08-05-2026, 12:51 PM
अब आगे .............
मैं भाभी की मनोस्थिति समझ गया था
और मुझे लगने लगा था की अब दिल्ली दूर नहीं
जैसे तैसे मै शाम होने का इंतज़ार करने लगा
टेबल पर हम सभी खाना खा रहे की भाभी उठ कर पापाजी को दाल परोसने गयी जैसे ही वो मेरे पास से गुजरी मैंने उसकी गांड मैं एक ऊँगली घुसा दी
मेरी इस हरकत से वो उछाल सी गयी और गिरने लगी तो पिताजी ने उठ कर उन्हें संभल लिया
पर मैंने देखा की सँभालने के चक्कर मैं पापाजी का हाथ उनकी नंगी कमर पर आ गया और दूसरा हाथ उनके बोबे पर
भाभी जैसे तैसे सम्भली और हम सब ने खाना ख़तम कर किया
मैं अब सबके सोने का इंतजार करने लगा
रात साढ़े दस बजे जब मुझे लगा की सब सो चुके हैं या फिर अपने अपने कमरे मैं व्यस्त हैं तो मैंने भाभी को आने का मैसेज किया
वो आयी पर थोड़ी गुस्से मैं थी
आते ही बोली - ललित ये क्या हरकत की तुमने आज शाम
मैं - मैंने क्या किया भाभी
भाभी - तुमने मेरी गाँण्ड ..................
मैं - क्या भाभी
भाभी - कुछ नहीं
मैं - खुल कर बोलो भाभी तभी तो मजा आएगा
भाभी - मैं नहीं बोलती ऐसे गंदे शब्द
मैं - अच्छर भाभी उस रात तो भैया का लौड़ा लेते वक्त आप बहुत बोल रही थी - चोदो ललित अपनी रंडी भाभी को जम कर चोदो, फाड् दो मेरी चूत को
और अभी क्या हो गया मेरी रंडी भाभी
भाभी - शर्म से पानी पानी हो गयी
मैं - यहाँ आ कर बैठो मेरी रन... ... भाभी
भाभी - जबान संभल कर
मैं ये सब भी सिर्फ तेरे भैया के आने तक करुँगी उसके बाद तू मुझे ब्लैकमेल नहीं करेगा
यही डील हुई हैं अपनी
मैं ठीक हैं भाभी पर तब तक आज के बचे हुए बीस मिनट का मजा तो लेने दो
भाभी मेरे बगल मैं आ कर बैठ गयी
मैं - भाभी आज तो आपको मज्जा आ गया होगा
भाभी - क्यों
मैं - सुबह मैं आपको गरम किया और अभी पापाजी ने आके गुदाज बोबे मसल दिए
भाभी - - पापाजी ने सिर्फ मुझे संभाला था मसला नहीं था
मैं - पर आपको मज्जा तो आय न
भाभी - सब लोग तेरी तरह नहीं सोचते
मैं - ठीक हैं, और उनके एक बोबे पर हाथ रख दिया
भाभी आपको मज्जा आया या नहीं मेरी सांसे उनकी गर्दन पर थी और मेरा हाथ उनकी छाती को सहला रहा था
भाभी - नहीं मुझे कोई मजा नहीं आया
मैं - भाभी आप झूठ बोल रही हो
मैंने ऐसे इसलिए कहा की छाती पर हाथ फेरने की वजह से उनके निप्पल कड़क होने लगे थे
वो आज भी गाउन पेहेन कर आयी थी और मैं सिर्फ कपड़ो के ऊपर से ही उनको छु सकता था
भाभी - नहीं मैं झूठ नहीं बोल रही
ये सुन कर मैंने जैसे ही अपनी गरम साँस उनकी गार्डा पर छोड़ी उन्होंने अपना मू मेरी तरफ फेर लिया
उनकी इस हरकत से उनके होठ मेरे होठ के पास आ गए
उनके गुलाबी होठो को इतने नजदीक से देखने और उनके उरोज पर हाथ फेरने से मेरा लौड़ा खड़ा होने लगा
