02-05-2026, 04:21 PM
मम्मी- बेटा, तू मेरे बारे में कितना सोचता है। और एक तेरे पापा हैं. जिन्हे बस आपनी डरू की पड़ी रहती है। बस कभी-कभी मुझे डर लगता है कि मैं और तू यहां ऐसे नंगे होके लेते हुए। कहीं तेरे पापा को कभी पता चल गया। तो मैं क्या करूंगी?
मैं- मम्मी, आप जिस बात के बारे में सोच रही हैं। वो भी एक ठीक है. मगर मम्मी आप जानती हो। असली सच्ची क्या है?
मेरी बात सुनके मम्मी मुझे देखने लगे। मैंने उनकी तांगे फिर से फेला दी। और अपना हाथ सीधे मम्मी की पैंटी में डाल दिया। और उनकी गीली चूत से अपना हाथ भीगा कर बाहर निकल लिया। मम्मी को दिखाते हुए बोला.
मैं- मम्मी, आपकी असली सच्ची ये है. आपके नीचे से बेहटा ये कामरस इस बात का सबूत है कि आप भी इस सुख के लिए पता नहीं कब से तरस रही थीं। मगर पापा आपको ये सुख नहीं दे रहे। मम्मी जब भी मैं आपको देखता हूं।
तो यही सोचता हूँ कि मैं अपने खड़े लंड से इसीलिये परेशान हूँ। क्योंकि ना तो मैं शादी शुदा हूं। और ना ही मेरे पास कोई औरत हो। जो मेरे लंड को शांत कर सके. मगर आप तो शादी शुदा हैं। और उसके बाद भी आपको वो सुख नहीं मिल रहा है।
![[Image: gifcandy-black-and-white-100.gif]](https://i.ibb.co/Y7vK9cdN/gifcandy-black-and-white-100.gif)
जिसकी ज़रूरत हर औरत को होती है। मम्मी सिर्फ इसलिए कि आप ही मेरी इस परेशानी को समझते हो। क्योंकि आप भी पता नहीं कब से इसी परेशानी से जूझ रहे हो। इसलिए आप हर रोज ये पैंटी मुझे देके मेरी मदद करते हो। मैं जानता हूं मम्मी.
ये पैंटी रात में भी सिर्फ आप मेरे लिए पहनते हो। वर्ना तो आप अपनी पैंटी डॉफर में ही उतार दें। क्योंकि आपको गर्मी बहुत लगती है। सच कह रहा हूँ मम्मी हां नहीं।
मम्मी- हां बेटा तू सही कह रहा है।
आपनी बात बोलके मम्मी चुप हो गई। और फिर हम दोनो कुछ देर खामोश होके लेते रहे। और फिर मैंने मम्मी का हाथ फिर से अपने लंड पर रख दिया। मम्मी मेरे लंड को पकड़ के ऊपर नीचे करने लगी। मैं उनको दूध फिर से चूसने लगा।
मैं- मम्मी, आप जिस बात के बारे में सोच रही हैं। वो भी एक ठीक है. मगर मम्मी आप जानती हो। असली सच्ची क्या है?
मेरी बात सुनके मम्मी मुझे देखने लगे। मैंने उनकी तांगे फिर से फेला दी। और अपना हाथ सीधे मम्मी की पैंटी में डाल दिया। और उनकी गीली चूत से अपना हाथ भीगा कर बाहर निकल लिया। मम्मी को दिखाते हुए बोला.
मैं- मम्मी, आपकी असली सच्ची ये है. आपके नीचे से बेहटा ये कामरस इस बात का सबूत है कि आप भी इस सुख के लिए पता नहीं कब से तरस रही थीं। मगर पापा आपको ये सुख नहीं दे रहे। मम्मी जब भी मैं आपको देखता हूं।
तो यही सोचता हूँ कि मैं अपने खड़े लंड से इसीलिये परेशान हूँ। क्योंकि ना तो मैं शादी शुदा हूं। और ना ही मेरे पास कोई औरत हो। जो मेरे लंड को शांत कर सके. मगर आप तो शादी शुदा हैं। और उसके बाद भी आपको वो सुख नहीं मिल रहा है।
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जिसकी ज़रूरत हर औरत को होती है। मम्मी सिर्फ इसलिए कि आप ही मेरी इस परेशानी को समझते हो। क्योंकि आप भी पता नहीं कब से इसी परेशानी से जूझ रहे हो। इसलिए आप हर रोज ये पैंटी मुझे देके मेरी मदद करते हो। मैं जानता हूं मम्मी.
ये पैंटी रात में भी सिर्फ आप मेरे लिए पहनते हो। वर्ना तो आप अपनी पैंटी डॉफर में ही उतार दें। क्योंकि आपको गर्मी बहुत लगती है। सच कह रहा हूँ मम्मी हां नहीं।
मम्मी- हां बेटा तू सही कह रहा है।
आपनी बात बोलके मम्मी चुप हो गई। और फिर हम दोनो कुछ देर खामोश होके लेते रहे। और फिर मैंने मम्मी का हाथ फिर से अपने लंड पर रख दिया। मम्मी मेरे लंड को पकड़ के ऊपर नीचे करने लगी। मैं उनको दूध फिर से चूसने लगा।


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