29-04-2026, 09:00 AM
मैं पीछे वाली सीट पर बैठा था और सामने नेहा और वेणु दोनों बगल-बगल बैठे थे।
सीटें इतनी छोटी थीं कि दोनों के नंगे कंधे बार-बार एक-दूसरे से टच हो रहे थे।
वेणु कभी-कभी कोई जोक मारता और नेहा जोर से खिलखिलाकर हँस पड़ती। उसकी हँसी पूरी बोट में गूँज रही थी।
नेहा की जाँघें भी उसकी शॉर्ट्स के कारण वेणु की जाँघों से लगातार टच हो रही थीं।
वेणु का कद लंबा-चौड़ा था, डार्क स्किन, मजबूत बॉडी... वो नेहा के बिल्कुल करीब बैठा था।
हर बार जब बोट हिलती, दोनों के शरीर और सट जाते।
वेणु का डार्क हाथ कभी-कभी नेहा की गोरी जाँघ के पास से गुजरता।
मैं पीछे बैठा सब देख रहा था।
मेरे शरीर में गुसबम्प्स पड़ गए थे।
दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
उस लड़के (वेणु) को अभी भी यकीन नहीं हो रहा था।
एक इतनी सुंदर, शादीशुदा लड़की उसके बगल में बैठी हुई थी और इतनी खुलकर उससे बातें कर रही थी।
वो बार-बार इधर-उधर देख रहा था — जैसे कहीं नेहा का पति आसपास बैठा हो और उसे देख न ले।
हर थोड़ी देर में उसकी नजर बोट में घूम जाती, फिर वापस नेहा पर आ जाती।
उसकी आँखों में हैरानी, खुशी और थोड़ा डर भी था।
नेहा को ये सब बहुत मज़ा आ रहा था।
वो जानबूझकर और खुलकर बातें कर रही थी, हँस रही थी, और कभी-कभी वेणु के कंधे से अपना कंधा हल्का सा टच कर लेती थी।
और यहाँ मैं ये सोच रहा था कि...
ये सब मैंने इतना जल्दी कैसे कह दिया नेहा को?
हमने तो पहले सिर्फ रोलप्ले में ही ऐसी फैंटेसी की थी — कई बार। लेकिन असल ज़िंदगी में ये मौका आएगा, ये हम दोनों को भी नहीं पता था। ये पूरी तरह अनप्लान्ड था।
बोट अब बीच समंदर में पहुँच चुकी थी, जहाँ स्कूबा डाइविंग होनी थी।
इंस्ट्रक्टर और उनके स्टाफ ने सबको इकट्ठा किया और एक-एक करके नियम समझाने लगे।
सब लोग ध्यान से सुन रहे थे। मैं भी पीछे से सुन रहा था।
नेहा ने भी एक-दो सवाल पूछे।
“ये सूट कैसे पहनेंगे?”
इंस्ट्रक्टर ने बताया, “ये वन-पीस सूट है। पैर डालिए, चेन ऊपर खींचिए, हाथ डालिए... ये आपके शरीर से पूरी तरह चिपक जाएगा। उसके बाद हेलमेट लगाएँगे और पानी में जाएँगे।”
नेहा ध्यान से सुन रही थी।
सूट काफी भारी था। इंस्ट्रक्टर ने एक-एक करके सबको सूट समझा दिया।
जो कपल्स थे, वो अपनी वाइफ को सूट पहनाने में मदद कर रहे थे। क्योंकि वो टाइट सूट था, अकेले पहनना मुश्किल था।
नेहा ने इधर-उधर देखा।
फिर उसने वेणु की तरफ मुड़कर बहुत सहजता से पूछा,
“क्या आप मेरी हेल्प करेंगे इस सूट पहनने में?”
वेणु एकदम से बहुत खुश हो गया।
उसके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान आ गई।
सच में वो लड़का नेहा की उम्र का ही था।
दोनों एक कपल की तरह ही लग रहे थे।
वेणु ने तुरंत कहा, “हाँ... क्यों नहीं।”
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा, “थैंक यू।”
वेणु ने सूट उठाया और नेहा के सामने खड़ा हो गया।
नेहा ने व्हाइट कलर का टॉप और शॉर्ट स्कर्ट पहना हुआ था।
स्कूबा सूट कपड़ों के ऊपर से ही पहनना था।
वेणु ने सूट को नीचे से खोला और नेहा के पैरों के पास रख दिया।
नेहा ने एक-एक करके अपने पैर सूट में डाले।
वेणु धीरे-धीरे सूट को नेहा की जाँघों पर चढ़ाने लगा।
सूट बहुत टाइट था, इसलिए उसे नेहा की जाँघों को थोड़ा ऊपर उठाना पड़ रहा था।
उसके हाथ नेहा की गोरी जाँघों पर बार-बार लग रहे थे।
नेहा ने एक बार पीछे मेरी तरफ देखा... फिर वेणु की तरफ मुड़कर हल्के से बोली,
“ऊपर भी मदद कर दो... पीछे की चेन लगाने में दिक्कत हो रही है।”
वेणु ने नेहा को घुमाया।
अब नेहा उसकी तरफ़ पीठ करके खड़ी थी।
वेणु ने सूट को नेहा की पीठ पर चढ़ाया और पीछे वाली चेन धीरे-धीरे ऊपर खींचने लगा।
उसकी उँगलियाँ नेहा की पीठ पर घूम रही थीं
मैं सब देख रहा था।
वेणु ने झुककर सूट चढ़ाया तो उसकी नज़र नेहा की छोटी स्कर्ट के अंदर चली गई।
स्कर्ट बहुत छोटी थी। जब वो नीचे बैठा होगा, तो उसे नेहा की पैंटी भी साफ़ दिखी होगी।
एक पल के लिए वेणु का चेहरा नेहा की चूत के बहुत करीब था।
मुझे यकीन था कि उसे नेहा की गर्म, मीठी खुशबू आई होगी।
ये सब मेरे दिमाग में घूम रहा था।
सूट पहनते समय पास बैठे एक कपल ने देखा और जोर से बोला,
“अरे वाह! आपने तो सूट बहुत आसानी से पहन लिया। मेरा पति तो ये कर भी नहीं पा रहा। क्या आपके पति ने पहले भी ये सब किया हुआ है?”
