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Incest Shaitani aaina
#5
अपडेट – 4 , मीना सत्रह साल की थी, लेकिन उसके शरीर में अब सोलह साल की लड़की नहीं, बल्कि एक जागती हुई औरत रह गई थी। सिंगारदान ने उसके मन को इतना उथल-पुथल कर दिया था कि वह दिन-रात अपनी देह को महसूस करती रहती। रात को अकेले में वह अपनी उँगलियाँ अपनी चूत पर फेरती, लेकिन कभी पूरी तरह अंदर नहीं डाल पाती। वह डरती थी — “अगर सील टूट गई तो?”
फिर राहुल आया।
एक शाम राहुल ने मीना को फोन किया और कहा, “आज मेरे घर आ। माँ-बाप दोनों बाहर गए हैं।” मीना ने एक पल भी नहीं सोचा। उसने हल्की पीली साड़ी पहनी, जिसमें उसकी उभरी हुई छाती और पतली कमर साफ दिख रही थी। ब्लाउज के हुक उसने जानबूझकर ढीले छोड़ दिए थे।
राहुल के घर पहुँचते ही दोनों सीधे उसके कमरे में गए। दरवाजा बंद होते ही राहुल ने मीना को दीवार से सटा दिया और जोर से किस किया। मीना की साँसें तेज़ हो गईं।
“राहुल... मैं डर रही हूँ,” मीना ने हाँफते हुए कहा।
राहुल ने उसके ब्लाउज के हुक खोलते हुए मुस्कुराकर कहा, “डर मत। आज मैं तुम्हारी सील तोड़ दूँगा। तुम्हारी वो टाइट, कुंवारी चूत आज मेरी हो जाएगी।”
उसने मीना की साड़ी का पल्लू नीचे सरका दिया। ब्लाउज पूरी तरह खुल गया। मीना की गोरी, गोल चुचियाँ बाहर आ गईं। राहुल ने एक चुची मुँह में ले ली और जोर से चूसने लगा। मीना की कमर तन गई।
“आह्ह्... राहुल... धीरे... मेरी चुचियाँ बहुत संवेदनशील हो गई हैं...”
राहुल ने मीना को बिस्तर पर लिटाया। उसकी साड़ी को कमर तक ऊपर किया। मीना ने शर्म से टाँगें बंद कर लीं। राहुल ने जबरन टाँगें फैलाईं। उसकी पैंटी पर एक बड़ा गीला धब्बा बन गया था।
“देखो... तुम्हारी चूत कितनी गीली हो रही है,” राहुल ने कहा और पैंटी उतार दी।
मीना की चूत साफ दिख रही थी — हल्के बालों वाली, गुलाबी, और अब पूरी तरह भीगी हुई। राहुल ने उँगली से उसके क्लिटोरिस को छुआ। मीना झटके से काँपी।
“आह्ह्ह... वहाँ मत... बहुत गुदगुदी हो रही है...”
राहुल ने अपनी पैंट उतारी। उसका मोटा, खड़ा लंड बाहर आ गया। मीना ने डरते हुए उसे देखा और बोली, “इतना बड़ा है... मेरी छोटी चूत में कैसे जाएगा?”
राहुल ने मीना की टाँगें कंधों पर रखीं और लंड का सिरा उसकी चूत पर रखा। धीरे-धीरे दबाव डालने लगा।
मीना ने आँखें बंद कर लीं और दाँत भींच लिए।
“आह्ह्ह्ह... दर्द हो रहा है राहुल... धीरे...”
राहुल रुका नहीं। उसने एक जोर का झटका दिया।
“फट्...!”
मीना की सील टूट गई। एक तीखा दर्द उसके पूरे शरीर में फैल गया। वह चीख पड़ी — “आआआह्ह्ह... निकालो... बहुत दर्द हो रहा है... मेरी चूत फट गई...!”
