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Misc. Erotica सम्मान और बदला: Hindi Version Of Honor and Vengeance
रात का सन्नाटा और अंधेरे की जुर्रत—5
 
मीरा पूरी कोशिश कर रही थी कि वह शेर को बिस्तर पर लिटा दे और इस दमघोंटू नज़दीकी से पीछा छुड़ाए। लेकिन जैसे ही वह शेर को पीछे की तरफ धकेल कर बिस्तर पर लिटाने के लिए उसके ऊपर झुकी, उसके रेशमी रोब की डोरी ढीली होकर खुल गई।
 
मीरा का पीला रेशमी नाइटगाउन सामने से पूरी तरह खुल गया, जिससे उसके दूधिया, भारी और सुडौल स्तन शेर की भूखी नज़रों के सामने बिल्कुल नंगे हो गए। उत्तेजना और दवा के असर से उसके निप्पल्स पत्थर की तरह कड़े और सुर्ख लाल हो चुके थे, जो उस मखमली गोलाई पर किसी अंगारे की तरह चमक रहे थे।

 
शेर की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने एक पल के लिए अपनी कराहट रोक दी और मीरा के उन नंगे उभारों को निहारने लगा।

 
शेर: (एक गहरी आवाज़ में, मीरा की आँखों में देखते हुए) "उफ़... मेमसाब! ये... ये क्या देख रहा हूँ मैं? आपके ये मम्मूँ... ये तो बिल्कुल उस चोरनी जैसे ही हैं।"

 
मीरा का चेहरा शर्म और डर से सफेद पड़ गया। वह अपने हाथों से रोब को ढकने की कोशिश करने ही वाली थी कि शेर ने अपनी चाल चल दी।

 
शेर: "उस चोरनी के भी निप्पल्स ऐसे ही सुर्ख लाल थे... बिल्कुल इन्हीं की तरह। मैंने अंधेरे में भी महसूस किया था कि वो कितने कड़क थे।"

 
कहते ही शेर ने बिजली जैसी फुर्ती दिखाई। उसने अपने दोनों बड़े हाथ मीरा के उन नंगे स्तनों पर जमा दिए और उन्हें पूरी मुट्ठी में भर लिया।

 
मीरा: (सिसकते हुए) "आह! शेर... छोड़ो! ये... ये तुम क्या कह रहे हो? हाथ हटाओ... तुम पागल हो गए हो!"

 
शेर: (स्तनों को सहलाते हुए) "पागल नहीं हुआ हूँ मेमसाब... बस देख रहा हूँ कि कुदरत ने दो अलग औरतों को एक जैसा जिस्म कैसे दे दिया। देखिए तो सही... ये कैसे मेरे हाथों में समा रहे हैं। उस चोरनी को भी ऐसे ही पकड़ा था मैंने… वह भी ऐसे ही तड़प रही थी जैसे आप अभी काँप रही हैं।"

 
शेर ने मीरा के उन लाल निप्पल्स को अपनी उंगलियों के बीच मरोड़ दिया। दवा के नशे में डूबी मीरा का बदन धनुष की तरह तन गया।

 
मीरा ने सिसकते हुए मिन्नत की, "शेर, प्लीज छोड़ दो इन्हें... तुम्हें शर्म आनी चाहिए ऐसा काम करते हुए। मैं तुम्हारी मदद कर रही हूँ और तुम मेरा नाजायज़ फायदा उठा रहे हो।"

 
उसकी आँखों में आँसू भरे थे और आवाज़ में बेबसी साफ झलक रही थी।

 
शेर ने अपनी पकड़ ढीली करने के बजाय और भी मज़बूती से मीरा के उभरे हुए वक्षों को भींच लिया और बोला, "नहीं मीरा मेमसाहब, मैं तो सिर्फ तुलना कर रहा हूँ उस चोरनी से। मैं तो आपके अपमान के बारे में सोच भी नहीं सकता, लेकिन मेरी समझ में एक बात नहीं आती... कि अगर आपको इतनी ही ज़िल्लत महसूस हो रही है, तो आपके ये चूचे ऐसे खड़े क्यों हैं? ऐसा लगता है जैसे इन कोमल अंगों को मेरे सख्त हाथ ही पसंद आ रहे हैं।"

