हँसी। "इतने में तो सिर्फ़ झाँकी मिलेगी, बाबू। पूरा खेल तो बहुत महँगा है।"

दाढ़ी वाले लड़के ने थोड़ा आगे झुककर कहा, "तो कितना चाहिए?"

"कम से कम पाँच हजार," चैताली ने बेबाकी से कहा।

दोनों लड़के एक-दूसरे को देखने लगे। "बहुत ज्यादा है यार," नीली टी-शर्ट वाले ने कहा।

"तुम्हारे लिए खास डिस्काउंट," चैताली ने अपनी आवाज में शरारत मिलाई। "तीन हजार।"

"दो हज़ार दे सकते हैं मंज़ूर है"लड़के ने कहाँ। चैताली ने हां भरते हुए अपना सर हिलाया।

दाढ़ी वाले लड़के ने सिर हिलाया। "ठीक है। लेकिन तुम्हे हमारे साथ हॉस्टल चलना होगा।"

"कहीं भी," चैताली ने कंधे उचकाए। "बस मेरा काम होना चाहिए।"

"ठीक है, बैठो," दाढ़ी वाले लड़के ने कहा।

चैताली एक्टिवा पर बैठ गई, दोनों लड़कों के बीच। उसकी देह उनके युवा शरीरों से छू रही थी। उसे एक अजीब सी उत्तेजना महसूस हुई। एक्टिवा तेजी से आगे बढ़ गई, गुरुग्राम की रात की सड़कों पर दौड़ती हुई। हवा उसके चेहरे से टकरा रही थी, उसके बालों को बिखेर रही थी। लड़कों की युवा गंध, उनके पसीने और परफ्यूम की मिली-जुली महक उसे घेर रही थी।

"तुम्हारा नाम क्या है?" नीली टी-शर्ट वाले ने पूछा।

"चैताली," उसने जवाब दिया।

"मैं रवि, और यह मेरा दोस्त अमित," दाढ़ी वाले ने कहा।

"कॉलेज के हो?" चैताली ने पूछा।

"हाँ, पास के कॉलेज में," अमित ने जवाब दिया।

"तो आज छुट्टी मना रहे हो?" चैताली ने हँसते हुए कहा।

रवि ने पीछे मुड़कर देखा। "हाँ, आज मूड है।"

चैताली ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराती रही। हॉस्टल की इमारतें दूर से दिखाई देने लगीं। एक पुरानी सी इमारत, जिसकी खिड़कियों से पीली रोशनी छनकर आ रही थी। एक्टिवा हॉस्टल के पिछले गेट पर रुकी, जहाँ अँधेरा था।

"यहाँ से," अमित ने कहा, "हमें पैदल जाना होगा।"

वे एक्टिवा से उतरे। चैताली ने अपने कपड़े ठीक किए। हॉस्टल के अंदर घुसते ही, गलियारों में अजीब सी बदबू थी – पसीने, पुराने खाने और शायद कुछ और।

"तुम्हारा कमरा कहाँ है?" चैताली ने पूछा।

"ऊपर, तीसरी मंजिल पर," रवि ने कहा।

वे सीढ़ियाँ चढ़ने लगे। चैताली की साँसें थोड़ी तेज हो रही थीं। उसके दिल की धड़कन बढ़ रही थी। यह सिर्फ़ काम नहीं था, यह एक अनुभव था, हर बार नया।

कमरे का दरवाजा खुला। अंदर दो और लड़के बैठे थे, ताश खेल रहे थे। जैसे ही उन्होंने चैताली को देखा, उनकी आँखें चमक उठीं।

"अरे वाह!" एक लड़के ने कहा, जिसका नाम करण था। उसने अपनी ताश की गड्डी नीचे रख दी।

"कौन है यह?" दूसरे लड़के ने पूछा, जिसका नाम विशाल था।

रवि ने हँसते हुए कहा, "चैताली, हमारी नई दोस्त।"

चैताली ने कमरे का जायजा लिया। एक छोटा सा कमरा, दो बिस्तर, एक मेज और कुछ किताबें। दीवारों पर फिल्म सितारों के पोस्टर लगे थे। हवा में सिगरेट और सस्ते परफ्यूम की गंध थी।

"नमस्ते," चैताली ने मुस्कुराते हुए कहा।

करण ने तुरंत उठकर एक कुर्सी चैताली की ओर खिसकाई। "बैठो, बैठो।"

चैताली कुर्सी पर बैठ गई। उसने अपने चारों ओर देखा। चारों लड़के उसे ऐसे घूर रहे थे, जैसे उसने कभी कोई औरत नहीं देखी हो।

अमित ने कहा, "यह भी हमारे साथ है।"

चैताली ने अपनी भौंहें उठाईं। "तो सौदा चार का है?"

रवि ने सिर हिलाया। "हाँ, आज पार्टी है।"

"तो कीमत बढ़ेगी," चैताली ने सीधे कहा।

करण ने हँसते हुए कहा, "कितनी?"

"चार हजार," चैताली ने कहा। "दो घंटे, चार लड़के।"

चारों लड़के एक-दूसरे को देखने लगे। "ठीक है," अमित ने कहा। "लेकिन पहले दिखाओ।"

चैताली ने अपनी आँखें सिकोड़ीं। "पहले पैसे।"

रवि ने अपने वॉलेट से नोट निकाले और चैताली की ओर बढ़ा दिए। चैताली ने नोट गिने, चार हजार पूरे थे। उसने पैसे अपने पर्स में रखे।

"तो, शुरू करें?" चैताली ने अपनी आवाज़ में एक अलग तरह की कामुकता घोलते हुए कहा।

करण ने कमरे का दरवाजा बंद किया। कमरे में एक अजीब सी गर्मी बढ़ गई। चैताली खड़ी हुई, उसने अपनी तंग जींस और टॉप उतारना शुरू किया। लड़कों की आँखें उस पर गड़ी थीं, उनकी साँसें तेज हो रही थीं।

उसने पहले अपना टॉप उतारा, फिर जींस। उसके काले रंग की ब्रा और पैंटी उसके शरीर पर कसकर फिट थे, उसकी सुडौल वक्रों को उजागर कर रहे थे। चारों लड़के उसकी ओर ऐसे देख रहे थे, जैसे उन्होंने कभी कोई औरत नहीं देखी हो।
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RE: एक रंडी की दास्तान-The story of a corporate whore - by MohdIqbal - 14-05-2026, 05:43 AM



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