नेहा मुस्कुराई और कुछ बोलने के लिए मुँह खोला।
वो शायद यही कहना चाह रही थी — “ये मेरा पति नहीं है।”
लेकिन अचानक वो रुक गई।
उसके दिमाग में तुरंत ख्याल आया —
अगर उसने ये कहा तो अगला सवाल तुरंत आएगा:
“अगर ये पति नहीं है तो आपके साथ इतना चिपककर क्यों खड़ा है? और सूट पहनाने में इतनी मदद क्यों कर रहा है? आपका पति कहाँ है?”
नेहा ने एक सेकंड में सब समझ लिया।
उसने मुस्कान को और चौड़ा किया और वेणु की तरफ इशारा करके बोली,
“हाँ... ये पहले भी कई बार कर चुका है। इसलिए आसानी से हो गया।”
आर्यन ने भी तुरंत नेहा का साथ देते हुए सिर हिला दिया।
मैं पीछे खड़ा था और सब देख रहा था।
नेहा ने झूठ बोल दिया था
और वेणु ने भी उसे कवर कर दिया था।
अब दोनों को लग रहा था कि वो एक कपल हैं।
सूट पहनकर सब लोग बारी-बारी पानी के अंदर गए।
नेहा करीब 15 मिनट पानी के नीचे रही। जब वो बाहर आई तो उसका चेहरा पूरी तरह चमक रहा था। उसकी मुस्कान बहुत बड़ी और ख़ुशी से भरी हुई थी।
मैं भी थोड़ी देर बाद बाहर निकला।
लेकिन जैसे ही नेहा बाहर आई, वो मेरे पास नहीं आई।
वो सीधे वेणु के पास गई।
वेणु पहले से ही बाहर खड़ा था। नेहा उसके सामने खड़ी हो गई और बहुत उत्साह से, थोड़ा तेज़ स्वर में बताने लगी — ताकि मैं भी सुन सकूँ।
“यार... अंदर का सीन देखने लायक था! नीला पानी, रंग-बिरंगी मछलियाँ, कोरल... बहुत ख़ूबसूरत था। मैं तो डर भी गई थी शुरू में, लेकिन एक बार नीचे गए तो सब भूल गई।”
नेहा का उस लड़के के साथ हँसते-खेलते घूमना अब मेरे लिए खेल से ज़्यादा मजबूरी बन चुका था।
एक-डेढ़ घंटे के अंदर आसपास के सब लोग नेहा और वेणु को कपल समझने लगे थे। वो दोनों इतना नैचुरली साथ घूम रहे थे कि किसी को शक भी नहीं हो रहा था।
अगर इस बीच नेहा अचानक मेरे पास आकर मुझसे बात करती, तो सबको अजीब लगता। इसलिए हम दोनों ने तय कर लिया था कि इस खेल को और आगे बढ़ाते हैं। हम देखना चाहते थे कि ये कहाँ तक जाता है।
उसके बाद कई वॉटर राइड्स हुईं।
जब पैरासेलिंग वाली राइड आई — जिसमें दो लोगों को साथ में पैराशूट से ऊपर हवा में छोड़ दिया जाता है — तो इंस्ट्रक्टर ने पूछा, “कौन-कौन जाना चाहता है?”
नेहा का उस लड़के के साथ हँसता-खेलता घूमना अब मेरे लिए खेल से ज़्यादा मजबूरी बन चुका था।
एक-डेढ़ घंटे के अंदर आसपास के सब लोग नेहा और वेणु को कपल समझने लगे थे। वो दोनों इतना नैचुरली साथ घूम रहे थे कि किसी को शक भी नहीं हो रहा था।
अगर इस बीच नेहा अचानक मेरे पास आकर मुझसे बात करती, तो सबको अजीब लगता।
इसलिए हम दोनों ने तय कर लिया था कि इस खेल को और आगे बढ़ाते हैं। हम देखना चाहते थे कि ये कहाँ तक जाता है।
उसके बाद कई वॉटर राइड्स हुईं।
जब पैरासेलिंग वाली राइड आई — जिसमें दो लोगों को साथ में पैराशूट से ऊपर हवा में छोड़ दिया जाता है — तो इंस्ट्रक्टर ने पूछा, “कौन-कौन जाना चाहता है?”
