27-04-2026, 12:19 PM
उस रात सब खत्म हो गया।
हम दोनों थोड़े अजीब हो गए थे अपने रिलेशनशिप में।
15-20 दिन निकल चुके थे, ये कहानी सुनाए हुए नेहा को।
हम बात कर रहे थे, खाना खा रहे थे, सेक्स भी कर रहे थे...
मगर एक अलग सा, अजीब सा साइलेंस था हमारे बीच।
एक ऑकवर्डनेस... एक अजीब सी हलचल।
मुझे नहीं पता था कि नेहा मेरे बारे में क्या सोच रही है।
क्या मुझे ये स्टोरी उसे बतानी चाहिए थी... या नहीं बतानी चाहिए थी।
फिर एक रात... 20-25 दिन बाद...
हम बिस्तर पर थे।
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा और धीरे से बोला —
“जैसे अविनाश तुम्हें डोमिनेट करना चाहता था...
क्या तुम भी उसे डोमिनेट करना चाहते हो?”
मैंने सोचा... नेहा क्या बोल रही है।
मैंने उसके चेहरे की तरफ़ देखा।
मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि ये बात कहाँ जा रही है।
मेरा दिल धड़कने लगा।
क्या वो मुझे टेस्ट कर रही है?
क्या वो जानना चाहती है कि मैं अब भी... उस पुरानी भूख को...
डोमिनेशन की... या सबमिशन की...
मैंने हल्के से पूछा —
“तुम्हारा मतलब... क्या है?”
नेहा ने मेरी आँखों में देखा... फिर स्माइल की — वो वाली स्माइल जो मुझे हमेशा हिला देती है।
उसने फोन उठाया... स्क्रीन पर अविनाश की वाइफ की तस्वीर दिखाई — वो भी सुंदर,
फिर धीरे से बोली —
“देखो... आज की रात... मैं अविनाश की बीवी हूँ।
तुम जो करोगे... वो कर सकते हो मेरे साथ।
जितना गंदा... जितना नीचा... जितना डोमिनेट... सब करो।
मैं... तुम्हारी... कुतिया हूँ।”
उसने इतनी तेज़ी से कपड़े उतारे — ब्रा, पैंटी, सब एक झटके में...
जैसे कोई रोलप्ले पहले से रिहर्सल किया हो।
फिर जमीन पर घुटनों के बल... कुतिया बन गई।
गांड ऊपर... सर नीचे... बाल बिखरे...
और बोली —
“अरे अविनाश के दोस्त... सैम... आओ... मुझे छू लो।
मुझे... नीचा दिखाओ...
जैसे तुमने वो रात में सहा...
अब... तुम करो।”
उसकी आँखों में वो चमक — दर्द और मज़ा का मिक्स।
“आओ सैम... कर लो... पूरा अपना आरमान।
अविनाश ने तुम्हें बहुत डॉमिनेट किया... आज उसका बदला... मेरे शरीर से ले लो।”
मैंने आगे बढ़ा... एक जोरदार थप्पड़ उसकी गांड पर मारा।
पटाक!
आवाज़ कमरे में गूँजी।
नेहा का मुँह दर्द से मुँह मढ़ाया... फिर एक पल बाद स्माइल... और आँख मारी।
“करो... मैं रेडी हूँ... बोलो उसका नाम... गाली दो...”
मैंने गुस्से में कहा —
“अनाया... बहन की लोड़ी... माधवचोद...
तेरे हसबंड ने मेरे साथ बहुत अपना लंड हिलवाया है...
अब तू मेरी कुतिया है!
एक और थप्पड़... इस बार उसके चेहरे पर।
उसकी गोरी गाल लाल हो गई।
मैंने उसके बाल पकड़े — नेहा के बाल, जो आज अनाया के थे —
जोर से पीछे खींचा।
उसकी चूत में लंड डाला... एक झटके में पूरा।
फिर जोर-जोर से... धक्के मारने लगा।
हर धक्के में वो चीखी — “आ... आ... सैम... आ...
इतना अच्छा... अविनाश ने भी कभी नहीं छूआ...
तुम... मुझे... चोद रहे हो... जैसे मैं... तेरी हो...”
नेहा — या अनाया — अभी भी कुतिया बनी, मेरे लंड पर चढ़ी हुई... हाँफती हुई।
मैंने उसे चोदते-चोदते रुकने का नाम नहीं लिया।
जोर से धक्के... उसके बाल कसकर पकड़े...
फिर उसने बीच में कहा —
“आह... सैम... मुझे एक बात बताओ...”
