09-05-2026, 11:26 AM
शाम के सात बजे हम “ला विटा” में बैठे थे।
नेहा मेरे सामने थी। उसका ब्लैक ड्रेस हल्का-हल्का चमक रहा था। वो टेबल क्लॉथ को उँगलियों से कसकर पकड़े हुए थी।
नेहा मेरे सामने बैठी थी। उसने एक सिंपल लेकिन बहुत खूबसूरत ब्लैक ड्रेस पहनी थी — घुटनों से थोड़ा ऊपर,
कंधों पर पतली स्ट्रैप्स, और गले में हल्का सा V-कट। उसके बाल खुले थे, हल्का मेकअप, और होंठों पर हल्का गुलाबी लिपस्टिक।
वो बहुत खूबसूरत लग रही थी... लेकिन उसका चेहरा थोड़ा तनावग्रस्त था।
“सैम... ये सही है ना?” उसने बहुत धीरे से पूछा। “मैं थोड़ा डर रही हूँ।”
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और हल्का दबाया।
“रिलैक्स बेबी। हम सिर्फ मिल रहे हैं। बात करेंगे। पसंद आया तो आगे, नहीं आया तो कॉफ़ी पीकर निकल जाएँगे। कोई ज़ोर नहीं है।”
नेहा ने हल्का सिर हिलाया, लेकिन उसकी उँगलियाँ अभी भी टेबल क्लॉथ को पकड़े हुए थीं।
ठीक सात बजकर दस मिनट पर दरवाज़ा खुला।
मैंने उसे अच्छे से देखा।
बहुत पतला... बहुत ही पतला।
चेहरे पर हड्डियाँ साफ़ नज़र आ रही थीं। हाथ-पैर इतने दुबले कि लग रहा था जैसे शरीर में खून ही नहीं है। कंधे झुके हुए, कमर पतली। बाल थोड़े सफ़ेद मिश्रित, चेहरा थका हुआ।
बिल्कुल उस मुकेश की तरह लग रहा था — जो हर फिल्म में पहले ही मर जाता है। या सिगरेट के पुराने विज्ञापनों में वो पतला-दुबला आदमी जो सिगरेट पीते हुए दिखाया जाता था।
नेहा भी उसे देख रही थी। उसकी आँखों में एक पल के लिए हैरानी थी, लेकिन वो तुरंत संभल गई।
बेकार आदमी ने पहले मेरी तरफ देखा, फिर नेहा की तरफ।
आदमी हमारी टेबल की तरफ बढ़ा।
उसने नेहा को ऊपर से नीचे तक देखा। फिर नेहा की तरफ इशारा करके थोड़ी हिचकिचाती हुई आवाज़ में बोला,
“नेहा...?”
नेहा ने हल्का सा सिर हिलाया।
“हाँ... मैं नेहा हूँ।”
वो आदमी एक पल के लिए रुक गया। उसके चेहरे पर हैरानी साफ़ दिख रही थी। शायद उसे उम्मीद नहीं थी कि हम सच में आएँगे। उसे लग रहा था कि ये इंटरनेट का कोई मज़ाक है। उसकी आँखें थोड़ी फड़क रही थीं।
वो धीरे-धीरे कुर्सी पर बैठ गया।
उसकी आवाज़ काँप रही थी।
“अरे यार... तुम तो बहुत खूबसूरत हो।”
उसने नेहा को फिर से देखा, जैसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा हो।
“तुम ये सब क्यों कर रही हो? मुझे लगा था या तो कोई आएगा नहीं... या आएगा तो बहुत बदसूरत होगा।”
उसकी आवाज़ में अभी भी थोड़ी कंपकंपी थी। जैसे वो डर रहा हो कि कहीं ये सब सच न हो जाए।
“बहनचोद... तू क्यों अपनी बीवी के साथ ये सब करने दे रहा है?”
वो इतनी जल्दी और पतली आवाज़ में बोल रहा था कि कुछ शब्द तो गड़बड़ हो रहे थे। लेकिन गाली साफ़ सुनाई दी।
नेहा मेरी तरफ देखने लगी। उसके चेहरे पर थोड़ी हैरानी थी।
मैं चुपचाप बैठा रहा।
बेकार आदमी अभी भी अपनी पतली, काँपती हुई आवाज़ में कुछ बोल रहा था, लेकिन अब हम उसकी बातें ठीक से सुन भी नहीं रहे थे।
नेहा भी मेरी तरफ देख रही थी।
उसकी आँखों में एक ही बात साफ़ लिखी थी — “यहाँ से निकल जाएँ।”
मुझे भी वैसा ही लग रहा था।
ये आदमी कीबोर्ड पर तो बहुत बोलता था, गालियाँ देता था, रफ़ बातें करता था... लेकिन सामने बैठकर देखने पर बिल्कुल फीका लग रहा था।
आवाज़ पतली, काँपती हुई।
न कोई कमांडिंग टोन, न कोई डॉमिनेंट फील।
बस एक दुबला-पतला, घबराया हुआ आदमी जो खुद को संभाल नहीं पा रहा था।
हम दोनों मन ही मन सोच रहे थे कि थोड़ी बहुत बात करके यहाँ से निकल जाएँ।
निकल जाएँ।
बेकार आदमी ने अचानक नेहा की तरफ देखा और पतली आवाज़ में पूछा,
“आज खाने में क्या बनाया है?”