 
उसने एक हाथ मीरा के गले पर रखा और दूसरे हाथ से उसके कड़क हो चुके निप्पलों को अपनी उंगलियों के बीच बेरहमी से मरोड़ दिया। मीरा के मुँह से विरोध के बजाय एक दबी हुई सिसकी निकली, जिसने शेर के दावे को और हवा दे दी।

 
शेर [आंतरिक संवाद]: "अब कहाँ भागेंगी मेमसाब? अब तो उजाला है और आपके ये चूचे मेरे हाथों की कैद में हैं। आप सती हैं या चोरनी... आज इस बिस्तर पर यह फर्क पूरी तरह मिट जाएगा। आपके ये लाल निप्पल्स पुकार रहे हैं कि मैं इन्हें अपने दाँतों से काट लूँ। जो दवाई मैंने आपके शरीर में डाली है, वही आपकी वासना को बढ़ा रही है, लेकिन मेरा मकसद तो आपके दिमाग से खेलना है। मैं बार-बार यही कहूँगा कि आपका शरीर यही चाहता है।"

 
शेर ने मीरा की आँखों में आँखें डालकर अपनी पकड़ को थोड़ा और कड़ा किया। मीरा का जिस्म दवाई के असर और शेर की छुअन के बीच बुरी तरह कशमकश में था।

 
शेर ने उसके कानों के पास झुककर गहरी और भारी आवाज़ में फुसफुसाया, "देखिए अपनी हालत मेमसाब... ज़ुबान मना कर रही है, पर ये धड़कते हुए अंग गवाही दे रहे हैं कि इन्हें मज़ा आ रहा है। मैं तो बस वही कर रहा हूँ जिसकी माँग आपका यह जिस्म कर रहा है।"

 
शेर ने अपनी बाज़ुओं की ताकत का इस्तेमाल किया और मीरा को एक झटके में बिस्तर पर चित लिटा दिया और खुद उसके ऊपर सवार हो गया।

 
मीरा का बदन बिस्तर के गद्दे और शेर के भारी जिस्म के बीच दब गया।

 
शेर: (एक गहरी और मदहोश कर देने वाली आवाज़ में, मीरा के चेहरे के बिल्कुल करीब) "मेमसाब... यकीन नहीं हो रहा। उस चोरनी का बदन भी इतना ही गरम था... और उसके ये उभार भी बिल्कुल ऐसे ही मखमली थे।"

 
शेर ने बड़ी धीमी और नशीली हरकत के साथ अपनी गर्दन झुकाई। उसने अपना चेहरा मीरा के उन नंगे स्तनों के बीच दफन कर दिया और एक गहरी सांस ली। उसकी गर्म सांसें मीरा के लाल निप्पल्स को सहलाने लगीं।

 
शेर: "मैंने उस चोरनी को ऐसे ही नीचे दबाया था... और ऐसे ही उसकी इन लाल कलियों को अपनी ज़बान का स्वाद चखाया था। देखिए... क्या आप भी वैसा ही महसूस कर रही हैं जैसा वो चोरनी कर रही थी?"
 

मीरा ने ज़ोर से कराहते हुए कहा, "शेर, प्लीज छोड़ दो मुझे!"

 
शेर ने बहुत ही धीरे से अपनी जीभ निकाली और मीरा के एक सुर्ख निप्पल के चारों तरफ गोल-गोल घुमाना शुरू किया। वह बिल्कुल वैसी ही 'सेवा' दे रहा था जैसी उसने अंधेरे गलियारे में 'चोरनी' को दी थी। मीरा का शरीर एक झटके के साथ बिस्तर से ऊपर उठा और उसकी पीठ धनुष की तरह तन गई।

 
मीरा: (आँखें बंद करके, एक लंबी और तीखी सिसकी के साथ) "आह... शेर... उफ़... ये... ये तुम क्या कर रहे हो? रुक जाओ... म्म्म्म्म!"

