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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#81
राजू ने रिशा के होठों को अपने होठों से भींच लिया...नीचे उसने अपना लौड़ा सुपाड़े तक बाहर निकाला और फिर एक जबरदस्त शॉट मारते हुए पूरा लौड़ा रिशा की चूत में गाड़ दिया। रिशा की चीख राजू के मुँह में ही दबकर रह गई

कुछ देर यूं ही रहने के बाद राजू ने धीरे-धीरे हरकत करते हुए अपना लौड़ा अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। रिशा का दर्द भी अब काम हो गया था. दर्द की जगह मजे ने ले ली और रिशा की आह-आह निकलने का दौर फ़िर से शुरू हो गया!

रिशा बोल रही थी- आह आह और जोर से देवर जी … आह मेरी चूत … तुम्हारा लंड तो बहुत मस्त है देवर जी … आह्ह मेरी बजा दो। फाड़ डालो आज मेरी चूत..कोई रहम ना करना.

राजू.. “भाभी आज आपका देवर आपकी चूत और गांड दोनों को फाड़ देगा। बस आप मेरा साथ देते रहना”

15 मिनट चोदने के बाद राजू ने रिशा को बेड का किनारा पकड़ा कर घोड़ी बना दिया ! इसी बीच रिशा की चूत एक बार पानी छोड़ चुकी थी !राजू ने अपना लंड चूत से बाहर निकाल लिया और और रिशा की गांड के छेद को अपनी जीभ निकाल कर के चाटने लगा. गांड का भूरा छेद बहुत टाइट लग रहा था। राजू भी जानता था कि उसका लंड इतने आसानी से अंदर नहीं घुसेगा। उसने बिस्तर के साइड टेबल पर पड़ी वैसलीन की शीशी उठाई और ढेर सारी वैसलीन अपनी उंगलियों से रिशा की गांड में घुसेढ दी।


रिशा भी समझ गई कि आज उसकी गांड फ़टने वाली है। उसने अपना चेहरा तकिया के अंदर छुपा लिया और खुद को होने वाले हमले के लिए तैयार कर लिया. राजू गांड की गोलाई देख कर पगला रहा था। कितने दिनों से वो रिशा की गांड मरना चाहता था और आज वो मौका आ गया था। राजू ने एक के बाद एक दो चार थप्पड़ रिशा की कुंवारी गांड पर मार दिए जिससे रिशा की गांड लाल हो गई और रिशा दर्द से चिल्ला उठी…. उफ्फ्फ...नहीं राजू दर्द होता है।

राजू...”माफ़ करना भाभी। इतनी खूबसूरत गांड देख खुद को रखा नहीं पाया”

राजू..”राजू प्लीज़ जरा आराम से करना। तेरा लौड़ा बहुत लंबा और मोटा है और मेरी गांड एक दम कुंवारी।”

राजू..”फिकर मत करो भाभी..बड़े आराम से पेलूंगा बस आप अपनी गांड को ढीला रखना “

रिशा...”थोड़ी वैसलीन अपने लंड पर भी लगा ले शायद दर्द कम हो “

राजू ने डिब्बी से वैसलीन ले अपने लौड़े पर लगा ली और फिर लौड़ा गांड के छेद से सेट कर दिया और करीब पाँच मिनट तक रगड़ने के बाद राजू ने अपना लंड रिशा की गाँड के छेद में घुसेड़ना चाहा, लेकिन गाँड काफी टाईट थी और राजू को अपना लंड घुसेड़ने में काफी तकलीफ महसूस होने लगी। राजू ने एक हाथ आगे ले जा रिशा की चुची को जोर से मसल दिया। चुची मसले जाने से रिशा जोर से चींखी “ऊऊई” और उसने अपनी गाँड को ढील छोड़ दिया. राजू ने अपने लंड का सुपाड़ा एक जोरदार धक्के से उसकी गाँड के छेद के अंदर घुसेड़ दिया। रिशा ने अपनी गाँड को फिर से टाईट करना चाहा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

रिशा बोली, “नहींईंईं... प्लीज़।”

चूँकि रिशा की गाँड और राजू का लंड वैसलीन से बहुत चीकना हो गया था, राजू का सुपाड़ा रिशा की गाँड में धँस चुका था और राजू उसकी दोनों चूंची कस कर पकड़ कर एक धक्के के साथ अपना पूरा का पूरा लंड उसकी कसी हुई गाँड के अंदर उतार दिया। राजू का पूरा का पूरा लंड रिशा की गाँड में एक झटके के साथ घुस गया। रिशा जोर से चींखी, “ऊऊऊईईईईईई माँ ओ ओ ऊईईईईईई ओह ओह ऊई ! मैं मर गयी। ऊईई मेरी गाँड फट गयी ऊऊऊऊ हाय माँ ओई मेरी गाँड फट गयी। प्लीज़ बाहर निकाल लो।”

रिशा ने अपना मुँह तकिये में घुसा दिया। वो दर्द से सुबक रही थी और बोल रही थी, “मेरी गाँड फाड़ दी, ऊईई मेरी गाँड फट गयी, बाहर निकालो नहीं तो मैं मर जाऊँगी।”

राजू उसकी चूंचियों को फिर से अपने हाथों से पकड़ कर मसलने लगा।


रिशा फिर बोली, “प्लीज़ बाहर निकालो राजू वरना मैं मर जाऊँगी।”

राजू ने उसकी चूंचियों को थोड़ा जोर दे कर दबाया और उससे कहा, “भाभी मैं तुम्हें मरने नहीं दुँगा, बस थोड़ी देर में ठीक हो जायेगा।”

रिशा अपना बाँया हाथ अपनी गाँड पर लायी और राजू के लौड़े को छू कर बोली, “उफफ ये बेहद मोटा है, इसने मेरी गाँड फाड़ दी… हाय।”

राजू ने उसकी चूंचियों को और थोड़ा जोर देकर मसला और पूछा, “क्या बहुत मोटा है?”