वेणु ने तुरंत नेहा की तरफ देखा।
नेहा ने भी वेणु की तरफ देखा।
दोनों की नज़र मिली और बिना कुछ कहे दोनों ने हाथ उठा दिया।
इंस्ट्रक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा, “पर्फेक्ट कपल! आ जाओ।”
नेहा ने मेरी तरफ एक बार देखा... फिर वेणु के साथ पैरासेलिंग वाली जगह की तरफ चल दी।
मैं वहीं खड़ा रह गया।
अब नेहा और वेणु दोनों हार्नेस में बंधने वाले थे — एक-दूसरे के बहुत करीब, कंधे से कंधा, कमर से कमर सटाकर।
नेहा आगे थी और उसके ठीक पीछे वेणु।
दोनों को हार्नेस में अच्छे से बाँध दिया गया था।
वेणु का शरीर नेहा के बहुत करीब था। उसका क्रॉच नेहा की गांड के ठीक ऊपर था और उसका सीना लगभग नेहा के कंधों के बराबर था। दोनों पूरी तरह चिपक गए थे — पीठ से छाती, गांड से क्रॉच, सब कुछ सटा हुआ था।
पैराशूट के ऊपर जाते ही हवा में दोनों और भी ज़्यादा सट गए।
वेणु के हाथ नेहा की कमर के आसपास थे। हवा के झोंके के साथ दोनों का शरीर एक-दूसरे से बार-बार रगड़ खा रहा था।
मैं नीचे से सब कुछ देख रहा था।
नेहा के चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन उसकी आँखें बार-बार मेरी तरफ आ रही थीं। वेणु भी बहुत एक्साइटेड दिख रहा था।
जब वो ऊपर हवा में थे, मैंने देखा कि वेणु ने अपना सिर नेहा के कंधे की तरफ झुकाया और उसके कान के पास कुछ कहा।
नेहा हँस पड़ी।
मैं नीचे खड़ा था और उन्हें देख रहा था।
नेहा की कमर पर काला बेल्ट टाइट बँधा हुआ था, जिससे उसकी कमर और भी पतली दिख रही थी। उसके बूब्स सूट के अंदर से साफ़ उभरे हुए थे। वो बहुत आकर्षक लग रही थी।
वेणु का एक हाथ नेहा के कंधे पर था।
एक पल के लिए मुझे लगा कि वेणु का हाथ नेहा के बूब्स पर चला गया — लगभग ५ सेकंड तक।
नेहा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी — न हटाया, न कुछ कहा। वो बस हँसती रही।
दोनों ऊपर हवा में ऐसे लग रहे थे जैसे कोई हनीमून कपल हो — बहुत क्लोज़, बहुत सहज, बहुत खुश।
मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
जब पैराशूट नीचे आ रहा था, तो नेहा और वेणु दोनों साथ में लैंडिंग कर रहे थे।
रोप खींचकर उन्हें बोट पर उतारा जा रहा था। जैसे ही उनके पैर बोट के फ्लोर पर पड़े, नेहा का बैलेंस बिगड़ गया। उसके पैर थोड़े काँप रहे थे और वो डगमगा गई।
मेरा पहला इंस्टिंक्ट था — उसे बचाना।
मैं तुरंत उठा और आगे बढ़ा, उसका हाथ पकड़ने के लिए।
नेहा ने मुझे देखा।
हमारे हाथ एक-दूसरे से मिले।
उसने मुस्कुराकर कहा — “आई एम ओके...”
लेकिन उसी पल एक और मजबूत हाथ आया और मेरे कलाई को पकड़ लिया।
वेणु था वो।
उसका हाथ बहुत सख्त और मज़बूत था। उसने मेरे हाथ को हिलाते हुए कहा —
“आई गॉट दिस ब्रो... थैंक्स।”
फिर वो नेहा की तरफ मुड़ा, उसकी कमर पर हल्का सा हाथ रखा और शरारती मुस्कान के साथ बोला —
“हनी... आर यू ओके?”