राहुल ने पूरी तरह अंदर डाल दिया। मीना की टाइट चूत अब उसके लंड से पूरी तरह भरी हुई थी। खून की हल्की धार बह रही थी। राहुल ने धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया।
दर्द के साथ-साथ अब मीना को एक अजीब सुख भी महसूस होने लगा। उसकी सिसकारियाँ बदल गईं।
“हmmm... राहुल... अब दर्द कम हो रहा है... और अंदर... गहरा चोदो...”
राहुल तेज़ हो गया। वह मीना की चुचियों को दबाते हुए जोर-जोर से चोद रहा था।
मीना अब पूरी तरह खुल चुकी थी। वह अपनी कमर उठाकर राहुल के ठेले का जवाब दे रही थी और सेक्सी आवाज़ में बोल रही थी:
“हाँ... इसी तरह... मेरी कुंवारी चूत फाड़ दो... अब मैं रंडी बन गई हूँ... तुम्हारी रंडी... जोर से चोदो मुझे... आह्ह्ह... मेरी फुद्दी भर दो अपने लंड से...!”
राहुल ने आखिरी जोर लगाया और मीना की चूत के अंदर ही झड़ गया। मीना भी काँपते हुए झड़ गई। उसकी पहली चुदाई पूरी हो चुकी थी।
जब दोनों थककर लेटे, मीना ने राहुल की छाती पर सिर रखा और धीरे से कहा,
“अब मेरी सील टूट गई... अब मैं पहले जैसी नहीं रही। सिंगारदान ने मुझे भी रंडी बना दिया।”
राहुल मुस्कुराया, “अब तुम सचमुच औरत बन गई हो।”
मीना ने आँखें बंद कीं। उसके मन में अब न डर था, न पछतावा — सिर्फ एक नई, गहरी भूख जाग रही थी।रात के नौ बज चुके थे जब मीना घर लौटी।
उसकी चाल में एक नई लचक थी, लेकिन चेहरा थका हुआ और आँखें लाल थीं। साड़ी का पल्लू ठीक से नहीं संभला हुआ था। ब्लाउज के हुक अधूरे बंद थे। कमर पर पसीने का हल्का निशान था। उसके बीच की जगह अभी भी गीली और दर्द भरी थी। राहुल के लंड का असर अभी भी उसके अंदर महसूस हो रहा था।
जैसे ही वह दरवाज़ा खोलकर अंदर आई, सरला सिंगारदान के सामने खड़ी थी। उसने मीना को एक नजर में भाँप लिया।
सरला मुस्कुराई — एक जानकार, अनुभवी मुस्कान।
“आ गईं?” सरला ने धीरे से पूछा।
मीना ने नजरें झुका लीं। उसके गाल लाल हो गए। वह कुछ बोल नहीं पाई।
सरला आगे बढ़ी। उसने मीना की ठोड़ी पकड़कर उसका चेहरा ऊपर किया।
“शर्मा मत। आँखों में देख।”
मीना ने धीरे-धीरे आँखें उठाईं।
सरला ने उसकी साड़ी के पल्लू को थोड़ा सरकाया और ब्लाउज की तरफ देखा। फिर निचली तरफ नजर गई। मीना की साड़ी के बीच में हल्का गीला निशान था।
सरला की आवाज़ नरम लेकिन गहरी थी,
“सील टूट गई न?”
मीना ने सिर हिलाया। उसकी आवाज़ काँप रही थी,
“हाँ माँ... राहुल ने... आज... पूरी तरह...”
