02-05-2026, 08:32 PM
मम्मी अपनी चूत की तारीफ सुनके शर्मा रही थी। मम्मी ने अभी तक जो कुछ भी किया था। वो सब अँधेरे में किया था. जिसकी शायद उनकी शर्म थोड़ी कम हो गई थी। मगर आज दिन दहाड़े मुख्य दुकान के अंदर उनकी चूत देखना चाहता था।
शायद इसीलिए वो मुझसे अभी भी शर्मा रही थी। मम्मी की ये शर्म मुझे बहुत अच्छी लग रही थी। इसलिए मैंने सोचा. जब यहां तक मैंने मम्मी का इंतजार किया। तो थोड़ा इंतज़ार और सही।
मैं मम्मी की चूत सहलाये जा रहा था। मम्मी मेरा लंड पकड़े हुए सहला रही थी। मैं मम्मी के दूध चूसते हुए उनकी चूत सहला रहा था। मम्मी बार बार शटर की तरफ देख रही थी। क्यूकी बहार से गुजरती गाडियों की आवाज आ रही थी।
जिसे मम्मी का ध्यान बार-बार शटर की तरफ जा रहा था। तभी मम्मी बोली.
मम्मी- बेटा, हाँ ये सब ठीक नहीं है। मुझे बहुत डर लग रहा है। कहीं कोई आ गया तो.
मैं- मम्मी, आप डर क्यों रहे हो? ये दुकान अपनी है. कोई नहीं आएगा. और वैसे भी आपके नीचे से बहुत पानी आ रहा है। ये देखो.
अपनी बात बोलते ही मैंने अपना हाथ मम्मी को दिखाया। जो मम्मी के चूत के पानी से गीला हो गया था। मम्मी अपना पानी देखकर मुझे देखने लगी। फिर मैंने मम्मी के सामने ही अपना हाथ चाट लिया।
जिसपर मम्मी की चूत का पानी था. मम्मी मुझे अपना कामरस चाटते हुए देख रही थी। तभी वो बोली.
मम्मी- बेटा, वो सब ठीक है। मगर यहाँ मुझे ये सब ठीक नहीं लग रहा है। और टाइम भी देख साढ़े तीन बजने वाले हैं।
मैं- मम्मी, मगर अभी आपका पानी नहीं निकला है। और ये देखो मेरा लंड भी कैसा खड़ा हुआ है। इसका क्या करू मम्मी?
मम्मी- बेटा, इसे रात को शांत कर लेना। अभी मैं घर जा रही हूं. तेरे पापा भी मेरी राह देख रहे होंगे।
मम्मी के दिल का हाल मैं समझ रहा था। दिन धाड़े दुकान में ये सब करने में उन्हें डर लग रहा था। और तुम नॉर्मल भी हो. फिर मैंने मम्मी की बात मान ली। और हम दोनो उठ के खड़े हो गये। खड़े होते ही मम्मी ने सबसे पहले अपनी साड़ी और पेटीकोट ठीक किया।
फिर वो आपने दूध ब्रा के अंदर करने लगी। मम्मी पूरी तरह तैयार हो गई थी। और उनकी नज़र बार बार मेरे लंड पर जा रही थी। तभी मैंने अपना लंड कच्चे के बाहर निकाल लिया। मम्मी मेरा लंड देखने लगी. फ़िर मैं बोला.
मैं- देखो मम्मी ये कितना टाइट हो गया है.
मेरी बात सुनते ही मम्मी ने मेरा लंड पकड़ लिया। और वो मेरा लंड सहलाते हुए बोली.
मम्मी- बेटा, ये तो हमेशा ही खड़ा रहता है। कल रात भी इतना पानी निकलने के बाद भी ये खड़ा हुआ था।
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मैं- काश मम्मी आप रुक जाएं। तो हम दोनों एक दूसरे को आचे से शांत कर लेते हैं।
मम्मी- बेटा, थोड़ा सावधान रहना सीखो। रात में इसे आचे से शांत कर दूंगी।
मैं- ठीक है मम्मी. अब आप भी जाके आराम करो.
मम्मी की बात सुनके मैंने दुकान का शटर खोल दिया। और वो फिर घर चली गई। मैं दुकान पर बैठकर मोबाइल में मूवी देखने लगा। आज मेरा टाइम पास नहीं हो रहा है. फिर शाम को 5 बजे मम्मी चाय लेके आई।
मगर आज वो रुकी नहीं. वो मुझे चाय देके घर चली गई। फ़िर मैं दुकान पर बैठा रहा। और दुखंदरी करने लगा. फिर 9 बजे ही मैं भी घर चला गया। घर जाके मैंने देखा. पापा को तो चोदो. मम्मी गुस्से में दिख रही थी. फ़िर मैं बोला.
मैं- क्या हुआ मम्मी?
मम्मी – देख ना बेटा. तबियत ख़राब है. मगर फिर भी शाम को जाके डरु पेके आये।
मैं- क्या मम्मी आप अपना मूड क्यों खराब कर रही हैं? आप तो जानते हो. पापा हर रोज डरू पीके आते हैं।
मम्मी- हां बेटा मैं ही पागल हूं. जो हमेशा बिगड़ती रहती है. चल तू मुँह हाथ धो ले. फिर हम दोनों खाना खाते हैं.
