11-05-2026, 11:32 AM
मैं वॉशरूम के बाहर खड़ा था।
दरवाज़े के शीशे में अपना चेहरा देख रहा था।
दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
मैं सोच रहा था — जब मैं वापस आऊँगा तो क्या होगा?
क्या वो अभी भी बस बातें कर रहे होंगे?
या नेहा की ड्रेस का कोई बटन खुल गया होगा?
या उसका हाथ नेहा की जाँघ पर होगा?
या नेहा खुद उसकी तरफ झुककर कुछ फुसफुसा रही होगी?
मैंने जानबूझकर वॉशरूम में थोड़ा टाइम लगाया।
दरवाज़े के शीशे में अपना चेहरा देखा।
दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
हाथ हल्के से काँप रहे थे।
मुझे पता नहीं था कि मैं वापस जाकर क्या देखने वाला हूँ।
क्या बेकार आदमी ने मेरे वॉशरूम जाने के इशारे को समझ लिया होगा?
क्या नेहा उसे कुछ और करीब आने देगी?
क्या वो सिर्फ बातें कर रहे होंगे... या उसका हाथ अब नेहा की जाँघ पर होगा?
मैंने सोचा —
कम से कम नेहा को इतना फ्री टाइम तो देना चाहिए।
उसने उसके साथ घंटों बात की थी।
चाहे वो आदमी कितना भी साधारण, पतला और harmless क्यों न लग रहा हो...
अगर वो नेहा को थोड़ा क़रीब से देखना चाहता है...
शायद छूना भी चाहता हो... तो शायद आज वो मौका मिल जाए।
मैंने एक गहरी साँस ली और वॉशरूम का दरवाज़ा खोला।
मैं धीरे-धीरे टेबल की तरफ बढ़ा।
वॉशरूम से निकलते ही मुझे नेहा की हल्की-हल्की खिलखिलाती हँसी सुनाई दी।
बहुत नरम, बहुत हल्की।
शायद उस आदमी ने कोई बात कही थी, या नेहा बस दया में हँस रही थी।
डिम लाइट की वजह से मुझे पहले अच्छे से देखना पड़ा।
जब मैं पास पहुँचा तो साफ़ दिखा —
मेरा इशारा वो समझ गए थे।
बेकार आदमी अब वहीं बैठा था जहाँ मैं पहले बैठा हुआ था — नेहा के बिल्कुल पास।
कुर्सियाँ थोड़ी करीब हो गई थीं।
उसकी चेक शर्ट का कंधा नेहा के स्लीवलेस ड्रेस वाले कंधे से हल्का-हल्का टच हो रहा था।
मैं आगे बढ़कर उनके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया।
नेहा अभी भी किसी बात पर मुस्कुरा रही थी।
उसने मेरी तरफ देखा और हल्के से बोली,
“आ गया मूत कर ? बहुत टाइम लगा।”
मैंने उसकी तरफ देखा और हल्का सा मुस्कुराया।
“मैं तेरी जगह बैठ गया था... तुझे बैठना है क्या यहाँ?”
नेहा ने तुरंत सिर हिलाया,
“नहीं... ठीक है। तुम बैठो।”
उसके ग्लास खाली थे।
मैंने वेटर की तरफ इशारा किया और दोबारा बीयर का ऑर्डर रिपीट कर दिया।
बेकार आदमी चुपचाप बैठा था।
उसकी आँखें नेहा पर टिकी हुई थीं।
फिर से टेबल पर शांति छा गई।
पहले तो बातें चल रही थीं, लेकिन अब अचानक सब कुछ रुक सा गया।
मैंने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा,
“अरे शांत क्यों हो गए... बात करो... या मैं वापस जा दूँ?”
पहली बार मुझे लगा कि मैं थर्ड पर्सन हूँ।
एक नए मिले जोड़े के बीच में... वो जिसके सामने बात करने में उन्हें असहज हो रहा है।
अजीब सी फीलिंग थी।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखा और धीरे से बोला,
“बोलो... जो तुम बोल रही थी।”
नेहा ने हल्का सा सिर हिलाया।
उसकी उँगलियाँ अभी भी ग्लास को घुमा रही थीं।
वो मेरी तरफ एक नज़र डालकर फिर उस आदमी की तरफ मुड़ी और बात जारी रखने की कोशिश करने लगी।
नेहा ने बहुत शर्माते हुए, धीरे से और हिचकिचाते हुए बोला,
“मैं इनसे ये बात कर रही थी कि... जब हम चैट पर बातें करते थे... तो आपसे ये बोलते थे कि... मुझे गोद में उठाकर... you know... वो करेंगे...”
नेहा “चोदना” बोलने में शर्मा रही थी।
उसकी बातों में अचानक उस आदमी के लिए एक रेस्पेक्ट की भावना आ गई थी — शायद उसकी उम्र की वजह से।
बेकार आदमी ने उसका वाक्य पूरा किया। अब वो कम शर्मा रहा था।
दारू आदमी को थोड़ा साहसी तो बना ही देती है।
वो बोला,
“हाँ... मैं चोद सकता हूँ... तुझे गोद में उठाकर... बिना किसी सपोर्ट के।”
उसकी आवाज़ अब पहले से थोड़ी मोटी और कॉन्फिडेंट लग रही थी।
नेहा ने मेरी तरफ एक नज़र डाली।
उसके गाल हल्के लाल हो गए थे।
मैं चुपचाप बैठा दोनों को देख रहा था।
उसकी ये बात सुनकर मुझे भी हल्की-हल्की हँसी आ रही थी।
एक तो उसकी पतली, काँपती हुई आवाज़...
दूसरे, वो खुद इतना पतला-दुबला था कि लगता था कोई अच्छी-खासी वजन की चीज़ भी नहीं उठा सकता।
और वो मेरी 5'4" लंबी, लगभग 60 किलो की बीवी को गोद में उठाकर हवा में चोदने की बात कर रहा था।
मैंने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन होंठों पर हँसी आ ही गई।
नेहा ने भी मेरी तरफ देखा। उसके चेहरे पर शर्म के साथ हल्की मुस्कान थी। वो भी समझ रही थी कि ये कितना अनरियल लग रहा है।
बेकार आदमी ने हम दोनों को देखा और थोड़ा शर्माया। फिर बोला,
“क्या... हँस क्यों रहे हो?
