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Adultery लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल...
#79
रिशा मस्ती से कराह उठी... “उफ़्फ़ ..धीरे देवर जी..दुखता है”
राजू रिशा के कान की लोई को अपने होठों से चूमने लगा और हाथो से चुची को मसलता रहा. इसके बाद राजू ने खुद अपने कपड़े उतारे और फिर पलट कर रिशा को अपने सामने किया. वो रिशा के होठों को चूमने लगा और धीरे से रिशा के लहंगे का नाड़ा ढीला कर दिया.



[Image: IMG-6996.jpg]
लहंगा ढीला हुआ तो सरसराता हुआ नीचे सरकने लगा.
रिशा नीचे से पैंटी में रह गईं.


उसके बाद राजू ने उसको अपनी बांहों में भरा और ब्लाउज के पीछे लगे बटन खोलने लगा. ब्लाउज के हुक खोलने के बाद राजू ने उसको उतारा नहीं, बस यूं ही ब्लाउज के साथ रिशा के मम्मों को मसलने लगा.

रिशा आह आह करने लगीं.
फिर राजू ने एक झटके से हाथ से खींचकर ब्लाउज को हटा दिया. अब रिशा उसके सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं. रिशा ने जालीदार ब्रा पैंटी पहन रखी थी.

पैंटी की जाली से रिशा की सफाचट चूत साफ दिख रही थी. चिकनी चूत देख कर एकदम साफ़ समझ आ रहा था कि रिशा ने आज ही झांटों को बनाया है.

राजू ने घुटनों के बल बैठ कर रिशा की पैंटी को बिना उतारे हुए हल्का सा किनारे कर दिया और उसकी चूत में अपनी जुबान डाल दी.
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RE: लफ़्ज़ों से कहाँ बयां हो पाता है हाले दिल... - by nitya.bansal3 - 02-05-2026, 06:10 PM



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