नेहा एक पल के लिए रुक गई।
फिर उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गई।
मुझे लगा वो सोच रही होगी — “ये वही है... जिससे मैं रोज़ घंटों बात करती हूँ।”
भले ही उसके दिमाग में उसका चेहरा कुछ और था, लेकिन ये वही आदमी था। जिसके साथ वो दिन के कई घंटे बिताती थी। उसकी बातों में एक मोह था। उसी मोह की वजह से आज वो यहाँ मिलने आई थी।
हालाँकि जैसा उसने सोचा था, वो बिल्कुल वैसा नहीं था।
नेहा ने धीरे से जवाब दिया,
“आज तो बाहर आए हैं... खाने का प्लान यहीं का है।”
वो आदमी ने हल्का सिर हिलाया।
“अच्छा...”
फिर थोड़ी देर चुप रहा।
उसकी उँगलियाँ टेबल पर हल्के-हल्के काँप रही थीं।
नेहा ने उसे देखा और पूछा,
“तुम ठीक हो?”
उसने हाँ में सिर हिलाया और बोला,
“हाँ... बस... थोड़ा अजीब लग रहा है।
तुम... फोटो में जैसी लग रही थीं... उससे भी ज्यादा अच्छी हो।”
नेहा ने हल्का मुस्कुराया।
मैं चुपचाप बैठा देख रहा था।
ये वही आदमी था जिससे नेहा महीनों से चैट करती थी।
रोज़ घंटों बातें।
रोज़ गंदी-गंदी बातें।
नेहा चैट पर बात करती थी और मैं नीचे बैठकर उसकी चूत चाटता था।
वो उन बातों से इतनी नशे में हो जाती थी कि उसका पूरा शरीर काँपने लगता था।
बेकार आदमी बहुत साधारण कपड़ों में था।
पुरानी चेक वाली शर्ट, जो कहीं-कहीं फीकी पड़ चुकी थी, और साधारण पैंट।
ऐसे कपड़े आजकल कोई मॉडर्न अपर मिडिल क्लास आदमी नहीं पहनता।
उसने अपनी उम्र बताई — 46 साल।
बोला कि शादी हो चुकी है, बच्चे भी हैं।
मुझे लगा वो फाइनेंशियली भी ज्यादा अच्छा नहीं है।
चेहरे पर थकान साफ़ दिख रही थी, जैसे रोज़ की मेहनत और टेंशन का बोझ हो।
नेहा उसे देख रही थी।
उसकी आँखों में एक अजीब सा भाव था — जैसे वो अभी भी चैट वाला “बेकार आदमी” ढूँढ रही हो, लेकिन सामने बैठा इंसान उससे काफी अलग था।
वो आदमी ने फिर नेहा की तरफ देखा और पतली आवाज़ में बोला,
“तुम... सच में बहुत खूबसूरत हो।
मुझे लगा था शायद फोटो एडिटेड होंगी... लेकिन नहीं... तुम वाकई में वैसी ही हो।”
नेहा ने हल्का मुस्कुराते हुए कहा,
“थैंक यू।”
नेहा ने बेकार आदमी की तरफ देखकर धीरे से कहा,
“तुम वैसे नहीं लग रहे जैसे मैंने सोचा था।”
वो आदमी ने हल्का सा मुस्कुराया। फिर उसकी पतली, थोड़ी काँपती हुई आवाज़ में बोला,
“मुझे नहीं लगा था कि वहाँ सामने कोई लड़की होगी।
हमने कभी ऑडियो पर बात नहीं की। मुझे हमेशा लगता था कि शायद कोई लड़का है... जो 45 साल के एक आदमी के साथ मज़े कर रहा है।
मुझे बातों में मज़ा आता था। वो डर्टी टॉक अच्छी लगती थी।
पर मुझे एक प्रतिशत भी चांस नहीं था कि सामने तुम जैसी कोई खूबसूरत लड़की होगी।
मुझे लगता था कि शायद लड़की हो सकती है, मगर वो बहुत गंदी और मोटी टाइप की होगी।
मुझे नहीं पता था... और ये मेरे लिए अच्छा ही काम किया।
अब ये मुझे पता होता कि सामने तुम जैसी खूबसूरत लड़की है और ये सब सच में है... एक पति-पत्नी, एक कपल के साथ ये सब करना चाहता हूँ... तो शायद मुझमें वो कॉन्फिडेंस ही नहीं आता तुमसे बात करने का।
मैं ऑलरेडी 46 साल का हूँ।
मुझे शाम के दो-तीन घंटे रात में मिलते थे। मैं उसमें तुमसे बात किया करता था।
ये तो बस मैंने चांस लिया यहाँ मिलने के लिए।”
उसकी आवाज़ में शर्म, हैरानी और थोड़ी सी खुशी सब मिली हुई थी।
नेहा ने धीरे से उसकी तरफ देखा और बोली,
“क्या हुआ? इतना घबरा क्यों रहे हो?”