मैं सच कह रहा हूँ... उठा लूँगा...”
अभी उसकी किसी भी बात पर हम बहस नहीं कर रहे थे।
मुझे लग रहा था कि आज के बाद हम कभी भी नहीं मिलेंगे।
ये बस एक जिंदगी के छोटे से हिस्से को एंड देना था।
हम एन्जॉय कर रहे थे।
धीरे-धीरे उस आदमी के हाथ नेहा के हाथों को छू रहे थे।
वो बोला,
“मैं सच में उठा सकता हूँ... 50 किलो की बोरी मैं रोज़ उठा लेता हूँ।”
म दोनों — सोफिस्टिकेटेड आई टी प्रोफेशनल — आधी सच्ची आधी झूठी हँसी दे रहे थे।
उसे थोड़ा महत्वपूर्ण दिखा रहे थे।
नेहा ने कहा,
“हाँ क्यों नहीं...”
उसने उसके शर्ट के ऊपर से ऊपरी आर्म के मसल फील करते हुए कहा।
वो हँसने लगा।
नेहा और उस आदमी के चेहरे अब काफी करीब थे।
दोनों एक-दूसरे के मुँह की हवा महसूस कर रहे थे।
फिर उसने अपना मुँह नेहा के कान के पास ले गया... और कुछ कहा।
नेहा थोड़ी सी हँसी।
मेरी तरफ देखा।
“सैम... थोड़ा आँखें बंद करो।”
मेरा दिल धड़क गया।
मुझे पता था क्या होने वाला है।
नेहा का एक हाथ अभी भी उसकी बाजू पर था।
एक हाथ टेबल पर।
उस आदमी का एक हाथ नेहा के उसी हाथ को पकड़े हुए था।
वो उसकी पतली नाजुक उँगलियाँ छू रहा था।
दूसरा हाथ टेबल के नीचे... मुझे पता नहीं कहाँ था।
मैंने आस-पास देखा।
नेहा के उस हाथ को थामा जो टेबल पर था।
धीरे से बोला,
“बे केयरफुल।”
हमने ये सिनेरियो पहले डिस्कस किया था।
हमें लगा था ये हो सकता है... मगर तब हमने बेकार आदमी को कुछ और ही इमेजिन किया था।
वो आदमी शायद व्हिस्पर कर रहा था।
सिर्फ उसे पता था उसने नेहा के कान में क्या कहा।
मैंने बस अपनी आँखें बंद करने का नाटक किया।
वो दोनों भी ये जानते थे।
नेहा ने एक बार चारों तरफ देखा...
शुरू करने की कि कोई देख तो नहीं रहा।
फिर उसने चेहरा उस आदमी की तरफ घुमाया।
पिंक लिपस्टिक वाले उसके होंठ उसके सामने थे।
वो उसके चेहरे से ज्यादा दूर नहीं थे।
वो झुका।
उसके खुरदुरे होंठ नेहा के होंठों पर...
वो हल्के-हल्के किस कर रहा था।
स्मूच जैसा नहीं... बस किस।
मुझे एक बार को लगा — उसे अच्छे से किस करना भी नहीं आता।
किस खत्म हुआ तो नेहा ने धीरे से अपना चेहरा पीछे खींच लिया।
उसके गाल अब और भी लाल हो गए थे।
होंठ थोड़े से खुले हुए थे, जैसे अभी भी उसकी साँस ठीक से नहीं आई हो।
उसकी आँखें आधी बंद थीं।
मैं देख रहा था।
नेहा की साँसें थोड़ी तेज़ हो गई थीं।
उसके चेहरे पर एक अजीब सा मिश्रण था — शर्म, उत्तेजना, और थोड़ी सी हैरानी।
जैसे वो खुद को समझ नहीं पा रही हो कि उसने अभी क्या किया।
बेकार आदमी भी चुप था।
उसकी पतली गर्दन हल्की-हल्की काँप रही थी।
उसकी आँखें नेहा के होंठों पर टिकी हुई थीं।
लग रहा था जैसे वो अभी भी उस किस को महसूस कर रहा हो।
टेबल पर अचानक बहुत शांति हो गई।
नेहा ने धीरे से मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में एक सवाल था... और साथ ही एक छोटी सी मुस्कान।
मुझे लगा —
ये किस छोटा था, लेकिन नेहा के अंदर कुछ हिल गया था।
शायद वो खुद भी समझ नहीं पा रही थी कि उसे अच्छा लगा या सिर्फ नया लगा।
नेहा का हाथ मेरे हाथ में था, जब वो आदमी उसे किस कर रहा था।
मैंने महसूस किया कि नेहा की बॉडी हल्की-हल्की काँप रही थी।
जब उसके खुरदुरे होंठ नेहा के नरम होंठों को छू रहे थे, तब नेहा की उँगलियाँ मेरे हाथ को और कसकर पकड़ रही थीं।
जब वो हटा, तो मेरा पूरा फोकस नेहा के चेहरे पर था।
उसकी आँखें बंद थीं।
होंठों पर हल्की-सी मुस्कान।
5 सेकंड तक वो वैसी ही रही... जैसे अभी भी उस kiss को महसूस कर रही हो।
फिर उसने आँखें खोलीं।
सबसे पहले चारों तरफ देखा... कहीं कोई देख तो नहीं रहा।
फिर मेरी तरफ देखा।
चेहरे पर भाव छुपाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी आँखों में excitement साफ़ झलक रहा था।
गाल हल्के लाल, साँसें थोड़ी तेज़।
नेहा ने मेरे हाथ को और कसकर दबाया।
बेकार आदमी भी चुप था। उसकी नज़रें अभी भी नेहा के होंठों पर टिकी हुई थीं।
बेकार आदमी और नेहा का एक-एक हाथ टेबल के नीचे था।
मुझे कुछ नहीं दिख रहा था, लेकिन नेहा के चेहरे से साफ़ लग रहा था कि कुछ चल रहा है।
उसकी साँसें थोड़ी-थोड़ी तेज़ हो रही थीं।
कभी-कभी वो हल्के से काँप जाती और तुरंत खुद को संभाल लेती।
मैंने अपनी घड़ी की तरफ देखा।
ये एक इशारा था नेहा के लिए — कि क्या हमें अब चलना चाहिए?
