26-04-2026, 12:42 PM
आया तो देखा एक महिला ( बॉडी मसाजर) जोकि मम्मी की बॉडी मसाज कर रही थी। मेरी मम्मी बिस्तर पर अधनंगी पड़ी हुई थी। उनके शरीर पर केवल पेटीकोट था। मम्मी उल्टी लेटी हुई थी। उनके पेटिकोट का नाड़ा भी शायद खुला था। बॉडी मसाजर बड़ी तन्मयता से उनके शरीर की मालिश कर रही थी। वह अपने हाथों को उनके कमर से होते हुए पेटीकोट के अंदर उनके नितंबों तक लाती, फिर पीठ से होते हुए दोनों किनारों से उनके बूब्स को दबाती।
इससे मुझे बार-बार मम्मी के नितम्बों का कटी प्रदेश दिखता। मैं काफी देर वहां खड़े होकर यह नजारा देखता रहा, कि काश पेटीकोट पूरा उतर जाए और मुझे चूत दर्शन हो जाए। पर यह नहीं हुआ, उलटे बॉडी मसाजर ने मुझे देख लिया। मुझे जैसे ही इस बात का अहसास हुआ, मैं बाथरूम में चला गया। मेरा छोटा नुनु वीर बहादुर बनकर तना हुआ था। अब मुझे अपने लौड़े के लिए भी कुछ करना था।
मैं अपने टावल को नीचे सरकाया लौड़ा तनकर खड़ा था। उसकी टोपी चमक रही थी, और एक चिकना पदार्थ रिस रहा था। मैं आंखे बंद करके अपने लंड को रगड़ने लगा। आंखें खुली तो सामने बॉडी मसाजर मेरे दोनों पैरो के बीच बैठी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी।
उसने बड़ी अदा से मुझे धक्का देकर वेस्टर्न टॉयलेट बैठाया । वह शायद मेरी जवानी भोगने के मूड में थी। उसने मेरे लंड को मुंह में भर लिया, और जोर-जोर से चूसने लगी। मैं आंखे बंद कर बस आनंद ले रहा था।
इतने में दरवाजा खुला। मैंने आंख खोली तो सामने मम्मी पेटीकोट और ब्लाउज पहने खड़ी थी। मम्मी को देख कर बॉडी मसाजर ने मेरा लंड मुंह से निकाल कर अपने हाथों में थाम लिया और उसे मुठियाते हुआ मम्मी से बोली, “बहन मैं तो इसकी देखभाल कर रही थी, जैसे आपकी करती हूं”।
मम्मी : छोड़ इसे, मैं इसकी देखभाल कर लूंगी।
मम्मी का गुस्सा भांपते हुए उसने मुझे अधूरा छोड़ दिया। मैं झड़ने के बहुत करीब था मेरी आंखे बंद हो रही थी, पैर कांप रहे थे, और सांसे तेज चल रही थी। तभी दरवाजा पटकते हुए बॉडी मसाजर चली गई। मेरा ऊपर उठता हुआ वीर्य वापस अंडकोष में चला गया। मुझे समझ नही आया मैं क्या बोलूं? मैं अपनी गर्दन झुकाए बेड पर बैठा रहा। शायद मम्मी को भी उस वक्त बात करना सही नहीं लगा ।
मैं बेड पर बैठा सोचता रहा मम्मी को कैसे समझाऊं। कुछ दस मिनट बाद मैं दबे पांव से मम्मी के पास बाथरूम में गया , तांकि सॉरी बोल सकूं। पर वहां नजारा कुछ और ही था।
मम्मी आईने के सामने खड़े हो कर कपड़े बदल रही थी। उन्होंने अपना ब्लाउज खोल कर बेड पर रख दिया था, और पेटीकोट का नाड़ा खोल रही थी। मेरे पांव वहीं दरवाजे के बाहर थम गए। लंड फिर से खड़ा हो गया। आंखे चमक उठी। इतने में मम्मी का पेटिकोट उनके पैरो में गिर गया। उनका नंगा जिस्म मुझे अपनी ओर बुलाने लगा। उनकी गांड की गोलाई और मोटी जांघों ने फिर से मेरे वीर्य को लंड के मुहाने पर ला खड़ा किया।
मेरी नंगी मम्मी पेटीकोट उठाने के लिए झुकी, तो मेरे लिए जैसे वक्त वहीं रुक गया। मम्मी की गदराई गांड मेरे सामने उभर के आ गई। अभी-अभी हुई उनकी मालिश से उनकी गांड चमक रही थी। भरी हुई गांड और छोटी-छोटी काली झांटे उनकी चूत वाली जगह से झांक रही थी। इतने में उन्हें टेबल के नीचे गिरा झुमका नज़र आया, जिसे उठाने को वह घुटनों को जमीन पर टिका कर टेबल के नीचे आगे की ओर झुकी।
