11-05-2026, 07:24 AM
अध्याय 9
विशाल ने एक ठहाका लगाया और आयशा के मखमली गाल को अपनी उंगलियों से सहलाया।
विशाल: "बहुत खूब! तो चलिए आयशा जी, इस 'प्राइवेट सेरेमनी' का आगाज़ आज से ही करते हैं।“
विशाल ने अपना फोन निकाला और आयशा से कहा, "आप मुझे अपना नंबर दीजिए, मैं अभी आपके फोन पर मिस कॉल करूँगा, उसे सेव कर लेना।" उसकी आवाज़ में एक मालिक जैसा रोब था।
आयशा के फोन पर कॉल आई और उन्होंने नंबर सेव कर लिया। उधर विशाल ने भी आयशा का नंबर सेव किया, लेकिन नाम रखा—'रसीली भाभी'।
विशाल ने अपनी स्क्रीन पर उस नाम को देखते हुए एक गहरी और कुटिल मुस्कान भरी।
विशाल: "याद रहे, मेरा मैसेज आते ही तुम्हारी उंगलियाँ जवाब देने के लिए तैयार होनी चाहिए।"
विशाल ने एक बार चारों तरफ अपनी नज़रें घुमाईं, और जब यकीन हो गया कि उस अंधेरे कोने में कोई तीसरा नहीं है।
विशाल ने झटके से आयशा के सुडौल वजूद को अपनी फौलादी बाहों में खींच लिया।
आयशा के वे पुष्ट और रसीले मम्मे विशाल के मजबूत और चौड़े सीने के नीचे पूरी तरह कुचल गए थे। उस शराबी रंग की साड़ी और महीन ब्लाउज के पार भी अम्मी को विशाल की मर्दानगी की तपिश महसूस हो रही थी।
विशाल के बड़े हाथ आयशा की पतली कमर के उस हिस्से पर जम गए जो साड़ी सरकने की वजह से बिल्कुल नंगा था। उसके हाथों की तपिश आयशा को अपने नंगे और मखमली पेट पर किसी जलते हुए कोयले की तरह महसूस हो रही थी। आयशा के पेट का वह नंगा दूधिया हिस्सा खौफ के मारे अंदर की तरफ सिकुड़ गया। विशाल ने अपनी पूरी हथेली खोल दी और उसके नंगे पेट को सहलाने लगा।
विशाल ने और भी करीब आते हुए कहा, "डरिए मत आयशा जी, आप तो मेरी गर्लफ्रेंड हैं, और मैं चाहता हूँ कि मेरी गर्लफ्रेंड मुझे खुश करें। आप अपने ये रसीले मम्मे मेरी छाती पर रगड़िए।"
उसने आयशा की कमर पर अपनी पकड़ और भी कस ली, जिससे उनके बदन के बीच की दूरी पूरी तरह खत्म हो गई।
आयशा के मुँह से खौफ के मारे चीख निकल गई, "क्या कह रहे हैं आप!"
"क्या हुआ आयशा जी? आप तो सायमा की आबरू का सौदा करने आई थीं ना?" विशाल ने एक हाथ बढ़ाकर उनके चेहरे की लट को कान के पीछे किया, "तो फिर अब कदम पीछे क्यों खींच रही हैं? बस थोड़ा सा सहयोग।"
आयशा की आँखों से आँसू की एक बूंद टपक कर विशाल के हाथ पर गिरी, लेकिन उस पर इसका कोई असर नहीं हुआ।
विशाल (आयशा के और करीब आते हुए): "रोइए मत, आयशा जी, ये आँसू आपकी खूबसूरती को कम कर रहे हैं। याद रखिए, आज आप यहाँ एक माँ और एक खाला बनकर नहीं, बल्कि मेरी पसंद बनकर खड़ी हैं। अब प्यार से अपनी ये रसीली देह मुझ पर न्योछावर कर दीजिए, वरना...।"
विशाल ने अपना दूसरा हाथ आयशा की गर्दन के पीछे रखा और उनके चेहरे को अपनी तरफ ऊपर उठाया। आयशा ने बेबसी में अपनी आँखें फेर लीं, पर उनका जिस्म विशाल के दबाव में बुरी तरह पिसा जा रहा था।
अम्मी (काँपती आवाज़ में): "विशाल... तुम... तुम बहुत गिरे हुए इंसान हो। खुदा तुम्हें कभी माफ नहीं करेगा।"