वो बस सिर हिला और बहुत धीमी आवाज़ में बोला,
“पहली बार... किसी खूबसूरत लड़की के सामने बैठा हूँ... वो भी जिसके साथ दो महीने से रोज़ गंदी-गंदी बातें करता था।”
नेहा मुस्कुराई।
उसके अंदर फिर वही वाली गर्मी उठने लगी थी।
हम तीनों चुपचाप बैठे थे।
इधर-उधर की बातें हो रही थीं — मौसम, गोवा, खाना, ट्रैफिक... लेकिन जिस काम के लिए हम मिले थे, वो बात बिल्कुल भी नहीं हो पा रही थी।
न वो कुछ बोल पा रहा था, न हम।
हमने उसकी फैमिली के बारे में पूछा।
उसने धीरे से बताया,
“मैं बहुत साधारण फैमिली से हूँ। मेरी एक बीवी है, दो बच्चे हैं। एक दसवीं में पढ़ता है, दूसरा सातवीं में।”
फिर वो अपने परिवार के बारे में बताने लगा।
मैं और नेहा चुपचाप सुन रहे थे।
धीरे-धीरे चीज़ें क्लियर होती जा रही थीं।
अब मुझे याद आ रहा था कि हम जब भी उससे इंग्लिश में कुछ पूछते थे, वो कभी इंग्लिश में जवाब नहीं देता था। हमेशा हिंदी में, अपनी रफ़ लैंग्वेज में, गाली-गलौज के साथ जवाब देता था — जैसे कोई एक्ट कर रहा हो।
अब लग रहा था कि शायद उसे इंग्लिश आती ही नहीं थी।
या वो उस स्टेटस से बिलॉन्ग नहीं करता था जिस स्टेटस से हम बिलॉन्ग करते थे।
उसने बताया कि वो एक छोटी सी फैक्ट्री में काम करता है। सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक। घर पर बीवी और बच्चे इंतज़ार करते रहते हैं।
नेहा ने उसे ध्यान से देखा।
उसकी आँखों में अब न तो वो पुरानी चैट वाली उत्तेजना थी, न कोई खास भाव।
वो बस एक साधारण, मेहनतकश, 46 साल का आदमी था — जो चैट पर तो बहुत बोलता था, लेकिन सामने बैठकर घबरा रहा था।
मुझे अब साफ़ दिख रहा था — वो शायद कोई ब्लू कॉलर जॉब करता था। कोई फैक्ट्री या छोटी दुकान वाला काम।
अब हमारे दिमाग में बिल्कुल कहीं भी कोई एक्साइटमेंट नहीं बचा था।
जब हमने उसे इस फाइव-स्टार होटल में मिलने के लिए कहा, तो वो उस टाइम भी हिचकिचाया था।
“ये तो बहुत दूर है मेरी जगह से... हम कहीं छोटी जगह पे मिलते हैं ना, जैसे कोई साधारण रेस्टोरेंट या मैकडॉनल्ड्स वगैरह पे।”
नेहा ने धीरे से कहा,
“वहाँ आराम से बातें नहीं हो पाएगी।”
वो थोड़ा और हिचकिचाया, लेकिन आखिरकार मान गया।
शायद उसके दिमाग में ये डर था कि कहीं बिल उसे पे करना पड़े। पता नहीं कितने पैसे लगेंगे।
थोड़ी देर बाद वेटर आया।
हमने उसे बोला,
“दो बीयर ले आओ।”
फिर हमने उसकी तरफ देखा।
उसने हल्का सा सिर हिलाया।
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“चलो, तीन ले आओ।”
वेटर चला गया।
हम थोड़ी देर और बैठे रहे।
तीन बीयर आ चुकी थीं।
नेहा और मुझे एकदम से उठकर जाना अजीब लग रहा था।
उसने एफर्ट लिया था हमसे मिलने का।
कर्टेसी बनती थी कि उसके साथ थोड़ी देर तो बैठें।
दो महीने से नेहा उसके साथ चैट करती थी, इमोशनल कनेक्शन भी था।
हमने सोचा — चलो, बीयर पीते हैं, इधर-उधर की बातें करते हैं।
उसे अच्छा लगेगा।
धीरे-धीरे हम तीनों को हल्का-हल्का नशा चढ़ने लगा था।
फिर दारू के बाद शायद उसमें थोड़ी हिम्मत आई।
उसने नेहा की तरफ देखा और थोड़ी काँपती हुई आवाज़ में पूछा,
“क्या तुम सच में वो सब करना चाहते हो... जो तुम नेट पर करते थे?”