नेहा ने तुरंत मेरे हाथ को हल्का सा दबाया।
यानी — “अभी नहीं... मुझे और थोड़ा टाइम दो।”
मैंने हल्का मुस्कुराकर सिर हिला दिया।
वो बार-बार नीचे देख रही थी, फिर मेरी तरफ, फिर बेकार आदमी की तरफ।
मुझे अजीब सा लग रहा था।
कार आदमी अब और करीब आ चुका था।
उसकी कोहनी नेहा के बूब्स को हल्के-हल्के छू रही थी।
वो बार-बार इधर-उधर से टच कर रहा था, जैसे जानबूझकर छू रहा हो।
नेहा कुछ नहीं बोल रही थी।
पिछले 15 मिनट से टेबल पर पूरी तरह सन्नाटा छाया हुआ था।
कोई कुछ बोल नहीं रहा था।
मैं टेबल के सामने बैठा था।
टेबल के नीचे क्या हो रहा था, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
नेहा मेरी शक्ल की तरफ देख रही थी।
उसकी आँखों में एक शरारती चमक थी।
वो जानती थी कि मैं क्या मिस कर रहा हूँ।
वो जानती थी कि मैं जानना चाहता हूँ।
आखिर ये हम दोनों का खेल था।
नेहा ने अचानक कहा,
“इस चेयर पर आ जाओ।”
अभी तक मैं उनके सामने बैठा हुआ था।
मैं अपनी कुर्सी से उठा और नेहा के इशारे से साइड वाली कुर्सी पर जा बैठा।
अब वो आदमी नेहा के और करीब हो गया था।
फिर नेहा ने कुछ नहीं कहा।
उस आदमी ने अपना ग्लास उठाकर एक घूँट पिया और मुस्कुराया।
अब मुझे साफ़ दिख रहा था...
उसका हाथ नेहा की नंगी जाँघ पर था।
धीरे-धीरे ऊपर की तरफ सरक रहा था।
नेहा का एक हाथ उसकी जाँघ पर रखा हुआ था... जैसे उसे रोक भी रही हो और जाने भी दे रही हो।
मैं चुपचाप बैठा देख रहा था।
नेहा ने कल ही अपने लेग्स वैक्स करवाए थे।
उसकी गोरी टांगें डिम लाइट में भी हल्की-हल्की चमक रही थीं।
बेकार आदमी का हाथ धीरे-धीरे उन टांगों पर घूम रहा था।
वो बहुत हल्के-हल्के उन्हें सहला रहा था, जैसे कोई नाजुक चीज को छू रहा हो।
मैंने उसे देखते हुए गला साफ किया।
मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था।
नेहा ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा,
“ये ‘बेकार आदमी’ क्या नाम हुआ? क्या ये तुम्हारा असली नाम है?”
वो आदमी नेहा की तरफ देखकर बोला,
“नहीं... बस ये तो चैट वाली वेबसाइट ने कहा कि कोई नाम रखो... तो मैंने रख लिया।
वरना ऐसा नाम कौन रखता है...”
नेहा ने फिर पूछा,
“तुमने ये नाम क्यों चुना?”
उसने थोड़ी मायूसी के साथ जवाब दिया,
“क्योंकि मैं बेकार हूँ... मैं मानता हूँ।
न पैसा कमा पाया... न परिवार को कुछ दे पाया...
न कोई इज्जत... न कोई खासियत...
सिवाय एक चीज के।”
नेहा ने हल्का सा मुस्कुराते हुए पूछा,
“क्या चीज?”
बेकार आदमी की उँगलियाँ अब नेहा की अंदरूनी जाँघों पर सरक चुकी थीं। बस एक इंच और आगे बढ़तीं तो वो नेहा की पैंटी के किनारे तक पहुँच जातीं।
नेहा ने उसका हाथ पकड़ रखा था, लेकिन उसकी पकड़ ढीली थी।
उँगलियाँ उसकी कलाई पर थीं, फिर भी उसने हाथ को पीछे नहीं खींचा।
उसकी जाँघें भी थोड़ी और खुल गई थीं।
मुझे अभी भी समझ नहीं आ रहा था कि वो उसे रोक रही है या खुद को और खोल रही है।
नेहा की साँसें तेज़ थीं। वो मेरी तरफ देख रही थी, लेकिन उसकी नज़रें बार-बार बेकार आदमी की उँगलियों की तरफ जा रही थीं।
मेरे दिमाग में बस यही बात घूम रही थी —
इतना आसान है नेहा के साथ करना?
मेरे दिमाग में बार-बार यही बात घूम रही थी —
क्या ये सब इतना आसान है मेरी बीवी के साथ?
आधे घंटे पहले नेहा मुझे बार-बार इशारा कर रही थी — “चलो, निकलते हैं।”
फिर थोड़ी देर बाद उसका मूड बदल गया।
थोड़ी इमोशनल बातें हुईं, थोड़ी तारीफें हुईं...
और अब... उसने अपनी हल्की सी टांगें खोल दी हैं।
बेकार आदमी की उँगलियाँ अब नेहा की जाँघों के सबसे अंदरूनी हिस्से पर थीं।
नेहा की साँसें तेज़ हो चुकी थीं।
उसका एक हाथ अभी भी मेरे हाथ में था, लेकिन दबाव बहुत ज़्यादा था।
मैं चुपचाप देख रहा था।
जलन हो रही थी।
उत्तेजना भी हो रही थी।
और सबसे बड़ा सवाल —
क्या नेहा को भी ये सब इतना आसान लग रहा है?
क्या उससे लोग ऑफिस में भी वैसे ही पटा लेते होंगे?
क्या कोई कहता होगा “मेरी सगाई टूट गई”... “मेरा ब्रेकअप हो गया”...