मैं उन्हें किस करना चाहता था और मैंने अपनी जीभ बहार निकाल कर उनके गुलाबी होठो को छेड़ दिया
मेरी इस हरकत से उनका हाथ अचानक से फिसला और मेरे खड़े लौड़े पर आ गया जिसको उन्होंने मुट्ठी में भर कर भींच दिया
मेरी सिसकारी निकल गयी और ऐसा लगा जैसे मेरा माल ही निकल जायेगा
मेरी सिसकारी सुन कर भाभी ने अपना हाथ हटा लिया और मुझे सॉरी बोलै
मैं - कोई बात नहीं भाभी मुझे तो अच्छा लगा अब ये बताओ आपको कैसा लगा
भाभी - चुप कर तेरे पास बस पांच मिनट और बचे हैं
मैं - भाभी, आपके साथ इस तरह गुजरा हर लम्हा मस्त हैं
मैं तो ऐसे ही आपको हमेशा प्यार कर सकता हूँ
और मै भाभी से लिपट गया
ये पहली बार था की मैंने भाभी को सामने से गले लगाया था, उनके कड़क कड़क गुजाद मम्मे मेरी छाती पर गढ़ रहे थे
उनकी सांसे मेरी गर्दन पर थी और मैं उनकी पीठ पर हाथ फेर रहा था
और फिर मैंने अपने दोनों हाथ उनकी गांड पर रखे और उनकी मोटी गांड को मसलने लगा
भाभी बेकाबू होने लगी थी और उनकी सांसे उखड रही थी
अचानक से उन्हें पता नहीं क्या हुआ और मुझे दूर छिटक कर वो बोली - तेरा आज का समय ख़तम
उनकी सांस फूल रही थी, और उनसे ज्यादा कुछ नहीं बोला जा रहा था
मैंने देखा नीचे लोअर मैं तम्बू बना हुआ हैं और वो भाभी की चूत पर को रहा था इसलिए उन्होंने मुझे भक्का दे दिया और दूर हो गयी
पर कोई बात नहीं आज भाभी ने मेरे लौड़े का एहसास दो बार कर लिया और मैं भी उनकी गांड दबा दी
भाभी मेरे लोअर मैं बने तम्बू को देख कर चली गयी
मैं उनके पीछे देखने गया की वो क्या करती हैं
उधर भाभी की हालत ख़राब थी
ये मुझे क्या हो गया था मेरी पैंटी कितनी गीली हो गयी
उसका लौड़ा सुनील के लौड़े से ज्यादा मोटा और बड़ा हैं
और यही सब सोच कर वो ऊँगली करती हुई सो गयी
और मैं उनके खयालो मैं खो गया और आ कर सो गया
मैं भाभी की मनोस्थिति समझ गया था
और मुझे लगने लगा था की अब दिल्ली दूर नहीं
जैसे तैसे मै शाम होने का इंतज़ार करने लगा
टेबल पर हम सभी खाना खा रहे की भाभी उठ कर पापाजी को दाल परोसने गयी जैसे ही वो मेरे पास से गुजरी मैंने उसकी गांड मैं एक ऊँगली घुसा दी
मेरी इस हरकत से वो उछाल सी गयी और गिरने लगी तो पिताजी ने उठ कर उन्हें संभल लिया
पर मैंने देखा की सँभालने के चक्कर मैं पापाजी का हाथ उनकी नंगी कमर पर आ गया और दूसरा हाथ उनके बोबे पर
भाभी जैसे तैसे सम्भली और हम सब ने खाना ख़तम कर किया
मैं अब सबके सोने का इंतजार करने लगा
रात साढ़े दस बजे जब मुझे लगा की सब सो चुके हैं या फिर अपने अपने कमरे मैं व्यस्त हैं तो मैंने भाभी को आने का मैसेज किया
वो आयी पर थोड़ी गुस्से मैं थी
आते ही बोली - ललित ये क्या हरकत की तुमने आज शाम
मैं - मैंने क्या किया भाभी
भाभी - तुमने मेरी गाँण्ड ..................