नेहा ने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा।
नेहा चुप थी।
उसने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में एक सवाल था — जैसे वो चाहती थी कि मैं जवाब दूँ।
मैंने हल्का सा गला साफ़ किया और बोला,
“हमारा ड्रीम तो यही था कि हम किसी के साथ ये सब करना चाहते हैं।”
बेकार आदमी ने अचम्भे से हम दोनों को देखा।
उसकी पतली आवाज़ में हैरानी साफ़ झलक रही थी,
“मगर क्यों?
ये तो इतनी खूबसूरत है... और तुम पैसे वाले भी लगते हो।
मुझे नहीं लगता कि तुम पैसे के लिए ये सब करना चाहते हो।”
वो बोलते हुए बार-बार नेहा को देख रहा था।
मैंने हल्के से मुस्कुराकर कहा,
“पैसे की बात नहीं है। हम बस... नया कुछ ट्राई करना चाहते थे। कुछ अलग।”
मैंने हल्के से कंधे उचकाए और आगे बोला,
“क्योंकि हम दोनों को ये एक्साइटमेंट पसंद है। एक नया आदमी... नई बातें... नया माहौल। नेहा बहुत खूबसूरत है, ये सच है। लेकिन हमें बस... इस तरह के रिस्क और थ्रिल की आदत हो गई है।”
बेकार आदमी ने हमें ध्यान से देखा। उसकी पतली आँखें थोड़ी और चौड़ी हो गईं।
फिर उसने अगला सवाल किया,
“क्या तुमने ये पहले भी कभी किया है... किसी के साथ?”
मैंने हल्का सा सिर हिलाया और सीधे जवाब दिया,
“पहली बार हमने ऐसा किया है।”
हम एक इटालियन रेस्टोरेंट में थे।
जैज़ म्यूजिक हल्के से बज रहा था।
हमने जानबूझकर कॉर्नर वाली टेबल चुनी थी, ताकि आराम से बात हो सके।
लाइट्स मद्धिम थीं।
हम तीनों जानते थे कि आज की मीटिंग सिर्फ मिलने के लिए नहीं थी।
नेहा को भी पता था।
उसे भी लग रहा था कि शायद आज इससे ज़्यादा कुछ नहीं होने वाला।
मगर उसे ये भी लगता था कि शायद आज मिलने के बाद हम उसे दूसरा चांस नहीं देंगे।
क्योंकि उसकी कद-काठी उसे खुद पता थी।
ना वो हैंडसम था, ना डॉमिनेटिंग टाइप।
ना उसका शरीर ऐसा था कि किसी को इम्प्रेस कर सके।
वो बस चुपचाप बैठा था।
बार-बार नेहा को देखता, फिर नज़रें झुका लेता।
उसकी उँगलियाँ बीयर के ग्लास को कसकर पकड़े हुए थीं।
उसकी बातें खत्म ही नहीं हो रही थीं।
ऐसा लग रहा था कि ये उसका आखिरी चांस है — अपने से हाई सोसाइटी में बैठने का।
आते-जाते वेटर की नज़रें हम महसूस कर रहे थे।
वे उसे नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे।
मगर वहाँ लोग कम ही थे, इसलिए वेटर भी तब आ रहे थे जब हम कुछ मंगवा रहे थे।
बेकार आदमी ने अचानक मेरी तरफ देखा और थोड़ी हिचकिचाती हुई आवाज़ में पूछा,
“क्या मैं नेहा को और करीब से देख सकता हूँ?”
हमने ये एक्सपेक्ट नहीं किया था।
मैंने एक पल सोचा।
फिर अपनी कुर्सी से उठा और बोला,
“मैं वॉशरूम जा के आता हूँ।”
ये एक इशारा था।
मैं वहाँ से थोड़ी देर के लिए चला गया।
अपनी बीवी को उस आदमी की कंपनी में छोड़कर... जिसे वो चैट पर “रंडी” नाम से बुलाता था।
मैं सोच रहा था — जब मैं वापस आऊँगा तो क्या होगा?