जैसे मैं अपनी एक्स गर्लफ्रेंड के साथ करता था।
क्या पेपर सही नहीं हुआ... फिर किस... फिर ब्लोजॉब...
क्या उसने भी ऑफिस के वॉशरूम में किसी-किसी का चूसा होगा?
दूसरा हिस्सा... उत्तेजना से काँप रहा था।
कैसे वो ये सब करने दे रही है... एक अनजान के साथ?
जिसे वो बस दो महीने की चैट से जानती है।
उसके हाथ उसकी जाँघों के बीच में हैं... और वो रोक नहीं रही।
वो जगह... जो सिर्फ़ मेरा हक था... सिर्फ़ मेरे पति का अधिकार था..
मेरा दूसरा हिस्सा बार-बार यही बात दोहरा रहा था —
"अरे, नेहा जो कुछ भी कर रही है, वो तेरे लिए कर रही है।
तूने ही उसे ये सब करने के लिए उकसाया है।
वो जानती है कि तू ये देखना चाहता था।
ये सब तुझे शो देने के लिए कर रही है।"
फिर भी मेरी छाती में जलन का एक तेज़ दर्द उठ रहा था।
मैं खुद से पूछ रहा था —
अगर ये सब मेरी ही इच्छा थी, अगर नेहा मेरे लिए ही ये सब कर रही है...
तो फिर मुझे इतनी जलन क्यों हो रही है?
क्यों मेरा दिल इतना ज़ोर से धड़क रहा है?
क्यों मुझे लग रहा है कि मेरी बीवी किसी और के हाथों में जा रही है?
नेहा अब पूरी तरह उस बात में खो चुकी थी।
नेहा ने हल्की-सी, भरी हुई साँस में, बहुत इरोटिक अंदाज़ में उसकी तरफ देखते हुए पूछा,
“क्या खास है तुममें?”
उसकी आवाज़ में अब शर्म नहीं थी।
सिर्फ़ गहरी उत्तेजना थी।
बेकार आदमी ने धीरे से मुस्कुराया।
उस आदमी ने नेहा की आँखों में गहरे देखते हुए पूछा,
“क्या सच में जानना चाहती हो... मैं मुझमें क्या खास है?”
नेहा ने इस बार उसकी आँखों में देखकर, बिना शर्माए, सीधे जवाब दिया,
“हाँ... मैं जानना चाहती हूँ।”
उसकी आवाज़ में अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी।
साफ़, भरी हुई और थोड़ी सी नशे वाली।
उसने नेहा का हाथ अपने हाथों में ले लिया।
दूसरा हाथ... नेहा का एक हाथ अभी भी उसके एक हाथ के ऊपर था, जो उसकी जाँघों में बहुत ऊपर था। शायद नेहा की चूत की गर्मी महसूस कर रहा था, इस ठंडी एसी में भी।
उस आदमी ने खाकी रंग की ढीली पैंट पहनी हुई थी — जींस नहीं, पुरानी टाइप की पैंट, जैसी अंकल पहनते हैं। उसमें कोई तंबू नहीं बना हुआ था... लेकिन जब नेहा ने हाथ लगाया तो साफ़ महसूस हुआ कि उसका लंड दाईं तरफ लेटा हुआ है, बहुत मोटा और कड़ा।
लगभग आधी जाँघ तक फैला हुआ था।
नेहा ने हल्के से हाथ लगाया... दबाकर उसकी चौड़ाई फील की... पैंट के ऊपर से।
धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकाती हुई... वो देखना चाह रही थी कि वो कहाँ खत्म होता है।
मैं देख रहा था।
नेहा का मुँह खुला का खुला रह गया।
उसके चेहरे पर एक झटका सा आया।
उस आदमी के हाथ-पाँव बहुत पतले थे... लगता था उसका सारा खाना यहीं लग रहा था।
अब उसने नेहा का हाथ छोड़ दिया।
मगर नेहा ने हाथ नहीं हटाया।
वो अभी भी उसे छू रही थी... फील कर रही थी... आउटलाइन बनाकर मुझे दिखा रही थी।
उस आदमी ने कभी नेहा को, कभी मुझे देखा।
नेहा का पूरा फोकस वहाँ था, तो शायद उसने मौके का फायदा उठाया।
दूसरा हाथ और अंदर... पैंटी के ऊपर से चूत पर...
उसने दबाव दिया।
नेहा के मुँह से हल्की-सी “आह्ह...” निकल गई।
तभी हम दोनों होश में आए।
उधर से वेटर आता नज़र आया।
नेहा ने तुरंत हाथ हटाया और अपनी स्कर्ट नीचे की।
मगर उस आदमी ने हाथ नहीं हटाया।
वो अभी भी नेहा की जाँघ पर ही था।
वेटर पास आकर खड़ा हो गया।
वो टेबल के नीचे क्या हो रहा है, ये नहीं देख सकता था।
उसके कुछ बोलने से पहले ही बेकार आदमी ने सामान्य चिटचैट की तरह कहा,
“मैंने कहा था ना कि मैं बस एक चीज़ में बेकार नहीं हूँ।”
वेटर को कुछ अंदाज़ा भी नहीं था कि वो मेरी बीवी को अपने लंड के शेप और साइज़ की बात कर रहा है।
नेहा बस “हाँ... हाँ...” बोल पाई।
वेटर के वहाँ खड़े होने की वजह से या उसने कुछ किया, पता नहीं... लेकिन नेहा की स्कर्ट के नीचे उसका हाथ अभी भी था।
वेटर ने कहा,
“सर, एक प्राइवेट पार्टी की वजह से आधे घंटे में गेस्ट आना शुरू होंगे... तो क्या मैं आपका बिल ले आऊँ? या कोई लास्ट ऑर्डर है?”
नेहा ने मेरी तरफ बिना देखे ही कहा,
“3 बीयर प्लीज़... और एक सिज़लर।”
मतलब वो थोड़ा और टाइम चाहती थी।
उसे पता था कि सिज़लर एक ऐसी डिश है जिसे बनाने में टाइम लगता है।
ये थोड़ी देर और वेटर को दूर रख सकता है।
दरवाज़े के शीशे में अपना चेहरा देख रहा था।
दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
मैं सोच रहा था — जब मैं वापस आऊँगा तो क्या होगा?
