14-05-2026, 12:17 AM
वेटर बीयर ले जाने के लिए मुड़ा ही था कि बेकार आदमी ने मुझे देखकर कहा,
“इससे पूछ बहनचोद ... दारू है क्या? व्हिस्की... रम... इसमें मजा नहीं आ रहा।”
नेहा ने वेटर से जो कम्युनिकेशन की थी वो इंग्लिश में थी, जो उसे ज्यादा समझ में नहीं आया।
उसने मेरे थ्रू वेटर से बात करनी चाही।
मैंने वेटर से पूछा।
वेटर ने धीरे से जवाब दिया,
“सर, रम है... ओल्ड मॉन्क है?”
बेकार आदमी ने तुरंत कहा,
“तो ले आ 60 ML।”
वेटर चला गया।
जैसे ही वो थोड़ा दूर गया, नेहा के मुँह से फिर एक हल्की “आह्ह...” निकली।
मैंने देखा — उस आदमी का हाथ हिल रहा था।
नेहा की स्कर्ट थोड़ी नीचे थी, इसलिए अंदर क्या हो रहा था साफ़ नहीं दिख रहा था।
लेकिन उसकी “आह्ह” से लग रहा था कि वो मेरी बीवी की चूत को रगड़ रहा है...
और वो ये काम थोड़ी बेरहमी से कर रहा था।
नेहा की साँसें अब और तेज़ हो गई थीं।
उस आदमी ने नेहा की तरफ देखा और धीरे से बोला,
“तो कहाँ थे हम... हाँ, मेरी इकलौती खास चीज़ के बारे में...”
नेहा शर्मा रही थी।
मैं उसके चेहरे को देख रहा था — उसकी आँखें आधी बंद, होंठ हल्के से खुले, गाल गहरे लाल।
हर मूवमेंट जो उसकी स्कर्ट के अंदर चल रही थी, उसके चेहरे पर साफ़ दिख रही थी।
नेहा ने बहुत धीमी, काँपती हुई आवाज़ में कहा,
“हाँ... हाँ...”
उस आदमी ने नेहा की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए पूछा,
“तो कैसी लगी मेरी खास चीज़?”
नेहा ने मुँह से कुछ नहीं कहा।
बस दूसरे हाथ से थंब्स अप का जेस्चर कर दिया।
उसका पूरा ध्यान अपनी ही चूत पर था।
बेकार आदमी ने फिर से पूछा, इस बार थोड़ी रफ़ आवाज़ में,
“क्या बोल रही है बहन की लोड़ी... मैंने सुना नहीं... बता ना... कैसा था?”
वो टेबल के नीचे अपनी पैंट के ऊपर से अपने लंड की आउटलाइन बना रहा था।
नेहा अपना हाथ नीचे नहीं ले जा रही थी।
उसे पता था कि वेटर वापस बीयर सर्व करने आएगा।
नेहा ने काँपती हुई आवाज़ में जवाब दिया,
“बड़ा... बहुत बड़ा...”
उसने छोटा जवाब देना चुना।
वो आदमी मेरी बीवी को मेरे सामने गाली दे रहा था।
चैट पर तो अक्सर देता था, लेकिन आज सामने... शायद उसमें हिम्मत आ गई थी।
वैसे भी वो चैट पर कहता था कि मैं रोज़ इसी टाइम पर दारू पीते हुए नेहा से बात करता हूँ।
हम इमेजिन करते थे कि वो बढ़िया व्हिस्की लेते हुए चैट करता होगा।
मगर अब लग रहा था... वो देसी दारू पीकर घर आता होगा, फिर सेक्स चैट मेरी बीवी के साथ करता होगा... और फिर हिलाकर सो जाता होगा।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोला,
“अच्छे से बता ना मादरचोद... चैट पर तो नहीं शर्माती... अच्छे से बता अपने पति को कि कैसी लगी मेरी खास चीज़।”
वो नेहा के मुँह से अपनी लंड की तारीफ सुनना चाहता था।
नेहा ने मेरी तरफ देखा, फिर बहुत धीरे से, शर्माते हुए बोला,
“बेबी... हिस डिक इज़ ह्यूज...”
उस आदमी ने तुरंत बीच में टोका,
“हिंदी में लोड़ी...”
नेहा ने हिचकिचाहट के साथ फिर से शुरू किया,
“बहुत बड़ा है इनका लु... लंड... (थोड़ी हिचकिचाहट के साथ)... मोटा... इनकी हाथ की कलाई जितना... और थोड़ा अजीब भी...”
मैंने नेहा को देखा और पूछा,
“अजीब?”
नेहा ने उस आदमी की तरफ देखकर बोला,
“हाँ... अजीब...”
बेकार आदमी मुस्कुराते हुए बोला,
“बता ना रंडी... क्या अजीब...”