दोस्तों मैं यह सिचुएशन आप पर छोड़ता हूं कल्पना करो। मम्मी कैटवॉक करती हुई दो-तीन कदम आगे बढ़ी। बस दोस्तों यह मेरी चरम सीमा थी। मैं पैंट में ही झड़ने लगा। शरीर झटके खा रहा था, और खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया। पैर कांप रहे थे। संभालने के लिए दरवाजा पकड़ा कि तभी मम्मी उसी हालत में गर्दन घुमा कर मुझे देखने लगी। मेरा कांपता जिस्म उन्हें मेरी हालत बयां कर रहा था।
मम्मी आई और धड़ाम की आवाज के साथ दरवाजा बंद हुआ। मैं आत्मग्लानि के साथ में वापस लौट आया। बिस्तर पर बैठ कर अपनी पेंट खोली और नीचे की ओर सरका दी। लंड सिकुड़ कर झूल रहा था। मेरा वीर्य मेरे लंड, आंड, और जांघो पर फैला पड़ा था। उसी हालत में लेट गया। आंखें बंद करते ही फिर से वहीं दृश्य सामने आ गया। लंड ने एक बार फिर सिर उठाया। इस बार बड़ी बेदर्दी से मैंने लंड को अपने पंजों में पकड़ा और मुठ मरने लगा।
वीर्य से सना गीला लंड आसानी से हाथों में फिसलने लगा। आवेग ऐसा था कि हाथ रुकते तो कमर से ऊपर की ओर धक्के मारने लगता। मैं दोनो हाथों से लंड को पकड़े झटके मार रहा था। पर इस बार आसान नहीं था झड़ना। मैंने तकिए को बगल में रखा, और उस पर लंड टिकाए लेट गया। मानों मम्मी की गांड पर लेटा था। झटके मारते-मारते झड़ गया और गहरी नींद में चला गया।
कुछ घंटों के बाद कमरे में हलचल हुई तो नींद खुली। मम्मी ने मुझे चादर ओढ़ा दी थी। जाते-जाते उन्होंने कहा, “रात हो गई है, बाहर आकर खाना खा लो”। मैं उठ कर कमरे में अटैच बाथरूम में गया तो पाया, मेरी वीर्य से सनी पेंट, और तकिए का कवर बाथरूम में पड़ा था। शायद मम्मी ने रखा था।
मैं फ्रेश हुआ और कमरे से बाहर आकर खाने के टेबल पर बैठ गया। मम्मी वहीं बैठी मेरा इंतजार कर रही थी।
मैने बड़ी ही मासूमियत से बोला: सॉरी मम्मी , आपने मुझे इस तरह से देखा। वो बॉडी मसाजर खुद ही वो सब कर रही थी। मैं सेल्फ सेटिस्फेक्शन के लिए कभी-कभी करता हूं। पर वो अचानक बाथरूम में आई, और वो सब करने लगी। मैंने उसे ऐसा करने को नहीं कहा था।
मम्मी : ठीक है मैं तुमसे बाद में बात करूंगी इस बारे में अभी खाना खा लो।
मैं मन में सोचा कि मम्मी शायद सेक्स के टॉपिक पर मुझसे कोई भी बात नहीं करना चाहती थी। खास कर मैंने जो उन्हें बिना कपड़ो के देख लिया था।
करीब रात के 12 बजे मुझे पियास लगी और मैं जागा । जब मेरी आंख खुली मेरी नजर मम्मी पर पड़ी। मम्मी लाल नाइटी मैं सो रही थी और उसकी नाइटी ऊपर उठी थी और आधे स्तन भी दिख रहे थे। मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी और मैंने आहिस्ता आहिस्ता मम्मी के स्तन हाथ रखा।
वाह क्या मुलायम स्तन थे और फिर मैंने स्तनों को हल्का सा दबाया। फिर मैंने मम्मी की नाइटी थोड़ी ऊपर उठाई तो मुझे मम्मी की पैंटी दिखने लगी जो गुलाबी रंग की पैंटी थी। मैंने हिम्मत करके पैंटी पर हाथ रखा तो देखा कि मम्मी की चूत बहुत गर्म थी। और फिर मैंने अपना एक हाथ लंड पर रखा तो वह पूरी तरह खड़ा हो गया था।
मैं हिम्मत करके एक हाथ मम्मी की पैंटी पर फेर रहा था और दूसरे हाथ से लंड हिला रहा था। करीब आधे घंटे के बाद मैं बिस्तर पर ही झड़ गया मेरा सारा वीर्य बिस्तर पर ही गिर गया और उसके बाद मैं सो गया।
सुबह मेरा जल्दी आंखों खुली तो देखा मैं मम्मी से चिपककर सो रहा था तभी मम्मी मेरी तरफ मुड़ी आज वह बहुत प्यारी लग रही थी उनके स्तन हर सांस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे यह देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा तभी उन्होंने अपने आंख खोले और उनकी नजर मुझपर पड़ी उसने मुझे अपनी बाहों में भरकर मेरे होंठों पर किस किया और उठकर बाथरूम चली गई।