क्या वो अभी भी बस बातें कर रहे होंगे?
या नेहा की ड्रेस का कोई बटन खुल गया होगा?
या उसका हाथ नेहा की जाँघ पर होगा?
या नेहा खुद उसकी तरफ झुककर कुछ फुसफुसा रही होगी?
मैंने जानबूझकर वॉशरूम में थोड़ा टाइम लगाया।
दरवाज़े के शीशे में अपना चेहरा देखा।
दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
हाथ हल्के से काँप रहे थे।
मुझे पता नहीं था कि मैं वापस जाकर क्या देखने वाला हूँ।
क्या बेकार आदमी ने मेरे वॉशरूम जाने के इशारे को समझ लिया होगा?
क्या नेहा उसे कुछ और करीब आने देगी?
क्या वो सिर्फ बातें कर रहे होंगे... या उसका हाथ अब नेहा की जाँघ पर होगा?
मैंने सोचा —
कम से कम नेहा को इतना फ्री टाइम तो देना चाहिए।
उसने उसके साथ घंटों बात की थी।
चाहे वो आदमी कितना भी साधारण, पतला और harmless क्यों न लग रहा हो...
अगर वो नेहा को थोड़ा क़रीब से देखना चाहता है...
शायद छूना भी चाहता हो... तो शायद आज वो मौका मिल जाए।
मैंने एक गहरी साँस ली और वॉशरूम का दरवाज़ा खोला।
मैं धीरे-धीरे टेबल की तरफ बढ़ा।
वॉशरूम से निकलते ही मुझे नेहा की हल्की-हल्की खिलखिलाती हँसी सुनाई दी।
बहुत नरम, बहुत हल्की।
शायद उस आदमी ने कोई बात कही थी, या नेहा बस दया में हँस रही थी।
डिम लाइट की वजह से मुझे पहले अच्छे से देखना पड़ा।
जब मैं पास पहुँचा तो साफ़ दिखा —
मेरा इशारा वो समझ गए थे।
बेकार आदमी अब वहीं बैठा था जहाँ मैं पहले बैठा हुआ था — नेहा के बिल्कुल पास।
कुर्सियाँ थोड़ी करीब हो गई थीं।
उसकी चेक शर्ट का कंधा नेहा के स्लीवलेस ड्रेस वाले कंधे से हल्का-हल्का टच हो रहा था।
मैं आगे बढ़कर उनके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया।
नेहा अभी भी किसी बात पर मुस्कुरा रही थी।
उसने मेरी तरफ देखा और हल्के से बोली,
“आ गया मूत कर ? बहुत टाइम लगा।”
मैंने उसकी तरफ देखा और हल्का सा मुस्कुराया।
“मैं तेरी जगह बैठ गया था... तुझे बैठना है क्या यहाँ?”
नेहा ने तुरंत सिर हिलाया,
“नहीं... ठीक है। तुम बैठो।”
उसके ग्लास खाली थे।
मैंने वेटर की तरफ इशारा किया और दोबारा बीयर का ऑर्डर रिपीट कर दिया।
बेकार आदमी चुपचाप बैठा था।
उसकी आँखें नेहा पर टिकी हुई थीं।
फिर से टेबल पर शांति छा गई।
पहले तो बातें चल रही थीं, लेकिन अब अचानक सब कुछ रुक सा गया।
मैंने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा,
“अरे शांत क्यों हो गए... बात करो... या मैं वापस जा दूँ?”
पहली बार मुझे लगा कि मैं थर्ड पर्सन हूँ।
एक नए मिले जोड़े के बीच में... वो जिसके सामने बात करने में उन्हें असहज हो रहा है।
अजीब सी फीलिंग थी।
बेकार आदमी ने नेहा की तरफ देखा और धीरे से बोला,
“बोलो... जो तुम बोल रही थी।”
नेहा ने हल्का सा सिर हिलाया।
उसकी उँगलियाँ अभी भी ग्लास को घुमा रही थीं।
वो मेरी तरफ एक नज़र डालकर फिर उस आदमी की तरफ मुड़ी और बात जारी रखने की कोशिश करने लगी।
नेहा ने बहुत शर्माते हुए, धीरे से और हिचकिचाते हुए बोला,
“मैं इनसे ये बात कर रही थी कि... जब हम चैट पर बातें करते थे... तो आपसे ये बोलते थे कि... मुझे गोद में उठाकर... you know... वो करेंगे...”
नेहा “चोदना” बोलने में शर्मा रही थी।
उसकी बातों में अचानक उस आदमी के लिए एक रेस्पेक्ट की भावना आ गई थी — शायद उसकी उम्र की वजह से।
बेकार आदमी ने उसका वाक्य पूरा किया। अब वो कम शर्मा रहा था।
दारू आदमी को थोड़ा साहसी तो बना ही देती है।
वो बोला,
“हाँ... मैं चोद सकता हूँ... तुझे गोद में उठाकर... बिना किसी सपोर्ट के।”
उसकी आवाज़ अब पहले से थोड़ी मोटी और कॉन्फिडेंट लग रही थी।
नेहा ने मेरी तरफ एक नज़र डाली।
उसके गाल हल्के लाल हो गए थे।
मैं चुपचाप बैठा दोनों को देख रहा था।
उसकी ये बात सुनकर मुझे भी हल्की-हल्की हँसी आ रही थी।
एक तो उसकी पतली, काँपती हुई आवाज़...
दूसरे, वो खुद इतना पतला-दुबला था कि लगता था कोई अच्छी-खासी वजन की चीज़ भी नहीं उठा सकता।
और वो मेरी 5'4" लंबी, लगभग 60 किलो की बीवी को गोद में उठाकर हवा में चोदने की बात कर रहा था।
मैंने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन होंठों पर हँसी आ ही गई।
नेहा ने भी मेरी तरफ देखा। उसके चेहरे पर शर्म के साथ हल्की मुस्कान थी। वो भी समझ रही थी कि ये कितना अनरियल लग रहा है।
बेकार आदमी ने हम दोनों को देखा और थोड़ा शर्माया। फिर बोला,
“क्या... हँस क्यों रहे हो?