नेहा ने फिर से कहा,
“ये... पूरा गोल नहीं लग रहा... ओवल साइज़ है।”
वो आदमी हँसा।
फिर मुझे समझाने के लिए बोला,
“बचपन से ही मेरा ऐसा है।
कोई भी देखता है... ऐसे ही अचंभित होता है।”
मैंने पूछा,
“ओवल मतलब?”
नेहा सोच रही थी कि कैसे समझाए, मगर उस आदमी ने खुद कहा,
“जैसे गन्ना कैसे हो जाता है एक बार रस निकालने के बाद... वैसा।”
उसके एग्ज़ाम्पल भी गरीबों वाले थे।
नेहा ने उस आदमी को इशारा किया — थोड़ा चुप होने के लिए।
सामने से वेटर आता दिख रहा था।
वेटर भी अब हमें थोड़ा सशंकित नज़रों से देख रहा था।
एक हॉट मॉडल टाइप की लड़की, शादीशुदा, जो थोड़ी देर पहले मेरे साथ आई थी — अब वो किसी ऐसे के साथ बैठी है जो शायद होटल मेन्यू के प्राइस देख लेता तो अंदर आने की हिम्मत भी न करता।
वेटर ने सर्व किया,
“लीजिए सर, आपकी रम।”
और वो जाने लगा।
वो थोड़ी दूर ही गया होगा कि उस आदमी ने ग्लास उठाया... और एक घूँट में 60 ML बिना पानी, बिना सोडा के अंदर कर लिया।
हम दोनों उसे देख रहे थे।
ग्लास टेबल पर रखा।
फिर नेहा को देखा।
और झुक गया।
अचानक हमला।
उसके होंठ नेहा के होंठों पर।
नेहा की पीठ कुर्सी से टिक गई।
वो कुर्सी पर आधी लेटी-सी हो गई थी।
इस बार वो किस हल्के नहीं थे।
वो होंठों को चाट रहा था।
रम के पैक ने उसे हिम्मत दे दी थी।
एक हाथ नेहा की कमर पर।
दूसरा चूत पर।
इस पोजीशन में स्कर्ट ऊपर थी।
मैं अब देख सकता था — उसके हाथ चूत को रगड़ते हुए... लाल पैंटी के ऊपर से।
और दूसरा हाथ boobs तक चला गया।
मैं एक नज़र से ये सब देख रहा था और बार-बार दूसरी तरफ देख लेता था कि कहीं कोई आ न जाए।
ये बोल्ड मूव था।
नेहा भी उसे धकेल रही थी... लेकिन पूरी ताकत से नहीं।
मैं थोड़ी देर तक देखता रहा।
सीन बहुत हॉट था।
हल्का-सा आदमी पब्लिक प्लेस में मेरी बीवी पर चढ़ा हुआ।
नेहा उसे धकेलने की कोशिश कर रही थी, मगर किस में रिस्पॉन्ड भी कर रही थी।
उसकी बॉडी उसके हाथों में मूवमेंट पर काँप रही थी।
बूब्स ऊपर आते, नीचे जाते।
मगर बहुत रिस्क था।
मैंने उसकी बाजू से पकड़ा और अपनी तरफ खींचकर वापस कुर्सी पर बिठा दिया।
उसने एकदम से मुझे गुस्से से देखा।
मगर फिर शांत हो गया।
वो समझ गया था कि ये सब रिस्की है।
नेहा ने हल्की साँस ली।
उसके गाल अभी भी लाल थे।
उसने मुझे देखा — आँखों में शर्म, उत्तेजना और थोड़ी राहत का मिश्रण था।
धर-उधर देखकर उस आदमी ने नेहा का हाथ वापस पकड़ लिया और अपने लंड पर रख दिया।
उसे पता था कि अब वेटर को टाइम लगेगा और दूर से टेबल के नीचे वाली एक्टिविटी दिखेगी नहीं।
वो नेहा के कान के पास मुंह ले जाकर धीरे से बोला,
“देख... ये शेप और साइज़ जब अंदर जाएगा तो तुझे कितना मजा आएगा।”
उसे पता था टाइम कम है... लिमिटेड टाइम में जितना भी उससे मिल सकता था, वो ले रहा था।
नेहा का हाथ अब उसकी पैंट के ऊपर से उसके लंड को महसूस कर रहा था।
उसकी उँगलियाँ हल्के-हल्के दबाव डाल रही थीं।
नेहा उसका लंड ऊपर से नीचे तक छू रही थी... महसूस कर रही थी... उँगलियों से उसके शेप और मोटाई को समझ रही थी।
बेकार आदमी ने धीरे से कहा,
“बता ना रंडी... अपने पति को कितना बड़ा है मेरा लंड।”
नेहा ने उसकी तरफ देखा।
फिर अँगूठे और तर्जनी से बेस से टिप तक मापते हुए... जैसे कोई कैलकुलेशन कर रही हो... बहुत धीरे से बोली,
“आई थिंक 7... या शायद 7 एंड हाफ इंच...”
बेकार आदमी ने मुस्कुराते हुए पूछा,
“अच्छा... पहले देखा है ऐसा?”
