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Misc. Erotica सुपरस्टीशन
#49
पूजा अपने आप में खोई हुई थीबाबा की बातों की मिठास, उनके शब्दों का प्रभाव और अपने अंदर उठ रहे भाव उसे पूरी तरह कामुक कर रहे थे। उसे ऐसा लग रहा था, मानो बाबा उसके लिए सिर्फ एक गुरु नहीं, बल्कि उसकी सोच और भावनाओं का भी सहारा हैं।
 
सारे दिन लिंग पूजा के टाँगों के बीच चुभता रहा लेकिन अब यह चुभन पूजा को अच्छी लग रही थी मैत्री की रचना.
 
रात गहराती जा रही थी। कमरे में हल्की-सी खामोशी पसरी हुई थी। पूजा बिस्तर पर लेटी हुई थी, लेकिन उसकी आँखों में नींद अभी दूर थी।
अचानक उसे याद आयाबाबा ने कहा था कि सोने से पहले उस लिंग को प्रणाम करना है। मैत्री की प्रस्तुति.

वह धीरे से उठी। उसके हाथों में हल्की-सी झिझक थी, लेकिन मन में श्रद्धा उससे कहीं ज्यादा। उसने अपने सलवार का नाड़ा ढीला किया और सावधानी से उस लिंग को बाहर निकाला।

कुछ पल के लिए वह उसे अपने हाथों में थामे रहीजैसे समझ नहीं पा रही हो कि यह केवल एक वस्तु है या कुछ और!

फिर उसने उसे अपने माथे से लगाया। उसकी आँखें अपने आप बंद हो गईं। उस स्पर्श में एक अजीब-सी शांति थीजैसे वह किसी अदृश्य सहारे को महसूस कर रही हो।

जब उसने आँखें खोलीं, तो उसकी नज़र उस पर लगी बाबा की छोटी-सी तस्वीर पर टिक गई।

वह काफी देर तक उसे देखती रही। हर गुजरते पल के साथ, उसके मन में बाबा की आवाज़, उनके शब्द, और दिन में की गई उसकी तारीफ़ गूंजने लगी।
तुम विशेष होतुममें श्रद्धा हैतुम एक अप्सरा हो.....जैसे वो शब्द फिर से उसके कानों में भर रहे हों।

उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आ गई। उसे महसूस हुआ कि कोई है जो उसे समझता है, जो उसे देख रहा हैऔर शायद उसकी परवाह भी करता है। मैत्री रचित.

धीरे-धीरे उसका मन उसी सोच में डूबता चला गया। अब उसके लिए बाबा सिर्फ एक गुरु नहीं रह गए थेबल्कि उसके अकेलेपन में एक सहारा बनते जा रहे थे।

कुछ देर बाद, जैसे उसे अपने आप का एहसास हुआ। उसने हल्के से सिर झटका, मानो उन ख्यालों से बाहर निकलना चाहती हो।

उसने उस लिंग को वापस सावधानी से अपने पेटीकोट के अन्दर अपनी जगह पर रख दिया और नाड़ा बांध लिया।

वह फिर से लेट गईकमरे में वही सन्नाटा था, लेकिन अब उसके अंदर कुछ बदल चुका था।

उसकी आँखें बंद थींपर नींद अभी भी नहीं आई थी। निर्मात्री मैत्री.

उसके मन में बस एक ही चेहरा बार-बार उभर रहा था-----

"बाबा का।"


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बने रहिये दोस्तों......................
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सुपरस्टीशन - by maitripatel - 10-04-2026, 03:59 PM
RE: सुपरस्टीशन - by Glenlivet - 10-04-2026, 05:01 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 25-04-2026, 07:06 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 01:06 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 29-04-2026, 03:45 PM
RE: सुपरस्टीशन - by maitripatel - 02-05-2026, 01:17 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 07-05-2026, 07:42 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 19-05-2026, 09:54 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:12 AM
RE: सुपरस्टीशन - by naree - 22-05-2026, 04:14 AM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 09-06-2026, 03:40 PM
RE: सुपरस्टीशन - by rajeev13 - 12-06-2026, 08:37 PM



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