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इससे मुझे बार-बार मम्मी के नितम्बों का कटी प्रदेश दिखता। मैं काफी देर वहां खड़े होकर यह नजारा देखता रहा, कि काश पेटीकोट पूरा उतर जाए और मुझे चूत दर्शन हो जाए। पर यह नहीं हुआ, उलटे बॉडी मसाजर ने मुझे देख लिया। मुझे जैसे ही इस बात का अहसास हुआ, मैं बाथरूम में चला गया। मेरा छोटा नुनु वीर बहादुर बनकर तना हुआ था। अब मुझे अपने लौड़े के लिए भी कुछ करना था।
मैं अपने टावल को नीचे सरकाया लौड़ा तनकर खड़ा था। उसकी टोपी चमक रही थी, और एक चिकना पदार्थ रिस रहा था। मैं आंखे बंद करके अपने लंड को रगड़ने लगा। आंखें खुली तो सामने बॉडी मसाजर मेरे दोनों पैरो के बीच बैठी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी।
उसने बड़ी अदा से मुझे धक्का देकर वेस्टर्न टॉयलेट बैठाया । वह शायद मेरी जवानी भोगने के मूड में थी। उसने मेरे लंड को मुंह में भर लिया, और जोर-जोर से चूसने लगी। मैं आंखे बंद कर बस आनंद ले रहा था।
इतने में दरवाजा खुला। मैंने आंख खोली तो सामने मम्मी पेटीकोट और ब्लाउज पहने खड़ी थी। मम्मी को देख कर बॉडी मसाजर ने मेरा लंड मुंह से निकाल कर अपने हाथों में थाम लिया और उसे मुठियाते हुआ मम्मी से बोली, “बहन मैं तो इसकी देखभाल कर रही थी, जैसे आपकी करती हूं”।
मम्मी : छोड़ इसे, मैं इसकी देखभाल कर लूंगी।
मम्मी का गुस्सा भांपते हुए उसने मुझे अधूरा छोड़ दिया। मैं झड़ने के बहुत करीब था मेरी आंखे बंद हो रही थी, पैर कांप रहे थे, और सांसे तेज चल रही थी। तभी दरवाजा पटकते हुए बॉडी मसाजर चली गई। मेरा ऊपर उठता हुआ वीर्य वापस अंडकोष में चला गया। मुझे समझ नही आया मैं क्या बोलूं? मैं अपनी गर्दन झुकाए बेड पर बैठा रहा। शायद मम्मी को भी उस वक्त बात करना सही नहीं लगा ।
मैं बेड पर बैठा सोचता रहा मम्मी को कैसे समझाऊं। कुछ दस मिनट बाद मैं दबे पांव से मम्मी के पास बाथरूम में गया , तांकि सॉरी बोल सकूं। पर वहां नजारा कुछ और ही था।
मम्मी आईने के सामने खड़े हो कर कपड़े बदल रही थी। उन्होंने अपना ब्लाउज खोल कर बेड पर रख दिया था, और पेटीकोट का नाड़ा खोल रही थी। मेरे पांव वहीं दरवाजे के बाहर थम गए। लंड फिर से खड़ा हो गया। आंखे चमक उठी। इतने में मम्मी का पेटिकोट उनके पैरो में गिर गया। उनका नंगा जिस्म मुझे अपनी ओर बुलाने लगा। उनकी गांड की गोलाई और मोटी जांघों ने फिर से मेरे वीर्य को लंड के मुहाने पर ला खड़ा किया।
मेरी नंगी मम्मी पेटीकोट उठाने के लिए झुकी, तो मेरे लिए जैसे वक्त वहीं रुक गया। मम्मी की गदराई गांड मेरे सामने उभर के आ गई। अभी-अभी हुई उनकी मालिश से उनकी गांड चमक रही थी। भरी हुई गांड और छोटी-छोटी काली झांटे उनकी चूत वाली जगह से झांक रही थी। इतने में उन्हें टेबल के नीचे गिरा झुमका नज़र आया, जिसे उठाने को वह घुटनों को जमीन पर टिका कर टेबल के नीचे आगे की ओर झुकी।
दोस्तों मैं यह सिचुएशन आप पर छोड़ता हूं कल्पना करो। मम्मी कैटवॉक करती हुई दो-तीन कदम आगे बढ़ी। बस दोस्तों यह मेरी चरम सीमा थी। मैं पैंट में ही झड़ने लगा। शरीर झटके खा रहा था, और खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया। पैर कांप रहे थे। संभालने के लिए दरवाजा पकड़ा कि तभी मम्मी उसी हालत में गर्दन घुमा कर मुझे देखने लगी। मेरा कांपता जिस्म उन्हें मेरी हालत बयां कर रहा था।