दोनों एक साथ हँस पड़े — जैसे कोई अंदर का जोक हो।
उसने मेरी आँखों के सामने मेरी बीवी से मेरा हाथ हटा लिया।
मैं उसकी गलती नहीं मानता, क्योंकि उसे लग रहा था कि मैं कोई अनजान हूँ जिसने एक लड़की को थामा और... उसने मेरा हाथ हटाकर फिर वो दोनों कोने में बैठ गए।
मैं उन्हें देख रहा था।
वो हँस रहे थे, खेल खेला रहे थे।
वो लड़का अब बार-बार मेरी तरफ देख रहा था क्योंकि उसे लग रहा था कि मैं उन दोनों को घूर रहा हूँ।
वो सच में मुझे शक की नज़र से देख रहा था।
नेहा बीच में बैठी थी, दोनों के बीच।
आर्यन का हाथ अब भी उसके कंधे पर था और वो कुछ कहकर नेहा को हँसा रहा था।
मैं बस खड़ा था, कुछ बोल नहीं पा रहा था।
मेरा दिमाग अभी भी उसी पल पर अटका हुआ था जब उसने मेरा हाथ हटाया था।
थोड़ी देर में बोट लैंड हो गई।
सब लोग हँसते-खेलते, मस्ती करते हुए बोट से उतर गए।
सबने मिलकर एक ग्रुप फोटो ली।
फोटो के बाद लोग अपने-अपने रास्ते चल दिए।
लेकिन नेहा अभी भी उस लड़के के साथ थी।
दोनों साथ-साथ चल रहे थे। नेहा हँस रही थी, वेणु भी कुछ कहकर उसे हँसा रहा था।
वो दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब चल रहे थे — कंधे लगभग टच होते हुए।
मैं थोड़ी दूर पीछे-पीछे चल रहा था।
मैंने देखा कि नेहा और वो लड़का (वेणु) साथ में जा रहे थे।
बीच की रेत पर धीरे-धीरे चलते हुए, सामने कुछ शैक्स बने हुए थे जहाँ बियर सर्व हो रही थी।
दोनों बातें करते हुए, हँसते हुए उसी तरफ बढ़ गए और एक शैक पर जाकर बैठ गए।
वहाँ उन्होंने कुछ ऑर्डर किया।
मैं भी उनके पीछे-पीछे धीरे-धीरे चला गया।
वो लड़का मुझे बार-बार घूर रहा था, लेकिन मैंने कोई ध्यान नहीं दिया।
मैं उनके पीछे थोड़ी दूर पर एक टेबल ले ली और बैठ गया।
अब मैं उन्हें अच्छे से सुन और देख सकता था।
वेणु अब धीरे-धीरे फिजिकल हो रहा था।
दोनों बहुत करीब बैठे थे।
मैंने देखा कि उसका हाथ नेहा की जाँघ पर था और वो धीरे-धीरे उसे रगड़ रहा था।
उसकी उँगलियाँ नेहा की जाँघ के अंदरूनी हिस्से पर घूम रही थीं।
वो सच में अपने आप को नेहा का टेम्परेरी पति समझ रहा था।
उसकी नज़रें नेहा के चेहरे, सीने और जाँघों पर बार-बार जा रही थीं।
नेहा भी उसे रोक नहीं रही थी।
वो हँस रही थी, बातें कर रही थी, और कभी-कभी वेणु के कंधे पर हाथ रख देती थी।
वेणु ने अब और थोड़ा साहस दिखाते हुए नेहा की जाँघ को हल्के से दबाया।
नेहा ने हल्के से साँस छोड़ी, लेकिन मुस्कुराती रही।
मैं थोड़ी देर तक उन दोनों को बातें करते हुए देखता रहा।
फिर थोड़ी देर बाद वेणु उठा और वॉशरूम की तरफ चला गया।
जैसे ही वो अंदर चला गया, मैं तुरंत उठा और नेहा के पास भागकर पहुँच गया।
मैंने जल्दी से पूछा, “तुम ठीक हो?”
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, मैं ठीक हूँ।”
मैंने फिर पूछा, “तो अब चलें या...?”
नेहा ने मेरी शक्ल की तरफ देखा और भौंहें थोड़ी ऊपर करके पूछा,
“क्या मतलब?”
उसकी आँखों में शरारत और थोड़ी हैरानी दोनों थी।
वो मेरी तरफ देख रही थी, जैसे मेरे दिमाग को पढ़ने की कोशिश कर रही हो।
थोड़ी देर और रुको, नेहा ने मेरी तरफ देखकर बोला, “जैसा तुम कहो।”
मैंने नेहा से कहा, “थोड़ी देर और रुको।”
नेहा ने मेरी तरफ देखा और बोली, “जैसे तुम कहो। अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है, तो हम थोड़ी देर और रुक सकते हैं।”
मैंने हाँ में सिर हिलाते हुए कहा, “अगर ये सब सेफ है, तो कोई दिक्कत नहीं... हम थोड़ी देर और रुक सकते हैं।”
जैसे ही ये शब्द मेरे मुँह से निकले, मैंने अपने कंधे पर एक भारी हाथ महसूस किया।
एक सख्त, मज़बूत हाथ।
मैंने पीछे मुड़कर देखा — वेणु खड़ा था।
उसने एक झटके से मेरी शर्ट का कॉलर पकड़ लिया और मुझे खींचा। उसकी आँखों में गुस्सा था।
साउथ इंडियन एक्सेंट में गरजते हुए बोला,
“साले अंकल! बहुत देर से मैं तुझे देख रहा हूँ! तू मेरी बीवी की तरफ देख रहा है! तुझे शर्म नहीं आ रही कि यहाँ खुलेआम उसको छेड़ रहा है? अभी मुक्के मारूँगा और तेरा सर फोड़ दूँगा!”
