22-04-2026, 11:28 AM
“कई बार वो गार्गी के अंडरगारमेंट्स भी माँगते थे।
ये मैं पहले भी कई बार कर चुका था।
अविनाश के लिए... या उन लड़कों के लिए... जब वो पूछते... तो मैं गार्गी की यूज़्ड ब्रा और पैंटी लेके जाता।
वो उसे सूँघते... बहुत गहरी साँस लेकर...
फिर गंदी-गंदी बातें शुरू कर देते —
‘गार्गी की चूत की खुशबू... कितनी मीठी होगी...’
‘मैं गार्गी को पूरी रात अपने बॉल्स चटवाऊँगा...’
‘मैं उसके मुँह में थूकना चाहता हूँ...’
‘मैं उसके बूब्स पर थूककर चोदूँगा...’
‘गार्गी को नंगी करके... उसके चेहरे पर वीर्य डालूँगा... और फिर उसे चाटने को कहूँगा...’
मैं... बस बैठा सुनता रहता।"
नेहा मेरी बात सुनकर साँस रोककर बैठी थी।
मैंने आगे कहा —
“भैया, मम्मी-पापा सब एक शादी में गए हुए थे।
घर अकेला था।
मैंने उन सबको बुलाया — चार-पाँच पुराने लड़के, और कुछ नए चेहरे भी।
सब आए... मेरे घर पर।
हमने डोर लॉक किया, पर्दे बंद किए।
फिर टीवी ऑन किया।
एक पॉर्न लगाई — गैंगबैंग वाली।
एक लड़की... बहुत सारे लड़कों के साथ...
वो सीडी वो खुद ही लेके आए थे।
हमने डीवीडी में डाल दिया।
“माल भी, बॉस सिगरेट्स भी...
तीन-चार लोग लगातार एक साथ घर में सिगरेट पी रहे थे।
पूरे घर में धुआँ-धुआँ सा हो रहा था — जैसे कोई धुंध छा गई हो।
बीच-बीच में मैं किचन से खाने के लिए कुछ लेके आता — चिप्स, कोल्ड ड्रिंक...
तभी मैंने महसूस किया... शायद एक-दो लोग... पहले वाले ग्रुप से नहीं हैं।
मैंने इधर-उधर देखा।
गेट की तरफ़ देखा — बाहर गए होंगे?
मगर गेट लॉक था।
फिर थोड़ा अंदर जाने के बाद... मैंने देखा।
वो गार्गी के रूम में घुस चुके थे।
उसकी अलमारी खोलकर... उसके कपड़ों को सूँघ रहे थे।
उसके टॉप को नाक पर रखकर... गहरी साँस ले रहे थे।
उसकी ब्रा को... अपने लंड से रगड़ रहे थे।
एक ने ब्रा को नाक पर रखा... और दूसरा... उसकी पैंटी को हाथ में लेकर... हिलाने लगा।
“उनमें से हर चीज़ से खरे थे।
गार्गी की हर चीज़ को सूँघ रहे थे — उसकी ब्रा, पैंटी, टॉप, साड़ी का ब्लाउज...
अलमारी के हर कोने में घुस रहे थे।
एक ने गार्गी की पुरानी स्लीपर उठाई... उसे नाक पर रखा... और बोला —
‘यार... गार्गी के पैरों की खुशबू... मैं इसे चाटूँगा...’
फिर वो सबने अपना लंड निकाला।
एक ने गार्गी की ब्रा को अपने लंड पर लपेट लिया...
जोर-जोर से हिलाने लगा...
‘देख... गार्गी की ब्रा पर मेरा प्रीकम... जैसे वो मेरे लंड को चूम रही हो...’
फिर... एक लड़का गार्गी के बिस्तर पर चढ़ गया।
घुटनों के बल बैठा... लंड हाथ में पकड़ा...
जोर-जोर से हिलाने लगा।
उसकी साँसें तेज़... आँखें बंद...
‘गार्गी... तेरे बिस्तर पर... मैं तुझे चोद रहा हूँ...’
और फिर... सारा पानी बिस्तर पर छोड़ दिया।
सफेद-गाढ़ा... गार्गी के तकिए पर... चादर पर...
उसने झटके में झड़ते हुए ताली बजाई —
‘देखो यार... गार्गी के बिस्तर पर मेरी झड़ाई...
अब ये बिस्तर हमेशा मेरी याद रखेगा!’
“वो बड़े खट्टे करने लगे थे।
एक ही कपड़ा बार-बार उठाते... सूँघते... फिर रख देते।
फिर अचानक कुछ कपड़े अलग करने लगे — जैसे कोई खजाना मिल गया हो।
ज्यादातर... गार्गी के इनर।"
फिर वो सब इकट्ठे किए — जैसे कोई ट्रॉफी हो।
रूम से बाहर निकल गए।
शायद... सोफे पर बैठे बाकी लड़कों को दिखाना चाहते थे।
जो पॉर्न देख रहे थे... और माल फूक रहे थे।
मैंने देखा... वो बाहर आकर सबको दिखाने लगे।
“उनमें से एक — वो जो सबसे ज़्यादा बोलता था — ने गार्गी की पिंक ब्रा उठाई।
उसने ब्रा के कप को अपनी नाक पर दबाया... गहरी साँस ली... फिर जीभ निकालकर कप को चाटा।
‘यार... गार्गी के बूब्स की खुशबू... जैसे दूध की... मैं इसे चूसूँगा...’
दूसरा लड़का उसकी ब्लैक पैंटी लेके आया।
उसने पैंटी को अपनी मुट्ठी में कसकर दबाया... फिर लंड पर लपेट लिया।
जोर-जोर से हिलाने लगा — पैंटी का कप उसके लंड के सिर पर रगड़ रहा था।
‘देख... गार्गी की पैंटी मेरे लंड को चूम रही है...