नेहा ने शर्माते हुए मुस्कुराकर ना में सिर हिला दिया।
उस आदमी ने नेहा की तरफ देखकर पूछा,
“इस गांडू का कितना बड़ा है?”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
मैंने हल्का सा इशारा किया — बताने के लिए।
ये सवाल हजारों बार दिया था — पहले आयाान को, अब इस आदमी को।
मेल ईगो हमेशा इस बूस्ट से खुश होता है।
ये सुनना चाहते हैं कि इस चूत को अब तक कितनी गहराई से नापा गया है।
बताना चाहते हैं — मेरी बीवी के उन कोनों में जा सकते हैं जहाँ अभी तक पति नहीं गया।
हा ने उसका लंड सहलाते हुए, बहुत धीरे से जवाब दिया,
“4.5 इंच...”
बेकार आदमी हल्का सा हँसा और बोला,
“नुन्नू बोलते हैं उससे... मेरा मोटने के टाइम भी इससे बड़ा होता है।”
उसके हाथ सीधे नेहा के निप्पल्स पर गए।
चारों तरफ देखकर, जब उसे लगा कि कोई नहीं देख रहा, तो उसने नेहा के निप्पल को जोर से पिंच कर दिया।
“आआह्ह्ह...”
नेहा के मुँह से एक छोटी-सी चीख निकल गई।
उसका शरीर एक झटके से काँप गया।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखकर, नशे में भारी आवाज़ में बुदबुदाया,
“क्या आदमी है तेरा पति भेनचोद... तू इसके सामने मेरा लंड टटोल रही है और इसे फर्क नहीं पड़ता...”
फिर उसने नेहा की तरफ झुककर, और भी धीमी लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा,
“किस तरह का आदमी है तू मादरचोद...
गुस्सा क्यों नहीं हो रहा?
मेरे साथ लड़ाई क्यों नहीं कर रहा?
कैसा आदमी है ये?”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में शर्म, उत्तेजना और थोड़ी सी हैरानी थी।
नेहा ने थोड़ी हिम्मत जुटाकर, धीरे लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा,
“वेल... मैंने हमेशा से ये फैंटसी की थी कि किसी अनजान आदमी के साथ सेक्स करूँ... किसी ऐसे के साथ जिसका लंड बड़ा हो... बस ये महसूस करने के लिए कि ऐसा कैसा लगता है।”
उसकी आवाज़ में शर्म थी, लेकिन साथ में एक साफ़ उत्तेजना भी थी।
वो जानती थी कि वो क्या सुनना चाहता है।
"तुम्हे तो बड़ा प्राउड फील हो रहा होना ना की में अपने पति के सामने तुम्हारा लुंड सहला रही हु
मेरा पति मेरा कुकॉल्ड है।
वो जानता है कि तुम वो हो जो मैं चाहती हूँ।
वो सिर्फ मेरी खुशी और मजा चाहता है।
मैं किसी भी मर्द के साथ सेक्स कर सकती हूँ।
वो मुझे वफादार रहेगा।
मैं उसकी इकलौती औरत हूँ...
और हमेशा रहूँगी।”
उसने ये सब एक साँस में कह दिया।
लंड को सहलाते-सहलाते।
हमारे बीच की वो अनकही बातें भी बता दीं जो हमने कभी किसी से नहीं कही थीं।
नेहा अब नशे में थी।
वो उस आदमी को सब बता रही थी।
उसे उत्तेजना दे रही थी।
मुझे नहीं लगता कि उसे “कुकॉल्ड” का मतलब भी ठीक से पता होगा।
मगर ये उसके लिए नई दुनिया ज़रूर थी।
बेकार आदमी ने पूछा,
“क्या वो गुस्सा नहीं होता? या जलन नहीं होती?”
नेहा ने हल्के से मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“वो गुस्सा नहीं होता... लेकिन जलन ज़रूर होती है।
जब वो देखता है कि मैं किसी और मर्द के साथ इस तरह हूँ... तो उसके मन में बहुत सारी चिंताएँ आती हैं।
इतनी ज़्यादा कि गिनती नहीं हो सकती।
मगर मैंने उसे अच्छे से ट्रेन कर रखा है।”
नेहा ये सब बोल रही थी जैसे उसने पूरा डायलॉग रटा हुआ हो।
मुझे याद आ गया — आयाान चैट पर अक्सर यही कहता था कि “तुम्हारे पति को ट्रेनिंग देनी होगी।”
बेकार आदमी ने पूछा,
“कैसे ट्रेन करते हो एक आदमी को... कि वो अपनी बीवी को किसी और से चुदवाने दे?”
नेहा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“वो तुम्हें धीरे-धीरे पता चलेगा... अभी तो बस पहली मुलाकात है।”
उस आदमी ने तुरंत पूछा,
“तो क्या हम दोबारा मिलेंगे?”