नेहा एकदम से चौंक गई। उसका चेहरा सफेद पड़ गया।
वेणु का पकड़ बहुत ज़ोर का था।
मैं वहीं खड़ा था, कॉलर पकड़ा हुआ, और वेणु मुझे घूर रहा था।
सीटें इतनी छोटी थीं कि दोनों के नंगे कंधे बार-बार एक-दूसरे से टच हो रहे थे।
वेणु कभी-कभी कोई जोक मारता और नेहा जोर से खिलखिलाकर हँस पड़ती। उसकी हँसी पूरी बोट में गूँज रही थी।
नेहा की जाँघें भी उसकी शॉर्ट्स के कारण वेणु की जाँघों से लगातार टच हो रही थीं।
वेणु का कद लंबा-चौड़ा था, डार्क स्किन, मजबूत बॉडी... वो नेहा के बिल्कुल करीब बैठा था।
हर बार जब बोट हिलती, दोनों के शरीर और सट जाते।
वेणु का डार्क हाथ कभी-कभी नेहा की गोरी जाँघ के पास से गुजरता।
मैं पीछे बैठा सब देख रहा था।
मेरे शरीर में गुसबम्प्स पड़ गए थे।
दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
उस लड़के (वेणु) को अभी भी यकीन नहीं हो रहा था।
एक इतनी सुंदर, शादीशुदा लड़की उसके बगल में बैठी हुई थी और इतनी खुलकर उससे बातें कर रही थी।
वो बार-बार इधर-उधर देख रहा था — जैसे कहीं नेहा का पति आसपास बैठा हो और उसे देख न ले।
हर थोड़ी देर में उसकी नजर बोट में घूम जाती, फिर वापस नेहा पर आ जाती।
उसकी आँखों में हैरानी, खुशी और थोड़ा डर भी था।
नेहा को ये सब बहुत मज़ा आ रहा था।
वो जानबूझकर और खुलकर बातें कर रही थी, हँस रही थी, और कभी-कभी वेणु के कंधे से अपना कंधा हल्का सा टच कर लेती थी।
और यहाँ मैं ये सोच रहा था कि...
ये सब मैंने इतना जल्दी कैसे कह दिया नेहा को?
हमने तो पहले सिर्फ रोलप्ले में ही ऐसी फैंटेसी की थी — कई बार। लेकिन असल ज़िंदगी में ये मौका आएगा, ये हम दोनों को भी नहीं पता था। ये पूरी तरह अनप्लान्ड था।
बोट अब बीच समंदर में पहुँच चुकी थी, जहाँ स्कूबा डाइविंग होनी थी।
इंस्ट्रक्टर और उनके स्टाफ ने सबको इकट्ठा किया और एक-एक करके नियम समझाने लगे।
सब लोग ध्यान से सुन रहे थे। मैं भी पीछे से सुन रहा था।
नेहा ने भी एक-दो सवाल पूछे।
“ये सूट कैसे पहनेंगे?”
इंस्ट्रक्टर ने बताया, “ये वन-पीस सूट है। पैर डालिए, चेन ऊपर खींचिए, हाथ डालिए... ये आपके शरीर से पूरी तरह चिपक जाएगा। उसके बाद हेलमेट लगाएँगे और पानी में जाएँगे।”
नेहा ध्यान से सुन रही थी।
सूट काफी भारी था। इंस्ट्रक्टर ने एक-एक करके सबको सूट समझा दिया।
जो कपल्स थे, वो अपनी वाइफ को सूट पहनाने में मदद कर रहे थे। क्योंकि वो टाइट सूट था, अकेले पहनना मुश्किल था।
नेहा ने इधर-उधर देखा।
फिर उसने वेणु की तरफ मुड़कर बहुत सहजता से पूछा,
“क्या आप मेरी हेल्प करेंगे इस सूट पहनने में?”
वेणु एकदम से बहुत खुश हो गया।
उसके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान आ गई।
सच में वो लड़का नेहा की उम्र का ही था।
दोनों एक कपल की तरह ही लग रहे थे।
वेणु ने तुरंत कहा, “हाँ... क्यों नहीं।”
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा, “थैंक यू।”
वेणु ने सूट उठाया और नेहा के सामने खड़ा हो गया।
नेहा ने व्हाइट कलर का टॉप और शॉर्ट स्कर्ट पहना हुआ था।
स्कूबा सूट कपड़ों के ऊपर से ही पहनना था।
वेणु ने सूट को नीचे से खोला और नेहा के पैरों के पास रख दिया।
नेहा ने एक-एक करके अपने पैर सूट में डाले।
वेणु धीरे-धीरे सूट को नेहा की जाँघों पर चढ़ाने लगा।
सूट बहुत टाइट था, इसलिए उसे नेहा की जाँघों को थोड़ा ऊपर उठाना पड़ रहा था।
उसके हाथ नेहा की गोरी जाँघों पर बार-बार लग रहे थे।
नेहा ने एक बार पीछे मेरी तरफ देखा... फिर वेणु की तरफ मुड़कर हल्के से बोली,
“ऊपर भी मदद कर दो... पीछे की चेन लगाने में दिक्कत हो रही है।”
वेणु ने नेहा को घुमाया।
अब नेहा उसकी तरफ़ पीठ करके खड़ी थी।
वेणु ने सूट को नेहा की पीठ पर चढ़ाया और पीछे वाली चेन धीरे-धीरे ऊपर खींचने लगा।
उसकी उँगलियाँ नेहा की पीठ पर घूम रही थीं
मैं सब देख रहा था।
वेणु ने झुककर सूट चढ़ाया तो उसकी नज़र नेहा की छोटी स्कर्ट के अंदर चली गई।
स्कर्ट बहुत छोटी थी। जब वो नीचे बैठा होगा, तो उसे नेहा की पैंटी भी साफ़ दिखी होगी।
एक पल के लिए वेणु का चेहरा नेहा की चूत के बहुत करीब था।
मुझे यकीन था कि उसे नेहा की गर्म, मीठी खुशबू आई होगी।
ये सब मेरे दिमाग में घूम रहा था।
सूट पहनते समय पास बैठे एक कपल ने देखा और जोर से बोला,
“अरे वाह! आपने तो सूट बहुत आसानी से पहन लिया। मेरा पति तो ये कर भी नहीं पा रहा। क्या आपके पति ने पहले भी ये सब किया हुआ है?”