अगर वो ये पहनेगी... तो उसकी चूत भी मेरे प्रीकम से भरी होगी।’
“रूम में मैंने देखा... अचानक सबने गार्गी के कपड़े देखे और एकदम खुश हो गए।
बीयर की बोतलें खुल गईं — सब चिल्ला रहे थे, हँस रहे थे।
“मैंने उन सबको देखा... गार्गी के कपड़ों के साथ।
फिर अचानक नोटिस किया — वो लड़का जो अभी-अभी बिस्तर पर झड़ा था... वो अभी तक रूम में ही था।
थोड़ी देर बाद वो भी बाहर आया... मेरे साथ खड़ा हो गया।
उसका लंड अभी मुरझाया हुआ था — गीला, लाल, चिपचिपा।
मुझे लगा... वो अभी भी मुझसे बड़ा है।
उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा।
मेरे हाथ की तरफ़ देखकर बोला —
‘भाई... जल्दी उसको खड़ा करो... वापस से।
मैं अभी-अभी तेरी बहन के बिस्तर पर गीला करके आया हूँ..."
मैंने उस लड़के का लंड हाथ में लिया —
धीरे-धीरे सहलाने लगा... उँगलियाँ उसके सिर पर घुमाती हुई...
वो जोर से आह भरी और बोला —
“बहन... चोद...
जब भाई का हाथ इतना अच्छा है... तो जब बहन हिलाएगी... तो कितना मज़ा आएगा...”
उसकी बात सुनते ही... कमरे में जो लोग गार्गी के कपड़ों में खोए हुए थे...
सबका ध्यान हमारी तरफ़ हो गया।
सब एक पल को मेरी तरफ़ देखे — आँखें चौड़ी, मुँह खुला।
दो सेकंड की पूरी शांति।
फिर... ठहाके।
जोर-जोर से हँसने लगे — जैसे कोई बहुत बड़ा जोक सुन लिया हो।
हँसी इतनी ज़ोर की कि कमरा गूँज उठा।
फिर एक ने कहा —
“अरे भाई को बीच में आने दो..."
वो लड़का — जिसका लंड अभी भी मेरे हाथ में था — ने मेरे कंधे पकड़ा।
मुझे खींचकर बीच में ले आया।
सब सोफे पर बैठे... मुझे घूर रहे थे।
कुछ के हाथ में गार्गी के कपड़े थे — ब्रा, पैंटी — वो उन्हें हवा में लहरा रहे थे।
उनकी आँखें मुझे चुभ रही थीं — जैसे मैं कोई शो का हिस्सा हूँ।
फिर एक ने बोला, हँसते हुए —
“यार... इसका तो पूरा परिवार ही सुंदर है।”
वो कमरे की दीवार पर लगी फैमिली फोटो की तरफ़ इशारा किया।
मम्मी-पापा, गार्गी, मैं... सब मुस्कुरा रहे थे।
उसने आगे कहा —
“देखो... आंटी भी जवानी में कितनी हॉट लगती होंगी।
सही में... आंटी ने तो कमाल किया — एक तो गार्गी जैसी सुंदर लड़की पैदा की...
और एक ये सैम जैसा... चूतिया लड़का।
जिसे मजा आता है अपनी बहन के बारे में सुनके।”
कमरे में अब सबकी आवाज़ें गूँज रही थीं।
किसी ने "भैंसोद" कहा, किसी ने "चूतिया", किसी ने "कांडू"...
शब्द हवा में उड़ रहे थे, जैसे कोई गंदी धुंध।
फिर एक ने पूछा —
“मगर भाई... ऐसे लड़के कौन होते हैं?
ऐसा लड़का कोई क्यों करेगा?
क्यों अपनी बहन के बारे में ये सब सुनना चाहता है?”
दूसरे ने हँसते हुए जवाब दिया —
“हाँ, हम तो नहीं सुनना चाहते।
अगर कोई हमारी फैमिली वुमन के बारे में कुछ गलत बोले... तो हम तो उसे मार देंगे।
मगर ये... अलग किस्म का लड़का है।
पता है क्यों?”
उसने उस लड़के की तरफ़ इशारा किया — जो अभी भी मेरे साथ खड़ा था, जिसका लंड मेरे हाथ में था।
उसने मेरे पजामे में एक उंगली फंसाई... और धीरे से नीचे खींच दिया।
मेरा लंड — साढ़े चार इंच का, सख्त लेकिन छोटा — सबके सामने आ गया।
सब एक पल को चुप... फिर ठहाके।
जोर-जोर से हँसने लगे।
“देखो यार... इतना छोटा!”
“भाई, ये तो पेनिस नहीं... पेंसिल है!”
फिर वो बोला —
“इसलिए... इसलिए ये ऐसा है।
क्योंकि ये चूतिया है।
इसका लंड बहुत छोटा है।
इसे पता है कि ये किसी को चोदेगा तो कभी सैटिस्फाई नहीं कर पाएगा।
इसलिए ये ऐसी सोचता है... नई-नई चीजें...
गार्गी को चोदते हुए कल्पना करता है...
क्योंकि असल में वो कभी किसी को चोद नहीं पाएगा।”
उनमें से एक ने गार्गी की ब्रा हवा में उछाली।
मैंने रिफ्लेक्स में कैच कर ली — वो पिंक वाली, लेस वाली... अभी भी उसकी खुशबू से भरी हुई।
फिर वो बोला —
“चल... पहन के दिखा।”
मैं उनकी तरफ़ देखता रहा — जैसे वो क्या कह रहे हों।
मेरा मन चीख रहा था... लेकिन कमरा मेरे घर का था... और कंट्रोल उनके पास था।
मैं कुछ कहने वाला था कि एक ने हँसते हुए बोला —
“अरे बहन... जोत पहन के दिखा।
ये ब्रा कैसे दिखती है तेरे ऊपर?
आज तू सैम नहीं... आज तू गार्गी है।”
सब फिर ठहाके मारकर हँसे।
एक ने मेरे कंधे पर हाथ रखा — दबाव दिया।
दूसरा बोला —
“पहन... पहन... देखते हैं तेरी बहन जैसी बॉडी कैसे लगती है।
तेरा छोटा लंड तो छुपा रहेगा..."
सबकी नजरें मेरी तरफ़ थीं — अति उत्तेजक, जैसे कोई शिकार का खेल चल रहा हो।
मुझे वो एक झुंड की तरह लग रहे थे... भूखे, हिंसक...