विशाल (ठहाका मारते हुए): "खुदा की फिक्र आप कीजिए आयशा जी, मैं तो फिलहाल इस जन्नत का मजा लेना चाहता हूँ जो मेरे सामने खड़ी है। अब बहाने छोड़िए और वो कीजिए जो मैंने कहा है... वरना अंजाम की जिम्मेदार आप खुद होंगी।"
आयशा की सिसकियाँ अब एक बेबस सरेंडर में तब्दील होने लगी थीं। सायमा की जिंदगी बचाने के लिए उसने भारी मन से अपने जिस्म को हरकत दी।
वह धीरे-धीरे अपने बदन को ऊपर-नीचे करने लगी, जिससे उन दोनों के जिस्मों के बीच एक तीव्र रगड़ पैदा हुई। विशाल के सीने के साथ उसके वक्षों का वह घर्षण आयशा को अंदर तक शर्मसार कर रहा था, लेकिन विशाल के लिए यह किसी नशीली जीत से कम नहीं था।
विशाल ने अपनी आँखें मूँद लीं और उस सिहरन का लुत्फ उठाने लगा। उसके हाथों की पकड़ आयशा की कमर पर और भी ज़्यादा हिंसक हो गई।
विशाल (भारी और हवस भरी आवाज़ में): "हाँ... बिल्कुल ऐसे ही आयशा जी। आपकी ये नरमा हट और ये बेचैनी... मुझे पागल कर रही है।"
विशाल ने उसे और ज़ोर से अपनी तरफ खींच लिया, जिससे आयशा का पेट उसकी मर्दानगी की कठोरता को और भी साफ़ महसूस करने लगा। आयशा का चेहरा शर्म से सुर्ख हो गया था और वह चाहकर भी अपनी नज़रों को विशाल की आँखों से नहीं मिला पा रही थी।
विशाल: "रुकिए मत... जारी रखिए। आज मुझे महसूस होना चाहिए कि सायमा की खाला उसे बचाने के लिए किस हद तक जा सकती हैं।"
विशाल ने आयशा के कान के पास अपनी गर्म और भारी साँसें छोड़ते हुए कहा, "आयशा जी, अब मेरा यह हाथ जो आपकी नंगी कमर और पेट पर है, इसे आप खुद ऊपर ले जाइए... इसे अपने इन रसीले मम्मों पर रखिए। और फिर, आपको अपने हाथों से मेरे हाथों को दबाना होगा।"
आयशा का पूरा वजूद काँप उठा। शर्म और ज़िल्लत की एक लहर उनके सिर से पाँव तक दौड़ गई। एक माँ और एक इज़्ज़तदार खाला के लिए इससे बड़ी अग्निपरीक्षा और क्या हो सकती थी?
आयशा ने काँपते हुए हाथों से विशाल के भारी हाथ को पकड़ा। उन्होंने धीरे-धीरे विशाल के हाथ को अपने पेट से ऊपर की ओर सरकाना शुरू किया। जब विशाल की हथेली उनके रेशमी ब्लाउज के ऊपर से उनके पुष्ट वक्षों पर टिकी, तो आयशा की एक दबी हुई सिसकी निकल गई।
विशाल (अपनी पकड़ मजबूत करते हुए): "शर्माइए मत आयशा जी... अब दबाइए मेरे हाथ को। मुझे महसूस होना चाहिए कि आप अपनी मर्जी से यह सब कर रही हैं।"
आयशा ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और रुँधे हुए गले से विशाल के हाथ को अपने सीने पर भींच लिया। विशाल ने हवस के मारे एक गहरी साँस ली, उसे आयशा के जिस्म की हरारत और उनकी मजबूरी का यह मेल बहुत सुकून दे रहा था। वह समझ चुका था कि अब आयशा पूरी तरह उसके काबू में आ चुकी हैं।
विशाल ने पहले तो सिर्फ उनके मम्मों की गोलाई को महसूस किया, फिर धीरे-धीरे वह अपनी हथेलियों से उनके उभारों को टटोलने लगा। जैसे-जैसे उसकी पकड़ मजबूत होती गई, उसने दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया। आयशा के जिस्म में इस अनचाहे स्पर्श की वजह से एक अजीब सी सिहरन और सनसनी दौड़ने लगी, जिसे वह चाहकर भी नहीं रोक पा रही थीं।
उनके हलक से एक दबी हुई आह निकल गई—"उह्ह्ह…"