 
शेर ने मीरा के विरोध को नज़रअंदाज़ करते हुए उस कड़क निप्पल को अपने होठों के बीच लिया और उसे बड़ी कोमलता से चूसने लगा। उसकी चूसने की गति इतनी धीमी और मद्धिम थी कि मीरा के रोम-रोम में उत्तेजना का सैलाब उमड़ने लगा। वह उसे चूस रहा था, अपनी जीभ से सहला रहा था और फिर अचानक उसे अपने दाँतों के बीच हल्का सा भींच लेता था।

 
शेर [आंतरिक संवाद]: 'तड़पिए मेमसाब... बिल्कुल वैसे ही जैसे उस चोरनी के भेष में तड़प रही थीं। आपकी ये सिसकियाँ और ये कड़क होते निप्पल्स मुझे सब बता रहे हैं। आज इस उजाले में मैं आपकी सती-सावित्री वाली छवि को धीरे-धीरे अपनी ज़बान से चाट जाऊँगा। आज मेरा मक़सद पूरा होगा, आज मैं आपकी इज़्ज़त को तार-तार कर दूँगा। अपने भाई शंकर की मौत का बदला आज पूरा होगा'

 
शेर का हाथ नीचे की तरफ फिसला और उसने मीरा की नंगी जाँघों को सहलाना शुरू किया। उसने अपनी नंगी जाँघ को मीरा की जाँघों के बीच इस तरह फँसाया कि उसकी रगड़ सीधे मीरा की भीगी हुई योनि पर पड़ रही थी।

 
शेर: (दूसरे स्तन की तरफ बढ़ते हुए) "बिल्कुल वही स्वाद... वही खुशबू। मेमसाब, अगर मैं अपनी आँखें बंद कर लूँ, तो मुझे लगेगा कि मैं उसी चोरनी के साथ हूँ। पर आप तो मेमसाब हैं… सती-सावित्री। फिर आपकी ये हालत... उफ़! आप तो उस चोरनी से भी ज़्यादा गरम हो रही हैं।"

 
यह कहते हुए उसने अपना पूरा मुँह मीरा के स्तन पर गड़ा दिया और उसे गहराई से चूसने लगा। मीरा के मुँह से एक बहुत तेज़ और लंबी कराह निकली, वह बेतहाशा तड़प उठी और हाँफते हुए बोली, "नहीं शेर... तुम गलत समझ रहे हो... आह! ऐसा मत करो..."

शेर ने मीरा की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया, उसका ध्यान तो बस उस गोरे मांस को अपने दाँतों और ज़बान से मसलने पर था।

 
शेर ने एक पल के लिए अपना मुँह हटाया और मीरा की आँखों में आँखें डालकर फुसफुसाया, "गलत मैं नहीं, गलत आपका यह बदन कह रहा है मेमसाब। देखिए तो सही, कैसे यह मेरे मुँह की गर्मी के लिए तरस रहा है।"

 
मीरा का हाथ अनजाने में ही शेर के बालों में उलझ गया और उसने शेर के सिर को अपने सीने पर और ज़ोर से दबा लिया। दवा और शेर के इस 'सेडक्टिव' प्रहार ने उसे सोचने-समझने की शक्ति से दूर कर दिया था। उसे नफरत करनी चाहिए थी, पर उसे सिर्फ उस वहशी सुख का अहसास हो रहा था जो उसके जिस्म को पिघला रहा था।

 
शेर ने अपना मुँह मीरा के दूसरे स्तन से हटाया, जो अब उसकी लार से चमक रहा था और उत्तेजना से पहले से भी ज़्यादा सख्त हो चुका था।

 
शेर ने मीरा की आँखों में अपनी नज़रें गड़ाईं। मीरा की पलकें भारी थीं और उसकी आँखों में दवा के नशे और उभरती हुई हवस का साफ़ असर दिख रहा था।

 
शेर: (एक गहरी और भारी आवाज़ में फुसफुसाते हुए) "मेमसाब... ऊपर से तो आप और वो चोरनी बिल्कुल एक जैसी निकलीं। पर असली तुलना तो अभी बाकी है। उस चोरनी की वो गहराई... वो इतनी रसीली और गरम थी कि मेरा हाथ जलने लगा था। क्या आपकी वो जगह भी वैसी ही सुलग रही है?"

