12-05-2026, 03:28 PM
गीता डरी हुई आवाज़ में बोली, “मैंने पूरा ध्यान रखा था बाबाजी, पर हो सकता है कुछ छुट गया हो......बाबा… अब क्या होगा?”
“चिंता मत करो। मैं तुम्हारे लिए यहाँ हूँ। बस यही तो मेरा काम है। रजनी को कमरे में ले जाओ, उसे लिटा दो, और दरवाज़ा बंद कर दो। लेकिन ध्यान रहे उसे कोई तकलीफ़ न हो, क्यों की मैंने अभी उसकी चूत से सब कुछ निकाल दिया है।”
मैंने रजनी की तरफ़ देखा और कहा, “बेटी, अंदर जाकर थोड़ी देर आराम करो, बेटा, अपनी टाँगें चौड़ी रखो ताकि गुरुजी को कोई तकलीफ़ न हो। वह तुम्हारे साथ वहीं रहेंगे और फिर मेरे अंदर घुस जाएँगे। गुरूजी का स्मरण करते रहना। और चूत को छूना नहीं।”
रजनी: “हाँ बाबाजी, जैसा आप कहें...” मैत्री की पेशकश।
गीता: “चलो बेटी, मैं तुम्हें उठने में मदद करती हूँ, तुम्हें तकलीफ़ हो रही होगी, ऐसा पहली बार हुआ है। हाँ बेटी, डरने की कोई ज़रूरत नहीं है, गुरुजी ने तुम्हारी शील भंग की है और वह एक आत्मा हैं, इसलिए तुम और तुम्हारी शील सुरक्षित हैं। और हाँ, बाबाजी ने खुद ही तो कहा है की तुम अक्षत हो यानी की तुम्हारी शील ऐसी ही है। बस अब तेरी चूत में परदी नहीं है वह गुरूजी ने ले ली है। जैसा बाबा कहते हैं वैसा करो, मेरे बेटे। थोड़ा अंदर आराम करो और दोनों टाँगें चौड़ी करके सीधे लेट जाओ। हो सकता है गुरुजी फिर से तुम्हारे अंदर घुसना चाहते हों, इसलिए डरो मत, मेरे बेटे। गुरूजी का लिंग तो अब हमारे लिए और हमारे जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण हो गया है। वह सिर्फ एक आत्मा है बेटी, इसलिए पैर फैलाके गुरूजी का स्मरण करते रहना। और अगर गुरूजी अपने औजार को डालते है तो रोकना मत बेटी। जितनी सुजन तेरी इस पारी पर है वह सब गुरूजी ही तो मिटायेंगे। तुम्हे थोडा आराम की जरुरत है बेटी।”
गीता तुरंत रजनी को कमरे में ले गई, उसे लिटाया, उसने सुनिश्चित किया की बेटी ने अपने दोनों पैरो को सही तरीके से चुदने की मुद्रा में रखे है। उसको पैरो को फ़ैलाने में मदद करते वक़्त उसने देखा की चूत कही दिख ही नहीं रही थी चारो तरफ सुजन ही सुजन थी। उसने सोचा गुरूजी का लंड काफी बड़ा और तगादा लगता है। तभी तो बेटी की चूत इतनी सूजी पड़ी है। उसने बाहर से दरवाज़ा बंद किया और मेरे पास वापस आ गई।
मैंने गीता को एक पवित्र लाल धागा दिया और कहा: “ इसे दरवाजे पर बाँध दो ताकि कोई पापी आत्मा उस तरफ और अन्दर ना जा सके।“
गीता ने आज्ञा मानकर कलावा बाँध दिया और वापस मेरे पास आकर बैठ गई।
मैं मंत्र पढ़ने लगा और बोला, “गीता… अब तुम मेरे करीब आओ।”
गीता मेरे पास सरक आई।
अब मैंने उसे कहा: “देखो गीता अब गुरूजी मेरे अन्दर आ सकते है तो जब तक वे मुझ में है मुझे कुछ भी याद नहीं रहेगा इस लिए जो भी गुरूजी आज्ञा दे उसी पूरी तरह निसंकोच करते रहना। ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं है। समज गई तुम?”
जी बाबाजी, गुरूजी तो महान है। उनके प्रताप से मेरी बेटी स्वस्थ हो गई। उसके पिताजी यह जान के बहोत खुश होंगे। और मैं समज गई हूँ की आप में गुरूजी आयेंगे तो मैं उनकी सब आज्ञा का सही तरीके से और सम्पूर्ण पूरा करुँगी। आप निश्चिन्त रहिये। मैं अब कोई जोखिम लेना नहीं चाहती। आप गुरूजी को अपने में प्रवेश करवाओ बाबाजी।“
मैंने सिंदूर लिया और उसे आगे बढ़ाकर इशारा किया। गीता ने खुद अपनी साड़ी का पल्लू हटा दिया। उसके भरे-भरे, दूधिया 36 साइज के स्तन मेरे सामने पूरी तरह नंगे हो गए। मैंने दोनों स्तनों के बीच और चूचियों पर सिंदूर का टीका लगाया। रचयिता मैत्री।
गीता भांग के नशे में कसमसा रही थी, लेकिन कुछ भी विरोध नहीं कर रही थी। रजनी के ठीक होने के बाद उसे मुझ पर पूरा यकीन हो चुका था।
मैंने फायदा उठाते हुए कहा, “साड़ी उतार दो।”
*******************************
आज के लिए बस यही तक दोस्तों.
