28-04-2026, 03:27 PM
बाबा: “अब तुम मेरी छाती पर टिक्के से बिंदु बना दो और मेरे निप्पलस के चारों तरफ़ एक घेरा भी बना दो।”
निपल्स का नाम सुन कर पूजा शर्मा गयी। मैत्री रचित कहानी
पूजा बाबा के निपल्स पर टिक्का लगाने लगी।
बाबा: “मानव की धुन्नी उसकी ऊर्जा का सोत्र (सोर्स) होती है। यहाँ भी टिक्का लगाओ।”
पूजा: “जो आज्ञा बाबाजी।”
पूजा ने उंगली में टिक्का लगाया। बाबा की नेवेल में उंगली डाली और टिका लगाने लगी, बाबा ने पूजा को अट्रॅक्ट करने के लिए अपना पेट और चेस्ट शेव करने के साथ-साथ अपनी नेवेल में थोड़ी क्रीम लगाई थी। इसलिए उसकी नेवेल चिकनी हो गयी थी, पूजा सोच रही थी की इतनी चिकनी नेवेल तो उसकी ख़ुद की भी नहीं है। पूजा बाबा के बदन की तरफ़ खीची चली जा रही थी। ऐसे थॉट्स उसके मन मैं पहले कभी नहीं आए थे।
पूजा ने बाबा की नेवेल में से अपनी उंगली निकाली। बाबा ने अपने थेले से एक लंड की शेप की लकड़ी निकाली, लकड़ी बिल्कुल वेल पॉलिश्ड थी। 5 इंच लंबी और 1 इंच मोटी थी।
लकड़ी के एंड में एक छेद था। बाबा ने उस छेद में डाल कर धागा बाँधा।
बाबा: “यह लो, यह पूजनीय लिंग है। इसे मैंने काफ़ी कड़ी साधना के बाद सिद्ध किया है। इस लिंग को प्रणाम करो।”
पूजा ने लिंग को प्रणाम किया।
बाबा: “इस लिंग को अपनी कमर में बाँध लो, यह हमेशा तुम्हारे सामने आना चाहिए। तुम्हारे पेट के नीचे।”
पूजा: “बाबाजी, इससे क्या होगा?” प्रस्तुतकर्ता मैत्री.
बाबा: “ सब से पहले इस लिंग को साधारण ना समजो। इसे साधारण समजने की भूल कभी ना करना। इस से ऊपर वाले का आशीर्वाद तुम्हारे साथ रहेगा। यदि किसी और ने इससे देख लिया तो अनर्थ हो जाएगा। अतः यह किसी को दिखाना या बताना नहीं और तुम्हें हर समय यह बाँधे रखना है । सोते समय भी। और नहाते समय इसे बंधे हुए ही इस लिंग को धोके फिर से वही लटका रखना है। समज गई! यह बहोत जरुरी है। इस लिंग और तुम्हारे पति की आत्मा की शांति को कोई लेना देना नहीं है। पर इस लिंग से तुम्हे तुम्हारे पति की अनुपस्थिति महसूस नहीं होगी। यह लिंग तुम्हे तुम्हारे पति की याद सतत दिलाता रहेगा।”
पूजा: “जैसा आप कहें बाबाजी।”
बाबा: “लाओ, मैं बाँध दू।“
दोनो खड़े हो गये। बाबा ने वह लिंग पूजा की कमर में डाला और उसके पीछे आ कर गाँठ बाँधने लगा। उसके हाथ पूजा की नंगी कमर को छु रहे थे।
गाँठ लगाने के बाद बाबा बोला;
बाबा: “अब इस लिंग को अंदर डाल लो।“
*****************************
बने रहिये दोस्तों....................
निपल्स का नाम सुन कर पूजा शर्मा गयी। मैत्री रचित कहानी
पूजा बाबा के निपल्स पर टिक्का लगाने लगी।
बाबा: “मानव की धुन्नी उसकी ऊर्जा का सोत्र (सोर्स) होती है। यहाँ भी टिक्का लगाओ।”
पूजा: “जो आज्ञा बाबाजी।”
पूजा ने उंगली में टिक्का लगाया। बाबा की नेवेल में उंगली डाली और टिका लगाने लगी, बाबा ने पूजा को अट्रॅक्ट करने के लिए अपना पेट और चेस्ट शेव करने के साथ-साथ अपनी नेवेल में थोड़ी क्रीम लगाई थी। इसलिए उसकी नेवेल चिकनी हो गयी थी, पूजा सोच रही थी की इतनी चिकनी नेवेल तो उसकी ख़ुद की भी नहीं है। पूजा बाबा के बदन की तरफ़ खीची चली जा रही थी। ऐसे थॉट्स उसके मन मैं पहले कभी नहीं आए थे।
पूजा ने बाबा की नेवेल में से अपनी उंगली निकाली। बाबा ने अपने थेले से एक लंड की शेप की लकड़ी निकाली, लकड़ी बिल्कुल वेल पॉलिश्ड थी। 5 इंच लंबी और 1 इंच मोटी थी।
लकड़ी के एंड में एक छेद था। बाबा ने उस छेद में डाल कर धागा बाँधा।
बाबा: “यह लो, यह पूजनीय लिंग है। इसे मैंने काफ़ी कड़ी साधना के बाद सिद्ध किया है। इस लिंग को प्रणाम करो।”
पूजा ने लिंग को प्रणाम किया।
बाबा: “इस लिंग को अपनी कमर में बाँध लो, यह हमेशा तुम्हारे सामने आना चाहिए। तुम्हारे पेट के नीचे।”
पूजा: “बाबाजी, इससे क्या होगा?” प्रस्तुतकर्ता मैत्री.
बाबा: “ सब से पहले इस लिंग को साधारण ना समजो। इसे साधारण समजने की भूल कभी ना करना। इस से ऊपर वाले का आशीर्वाद तुम्हारे साथ रहेगा। यदि किसी और ने इससे देख लिया तो अनर्थ हो जाएगा। अतः यह किसी को दिखाना या बताना नहीं और तुम्हें हर समय यह बाँधे रखना है । सोते समय भी। और नहाते समय इसे बंधे हुए ही इस लिंग को धोके फिर से वही लटका रखना है। समज गई! यह बहोत जरुरी है। इस लिंग और तुम्हारे पति की आत्मा की शांति को कोई लेना देना नहीं है। पर इस लिंग से तुम्हे तुम्हारे पति की अनुपस्थिति महसूस नहीं होगी। यह लिंग तुम्हे तुम्हारे पति की याद सतत दिलाता रहेगा।”
पूजा: “जैसा आप कहें बाबाजी।”
बाबा: “लाओ, मैं बाँध दू।“
दोनो खड़े हो गये। बाबा ने वह लिंग पूजा की कमर में डाला और उसके पीछे आ कर गाँठ बाँधने लगा। उसके हाथ पूजा की नंगी कमर को छु रहे थे।
गाँठ लगाने के बाद बाबा बोला;
बाबा: “अब इस लिंग को अंदर डाल लो।“
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