अगर चाहते तो मुझे कुचल सकते थे।
मैं थोड़ा डर गया था — दिल तेज़ धड़क रहा था।
पर... मैं जानता था, मैं ये सब रोक सकता था।
बस एक चिल्लाहट, एक धक्का... और सब खत्म।
मगर... मैं रोकना नहीं चाहता था।
मैं जानना चाहता था — मैं कहाँ तक जा सकता हूँ।
मैंने धीरे से अपनी शर्ट ऊपर की...
और ब्रा को छाती पर लगाया।
वो थोड़ी ढीली थी — मेरे छोटे बूब्स पर लटक रही थी।
सब देखकर हँसने लगे — जोर-जोर से।
एक ने बोला —
“कोई बात नहीं... जब तू उस एज में जाएगा तो तेरे भी बड़े हो जाएंगे।
बस किसी को चूसने पड़ेंगे... फिर देखना, कितने फूलेंगे!”
मेरी पैंट तो पहले से नीचे थी — लंड बाहर, सख्त, छोटा।
किसी ने मुझे पैंट ही पहना दी — गार्गी की पैंटी।
फिर एक ने कहा — “ओ गार्गी, बहन की लोड़ी!”
“चल, अब झुक जा और कुतिया बनके दिखा।”
वो मुझे जमीन पर... हाथ-पाँव के बल...
अपने लिए बोल रहे थे।
मैंने देखा — सबकी आँखें जल रही थीं।
किसी ने मेरे बाल पकड़े, कस के दबाया —
“बहन चुप गार्गी... चल कुतिया की तरह भौंक के दिखा!”
मुझे लगा... शायद मजाक है।
मगर बालों में दर्द... और उनकी नजरें...
मैंने कोशिश की — “भौ... भौ...”
आवाज़ काँपती हुई, छोटी।
सब ठहाके मारकर हँसे।
“हाहा... गार्गी की भौंक!”
“अब पूँछ हिला... कुतिया!”
मुझे पता नहीं था... उन्हें क्या मज़ा आ रहा था।
और मुझे... क्या मज़ा आ रहा था ये सब होने देना।
शर्म... डर... उत्तेजना... सब मिलकर...
मैं बस देखता रहा कि आगे क्या होगा।
फिर एक-एक ने मुझे पास बुलाया।
अपना लंड मेरे हाथ में थमा दिया।
“हिला... गार्गी के नाम पर हिला...”
“कल्पना कर... तेरी बहन को चोद रहा हूँ...”
मैं हिलाता... तेज़...
वे झड़ते — मेरे हाथ में... गाढ़ा, गर्म।
फिर मैं बार-बार वॉशबेसिन में जाता... हाथ धोकर आता...
फिर अगले को... फिर अगले को।
सबने एक-एक करके... पॉर्न देखते हुए...
गार्गी के बारे में गंदी बातें करते हुए...
मेरे हाथ से झड़ लिया।
सब... एक बार झड़ चुके थे।
ब कमरा पूरी तरह महक गया था — दारू की तेज़ गंध, सिगरेट का धुंआ, माल की मीठी-कड़वी खुशबू, और अह... कम की गंध... पसीने की, लंड की, सब मिलकर एक भारी, गर्म हवा बन गई थी।
सब लोग अब कंप्लीटली नंगे थे — छाती पर घने बाल, पसीना टपकता हुआ, लंड लटकते हुए या सख्त... सब कुछ दिख रहा था।
मैं कोने में खड़ा था — जैसे कोई कुत्ता, जिसे उन्होंने वहाँ ऑर्डर किया था।
वो आपस में बातें करने लगे — धीमी, गुप्त आवाज़ों में।
मुझे सुनाई नहीं दे रहा था... शायद प्लानिंग कर रहे थे... अगला स्टेप क्या होगा।
मैं बस खड़ा रहा, पसीना मेरी पीठ पर बह रहा था।
फिर एक ने अचानक बोला —
“तुझे मज़ा आया?”
मैंने उनकी तरफ़ देखा... कोई जवाब नहीं दिया।
वो हँसा —
“मज़ा आया होगा तभी तो अभी तक तूने हमें अपने घर से बाहर नहीं निकाला।
देख... पूरा घर अस्त-व्यस्त कर दिया है।
सफाई में तुझे दो दिन लगेंगे... और तू अभी भी हमें रोक रहा है।
क्यों? क्योंकि तुझे ये सब... पसंद है।”
मैंने फिर कोई जवाब नहीं दिया।
मन में लगा... शायद वो सच बोल रहा है।
उसने मेरी तरफ़ देखा, मुस्कुराकर बोला —
“चल, कोई नहीं... तुझे मज़ा आया तो बढ़िया है।
अब बैठ जा, अभी कोई डर नहीं है। हम कुछ नहीं करेंगे।”
उसने एक सीट खींची — सिंगल सीटर सोफा, कमरे के कोने में।
मुझे वहाँ बिठा दिया।
सब अब दो सोफों पर फैल गए थे — एक पर तीन, दूसरे पर दो।
मैं अकेला... बीच में... जैसे कोई स्टेज पर हो।
मेरा लंड अभी भी सख्त... ब्रा और पैंटी पहनी हुई...
शर्ट आधी खुली।
एक ने ग्लास में बीयर पलटी — ठंडी, झाग वाली।
मुझे थमाया।
मैं इतना घबराया था कि एक घूँट में पी गया — गले से नीचे उतरा, जलन हुई।
जैसे ही खत्म किया... उसने दूसरी भर दी।
झे उस टाइम पता नहीं था... शायद वो मुझे नशे में करना चाहते हैं।
बीयर... सिगरेट... माल... सब मिलकर दिमाग धुंधला हो रहा था।
मुझे लगा... अब उन्होंने जो करना था... वो कर लिया।
अब बस... मज़ा ले रहे हैं।
मुझे लगा अब सब खत्म हो चुका है।
सब लोग अब सोफे पर फैलकर बैठे थे — नंगे, पसीने से तर, बीयर के ग्लास हाथ में।
गप्पें मार रहे थे — कोई क्रिकेट की बात, कोई बॉलीवुड की, कोई पॉर्न की।
पॉर्न... वही था, लेकिन अब स्क्रीन पर लड़की चेंज हो गई थी।
एक रशियन — गोल्डन बाल, लंबे, चमकदार... गोरी चमड़ी, नीली आँखें।
वो एक झुंड काले लड़कों के बीच में थी — बेरहमी से चोद रहे थे।
एक उसके मुँह में... एक उसके चूत में... एक उसके गांड में...