नेहा ने आँख मारते हुए कहा,
“मैं तुम्हें चैट पर बताऊँगी... रात में।”
बेकार आदमी ने फिर पूछा,
“क्या सच में ये चूतिया वो करेगा जो तुम कहोगी?”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसने मेरी आँखों में देखा।
उस आदमी के जवाब का इंतज़ार भी नहीं किया।
उसने धीरे से कहा,
“बेबी... क्या तुम फील कराना चाहोगे... इस बेकार आदमी के लंड को?”
मैं चौंक गया।
हमने सब डिस्कस किया था...
मगर ये नहीं।
ये मेरे लिए भी आउट ऑफ कोर्स था।
टेबल पर दोनों मर्द शॉक में थे।
नेहा ने कुछ ऐसा कह दिया था कि हम दोनों एक पल के लिए सन्न रह गए।
नेहा मुस्कुराई।
उसका हाथ अभी भी उस आदमी के लंड पर था।
उसने धीरे से कहा,
“आओ ना... तुम्हें अच्छा फील होगा।”
मुझे कई साल हो गए थे किसी का लंड फील किए हुए।
मैंने काँपते हाथों से आगे बढ़ाया।
आधे रास्ते में ही नेहा ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
और जैसे पहले उस आदमी ने नेहा को फील करवाया था, वैसे ही नेहा अब मुझे उसका लंड फील करवाने लगी।
उस आदमी के मुँह से “आह्ह” निकल गई।
मैं पहली बार लंड छू रहा था... नेहा के साथ।
उसने फील किया होगा कि एक पति और पत्नी... दोनों मिलकर उसका लंड फील कर रहे थे।
मुझे भी थोड़ा अच्छा लग रहा था।
पहली बार ऐसा लग रहा था कि हम एक टीम की तरह काम कर रहे हैं।
अलग किस्म का बॉन्डिंग।
दोनों हाथ एक आदमी को प्लेजर दे रहे थे।
और दोनों हाथ नहीं हटा रहे थे।
हम खो गए थे।
हमारा खुमार उतरा जब चिट-चिट करती आवाज़ और धोने के साथ हमारा खाना आ गया।
तुरंत दोनों ने हाथ हटा लिया।
वेटर ने सर्व किया और बोला,
“सर, गेस्ट आने लग गए हैं... प्लीज़ अगर आप ये सब जल्दी करें तो...”
ये सब का मतलब खाने से था या किसी और से... मुझे समझ नहीं आया।
उसने साफ कहा था।
1 मिनट में ही कुछ बच्चे पूरे रूम में भागने लगे।
प्राइवेसी खत्म हो गई थी।
भीड़ बढ़ रही थी।
हम जल्दी-जल्दी खाना खाने लगे।
एक-दो बार मैंने देखा — वो आदमी नेहा की जाँघों को अप्रोच कर रहा था।
मगर नेहा ने हाथ झटक दिया।
ये सच में इनकार वाला झटका था।
थोड़ी देर में हम निकलने लगे।
लिफ्ट में एंटर हुए।
उस आदमी की खुशी को मैंने एक झटके में कम कर दिया — लिफ्ट में CCTV कैमरा दिखाकर।
“सोचना भी मत।”
नेहा ने पूछा,
“तुम्हारी गाड़ी कहाँ है?”
उसने इशारा किया — बाहर है।
हमारी बेसमेंट में।
पुणे की बारिश बिन मौसम बरस रही थी।
उस आदमी ने जाने से पहले आखिरी चांस लिया...
नेहा की गांड को हल्के से दबाकर बोला,
“तू पक्का मिलेगी ना दोबारा?”
नेहा ने “हम्म” में जवाब दिया।
और हम अलग हो गए।
हम अपनी कार में बैठे।
बारिश हो रही थी।
अभी हम दोनों चुप थे।
दोनों के हाथ में उस आदमी के लंड की गर्माहट अभी तक थी।
मैं ड्राइव करते हुए आगे बढ़ा।
हम रोड पर थे।
बारिश।
हमने एक बस स्टॉप क्रॉस किया।
नेहा ने अचानक कहा,
“सैम... वो आदमी... वो वहाँ खड़ा था... बस स्टॉप पर... बारिश में।”
हम आगे निकल चुके थे।
मगर मैंने गाड़ी साइड में लगा दी।
“शायद वो बस से ही आया होगा... और बस का इंतज़ार कर रहा होगा।”
मैंने कहा।
नेहा ने दाँतों में उँगली दबाकर कहा,
“क्या हम उसे घर तक छोड़ सकते हैं?”
मैंने कुछ सोचा।
“तुम्हें पता है ना... एक बार वो कार में आ गया तो रोक पाना मुश्किल होगा...
