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Misc. Erotica सुपरस्टीशन
#53
कमरे में फिर से सन्नाटा छा गया था… लेकिन अब वह पहले जैसा सुकून भरा सन्नाटा नहीं था।


पूजा बिस्तर पर लेटी हुई थी, आँखें बंद थीं, पर मन पूरी तरह जाग रहा था। उसके भीतर जैसे कोई हलचल शुरू हो गई थी—एक ऐसी हलचल, जिसे वह समझ भी नहीं पा रही थी और रोक भी नहीं पा रही थी। लिंग बार बार चूत को छुए जा रहा था। जैसे जैसे उसके पैर हिलते लिंग उसकी चूत में चुभता, धीरे धीरे इस हलन चलन से लिंग अब उसकी गांड के द्वार को खटखटा रहा था। वह अपने आप को कामुक पा रही थी और इस कामुकता के आगे वह हार भी मान रही थी। उसे यह सब अच्छा लग रहा था।
 
बाबा की बातें… उनकी आवाज़… उनके शब्द…सब कुछ बार-बार उसके मन में गूंज रहा था। मैत्री की प्रस्तुति.
 
“यह केवल एक क्रिया है…”

“तुम्हारे विश्वास की परीक्षा है…”
 
वह खुद को समझाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन जितना वह खुद को समझाती, उतना ही उसका मन उलझता जाता।
 
उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह धीरे-धीरे किसी ऐसी दिशा में बढ़ रही है, जहाँ से वापस आना आसान नहीं होगा।
 
उसने करवट बदली। आज उसे हरदिन देख रही थी वह कमरे की दीवारों पर पड़ती हल्की रोशनी अब उसे अजीब-सी लगने लगी थी। जैसे हर चीज़ उसे देख रही हो… पर कुछ कह नहीं रही। हर चीज़ उस से सवाल पूछ रहा था की कया सही कर रही हो या फिर गलत! पर उसका मन और तन दोनों ही कह रहे थे की जो हो रहा है वह अच्छा ही हो रहा है। खुद को आश्वासन भी देती की मैं क्या कर सकती हूँ? यह एक प्रक्रिया मात्र है और मैं उसमे शामिल हूँ बस। लेकिन मन ही मन में खुश होती जा रही थी की बाबाजी का यह लिंग (अब वह लंड समजने लगी थी) उसे परेशां नहीं पर उसकी शारीरिक जरूरियातो को पूरा करने की कोशिश कर रहा है और उसे अपना काम करने देना चाहिए। भलेही मेरे दोनों द्वारो को छेड़े जा रहा है। यही तो उसका काम है की मेरे द्वारो को वह छेड़े......काश वह भेदता भी...... ।
 
उसके अंदर एक सवाल बार-बार उठ रहा था, “क्या मैं सच में सही कर रही हूँ…?” मैत्री रचित कहानी.
 
लेकिन उसी पल बाबा का चेहरा उसकी आँखों के सामने आ जाता…उनकी शांत आवाज़… उनका विश्वास दिलाने वाला अंदाज़…और फिर वह सवाल धीरे-धीरे दब जाता। उसको सभी सवाल कामुकता के सामने बेकार लगने लगे थे।
 
अब उसके भीतर एक नया भाव जन्म ले चुका था—
 
श्रद्धा और संशय के बीच का एक धुंधला-सा रिश्ता।
 
वह समझ नहीं पा रही थी कि यह सब केवल विधि है… या कुछ और।
 
लिंग ने धीरे धीरे अपना काम शुरू कर दिया, वह अब पूजा की गांड को सहला रहा था। पूजा को बहोत अच्छा लग रहा था। उसने पाया की उसकी गांड अब खुल रही है और लिंग को अपने में समा रही है।
 
पूजा ने सलवार का नाडा खोला और लिंग को बहार निकाला, उसने उसे प्रणाम किया और मन ही मन बोली जय लिंग। उस पर बाबा की फोटो देख कर मुस्कुराई और दिल ही दिल में बोलने लगी: “यह क्या बाबाजी, आप मेरे पीछे के द्वार पर क्या कर रहे थे? क्या मैं मदद कर दू? आप भी ना आगे के छेद का सही उपयोग करे। स्वर्ग जैसा महसूस करूंगी आपको। खेर आपको मेरी गांड ही चाहिए तो कोई बात नहीं वही से ही सही लेकिन शुरुआत तो कीजिये बाबाजी।”
 
पूजा लिंग को अपनी कुलहो के बीच में ले गयी और अपने गांड पर दबाने लगी, उसे मज़ा आ रहा था।
 
लेकिन डर की वज़ह से वह लिंग को गांड से हटा कर टाँगों के बीच ले आई। उसने लिंग को हल्का-सा चूत पर रगड़ा। फिर लिंग को अपने माथे पर रखा और बाबा की फोटो को देख कर दिल मैं कहने लगी "बाबाजी। क्या चाहते हो...?  एक विधवा के साथ यह सब करना अच्छी बात नहीं।"
 
लिंग को अपने चूत से रगड़ते हुए, धीरे-धीरे उसकी आँखें भारी होने लगीं…
 
पर नींद के आगोश में जाते-जाते भी उसके मन में एक हल्की-सी आशंका बाकी थी—
 
फिर उसने वापस लिंग को अपनी जगह बाँध दिया। और गरम चूत ही ले के सो गयी।
 
शायद वह किसी ऐसे जाल में फँसती जा रही है, जिसका उसे अभी अंदाज़ा भी नहीं है…
 
********************** 

दोस्तों आज के लिए बस यही तक फिर मिलेंगे एक नए एपिसोड के साथ.


तब तक के लिए मैत्री का जय भारत.
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सुपरस्टीशन - by maitripatel - 10-04-2026, 03:59 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Glenlivet - 10-04-2026, 05:01 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 25-04-2026, 07:06 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 01:06 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 03:45 PM
RE: सुपरस्टीशन - by maitripatel - 02-05-2026, 01:29 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-05-2026, 07:42 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-05-2026, 09:54 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:12 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:14 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 09-06-2026, 03:40 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 12-06-2026, 08:37 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 27-06-2026, 05:02 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Rizzi1198 - 30-07-2026, 12:21 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 22-08-2026, 06:21 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 28-08-2026, 05:28 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-09-2026, 06:23 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 08-09-2026, 10:10 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 10-09-2026, 05:04 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-09-2026, 12:21 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 21-09-2026, 09:57 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 22-09-2026, 05:39 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 24-09-2026, 04:27 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Tadpole - 23-09-2026, 07:12 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Wanton - 23-09-2026, 07:24 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 01-10-2026, 09:20 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Bumchod - 05-10-2026, 05:27 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-10-2026, 08:23 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 10-10-2026, 07:50 PM



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