सरला ने मीना को सिंगारदान के सामने ले जाकर खड़ा कर दिया। आईने में दोनों औरतें एक साथ दिख रही थीं — एक अनुभवी, दूसरी अभी-अभी औरत बनी।
सरला ने मीना के कान में धीरे से कहा,
“अब तू भी औरत हो गई है मीना। अब छुपाने की ज़रूरत नहीं। जब भी तेरी चूत में भूख जगे, तू मुझे बता देना। मैं सिखाऊँगी तुझे — कैसे देह को इस्तेमाल करना है, कैसे अपनी कीमत बढ़ानी है।”
मीना ने पीछे मुड़कर अपनी माँ को देखा। उसकी आँखों में शर्म, डर और एक नई उत्तेजना का मिश्रण था।
“माँ... मुझे लगता है... मैं अब पहले जैसी कभी नहीं रहूँगी।”
सरला ने मीना के माथे को चूमते हुए कहा,
“नहीं रहनी है भी।
मीना की सील टूट चुकी थी।
और उसके साथ, घर की आखिरी बची-खुची शर्म भी टूट चुकी थी ।तीन दिन बाद।
मीना अब खुद को रोक नहीं पा रही थी। पहली चुदाई के बाद उसकी चूत में एक लगातार खालीपन और भूख महसूस हो रही थी। दिन भर कॉलेज में बैठे-बैठे भी उसकी जांघें आपस में रगड़ती रहतीं। रात को सोते समय वह बार-बार अपनी उँगलियाँ चूत पर फेरती, लेकिन अब उँगलियाँ काफी नहीं लग रही थीं।
उसने राहुल को मैसेज किया:
“आज शाम को आना चाहती हूँ।”
राहुल ने तुरंत जवाब दिया — “आ जा। घर खाली है।”
शाम सात बजे मीना राहुल के घर पहुँची। इस बार उसने कोई साड़ी नहीं पहनी थी। एक कसी हुई सलवार-कमीज पहनी थी, जिसमें उसकी जवान देह की हर रेखा साफ दिख रही थी। कमीज के ऊपर के तीन बटन पहले से ही खुले हुए थे।
दरवाजा बंद होते ही राहुल ने मीना को जोर से दीवार से सटा दिया और उसके होठों को चूसने लगा।
मीना ने हाँफते हुए कहा, “राहुल... आज मुझे और जोर से चोदना... पहली बार जितना दर्द नहीं चाहिए... बस मुझे अच्छा लगे।”
राहुल मुस्कुराया, “अब तू मेरी रंडी बन चुकी है मीना। आज मैं तुझे पूरा ट्रेन करूँगा।”
उसने मीना की कमीज के बाकी बटन भी खोल दिए। मीना की गोरी, भरी हुई चुचियाँ बाहर आ गईं। राहुल ने दोनों स्तनों को जोर से पकड़कर मसलना शुरू किया।
“आह्ह्... जोर से... मेरी चुचियाँ दबा... काट उन्हें...” मीना सिसक उठी।
राहुल ने मीना को बिस्तर पर पटक दिया। सलवार की नाड़ी खींचकर एक झटके में उतार दी। मीना अब सिर्फ काली पैंटी में थी, जो पहले से ही गीली हो चुकी थी। राहुल ने पैंटी भी उतारी। मीना की चूत अब थोड़ी सूजी हुई थी, लेकिन पूरी तरह तैयार।
राहुल ने घुटनों के बल बैठकर मीना की जांघें चौड़ी कीं और अपनी जीभ से उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी।
“आआह्ह्ह... राहुल... क्या कर रहे हो... वहाँ... आह्ह्... जीभ अंदर डालो... चूसो मेरी चूत...”
मीना की कमर उठ-उठकर राहुल के मुँह से सट रही थी। राहुल ने उसका क्लिटोरिस चूसते हुए दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा।
मीना जोर से चीखी, “हाँ... इसी तरह... मेरी चूत फाड़ दो उँगलियों से... मैं झड़ने वाली हूँ... आह्ह्ह!”
वह पहली बार राहुल की उँगलियों पर झड़ गई। उसके रस राहुल के मुँह और चादर पर फैल गए।
लेकिन राहुल रुका नहीं।
उसने अपनी पैंट उतारी। उसका मोटा, खड़ा लंड पहले से भी ज्यादा सख्त था। उसने मीना को पलटकर घुटनों के बल खड़ा किया — कुत्ते की मुद्रा में।
मीना ने पीछे मुड़कर कहा, “अब डालो... पूरी तरह... आज मुझे जोर से चोदना... जैसे कोई सस्ती रंडी को चोदता है।”
राहुल ने लंड का सिरा मीना की चूत पर रखा और एक ही झटके में आधा लंड अंदर ठेल दिया।
“आआआह्ह्ह...!” मीना की चीख निकल गई। “बहुत मोटा है... धीरे...”