वो चीख रही थी, लेकिन चेहरा... खुश... सैटिस्फाइड।
लोग बोल रहे थे —
“अरे ये तो बहुत सुंदर है... क्यों ऐसे काम करती है?”
दूसरा हँसा — “देख इसका चेहरा... कितनी सैटिस्फाइड लग रही है।
एक जना तो सैटिस्फाई नहीं कर सकता... इसलिए ये झुंड चुनती है।”
फिर किसी ने दीवार पर लगी गार्गी की तस्वीर की तरफ़ देखा — वो मुस्कुराती हुई फैमिली फोटो।
बोला — “देख... गार्गी का चेहरा...
शायद उसका भी ऐसा ही है।
एक जना सैटिस्फाई नहीं कर पाएगा।
शायद उसे भी झुंड चाहिए... अपने जैसा झुंड... जो उसके साथ ये सब करे।”
सब हँसे... फिर मेरी तरफ़ देखा।
मैं... सिंगल सीटर पर... ब्रा-पैंटी में...
बीयर का ग्लास हाथ में... नशा चढ़ रहा था।
उनका सारा कन्वर्सेशन अब फिर से गार्गी पर आ चुका था।
एक ने बीयर का घूँट लिया और बोला —
“यार... वैसे तो मेरी कम्युनिटी से ही हो तुम लोग...
क्या मैं गार्गी से शादी कर लूँ?”
सब हँसे।
वो जारी रखा —
“अगर मैं गार्गी से शादी कर लूँगा... तो स्वागत वाले दिन तुम सबको बुलाऊँगा...
और इस चूतिये को भी बुलाऊँगा।
ये चूतिया देखेगा... और गार्गी हम सबसे चुदेगी।
पता है... मुझे लगता है कि वो दोबारा... एक बार चुदने के बाद फिर सबके लिए लाइन खड़ा करेगी...
चूस-चूस के... और फिर उसके बाद वो वापस चुदेगी...
क्योंकि वो एक से सैटिस्फाई नहीं हो सकती।”
दूसरा हँसा, ग्लास उठाकर बोला —
“मैं तो उससे कुतिया बना के पूरे होटल में घूमूँगा...
जहाँ हम लोग हनीमून मनाएंगे...
उसे पूरी नंगी कराऊँगा...
उसकी चूत में लंड डालकर... घसीटता हुआ...
सब देखेंगे... और वो भौंकती रहेगी...
मैंने देखा... सबके लंड बापिस से खड़े हो रहे थे।
एक लड़का मेरे पास आया — धीरे से।
उसने मेरी ब्रा को थोड़ा नीचे खींचा... मेरी निप्पल बाहर आ गई।
उसने हाथ रखा... मसलने लगा... धीरे-धीरे...
देखता हुआ बोला —
“गार्गी के भी इसी कलर के होंगे...
ये दोनों भाई-बहन एक ही चूत से निकले हैं...”
सब ठहाके मारकर हँसे।
फिर उसने अपना मुँह बढ़ाया —
“क्या कोई नहीं... बहन नहीं तो भाई सही।”
और उसने मेरी निप्पल अपने मुँह में ले ली... चूसने लगा।
जोर से... गीला... गर्म...
उसके हाथ मेरे लिंग पर... रगड़ते हुए... जैसे कोई चूत रगड़ रहा हो।
नेहा अब मेरी बात सुनकर पूरी तरह सिसक रही थी — आँखें नम।
वो सबने मुझे घेर लिया।
हाथ फैलाए...
कोई निप्पल पिंच करता... कोई कमर दबाता...
कोई लंड हिलाता... जैसे मैं कोई खिलौना हूँ।
मैं बोलना चाहता था — ‘रुक जाओ... ये ज्यादा हो रहा है...’
मगर आवाज़ नहीं निकल रही थी।
फिर एक ने दीवार से वो फैमिली फोटो उतारी
मैंने चिल्लाया — ‘ये मत करो!’
मगर वो सुना नहीं।
फोटो सामने लाया... और सबने लंड रगड़ना शुरू कर दिया।
कोई गार्गी के चेहरे पर... कोई पूरी फैमिली पर...
आधे लोग मेरे शरीर पर झड़ गए — हाथ, मुँह, लंड... सब जगह।
आधे फोटो पर... झड़ते हुए।
एक ने बोला — “सॉरी भाई... थोड़ा ज्यादा हो गया...”
एक चिल्लाया —"अपनी बहन के बारे में सुनने के लिए... तो ये सब भी सहे!”
फिर सब नशे में थे।
एक-एक करके चले गए — कपड़े पहनकर... हँसते हुए...
मैं... रूम में अकेला... सोफे पर।
चारों तरफ़ गंदगी — बीयर की बोतलें, सिगरेट के टुकड़े, कम की गंध...
फोटो पर... पूरा गीला... सफेद-गाढ़ा...
मुझे लगा — कल पूरे दिन सफाई करनी पड़ेगी।
मगर नशा इतना चढ़ा था... मैं सोफे पर लेट गया...
सोचते-सोचते... सो गया।
नेहा ने मेरी आँखों में आँसू देखे।
उसने धीरे से मेरी ठोड़ी उठाई... अपनी उँगलियाँ मेरे गाल पर फेरती हुई।
“ओवर बेबी... तुम्हें ये सब सहना पड़ा।
तुम्हारा मन... कितना टूटा होगा।
मैं... मैं समझ सकती हूँ।"
वो आखिरी टाइम था जब में उन सब से मिला।
में उस हादसे के बाद टूट गया था।
कभी कभी कोई बिल जाता तो में इग्नोर केर देता।
कई बार सॉरी बोलने की कोशिश की उन्होंने।
और फिर में इंजीनियरिंग के लिए शहर छोड़ दिआ।
ये मैं पहले भी कई बार कर चुका था।
अविनाश के लिए... या उन लड़कों के लिए... जब वो पूछते... तो मैं गार्गी की यूज़्ड ब्रा और पैंटी लेके जाता।
वो उसे सूँघते... बहुत गहरी साँस लेकर...