 
मीरा ने मना करने के लिए अपना सिर हिलाना चाहा, पर उसके गले से सिर्फ एक बेबस कराह निकली।

 
मीरा: "नहीं... शेर... वहाँ नहीं... आह! म्म्म्म..."

 
शेर ने उसकी एक न सुनी। उसने अपना बड़ा और सख्त हाथ मीरा के पेट के नीचे, उस गीले पीले नाइटगाउन के ऊपर से सरकाया और सीधे उसकी जाँघों के बीच ले गया। जैसे ही शेर की उंगलियों ने मीरा की नीली थोंग के ऊपर से उस उभरे हुए और धड़कते हुए हिस्से को छुआ, मीरा का पूरा बदन बिस्तर पर उछल गया।

 
शेर: (एक शैतानी मुस्कान के साथ) "उफ़! मेमसाब... ये क्या? आपका ये कपड़ा तो पूरा भीगा हुआ है। जैसे कोई झरना बह रहा हो। उस चोरनी ने भी मुझे ऐसे ही गीला कर दिया था... पर आपकी ये गर्मी... ये तो आग लगा रही है।"

 
शेर ने अपनी उंगलियों को उस नीली थोंग के किनारे से अंदर घुसा दिया। उसकी उंगलियों का स्पर्श सीधे मीरा की उस रसीली और तपती हुई मखमली दरार से हुआ। वह हिस्सा इतना ज़्यादा गीला और गर्म था कि शेर की उंगलियाँ फिसलने लगीं।

 
शेर: (मीरा की योनि के भीतर अपनी उंगलियाँ धीरे-धीरे उतारते हुए) "आह... बिल्कुल वही अहसास! वही फिसलन... वही गर्मी। मेमसाब, अगर साहब को पता चले कि उनकी सती-सावित्री पत्नी अंदर से एक चोरनी की तरह सुलग रही है, तो उनका क्या होगा? देखिए... कैसे मेरी उंगलियाँ आपकी इस गहराई में डूबती जा रही हैं।"

 
शेर ने अपनी उंगलियों की गति बढ़ानी शुरू की। वह बिल्कुल वैसी ही लय में मीरा को सहला रहा था, जैसे उसने गलियारे में 'चोरनी' के साथ किया था। मीरा का संयम अब पूरी तरह टूट चुका था। वह अपनी जाँघें शेर के हाथ के इर्द-गिर्द कसने लगी और उसके मुँह से बेतहाशा सिसकियाँ निकलने लगीं।

 
मीरा (सिसकते हुए): "हे भगवान! मैं... मैं क्या कर रही हूँ? शेर मुझे छोड़ो, मैं सरताज की पत्नी हूँ, यह गलत है!"

 
शेर: "सरताज की पत्नी? मेमसाब, सरताज साहब तो इस वक्त ड्यूटी निभा रहे हैं, उन्हें क्या पता कि उनकी 'सती' पत्नी का जिस्म एक नौकर की उंगलियों की थाप पर कैसे नाच रहा है। और गलत क्या है? और मेमसाब, आपको पता है... वह चोरनी भी आपकी तरह ही छोटी कच्ची पैंटी पहनती थी। बिल्कुल ऐसी ही नीली और रेशमी, जो जरा से हाथ लगाते ही इधर-उधर खिसक जाती थी।"

 
शेर ने मीरा की उस नीली थोंग के पतले से किनारे को अपनी उंगली में फँसाकर थोड़ा और खींचा, जिससे वह उसके गोरे मांस में धंस गई। उसने अपनी आँखों में एक अजीब सी चमक के साथ मीरा के चेहरे को देखा, जो शर्म और उत्तेजना के मारे सुर्ख लाल हो चुका था।

 
उसने जारी रखा, "मेमसाब, अब तो यह थोंग भी गीली हो चुकी है और आपकी जाँघें भी मेरा साथ दे रही हैं। अब सरताज साहब की ड्यूटी को भूल जाइए और इस नौकर की सेवा का मज़ा लीजिए।"

