06-05-2026, 01:39 PM
लड़की के माता-पिता तुरंत राजी हो गए और पूजा का सारा सामान मँगवा लिया।
मैंने चौकी लगाई और बैठ गया। लड़की की माँ गीता, लड़की और उसका पिता मेरे सामने बैठ गए।
पूजा शुरू हुई। कुछ देर बाद मैंने कहा, “तुम्हारी लड़की पूरी तरह ठीक हो सकती है।”
माता-पिता के चेहरे पर खुशी छा गई।
“लेकिन…” मैंने जानबूझकर रुककर कहा।
गीता ने तुरंत पूछा, “लेकिन क्या बाबा?”
“मैं अपनी सिद्धि से अपने गुरु को अपने ऊपर बुलाऊंगा। वही इसे ठीक कर सकते हैं। लेकिन उनके जो भी आदेश होंगे, उन्हें बिना सवाल किए मानना पड़ेगा। अगर बीच में कोई विघ्न पड़ा या आपने उनकी बात नहीं मानी, तो फिर कुछ नहीं हो पाएगा। तैयार हो तो बताओ।”
दोनों ने तुरंत सिर हिलाया, “हम तैयार हैं बाबा। आप पूजा शुरू कीजिए।”
मैंने अपना काम शुरू कर दिया। अब मुझे कोई डर नहीं था।
थोड़ी देर बाद मैंने मोटी, गुरु जैसी आवाज में कहा, “बच्चा!”
गीता ने काँपते स्वर में जवाब दिया, “जी बाबा…”
“ये कलावा ले, इसे अपने पति को दे दे। फिर ये कलावा लेकर रात के ठीक 12 बजे 121 बार ‘******’ का जाप करते हुए गाँव के बाहर बरगद के पेड़ पर बाँध आए।”
लड़की का पिता कलावा लेकर तुरंत निकल गया।
मैंने फिर आँखें बंद कर लीं। कुछ देर बाद बोला, “बेटा, कमरे की सारी खिड़कियाँ और दरवाजे बंद कर दो। तुम दोनों के शरीर पर जो भी रबर या लोहे की चीज है, उसे उतार दो।”
गीता ने पूछा, “यहीं या अंदर जाकर?”
“अंदर जाकर कर लो। और अब से सिर्फ सफेद कपड़े ही पहनने होंगे। मेरे लिए भी सफेद धोती ले आओ।”
गीता ने वैसा ही किया।
उसकी उम्र 34 साल थी, पर उसका शरीर पूर्ण रूप से भरा-भरा और आकर्षक था। उसने मुझे धोती देकर अंदर जाकर कपड़े बदल लिये। जब वह और उसकी बेटी बाहर आईं, तब तक मैंने भी अपने सारे कपड़े उतारकर सिर्फ सफेद धोती पहन ली थी।
दोनों माँ-बेटी सिर्फ साड़ी पहने हुए थीं। जैसे ही वे मेरे पास आईं, मेरा लिंग खड़ा हो गया। मन में एक ही विचार घूम रहा था- अभी दोनों को चोद डालूँ। लेकिन मैंने धैर्य रखा।
मैंने गीता से कहा, “गीता, अब जब तक मैं न कहूँ, तब तक कोई भी इस जगह से नहीं हिलेगा।”
गीता ने सहमति में सिर हिलाया। उसी पल उसका पल्लू सरक गया और उसके भरे-भरे 36 साइज के स्तन एक पल के लिए साफ दिख गए। उसने झट से पल्लू संभाल लिया।
दोपहर के एक बज चुके थे।
अब मैंने अपना असली जाल बिछाना शुरू कर दिया।
मैंने गीता को आटे में रोली-सिंदूर मिलाकर दिया और मंत्र पढ़ते हुए उसका हाथ पकड़ लिया। फिर आटे में पानी डालकर उसे मथने लगा। गीता समझ रही थी कि मैं कोई सिद्धि कर रहा हूँ। जब आटा गाढ़ा हो गया, तो मैंने उसका हाथ पकड़कर सीधे उसकी साड़ी के ऊपर, चूत पर रख दिया।
गीता कुछ कहने को हुई, लेकिन अचानक चुप हो गई। शायद उसे मेरी पहले कही हुई बात याद आ गई थी - कोई विघ्न नहीं पड़ना चाहिए।
**********************
जुड़े रहिये दोस्तों................