मैं सच कह रहा हूँ... उठा लूँगा...”
अभी उसकी किसी भी बात पर हम बहस नहीं कर रहे थे।
मुझे लग रहा था कि आज के बाद हम कभी भी नहीं मिलेंगे।
ये बस एक जिंदगी के छोटे से हिस्से को एंड देना था।
हम एन्जॉय कर रहे थे।
धीरे-धीरे उस आदमी के हाथ नेहा के हाथों को छू रहे थे।
वो बोला,
“मैं सच में उठा सकता हूँ... 50 किलो की बोरी मैं रोज़ उठा लेता हूँ।”
म दोनों — सोफिस्टिकेटेड आई टी प्रोफेशनल — आधी सच्ची आधी झूठी हँसी दे रहे थे।
उसे थोड़ा महत्वपूर्ण दिखा रहे थे।
नेहा ने कहा,
“हाँ क्यों नहीं...”
उसने उसके शर्ट के ऊपर से ऊपरी आर्म के मसल फील करते हुए कहा।
वो हँसने लगा।
नेहा और उस आदमी के चेहरे अब काफी करीब थे।
दोनों एक-दूसरे के मुँह की हवा महसूस कर रहे थे।
फिर उसने अपना मुँह नेहा के कान के पास ले गया... और कुछ कहा।
नेहा थोड़ी सी हँसी।
मेरी तरफ देखा।
“सैम... थोड़ा आँखें बंद करो।”
मेरा दिल धड़क गया।
मुझे पता था क्या होने वाला है।
नेहा का एक हाथ अभी भी उसकी बाजू पर था।
एक हाथ टेबल पर।
उस आदमी का एक हाथ नेहा के उसी हाथ को पकड़े हुए था।
वो उसकी पतली नाजुक उँगलियाँ छू रहा था।
दूसरा हाथ टेबल के नीचे... मुझे पता नहीं कहाँ था।
मैंने आस-पास देखा।
नेहा के उस हाथ को थामा जो टेबल पर था।
धीरे से बोला,
“बे केयरफुल।”
हमने ये सिनेरियो पहले डिस्कस किया था।
हमें लगा था ये हो सकता है... मगर तब हमने बेकार आदमी को कुछ और ही इमेजिन किया था।
वो आदमी शायद व्हिस्पर कर रहा था।
सिर्फ उसे पता था उसने नेहा के कान में क्या कहा।
मैंने बस अपनी आँखें बंद करने का नाटक किया।
वो दोनों भी ये जानते थे।
नेहा ने एक बार चारों तरफ देखा...
शुरू करने की कि कोई देख तो नहीं रहा।
फिर उसने चेहरा उस आदमी की तरफ घुमाया।
पिंक लिपस्टिक वाले उसके होंठ उसके सामने थे।
वो उसके चेहरे से ज्यादा दूर नहीं थे।
वो झुका।
उसके खुरदुरे होंठ नेहा के होंठों पर...
वो हल्के-हल्के किस कर रहा था।
स्मूच जैसा नहीं... बस किस।
मुझे एक बार को लगा — उसे अच्छे से किस करना भी नहीं आता।
किस खत्म हुआ तो नेहा ने धीरे से अपना चेहरा पीछे खींच लिया।
उसके गाल अब और भी लाल हो गए थे।
होंठ थोड़े से खुले हुए थे, जैसे अभी भी उसकी साँस ठीक से नहीं आई हो।
उसकी आँखें आधी बंद थीं।
मैं देख रहा था।
नेहा की साँसें थोड़ी तेज़ हो गई थीं।
उसके चेहरे पर एक अजीब सा मिश्रण था — शर्म, उत्तेजना, और थोड़ी सी हैरानी।
जैसे वो खुद को समझ नहीं पा रही हो कि उसने अभी क्या किया।
बेकार आदमी भी चुप था।
उसकी पतली गर्दन हल्की-हल्की काँप रही थी।
उसकी आँखें नेहा के होंठों पर टिकी हुई थीं।
लग रहा था जैसे वो अभी भी उस किस को महसूस कर रहा हो।
टेबल पर अचानक बहुत शांति हो गई।
नेहा ने धीरे से मेरी तरफ देखा।
उसकी आँखों में एक सवाल था... और साथ ही एक छोटी सी मुस्कान।
मुझे लगा —
ये किस छोटा था, लेकिन नेहा के अंदर कुछ हिल गया था।
शायद वो खुद भी समझ नहीं पा रही थी कि उसे अच्छा लगा या सिर्फ नया लगा।
नेहा का हाथ मेरे हाथ में था, जब वो आदमी उसे किस कर रहा था।
मैंने महसूस किया कि नेहा की बॉडी हल्की-हल्की काँप रही थी।
जब उसके खुरदुरे होंठ नेहा के नरम होंठों को छू रहे थे, तब नेहा की उँगलियाँ मेरे हाथ को और कसकर पकड़ रही थीं।
जब वो हटा, तो मेरा पूरा फोकस नेहा के चेहरे पर था।
उसकी आँखें बंद थीं।
होंठों पर हल्की-सी मुस्कान।
5 सेकंड तक वो वैसी ही रही... जैसे अभी भी उस kiss को महसूस कर रही हो।
फिर उसने आँखें खोलीं।
सबसे पहले चारों तरफ देखा... कहीं कोई देख तो नहीं रहा।
फिर मेरी तरफ देखा।
चेहरे पर भाव छुपाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी आँखों में excitement साफ़ झलक रहा था।
गाल हल्के लाल, साँसें थोड़ी तेज़।
नेहा ने मेरे हाथ को और कसकर दबाया।
बेकार आदमी भी चुप था। उसकी नज़रें अभी भी नेहा के होंठों पर टिकी हुई थीं।
बेकार आदमी और नेहा का एक-एक हाथ टेबल के नीचे था।
मुझे कुछ नहीं दिख रहा था, लेकिन नेहा के चेहरे से साफ़ लग रहा था कि कुछ चल रहा है।
उसकी साँसें थोड़ी-थोड़ी तेज़ हो रही थीं।
कभी-कभी वो हल्के से काँप जाती और तुरंत खुद को संभाल लेती।
मैंने अपनी घड़ी की तरफ देखा।
ये एक इशारा था नेहा के लिए — कि क्या हमें अब चलना चाहिए?