नेहा मेरे सामने थी। उसका ब्लैक ड्रेस हल्का-हल्का चमक रहा था। वो टेबल क्लॉथ को उँगलियों से कसकर पकड़े हुए थी।
नेहा मेरे सामने बैठी थी। उसने एक सिंपल लेकिन बहुत खूबसूरत ब्लैक ड्रेस पहनी थी — घुटनों से थोड़ा ऊपर,
कंधों पर पतली स्ट्रैप्स, और गले में हल्का सा V-कट। उसके बाल खुले थे, हल्का मेकअप, और होंठों पर हल्का गुलाबी लिपस्टिक।
वो बहुत खूबसूरत लग रही थी... लेकिन उसका चेहरा थोड़ा तनावग्रस्त था।
“सैम... ये सही है ना?” उसने बहुत धीरे से पूछा। “मैं थोड़ा डर रही हूँ।”
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और हल्का दबाया।
“रिलैक्स बेबी। हम सिर्फ मिल रहे हैं। बात करेंगे। पसंद आया तो आगे, नहीं आया तो कॉफ़ी पीकर निकल जाएँगे। कोई ज़ोर नहीं है।”
नेहा ने हल्का सिर हिलाया, लेकिन उसकी उँगलियाँ अभी भी टेबल क्लॉथ को पकड़े हुए थीं।
ठीक सात बजकर दस मिनट पर दरवाज़ा खुला।
मैंने उसे अच्छे से देखा।
बहुत पतला... बहुत ही पतला।
चेहरे पर हड्डियाँ साफ़ नज़र आ रही थीं। हाथ-पैर इतने दुबले कि लग रहा था जैसे शरीर में खून ही नहीं है। कंधे झुके हुए, कमर पतली। बाल थोड़े सफ़ेद मिश्रित, चेहरा थका हुआ।
बिल्कुल उस मुकेश की तरह लग रहा था — जो हर फिल्म में पहले ही मर जाता है। या सिगरेट के पुराने विज्ञापनों में वो पतला-दुबला आदमी जो सिगरेट पीते हुए दिखाया जाता था।
नेहा भी उसे देख रही थी। उसकी आँखों में एक पल के लिए हैरानी थी, लेकिन वो तुरंत संभल गई।
बेकार आदमी ने पहले मेरी तरफ देखा, फिर नेहा की तरफ।
आदमी हमारी टेबल की तरफ बढ़ा।
उसने नेहा को ऊपर से नीचे तक देखा। फिर नेहा की तरफ इशारा करके थोड़ी हिचकिचाती हुई आवाज़ में बोला,
“नेहा...?”
नेहा ने हल्का सा सिर हिलाया।
“हाँ... मैं नेहा हूँ।”
वो आदमी एक पल के लिए रुक गया। उसके चेहरे पर हैरानी साफ़ दिख रही थी। शायद उसे उम्मीद नहीं थी कि हम सच में आएँगे। उसे लग रहा था कि ये इंटरनेट का कोई मज़ाक है। उसकी आँखें थोड़ी फड़क रही थीं।
वो धीरे-धीरे कुर्सी पर बैठ गया।
उसकी आवाज़ काँप रही थी।
“अरे यार... तुम तो बहुत खूबसूरत हो।”
उसने नेहा को फिर से देखा, जैसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा हो।
“तुम ये सब क्यों कर रही हो? मुझे लगा था या तो कोई आएगा नहीं... या आएगा तो बहुत बदसूरत होगा।”
उसकी आवाज़ में अभी भी थोड़ी कंपकंपी थी। जैसे वो डर रहा हो कि कहीं ये सब सच न हो जाए।
“बहनचोद... तू क्यों अपनी बीवी के साथ ये सब करने दे रहा है?”
वो इतनी जल्दी और पतली आवाज़ में बोल रहा था कि कुछ शब्द तो गड़बड़ हो रहे थे। लेकिन गाली साफ़ सुनाई दी।
नेहा मेरी तरफ देखने लगी। उसके चेहरे पर थोड़ी हैरानी थी।
मैं चुपचाप बैठा रहा।
बेकार आदमी अभी भी अपनी पतली, काँपती हुई आवाज़ में कुछ बोल रहा था, लेकिन अब हम उसकी बातें ठीक से सुन भी नहीं रहे थे।
नेहा भी मेरी तरफ देख रही थी।
उसकी आँखों में एक ही बात साफ़ लिखी थी — “यहाँ से निकल जाएँ।”
मुझे भी वैसा ही लग रहा था।
ये आदमी कीबोर्ड पर तो बहुत बोलता था, गालियाँ देता था, रफ़ बातें करता था... लेकिन सामने बैठकर देखने पर बिल्कुल फीका लग रहा था।
आवाज़ पतली, काँपती हुई।
न कोई कमांडिंग टोन, न कोई डॉमिनेंट फील।
बस एक दुबला-पतला, घबराया हुआ आदमी जो खुद को संभाल नहीं पा रहा था।
हम दोनों मन ही मन सोच रहे थे कि थोड़ी बहुत बात करके यहाँ से निकल जाएँ।
निकल जाएँ।
बेकार आदमी ने अचानक नेहा की तरफ देखा और पतली आवाज़ में पूछा,
“आज खाने में क्या बनाया है?”