मैंने चौकी लगाई और बैठ गया। लड़की की माँ गीता, लड़की और उसका पिता मेरे सामने बैठ गए।
पूजा शुरू हुई। कुछ देर बाद मैंने कहा, “तुम्हारी लड़की पूरी तरह ठीक हो सकती है।”
माता-पिता के चेहरे पर खुशी छा गई।
“लेकिन…” मैंने जानबूझकर रुककर कहा।
गीता ने तुरंत पूछा, “लेकिन क्या बाबा?”
“मैं अपनी सिद्धि से अपने गुरु को अपने ऊपर बुलाऊंगा। वही इसे ठीक कर सकते हैं। लेकिन उनके जो भी आदेश होंगे, उन्हें बिना सवाल किए मानना पड़ेगा। अगर बीच में कोई विघ्न पड़ा या आपने उनकी बात नहीं मानी, तो फिर कुछ नहीं हो पाएगा। तैयार हो तो बताओ।”
दोनों ने तुरंत सिर हिलाया, “हम तैयार हैं बाबा। आप पूजा शुरू कीजिए।”
मैंने अपना काम शुरू कर दिया। अब मुझे कोई डर नहीं था।
थोड़ी देर बाद मैंने मोटी, गुरु जैसी आवाज में कहा, “बच्चा!”
गीता ने काँपते स्वर में जवाब दिया, “जी बाबा…”
“ये कलावा ले, इसे अपने पति को दे दे। फिर ये कलावा लेकर रात के ठीक 12 बजे 121 बार ‘******’ का जाप करते हुए गाँव के बाहर बरगद के पेड़ पर बाँध आए।”
लड़की का पिता कलावा लेकर तुरंत निकल गया।
मैंने फिर आँखें बंद कर लीं। कुछ देर बाद बोला, “बेटा, कमरे की सारी खिड़कियाँ और दरवाजे बंद कर दो। तुम दोनों के शरीर पर जो भी रबर या लोहे की चीज है, उसे उतार दो।”
गीता ने पूछा, “यहीं या अंदर जाकर?”
“अंदर जाकर कर लो। और अब से सिर्फ सफेद कपड़े ही पहनने होंगे। मेरे लिए भी सफेद धोती ले आओ।”
गीता ने वैसा ही किया।
उसकी उम्र 34 साल थी, पर उसका शरीर पूर्ण रूप से भरा-भरा और आकर्षक था। उसने मुझे धोती देकर अंदर जाकर कपड़े बदल लिये। जब वह और उसकी बेटी बाहर आईं, तब तक मैंने भी अपने सारे कपड़े उतारकर सिर्फ सफेद धोती पहन ली थी।
दोनों माँ-बेटी सिर्फ साड़ी पहने हुए थीं। जैसे ही वे मेरे पास आईं, मेरा लिंग खड़ा हो गया। मन में एक ही विचार घूम रहा था- अभी दोनों को चोद डालूँ। लेकिन मैंने धैर्य रखा।
मैंने गीता से कहा, “गीता, अब जब तक मैं न कहूँ, तब तक कोई भी इस जगह से नहीं हिलेगा।”
गीता ने सहमति में सिर हिलाया। उसी पल उसका पल्लू सरक गया और उसके भरे-भरे 36 साइज के स्तन एक पल के लिए साफ दिख गए। उसने झट से पल्लू संभाल लिया।
दोपहर के एक बज चुके थे।
अब मैंने अपना असली जाल बिछाना शुरू कर दिया।
मैंने गीता को आटे में रोली-सिंदूर मिलाकर दिया और मंत्र पढ़ते हुए उसका हाथ पकड़ लिया। फिर आटे में पानी डालकर उसे मथने लगा। गीता समझ रही थी कि मैं कोई सिद्धि कर रहा हूँ। जब आटा गाढ़ा हो गया, तो मैंने उसका हाथ पकड़कर सीधे उसकी साड़ी के ऊपर, चूत पर रख दिया।
गीता कुछ कहने को हुई, लेकिन अचानक चुप हो गई। शायद उसे मेरी पहले कही हुई बात याद आ गई थी - कोई विघ्न नहीं पड़ना चाहिए।
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