मगर मैं ये फैसला तुम पर छोड़ता हूँ।
तुम चाहो तो मैं गाड़ी घुमा सकता हूँ।”
बोलते हुए मैं नेहा को देख रहा था।
नेहा कुछ सोच रही थी।
और मैं सोच रहा था कि नेहा का एडवेंचर से मन नहीं भरा।
मैं जवाब का इंतज़ार कर रहा था।
“इससे पूछ बहनचोद ... दारू है क्या? व्हिस्की... रम... इसमें मजा नहीं आ रहा।”
नेहा ने वेटर से जो कम्युनिकेशन की थी वो इंग्लिश में थी, जो उसे ज्यादा समझ में नहीं आया।
उसने मेरे थ्रू वेटर से बात करनी चाही।
मैंने वेटर से पूछा।
वेटर ने धीरे से जवाब दिया,
“सर, रम है... ओल्ड मॉन्क है?”
बेकार आदमी ने तुरंत कहा,
“तो ले आ 60 ML।”
वेटर चला गया।
जैसे ही वो थोड़ा दूर गया, नेहा के मुँह से फिर एक हल्की “आह्ह...” निकली।
मैंने देखा — उस आदमी का हाथ हिल रहा था।
नेहा की स्कर्ट थोड़ी नीचे थी, इसलिए अंदर क्या हो रहा था साफ़ नहीं दिख रहा था।
लेकिन उसकी “आह्ह” से लग रहा था कि वो मेरी बीवी की चूत को रगड़ रहा है...
और वो ये काम थोड़ी बेरहमी से कर रहा था।
नेहा की साँसें अब और तेज़ हो गई थीं।
उस आदमी ने नेहा की तरफ देखा और धीरे से बोला,
“तो कहाँ थे हम... हाँ, मेरी इकलौती खास चीज़ के बारे में...”
नेहा शर्मा रही थी।
मैं उसके चेहरे को देख रहा था — उसकी आँखें आधी बंद, होंठ हल्के से खुले, गाल गहरे लाल।
हर मूवमेंट जो उसकी स्कर्ट के अंदर चल रही थी, उसके चेहरे पर साफ़ दिख रही थी।
नेहा ने बहुत धीमी, काँपती हुई आवाज़ में कहा,
“हाँ... हाँ...”
उस आदमी ने नेहा की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए पूछा,
“तो कैसी लगी मेरी खास चीज़?”
नेहा ने मुँह से कुछ नहीं कहा।
बस दूसरे हाथ से थंब्स अप का जेस्चर कर दिया।
उसका पूरा ध्यान अपनी ही चूत पर था।
बेकार आदमी ने फिर से पूछा, इस बार थोड़ी रफ़ आवाज़ में,
“क्या बोल रही है बहन की लोड़ी... मैंने सुना नहीं... बता ना... कैसा था?”
वो टेबल के नीचे अपनी पैंट के ऊपर से अपने लंड की आउटलाइन बना रहा था।
नेहा अपना हाथ नीचे नहीं ले जा रही थी।
उसे पता था कि वेटर वापस बीयर सर्व करने आएगा।
नेहा ने काँपती हुई आवाज़ में जवाब दिया,
“बड़ा... बहुत बड़ा...”
उसने छोटा जवाब देना चुना।
वो आदमी मेरी बीवी को मेरे सामने गाली दे रहा था।
चैट पर तो अक्सर देता था, लेकिन आज सामने... शायद उसमें हिम्मत आ गई थी।
वैसे भी वो चैट पर कहता था कि मैं रोज़ इसी टाइम पर दारू पीते हुए नेहा से बात करता हूँ।
हम इमेजिन करते थे कि वो बढ़िया व्हिस्की लेते हुए चैट करता होगा।
मगर अब लग रहा था... वो देसी दारू पीकर घर आता होगा, फिर सेक्स चैट मेरी बीवी के साथ करता होगा... और फिर हिलाकर सो जाता होगा।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोला,
“अच्छे से बता ना मादरचोद... चैट पर तो नहीं शर्माती... अच्छे से बता अपने पति को कि कैसी लगी मेरी खास चीज़।”
वो नेहा के मुँह से अपनी लंड की तारीफ सुनना चाहता था।
नेहा ने मेरी तरफ देखा, फिर बहुत धीरे से, शर्माते हुए बोला,
“बेबी... हिस डिक इज़ ह्यूज...”
उस आदमी ने तुरंत बीच में टोका,
“हिंदी में लोड़ी...”
नेहा ने हिचकिचाहट के साथ फिर से शुरू किया,
“बहुत बड़ा है इनका लु... लंड... (थोड़ी हिचकिचाहट के साथ)... मोटा... इनकी हाथ की कलाई जितना... और थोड़ा अजीब भी...”
मैंने नेहा को देखा और पूछा,
“अजीब?”
नेहा ने उस आदमी की तरफ देखकर बोला,
“हाँ... अजीब...”
बेकार आदमी मुस्कुराते हुए बोला,
“बता ना रंडी... क्या अजीब...”
नेहा ने फिर से कहा,
“ये... पूरा गोल नहीं लग रहा... ओवल साइज़ है।”
वो आदमी हँसा।
फिर मुझे समझाने के लिए बोला,
“बचपन से ही मेरा ऐसा है।
कोई भी देखता है... ऐसे ही अचंभित होता है।”
मैंने पूछा,
“ओवल मतलब?”