एक नए अध्याय के साथ फिर मिलेंगे।
मैत्री की तरफ से.
जय भारत।।
“चिंता मत करो। मैं तुम्हारे लिए यहाँ हूँ। बस यही तो मेरा काम है। रजनी को कमरे में ले जाओ, उसे लिटा दो, और दरवाज़ा बंद कर दो। लेकिन ध्यान रहे उसे कोई तकलीफ़ न हो, क्यों की मैंने अभी उसकी चूत से सब कुछ निकाल दिया है।”
मैंने रजनी की तरफ़ देखा और कहा, “बेटी, अंदर जाकर थोड़ी देर आराम करो, बेटा, अपनी टाँगें चौड़ी रखो ताकि गुरुजी को कोई तकलीफ़ न हो। वह तुम्हारे साथ वहीं रहेंगे और फिर मेरे अंदर घुस जाएँगे। गुरूजी का स्मरण करते रहना। और चूत को छूना नहीं।”
रजनी: “हाँ बाबाजी, जैसा आप कहें...” मैत्री की पेशकश।
गीता: “चलो बेटी, मैं तुम्हें उठने में मदद करती हूँ, तुम्हें तकलीफ़ हो रही होगी, ऐसा पहली बार हुआ है। हाँ बेटी, डरने की कोई ज़रूरत नहीं है, गुरुजी ने तुम्हारी शील भंग की है और वह एक आत्मा हैं, इसलिए तुम और तुम्हारी शील सुरक्षित हैं। और हाँ, बाबाजी ने खुद ही तो कहा है की तुम अक्षत हो यानी की तुम्हारी शील ऐसी ही है। बस अब तेरी चूत में परदी नहीं है वह गुरूजी ने ले ली है। जैसा बाबा कहते हैं वैसा करो, मेरे बेटे। थोड़ा अंदर आराम करो और दोनों टाँगें चौड़ी करके सीधे लेट जाओ। हो सकता है गुरुजी फिर से तुम्हारे अंदर घुसना चाहते हों, इसलिए डरो मत, मेरे बेटे। गुरूजी का लिंग तो अब हमारे लिए और हमारे जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण हो गया है। वह सिर्फ एक आत्मा है बेटी, इसलिए पैर फैलाके गुरूजी का स्मरण करते रहना। और अगर गुरूजी अपने औजार को डालते है तो रोकना मत बेटी। जितनी सुजन तेरी इस पारी पर है वह सब गुरूजी ही तो मिटायेंगे। तुम्हे थोडा आराम की जरुरत है बेटी।”
गीता तुरंत रजनी को कमरे में ले गई, उसे लिटाया, उसने सुनिश्चित किया की बेटी ने अपने दोनों पैरो को सही तरीके से चुदने की मुद्रा में रखे है। उसको पैरो को फ़ैलाने में मदद करते वक़्त उसने देखा की चूत कही दिख ही नहीं रही थी चारो तरफ सुजन ही सुजन थी। उसने सोचा गुरूजी का लंड काफी बड़ा और तगादा लगता है। तभी तो बेटी की चूत इतनी सूजी पड़ी है। उसने बाहर से दरवाज़ा बंद किया और मेरे पास वापस आ गई।
मैंने गीता को एक पवित्र लाल धागा दिया और कहा: “ इसे दरवाजे पर बाँध दो ताकि कोई पापी आत्मा उस तरफ और अन्दर ना जा सके।“
गीता ने आज्ञा मानकर कलावा बाँध दिया और वापस मेरे पास आकर बैठ गई।
मैं मंत्र पढ़ने लगा और बोला, “गीता… अब तुम मेरे करीब आओ।”
गीता मेरे पास सरक आई।
अब मैंने उसे कहा: “देखो गीता अब गुरूजी मेरे अन्दर आ सकते है तो जब तक वे मुझ में है मुझे कुछ भी याद नहीं रहेगा इस लिए जो भी गुरूजी आज्ञा दे उसी पूरी तरह निसंकोच करते रहना। ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं है। समज गई तुम?”
जी बाबाजी, गुरूजी तो महान है। उनके प्रताप से मेरी बेटी स्वस्थ हो गई। उसके पिताजी यह जान के बहोत खुश होंगे। और मैं समज गई हूँ की आप में गुरूजी आयेंगे तो मैं उनकी सब आज्ञा का सही तरीके से और सम्पूर्ण पूरा करुँगी। आप निश्चिन्त रहिये। मैं अब कोई जोखिम लेना नहीं चाहती। आप गुरूजी को अपने में प्रवेश करवाओ बाबाजी।“
मैंने सिंदूर लिया और उसे आगे बढ़ाकर इशारा किया। गीता ने खुद अपनी साड़ी का पल्लू हटा दिया। उसके भरे-भरे, दूधिया 36 साइज के स्तन मेरे सामने पूरी तरह नंगे हो गए। मैंने दोनों स्तनों के बीच और चूचियों पर सिंदूर का टीका लगाया। रचयिता मैत्री।
गीता भांग के नशे में कसमसा रही थी, लेकिन कुछ भी विरोध नहीं कर रही थी। रजनी के ठीक होने के बाद उसे मुझ पर पूरा यकीन हो चुका था।
मैंने फायदा उठाते हुए कहा, “साड़ी उतार दो।”
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आज के लिए बस यही तक दोस्तों.
एक नए अध्याय के साथ फिर मिलेंगे।
मैत्री की तरफ से.
जय भारत।।



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