नेहा एक पल के लिए रुक गई।
फिर उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान आ गई।
मुझे लगा वो सोच रही होगी — “ये वही है... जिससे मैं रोज़ घंटों बात करती हूँ।”
भले ही उसके दिमाग में उसका चेहरा कुछ और था, लेकिन ये वही आदमी था। जिसके साथ वो दिन के कई घंटे बिताती थी। उसकी बातों में एक मोह था। उसी मोह की वजह से आज वो यहाँ मिलने आई थी।
हालाँकि जैसा उसने सोचा था, वो बिल्कुल वैसा नहीं था।
नेहा ने धीरे से जवाब दिया,
“आज तो बाहर आए हैं... खाने का प्लान यहीं का है।”
वो आदमी ने हल्का सिर हिलाया।
“अच्छा...”
फिर थोड़ी देर चुप रहा।
उसकी उँगलियाँ टेबल पर हल्के-हल्के काँप रही थीं।
नेहा ने उसे देखा और पूछा,
“तुम ठीक हो?”
उसने हाँ में सिर हिलाया और बोला,
“हाँ... बस... थोड़ा अजीब लग रहा है।
तुम... फोटो में जैसी लग रही थीं... उससे भी ज्यादा अच्छी हो।”
नेहा ने हल्का मुस्कुराया।
मैं चुपचाप बैठा देख रहा था।
ये वही आदमी था जिससे नेहा महीनों से चैट करती थी।
रोज़ घंटों बातें।
रोज़ गंदी-गंदी बातें।
नेहा चैट पर बात करती थी और मैं नीचे बैठकर उसकी चूत चाटता था।
वो उन बातों से इतनी नशे में हो जाती थी कि उसका पूरा शरीर काँपने लगता था।
बेकार आदमी बहुत साधारण कपड़ों में था।
पुरानी चेक वाली शर्ट, जो कहीं-कहीं फीकी पड़ चुकी थी, और साधारण पैंट।
ऐसे कपड़े आजकल कोई मॉडर्न अपर मिडिल क्लास आदमी नहीं पहनता।
उसने अपनी उम्र बताई — 46 साल।
बोला कि शादी हो चुकी है, बच्चे भी हैं।
मुझे लगा वो फाइनेंशियली भी ज्यादा अच्छा नहीं है।
चेहरे पर थकान साफ़ दिख रही थी, जैसे रोज़ की मेहनत और टेंशन का बोझ हो।
नेहा उसे देख रही थी।
उसकी आँखों में एक अजीब सा भाव था — जैसे वो अभी भी चैट वाला “बेकार आदमी” ढूँढ रही हो, लेकिन सामने बैठा इंसान उससे काफी अलग था।
वो आदमी ने फिर नेहा की तरफ देखा और पतली आवाज़ में बोला,
“तुम... सच में बहुत खूबसूरत हो।
मुझे लगा था शायद फोटो एडिटेड होंगी... लेकिन नहीं... तुम वाकई में वैसी ही हो।”
नेहा ने हल्का मुस्कुराते हुए कहा,
“थैंक यू।”
नेहा ने बेकार आदमी की तरफ देखकर धीरे से कहा,
“तुम वैसे नहीं लग रहे जैसे मैंने सोचा था।”
वो आदमी ने हल्का सा मुस्कुराया। फिर उसकी पतली, थोड़ी काँपती हुई आवाज़ में बोला,
“मुझे नहीं लगा था कि वहाँ सामने कोई लड़की होगी।
हमने कभी ऑडियो पर बात नहीं की। मुझे हमेशा लगता था कि शायद कोई लड़का है... जो 45 साल के एक आदमी के साथ मज़े कर रहा है।
मुझे बातों में मज़ा आता था। वो डर्टी टॉक अच्छी लगती थी।
पर मुझे एक प्रतिशत भी चांस नहीं था कि सामने तुम जैसी कोई खूबसूरत लड़की होगी।
मुझे लगता था कि शायद लड़की हो सकती है, मगर वो बहुत गंदी और मोटी टाइप की होगी।
मुझे नहीं पता था... और ये मेरे लिए अच्छा ही काम किया।
अब ये मुझे पता होता कि सामने तुम जैसी खूबसूरत लड़की है और ये सब सच में है... एक पति-पत्नी, एक कपल के साथ ये सब करना चाहता हूँ... तो शायद मुझमें वो कॉन्फिडेंस ही नहीं आता तुमसे बात करने का।
मैं ऑलरेडी 46 साल का हूँ।
मुझे शाम के दो-तीन घंटे रात में मिलते थे। मैं उसमें तुमसे बात किया करता था।
ये तो बस मैंने चांस लिया यहाँ मिलने के लिए।”
उसकी आवाज़ में शर्म, हैरानी और थोड़ी सी खुशी सब मिली हुई थी।
नेहा ने धीरे से उसकी तरफ देखा और बोली,
“क्या हुआ? इतना घबरा क्यों रहे हो?”