नेहा ने तुरंत मेरे हाथ को हल्का सा दबाया।
यानी — “अभी नहीं... मुझे और थोड़ा टाइम दो।”
मैंने हल्का मुस्कुराकर सिर हिला दिया।
वो बार-बार नीचे देख रही थी, फिर मेरी तरफ, फिर बेकार आदमी की तरफ।
मुझे अजीब सा लग रहा था।
कार आदमी अब और करीब आ चुका था।
उसकी कोहनी नेहा के बूब्स को हल्के-हल्के छू रही थी।
वो बार-बार इधर-उधर से टच कर रहा था, जैसे जानबूझकर छू रहा हो।
नेहा कुछ नहीं बोल रही थी।
पिछले 15 मिनट से टेबल पर पूरी तरह सन्नाटा छाया हुआ था।
कोई कुछ बोल नहीं रहा था।
मैं टेबल के सामने बैठा था।
टेबल के नीचे क्या हो रहा था, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
नेहा मेरी शक्ल की तरफ देख रही थी।
उसकी आँखों में एक शरारती चमक थी।
वो जानती थी कि मैं क्या मिस कर रहा हूँ।
वो जानती थी कि मैं जानना चाहता हूँ।
आखिर ये हम दोनों का खेल था।
नेहा ने अचानक कहा,
“इस चेयर पर आ जाओ।”
अभी तक मैं उनके सामने बैठा हुआ था।
मैं अपनी कुर्सी से उठा और नेहा के इशारे से साइड वाली कुर्सी पर जा बैठा।
अब वो आदमी नेहा के और करीब हो गया था।
फिर नेहा ने कुछ नहीं कहा।
उस आदमी ने अपना ग्लास उठाकर एक घूँट पिया और मुस्कुराया।
अब मुझे साफ़ दिख रहा था...
उसका हाथ नेहा की नंगी जाँघ पर था।
धीरे-धीरे ऊपर की तरफ सरक रहा था।
नेहा का एक हाथ उसकी जाँघ पर रखा हुआ था... जैसे उसे रोक भी रही हो और जाने भी दे रही हो।
मैं चुपचाप बैठा देख रहा था।
नेहा ने कल ही अपने लेग्स वैक्स करवाए थे।
उसकी गोरी टांगें डिम लाइट में भी हल्की-हल्की चमक रही थीं।
बेकार आदमी का हाथ धीरे-धीरे उन टांगों पर घूम रहा था।
वो बहुत हल्के-हल्के उन्हें सहला रहा था, जैसे कोई नाजुक चीज को छू रहा हो।
मैंने उसे देखते हुए गला साफ किया।
मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था।
नेहा ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा,
“ये ‘बेकार आदमी’ क्या नाम हुआ? क्या ये तुम्हारा असली नाम है?”
वो आदमी नेहा की तरफ देखकर बोला,
“नहीं... बस ये तो चैट वाली वेबसाइट ने कहा कि कोई नाम रखो... तो मैंने रख लिया।
वरना ऐसा नाम कौन रखता है...”
नेहा ने फिर पूछा,
“तुमने ये नाम क्यों चुना?”
उसने थोड़ी मायूसी के साथ जवाब दिया,
“क्योंकि मैं बेकार हूँ... मैं मानता हूँ।
न पैसा कमा पाया... न परिवार को कुछ दे पाया...
न कोई इज्जत... न कोई खासियत...
सिवाय एक चीज के।”
नेहा ने हल्का सा मुस्कुराते हुए पूछा,
“क्या चीज?”
बेकार आदमी की उँगलियाँ अब नेहा की अंदरूनी जाँघों पर सरक चुकी थीं। बस एक इंच और आगे बढ़तीं तो वो नेहा की पैंटी के किनारे तक पहुँच जातीं।
नेहा ने उसका हाथ पकड़ रखा था, लेकिन उसकी पकड़ ढीली थी।
उँगलियाँ उसकी कलाई पर थीं, फिर भी उसने हाथ को पीछे नहीं खींचा।
उसकी जाँघें भी थोड़ी और खुल गई थीं।
मुझे अभी भी समझ नहीं आ रहा था कि वो उसे रोक रही है या खुद को और खोल रही है।
नेहा की साँसें तेज़ थीं। वो मेरी तरफ देख रही थी, लेकिन उसकी नज़रें बार-बार बेकार आदमी की उँगलियों की तरफ जा रही थीं।
मेरे दिमाग में बस यही बात घूम रही थी —
इतना आसान है नेहा के साथ करना?
मेरे दिमाग में बार-बार यही बात घूम रही थी —
क्या ये सब इतना आसान है मेरी बीवी के साथ?
आधे घंटे पहले नेहा मुझे बार-बार इशारा कर रही थी — “चलो, निकलते हैं।”
फिर थोड़ी देर बाद उसका मूड बदल गया।
थोड़ी इमोशनल बातें हुईं, थोड़ी तारीफें हुईं...
और अब... उसने अपनी हल्की सी टांगें खोल दी हैं।
बेकार आदमी की उँगलियाँ अब नेहा की जाँघों के सबसे अंदरूनी हिस्से पर थीं।
नेहा की साँसें तेज़ हो चुकी थीं।
उसका एक हाथ अभी भी मेरे हाथ में था, लेकिन दबाव बहुत ज़्यादा था।
मैं चुपचाप देख रहा था।
जलन हो रही थी।
उत्तेजना भी हो रही थी।
और सबसे बड़ा सवाल —
क्या नेहा को भी ये सब इतना आसान लग रहा है?
क्या उससे लोग ऑफिस में भी वैसे ही पटा लेते होंगे?
क्या कोई कहता होगा “मेरी सगाई टूट गई”... “मेरा ब्रेकअप हो गया”...