फिर गंदी-गंदी बातें शुरू कर देते —
‘गार्गी की चूत की खुशबू... कितनी मीठी होगी...’
‘मैं गार्गी को पूरी रात अपने बॉल्स चटवाऊँगा...’
‘मैं उसके मुँह में थूकना चाहता हूँ...’
‘मैं उसके बूब्स पर थूककर चोदूँगा...’
‘गार्गी को नंगी करके... उसके चेहरे पर वीर्य डालूँगा... और फिर उसे चाटने को कहूँगा...’
मैं... बस बैठा सुनता रहता।"
नेहा मेरी बात सुनकर साँस रोककर बैठी थी।
मैंने आगे कहा —
“भैया, मम्मी-पापा सब एक शादी में गए हुए थे।
घर अकेला था।
मैंने उन सबको बुलाया — चार-पाँच पुराने लड़के, और कुछ नए चेहरे भी।
सब आए... मेरे घर पर।
हमने डोर लॉक किया, पर्दे बंद किए।
फिर टीवी ऑन किया।
एक पॉर्न लगाई — गैंगबैंग वाली।
एक लड़की... बहुत सारे लड़कों के साथ...
वो सीडी वो खुद ही लेके आए थे।
हमने डीवीडी में डाल दिया।
“माल भी, बॉस सिगरेट्स भी...
तीन-चार लोग लगातार एक साथ घर में सिगरेट पी रहे थे।
पूरे घर में धुआँ-धुआँ सा हो रहा था — जैसे कोई धुंध छा गई हो।
बीच-बीच में मैं किचन से खाने के लिए कुछ लेके आता — चिप्स, कोल्ड ड्रिंक...
तभी मैंने महसूस किया... शायद एक-दो लोग... पहले वाले ग्रुप से नहीं हैं।
मैंने इधर-उधर देखा।
गेट की तरफ़ देखा — बाहर गए होंगे?
मगर गेट लॉक था।
फिर थोड़ा अंदर जाने के बाद... मैंने देखा।
वो गार्गी के रूम में घुस चुके थे।
उसकी अलमारी खोलकर... उसके कपड़ों को सूँघ रहे थे।
उसके टॉप को नाक पर रखकर... गहरी साँस ले रहे थे।
उसकी ब्रा को... अपने लंड से रगड़ रहे थे।
एक ने ब्रा को नाक पर रखा... और दूसरा... उसकी पैंटी को हाथ में लेकर... हिलाने लगा।
“उनमें से हर चीज़ से खरे थे।
गार्गी की हर चीज़ को सूँघ रहे थे — उसकी ब्रा, पैंटी, टॉप, साड़ी का ब्लाउज...
अलमारी के हर कोने में घुस रहे थे।
एक ने गार्गी की पुरानी स्लीपर उठाई... उसे नाक पर रखा... और बोला —
‘यार... गार्गी के पैरों की खुशबू... मैं इसे चाटूँगा...’
फिर वो सबने अपना लंड निकाला।
एक ने गार्गी की ब्रा को अपने लंड पर लपेट लिया...
जोर-जोर से हिलाने लगा...
‘देख... गार्गी की ब्रा पर मेरा प्रीकम... जैसे वो मेरे लंड को चूम रही हो...’
फिर... एक लड़का गार्गी के बिस्तर पर चढ़ गया।
घुटनों के बल बैठा... लंड हाथ में पकड़ा...
जोर-जोर से हिलाने लगा।
उसकी साँसें तेज़... आँखें बंद...
‘गार्गी... तेरे बिस्तर पर... मैं तुझे चोद रहा हूँ...’
और फिर... सारा पानी बिस्तर पर छोड़ दिया।
सफेद-गाढ़ा... गार्गी के तकिए पर... चादर पर...
उसने झटके में झड़ते हुए ताली बजाई —
‘देखो यार... गार्गी के बिस्तर पर मेरी झड़ाई...
अब ये बिस्तर हमेशा मेरी याद रखेगा!’
“वो बड़े खट्टे करने लगे थे।
एक ही कपड़ा बार-बार उठाते... सूँघते... फिर रख देते।
फिर अचानक कुछ कपड़े अलग करने लगे — जैसे कोई खजाना मिल गया हो।
ज्यादातर... गार्गी के इनर।"
फिर वो सब इकट्ठे किए — जैसे कोई ट्रॉफी हो।
रूम से बाहर निकल गए।
शायद... सोफे पर बैठे बाकी लड़कों को दिखाना चाहते थे।
जो पॉर्न देख रहे थे... और माल फूक रहे थे।
मैंने देखा... वो बाहर आकर सबको दिखाने लगे।
“उनमें से एक — वो जो सबसे ज़्यादा बोलता था — ने गार्गी की पिंक ब्रा उठाई।
उसने ब्रा के कप को अपनी नाक पर दबाया... गहरी साँस ली... फिर जीभ निकालकर कप को चाटा।
‘यार... गार्गी के बूब्स की खुशबू... जैसे दूध की... मैं इसे चूसूँगा...’
दूसरा लड़का उसकी ब्लैक पैंटी लेके आया।
उसने पैंटी को अपनी मुट्ठी में कसकर दबाया... फिर लंड पर लपेट लिया।
जोर-जोर से हिलाने लगा — पैंटी का कप उसके लंड के सिर पर रगड़ रहा था।
‘देख... गार्गी की पैंटी मेरे लंड को चूम रही है...