राहुल ने दोनों हाथों से मीना की कमर पकड़ी और पूरी ताकत से पीछे से चोदना शुरू कर दिया। हर ठेला गहरा और तेज़ था। कमरे में ‘पच-पच-पच’ की आवाज़ गूँज रही थी।
मीना अब पूरी तरह खुल चुकी थी। वह अपनी गांड पीछे करके राहुल के ठेले का जवाब दे रही थी और लगातार बोल रही थी:
“हाँ... और तेज... मेरी चूत फाड़ दो... पूरा लंड अंदर डालो... आह्ह्... मुझे रंडी समझकर चोदो राहुल... मेरी फुद्दी तुम्हारी है... जितना मन करे चोदो... हाँ... यही... गहरी चोदाई... मैं फिर झड़ रही हूँ... आआह्ह्ह!”
राहुल ने मीना के बाल पकड़कर उसका सिर पीछे खींचा और और तेज़ चोदने लगा। मीना की चुचियाँ झूल रही थीं। उसकी चूत से सफेद रस निकल-निकलकर राहुल के लंड पर चमक रहा था।
आखिरकार राहुल ने जोर से कराहते हुए मीना की चूत के अंदर ही अपना गर्म वीर्य छोड़ दिया। मीना भी दूसरी बार काँपते हुए झड़ गई।
दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। मीना की चूत से वीर्य बाहर निकल रहा था। वह हाँफ रही थी।
राहुल ने उसके कान में कहा, “अब तू पूरी तरह मेरी रंडी है।”
मीना ने मुस्कुराते हुए, आँखें बंद करके जवाब दिया,
“हाँ... अब मैं रंडी बन गई हूँ। और मुझे यह बहुत अच्छा लग रहा है।”
घर लौटते समय मीना की चाल में एक नई मस्ती थी। उसकी चूत अभी भी दर्द कर रही थी, लेकिन उस दर्द में भी एक मीठास थी।
मीना अब अक्सर ही राहुल के साथ अपना कांड करवाने लगी । जब पड़ोसियों के माध्यम से बृजमोहन को पता चला कि मीना आजकल एक लड़के के साथ घूम रही है तो वो शाम को घर आया । सरला और रेखा रसोई में थे, लेकिन मीना अपने कमरे में नहीं थी। बृजमोहन ने पूछा, “मीना कहाँ है?”
सरला ने बिना मुड़े जवाब दिया, “अभी आई होगी।”
बृजमोहन को कुछ शक हुआ। मीना पिछले कुछ दिनों से अक्सर देर से आ रही थी। उसकी चाल में बदलाव, नजरों में एक नई चमक — सब कुछ उसे परेशान कर रहा था।
वो अब समझ रहा था कि ये सब किस कारण से हो रहा है ।
रात करीब दस बजे मीना घर आई।
जैसे ही वह दरवाज़े से अंदर घुसी, बृजमोहन की नजर उस पर पड़ी। मीना की सलवार-कमीज अस्त-व्यस्त थी। सबसे अजीब बात — उसकी चाल में एक असहज लचक थी, जैसे बीच की जगह में अभी भी कुछ दर्द या भारीपन हो।
बृजमोहन का दिल जोर से धड़का।
“मीना... इतनी देर कहाँ थी?” उसकी आवाज़ काँप रही थी।
मीना ने नजरें नीचे कर लीं। कुछ बोल नहीं पाई।
सरला रसोई से बाहर आई और शांत स्वर में बोली, “ब्रजमोहन, छोड़ दो। लड़की थकी हुई है।”
लेकिन बृजमोहन अब रुकने वाला नहीं था। उसका पछतावा, गुस्सा और डर सब एक साथ उबल पड़ा।
“थकी हुई है? देख रही हो तुम इसकी हालत? बाल बिखरे हुए हैं,, चेहरा लाल है... और ये चाल... ये चाल कैसी है मीना?”
