07-05-2026, 08:54 AM
तुम खयालों में यूं समाए हो
दिल के शहर में घर बसाए हो
रौनकों की तुम फुलवारी हो
लगता है इत्र से नहा कर आए हो
हर तरफ तुम ही तुम क्यों दिखते हो
क्या कोई शीशमहल बनाए हो
तुम से नज़र हटे तो दुनियां देखूं
कोई जादू सीख तो नहीं आए हो।
अंजु दिल से दिल तक
दिल के शहर में घर बसाए हो
रौनकों की तुम फुलवारी हो
लगता है इत्र से नहा कर आए हो
हर तरफ तुम ही तुम क्यों दिखते हो
क्या कोई शीशमहल बनाए हो
तुम से नज़र हटे तो दुनियां देखूं
कोई जादू सीख तो नहीं आए हो।
अंजु दिल से दिल तक


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