अगर वो ये पहनेगी... तो उसकी चूत भी मेरे प्रीकम से भरी होगी।’
“रूम में मैंने देखा... अचानक सबने गार्गी के कपड़े देखे और एकदम खुश हो गए।
बीयर की बोतलें खुल गईं — सब चिल्ला रहे थे, हँस रहे थे।
“मैंने उन सबको देखा... गार्गी के कपड़ों के साथ।
फिर अचानक नोटिस किया — वो लड़का जो अभी-अभी बिस्तर पर झड़ा था... वो अभी तक रूम में ही था।
थोड़ी देर बाद वो भी बाहर आया... मेरे साथ खड़ा हो गया।
उसका लंड अभी मुरझाया हुआ था — गीला, लाल, चिपचिपा।
मुझे लगा... वो अभी भी मुझसे बड़ा है।
उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा।
मेरे हाथ की तरफ़ देखकर बोला —
‘भाई... जल्दी उसको खड़ा करो... वापस से।
मैं अभी-अभी तेरी बहन के बिस्तर पर गीला करके आया हूँ..."
मैंने उस लड़के का लंड हाथ में लिया —
धीरे-धीरे सहलाने लगा... उँगलियाँ उसके सिर पर घुमाती हुई...
वो जोर से आह भरी और बोला —
“बहन... चोद...
जब भाई का हाथ इतना अच्छा है... तो जब बहन हिलाएगी... तो कितना मज़ा आएगा...”
उसकी बात सुनते ही... कमरे में जो लोग गार्गी के कपड़ों में खोए हुए थे...
सबका ध्यान हमारी तरफ़ हो गया।
सब एक पल को मेरी तरफ़ देखे — आँखें चौड़ी, मुँह खुला।
दो सेकंड की पूरी शांति।
फिर... ठहाके।
जोर-जोर से हँसने लगे — जैसे कोई बहुत बड़ा जोक सुन लिया हो।
हँसी इतनी ज़ोर की कि कमरा गूँज उठा।
फिर एक ने कहा —
“अरे भाई को बीच में आने दो..."
वो लड़का — जिसका लंड अभी भी मेरे हाथ में था — ने मेरे कंधे पकड़ा।
मुझे खींचकर बीच में ले आया।
सब सोफे पर बैठे... मुझे घूर रहे थे।
कुछ के हाथ में गार्गी के कपड़े थे — ब्रा, पैंटी — वो उन्हें हवा में लहरा रहे थे।
उनकी आँखें मुझे चुभ रही थीं — जैसे मैं कोई शो का हिस्सा हूँ।
फिर एक ने बोला, हँसते हुए —
“यार... इसका तो पूरा परिवार ही सुंदर है।”
वो कमरे की दीवार पर लगी फैमिली फोटो की तरफ़ इशारा किया।
मम्मी-पापा, गार्गी, मैं... सब मुस्कुरा रहे थे।
उसने आगे कहा —
“देखो... आंटी भी जवानी में कितनी हॉट लगती होंगी।
सही में... आंटी ने तो कमाल किया — एक तो गार्गी जैसी सुंदर लड़की पैदा की...
और एक ये सैम जैसा... चूतिया लड़का।
जिसे मजा आता है अपनी बहन के बारे में सुनके।”
कमरे में अब सबकी आवाज़ें गूँज रही थीं।
किसी ने "भैंसोद" कहा, किसी ने "चूतिया", किसी ने "कांडू"...
शब्द हवा में उड़ रहे थे, जैसे कोई गंदी धुंध।
फिर एक ने पूछा —
“मगर भाई... ऐसे लड़के कौन होते हैं?
ऐसा लड़का कोई क्यों करेगा?
क्यों अपनी बहन के बारे में ये सब सुनना चाहता है?”
दूसरे ने हँसते हुए जवाब दिया —
“हाँ, हम तो नहीं सुनना चाहते।
अगर कोई हमारी फैमिली वुमन के बारे में कुछ गलत बोले... तो हम तो उसे मार देंगे।
मगर ये... अलग किस्म का लड़का है।
पता है क्यों?”
उसने उस लड़के की तरफ़ इशारा किया — जो अभी भी मेरे साथ खड़ा था, जिसका लंड मेरे हाथ में था।
उसने मेरे पजामे में एक उंगली फंसाई... और धीरे से नीचे खींच दिया।
मेरा लंड — साढ़े चार इंच का, सख्त लेकिन छोटा — सबके सामने आ गया।
सब एक पल को चुप... फिर ठहाके।
जोर-जोर से हँसने लगे।
“देखो यार... इतना छोटा!”
“भाई, ये तो पेनिस नहीं... पेंसिल है!”
फिर वो बोला —
“इसलिए... इसलिए ये ऐसा है।
क्योंकि ये चूतिया है।
इसका लंड बहुत छोटा है।
इसे पता है कि ये किसी को चोदेगा तो कभी सैटिस्फाई नहीं कर पाएगा।
इसलिए ये ऐसी सोचता है... नई-नई चीजें...
गार्गी को चोदते हुए कल्पना करता है...
क्योंकि असल में वो कभी किसी को चोद नहीं पाएगा।”
उनमें से एक ने गार्गी की ब्रा हवा में उछाली।
मैंने रिफ्लेक्स में कैच कर ली — वो पिंक वाली, लेस वाली... अभी भी उसकी खुशबू से भरी हुई।
फिर वो बोला —
“चल... पहन के दिखा।”
मैं उनकी तरफ़ देखता रहा — जैसे वो क्या कह रहे हों।
मेरा मन चीख रहा था... लेकिन कमरा मेरे घर का था... और कंट्रोल उनके पास था।
मैं कुछ कहने वाला था कि एक ने हँसते हुए बोला —
“अरे बहन... जोत पहन के दिखा।
ये ब्रा कैसे दिखती है तेरे ऊपर?
आज तू सैम नहीं... आज तू गार्गी है।”
सब फिर ठहाके मारकर हँसे।
एक ने मेरे कंधे पर हाथ रखा — दबाव दिया।
दूसरा बोला —
“पहन... पहन... देखते हैं तेरी बहन जैसी बॉडी कैसे लगती है।
तेरा छोटा लंड तो छुपा रहेगा..."
सबकी नजरें मेरी तरफ़ थीं — अति उत्तेजक, जैसे कोई शिकार का खेल चल रहा हो।
मुझे वो एक झुंड की तरह लग रहे थे... भूखे, हिंसक...