नेहा मुस्कुराई और कुछ बोलने के लिए मुँह खोला।
वो शायद यही कहना चाह रही थी — “ये मेरा पति नहीं है।”
लेकिन अचानक वो रुक गई।
उसके दिमाग में तुरंत ख्याल आया —
अगर उसने ये कहा तो अगला सवाल तुरंत आएगा:
“अगर ये पति नहीं है तो आपके साथ इतना चिपककर क्यों खड़ा है? और सूट पहनाने में इतनी मदद क्यों कर रहा है? आपका पति कहाँ है?”
नेहा ने एक सेकंड में सब समझ लिया।
उसने मुस्कान को और चौड़ा किया और वेणु की तरफ इशारा करके बोली,
“हाँ... ये पहले भी कई बार कर चुका है। इसलिए आसानी से हो गया।”
आर्यन ने भी तुरंत नेहा का साथ देते हुए सिर हिला दिया।
मैं पीछे खड़ा था और सब देख रहा था।
नेहा ने झूठ बोल दिया था
और वेणु ने भी उसे कवर कर दिया था।
अब दोनों को लग रहा था कि वो एक कपल हैं।
सूट पहनकर सब लोग बारी-बारी पानी के अंदर गए।
नेहा करीब 15 मिनट पानी के नीचे रही। जब वो बाहर आई तो उसका चेहरा पूरी तरह चमक रहा था। उसकी मुस्कान बहुत बड़ी और ख़ुशी से भरी हुई थी।
मैं भी थोड़ी देर बाद बाहर निकला।
लेकिन जैसे ही नेहा बाहर आई, वो मेरे पास नहीं आई।
वो सीधे वेणु के पास गई।
वेणु पहले से ही बाहर खड़ा था। नेहा उसके सामने खड़ी हो गई और बहुत उत्साह से, थोड़ा तेज़ स्वर में बताने लगी — ताकि मैं भी सुन सकूँ।
“यार... अंदर का सीन देखने लायक था! नीला पानी, रंग-बिरंगी मछलियाँ, कोरल... बहुत ख़ूबसूरत था। मैं तो डर भी गई थी शुरू में, लेकिन एक बार नीचे गए तो सब भूल गई।”
नेहा का उस लड़के के साथ हँसते-खेलते घूमना अब मेरे लिए खेल से ज़्यादा मजबूरी बन चुका था।
एक-डेढ़ घंटे के अंदर आसपास के सब लोग नेहा और वेणु को कपल समझने लगे थे। वो दोनों इतना नैचुरली साथ घूम रहे थे कि किसी को शक भी नहीं हो रहा था।
अगर इस बीच नेहा अचानक मेरे पास आकर मुझसे बात करती, तो सबको अजीब लगता। इसलिए हम दोनों ने तय कर लिया था कि इस खेल को और आगे बढ़ाते हैं। हम देखना चाहते थे कि ये कहाँ तक जाता है।
उसके बाद कई वॉटर राइड्स हुईं।
जब पैरासेलिंग वाली राइड आई — जिसमें दो लोगों को साथ में पैराशूट से ऊपर हवा में छोड़ दिया जाता है — तो इंस्ट्रक्टर ने पूछा, “कौन-कौन जाना चाहता है?”
नेहा का उस लड़के के साथ हँसता-खेलता घूमना अब मेरे लिए खेल से ज़्यादा मजबूरी बन चुका था।
एक-डेढ़ घंटे के अंदर आसपास के सब लोग नेहा और वेणु को कपल समझने लगे थे। वो दोनों इतना नैचुरली साथ घूम रहे थे कि किसी को शक भी नहीं हो रहा था।
अगर इस बीच नेहा अचानक मेरे पास आकर मुझसे बात करती, तो सबको अजीब लगता।
इसलिए हम दोनों ने तय कर लिया था कि इस खेल को और आगे बढ़ाते हैं। हम देखना चाहते थे कि ये कहाँ तक जाता है।
उसके बाद कई वॉटर राइड्स हुईं।
जब पैरासेलिंग वाली राइड आई — जिसमें दो लोगों को साथ में पैराशूट से ऊपर हवा में छोड़ दिया जाता है — तो इंस्ट्रक्टर ने पूछा, “कौन-कौन जाना चाहता है?”