नेहा सोच रही थी कि कैसे समझाए, मगर उस आदमी ने खुद कहा,
“जैसे गन्ना कैसे हो जाता है एक बार रस निकालने के बाद... वैसा।”
उसके एग्ज़ाम्पल भी गरीबों वाले थे।
नेहा ने उस आदमी को इशारा किया — थोड़ा चुप होने के लिए।
सामने से वेटर आता दिख रहा था।
वेटर भी अब हमें थोड़ा सशंकित नज़रों से देख रहा था।
एक हॉट मॉडल टाइप की लड़की, शादीशुदा, जो थोड़ी देर पहले मेरे साथ आई थी — अब वो किसी ऐसे के साथ बैठी है जो शायद होटल मेन्यू के प्राइस देख लेता तो अंदर आने की हिम्मत भी न करता।
वेटर ने सर्व किया,
“लीजिए सर, आपकी रम।”
और वो जाने लगा।
वो थोड़ी दूर ही गया होगा कि उस आदमी ने ग्लास उठाया... और एक घूँट में 60 ML बिना पानी, बिना सोडा के अंदर कर लिया।
हम दोनों उसे देख रहे थे।
ग्लास टेबल पर रखा।
फिर नेहा को देखा।
और झुक गया।
अचानक हमला।
उसके होंठ नेहा के होंठों पर।
नेहा की पीठ कुर्सी से टिक गई।
वो कुर्सी पर आधी लेटी-सी हो गई थी।
इस बार वो किस हल्के नहीं थे।
वो होंठों को चाट रहा था।
रम के पैक ने उसे हिम्मत दे दी थी।
एक हाथ नेहा की कमर पर।
दूसरा चूत पर।
इस पोजीशन में स्कर्ट ऊपर थी।
मैं अब देख सकता था — उसके हाथ चूत को रगड़ते हुए... लाल पैंटी के ऊपर से।
और दूसरा हाथ boobs तक चला गया।
मैं एक नज़र से ये सब देख रहा था और बार-बार दूसरी तरफ देख लेता था कि कहीं कोई आ न जाए।
ये बोल्ड मूव था।
नेहा भी उसे धकेल रही थी... लेकिन पूरी ताकत से नहीं।
मैं थोड़ी देर तक देखता रहा।
सीन बहुत हॉट था।
हल्का-सा आदमी पब्लिक प्लेस में मेरी बीवी पर चढ़ा हुआ।
नेहा उसे धकेलने की कोशिश कर रही थी, मगर किस में रिस्पॉन्ड भी कर रही थी।
उसकी बॉडी उसके हाथों में मूवमेंट पर काँप रही थी।
बूब्स ऊपर आते, नीचे जाते।
मगर बहुत रिस्क था।
मैंने उसकी बाजू से पकड़ा और अपनी तरफ खींचकर वापस कुर्सी पर बिठा दिया।
उसने एकदम से मुझे गुस्से से देखा।
मगर फिर शांत हो गया।
वो समझ गया था कि ये सब रिस्की है।
नेहा ने हल्की साँस ली।
उसके गाल अभी भी लाल थे।
उसने मुझे देखा — आँखों में शर्म, उत्तेजना और थोड़ी राहत का मिश्रण था।
धर-उधर देखकर उस आदमी ने नेहा का हाथ वापस पकड़ लिया और अपने लंड पर रख दिया।
उसे पता था कि अब वेटर को टाइम लगेगा और दूर से टेबल के नीचे वाली एक्टिविटी दिखेगी नहीं।
वो नेहा के कान के पास मुंह ले जाकर धीरे से बोला,
“देख... ये शेप और साइज़ जब अंदर जाएगा तो तुझे कितना मजा आएगा।”
उसे पता था टाइम कम है... लिमिटेड टाइम में जितना भी उससे मिल सकता था, वो ले रहा था।
नेहा का हाथ अब उसकी पैंट के ऊपर से उसके लंड को महसूस कर रहा था।
उसकी उँगलियाँ हल्के-हल्के दबाव डाल रही थीं।
नेहा उसका लंड ऊपर से नीचे तक छू रही थी... महसूस कर रही थी... उँगलियों से उसके शेप और मोटाई को समझ रही थी।
बेकार आदमी ने धीरे से कहा,
“बता ना रंडी... अपने पति को कितना बड़ा है मेरा लंड।”
नेहा ने उसकी तरफ देखा।
फिर अँगूठे और तर्जनी से बेस से टिप तक मापते हुए... जैसे कोई कैलकुलेशन कर रही हो... बहुत धीरे से बोली,
“आई थिंक 7... या शायद 7 एंड हाफ इंच...”
बेकार आदमी ने मुस्कुराते हुए पूछा,
“अच्छा... पहले देखा है ऐसा?”