अगर चाहते तो मुझे कुचल सकते थे।
मैं थोड़ा डर गया था — दिल तेज़ धड़क रहा था।
पर... मैं जानता था, मैं ये सब रोक सकता था।
बस एक चिल्लाहट, एक धक्का... और सब खत्म।
मगर... मैं रोकना नहीं चाहता था।
मैं जानना चाहता था — मैं कहाँ तक जा सकता हूँ।
मैंने धीरे से अपनी शर्ट ऊपर की...
और ब्रा को छाती पर लगाया।
वो थोड़ी ढीली थी — मेरे छोटे बूब्स पर लटक रही थी।
सब देखकर हँसने लगे — जोर-जोर से।
एक ने बोला —
“कोई बात नहीं... जब तू उस एज में जाएगा तो तेरे भी बड़े हो जाएंगे।
बस किसी को चूसने पड़ेंगे... फिर देखना, कितने फूलेंगे!”
मेरी पैंट तो पहले से नीचे थी — लंड बाहर, सख्त, छोटा।
किसी ने मुझे पैंट ही पहना दी — गार्गी की पैंटी।
फिर एक ने कहा — “ओ गार्गी, बहन की लोड़ी!”
“चल, अब झुक जा और कुतिया बनके दिखा।”
वो मुझे जमीन पर... हाथ-पाँव के बल...
अपने लिए बोल रहे थे।
मैंने देखा — सबकी आँखें जल रही थीं।
किसी ने मेरे बाल पकड़े, कस के दबाया —
“बहन चुप गार्गी... चल कुतिया की तरह भौंक के दिखा!”
मुझे लगा... शायद मजाक है।
मगर बालों में दर्द... और उनकी नजरें...
मैंने कोशिश की — “भौ... भौ...”
आवाज़ काँपती हुई, छोटी।
सब ठहाके मारकर हँसे।
“हाहा... गार्गी की भौंक!”
“अब पूँछ हिला... कुतिया!”
मुझे पता नहीं था... उन्हें क्या मज़ा आ रहा था।
और मुझे... क्या मज़ा आ रहा था ये सब होने देना।
शर्म... डर... उत्तेजना... सब मिलकर...
मैं बस देखता रहा कि आगे क्या होगा।
फिर एक-एक ने मुझे पास बुलाया।
अपना लंड मेरे हाथ में थमा दिया।
“हिला... गार्गी के नाम पर हिला...”
“कल्पना कर... तेरी बहन को चोद रहा हूँ...”
मैं हिलाता... तेज़...
वे झड़ते — मेरे हाथ में... गाढ़ा, गर्म।
फिर मैं बार-बार वॉशबेसिन में जाता... हाथ धोकर आता...
फिर अगले को... फिर अगले को।
सबने एक-एक करके... पॉर्न देखते हुए...
गार्गी के बारे में गंदी बातें करते हुए...
मेरे हाथ से झड़ लिया।
सब... एक बार झड़ चुके थे।
ब कमरा पूरी तरह महक गया था — दारू की तेज़ गंध, सिगरेट का धुंआ, माल की मीठी-कड़वी खुशबू, और अह... कम की गंध... पसीने की, लंड की, सब मिलकर एक भारी, गर्म हवा बन गई थी।
सब लोग अब कंप्लीटली नंगे थे — छाती पर घने बाल, पसीना टपकता हुआ, लंड लटकते हुए या सख्त... सब कुछ दिख रहा था।
मैं कोने में खड़ा था — जैसे कोई कुत्ता, जिसे उन्होंने वहाँ ऑर्डर किया था।
वो आपस में बातें करने लगे — धीमी, गुप्त आवाज़ों में।
मुझे सुनाई नहीं दे रहा था... शायद प्लानिंग कर रहे थे... अगला स्टेप क्या होगा।
मैं बस खड़ा रहा, पसीना मेरी पीठ पर बह रहा था।
फिर एक ने अचानक बोला —
“तुझे मज़ा आया?”
मैंने उनकी तरफ़ देखा... कोई जवाब नहीं दिया।
वो हँसा —
“मज़ा आया होगा तभी तो अभी तक तूने हमें अपने घर से बाहर नहीं निकाला।
देख... पूरा घर अस्त-व्यस्त कर दिया है।
सफाई में तुझे दो दिन लगेंगे... और तू अभी भी हमें रोक रहा है।
क्यों? क्योंकि तुझे ये सब... पसंद है।”
मैंने फिर कोई जवाब नहीं दिया।
मन में लगा... शायद वो सच बोल रहा है।
उसने मेरी तरफ़ देखा, मुस्कुराकर बोला —
“चल, कोई नहीं... तुझे मज़ा आया तो बढ़िया है।
अब बैठ जा, अभी कोई डर नहीं है। हम कुछ नहीं करेंगे।”
उसने एक सीट खींची — सिंगल सीटर सोफा, कमरे के कोने में।
मुझे वहाँ बिठा दिया।
सब अब दो सोफों पर फैल गए थे — एक पर तीन, दूसरे पर दो।
मैं अकेला... बीच में... जैसे कोई स्टेज पर हो।
मेरा लंड अभी भी सख्त... ब्रा और पैंटी पहनी हुई...
शर्ट आधी खुली।
एक ने ग्लास में बीयर पलटी — ठंडी, झाग वाली।
मुझे थमाया।
मैं इतना घबराया था कि एक घूँट में पी गया — गले से नीचे उतरा, जलन हुई।
जैसे ही खत्म किया... उसने दूसरी भर दी।
झे उस टाइम पता नहीं था... शायद वो मुझे नशे में करना चाहते हैं।
बीयर... सिगरेट... माल... सब मिलकर दिमाग धुंधला हो रहा था।
मुझे लगा... अब उन्होंने जो करना था... वो कर लिया।
अब बस... मज़ा ले रहे हैं।
मुझे लगा अब सब खत्म हो चुका है।
सब लोग अब सोफे पर फैलकर बैठे थे — नंगे, पसीने से तर, बीयर के ग्लास हाथ में।
गप्पें मार रहे थे — कोई क्रिकेट की बात, कोई बॉलीवुड की, कोई पॉर्न की।
पॉर्न... वही था, लेकिन अब स्क्रीन पर लड़की चेंज हो गई थी।
एक रशियन — गोल्डन बाल, लंबे, चमकदार... गोरी चमड़ी, नीली आँखें।
वो एक झुंड काले लड़कों के बीच में थी — बेरहमी से चोद रहे थे।
एक उसके मुँह में... एक उसके चूत में... एक उसके गांड में...