फ़िर मैंने कपड़े बदल लिये। फ़िर मैं और मम्मी खाना खाने लगे। और जैसा ही मैं और मम्मी खाना खाके उठे। तभी लाइट चली गई. और लाइट जाने के बाद मैं ऊपर छत पर गया। मम्मी भी अपना काम करके छत पर आ गई।
शायद इसीलिए वो मुझसे अभी भी शर्मा रही थी। मम्मी की ये शर्म मुझे बहुत अच्छी लग रही थी। इसलिए मैंने सोचा. जब यहां तक मैंने मम्मी का इंतजार किया। तो थोड़ा इंतज़ार और सही।
मैं मम्मी की चूत सहलाये जा रहा था। मम्मी मेरा लंड पकड़े हुए सहला रही थी। मैं मम्मी के दूध चूसते हुए उनकी चूत सहला रहा था। मम्मी बार बार शटर की तरफ देख रही थी। क्यूकी बहार से गुजरती गाडियों की आवाज आ रही थी।
जिसे मम्मी का ध्यान बार-बार शटर की तरफ जा रहा था। तभी मम्मी बोली.
मम्मी- बेटा, हाँ ये सब ठीक नहीं है। मुझे बहुत डर लग रहा है। कहीं कोई आ गया तो.
मैं- मम्मी, आप डर क्यों रहे हो? ये दुकान अपनी है. कोई नहीं आएगा. और वैसे भी आपके नीचे से बहुत पानी आ रहा है। ये देखो.
अपनी बात बोलते ही मैंने अपना हाथ मम्मी को दिखाया। जो मम्मी के चूत के पानी से गीला हो गया था। मम्मी अपना पानी देखकर मुझे देखने लगी। फिर मैंने मम्मी के सामने ही अपना हाथ चाट लिया।
जिसपर मम्मी की चूत का पानी था. मम्मी मुझे अपना कामरस चाटते हुए देख रही थी। तभी वो बोली.
मम्मी- बेटा, वो सब ठीक है। मगर यहाँ मुझे ये सब ठीक नहीं लग रहा है। और टाइम भी देख साढ़े तीन बजने वाले हैं।
मैं- मम्मी, मगर अभी आपका पानी नहीं निकला है। और ये देखो मेरा लंड भी कैसा खड़ा हुआ है। इसका क्या करू मम्मी?
मम्मी- बेटा, इसे रात को शांत कर लेना। अभी मैं घर जा रही हूं. तेरे पापा भी मेरी राह देख रहे होंगे।
मम्मी के दिल का हाल मैं समझ रहा था। दिन धाड़े दुकान में ये सब करने में उन्हें डर लग रहा था। और तुम नॉर्मल भी हो. फिर मैंने मम्मी की बात मान ली। और हम दोनो उठ के खड़े हो गये। खड़े होते ही मम्मी ने सबसे पहले अपनी साड़ी और पेटीकोट ठीक किया।
फिर वो आपने दूध ब्रा के अंदर करने लगी। मम्मी पूरी तरह तैयार हो गई थी। और उनकी नज़र बार बार मेरे लंड पर जा रही थी। तभी मैंने अपना लंड कच्चे के बाहर निकाल लिया। मम्मी मेरा लंड देखने लगी. फ़िर मैं बोला.
मैं- देखो मम्मी ये कितना टाइट हो गया है.
मेरी बात सुनते ही मम्मी ने मेरा लंड पकड़ लिया। और वो मेरा लंड सहलाते हुए बोली.
मम्मी- बेटा, ये तो हमेशा ही खड़ा रहता है। कल रात भी इतना पानी निकलने के बाद भी ये खड़ा हुआ था।
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मम्मी- बेटा, थोड़ा सावधान रहना सीखो। रात में इसे आचे से शांत कर दूंगी।
मैं- ठीक है मम्मी. अब आप भी जाके आराम करो.
मम्मी की बात सुनके मैंने दुकान का शटर खोल दिया। और वो फिर घर चली गई। मैं दुकान पर बैठकर मोबाइल में मूवी देखने लगा। आज मेरा टाइम पास नहीं हो रहा है. फिर शाम को 5 बजे मम्मी चाय लेके आई।
मगर आज वो रुकी नहीं. वो मुझे चाय देके घर चली गई। फ़िर मैं दुकान पर बैठा रहा। और दुखंदरी करने लगा. फिर 9 बजे ही मैं भी घर चला गया। घर जाके मैंने देखा. पापा को तो चोदो. मम्मी गुस्से में दिख रही थी. फ़िर मैं बोला.
मैं- क्या हुआ मम्मी?
मम्मी – देख ना बेटा. तबियत ख़राब है. मगर फिर भी शाम को जाके डरु पेके आये।
मैं- क्या मम्मी आप अपना मूड क्यों खराब कर रही हैं? आप तो जानते हो. पापा हर रोज डरू पीके आते हैं।
मम्मी- हां बेटा मैं ही पागल हूं. जो हमेशा बिगड़ती रहती है. चल तू मुँह हाथ धो ले. फिर हम दोनों खाना खाते हैं.
फ़िर मैंने कपड़े बदल लिये। फ़िर मैं और मम्मी खाना खाने लगे। और जैसा ही मैं और मम्मी खाना खाके उठे। तभी लाइट चली गई. और लाइट जाने के बाद मैं ऊपर छत पर गया। मम्मी भी अपना काम करके छत पर आ गई।


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