 
शेर की उंगलियाँ अब थोंग के किनारे को पूरी तरह से हटाकर मीरा की उस छिपी हुई कोमलता को बिना किसी परदे के महसूस करने लगी थीं। मीरा का शरीर बेबसी में एक बार फिर बिस्तर पर थरथरा उठा, और उसके मुँह से निकली "नहीं" अब बस एक धीमी और मदहोश सिसकी बनकर रह गई थी।

 
शेर [आंतरिक संवाद]: 'अब आप कहीं नहीं जाएँगी मेमसाब। आपकी ये सिसकियाँ और ये सैलाब गवाही दे रहा है कि आज इस क्वार्टर में आपकी सती होने की कसम पूरी तरह टूट चुकी है। अब तो बस इस 'वफादार' का 7 इंच का लंड ही आपकी इस प्यास को मुकाम तक पहुँचाएगा।'

 
शेर ने मीरा की आँखों में आँखें डालीं, जहाँ अब सिर्फ धुंधली उत्तेजना बची थी। उसने अपनी उंगलियों को उस नीली थोंग के किनारों में फँसाया।

 
शेर: (एक हिंसक और भारी आवाज़ में) "ये पर्दा कैसा मेमसाब? उस चोरनी ने तो अपने सारे कपड़े उतार दिए थे जब मैंने उसे चखा था... फिर आप क्यों इस ज़ंजीर को पहने हुए हैं? चलिए... आज आपकी इस 'कच्ची' को उतार ही देते हैं। मैं भी तो देखूँ मेरी मेमसाब के नीचे वाले लब कैसे दिखते हैं।"

 
मीरा: (काँपती और टूटती आवाज़ में) "शेर... नहीं... उफ़... म्म्म्म!"

 
मीरा के कमज़ोर विरोध का शेर पर कोई असर नहीं हुआ। उसने एक ज़ोरदार झटके के साथ उस भीगी हुई नीली थोंग को बीच से दो टुकड़ों में फाड़ दिया। कपड़े के फटने की आवाज़ उस सन्नाटे में किसी बिजली की तरह गूँजी। अब मीरा का वह सबसे निजी और रसीला हिस्सा शेर की भूखी नज़रों के सामने बिल्कुल नंगा था।

 
शेर ने रुकने का नाम नहीं लिया। उसने मीरा के पीले नाइटगाउन और रोब को भी उसके कंधों से नीचे खींच दिया। अब मीरा उस बिस्तर पर पूरी तरह नग्न पड़ी थी—दूधिया गोरा बदन, सुर्ख लाल निप्पल्स और जाँघों के बीच वह गुलाबी दरार जो पसीने और रस से चमक रही थी।

 
शेर: (मीरा के नंगे जिस्म को ऊपर से नीचे तक निहारते हुए, राल टपकाते हुए) "कयामत... कयामत है आप मेमसाब! उस चोरनी का जिस्म तो बस एक परछाई थी, असली आग तो यहाँ है। आपकी ये जाँघें... ये पेट... और ये आपकी गुलाबी कली, जो इस तरह खिल रही है जैसे मेरा इंतज़ार कर रही हो।"

 
शेर ने अपना भारी और सख्त जिस्म मीरा के नंगे बदन पर पूरी तरह टिका दिया। नग्न जिस्म से नग्न जिस्म का वह स्पर्श इतना तीव्र था कि मीरा के मुँह से एक लंबी और गूँजती हुई सिसकी निकली। शेर ने अपना चेहरा मीरा की जाँघों के बीच झुकाया और उस महक को महसूस किया जो उसे पागल कर रही थी।

 
शेर: "आज इस क्वार्टर में कोई साहब नहीं हैं, कोई चोरनी नहीं है... सिर्फ ये वफादार और उसकी मालकिन की ये प्यासी जवानी है। देखिए मेमसाब... अब मैं वो करूँगा जो साहब कभी नहीं कर पाए।"