रिशा बोली, “वही जिसे तुमने मेरी गांड में घुसा रखा है।”

राजू ने फिर से पूछा, “यह क्या है, इस को क्या कहते हैं?”

रिशा ..”मुझे नहीं पता, तुम्हें पता होगा। मेरे से कुछ बोला भी नहीं जा रहा और तुम बिल्कुल मत हिलो, ... मुझे दर्द हो रहा है... बस आराम से अंदर डाल कर पड़े रहो।”

राजू ने फिर से रिशा से कहा, “पहले इसका नाम ले कर बोलो भाभी जैसे चूत चुदाई के वक्त बोल रही थी!”

रिशा राजू के आँडों को अपने हाथों से दबाती हुई बोली, “तुम बहुत बेहया हो, मुझसे गंदी बातें करवाना चाहते हो।”

रिशा ने अपना चेहरा घुमाया और राजू के सिर को पकड़ कर अपने चेहरे के पास ले आयी और राजू के कान मैं फुसफुसा कर बोली, “राजू तेरा इतना मोटा लंड अपनी गाँड में ले कर बेहया बनी हुई तो हूँ, और क्या चाहता है तू।”

ये सुन कर राजू बहुत गरम हो गया और रिशा की गाँड में अपना लंड धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। रिशा की गाँड इतनी टाईट थी कि लंड को अंदर-बाहर करने में काफी जोर लगाना पड़ रहा था।

रिशा फिर चींखी और बोली, “नहीं प्लीज़ हिलना नहीं, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, अभी ऐसे ही रहो... जब मेरी गाँड की तुम्हारे लंड से दोस्ती हो जाये तो फिर हिलना।”

राजू ने अपना हाथ रिशा के पेट के नीचे ले जा कर उसकी चूत में अपनी अँगुली डाल दी। जिससे रिशा को थोड़ा अच्छा लगने लगा ! फिर थोड़ी देर के बाद राजू रिशा की गाँड धीरे-धीरे चोदने की कोशिश करने लगा। रिशा चिल्ला रही थी, “ऊऊऊईईईईईई..... नहीं मैं मर जाऊँगी। मेरी गाँड फट जायेगी, प्लीज़ अभी अपने लंड को नहीं हिलाओ!” लेकिन राजू ने अबकी उसकी एक ना सुनी और उसकी गाँड जोर जोर से चोदने लगा। थोड़ी देर के बाद रिशा को भी मज़ा आने लगा और वो अपनी गाँड लंड के धक्कों के साथ आगे पीछे करने लगी। थोड़ी देर उसकी गाँड चोदने के बाद राजू का वीर्य उबलने लगा“ओह भाभी, मैं अब छूटने वाला हूँ।”

तब रिशा लंड को अपनी गाँड के और अंदर लेती हुई बोली, “अपने लंड को मेरी गाँड के अंदर छूटने दो और मेरी गाँड को अपने लंड की मलाई से भर दो!”


इसके साथ ही राजू ने दो चार और तेज़-तेज़ धक्के मार कर रिशा की गाँड के अंदर अपने लंड की पिचकारी छोड़ दी। रिशा ने भी राजू के झड़ने साथ ही अपनी चूत का पानी छोड़ दिया।

थोड़ी देर तक राजू रिशा की पीठ के ऊपर पड़ा रहा और फिर उसकी गाँड में से अपना लंड निकाला। लंड उसकी गाँड में से “पुच” की आवाज से बाहर निकल आया। रिशा जल्दी से उठ कर बाथरूम की तरफ़ भागी और थोड़ी देर के बाद राजू भी बाथरूम में चला गया। रिशा राजू के लंड को देखती हुई बोली, “देखो मेरी गाँड मार के कैसे मरे चूहे जैसा हो गया है।”मेरे तो जैसे शरीर में जान ही नहीं बची!


राजू मुस्कुराकर बोला, “अभी तो शुरू किया है भाभी। और करना है मुझे बहुत दिन से तड़प रहा था।

रिशा ने राजू के हाथ को पकड़कर अपने दोनों हाथों के बीच में रखा और बोली, “किसी को को पता मत चलने देना, पूरी जिंदगी तेरी कुतिया बन के रहूंगी।”
राजू बोला, “भाभी, तुम तो मेरी रानी हो। कुतिया तो बस चोदने के टाइम बनाऊंगा।”


कुछ देर आराम करने के बाद दोनों के बदन फिर से सुलगने लगे। आज की रात दोनों में से कोई भी सो कर बरबाद नहीं करना चाहता था . दोनों की आंखों में फिर से वासना के डोरे तैरने लगे, पूरी रात भर दोनों ने एक दूसरे को चूमते, चुस्ते चाटते हुए बितायी। उस रात रिशा की कई बार चूत चुदाई हुई और राज ने भी अगणनीत बार अपने लौड़े का प्रसाद रिशा को पिलाया।
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 02-05-2026, 06:20 PM



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