वेणु ने तुरंत नेहा की तरफ देखा।
नेहा ने भी वेणु की तरफ देखा।
दोनों की नज़र मिली और बिना कुछ कहे दोनों ने हाथ उठा दिया।
इंस्ट्रक्टर ने मुस्कुराते हुए कहा, “पर्फेक्ट कपल! आ जाओ।”
नेहा ने मेरी तरफ एक बार देखा... फिर वेणु के साथ पैरासेलिंग वाली जगह की तरफ चल दी।
मैं वहीं खड़ा रह गया।
अब नेहा और वेणु दोनों हार्नेस में बंधने वाले थे — एक-दूसरे के बहुत करीब, कंधे से कंधा, कमर से कमर सटाकर।
नेहा आगे थी और उसके ठीक पीछे वेणु।
दोनों को हार्नेस में अच्छे से बाँध दिया गया था।
वेणु का शरीर नेहा के बहुत करीब था। उसका क्रॉच नेहा की गांड के ठीक ऊपर था और उसका सीना लगभग नेहा के कंधों के बराबर था। दोनों पूरी तरह चिपक गए थे — पीठ से छाती, गांड से क्रॉच, सब कुछ सटा हुआ था।
पैराशूट के ऊपर जाते ही हवा में दोनों और भी ज़्यादा सट गए।
वेणु के हाथ नेहा की कमर के आसपास थे। हवा के झोंके के साथ दोनों का शरीर एक-दूसरे से बार-बार रगड़ खा रहा था।
मैं नीचे से सब कुछ देख रहा था।
नेहा के चेहरे पर मुस्कान थी, लेकिन उसकी आँखें बार-बार मेरी तरफ आ रही थीं। वेणु भी बहुत एक्साइटेड दिख रहा था।
जब वो ऊपर हवा में थे, मैंने देखा कि वेणु ने अपना सिर नेहा के कंधे की तरफ झुकाया और उसके कान के पास कुछ कहा।
नेहा हँस पड़ी।
मैं नीचे खड़ा था और उन्हें देख रहा था।
नेहा की कमर पर काला बेल्ट टाइट बँधा हुआ था, जिससे उसकी कमर और भी पतली दिख रही थी। उसके बूब्स सूट के अंदर से साफ़ उभरे हुए थे। वो बहुत आकर्षक लग रही थी।
वेणु का एक हाथ नेहा के कंधे पर था।
एक पल के लिए मुझे लगा कि वेणु का हाथ नेहा के बूब्स पर चला गया — लगभग ५ सेकंड तक।
नेहा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी — न हटाया, न कुछ कहा। वो बस हँसती रही।
दोनों ऊपर हवा में ऐसे लग रहे थे जैसे कोई हनीमून कपल हो — बहुत क्लोज़, बहुत सहज, बहुत खुश।
मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था।
जब पैराशूट नीचे आ रहा था, तो नेहा और वेणु दोनों साथ में लैंडिंग कर रहे थे।
रोप खींचकर उन्हें बोट पर उतारा जा रहा था। जैसे ही उनके पैर बोट के फ्लोर पर पड़े, नेहा का बैलेंस बिगड़ गया। उसके पैर थोड़े काँप रहे थे और वो डगमगा गई।
मेरा पहला इंस्टिंक्ट था — उसे बचाना।
मैं तुरंत उठा और आगे बढ़ा, उसका हाथ पकड़ने के लिए।
नेहा ने मुझे देखा।
हमारे हाथ एक-दूसरे से मिले।
उसने मुस्कुराकर कहा — “आई एम ओके...”
लेकिन उसी पल एक और मजबूत हाथ आया और मेरे कलाई को पकड़ लिया।
वेणु था वो।
उसका हाथ बहुत सख्त और मज़बूत था। उसने मेरे हाथ को हिलाते हुए कहा —
“आई गॉट दिस ब्रो... थैंक्स।”
फिर वो नेहा की तरफ मुड़ा, उसकी कमर पर हल्का सा हाथ रखा और शरारती मुस्कान के साथ बोला —
“हनी... आर यू ओके?”