मैंने चोदते-चोदते पूछा — “क्या?”
“कौन पूछ रहा ह ?"
.“मैं... नेहा पूछ रही हूँ।
बोलो... मैं अनाया नहीं... नेहा हूँ... अगर तुम सैम नहीं... अविनाश हो .. तो?”
उसकी बात सुनते ही... मेरे दिमाग में करंट दौड़ गया।
अविनाश...
एक सेकंड में सब घुस गया।
मैंने स्पीड बढ़ा दी — और तेज़... और गहरा।
उसके बालों को और कसकर खींचा — इतना कसकर कि वो हड़बड़ा गई।
“आह... अविनाश... आह...”
मैंने एक और थप्पड़ मारा — इस बार इतना जोर से कि उसकी गोरी गाल पर लाल निशान पड़ गया।
नेहा चीखी — “हाँ... अविनाश... चोद... और जोर से...
मैंने बाल और खींचे... धक्के और तेज़...
उसकी चूत ने मुझे निचोड़ा...
और मैं... झड़ गया — गाढ़ा... गर्म... उसके अंदर।
वो भी झड़ गई — “आह... अविनाश... आह...”
नेहा चूत में झड़के... आखिरी धक्का... और उसके ऊपर लेट गया।
हम दोनों... पसीने से तर... गर्म साँसें... एक-दूसरे के चेहरे पर।
नेहा — या अनाया — मेरे नीचे थी... उसकी आँखें मेरी तरफ़...
मैं समझ गया... मैंने गलती कर दी।
उसे पता चल गया था... कि मैं सैम और अनाया के रोल में इतना जल्दी, इतनी गहराई से नहीं छू पाया...
जितनी गहराई से अविनाश और नेहा के रोल में चला गया।
वो मेरे मनोविज्ञान को पढ़ रही थी... धीरे-धीरे...
जैसे कोई किताब खोल रही हो।
मुझे किस बात में मज़ा आता है... वो समझने लगी थी।
शायद... वो समझ गई कि मेरे अंदर... डोमिनेशन नहीं... बल्कि... सबमिशन की भूख है।
मैं... खुद को नीचा दिखाने में... उत्तेजित होता हूँ।
न कि किसी को नीचा दिखाने में।
हम दोनों थोड़े अजीब हो गए थे अपने रिलेशनशिप में।
15-20 दिन निकल चुके थे, ये कहानी सुनाए हुए नेहा को।
हम बात कर रहे थे, खाना खा रहे थे, सेक्स भी कर रहे थे...
मगर एक अलग सा, अजीब सा साइलेंस था हमारे बीच।
एक ऑकवर्डनेस... एक अजीब सी हलचल।
मुझे नहीं पता था कि नेहा मेरे बारे में क्या सोच रही है।
क्या मुझे ये स्टोरी उसे बतानी चाहिए थी... या नहीं बतानी चाहिए थी।
फिर एक रात... 20-25 दिन बाद...
हम बिस्तर पर थे।
नेहा ने मेरी तरफ़ देखा और धीरे से बोला —
“जैसे अविनाश तुम्हें डोमिनेट करना चाहता था...
क्या तुम भी उसे डोमिनेट करना चाहते हो?”
मैंने सोचा... नेहा क्या बोल रही है।
मैंने उसके चेहरे की तरफ़ देखा।
मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि ये बात कहाँ जा रही है।
मेरा दिल धड़कने लगा।
क्या वो मुझे टेस्ट कर रही है?
क्या वो जानना चाहती है कि मैं अब भी... उस पुरानी भूख को...
डोमिनेशन की... या सबमिशन की...
मैंने हल्के से पूछा —
“तुम्हारा मतलब... क्या है?”
नेहा ने मेरी आँखों में देखा... फिर स्माइल की — वो वाली स्माइल जो मुझे हमेशा हिला देती है।
उसने फोन उठाया... स्क्रीन पर अविनाश की वाइफ की तस्वीर दिखाई — वो भी सुंदर,
फिर धीरे से बोली —
“देखो... आज की रात... मैं अविनाश की बीवी हूँ।
तुम जो करोगे... वो कर सकते हो मेरे साथ।
जितना गंदा... जितना नीचा... जितना डोमिनेट... सब करो।
मैं... तुम्हारी... कुतिया हूँ।”
उसने इतनी तेज़ी से कपड़े उतारे — ब्रा, पैंटी, सब एक झटके में...