वो चीख रही थी, लेकिन चेहरा... खुश... सैटिस्फाइड।
लोग बोल रहे थे —
“अरे ये तो बहुत सुंदर है... क्यों ऐसे काम करती है?”
दूसरा हँसा — “देख इसका चेहरा... कितनी सैटिस्फाइड लग रही है।
एक जना तो सैटिस्फाई नहीं कर सकता... इसलिए ये झुंड चुनती है।”
फिर किसी ने दीवार पर लगी गार्गी की तस्वीर की तरफ़ देखा — वो मुस्कुराती हुई फैमिली फोटो।
बोला — “देख... गार्गी का चेहरा...
शायद उसका भी ऐसा ही है।
एक जना सैटिस्फाई नहीं कर पाएगा।
शायद उसे भी झुंड चाहिए... अपने जैसा झुंड... जो उसके साथ ये सब करे।”
सब हँसे... फिर मेरी तरफ़ देखा।
मैं... सिंगल सीटर पर... ब्रा-पैंटी में...
बीयर का ग्लास हाथ में... नशा चढ़ रहा था।
उनका सारा कन्वर्सेशन अब फिर से गार्गी पर आ चुका था।
एक ने बीयर का घूँट लिया और बोला —
“यार... वैसे तो मेरी कम्युनिटी से ही हो तुम लोग...
क्या मैं गार्गी से शादी कर लूँ?”
सब हँसे।
वो जारी रखा —
“अगर मैं गार्गी से शादी कर लूँगा... तो स्वागत वाले दिन तुम सबको बुलाऊँगा...
और इस चूतिये को भी बुलाऊँगा।
ये चूतिया देखेगा... और गार्गी हम सबसे चुदेगी।
पता है... मुझे लगता है कि वो दोबारा... एक बार चुदने के बाद फिर सबके लिए लाइन खड़ा करेगी...
चूस-चूस के... और फिर उसके बाद वो वापस चुदेगी...
क्योंकि वो एक से सैटिस्फाई नहीं हो सकती।”
दूसरा हँसा, ग्लास उठाकर बोला —
“मैं तो उससे कुतिया बना के पूरे होटल में घूमूँगा...
जहाँ हम लोग हनीमून मनाएंगे...
उसे पूरी नंगी कराऊँगा...
उसकी चूत में लंड डालकर... घसीटता हुआ...
सब देखेंगे... और वो भौंकती रहेगी...
मैंने देखा... सबके लंड बापिस से खड़े हो रहे थे।
एक लड़का मेरे पास आया — धीरे से।
उसने मेरी ब्रा को थोड़ा नीचे खींचा... मेरी निप्पल बाहर आ गई।
उसने हाथ रखा... मसलने लगा... धीरे-धीरे...
देखता हुआ बोला —
“गार्गी के भी इसी कलर के होंगे...
ये दोनों भाई-बहन एक ही चूत से निकले हैं...”
सब ठहाके मारकर हँसे।
फिर उसने अपना मुँह बढ़ाया —
“क्या कोई नहीं... बहन नहीं तो भाई सही।”
और उसने मेरी निप्पल अपने मुँह में ले ली... चूसने लगा।
जोर से... गीला... गर्म...
उसके हाथ मेरे लिंग पर... रगड़ते हुए... जैसे कोई चूत रगड़ रहा हो।
नेहा अब मेरी बात सुनकर पूरी तरह सिसक रही थी — आँखें नम।
वो सबने मुझे घेर लिया।
हाथ फैलाए...
कोई निप्पल पिंच करता... कोई कमर दबाता...
कोई लंड हिलाता... जैसे मैं कोई खिलौना हूँ।
मैं बोलना चाहता था — ‘रुक जाओ... ये ज्यादा हो रहा है...’
मगर आवाज़ नहीं निकल रही थी।
फिर एक ने दीवार से वो फैमिली फोटो उतारी
मैंने चिल्लाया — ‘ये मत करो!’
मगर वो सुना नहीं।
फोटो सामने लाया... और सबने लंड रगड़ना शुरू कर दिया।
कोई गार्गी के चेहरे पर... कोई पूरी फैमिली पर...
आधे लोग मेरे शरीर पर झड़ गए — हाथ, मुँह, लंड... सब जगह।
आधे फोटो पर... झड़ते हुए।
एक ने बोला — “सॉरी भाई... थोड़ा ज्यादा हो गया...”
एक चिल्लाया —"अपनी बहन के बारे में सुनने के लिए... तो ये सब भी सहे!”
फिर सब नशे में थे।
एक-एक करके चले गए — कपड़े पहनकर... हँसते हुए...
मैं... रूम में अकेला... सोफे पर।
चारों तरफ़ गंदगी — बीयर की बोतलें, सिगरेट के टुकड़े, कम की गंध...
फोटो पर... पूरा गीला... सफेद-गाढ़ा...
मुझे लगा — कल पूरे दिन सफाई करनी पड़ेगी।
मगर नशा इतना चढ़ा था... मैं सोफे पर लेट गया...
सोचते-सोचते... सो गया।
नेहा ने मेरी आँखों में आँसू देखे।
उसने धीरे से मेरी ठोड़ी उठाई... अपनी उँगलियाँ मेरे गाल पर फेरती हुई।
“ओवर बेबी... तुम्हें ये सब सहना पड़ा।
तुम्हारा मन... कितना टूटा होगा।
मैं... मैं समझ सकती हूँ।"
वो आखिरी टाइम था जब में उन सब से मिला।
में उस हादसे के बाद टूट गया था।
कभी कभी कोई बिल जाता तो में इग्नोर केर देता।
कई बार सॉरी बोलने की कोशिश की उन्होंने।
और फिर में इंजीनियरिंग के लिए शहर छोड़ दिआ।


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