नेहा ने शर्माते हुए मुस्कुराकर ना में सिर हिला दिया।
उस आदमी ने नेहा की तरफ देखकर पूछा,
“इस गांडू का कितना बड़ा है?”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
मैंने हल्का सा इशारा किया — बताने के लिए।
ये सवाल हजारों बार दिया था — पहले आयाान को, अब इस आदमी को।
मेल ईगो हमेशा इस बूस्ट से खुश होता है।
ये सुनना चाहते हैं कि इस चूत को अब तक कितनी गहराई से नापा गया है।
बताना चाहते हैं — मेरी बीवी के उन कोनों में जा सकते हैं जहाँ अभी तक पति नहीं गया।
हा ने उसका लंड सहलाते हुए, बहुत धीरे से जवाब दिया,
“4.5 इंच...”
बेकार आदमी हल्का सा हँसा और बोला,
“नुन्नू बोलते हैं उससे... मेरा मोटने के टाइम भी इससे बड़ा होता है।”
उसके हाथ सीधे नेहा के निप्पल्स पर गए।
चारों तरफ देखकर, जब उसे लगा कि कोई नहीं देख रहा, तो उसने नेहा के निप्पल को जोर से पिंच कर दिया।
“आआह्ह्ह...”
नेहा के मुँह से एक छोटी-सी चीख निकल गई।
उसका शरीर एक झटके से काँप गया।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखकर, नशे में भारी आवाज़ में बुदबुदाया,
“क्या आदमी है तेरा पति भेनचोद... तू इसके सामने मेरा लंड टटोल रही है और इसे फर्क नहीं पड़ता...”
फिर उसने नेहा की तरफ झुककर, और भी धीमी लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा,
“किस तरह का आदमी है तू मादरचोद...
गुस्सा क्यों नहीं हो रहा?
मेरे साथ लड़ाई क्यों नहीं कर रहा?
कैसा आदमी है ये?”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में शर्म, उत्तेजना और थोड़ी सी हैरानी थी।
नेहा ने थोड़ी हिम्मत जुटाकर, धीरे लेकिन साफ़ आवाज़ में कहा,
“वेल... मैंने हमेशा से ये फैंटसी की थी कि किसी अनजान आदमी के साथ सेक्स करूँ... किसी ऐसे के साथ जिसका लंड बड़ा हो... बस ये महसूस करने के लिए कि ऐसा कैसा लगता है।”
उसकी आवाज़ में शर्म थी, लेकिन साथ में एक साफ़ उत्तेजना भी थी।
वो जानती थी कि वो क्या सुनना चाहता है।
"तुम्हे तो बड़ा प्राउड फील हो रहा होना ना की में अपने पति के सामने तुम्हारा लुंड सहला रही हु
मेरा पति मेरा कुकॉल्ड है।
वो जानता है कि तुम वो हो जो मैं चाहती हूँ।
वो सिर्फ मेरी खुशी और मजा चाहता है।
मैं किसी भी मर्द के साथ सेक्स कर सकती हूँ।
वो मुझे वफादार रहेगा।
मैं उसकी इकलौती औरत हूँ...
और हमेशा रहूँगी।”
उसने ये सब एक साँस में कह दिया।
लंड को सहलाते-सहलाते।
हमारे बीच की वो अनकही बातें भी बता दीं जो हमने कभी किसी से नहीं कही थीं।
नेहा अब नशे में थी।
वो उस आदमी को सब बता रही थी।
उसे उत्तेजना दे रही थी।
मुझे नहीं लगता कि उसे “कुकॉल्ड” का मतलब भी ठीक से पता होगा।
मगर ये उसके लिए नई दुनिया ज़रूर थी।
बेकार आदमी ने पूछा,
“क्या वो गुस्सा नहीं होता? या जलन नहीं होती?”
नेहा ने हल्के से मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“वो गुस्सा नहीं होता... लेकिन जलन ज़रूर होती है।
जब वो देखता है कि मैं किसी और मर्द के साथ इस तरह हूँ... तो उसके मन में बहुत सारी चिंताएँ आती हैं।
इतनी ज़्यादा कि गिनती नहीं हो सकती।
मगर मैंने उसे अच्छे से ट्रेन कर रखा है।”
नेहा ये सब बोल रही थी जैसे उसने पूरा डायलॉग रटा हुआ हो।
मुझे याद आ गया — आयाान चैट पर अक्सर यही कहता था कि “तुम्हारे पति को ट्रेनिंग देनी होगी।”
बेकार आदमी ने पूछा,
“कैसे ट्रेन करते हो एक आदमी को... कि वो अपनी बीवी को किसी और से चुदवाने दे?”
नेहा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया,
“वो तुम्हें धीरे-धीरे पता चलेगा... अभी तो बस पहली मुलाकात है।”
उस आदमी ने तुरंत पूछा,
“तो क्या हम दोबारा मिलेंगे?”
नेहा ने आँख मारते हुए कहा,
“मैं तुम्हें चैट पर बताऊँगी... रात में।”
बेकार आदमी ने फिर पूछा,
“क्या सच में ये चूतिया वो करेगा जो तुम कहोगी?”