 
शेर ने अपनी जीभ निकाली और मीरा की उस नग्न और भीगी हुई गहराई के मुहाने पर फिरा दी। मीरा का पूरा शरीर बिस्तर पर मछली की तरह तड़प उठा।

 
शेर ने अपना सिर मीरा की जाँघों के बीच झुकाया। मीरा की गुलाबी गहराई अब रस से पूरी तरह तर थी और उससे उठती हुई मादक गंध शेर के दिमाग पर हावी हो रही थी।

 
शेर: (एक वहशी मुस्कान के साथ) "मेमसाब... उस चोरनी की गहराई तो शहद जैसी थी, पर आपकी... आपकी तो अमृत लग रही है। ज़रा देखूँ तो सही, क्या स्वाद भी वैसा ही है?"

 
कहते ही शेर ने अपनी जीभ मीरा की उस नग्न और सुलगती हुई दरार पर फिरा दी।

 
मीरा: "आआआह! शेर... उफ़... ये क्या... म्म्म्म!"

 
मीरा का बदन बिजली के झटके की तरह बिस्तर पर उछला। शेर की खुरदरी ज़बान जैसे ही उसकी कोमल और भीगी हुई दीवारों से टकराई, मीरा के दिमाग की बची-कुची नसें भी जवाब दे गईं। शेर रुकने वाला नहीं था। उसने अपनी ज़बान को मीरा की उस गुलाबी कली के भीतर गहराई तक उतार दिया और उसे चूसने लगा। वह उसे चख रहा था, उसे अपनी ज़बान से सहला रहा था, जैसे कोई प्यासा सदियों बाद पानी के सोते पर पहुँचा हो।

 
मीरा के हाथ बिस्तर की चादर को पूरी ताकत से भींच रहे थे। दवा के ज़हर ने उसके शरीर के उस हिस्से को इतना संवेदनशील बना दिया था कि शेर का हर 'चाटना' उसे पागल कर रहा था। उसके मुँह से अब विरोध की नहीं, बल्कि बेतहाशा लज़्ज़त की सिसकियाँ निकल रही थीं।

 
शेर: (मुँह हटाकर, राल टपकती आवाज़ में) "मेमसाब... आप तो अंदर से आग उगल रही हैं। उस चोरनी की प्यास तो मैंने बुझा दी थी, पर आपकी इस आग को शांत करने के लिए अब मुझे अपना सबसे बड़ा हथियार इस्तेमाल करना ही होगा।"

 
शेर अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था। उसने घुटनों के बल बैठकर अपनी लुंगी पूरी तरह खोलकर फेंक दी। उसका 7 इंच का सख्त, मोटा और नसों वाला लंड अब पूरी तरह नंगा होकर मीरा की आँखों के सामने फड़क रहा था। उसने मीरा की दोनों टाँगों को उठाया और उन्हें अपने चौड़े कंधों पर टिका दिया, जिससे मीरा की योनि का मुहाना पूरी तरह खुल गया।

 
शेर का वह विशाल और खौफनाक अंग मीरा की नज़रों के ठीक सामने था, जो उसकी आँखों में दहशत और एक अनचाही तड़प भर रहा था। मीरा ने जब उस काली और भारी चीज़ को अपनी ओर बढ़ते देखा, तो उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। शेर ने बिना किसी देरी के अपने हाथों से मीरा के गुलाबी मांसल लबों को और चौड़ा किया, जिससे उसकी गहराई का एक-एक हिस्सा शेर के सामने नुमाया हो गया।
 
उसने अपने लंड की कड़क नोक को मीरा के उस गीले और धड़कते हुए छेद पर टिका दिया। जैसे ही उस गर्म और सख्त खाल का स्पर्श मीरा की नाजुक गहराई से हुआ, मीरा के मुँह से एक लंबी और दर्द भरी सिसकी निकली, "ओह गॉड... शेर... नहीं!"

 
शेर: (अपने लंड की नोक को मीरा की भीगी हुई गहराई पर रगड़ते हुए) "तैयार हो जाइए मेमसाब... क्योंकि ये वफ़ादार कुत्ता अब अपनी मालकिन की इस गहराई को हमेशा के लिए अपना गुलाम बनाने जा रहा है। ये वो चोट है... जो उस चोरनी को भी नहीं मिली थी!"