मैं - क्या भाभी
भाभी - कुछ नहीं
मैं - खुल कर बोलो भाभी तभी तो मजा आएगा
भाभी - मैं नहीं बोलती ऐसे गंदे शब्द
मैं - अच्छर भाभी उस रात तो भैया का लौड़ा लेते वक्त आप बहुत बोल रही थी - चोदो ललित अपनी रंडी भाभी को जम कर चोदो, फाड् दो मेरी चूत को
और अभी क्या हो गया मेरी रंडी भाभी
भाभी - शर्म से पानी पानी हो गयी
मैं - यहाँ आ कर बैठो मेरी रन... ... भाभी
भाभी - जबान संभल कर
मैं ये सब भी सिर्फ तेरे भैया के आने तक करुँगी उसके बाद तू मुझे ब्लैकमेल नहीं करेगा
यही डील हुई हैं अपनी
मैं ठीक हैं भाभी पर तब तक आज के बचे हुए बीस मिनट का मजा तो लेने दो
भाभी मेरे बगल मैं आ कर बैठ गयी
मैं - भाभी आज तो आपको मज्जा आ गया होगा
भाभी - क्यों
मैं - सुबह मैं आपको गरम किया और अभी पापाजी ने आके गुदाज बोबे मसल दिए
भाभी - - पापाजी ने सिर्फ मुझे संभाला था मसला नहीं था
मैं - पर आपको मज्जा तो आय न
भाभी - सब लोग तेरी तरह नहीं सोचते
मैं - ठीक हैं, और उनके एक बोबे पर हाथ रख दिया
भाभी आपको मज्जा आया या नहीं मेरी सांसे उनकी गर्दन पर थी और मेरा हाथ उनकी छाती को सहला रहा था
भाभी - नहीं मुझे कोई मजा नहीं आया
मैं - भाभी आप झूठ बोल रही हो
मैंने ऐसे इसलिए कहा की छाती पर हाथ फेरने की वजह से उनके निप्पल कड़क होने लगे थे
वो आज भी गाउन पेहेन कर आयी थी और मैं सिर्फ कपड़ो के ऊपर से ही उनको छु सकता था
भाभी - नहीं मैं झूठ नहीं बोल रही
ये सुन कर मैंने जैसे ही अपनी गरम साँस उनकी गार्डा पर छोड़ी उन्होंने अपना मू मेरी तरफ फेर लिया
उनकी इस हरकत से उनके होठ मेरे होठ के पास आ गए
उनके गुलाबी होठो को इतने नजदीक से देखने और उनके उरोज पर हाथ फेरने से मेरा लौड़ा खड़ा होने लगा
मैं उन्हें किस करना चाहता था और मैंने अपनी जीभ बहार निकाल कर उनके गुलाबी होठो को छेड़ दिया
मेरी इस हरकत से उनका हाथ अचानक से फिसला और मेरे खड़े लौड़े पर आ गया जिसको उन्होंने मुट्ठी में भर कर भींच दिया
मेरी सिसकारी निकल गयी और ऐसा लगा जैसे मेरा माल ही निकल जायेगा
मेरी सिसकारी सुन कर भाभी ने अपना हाथ हटा लिया और मुझे सॉरी बोलै
मैं - कोई बात नहीं भाभी मुझे तो अच्छा लगा अब ये बताओ आपको कैसा लगा
भाभी - चुप कर तेरे पास बस पांच मिनट और बचे हैं
मैं - भाभी, आपके साथ इस तरह गुजरा हर लम्हा मस्त हैं
मैं तो ऐसे ही आपको हमेशा प्यार कर सकता हूँ
और मै भाभी से लिपट गया
ये पहली बार था की मैंने भाभी को सामने से गले लगाया था, उनके कड़क कड़क गुजाद मम्मे मेरी छाती पर गढ़ रहे थे
उनकी सांसे मेरी गर्दन पर थी और मैं उनकी पीठ पर हाथ फेर रहा था
और फिर मैंने अपने दोनों हाथ उनकी गांड पर रखे और उनकी मोटी गांड को मसलने लगा
भाभी बेकाबू होने लगी थी और उनकी सांसे उखड रही थी
अचानक से उन्हें पता नहीं क्या हुआ और मुझे दूर छिटक कर वो बोली - तेरा आज का समय ख़तम
उनकी सांस फूल रही थी, और उनसे ज्यादा कुछ नहीं बोला जा रहा था
मैंने देखा नीचे लोअर मैं तम्बू बना हुआ हैं और वो भाभी की चूत पर को रहा था इसलिए उन्होंने मुझे भक्का दे दिया और दूर हो गयी
पर कोई बात नहीं आज भाभी ने मेरे लौड़े का एहसास दो बार कर लिया और मैं भी उनकी गांड दबा दी
भाभी मेरे लोअर मैं बने तम्बू को देख कर चली गयी
मैं उनके पीछे देखने गया की वो क्या करती हैं
उधर भाभी की हालत ख़राब थी
ये मुझे क्या हो गया था मेरी पैंटी कितनी गीली हो गयी
उसका लौड़ा सुनील के लौड़े से ज्यादा मोटा और बड़ा हैं
और यही सब सोच कर वो ऊँगली करती हुई सो गयी
और मैं उनके खयालो मैं खो गया और आ कर सो गया


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