विशाल ने जब उनके मुँह से निकली वह मदहोश कर देने वाली आवाज़ सुनी, तो उसकी हवस और भी बढ़ गई। उसने अपने हाथों का दबाव और तेज़ कर दिया, जैसे वह उन पुष्ट वक्षों को अपने हाथों में मसल देना चाहता हो।
विशाल (आयशा के चेहरे के बिल्कुल करीब आकर): "देखा, आयशा जी? आपका जिस्म भी वही चाह रहा है जो मैं चाह रहा हूँ। ये आहें झूठ नहीं बोलतीं। आप भले ही ज़ुबान से नफरत दिखाएं, पर आपकी ये धड़कनें और ये आवाज़ें बता रही हैं कि आपको भी इस खेल में मज़ा आ रहा है।"
आयशा ने शर्म के मारे अपना चेहरा दूसरी तरफ फेर लिया, मगर विशाल के हाथों का वह बढ़ता हुआ दबाव उनके पूरे वजूद को झकझोर रहा था। वह जितनी कोशिश करतीं खुद को संभालने की, विशाल की मर्दानगी और उसकी छुअन उन्हें उतना ही बेबस करती जा रही थी।
विशाल ने आयशा की आँखों में अपनी हवस भरी नज़रें गड़ाते हुए आदेश दिया, "अब आप अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़कर अपने ब्लाउज और ब्रा के नीचे ले जाइए। मैं अपनी गर्लफ्रेंड के इन मम्मों को नंगा पकड़ना चाहता हूँ।"
आयशा के कानों में उसकी यह माँग किसी बम की तरह फटी। उनकी रूह तक काँप गई। अभी तक तो विशाल कपड़ों के ऊपर से ही ज़बरदस्ती कर रहा था, मगर अब उसकी माँगें शर्मो-हया की सारी हदें पार कर रही थीं।
विशाल (अपनी आवाज़ को और भारी करते हुए): "देर मत कीजिए, आयशा जी। जितना आप झिझकेंगी, उतनी ही देर सायमा उन तस्वीरों की गिरफ्त में रहेगी। क्या आप नहीं चाहतीं कि मैं अपना फोन निकालूँ और सब कुछ अभी के अभी डिलीट कर दूँ? तो फिर मेरे हाथ को अंदर ले जाइए।"
आयशा ने एक लंबी और ठंडी साँस ली। उनकी आँखों से आँसू अब लगातार बह रहे थे। उन्होंने काँपते हुए हाथों से विशाल की मज़बूत हथेली को फिर से थामा। उनके हाथ की उंगलियों ने विशाल के खुरदरे हाथ को उनके ब्लाउज के किनारों की ओर ले जाना शुरू किया।
जैसे ही विशाल की उंगलियों ने आयशा की छाती की रेशमी त्वचा को सीधे छुआ, आयशा के पूरे बदन में एक बिजली सी दौड़ गई। विशाल ने अपनी उंगलियों को और अंदर धकेला और उनकी नंगी त्वचा को अपनी हथेली में भर लिया।
विशाल (मदहोशी में फुसफुसाते हुए): "उफ़्फ़... आयशा जी... ये तो रेशम से भी ज़्यादा नरम हैं। आप तो वाकई कयामत हैं।"
विशाल की उंगलियाँ अब आयशा के ब्लाउज और ब्रा की सीमाओं को पार कर उनके रेशमी बदन की गहराई में उतर चुकी थीं।
उसने अपनी उंगलियों को फैलाया और आयशा के उस पुष्ट उभार को अपनी मुट्ठी में पूरी तरह भर लिया।
आयशा का शरीर बुरी तरह थरथरा उठा। विशाल नंगे वक्ष को अपनी हथेली में मसलना शुरू किया।
विशाल (मदहोशी में फुसफुसाते हुए): "आह्ह... आयशा जी, आपकी यह त्वचा तो बिल्कुल मक्खन जैसी है। कितने नर्म, कितने सुडौल... काश! मैं इन्हें अभी जी भर के देख पाता, पर फिलहाल तो इन्हें सिर्फ महसूस ही कर सकता हूँ।"
विशाल ने अपनी पकड़ को और भी फैला दिया, जैसे वह उसे पूरी तरह महसूस करना चाहता हो; उसकी पकड़ में अब एक अजीब सी ताकत थी।