 
शेर ने एक वहशी मुस्कान के साथ उसकी आँखों में झाँका और अपनी कमर को धीरे से आगे की ओर धकेला। वह विशाल अंग धीरे-धीरे मीरा की तंग गहराई को चीरता हुआ अंदर उतरने लगा। मीरा का जिस्म उस भारी दबाव से जैसे फटने को हो गया, उसकी टाँगें शेर के कंधों पर और भी कस गईं। शेर ने अपनी पकड़ मज़बूत की और एक गहरा झटका देते हुए आधा रास्ता तय कर लिया, जिससे मीरा के मुँह से केवल एक बेबस कराह निकल कर रूम की दीवारों में दफन हो गई।
 
मीरा: "आआआह! शेर... रुक... आह! मर गई... म्म्म्म!"

 
शेर ने अपनी कमर को थोड़ा और आगे धकेला, जिससे उसका भारी अंग मीरा की तंग दीवारों को और भी सख़्ती से छूने लगा। उसने एक गहरी और मदहोश साँस ली और अपनी कर्कश आवाज़ में फुसफुसाया, "कितनी टाइट हो आप... मज़ा आ गया! ऐसा लगता है जैसे किसी कुंवारी कली को चोद रहा हूँ मैं।"

 
शेर ने एक पल के लिए रुककर उसकी बेबसी का आनंद लिया और फिर एक ज़ोरदार झटका दिया, जिससे उसका अंग मीरा की गहराइयों में समा गया।

 
मीरा के मुँह से एक तीखी और लंबी कराह निकली, "आह्ह... शेर! मर जाऊँगी मैं!" पर शेर पर जैसे कोई जुनून सवार था। उसने मीरा की कमर को अपने मज़बूत हाथों से जकड़ लिया ताकि वह हिल न सके और फिर लगातार छोटे-छोटे पर गहरे झटके देने लगा। हर धक्के के साथ मीरा का शरीर बिस्तर पर ऊपर-नीचे हो रहा था, और शेर की वहशी मुस्कान उसकी जीत की गवाही दे रही थी। वह बार-बार उसे उस 'चोरनी' की याद दिला रहा था, ताकि मीरा का मानसिक प्रतिरोध पूरी तरह टूट जाए।

 
शेर का पसीना मीरा के नंगे सीने पर गिर रहा था, और कमरे का सन्नाटा अब सिर्फ शेर के धक्कों की 'चप-चप' और मीरा की गूँजती हुई सिसकियों से भरा हुआ था।

 
शेर ने मीरा की जाँघों को अपने कंधों पर और भी मजबूती से जकड़ लिया। उसका ७ इंच का अंग अब मीरा के भीतर पूरी तरह समा चुका था और घर्षण की गर्मी असहनीय होती जा रही थी।

 
शेर: (हाँफते हुए, एक जानवर की तरह) "आह... मेमसाब... देखिए... आपका ये वफादार... आज आपकी इस आग को हमेशा के लिए बुझा रहा है... उफ़! आप... आप तो अंदर से मुझे निगल रही हैं!"

 
शेर ने अपनी गति और भी तेज़ कर दी। मीरा का गोरा बदन बिस्तर पर बेतहाशा उछल रहा था। अंत में, एक ज़ोरदार और गहरे झटके के साथ, शेर ने अपनी पूरी मर्दानगी मीरा की कोमल दीवारों के भीतर तक धँसा दी। उसका पूरा शरीर अकड़ गया और उसने अपना सारा गर्म रस मीरा की रसीली गहराई में उड़ेल दिया।

 
शेर: "आआआह... मेमसाब!"

 
एक लंबी कराह के साथ शेर का शरीर ढीला पड़ने लगा। उसकी आँखों के सामने धुंध छाने लगी और वह गहरी थकावट और मदहोशी के समुद्र में डूबने लगा…

Deepak Kapoor
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RE: सम्मान और बदला: Hindi Version Of Honor and Vengeance - by Deepak.kapoor - 05-05-2026, 03:15 AM



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