वो बस सिर हिला और बहुत धीमी आवाज़ में बोला,
“पहली बार... किसी खूबसूरत लड़की के सामने बैठा हूँ... वो भी जिसके साथ दो महीने से रोज़ गंदी-गंदी बातें करता था।”
नेहा मुस्कुराई।
उसके अंदर फिर वही वाली गर्मी उठने लगी थी।
हम तीनों चुपचाप बैठे थे।
इधर-उधर की बातें हो रही थीं — मौसम, गोवा, खाना, ट्रैफिक... लेकिन जिस काम के लिए हम मिले थे, वो बात बिल्कुल भी नहीं हो पा रही थी।
न वो कुछ बोल पा रहा था, न हम।
हमने उसकी फैमिली के बारे में पूछा।
उसने धीरे से बताया,
“मैं बहुत साधारण फैमिली से हूँ। मेरी एक बीवी है, दो बच्चे हैं। एक दसवीं में पढ़ता है, दूसरा सातवीं में।”
फिर वो अपने परिवार के बारे में बताने लगा।
मैं और नेहा चुपचाप सुन रहे थे।
धीरे-धीरे चीज़ें क्लियर होती जा रही थीं।
अब मुझे याद आ रहा था कि हम जब भी उससे इंग्लिश में कुछ पूछते थे, वो कभी इंग्लिश में जवाब नहीं देता था। हमेशा हिंदी में, अपनी रफ़ लैंग्वेज में, गाली-गलौज के साथ जवाब देता था — जैसे कोई एक्ट कर रहा हो।
अब लग रहा था कि शायद उसे इंग्लिश आती ही नहीं थी।
या वो उस स्टेटस से बिलॉन्ग नहीं करता था जिस स्टेटस से हम बिलॉन्ग करते थे।
उसने बताया कि वो एक छोटी सी फैक्ट्री में काम करता है। सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक। घर पर बीवी और बच्चे इंतज़ार करते रहते हैं।
नेहा ने उसे ध्यान से देखा।
उसकी आँखों में अब न तो वो पुरानी चैट वाली उत्तेजना थी, न कोई खास भाव।
वो बस एक साधारण, मेहनतकश, 46 साल का आदमी था — जो चैट पर तो बहुत बोलता था, लेकिन सामने बैठकर घबरा रहा था।
मुझे अब साफ़ दिख रहा था — वो शायद कोई ब्लू कॉलर जॉब करता था। कोई फैक्ट्री या छोटी दुकान वाला काम।
अब हमारे दिमाग में बिल्कुल कहीं भी कोई एक्साइटमेंट नहीं बचा था।
जब हमने उसे इस फाइव-स्टार होटल में मिलने के लिए कहा, तो वो उस टाइम भी हिचकिचाया था।
“ये तो बहुत दूर है मेरी जगह से... हम कहीं छोटी जगह पे मिलते हैं ना, जैसे कोई साधारण रेस्टोरेंट या मैकडॉनल्ड्स वगैरह पे।”
नेहा ने धीरे से कहा,
“वहाँ आराम से बातें नहीं हो पाएगी।”
वो थोड़ा और हिचकिचाया, लेकिन आखिरकार मान गया।
शायद उसके दिमाग में ये डर था कि कहीं बिल उसे पे करना पड़े। पता नहीं कितने पैसे लगेंगे।
थोड़ी देर बाद वेटर आया।
हमने उसे बोला,
“दो बीयर ले आओ।”
फिर हमने उसकी तरफ देखा।
उसने हल्का सा सिर हिलाया।
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“चलो, तीन ले आओ।”
वेटर चला गया।
हम थोड़ी देर और बैठे रहे।
तीन बीयर आ चुकी थीं।
नेहा और मुझे एकदम से उठकर जाना अजीब लग रहा था।
उसने एफर्ट लिया था हमसे मिलने का।
कर्टेसी बनती थी कि उसके साथ थोड़ी देर तो बैठें।
दो महीने से नेहा उसके साथ चैट करती थी, इमोशनल कनेक्शन भी था।
हमने सोचा — चलो, बीयर पीते हैं, इधर-उधर की बातें करते हैं।
उसे अच्छा लगेगा।
धीरे-धीरे हम तीनों को हल्का-हल्का नशा चढ़ने लगा था।
फिर दारू के बाद शायद उसमें थोड़ी हिम्मत आई।
उसने नेहा की तरफ देखा और थोड़ी काँपती हुई आवाज़ में पूछा,
“क्या तुम सच में वो सब करना चाहते हो... जो तुम नेट पर करते थे?”