मीना चुप रही।
बृजमोहन आगे बढ़ा और मीना की ठोड़ी पकड़कर उसका चेहरा ऊपर किया।
“बोल! कहाँ थी तू? किसके साथ थी?”
मीना की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन उसकी आवाज़ में अब पहले जैसी शर्म नहीं थी। वह धीरे से बोली,
“राहुल के साथ थी पापा...”

बृजमोहन जैसे बिजली का झटका लगा हो। उसका हाथ काँपने लगा।
“राहुल...? और... क्या किया तुम दोनों ने?”
मीना ने एक पल के लिए सरला की तरफ देखा, फिर बृजमोहन की आँखों में सीधे देखते हुए कहा,
“मैंने उसे... अपनी देह दी। उसने मुझे चोदा।”
घर में सन्नाटा छा गया।
बृजमोहन के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसकी आवाज़ फट पड़ी,
“क्या...? तू... मेरी बेटी... अपनी सील... तूने...?”
मीना की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन उसकी आवाज़ अब थोड़ी मजबूत थी।
“हाँ पापा। मेरी सील टूट गई। उसने मुझे दो बार चोदा। पहली बार बहुत दर्द हुआ था... लेकिन दूसरी बार... मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने खुद कहा था — ‘जोर से चोदो... मेरी चूत फाड़ दो... मुझे रंडी बना दो’।”
बृजमोहन का चेहरा सफेद पड़ गया। वह पीछे हटा और दीवार से टेक लगाकर बैठ गया। उसके मुँह से सिर्फ एक शब्द निकला,
“भगवान...”
सरला आगे आई और शांत लेकिन ठंडे स्वर में बोली,
“रो मत ब्रजमोहन। जो होना था, हो गया। सिंगारदान ने जो बीज बोया था, वह अब फल रहा है। मीना अब छोटी बच्ची नहीं रही। वह औरत बन गई है।”
बृजमोहन ने सिर उठाया। उसकी आँखों में आँसू और गुस्सा दोनों थे। मेरी सत्रह साल की मीना किसी लड़के के लंड पर झूल रही है, और तू... तू अपनी बेटी को यह सब करने दे रही है? क्या बन गया है ये घर? कोठा?”
मीना ने धीरे से कहा,
“पापा, अब गाली देने से कुछ नहीं होगा। जो टूटना था, वो टूट चुका है। अब मैं अपनी देह को जान चुकी हूँ। और मुझे यह अच्छा लग रहा है।”
बृजमोहन ने दोनों हाथों से अपना सिर पकड़ लिया। उसके कंधे फड़फड़ा रहे थे। वह रो रहा था — नहीं, वह टूट रहा था।
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Messages In This Thread
Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 30-04-2026, 04:18 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 30-04-2026, 06:54 PM
RE: Shaitani aaina - by rajeev13 - 30-04-2026, 08:08 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 30-04-2026, 08:10 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 30-04-2026, 08:39 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 02-05-2026, 03:34 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 02-05-2026, 03:43 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 02-05-2026, 09:50 PM
RE: Shaitani aaina - by Praveen84 - 26-05-2026, 08:25 AM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 13-06-2026, 11:55 PM
RE: Shaitani aaina - by Rocksanna999 - 15-06-2026, 02:31 PM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 16-06-2026, 01:47 AM
RE: Shaitani aaina - by Rocksanna999 - 16-06-2026, 08:38 AM
RE: Shaitani aaina - by Hot_randi_rishita - 16-06-2026, 02:06 PM
RE: Shaitani aaina - by Rocksanna999 - 16-06-2026, 10:29 PM
RE: Shaitani aaina - by Raj14592 - 16-06-2026, 11:11 PM
RE: Shaitani aaina - by Rocksanna999 - 17-06-2026, 04:51 PM
RE: Shaitani aaina - by 123@abc - 17-06-2026, 07:48 PM
RE: Shaitani aaina - by Rocksanna999 - 20-06-2026, 12:22 PM
RE: Shaitani aaina - by Rocksanna999 - 6 hours ago



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