नेहा ने मेरी तरफ देखा।
उसने मेरी आँखों में देखा।
उस आदमी के जवाब का इंतज़ार भी नहीं किया।
उसने धीरे से कहा,
“बेबी... क्या तुम फील कराना चाहोगे... इस बेकार आदमी के लंड को?”
मैं चौंक गया।
हमने सब डिस्कस किया था...
मगर ये नहीं।
ये मेरे लिए भी आउट ऑफ कोर्स था।
टेबल पर दोनों मर्द शॉक में थे।
नेहा ने कुछ ऐसा कह दिया था कि हम दोनों एक पल के लिए सन्न रह गए।
नेहा मुस्कुराई।
उसका हाथ अभी भी उस आदमी के लंड पर था।
उसने धीरे से कहा,
“आओ ना... तुम्हें अच्छा फील होगा।”
मुझे कई साल हो गए थे किसी का लंड फील किए हुए।
मैंने काँपते हाथों से आगे बढ़ाया।
आधे रास्ते में ही नेहा ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
और जैसे पहले उस आदमी ने नेहा को फील करवाया था, वैसे ही नेहा अब मुझे उसका लंड फील करवाने लगी।
उस आदमी के मुँह से “आह्ह” निकल गई।
मैं पहली बार लंड छू रहा था... नेहा के साथ।
उसने फील किया होगा कि एक पति और पत्नी... दोनों मिलकर उसका लंड फील कर रहे थे।
मुझे भी थोड़ा अच्छा लग रहा था।
पहली बार ऐसा लग रहा था कि हम एक टीम की तरह काम कर रहे हैं।
अलग किस्म का बॉन्डिंग।
दोनों हाथ एक आदमी को प्लेजर दे रहे थे।
और दोनों हाथ नहीं हटा रहे थे।
हम खो गए थे।
हमारा खुमार उतरा जब चिट-चिट करती आवाज़ और धोने के साथ हमारा खाना आ गया।
तुरंत दोनों ने हाथ हटा लिया।
वेटर ने सर्व किया और बोला,
“सर, गेस्ट आने लग गए हैं... प्लीज़ अगर आप ये सब जल्दी करें तो...”
ये सब का मतलब खाने से था या किसी और से... मुझे समझ नहीं आया।
उसने साफ कहा था।
1 मिनट में ही कुछ बच्चे पूरे रूम में भागने लगे।
प्राइवेसी खत्म हो गई थी।
भीड़ बढ़ रही थी।
हम जल्दी-जल्दी खाना खाने लगे।
एक-दो बार मैंने देखा — वो आदमी नेहा की जाँघों को अप्रोच कर रहा था।
मगर नेहा ने हाथ झटक दिया।
ये सच में इनकार वाला झटका था।
थोड़ी देर में हम निकलने लगे।
लिफ्ट में एंटर हुए।
उस आदमी की खुशी को मैंने एक झटके में कम कर दिया — लिफ्ट में CCTV कैमरा दिखाकर।
“सोचना भी मत।”
नेहा ने पूछा,
“तुम्हारी गाड़ी कहाँ है?”
उसने इशारा किया — बाहर है।
हमारी बेसमेंट में।
पुणे की बारिश बिन मौसम बरस रही थी।
उस आदमी ने जाने से पहले आखिरी चांस लिया...
नेहा की गांड को हल्के से दबाकर बोला,
“तू पक्का मिलेगी ना दोबारा?”
नेहा ने “हम्म” में जवाब दिया।
और हम अलग हो गए।
हम अपनी कार में बैठे।
बारिश हो रही थी।
अभी हम दोनों चुप थे।
दोनों के हाथ में उस आदमी के लंड की गर्माहट अभी तक थी।
मैं ड्राइव करते हुए आगे बढ़ा।
हम रोड पर थे।
बारिश।
हमने एक बस स्टॉप क्रॉस किया।
नेहा ने अचानक कहा,
“सैम... वो आदमी... वो वहाँ खड़ा था... बस स्टॉप पर... बारिश में।”
हम आगे निकल चुके थे।
मगर मैंने गाड़ी साइड में लगा दी।
“शायद वो बस से ही आया होगा... और बस का इंतज़ार कर रहा होगा।”
मैंने कहा।
नेहा ने दाँतों में उँगली दबाकर कहा,
“क्या हम उसे घर तक छोड़ सकते हैं?”
मैंने कुछ सोचा।
“तुम्हें पता है ना... एक बार वो कार में आ गया तो रोक पाना मुश्किल होगा...
मगर मैं ये फैसला तुम पर छोड़ता हूँ।
तुम चाहो तो मैं गाड़ी घुमा सकता हूँ।”
बोलते हुए मैं नेहा को देख रहा था।
नेहा कुछ सोच रही थी।
और मैं सोच रहा था कि नेहा का एडवेंचर से मन नहीं भरा।
मैं जवाब का इंतज़ार कर रहा था।


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