जैसे मैं अपनी एक्स गर्लफ्रेंड के साथ करता था।
क्या पेपर सही नहीं हुआ... फिर किस... फिर ब्लोजॉब...
क्या उसने भी ऑफिस के वॉशरूम में किसी-किसी का चूसा होगा?
दूसरा हिस्सा... उत्तेजना से काँप रहा था।
कैसे वो ये सब करने दे रही है... एक अनजान के साथ?
जिसे वो बस दो महीने की चैट से जानती है।
उसके हाथ उसकी जाँघों के बीच में हैं... और वो रोक नहीं रही।
वो जगह... जो सिर्फ़ मेरा हक था... सिर्फ़ मेरे पति का अधिकार था..
मेरा दूसरा हिस्सा बार-बार यही बात दोहरा रहा था —
"अरे, नेहा जो कुछ भी कर रही है, वो तेरे लिए कर रही है।
तूने ही उसे ये सब करने के लिए उकसाया है।
वो जानती है कि तू ये देखना चाहता था।
ये सब तुझे शो देने के लिए कर रही है।"
फिर भी मेरी छाती में जलन का एक तेज़ दर्द उठ रहा था।
मैं खुद से पूछ रहा था —
अगर ये सब मेरी ही इच्छा थी, अगर नेहा मेरे लिए ही ये सब कर रही है...
तो फिर मुझे इतनी जलन क्यों हो रही है?
क्यों मेरा दिल इतना ज़ोर से धड़क रहा है?
क्यों मुझे लग रहा है कि मेरी बीवी किसी और के हाथों में जा रही है?
नेहा अब पूरी तरह उस बात में खो चुकी थी।
नेहा ने हल्की-सी, भरी हुई साँस में, बहुत इरोटिक अंदाज़ में उसकी तरफ देखते हुए पूछा,
“क्या खास है तुममें?”
उसकी आवाज़ में अब शर्म नहीं थी।
सिर्फ़ गहरी उत्तेजना थी।
बेकार आदमी ने धीरे से मुस्कुराया।
उस आदमी ने नेहा की आँखों में गहरे देखते हुए पूछा,
“क्या सच में जानना चाहती हो... मैं मुझमें क्या खास है?”
नेहा ने इस बार उसकी आँखों में देखकर, बिना शर्माए, सीधे जवाब दिया,
“हाँ... मैं जानना चाहती हूँ।”
उसकी आवाज़ में अब कोई हिचकिचाहट नहीं थी।
साफ़, भरी हुई और थोड़ी सी नशे वाली।
उसने नेहा का हाथ अपने हाथों में ले लिया।
दूसरा हाथ... नेहा का एक हाथ अभी भी उसके एक हाथ के ऊपर था, जो उसकी जाँघों में बहुत ऊपर था। शायद नेहा की चूत की गर्मी महसूस कर रहा था, इस ठंडी एसी में भी।
उस आदमी ने खाकी रंग की ढीली पैंट पहनी हुई थी — जींस नहीं, पुरानी टाइप की पैंट, जैसी अंकल पहनते हैं। उसमें कोई तंबू नहीं बना हुआ था... लेकिन जब नेहा ने हाथ लगाया तो साफ़ महसूस हुआ कि उसका लंड दाईं तरफ लेटा हुआ है, बहुत मोटा और कड़ा।
लगभग आधी जाँघ तक फैला हुआ था।
नेहा ने हल्के से हाथ लगाया... दबाकर उसकी चौड़ाई फील की... पैंट के ऊपर से।
धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकाती हुई... वो देखना चाह रही थी कि वो कहाँ खत्म होता है।
मैं देख रहा था।
नेहा का मुँह खुला का खुला रह गया।
उसके चेहरे पर एक झटका सा आया।
उस आदमी के हाथ-पाँव बहुत पतले थे... लगता था उसका सारा खाना यहीं लग रहा था।
अब उसने नेहा का हाथ छोड़ दिया।
मगर नेहा ने हाथ नहीं हटाया।
वो अभी भी उसे छू रही थी... फील कर रही थी... आउटलाइन बनाकर मुझे दिखा रही थी।
उस आदमी ने कभी नेहा को, कभी मुझे देखा।
नेहा का पूरा फोकस वहाँ था, तो शायद उसने मौके का फायदा उठाया।
दूसरा हाथ और अंदर... पैंटी के ऊपर से चूत पर...
उसने दबाव दिया।
नेहा के मुँह से हल्की-सी “आह्ह...” निकल गई।
तभी हम दोनों होश में आए।
उधर से वेटर आता नज़र आया।
नेहा ने तुरंत हाथ हटाया और अपनी स्कर्ट नीचे की।
मगर उस आदमी ने हाथ नहीं हटाया।
वो अभी भी नेहा की जाँघ पर ही था।
वेटर पास आकर खड़ा हो गया।
वो टेबल के नीचे क्या हो रहा है, ये नहीं देख सकता था।
उसके कुछ बोलने से पहले ही बेकार आदमी ने सामान्य चिटचैट की तरह कहा,
“मैंने कहा था ना कि मैं बस एक चीज़ में बेकार नहीं हूँ।”
वेटर को कुछ अंदाज़ा भी नहीं था कि वो मेरी बीवी को अपने लंड के शेप और साइज़ की बात कर रहा है।
नेहा बस “हाँ... हाँ...” बोल पाई।
वेटर के वहाँ खड़े होने की वजह से या उसने कुछ किया, पता नहीं... लेकिन नेहा की स्कर्ट के नीचे उसका हाथ अभी भी था।
वेटर ने कहा,
“सर, एक प्राइवेट पार्टी की वजह से आधे घंटे में गेस्ट आना शुरू होंगे... तो क्या मैं आपका बिल ले आऊँ? या कोई लास्ट ऑर्डर है?”
नेहा ने मेरी तरफ बिना देखे ही कहा,
“3 बीयर प्लीज़... और एक सिज़लर।”
मतलब वो थोड़ा और टाइम चाहती थी।
उसे पता था कि सिज़लर एक ऐसी डिश है जिसे बनाने में टाइम लगता है।
ये थोड़ी देर और वेटर को दूर रख सकता है।


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