मम्मी आई और धड़ाम की आवाज के साथ दरवाजा बंद हुआ। मैं आत्मग्लानि के साथ में वापस लौट आया। बिस्तर पर बैठ कर अपनी पेंट खोली और नीचे की ओर सरका दी। लंड सिकुड़ कर झूल रहा था। मेरा वीर्य मेरे लंड, आंड, और जांघो पर फैला पड़ा था। उसी हालत में लेट गया। आंखें बंद करते ही फिर से वहीं दृश्य सामने आ गया। लंड ने एक बार फिर सिर उठाया। इस बार बड़ी बेदर्दी से मैंने लंड को अपने पंजों में पकड़ा और मुठ मरने लगा।
वीर्य से सना गीला लंड आसानी से हाथों में फिसलने लगा। आवेग ऐसा था कि हाथ रुकते तो कमर से ऊपर की ओर धक्के मारने लगता। मैं दोनो हाथों से लंड को पकड़े झटके मार रहा था। पर इस बार आसान नहीं था झड़ना। मैंने तकिए को बगल में रखा, और उस पर लंड टिकाए लेट गया। मानों मम्मी की गांड पर लेटा था। झटके मारते-मारते झड़ गया और गहरी नींद में चला गया।
कुछ घंटों के बाद कमरे में हलचल हुई तो नींद खुली। मम्मी ने मुझे चादर ओढ़ा दी थी। जाते-जाते उन्होंने कहा, “रात हो गई है, बाहर आकर खाना खा लो”। मैं उठ कर कमरे में अटैच बाथरूम में गया तो पाया, मेरी वीर्य से सनी पेंट, और तकिए का कवर बाथरूम में पड़ा था। शायद मम्मी ने रखा था।
मैं फ्रेश हुआ और कमरे से बाहर आकर खाने के टेबल पर बैठ गया। मम्मी वहीं बैठी मेरा इंतजार कर रही थी।
मैने बड़ी ही मासूमियत से बोला: सॉरी मम्मी , आपने मुझे इस तरह से देखा। वो बॉडी मसाजर खुद ही वो सब कर रही थी। मैं सेल्फ सेटिस्फेक्शन के लिए कभी-कभी करता हूं। पर वो अचानक बाथरूम में आई, और वो सब करने लगी। मैंने उसे ऐसा करने को नहीं कहा था।
मम्मी : ठीक है मैं तुमसे बाद में बात करूंगी इस बारे में अभी खाना खा लो।
मैं मन में सोचा कि मम्मी शायद सेक्स के टॉपिक पर मुझसे कोई भी बात नहीं करना चाहती थी। खास कर मैंने जो उन्हें बिना कपड़ो के देख लिया था।
करीब रात के 12 बजे मुझे पियास लगी और मैं जागा । जब मेरी आंख खुली मेरी नजर मम्मी पर पड़ी। मम्मी लाल नाइटी मैं सो रही थी और उसकी नाइटी ऊपर उठी थी और आधे स्तन भी दिख रहे थे। मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी और मैंने आहिस्ता आहिस्ता मम्मी के स्तन हाथ रखा।
वाह क्या मुलायम स्तन थे और फिर मैंने स्तनों को हल्का सा दबाया। फिर मैंने मम्मी की नाइटी थोड़ी ऊपर उठाई तो मुझे मम्मी की पैंटी दिखने लगी जो गुलाबी रंग की पैंटी थी। मैंने हिम्मत करके पैंटी पर हाथ रखा तो देखा कि मम्मी की चूत बहुत गर्म थी। और फिर मैंने अपना एक हाथ लंड पर रखा तो वह पूरी तरह खड़ा हो गया था।
मैं हिम्मत करके एक हाथ मम्मी की पैंटी पर फेर रहा था और दूसरे हाथ से लंड हिला रहा था। करीब आधे घंटे के बाद मैं बिस्तर पर ही झड़ गया मेरा सारा वीर्य बिस्तर पर ही गिर गया और उसके बाद मैं सो गया।
सुबह मेरा जल्दी आंखों खुली तो देखा मैं मम्मी से चिपककर सो रहा था तभी मम्मी मेरी तरफ मुड़ी आज वह बहुत प्यारी लग रही थी उनके स्तन हर सांस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे यह देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा तभी उन्होंने अपने आंख खोले और उनकी नजर मुझपर पड़ी उसने मुझे अपनी बाहों में भरकर मेरे होंठों पर किस किया और उठकर बाथरूम चली गई।
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