नेहा ने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा।
नेहा चुप थी।
उसने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में एक सवाल था — जैसे वो चाहती थी कि मैं जवाब दूँ।
मैंने हल्का सा गला साफ़ किया और बोला,
“हमारा ड्रीम तो यही था कि हम किसी के साथ ये सब करना चाहते हैं।”
बेकार आदमी ने अचम्भे से हम दोनों को देखा।
उसकी पतली आवाज़ में हैरानी साफ़ झलक रही थी,
“मगर क्यों?
ये तो इतनी खूबसूरत है... और तुम पैसे वाले भी लगते हो।
मुझे नहीं लगता कि तुम पैसे के लिए ये सब करना चाहते हो।”
वो बोलते हुए बार-बार नेहा को देख रहा था।
मैंने हल्के से मुस्कुराकर कहा,
“पैसे की बात नहीं है। हम बस... नया कुछ ट्राई करना चाहते थे। कुछ अलग।”
मैंने हल्के से कंधे उचकाए और आगे बोला,
“क्योंकि हम दोनों को ये एक्साइटमेंट पसंद है। एक नया आदमी... नई बातें... नया माहौल। नेहा बहुत खूबसूरत है, ये सच है। लेकिन हमें बस... इस तरह के रिस्क और थ्रिल की आदत हो गई है।”
बेकार आदमी ने हमें ध्यान से देखा। उसकी पतली आँखें थोड़ी और चौड़ी हो गईं।
फिर उसने अगला सवाल किया,
“क्या तुमने ये पहले भी कभी किया है... किसी के साथ?”
मैंने हल्का सा सिर हिलाया और सीधे जवाब दिया,
“पहली बार हमने ऐसा किया है।”
हम एक इटालियन रेस्टोरेंट में थे।
जैज़ म्यूजिक हल्के से बज रहा था।
हमने जानबूझकर कॉर्नर वाली टेबल चुनी थी, ताकि आराम से बात हो सके।
लाइट्स मद्धिम थीं।
हम तीनों जानते थे कि आज की मीटिंग सिर्फ मिलने के लिए नहीं थी।
नेहा को भी पता था।
उसे भी लग रहा था कि शायद आज इससे ज़्यादा कुछ नहीं होने वाला।
मगर उसे ये भी लगता था कि शायद आज मिलने के बाद हम उसे दूसरा चांस नहीं देंगे।
क्योंकि उसकी कद-काठी उसे खुद पता थी।
ना वो हैंडसम था, ना डॉमिनेटिंग टाइप।
ना उसका शरीर ऐसा था कि किसी को इम्प्रेस कर सके।
वो बस चुपचाप बैठा था।
बार-बार नेहा को देखता, फिर नज़रें झुका लेता।
उसकी उँगलियाँ बीयर के ग्लास को कसकर पकड़े हुए थीं।
उसकी बातें खत्म ही नहीं हो रही थीं।
ऐसा लग रहा था कि ये उसका आखिरी चांस है — अपने से हाई सोसाइटी में बैठने का।
आते-जाते वेटर की नज़रें हम महसूस कर रहे थे।
वे उसे नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे।
मगर वहाँ लोग कम ही थे, इसलिए वेटर भी तब आ रहे थे जब हम कुछ मंगवा रहे थे।
बेकार आदमी ने अचानक मेरी तरफ देखा और थोड़ी हिचकिचाती हुई आवाज़ में पूछा,
“क्या मैं नेहा को और करीब से देख सकता हूँ?”
हमने ये एक्सपेक्ट नहीं किया था।
मैंने एक पल सोचा।
फिर अपनी कुर्सी से उठा और बोला,
“मैं वॉशरूम जा के आता हूँ।”
ये एक इशारा था।
मैं वहाँ से थोड़ी देर के लिए चला गया।
अपनी बीवी को उस आदमी की कंपनी में छोड़कर... जिसे वो चैट पर “रंडी” नाम से बुलाता था।
मैं सोच रहा था — जब मैं वापस आऊँगा तो क्या होगा?


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