दोनों एक साथ हँस पड़े — जैसे कोई अंदर का जोक हो।
उसने मेरी आँखों के सामने मेरी बीवी से मेरा हाथ हटा लिया।
मैं उसकी गलती नहीं मानता, क्योंकि उसे लग रहा था कि मैं कोई अनजान हूँ जिसने एक लड़की को थामा और... उसने मेरा हाथ हटाकर फिर वो दोनों कोने में बैठ गए।
मैं उन्हें देख रहा था।
वो हँस रहे थे, खेल खेला रहे थे।
वो लड़का अब बार-बार मेरी तरफ देख रहा था क्योंकि उसे लग रहा था कि मैं उन दोनों को घूर रहा हूँ।
वो सच में मुझे शक की नज़र से देख रहा था।
नेहा बीच में बैठी थी, दोनों के बीच।
आर्यन का हाथ अब भी उसके कंधे पर था और वो कुछ कहकर नेहा को हँसा रहा था।
मैं बस खड़ा था, कुछ बोल नहीं पा रहा था।
मेरा दिमाग अभी भी उसी पल पर अटका हुआ था जब उसने मेरा हाथ हटाया था।
थोड़ी देर में बोट लैंड हो गई।
सब लोग हँसते-खेलते, मस्ती करते हुए बोट से उतर गए।
सबने मिलकर एक ग्रुप फोटो ली।
फोटो के बाद लोग अपने-अपने रास्ते चल दिए।
लेकिन नेहा अभी भी उस लड़के के साथ थी।
दोनों साथ-साथ चल रहे थे। नेहा हँस रही थी, वेणु भी कुछ कहकर उसे हँसा रहा था।
वो दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब चल रहे थे — कंधे लगभग टच होते हुए।
मैं थोड़ी दूर पीछे-पीछे चल रहा था।
मैंने देखा कि नेहा और वो लड़का (वेणु) साथ में जा रहे थे।
बीच की रेत पर धीरे-धीरे चलते हुए, सामने कुछ शैक्स बने हुए थे जहाँ बियर सर्व हो रही थी।
दोनों बातें करते हुए, हँसते हुए उसी तरफ बढ़ गए और एक शैक पर जाकर बैठ गए।
वहाँ उन्होंने कुछ ऑर्डर किया।
मैं भी उनके पीछे-पीछे धीरे-धीरे चला गया।
वो लड़का मुझे बार-बार घूर रहा था, लेकिन मैंने कोई ध्यान नहीं दिया।
मैं उनके पीछे थोड़ी दूर पर एक टेबल ले ली और बैठ गया।
अब मैं उन्हें अच्छे से सुन और देख सकता था।
वेणु अब धीरे-धीरे फिजिकल हो रहा था।
दोनों बहुत करीब बैठे थे।
मैंने देखा कि उसका हाथ नेहा की जाँघ पर था और वो धीरे-धीरे उसे रगड़ रहा था।
उसकी उँगलियाँ नेहा की जाँघ के अंदरूनी हिस्से पर घूम रही थीं।
वो सच में अपने आप को नेहा का टेम्परेरी पति समझ रहा था।
उसकी नज़रें नेहा के चेहरे, सीने और जाँघों पर बार-बार जा रही थीं।
नेहा भी उसे रोक नहीं रही थी।
वो हँस रही थी, बातें कर रही थी, और कभी-कभी वेणु के कंधे पर हाथ रख देती थी।
वेणु ने अब और थोड़ा साहस दिखाते हुए नेहा की जाँघ को हल्के से दबाया।
नेहा ने हल्के से साँस छोड़ी, लेकिन मुस्कुराती रही।
मैं थोड़ी देर तक उन दोनों को बातें करते हुए देखता रहा।
फिर थोड़ी देर बाद वेणु उठा और वॉशरूम की तरफ चला गया।
जैसे ही वो अंदर चला गया, मैं तुरंत उठा और नेहा के पास भागकर पहुँच गया।
मैंने जल्दी से पूछा, “तुम ठीक हो?”
नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, मैं ठीक हूँ।”
मैंने फिर पूछा, “तो अब चलें या...?”
नेहा ने मेरी शक्ल की तरफ देखा और भौंहें थोड़ी ऊपर करके पूछा,
“क्या मतलब?”
उसकी आँखों में शरारत और थोड़ी हैरानी दोनों थी।
वो मेरी तरफ देख रही थी, जैसे मेरे दिमाग को पढ़ने की कोशिश कर रही हो।
थोड़ी देर और रुको, नेहा ने मेरी तरफ देखकर बोला, “जैसा तुम कहो।”
मैंने नेहा से कहा, “थोड़ी देर और रुको।”
नेहा ने मेरी तरफ देखा और बोली, “जैसे तुम कहो। अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है, तो हम थोड़ी देर और रुक सकते हैं।”
मैंने हाँ में सिर हिलाते हुए कहा, “अगर ये सब सेफ है, तो कोई दिक्कत नहीं... हम थोड़ी देर और रुक सकते हैं।”
जैसे ही ये शब्द मेरे मुँह से निकले, मैंने अपने कंधे पर एक भारी हाथ महसूस किया।
एक सख्त, मज़बूत हाथ।
मैंने पीछे मुड़कर देखा — वेणु खड़ा था।
उसने एक झटके से मेरी शर्ट का कॉलर पकड़ लिया और मुझे खींचा। उसकी आँखों में गुस्सा था।
साउथ इंडियन एक्सेंट में गरजते हुए बोला,
“साले अंकल! बहुत देर से मैं तुझे देख रहा हूँ! तू मेरी बीवी की तरफ देख रहा है! तुझे शर्म नहीं आ रही कि यहाँ खुलेआम उसको छेड़ रहा है? अभी मुक्के मारूँगा और तेरा सर फोड़ दूँगा!”
नेहा एकदम से चौंक गई। उसका चेहरा सफेद पड़ गया।
वेणु का पकड़ बहुत ज़ोर का था।
मैं वहीं खड़ा था, कॉलर पकड़ा हुआ, और वेणु मुझे घूर रहा था।


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