जैसे कोई रोलप्ले पहले से रिहर्सल किया हो।
फिर जमीन पर घुटनों के बल... कुतिया बन गई।
गांड ऊपर... सर नीचे... बाल बिखरे...
और बोली —
“अरे अविनाश के दोस्त... सैम... आओ... मुझे छू लो।
मुझे... नीचा दिखाओ...
जैसे तुमने वो रात में सहा...
अब... तुम करो।”
उसकी आँखों में वो चमक — दर्द और मज़ा का मिक्स।
“आओ सैम... कर लो... पूरा अपना आरमान।
अविनाश ने तुम्हें बहुत डॉमिनेट किया... आज उसका बदला... मेरे शरीर से ले लो।”
मैंने आगे बढ़ा... एक जोरदार थप्पड़ उसकी गांड पर मारा।
पटाक!
आवाज़ कमरे में गूँजी।
नेहा का मुँह दर्द से मुँह मढ़ाया... फिर एक पल बाद स्माइल... और आँख मारी।
“करो... मैं रेडी हूँ... बोलो उसका नाम... गाली दो...”
मैंने गुस्से में कहा —
“अनाया... बहन की लोड़ी... माधवचोद...
तेरे हसबंड ने मेरे साथ बहुत अपना लंड हिलवाया है...
अब तू मेरी कुतिया है!
एक और थप्पड़... इस बार उसके चेहरे पर।
उसकी गोरी गाल लाल हो गई।
मैंने उसके बाल पकड़े — नेहा के बाल, जो आज अनाया के थे —
जोर से पीछे खींचा।
उसकी चूत में लंड डाला... एक झटके में पूरा।
फिर जोर-जोर से... धक्के मारने लगा।
हर धक्के में वो चीखी — “आ... आ... सैम... आ...
इतना अच्छा... अविनाश ने भी कभी नहीं छूआ...
तुम... मुझे... चोद रहे हो... जैसे मैं... तेरी हो...”
नेहा — या अनाया — अभी भी कुतिया बनी, मेरे लंड पर चढ़ी हुई... हाँफती हुई।
मैंने उसे चोदते-चोदते रुकने का नाम नहीं लिया।
जोर से धक्के... उसके बाल कसकर पकड़े...
फिर उसने बीच में कहा —
“आह... सैम... मुझे एक बात बताओ...”
मैंने चोदते-चोदते पूछा — “क्या?”
“कौन पूछ रहा ह ?"
.“मैं... नेहा पूछ रही हूँ।
बोलो... मैं अनाया नहीं... नेहा हूँ... अगर तुम सैम नहीं... अविनाश हो .. तो?”
उसकी बात सुनते ही... मेरे दिमाग में करंट दौड़ गया।
अविनाश...
एक सेकंड में सब घुस गया।
मैंने स्पीड बढ़ा दी — और तेज़... और गहरा।
उसके बालों को और कसकर खींचा — इतना कसकर कि वो हड़बड़ा गई।
“आह... अविनाश... आह...”
मैंने एक और थप्पड़ मारा — इस बार इतना जोर से कि उसकी गोरी गाल पर लाल निशान पड़ गया।
नेहा चीखी — “हाँ... अविनाश... चोद... और जोर से...
मैंने बाल और खींचे... धक्के और तेज़...
उसकी चूत ने मुझे निचोड़ा...
और मैं... झड़ गया — गाढ़ा... गर्म... उसके अंदर।
वो भी झड़ गई — “आह... अविनाश... आह...”
नेहा चूत में झड़के... आखिरी धक्का... और उसके ऊपर लेट गया।
हम दोनों... पसीने से तर... गर्म साँसें... एक-दूसरे के चेहरे पर।
नेहा — या अनाया — मेरे नीचे थी... उसकी आँखें मेरी तरफ़...
मैं समझ गया... मैंने गलती कर दी।
उसे पता चल गया था... कि मैं सैम और अनाया के रोल में इतना जल्दी, इतनी गहराई से नहीं छू पाया...
जितनी गहराई से अविनाश और नेहा के रोल में चला गया।
वो मेरे मनोविज्ञान को पढ़ रही थी... धीरे-धीरे...
जैसे कोई किताब खोल रही हो।
मुझे किस बात में मज़ा आता है... वो समझने लगी थी।
शायद... वो समझ गई कि मेरे अंदर... डोमिनेशन नहीं... बल्कि... सबमिशन की भूख है।
मैं... खुद को नीचा दिखाने में... उत्तेजित होता हूँ।
न कि किसी को नीचा दिखाने में।


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