आयशा की सिसकियाँ अब धीरे-धीरे एक कराह में बदलने लगी थीं और उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं। वह नहीं चाहती थी कि उसके मुँह से कोई आवाज़ निकले, पर उसका शरीर उसका साथ नहीं दे रहा था।
आयशा (बेबसी में सिसकते हुए): "विशाल… बस… अब और नहीं… आपने…"
विशाल (एक कुटिल मुस्कान के साथ): "अभी शुरू हुआ है जानम। अभी तो मैंने सिर्फ छूना शुरू किया है। अब जब मेरा हाथ यहाँ तक पहुँच ही गया है, तो इसे थोड़ा और काम करने दीजिए। अपनी इन आँखों को खोलिए और मेरी तरफ देखिए… मुझे आँखों में वो डर और चाहत देखनी है।"
जब आयशा ने अपनी आँखें नहीं उठाईं, तो विशाल की आवाज़ और भी कठोर हो गई। उसने उसके निप्पल्स पर दबाव बढ़ाते हुए उन्हें बुरी तरह मसला और कड़क लहजे में कहा, "मेरी गर्लफ्रेंड्स मेरे हर हुकुम को मानती हैं, आयशा जी। अगर मैंने कहा है कि मेरी आँखों में देखो, तो इसका मतलब है कि तुम्हें देखना होगा।"
दर्द और उस अनचाही उत्तेजना की एक लहर आयशा के पूरे शरीर में दौड़ गई। विशाल की उंगलियों की वह सख्त पकड़ उसे चीखने पर मजबूर कर रही थी, लेकिन उसकी आवाज़ सिर्फ एक दबी हुई कराह बनकर रह गई।
विशाल: "ये पलकें झुकाकर तुम खुद को नहीं बचा सकतीं। तुम्हारी हर धड़कन अब मेरी मर्ज़ी की मोहताज है। अब अपनी ये खूबसूरत आँखें खोलो और देखो कि तुम्हारा मालिक कौन है।"
आयशा ने बेबसी में धीरे-धीरे अपनी पलकें उठाईं। उनकी आँखों में आँसू भरे थे और वे शर्म से लाल हो चुकी थीं। विशाल ने उनकी आँखों में झाँकते हुए एक मुस्कान दी और अपने हाथ का दबाव और भी ज़्यादा बढ़ा दिया, जिससे आयशा का बदन कमान की तरह मुड़ गया।
विशाल: "बेहतरीन... अब लग रहा है कि तुम एक अच्छी और आज्ञाकारी प्रेमिका बनने का हुनर सीख रही हो। इसी तरह मेरी बातों को मानती रहो, तो शायद मैं सायमा के बारे में थोड़ा नरम दिल हो जाऊं।"
तभी विशाल को बाहर से कुछ आहट सुनाई दी। उसने झटके से अपना हाथ आयशा के ब्लाउज के अंदर से निकाला और खुद को दुरुस्त करते हुए आयशा से कहा, "मैं बाहर महफिल में जा रहा हूँ। आप थोड़ी देर में मुझे वहीं मिलिए, और याद रहे, वहाँ आपको मेरे साथ हँस-हँसकर बातें करनी हैं।"
विशाल ने अपनी शर्ट की सिलवटें ठीक कीं और एक आखिरी बार आयशा के बिखरे हुए हुस्न को हवस भरी नज़रों से देखा। आयशा अभी भी काँप रही थीं और अपनी साड़ी का पल्लू सँभालने की कोशिश कर रही थीं।
विशाल : "अगर आपके चेहरे पर ज़रा भी शिकन दिखी या किसी को शक हुआ, तो सायमा का वह वीडियो वायरल होने में एक सेकंड भी नहीं लगेगा। समझ गई आप? अब अपना चेहरा साफ कीजिए और मुस्कराते हुए बाहर आइए।"
आयशा वहीं खड़ी रहीं—उनकी शराबी साड़ी बेतरतीब थी, उनके बालों का जूड़ा ढीला हो चुका था, और उनके पुष्ट सीने पर विशाल की उंगलियों के निशान अभी भी जल रहे थे। वह अपनी इस कातिलाना और बेपनाह खूबसूरती को कोस रही थीं, जो आज एक शैतान की भूख बन चुकी थी। बाहर साहिल अभी भी बेखबर था, जबकि उसकी अम्मी के नूरानी जिस्म पर एक दरिंदे की हवस की मुहर लग चुकी थी।
Deepak Kapoor
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